आपका-अख्तर खान

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04 अप्रैल 2011

आज आखरी बार मिल तो लूँ .........

सोचा 
जरा 
तुम से भी आज 
आखरी बार ही सही 
मिल तो लूँ , 
में जानता हूँ 
यह साँसे हें 
जो तुम से भी 
कहीं ज्यादा 
बेवफा होती हें 
तुमसे भी कहीं 
ज्यादा बेवफा होती हें . 
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 

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