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27 जनवरी 2011

उदास ना हो ...

उदास ना हो
नील नाकाम ही तो हुआ हे
ना उम्मीद तो नहीं
यह गम की शाम
लम्बी तो हे
लेकिन
शाम ही तो हे
कल फिर सुबह होगी
रौशनी होगी
गम को इसी डर की
हेरानी तो हे
इसलियें ना उम्मीद रख उदास ना हो ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

4 टिप्‍पणियां:

  1. umeed par dunia kaayam hai
    तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार 29.01.2011 को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    आपका नया चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    उत्तर देंहटाएं
  3. उम्मीद पै दुनिया कायम है.....

    उत्तर देंहटाएं

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

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