आपका-अख्तर खान

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26 नवंबर 2010

पानी से कुछ सीखो यारों ...

में जब भी
पानी को देखता हूँ
सोचता हूँ
इससे कुछ सीखूं
जब प्यास इससे
किस की बुझती हे
और प्यासे के चेहरे पर
ठंडक देखता हूँ
तो सोचता हूँ
काश में पानी होता
जहां जिस बर्तन में
जिस हालत में होता
हर हाल में
हर आकर में
केसे एडजस्ट होते हें
इस पानी से सीख लेता
आग अगर कहीं लगती
तो पानी को बुझाते देख
सोचता हूँ काश में पानी होता
बस यही सोचता हूँ
हर हाल में खुद को
केसे एडजस्ट करना हे
एक प्यारी सी सीख
इस पानी से में
सीख लेता .....?

3 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन की भाव भंगिमाओं को सौम्यता से सहेजे हुए जल क्या कुछ नहीं सिखाता!

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह! बेहतरीन दृष्टिकोण्…………सार्थक रचना।

    जवाब देंहटाएं
  3. जल के नैसर्गिक गुणों को सरल, सहज एवं तरल शब्दों में उकेरती, दिल की गहराईयों को छूने वाली, गहन संवेदनाओं की बेहद मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

    जवाब देंहटाएं

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