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25 नवंबर 2010

प्रेम की पीड़ा ...

प्रेम की पीड़ा
और इश्क की सियासत
मिल कर जब
चिन्तन करते हें
यह चिन्तन
और इसका रस रंग
जब
संगीत में
ढला करते हें
तब इन सब के
मिलन को हम
गजल और कविता
कहा करते हें ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

5 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल सही कहा ....यही तो होता है यहाँ ....शुक्रिया

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  2. बहुत ही सही पँक्तियाँ है। सही कहा आपने तभी तो सृजन होता है कविता और गजल का। आभार जी!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत अच्छा वर्णन |बधाई
    आशा

    उत्तर देंहटाएं

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