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17 सितंबर 2010

सूरज की रौशनी

सुबह सवेरे
सूरज की
रौशनी की तरह
नई सुबह
की तरह
में
तेरी जिंदगी में
चला आउंगा ,
अँधेरे जो भी पाले हें तुने '
मेरी रौशनी से
उन्हें दूर बहुत दूर
कर जाउंगा
में तो चल दिया था बस
अंधेरा देखा
घर में तेरे
सोचा
जरा रुक लूँ
रौशनी तो करदूं
रोशन होगा
घर जब तेरा
बस फिर में
खुद ही तेरी
जिंदगी
से चला जाउंगा ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

2 टिप्‍पणियां:

  1. darkness is merely an absence of light....
    अँधेरे जो भी पाले हें तुने '
    मेरी रौशनी से
    उन्हें दूर बहुत दूर
    कर जाउंगा
    nicely expressed!
    subhkamnayen:)

    जवाब देंहटाएं

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