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23 सितंबर 2010

सुप्रीम कोर्ट की भूल

दोस्तों कहते हें के न्ययालय मन्दिर और उसमें बेठ कर न्याय करने वाले भगवान होते हें हमारे देश में न्यायालयों को अपमानित करने वालों के खिलाफ इसीलियें कड़ा कानून बनाया गया हे । लेकिन पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक अजब दास्ताँ हुई हे जिससे सुप्रीम कोर्ट की भूल के बारे में हमें सोचने पर मजबूर होना पढ़ा हे , कल जब सुप्रीम कोर्ट ने रमेश त्रिपाठी की सुलह की अर्जी ख़ारिज करी तो देश में भ्रांतियां फेल गयीं लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने अपने भूल सुधर ली हे आप जानते हें के सुप्रीम कोर्ट में रमेश त्रिपाठी की अर्जी जब लगाई गयी तो रजिस्ट्रार महोदय ने इस अर्जी को सुनवाई के लियें ग़लत कोर्ट में भेज दी नतीजन प्रकरण सिविल नेचर का होने और कोर्ट क्रिमनल मामलों की होने के कारण न्यायधीशों ने इस अर्जी को तकनीकी कारणों से सुनने से इनकार कर दिया बाद में रजिस्ट्रार ने अपनी भूल सुधारी और इस अर्जी को सिविल न्यायधीशों के समक्ष रखा गया नतीजन एक सुखद फेसला जनता के सामने हें ।

दोस्तों मेरे भारत वासियों कहने को तो यह सामान्य सी बात हे लेकिन रजिस्ट्रार सुप्रीमकोर्ट की इस छोटी सी भूल ने यह साबित कर दिया हे के गलतियां भगवान से भी हो सकती हें ताज्जुब तो इस पर हे के आम आदमी से अगर यह गलती होती तो वोह या तो जेल में होता या फिर तारीखों के लियें चक्कर काट रहा होता लेकिन सुप्रीम कोर्ट में की गयी इस भयंककर गलती के लियें किसी की ज़िम्मेदारी तय कर उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गयी हे आप लोगों की इस मामले में क्या राय हे जनाब । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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