तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे?
गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
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26 अगस्त 2010
जिंदगी कितनी ही ज़ालिम हो फिर भी म़ोत से बदतर हे , नफरत कितनी भी गहरी हो फिर भी प्यार से बहुत कमतर हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)
वाकई अख्तर साहिब... जीवन का दर्शन कितना वृहद है और कितना संक्षिप्त ........ समझाना तो मन को ही है न.
जवाब देंहटाएंbadhiya baat...mot ko mout our he ko hai karen to kavita our acchi ho jaayegi.
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