कोटा व्यापार संघ , कोटा टूरिस्ट ट्रेवल मार्ट की फ़ज़ीहत के बाद आंतरिक विरोध के दौर से गुज़र रहा है ,संस्थापक स्वर्गीय बृजमोहन मालवीय जी के लगाये हुए , व्यापार महासंघ के इस पेड़ की 170 शाखाएं पहली बार आंतरिक विद्रोह के दौर से गुज़र रही हैं, कुछ चुप हैं, कुछ लिहाज़ में हैं, कुछ हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं , सरकारी खर्च पर कोटा टूरिस्ट ट्रेवल मार्ट में कई व्यापारियों की भी उपेक्षा के आरोप लग रहे हैं, जबकि कोटा उत्तर विधायक शांति कुमार धारीवाल जिन्होंने कोटा को इस लायक बनाया के कोटा का व्यापारी , होटल व्यवसाई सीना ठोक कर कह सकें, के कोटा को पर्यटन सर्किट बनाया जाए, उनकी उपेक्षा को लेकर व्यापार महासंघ चाहे शर्मिंदा ना हो , लेकिन व्यापार महासंघ के 170 से भी ज़्यादा वोटर्स में से कई अब पच्चीस सालों से निर्विरोध के नाम पर खूंटा गाढ़ कर बैठे लोगों के खिलाफ आंतरिक लोकतंत्र नियमों के तहत चुनाव करवाने की मांग उठाने लगे हैं , , इसका विधिक रजिस्ट्रेशन करवाने की बात करने लगे हैं, कोटा व्यापार महासंघ हमेशा हर कार्यक्रम में , आवश्यक्तानुसार , राजनितिक रूप से तटस्थ भूमिका निभाता रहा है , पदाधिकारियों की निजी विचारधारा भाजपा की होने के बावजूद भी , व्यापार महासंघ के पदाधिकारियों के साथ कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल जिन्हे कोटा के लिए विकास और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने वाला युग पुरुष कहा जाने लगा है , उन्होंने सुख दुःख में इन लोगों का व्यक्तिगत और व्यापारिक स्तर पर , जो भी सरकार के ज़रिये आवश्यकनुसार डिमांड रही , बिना किसी हील हुज्जत किये, कांग्रेस भाजपा के भेदभाव के दिल खोल कर मदद की है , लेकिन आज स्थिति बदल गई है, करोड़ों करोड़ सरकारी खर्च के बाद , भाजपा के लोग , कोटा के जिन विकास कार्यों को , कांग्रेस की फ़िज़ूल खर्ची बताकर उपेक्षित कर रहे थे , आज उन्हें देखने और दिखाने और विकसित करने के नाम पर सरकारी फंड के करोड़ों रूपये खर्च किये गये , सरकारी फंड से लाखों रूपये यात्रा भत्ता के नाम पर खर्च कर भाजपा नेता, कोटा के इन स्थलों को देखने यहां आकर इन्हे खूबसूरत अद्भुत बताने के भाषण देने के लिए आये, यह सब थूक के चाटने के समान है , खेर , सरकार में बैठे लोग देर आयद , दुरुस्त आयद , लेकिन कोटा को यह सब जिसने दिया , उस शख्सियत शांति कुमार धारीवाल का भाजपा में उनके निजी मित्रों तक ने उनका कोई नाम नहीं लिया और उनसे सीधे तोर पर निजी तोर पर ओब्लाइज्ड रहे आयोजकों ने भी उन्हें बुलाना तो दूर , उनका नाम कार्ड तक में भी नहीं छापा , उनके कार्यो को लेकर उनका सम्मान करना तक मुनासिब नहीं समझा, बात साफ है , सरकार ईमानदार नहीं है , व्यापारी हैं , व्यापारी तो व्यापारी ही हैं , जिसके पास देने के लिए हैं उसके ही साथ रहते हैं , लेकिन विभिन्न विचारधारा के 170 व्यापार संघ मतदाताओं के साथ यह न्याय नहीं है , इस मुद्दे पर साधारण सभा बुलाकर कई व्यापारी विरोध भी दर्ज कराने की सोच रहे हैं , जबकि इस टूरिस्ट मीट में आये संबंधित नेताओं की चमचागिरी में लगे कुछ लोग , खुद को राजस्थान सरकार में व्यापार लघु उद्योग आयोग का चेयरमेन बनाने की कोशिशों में जुटे हैं ,, तो कुछ जो होटल ,,रिसोर्ट से जुड़े हैं इस पर्यटन को बढ़ावा देने के कार्यक्रम के नाम पर खुद को राजस्थान पर्यटन विकास निगम का चेयरमेन बनाने की कोशिशों में जुटे है , कोटा के लोग हैं नियुक्त भी होना चाहियें, लेकिन दिक़्क़त यह है, के इनके इन सपनों पर पानी फेरने के लिए , कोटा के सोशल मिडिया ने जो खुलकर इनके आयोजन की फ़ज़ीहत की है , यह बताने की कोशिश की है के, यह उनके ही सगे नहीं रह सके जिन्होंने इन्हे इस मुक़ाम पर हमेशा ज़िंदाबाद रखने के लिए कांग्रेस ,भाजपा के सिद्धांतों को भी ताक में रखकर अपने ही कार्यकर्ताओं का विरोध लिया है ,, कोटा में सियासी नियुक्तियों का गणित अगर हम समझे तो सीधी सी बात है के यहां आदरणीय ओम जी बिरला की मर्ज़ी के बगैर पत्ता भी नहीं हिल सकता , तो फिर ,, नियुक्तियों में सामाजिक , संतुलन सिद्धांतों के तहत वोह जिस समाज के हैं , उसी समाज के सभी लोगों को तो बनाने की सिफारिश करेंगे नहीं , जबकि कोटा में भाजपा के जिलाध्यक्ष भी इसी समाज से है , एक अन्य जो कांग्रेस से भाजपा में शामिल होकर मुखर भूमिका में हैं ,वायदे और दोस्ती के सिद्धांत के तहत उनका भी अपना पहला हक़ है , तो अगर उन्हें बनाया तो फिर इन पदों पर इसी समाज से जुड़े लोगों का ख्वाब देखना तो अजीब सा लगता है , खेर सरकारें है, कुछ भी कर सकती हैं , किसी को भी किसी भी ओहदे पर नियुक्त कर सकती है , लेकिन मेने जब एक आर्टिकल शांति कुमार धारीवाल साहब की उपेक्षा और इस टूरिस्ट मीट के आयोजन आचरण पर लिखा था , तो मुझे एक दर्जन से भी अधिक व्यापारियों ने फोन पर शाबाशी देते हुए कहा था , के कुछ ऐसा करो के व्यापार महासंघ का लोकतंत्र बहाल हो , निर्विरोध की नौटंकी खत्म हो , मेने उन्हें यही कहा , तुम्हारा अपना संगठन है , तुम ही साधारण सभा बुलवाओ , तुम ही चुनाव की बात करो ,, यह सब तो तुम्हे ही करना होगा , व्यापार संघ के विधिक रजिस्ट्रेशन पर बात भी खुद को ही करना होगी, लेकिन वोह क्या करें , दोहरी ताक़त है व्यापारी भी हैं , पार्टी के अध्यक्ष भी हैं , पार्टी के पदाधिकारी हैं , तो सरकार के नज़दीकी भी हैं , तो फिर डरे सहमे होकर कहते हैं , खेर आप लिख अच्छा रहे हो , जगाने की कोशिश कर रहे हो , भगत सिंह हमारे घर में नहीं तो किसी और के घर में तो पैदा कभी तो होगा ही , देखते हैं एक ब्रेक के बाद , किसको क्या राजनितिक नियुक्ति का ओहदा मिलता है , और भविष्य में व्यापार महासंघ के निर्विरोध चुनाव का क्या तरीक़ा होता है , होस्टल व्यवसाइयों की समस्या उपेक्षित किये जाने से होस्टल व्यवसाय तो बगावत पर हैं, सभी जानते हैं , रामपुरा के आदरणीय स्वर्गीय ब्रिज मोहन मालवीय ने इस व्यापार संघ की नींव गेर सियासी रखी थी , लेकिन उस आत्मा के विरुद्ध यह आयोजन झकझोर रहा है, ,जबकि सवर्गीय सत्यभान जी उपाध्यक्ष रहते उनके जीवनकाल में ऐसा हरगिज़ नहीं होने देते,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
