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22 जनवरी 2026

मानव सेवा ही ईश्वर सेवा का सर्वोच्च स्वरूप - बिरला*

 

मानव सेवा ही ईश्वर सेवा का सर्वोच्च स्वरूप - बिरला*
- श्री राम धर्मार्थ चिकित्सालय का 31वाँ वार्षिकोत्सव
के डी अब्बासी
कोटा, 22 जनवरी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला गुरुवार को कोटा में श्री राम धर्मार्थ चिकित्सालय के 31वें वार्षिकोत्सव समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन सेवा, मर्यादा, नैतिकता और समर्पण का आदर्श है, और यही मूल्य इस चिकित्सालय की कार्यप्रणाली में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। बीते तीन दशकों से यह संस्थान मानव सेवा को ईश्वर सेवा मानकर निस्वार्थ भाव से चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कर रहा है, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि श्री राम धर्मार्थ चिकित्सालय की पहचान यह है कि यहाँ जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर हर जरूरतमंद को उपचार और संवेदना मिलती है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा का मूल भाव सेवा है, और मंदिर, चिकित्सालय व अन्न सेवा जैसे कार्य इसी परंपरा को जीवंत रखते हैं। प्रभु श्रीराम का जीवन केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि नैतिक जीवन और कर्तव्यबोध का मार्गदर्शक है।
बिरला ने कहा कि कोविड काल में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों के प्राण बचाए जो भारत की मानवीय शक्ति और सेवा भाव का सच्चा उदाहरण है, जिससे देश की प्रतिष्ठा विश्व स्तर पर सुदृढ़ हुई है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आने वाले समय में कोटा चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में और अधिक सशक्त केंद्र के रूप में उभरेगा। सरकार, समाज और संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ, निःशुल्क उपचार तथा मरीजों और उनके परिजनों के लिए भोजन व विश्राम के लिए रामाश्रय जैसी व्यवस्थाएँ विकसित की जा रही हैं, जिससे कोटा मेडिकल टूरिज्म के रूप में भी अपनी पहचान बनाएगा।

“हड्डी टूटेगी ही नहीं” मंत्री का मज़ाकिया बयान चूर-चूर

 

“हड्डी टूटेगी ही नहीं” मंत्री का मज़ाकिया बयान चूर-चूर
कलश यात्रा में भगदड़ से 70 वर्षीय वृद्धा की हड्डी टूटी, मधुमक्खी हमले में 5 युवतियाँ घायल
रामगंजमंडी।धार्मिक आस्था के नाम पर आयोजित भव्यता, हकीकत में प्रशासनिक अराजकता और मंत्री की गैरजिम्मेदार बयानबाज़ी का जीवंत उदाहरण बन गई। कृषि उपज मंडी समिति परिसर में पंडित धीरेन्द्र शास्त्री की रामकथा के लिए निकाली गई कलश यात्रा अव्यवस्थाओं के चलते हादसों में तब्दील हो गई।
कलश वितरण के दौरान मची अफरा-तफरी और भगदड़ में धुलेट निवासी गंगाबाई (70 वर्ष) गिर पड़ीं। नतीजा कूल्हे की हड्डी टूट गई। वृद्धा दर्द से तड़पती रही और रामगंजमंडी जिला चिकित्सालय से कोटा रेफर कर दी गई। यही नहीं, ओवरब्रिज पर अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने महिलाओं पर हमला कर दिया, जिससे शीतल, रेनू, पल्लवी, प्रियंका व योगिता घायल हो गईं।
सबसे गंभीर और चौंकाने वाली बात यह है कि हादसे से महज एक दिन पहले आयोजित पत्रकार वार्ता में एक पत्रकार ने शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर से बड़े धार्मिक आयोजन को देखते हुए हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती की मांग की थी।इस पर मंत्री ने जिम्मेदारी लेने के बजाय हँसते हुए कहा था “हड्डी टूटेगी ही नहीं।”
लेकिन मंत्री का यह दावा 24 घंटे भी नहीं टिक पाया।कलश यात्रा के दौरान ही वृद्धा की हड्डी टूट गई और मंत्री का बयान जनता के जख्मों पर नमक बन गया।
पहले मज़ाक, फिर मजबूरी
हादसे के बाद जब सवाल उठे और किरकिरी हुई, तब जाकर जिला मुख्य चिकित्साधिकारी को मजबूरी में सभा स्थल पर तीन दिनों के लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात करना पड़ा।सवाल यह है कि यदि हादसा नहीं होता तो क्या प्रशासन यूँ ही सोया रहता?धार्मिक आयोजन या प्रशासनिक तमाशा?हजारों की भीड़ के बावजूद भीड़ नियंत्रण शून्य,चिकित्सा व्यवस्था अधूरी,आपदा प्रबंधन नदारद,धार्मिक आयोजन में श्रद्धालु भगवान के भरोसे छोड़ दिए गए, जबकि मंत्री कैमरे के सामने हँसी-मज़ाक करते रहे।हादसे के लिए कौन जवाबदेह है?क्या किसी की जान चली जाती, तब भी यही जवाब होता?आस्था के नाम पर लापरवाही और सत्ता के घमंड का यह नज़ारा रामगंजमंडी की जनता लंबे समय तक नहीं भूलेगी।

पोते ने प्रेरित किया तो,संपन्न हुआ नेत्रदान

 पोते ने प्रेरित किया तो,संपन्न हुआ नेत्रदान

हाडोती समाज में शाइन इंडिया फाउंडेशन,पिछले काफी समय से देश के अलग-अलग विश्वविद्यालय के छात्रों को समाज सेवा में निशुल्क इंटर्नशिप कराती है । इसी इंटर्नशिप में थोड़े समय पहले महावीर नगर तृतीय निवासी पुलकित अग्रवाल ने भी भाग लिया था, इस दौरान उन्होंने नेत्रदान की कार्यशालाओं के आयोजन के साथ-साथ घर, परिवार,दोस्तों और रिश्तेदारों के नेत्रदान संकल्प पत्र भी भरवाये थे।

पुलकित वर्तमान में देहरादून के एक निजी कॉलेज में अध्ययन कर रहे हैं, दादी मां अयोध्या देवीके निधन की सूचना जैसे ही उन्हें मिली, उन्होंने तुरंत अपने पिता गजेंद्र और ताऊ जी नवीन अग्रवाल को दादी मां के नेत्रदान करवाने के लिए समझाया ।

अयोध्या ने स्वयं ने अपनी इच्छा से प्रेरित होकर  नेत्रदान का संकल्प पत्र भरा हुआ था,इसीलिये बेटे नवीन,गजेंद्र और बेटियों शारदा,चंदा,हेमंत ने भी तुरंत ही नेत्रदान का निर्णय ले लिया । सभी की सहमति से निवास स्थान पर नेत्रदान की प्रक्रिया शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से संपन्न हुई।

और शैतान का उन लोगों पर कुछ क़ाबू तो था नहीं मगर ये (मतलब था) कि हम उन लोगों को जो आख़ेरत का यक़ीन रखते हैं उन लोगों से अलग देख लें जो उसके बारे में शक में (पड़े) हैं और तुम्हारा परवरदिगार तो हर चीज़ का निगरा है

 और शैतान का उन लोगों पर कुछ क़ाबू तो था नहीं मगर ये (मतलब था) कि हम उन लोगों को जो आख़ेरत का यक़ीन रखते हैं उन लोगों से अलग देख लें जो उसके बारे में शक में (पड़े) हैं और तुम्हारा परवरदिगार तो हर चीज़ का निगरा है (21)
(ऐ रसूल इनसे) कह दो कि जिन लोगों को तुम खु़द ख़ुदा के सिवा (माबूद) समझते हो पुकारो (तो मालूम हो जाएगा कि) वह लोग ज़र्रा बराबर न आसमानों में कुछ इख़तेयार रखते हैं और न ज़मीन में और न उनकी उन दोनों में शिरकत है और न उनमें से कोई खु़दा का (किसी चीज़ में) मद्दगार है (22)
जिसके लिए वह खु़द इजाज़त अता फ़रमाए उसके सिवा कोई सिफारिश उसकी बारगाह में काम न आएगी (उसके दरबार की हैबत) यहाँ तक (है) कि जब (शिफ़ाअत का) हुक्म होता है तो शिफ़ाअत करने वाले बेहोश हो जाते हैं फिर तब उनके दिलों की घबराहट दूर कर दी जाती है तो पूछते हैं कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या हुक्म दिया (23)
तो मुक़र्रिब फरिश्ते कहते हैं कि जो वाजिबी था (ऐ रसूल) तुम (इनसे) पूछो तो कि भला तुमको सारे आसमान और ज़मीन से कौन रोज़ी देता है (वह क्या कहेंगे) तुम खु़द कह दो कि खु़दा और मैं या तुम (दोनों में से एक तो) ज़रूर राहे रास्त पर है (और दूसरा गुमराह) या वह सरीही गुमराही में पड़ा है (और दूसरा राहे रास्त पर) (24)
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो न हमारे गुनाहों की तुमसे पूछ गछ होगी और न तुम्हारी कारस्तानियों की हम से बाज़ पुर्स (25)
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि हमारा परवरदिगार (क़यामत में) हम सबको इकट्ठा करेगा फिर हमारे दरमियान (ठीक) फैसला कर देगा और वह तो ठीक-ठीक फैसला करने वाला वाकि़फकार है (26)
(ऐ रसूल तुम कह दो कि जिनको तुम ने खु़दा का शरीक बनाकर) खु़दा के साथ मिलाया है ज़रा उन्हें मुझे भी तो दिखा दो हरगिज़ (कोई शरीक नहीं) बल्कि खु़दा ग़ालिब हिकमत वाला है (27)
(ऐ रसूल) हमने तुमको तमाम (दुनिया के) लोगों के लिए (नेकों को बेहश्त की) खु़शखबरी देने वाला और (बन्दों को अज़ाब से) डराने वाला (पैग़म्बर) बनाकर भेजा मगर बहुतेरे लोग (इतना भी) नहीं जानते (28)
और (उलटे) कहते हैं कि अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो (आखि़र) ये क़यामत का वायदा कब पूरा होगा (29)
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि तुम लोगों के वास्ते एक ख़ास दिन की मीयाद मुक़र्रर है कि न तुम उससे एक घड़ी पीछे रह सकते हो और न आगे ही बड़ सकते हो (30)

21 जनवरी 2026

लोकसभा चुनाव में वक़्फ़ बोर्ड कॉलोनी दादाबाड़ी क्षेत्र में ओम बिरला जी की तरफ से प्रचार करने और बूथों पर बैठ कर भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित करने वाले साजिद जावेद के लिए खबर के वोह 2000 रूपये के इनामी 6 साल से फरार आरोपी थे , क्या किसी के गले उतर रही है

 लोकसभा अध्यक्ष कोटा सांसद आदरणीय ओम जी बिरला के वर्तमान कटटर समर्थक , नियमित रूप से केम्प कार्यालय की तरफ आने जाने वाले , कई सालों तक वक़्फ़ कमेटी कोटा के पदाधिकारी रहने वाले ,, लोकसभा चुनाव में वक़्फ़ बोर्ड कॉलोनी दादाबाड़ी क्षेत्र में ओम बिरला जी की तरफ से प्रचार करने और बूथों पर बैठ कर भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित करने वाले साजिद जावेद के लिए खबर के वोह 2000 रूपये के इनामी 6 साल से फरार आरोपी थे , क्या किसी के गले उतर रही है ,, जबकि कोंग्रेस से इनके भाजपा में शामिल होने, वक़्फ़ उम्मीद पोर्टल के वक़्त की विज्ञप्तियां इनके नाम के साथ सभी अखबारों में सोशल मीडिया पर प्रकाशित है, शायद हाँ, शायद ना , लेकिन एक तरफ जहाँ जोधपुर हाईकोर्ट के जज , जस्टिस फ़रज़न्द अली जोधपुर रेंज के एक मामले में , सोशल मीडिया , अख़बारों में प्रकाशित और पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के तुरंत बाद फोटो खेंच कर पुलिस द्वारा प्रचारित , प्रसारित करने पर रोक लगाते हुए आदेशित कर रहे थे के ,, तत्काल गिरफ्तार आरोपी होता है साबित अपराधी नहीं , ऐसे में उसके फोटो , वगेरा प्रचारित , प्रसारित नहीं होना चाहिए और इसके लिए उन्होंने बीकानेर पुलिस को आदेशित भी किया , सोशल मिडिया , फेसबुक वगेरा से कंटेंट हटाने के निर्देश भी दिए उसी वक़्त बढ़ी बहादुरी की इस गिरफ्तारी पर पुलिस अखबारों को बुलाती है , फोटो खिंचवाती है , खबर बताती है , इनामी अपराधी को , फरार अपराधी को पकड़ने के साहसिक क़िस्से सुनाती है , तो फिर साजिद जावेद के पुराने सी सी टी वी फुटेज जो चाहे सूरजपोल चौकी के हों , एस पी ऑफिस के हों , खुद बोरखेड़ा थाने के हों , सार्वजनिक स्थानों के हों ,, लोकसभा अध्यक्ष के केम्प कार्यालय के हों , एक बार सर्च कर ले ,, ऐसा अनोखा 6 साल से इनामी फरार आरोपी पहली बार लोगों ने देखा होगा जो सभी जगह उपस्थित रहे , जिनके खिलाफ दादाबाड़ी , जवाहर नगर पुलिस ने कोरोना संक्रमण के वक़्त ,, एकत्रित होकर मस्जिद में प्रतिबंध के बाद भी नमाज़ पढ़ने का मुक़दमा चलाया हो , उन्हें गिरफ्तार किया हो , ज़मानत पर छूटे हो और फिर उनके खिलाफ चालान पेश हुआ हो , फिर वोह मामला खत्म हुआ हो , इसके बावजूद भी यह फरार आरोपी यक़ीनन अजब मगर गज़ब है ,, ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

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