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11 जनवरी 2026

ऐसा देश है मेरा / साहित्यिक परिचय..892 अक्षयलता शर्मा, जयपुर

 

ऐसा देश है मेरा / साहित्यिक परिचय..892
अक्षयलता शर्मा, जयपुर
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साहित्य की विभिन्न विधाओं में भावपूर्ण लेखन की शिल्पी श्रीमती अक्षयलता शर्मा का जन्म एक जनवरी 1959 को कोटा में माता स्व. रामसुखी बाई और पिता स्व. मदनमोहन शर्मा के परिवार में हुआ। इन्होंने संस्कृत और हिंदी विषयों में एमए, बीएड एवं आयुर्वेद रत्न की शिक्षा प्राप्त की। कई पत्र-पत्रिका में इनकी रचनाओं का नियमित प्रकाशन होता है।
वर्तमान सामाजिक परिवेश में गिरते हुए जीवन मूल्यों के मर्म को लेकर जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना, संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य के साथ पद्य विधा में कविताओं के साथ-साथ गीत, प्रहेलिका, चतुष्पदी और गद्य विधा में लेख, कहानी, कहानी का नाट्य रूपांतरण, समीक्षा का लेखन कर सभी को जीवन मूल्यों को बचाने के लिए के सतत सजग एवं प्रयत्नशील रहने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
आपका हिंदी, राजस्थानी, हाड़ौती और संस्कृत भाषा पर समान अधिकार है। व्यंग्य शैली, प्रश्न शैली, हास्य-व्यंग्य शैली, गीत शैली, समास शैली, चित्र शैली को अपनाते हुए भक्ति रस, शांत रस, वीर रस, हास्य रस, श्रृंगार रस, अद्भुत रस और करुण रस भावों से आप्लावित साहित्य का सृजन करती हैं। आपकी पुस्तकों की समीक्षा की अपनी अलग शैली है जिसमें साहित्य का पुट समीक्षा को औरों से अलग ला खड़ा करता है ।
इनके काव्य सुजन में मानवीकरण, प्रतीकात्मकता, विविध शैलियों का प्रयोग, शब्द शक्तियों के सफल प्रयोग, विषय की गंभीरता, चिन्तन, विश्लेषण, दिशाबोध, प्रभावोत्पादकता, हास्य विनोद, भावोत्तेजक, विशद शब्दकोश अवसरानुकूल क्लिष्ट शब्दावली व सामासिक शब्दों का प्रयोग, अलंकृत एवं प्रवाहपूर्ण भाषा, मौलिक अभिव्यंजना, माधुर्य, ओज व प्रसाद गुण सम्पन्नता की विशेषताएँ हैं।
इनकी कहानियों में गिरते पारिवारिक मूल्य, विफल चरित्र का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, आवास की समस्या प्रमुख विषय हैं। परिजनों के प्रति तथा मनुष्य को मनुष्य के प्रति वेतना की साहित्यिक उड़ान सौहार्दपूर्ण व्यवहार करने, आवास की समस्या हल करने के लिए संवेदना जगाते हुए पीड़ितों की यथाशक्ति सहायता करने जैसे कथ्य इनकी कहानियों में मुखर हैं और संदेश है कि पाठक मर्मस्पर्शी घटनाओं से प्रभावित होकर समस्याग्रस्त परिवार व समाज के हित में प्रयास करने को प्रेरित होंगे।
वे बताती हैं बचपन में कक्षा पांच से ही इनके मन में कविता लिखने के शौक ने जन्म लिया। क्या लिखें विषय कोई सूझ नहीं रहा था। इन्होंने उस समय 'करो परीक्षा की तैयारी' प्रथम तुक बंदी कविता लिखी। परिजनों, सहपाठियों और शिक्षकों ने खूब सराहा। उत्साहित होने से उस समय 'सुमन', 'यह स्वर्णमहल' और 'चल रही वह लकुटी टेक' जैसी तुक बंदियों की झड़ी लग गई। फिर व्यस्तता के चलते यथा अवसर उद्वेलित करने वाली संवेदनाएँ इन्हें झकझोरती हुई इनकी लेखनी को क्रियाशील करती रहीं। समय के साथ-साथ आज साहित्य में इन्होंने जिस प्रकार मुकाम बनाया है उस पर प्रसिद्ध संपादक अशोक बत्रा ने लिखा "'जिन कवियों ने छंदों का निपुणता पूर्वक निर्वाह किया है और अपने भाव को विशेष अभिव्यक्ति प्रवाह में निबद्ध किया है, उनमें से कई साहित्यकारों की तरह अक्षयलता शर्मा प्रभावित करती हैं।"
जीवनमूल्य, जीवनमूल्य द्वितीय सुमन और मानस की गूंज आपकी काव्य संग्रह कृतियां हैं। बाल काव्य निकुंज श्रृंखला में पल्लव और प्रसून बाल कृतियां हैं। कृतघ्न और अंधेरे में कहानियां और समझ लघु कथा लोकप्रिय हुई हैं। आपको लेखन के लिए कोटा भारतेंदु समिति द्वारा साहित्य श्री अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया गया है। आप वर्तमान में पिछले कई वर्षों से जयपुर में निवास कर रही हैं। ( संपर्क : अपना बेंगलो, बालाजी विहार,,मोहनपुरा बालाजी, बी-34, सांगानेर, जयपुर- 302029 (राजस्थान) मोबाइल 94617 04390 )
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प्रस्तुति : डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा

कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर के नेतृत्व में ग्रामीण पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी,

 

कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर के नेतृत्व में ग्रामीण पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी,
पुलिस पर फायरिंग करने वाले हार्डकोर अपराधी को मय हथियारों के जखीरे सहित गिरफ्तार
के डी अब्बासी
कोटा,जनवरी। कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर के नेतृत्व में ग्रामीण पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी,
पुलिस पर फायरिंग करने वाले हार्डकोर अपराधी को मय हथियारों के जखीरे सहित गिरफ्तार
के
आमने सामने की फायरिंग में हार्डकोर अपराधी के पैर में लगी गोली, हार्डकोर अपराधी हुआ घायल।
2-हार्डकोर अपराधी पूर्व में भी पुलिस पर कर चुका फायरिंग ।
-हार्डकोर अपराधी अपने साथियों के साथ मय हथियार पुलिस के हत्थे चढा।
जिला कोटा शहर पुलिस द्वारा उक्त हार्डकोर अपराधी आदिल मिर्जा पर अलग-अलग प्रकरणों में दस-दस हजार रूपये का घोषित था ईनाम।
जिला कोटा ग्रामीण में उक्त फरार हार्डकोर अपराधी रेंज स्तर का टॉप-10 व पुलिस अधीक्षक जिला कोटा ग्रामीण द्वारा चव्वनी (25 पैसे) ईनाम घोषित किया हुआ था।
कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर ने जानकारी देते हुए बताया कि थाना मोडक पर 11 जनवरी को थाना सांगोद के फायरिंग के प्रकरण एवं जिला कोटा शहर के फायरिंग के प्रकरणों मे व पुलिस टीम पर फायरिंग के प्रकरण में फरार हार्डकोर अपराधी आदिल मिर्जा को मय हथियार व अपने साथियों के साथ गिरफ्तार करनें में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि
आर्म्स एक्ट पुलिस थाना कैथूनीपोल जिला कोटा शहर में फरार चल रहे हार्डकोर अपराधी आदिल मिर्जा को उसके साथियों के साथ पार्टी करनें की सूचना होने पर जिला कोटा शहर की पुलिस द्वारा दबिश देने पर उक्त अपराधी द्वारा पुलिस पर फायरिंग की गई जबाव में पुलिस द्वारा फायरिंग की परन्तु अपराधी रात्रि का फायदा उठाकर फरार होने में कामयाब हुआ था। उन्होंने बताया कि
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामकल्याण मीणा व डीएसपी घनश्याम मीणा के निर्देशन में लगभग तीन दर्जन पुलिस वालों की अलग-अलग टीमो का गठन
किया। गठित पुलिस टीम के सदस्य के सदस्य श्री लाखन सिंह कानि० सायबर सैल द्वारा टीम के अन्य सदस्यों को सूचना दी गई कि उक्त फरार हार्डकोर अपराधी आदिल मिर्जा अपने साथियों के साथ मोडक क्षेत्र में चौसला ब्रीज के पास अमरूद के बाग में छिपा हुआ है उक्त सूचना पर वृत रामगंजमण्डी व थाना सांगोद की टीम एवं कार्यालय पुलिस अधीक्षक जिला कोटा ग्रामीण की स्पेशल टीमों द्वारा उक्त स्थान पर दबिश दी गई। जिसमें हार्डकोर अपराधी आदिल मिर्जा अपने साथियों के साथ छिपा हुआ दिखा। हार्डकोर अपराधी ने पुलिस टीम को देखते ही पुलिस टीम पर फायर किया जिस पर जवाब में पुलिस टीम द्वारा भी फायर किया। पुलिस की जवाबी फायरिंग में हार्डकोर अपराधी आदिल मिर्जा के बायें पैर में गोली लगने से उक्त हार्डकोर अपराधी घायल हो गया और अपराधी के साथी भी भागने का प्रयास करने लगे जिससे उनके भी चोंटे आयी जिनको पुलिस द्वारा इलाज हेतु अस्पताल में भर्ती करवाया गया। आरोपी से एक 12 बोर देशी कटटा दो नाली, 2 देशी कट्टा, 1 पिस्टल व 3 मेग्जीन मय 16 जिन्दा कारतूस व 01 चाकू, 03 एन्ड्रोइड मोबाईल व 01 छोटा मोबाईल, 01 जिओ डोगल व वाहन मोटर साईकिल व स्कूटी जब्त की है।

और हम यक़ीनी (क़यामत के) बड़े अज़ाब से पहले दुनिया के (मामूली) अज़ाब का मज़ा चखाएँगें जो अनक़रीब होगा ताकि ये लोग अब भी (मेरी तरफ) रुज़ू करें

 और हम यक़ीनी (क़यामत के) बड़े अज़ाब से पहले दुनिया के (मामूली) अज़ाब का मज़ा चखाएँगें जो अनक़रीब होगा ताकि ये लोग अब भी (मेरी तरफ) रुज़ू करें (21)
और जिस शख़्स को उसके परवरदिगार की आयतें याद दिलायी जाएँ और वह उनसे मुँह फेर उससे बढ़कर और ज़ालिम कौन होगा हम गुनाहगारों से इन्तक़ाम लेगें और ज़रुर लेंगे (22)
और (ऐ रसूल) हमने तो मूसा को भी (आसमानी किताब) तौरेत अता की थी तुम भी इस किताब (कुरान) के (अल्लाह की तरफ से) मिलने में शक में न पड़े रहो और हमने इस (तौरेत) तो तुम को भी बनी इसराईल के लिए रहनुमा क़रार दिया था (23)
और उन्ही (बनी इसराईल) में से हमने कुछ लोगों को चूँकि उन्होंने (मुसीबतों पर) सब्र किया था पेशवा बनाया जो हमारे हुक़्म से (लोगो की) हिदायत करते थे और (इसके अलावा) हमारी आयतो का दिल से यक़ीन रखते थे (24)
(ऐ रसूल) हसमें शक नहीं कि जिन बातों में लोग (दुनिया में) बाहम झगड़ते रहते हैं क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार क़तई फैसला कर देगा (25)
क्या उन लोगों को ये मालूम नहीं कि हमने उनसे पहले कितनी उम्मतों को हलाक कर डाला जिन के घरों में ये लोग चल फिर रहें हैं बेशक उसमे (कुदरते ख़़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं तो क्या ये लोग सुनते नहीं हैं (26)
क्या इन लोगों ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम चटियल मैदान (इफ़तादा) ज़मीन की तरफ पानी को जारी करते हैं फिर उसके ज़रिए से हम घास पात लगाते हैं जिसे उनके जानवर और ये ख़ुद भी खाते हैं तो क्या ये लोग इतना भी नहीं देखते (27)
और ये लोग कहते है कि अगर तुम लोग सच्चे हो (कि क़यामत आएगी) तो (आखि़र) ये फैसला कब होगा (28)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि फैसले के दिन कुफ़्फ़ार को उनका ईमान लाना कुछ काम न आएगा और न उनको (इसकी) मोहलत दी जाएगी (29)
ग़रज़ तुम उनकी बातों का ख़्याल छोड़ दो और तुम मुन्तजि़र रहो (आखि़र) वह लोग भी तो इन्तज़ार कर रहे हैं (30)

10 जनवरी 2026

कोटा व्यापार संघ , कोटा टूरिस्ट ट्रेवल मार्ट की फ़ज़ीहत के बाद आंतरिक विरोध के दौर से गुज़र रहा है ,संस्थापक स्वर्गीय बृजमोहन मालवीय जी के लगाये हुए , व्यापार महासंघ के इस पेड़ की

 

कोटा व्यापार संघ , कोटा टूरिस्ट ट्रेवल मार्ट की फ़ज़ीहत के बाद आंतरिक विरोध के दौर से गुज़र रहा है ,संस्थापक स्वर्गीय बृजमोहन मालवीय जी के लगाये हुए , व्यापार महासंघ के इस पेड़ की 170 शाखाएं पहली बार आंतरिक विद्रोह के दौर से गुज़र रही हैं, कुछ चुप हैं, कुछ लिहाज़ में हैं, कुछ हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं , सरकारी खर्च पर कोटा टूरिस्ट ट्रेवल मार्ट में कई व्यापारियों की भी उपेक्षा के आरोप लग रहे हैं, जबकि कोटा उत्तर विधायक शांति कुमार धारीवाल जिन्होंने कोटा को इस लायक बनाया के कोटा का व्यापारी , होटल व्यवसाई सीना ठोक कर कह सकें, के कोटा को पर्यटन सर्किट बनाया जाए, उनकी उपेक्षा को लेकर व्यापार महासंघ चाहे शर्मिंदा ना हो , लेकिन व्यापार महासंघ के 170 से भी ज़्यादा वोटर्स में से कई अब पच्चीस सालों से निर्विरोध के नाम पर खूंटा गाढ़ कर बैठे लोगों के खिलाफ आंतरिक लोकतंत्र नियमों के तहत चुनाव करवाने की मांग उठाने लगे हैं , , इसका विधिक रजिस्ट्रेशन करवाने की बात करने लगे हैं, कोटा व्यापार महासंघ हमेशा हर कार्यक्रम में , आवश्यक्तानुसार , राजनितिक रूप से तटस्थ भूमिका निभाता रहा है , पदाधिकारियों की निजी विचारधारा भाजपा की होने के बावजूद भी , व्यापार महासंघ के पदाधिकारियों के साथ कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल जिन्हे कोटा के लिए विकास और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने वाला युग पुरुष कहा जाने लगा है , उन्होंने सुख दुःख में इन लोगों का व्यक्तिगत और व्यापारिक स्तर पर , जो भी सरकार के ज़रिये आवश्यकनुसार डिमांड रही , बिना किसी हील हुज्जत किये, कांग्रेस भाजपा के भेदभाव के दिल खोल कर मदद की है , लेकिन आज स्थिति बदल गई है, करोड़ों करोड़ सरकारी खर्च के बाद , भाजपा के लोग , कोटा के जिन विकास कार्यों को , कांग्रेस की फ़िज़ूल खर्ची बताकर उपेक्षित कर रहे थे , आज उन्हें देखने और दिखाने और विकसित करने के नाम पर सरकारी फंड के करोड़ों रूपये खर्च किये गये , सरकारी फंड से लाखों रूपये यात्रा भत्ता के नाम पर खर्च कर भाजपा नेता, कोटा के इन स्थलों को देखने यहां आकर इन्हे खूबसूरत अद्भुत बताने के भाषण देने के लिए आये, यह सब थूक के चाटने के समान है , खेर , सरकार में बैठे लोग देर आयद , दुरुस्त आयद , लेकिन कोटा को यह सब जिसने दिया , उस शख्सियत शांति कुमार धारीवाल का भाजपा में उनके निजी मित्रों तक ने उनका कोई नाम नहीं लिया और उनसे सीधे तोर पर निजी तोर पर ओब्लाइज्ड रहे आयोजकों ने भी उन्हें बुलाना तो दूर , उनका नाम कार्ड तक में भी नहीं छापा , उनके कार्यो को लेकर उनका सम्मान करना तक मुनासिब नहीं समझा, बात साफ है , सरकार ईमानदार नहीं है , व्यापारी हैं , व्यापारी तो व्यापारी ही हैं , जिसके पास देने के लिए हैं उसके ही साथ रहते हैं , लेकिन विभिन्न विचारधारा के 170 व्यापार संघ मतदाताओं के साथ यह न्याय नहीं है , इस मुद्दे पर साधारण सभा बुलाकर कई व्यापारी विरोध भी दर्ज कराने की सोच रहे हैं , जबकि इस टूरिस्ट मीट में आये संबंधित नेताओं की चमचागिरी में लगे कुछ लोग , खुद को राजस्थान सरकार में व्यापार लघु उद्योग आयोग का चेयरमेन बनाने की कोशिशों में जुटे हैं ,, तो कुछ जो होटल ,,रिसोर्ट से जुड़े हैं इस पर्यटन को बढ़ावा देने के कार्यक्रम के नाम पर खुद को राजस्थान पर्यटन विकास निगम का चेयरमेन बनाने की कोशिशों में जुटे है , कोटा के लोग हैं नियुक्त भी होना चाहियें, लेकिन दिक़्क़त यह है, के इनके इन सपनों पर पानी फेरने के लिए , कोटा के सोशल मिडिया ने जो खुलकर इनके आयोजन की फ़ज़ीहत की है , यह बताने की कोशिश की है के, यह उनके ही सगे नहीं रह सके जिन्होंने इन्हे इस मुक़ाम पर हमेशा ज़िंदाबाद रखने के लिए कांग्रेस ,भाजपा के सिद्धांतों को भी ताक में रखकर अपने ही कार्यकर्ताओं का विरोध लिया है ,, कोटा में सियासी नियुक्तियों का गणित अगर हम समझे तो सीधी सी बात है के यहां आदरणीय ओम जी बिरला की मर्ज़ी के बगैर पत्ता भी नहीं हिल सकता , तो फिर ,, नियुक्तियों में सामाजिक , संतुलन सिद्धांतों के तहत वोह जिस समाज के हैं , उसी समाज के सभी लोगों को तो बनाने की सिफारिश करेंगे नहीं , जबकि कोटा में भाजपा के जिलाध्यक्ष भी इसी समाज से है , एक अन्य जो कांग्रेस से भाजपा में शामिल होकर मुखर भूमिका में हैं ,वायदे और दोस्ती के सिद्धांत के तहत उनका भी अपना पहला हक़ है , तो अगर उन्हें बनाया तो फिर इन पदों पर इसी समाज से जुड़े लोगों का ख्वाब देखना तो अजीब सा लगता है , खेर सरकारें है, कुछ भी कर सकती हैं , किसी को भी किसी भी ओहदे पर नियुक्त कर सकती है , लेकिन मेने जब एक आर्टिकल शांति कुमार धारीवाल साहब की उपेक्षा और इस टूरिस्ट मीट के आयोजन आचरण पर लिखा था , तो मुझे एक दर्जन से भी अधिक व्यापारियों ने फोन पर शाबाशी देते हुए कहा था , के कुछ ऐसा करो के व्यापार महासंघ का लोकतंत्र बहाल हो , निर्विरोध की नौटंकी खत्म हो , मेने उन्हें यही कहा , तुम्हारा अपना संगठन है , तुम ही साधारण सभा बुलवाओ , तुम ही चुनाव की बात करो ,, यह सब तो तुम्हे ही करना होगा , व्यापार संघ के विधिक रजिस्ट्रेशन पर बात भी खुद को ही करना होगी, लेकिन वोह क्या करें , दोहरी ताक़त है व्यापारी भी हैं , पार्टी के अध्यक्ष भी हैं , पार्टी के पदाधिकारी हैं , तो सरकार के नज़दीकी भी हैं , तो फिर डरे सहमे होकर कहते हैं , खेर आप लिख अच्छा रहे हो , जगाने की कोशिश कर रहे हो , भगत सिंह हमारे घर में नहीं तो किसी और के घर में तो पैदा कभी तो होगा ही , देखते हैं एक ब्रेक के बाद , किसको क्या राजनितिक नियुक्ति का ओहदा मिलता है , और भविष्य में व्यापार महासंघ के निर्विरोध चुनाव का क्या तरीक़ा होता है , होस्टल व्यवसाइयों की समस्या उपेक्षित किये जाने से होस्टल व्यवसाय तो बगावत पर हैं, सभी जानते हैं , रामपुरा के आदरणीय स्वर्गीय ब्रिज मोहन मालवीय ने इस व्यापार संघ की नींव गेर सियासी रखी थी , लेकिन उस आत्मा के विरुद्ध यह आयोजन झकझोर रहा है, ,जबकि सवर्गीय सत्यभान जी उपाध्यक्ष रहते उनके जीवनकाल में ऐसा हरगिज़ नहीं होने देते,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा का नाम बदलने और उसकी शर्तों में किए जा रहे बदलावों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

 

कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा का नाम बदलने और उसकी शर्तों में किए जा रहे बदलावों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेसी नेताओं का आरोप है कि इससे गरीब और मजदूर वर्ग से उसकी हकदारी छीनी जा रही है और उन्हें योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है। इसी के विरोध में 11 जनवरी को कांग्रेस ने केंद्र की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन और मौन उपवास करने का ऐलान किया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने पर कांग्रेसियों में आक्रोश है। गुमानपुरा स्थित जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आंदोलन को लेकर पदाधिकारी ने बैठक आयोजित की।कांग्रेसियों ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलकर मजदूरों के अधिकार छिने जा रहे। भाजपा का मूर्ख बनाओ अभियान चल रहा है।
लोगों को रामजी के नाम पर किया जा रहा भ्रमित
शहर अध्यक्ष राखी गौतम ने बताया लोगों को रामजी के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने 100 दिन की जगह 125 दिन रोजगार का कानून बनाया है। यह सिर्फ मूर्ख बनाओ अभियान चल रहा है। हमें लोगों को समझाना बताना होगा।
हमें लोगो के बीच जाकर बताना होगा कि आपके साथ 2 महीने का कुठाराघात होगा।आपके अधिकार छीन जाएंगे। पहले सरकार की 15 दिन में रोजगार उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी होती थी।
ग्रामीण क्षेत्र के लोग शहर की ओर करेंगे पलायन
नए कानून के तहत जब तक केंद्र सरकार नहीं चाहेगी तब तक कोई भी जगह काम नहीं होगा। इस कारण काम नहीं मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र के लोग शहर की ओर पलायन करेंगे। उन्हें शहर में कम पैसों में काम करने को मजबूर होना पड़ेगा।
केंद्र की नीतियों के खिलाफ कल कैथून में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मॉनिटरिंग उपवास रखेंगे। 5 फरवरी तक ब्लॉक स्तर, मंडल स्तर, वार्ड स्तर तक जाएंगे ओर लोगों को जागरूक करेंगे। मनरेगा मजदूरों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जाएगी।
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