आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
31 दिसंबर 2025
नगर निगम कोटा द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने एवं प्रतिबंधित चाईनीज मांझा जप्ती की कार्यवाही
परिजनों के सहयोग से संपन्न हुए दो नेत्रदान
हाडोती संभाग में शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से मंगलवार को दो नेत्रदान संपन्न हुए । संस्था के ज्योति मित्र अमित जैन ने सूचना दी की उनकी भाभी प्रीति की माताजी निर्मला रंगावत का आकस्मिक निधन हुआ है,और उनके पति प्रफुल्ल,पुत्र अतुल ने नेत्रदान के लिए सहमति दी है, जिसके उपरांत वल्लभभाई स्थित निवास स्थान पर निर्मला के नेत्रदान संपन्न हुए।
इसी नेत्रदान के ठीक उपरांत संस्था के ज्योति मित्र, एवं भारतीय विकास परिषद के सक्रिय सदस्य ललित कुमार टेलर ने कापरेन से सूचना दी की,उनके मित्र ताराचंद गर्ग की माताजी रामप्यारी बाई के आकस्मिक निधन के उपरांत उनकी समझाइश पर परिजनों ने नेत्रदान के लिए सहमति दी है ।
सूचना आते ही कोटा से डॉ कुलवंत गौड़ ज्योति-रथ से कापरेन रवाना हुए और परिवार के सभी सदस्यों के बीच में नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया,इसके उपरांत मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के समय क्षेत्रवासियों के बीच में नेत्रदान और उससे जुड़ी भ्रांतियों के बारे पर डॉ गौड़ ने विस्तार से जानकारीए दी।
उपस्थित जन समूह ने आश्वासन दिया है कि,जब भी कभी क्षेत्र में ऐसी कोई शोक की घटना होती है तो,प्रयास करेंगे कि,परिजन उनके नेत्रदान करवाने के लिए राजी हो ।
(यहाँ से) बहुत क़रीब के मुल्क में रोमी (नसारा एहले फ़ारस आतिश परस्तों से) हार गए
ख़ुदा के नाम से (शुरु करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला हैं
अलिफ़ लाम मीम (1)
(यहाँ से) बहुत क़रीब के मुल्क में रोमी (नसारा एहले फ़ारस आतिश परस्तों से) हार गए (2)
मगर ये लोग अनक़रीब ही अपने हार जाने के बाद चन्द सालों में फिर (एहले फ़ारस पर) ग़ालिब आ जाएँगे (3)
क्योंकि (इससे) पहले और बाद (ग़रज़ हर ज़माने में) हर अम्र का एख़्तेयार ख़ुदा ही को है और उस दिन ईमानदार लोग ख़ुदा की मदद से खुश हो जाएँगे (4)
वह जिसकी चाहता है मदद करता है और वह (सब पर) ग़ालिब रहम करने वाला है (5)
(ये) ख़़ुदा का वायदा है) ख़़ुदा अपने वायदे के खि़लाफ नहीं किया करता मगर अकसर लोग नहीं जानते हैं (6)
ये लोग बस दुनियावी जि़न्दगी की ज़ाहिरी हालत को जानते हैं और ये लोग आख़ेरत से बिल्कुल ग़ाफिल हैं (7)
क्या उन लोगों ने अपने दिल में (इतना भी) ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को और जो चीजे़ उन दोनों के दरमेयान में हैं बस बिल्कुल ठीक और एक मुक़र्रर मियाद के वास्ते पैदा किया है और कुछ शक नहीं कि बहुतेरे लोग तो अपने परवरदिगार की (बारगाह) के हुज़ूर में (क़यामत) ही को किसी तरह नहीं मानते (8)
क्या ये लोग रुए ज़मीन पर चले फिरे नहीं कि देखते कि जो लोग इनसे पहले गुज़र गए उनका अन्जाम कैसा (बुरा) हुआ हांलाँकि जो लोग उनसे पहले क़ूवत में भी कहीं ज़्यादा थे और जिस क़दर ज़मीन उन लोगों ने आबाद की है उससे कहीं ज़्यादा (ज़मीन की) उन लोगों ने काष्त भी की थी और उसको आबाद भी किया था और उनके पास भी उनके पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ चुके थे (मगर उन लोगों ने न माना) तो ख़ुदा ने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया मगर वह लोग (कुफ़्र व सरकशी से) आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहे (9)
फिर जिन लोगों ने बुराई की थी उनका अन्जाम बुरा ही हुआ क्योंकि उन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया था और उनके साथ मसखरा पन किया किए (10)
28 दिसंबर 2025
*कथाकुंज साहित्य सेवा परिषद ने मेहताब आलम को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत किया*
(ऐ रसूल) अगर तुम उनसे पूछो कि (भला) किसने सारे आसमान व ज़मीन को पैदा किया और चाँद और सूरज को काम में लगाया तो वह ज़रुर यही कहेंगे कि अल्लाह ने फिर वह कहाँ बहके चले जाते हैं
(ऐ रसूल) अगर तुम उनसे पूछो कि (भला) किसने सारे आसमान व ज़मीन को पैदा
किया और चाँद और सूरज को काम में लगाया तो वह ज़रुर यही कहेंगे कि अल्लाह
ने फिर वह कहाँ बहके चले जाते हैं (61)
ख़ुदा ही अपने बन्दों में से जिसकी रोज़ी चाहता है कुशादा कर देता है और
जिसके लिए चाहता है तंग कर देता है इसमें शक नहीं कि ख़़ुदा ही हर चीज़ से
वाकि़फ़ है (62)
और (ऐ रसूल) अगर तुम उससे पूछो कि किसने आसमान से पानी बरसाया फिर उसके
ज़रिये से ज़मीन को इसके मरने (परती होने) के बाद जि़न्दा (आबाद) किया तो
वह ज़रुर यही कहेंगे कि अल्लाह ने (ऐ रसूल) तुम कह दो अल्हम दो लिल्लाह-मगर
उनमे से बहुतेरे (इतना भी) नहीं समझते (63)
और ये दुनिया की जि़न्दगी तो खेल तमाशे के सिवा कुछ नहीं और मगर ये लोग
समझें बूझें तो इसमे षक नहीं कि अबदी जि़न्दगी (की जगह) तो बस आख़ेरत का घर
है (बाक़ी लग़ो) (64)
फिर जब ये लोग कश्ती में सवार होते हैं तो निहायत ख़ुलूस से उसकी इबादत
करने वाले बन कर ख़़ुदा से दुआ करते हैं फिर जब उन्हें खुश्कीमें (पहुँचा
कर) नजात देता है तो फौरन शिर्क करने लगते हैं (65)
ताकि जो (नेअमतें) हमने उन्हें अता की हैं उनका इन्कार कर बैठें और ताकि
(दुनिया में) ख़ूब चैन कर लें तो अनक़रीब ही (इसका नतीजा) उन्हें मालूम हो
जाएगा (66)
क्या उन लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि हमने हरम (मक्का) को अमन व
इत्मेनान की जगह बनाया हालाँ कि उनके गिर्द व नवाह से लोग उचक ले जाते हैं
तो क्या ये लोग झूठे माबूदों पर ईमान लाते हैं और ख़़ुदा की नेअमत की
नाशुक्री करते हैं (67)
और जो शख़्स ख़़ुदा पर झूठ बोहतान बॅाधे या जब उसके पास कोई सच्ची बात आए
तो झुठला दे इससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा क्या (इन) काफ़िरों का ठिकाना
जहन्नुम में नहीं है (ज़रुर है) (68)
और जिन लोगों ने हमारी राह में जिहाद किया उन्हें हम ज़रुर अपनी राह की
हिदायत करेंगे और इसमें शक नही कि ख़़ुदा नेकोकारों का साथी है (69)
सूरए अन अनक़बूत ख़त्म
