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27 मार्च 2025

ज़माना कहता है भारत में पत्रकारिता मर गई है ,

 

ज़माना कहता है भारत में पत्रकारिता मर गई है , ज़माने के साथ साथ , अब तो एलन मस्क का , ब्रांड , ग्रोक , भी तस्दीक़ कर रहा है , के यक़ीनन भारत में पत्रकारिता गोदी मिडिया के रूप में ,, दलाल पत्रकारिता के रूप में जन्म ले चुकी है ,और पत्रकारिता सिसक रही है ,, लेकिन इसी माहौल के बीच अगर ,, कुछ पत्रकार जिनमे से खास तोर पर , दैनिक भास्कर के इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट भाई अवधेश आकोदिया , निर्भीक , नीडर होकर बिना किसी लोभ लालच के लाखों रूपये के ऑफर को ठुकरा कर , अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करवाने में सफल होते हैं , तो यक़ीनन , पत्रकारिता अभी मरी नहीं है , पत्रकारिता अभी ज़िंदा है , वोह यह सो फीसदी साबित कर पत्रकारिता का शर्म से झुका हुआ सर , गर्व से ऊंचा कर देते हैं, अवधेश आकोदिया की क़लम ने आज भी पत्रकारिता को ज़िंदाबाद किया हुआ है , यही सब, उनकी खबरों को पढ़ने के बाद आम जनता के बीच में चर्चा होने लगती है , यूँ तो हर क़दम पर , एक दो सप्ताह में , इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म के नाम पर , अवधेश आकोदिया बेहतरीन खबर दैनिक भास्कर में प्रकाशित करवाकर सभी को चौंका देते हैं , लेकिन जब , डॉक्टर्स रजिस्ट्रेशन में बेईमानी , रिश्वतखोरी , के साथ , फ़र्ज़ी लोगों को डॉक्टर का लाइसेंस देकर , उन्हें जनता के साथ, खिलवाड़ करने की पोल पट्टी सामने आती है , तो फिर अपने इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म के सभी भाव ताव के साथ , अवधेश खांडल खबर खोजने में जुट जाते हैं , अलग अलग जगह, कई बार बात करते हैं , स्टिंग ऑपरेशन करते हैं , और राजस्थान मेडिकल कौंसिल के रजिस्ट्रार के पास फ़र्ज़ी डॉक्टर्स की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट लेकर जब, वोह उनका वर्जन लेने पहुंचते हैं , तो बस ,, राजस्थान मेडिकल कौंसिल के ज़िम्मेदार रजिस्ट्रार साहब कहते हैं , कोई बात नहीं , आप को भी उन फ़र्ज़ी पंजीयन जिनका हुआ है , उनसे रूपये दिलवा देंगे , सेल्यूट करता हूँ में , अवधेष आकोदिया जी को , जिन्होंने इन जनाब के मंसूबों को पैरों तले रौंद दिया , इनके प्रस्ताव को राष्ट्रहित , पत्रकारिता के मूल्य संवर्धन को जीवित कहो , या पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से ठुकरा कर , उस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करवाई , में उस वक़्त के दैनिक भास्कर के स्थानीय सम्पादक को भी सेल्यूट करता हूँ , जिन्होंने , सम्पादकीय आदत के मुताबिक़ , बिना किसी नाज़ नखरे के पत्रकारिता के सिद्धांतों को सर्वोपरि माना और , उस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित भी की , वोह बात अलग के अब उस खबर का अंतिम फॉलो अप , ऐंटी करप्शन की जांच कहाँ तक पहुंची , ,कोन ,, कौन दोषी है , कौन गिरफ्तार हुआ ,, इन रजिस्ट्रार साहब के खिलाफ सरकार ने क्या कार्यवाही की और वर्तमान में भी , वही ढीलमपोल , राजस्थान मेडिकल कौंसिल में , नए रजिस्ट्रेशन में , बाहर के डॉक्टर्स , स्थानीय डॉक्टर्स को वेरिफिकेशन के नाम पर क्यों अनावश्यक देरी कर चक्कार कटवाए जा रहे हैं , इसकी फॉलो अप रिपोर्टिंग बंद हो गई है , लेकिन अवधेष आकोदिया ने , किडनी ट्रांसप्लांट घोटाला हो , कर्मचारियों का सरकारी घोटाला हो , कामचोरी , भ्रष्टाचार से संबंधित खबरें हों , प्रमुखता से इन्वेस्टीगेट की , सुबूत जुटाए और फिर आम पाठकों को परोस कर , दैनिक भास्कर के प्रकाशन और , पत्रकारिता के मूल्य संवर्धन को , बुलंदियों पर पहुंचाया है , यूँ तो अवधेष आकोदिया इस तरह की निष्पक्ष , निर्भीक , इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म , के लिए किसी पुरस्कार के मोहताज नहीं , क्यौंकि उनकी इस बहादुर क़लम को राजस्थान ने ही नहीं , देश ने सेल्यूट किया है , वोह बात अलग है , के राजस्थान सरकार ने अभी तक इन खबरों के ज़िम्मेदार, बेईमानों को दंडित नहीं किया है , ओहदों पर बैठा रखा है , लेकिन अवधेश आकोदिया ज़िंदाबाद हो गए , उन्हें कई पुरस्कार , कई सम्मान मिले , हाल ही में , उन्हें फिर एक नया सम्मान मिला है , ,उन्हें सेल्यूट , इस उम्मीद के साथ, के जब पत्रकारिता का मरणासन्न दौर है , सेटिंग और विज्ञापन के बोझ तले , सिसकने का दौर है ,, सरकार और नेताओं के मुखबीर , भेदिये , प्रवक्ता , स्पोक्स पर्सन , दलाली करने , का दौर है , पेड खबरों का दौर है , पत्रकारिता को कलंकित करने , सम्पादकीय विभाग और मालिकों द्वारा पत्रकारों , रिपोर्टर्स के मानवाधिकारों का हनन करने , उनके द्वारा कढ़ी महनत के बाद जुटाई गई निष्पक्ष , खबरों , इन्वेस्टिगेटिव खबरों को कचरे में फेंकने का दौर है, ऐसे दौर में भी वोह पत्रकारिता के मूल्य संवर्धन को जीवित रखे हुए हैं , और रखते रहेंगे , , उन्हें सेल्यूट, सलाम, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

मगर (हाँ) जिन लोगों ने इससे पहले कि तुम इनपर क़ाबू पाओ तौबा कर लीे तो उनका गुनाह बख़्श दिया जाएगा क्योंकि समझ लो कि ख़ुदा बेशक बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है

 (तब उसे फि़क्र हुयी कि लाश को क्या करे) तो ख़ुदा ने एक कौवे को भेजा कि वह ज़मीन को कुरेदने लगा ताकि उसे (क़ाबील) को दिखा दे कि उसे अपने भाई की लाश क्योंकर छुपानी चाहिए (ये देखकर) वह कहने लगा हाए अफ़सोस क्या मैं उस से भी आजिज़ हॅू कि उस कौवे की बराबरी कर सकॅू कि (बला से यह भी होता) तो अपने भाई की लाश छुपा देता अलगरज़ वह (अपनी हरकत से) बहुत पछताया (31)
इसी सबब से तो हमने बनी इसराईल पर वाजिब कर दिया था कि जो श्शख़्स किसी को न जान के बदले में और न मुल्क में फ़साद फैलाने की सज़ा में (बल्कि नाहक़) क़त्ल कर डालेगा तो गोया उसने सब लोगों को क़त्ल कर डाला और जिसने एक आदमी को जिला दिया तो गोया उसने सब लोगों को जिला लिया और उन (बनी इसराईल) के पास तो हमारे पैग़म्बर (कैसे कैसे) रौशन मौजिज़े लेकर आ चुके हैं (मगर) फिर उसके बाद भी यक़ीनन उसमें से बहुतेरे ज़मीन पर ज़्यादतिया करते रहे (32)
जो लोग ख़ुदा और उसके रसूल से लड़ते भिड़ते हैं (और एहकाम को नहीं मानते) और फ़साद फैलाने की ग़रज़ से मुल्को (मुल्को) दौड़ते फिरते हैं उनकी सज़ा बस यही है कि (चुन चुनकर) या तो मार डाले जाए या उन्हें सूली दे दी जाए या उनके हाथ पॉव हेर फेर कर एक तरफ़ का हाथ दूसरी तरफ़ का पॉव काट डाले जाए या उन्हें (अपने वतन की) सरज़मीन से शहर बदर कर दिया जाए यह रूसवाई तो उनकी दुनिया में हुयी और फिर आख़ेरत में तो उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब ही है (33)
मगर (हाँ) जिन लोगों ने इससे पहले कि तुम इनपर क़ाबू पाओ तौबा कर लीे तो उनका गुनाह बख़्श दिया जाएगा क्योंकि समझ लो कि ख़ुदा बेशक बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (34)
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरते रहो और उसके (तक़र्रब {क़रीब होने} के) ज़रिये की जुस्तजू में रहो और उसकी राह में जेहाद करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ (35)
इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया अगर उनके पास ज़मीन में जो कुछ (माल ख़ज़ाना) है (वह) सब बल्कि उतना और भी उसके साथ हो कि रोज़े क़यामत के अज़ाब का मुआवेज़ा दे दे (और ख़ुद बच जाए) तब भी (उसका ये मुआवेज़ा) कु़बूल न किया जाएगा और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है (36)
वह लोग तो चाहेंगे कि किसी तरह जहन्नुम की आग से निकल भागे मगर वहाँ से तो वह निकल ही नहीं सकते और उनके लिए तो दाएमी अज़ाब है (37)
और चोर ख़्वाह मर्द हो या औरत तुम उनके करतूत की सज़ा में उनका (दाहिना) हाथ काट डालो ये (उनकी सज़ा) ख़ुदा की तरफ़ से है और ख़ुदा (तो) बड़ा ज़बरदस्त हिकमत वाला है (38)
हाँ जो अपने गुनाह के बाद तौबा कर ले और अपने चाल चलन दुरूस्त कर लें तो बेशक ख़ुदा भी तौबा कु़बूल कर लेता है क्योंकि ख़ुदा तो बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (39)
ऐ शख़्स क्या तू नहीं जानता कि सारे आसमान व ज़मीन (ग़रज़ दुनिया जहान) में ख़ास ख़ुदा की हुकूमत है जिसे चाहे अज़ाब करे और जिसे चाहे माफ़ कर दे और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है (40)

26 मार्च 2025

अखंड टाइम्स एक्सक्लूसिव साक्षात्कार: कोटा कोचिंग माफिया, छात्रों की मानसिक स्थिति और शिक्षा की गिरती साख

 

अखंड टाइम्स एक्सक्लूसिव साक्षात्कार: कोटा कोचिंग माफिया, छात्रों की मानसिक स्थिति और शिक्षा की गिरती साख
संवाददाता: अख्तर खान अकेला जी, नमस्ते। कोटा और सीकर जैसे शहर कभी शिक्षा के केंद्र माने जाते थे, लेकिन आज वहां आत्महत्याओं की ख़बरें आम हो गई हैं। हाल ही में बिहार के एक छात्र की आत्महत्या ने फिर इस संकट को उजागर कर दिया है। आप इस स्थिति को कैसे देखते हैं?
अख्तर खान अकेला: नमस्ते। यह बेहद दुखद है। कोटा आज शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि एक मानसिक तनाव का दोज़ख बन चुका है। कोचिंग संस्थानों की मनमानी और बेतहाशा दबाव ने बच्चों से उनका बचपन छीन लिया है। माता-पिता अपनी जमा-पूंजी झोंककर बच्चों को यहां भेजते हैं, और बदले में उन्हें मिलता है—अत्यधिक तनाव, अकेलापन, अवसाद और कभी-कभी मौत। आत्महत्या की बढ़ती घटनाएँ सिर्फ एक संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित लूटतंत्र का परिणाम हैं।
संवाददाता: आपने कोचिंग माफिया और सरकारी निष्क्रियता की बात की। क्या कोचिंग रेगुलेशन बिल इस स्थिति को सुधार सकता था?
अख्तर खान अकेला: यह बिल कागजों में तो बना, लेकिन कोचिंग लॉबी के सामने सरकारें घुटने टेक चुकी हैं। कांग्रेस और भाजपा, दोनों की मिलीभगत के चलते यह बिल विधानसभा में प्रवर समिति के हवाले कर दिया गया और वहीं दफन हो गया। कोचिंग संचालकों की ताकत इतनी है कि वे सियासत को अपनी उंगलियों पर नचा रहे हैं। विज्ञापनों की मोटी कमाई के चलते अख़बार भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।
संवाददाता: क्या कोर्ट ने इस मामले में कोई सख्त कदम उठाया है?
अख्तर खान अकेला: राजस्थान हाईकोर्ट ने 2016 में इस मुद्दे पर स्वप्रेरित संज्ञान लिया था। अब तक 65 से ज्यादा निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी इन पर अमल नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में एक नेशनल टास्क फोर्स बनाने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। लेकिन कोटा और सीकर में इसे लागू करने की हिम्मत किसी में नहीं। प्रशासन बच्चों के साथ लंच कर फोटो खिंचवाने तक सीमित है, लेकिन कोचिंग संस्थानों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता।
संवाददाता: कोचिंग संस्थानों के इस बेतहाशा दबाव का छात्रों की मानसिक स्थिति पर क्या असर हो रहा है?
अख्तर खान अकेला: बच्चे रोबोट बन चुके हैं। पढ़ाई के अलावा उन्हें कुछ भी सोचने-समझने का वक्त नहीं दिया जाता। 12-14 घंटे की पढ़ाई, डमी एडमिशन के नाम पर स्कूली शिक्षा का मज़ाक, और लगातार रिजल्ट का दबाव—इन सबने एक संपूर्ण पीढ़ी को मानसिक रूप से अस्थिर कर दिया है। आत्मविश्वास की जगह डर, प्रेरणा की जगह हताशा, और सपनों की जगह मौत की सोच ने ले ली है।
संवाददाता: कोटा शहर का परिदृश्य भी बदला है। पहले यह शिक्षा का केंद्र था, अब प्रॉपर्टी डीलरों और हॉस्टलों का गढ़ बन गया है।
अख्तर खान अकेला: कोटा अब एक कब्रिस्तान जैसा नजर आता है—जहाँ हर गली में हॉस्टल, हर नुक्कड़ पर पीजी, और हर दीवार पर कोचिंग के विज्ञापन हैं। मकान मालिक, प्रॉपर्टी डीलर, और कोचिंग संचालक करोड़ों में खेल रहे हैं, लेकिन छात्रों और मध्यम वर्गीय परिवारों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। शिक्षा एक व्यवसाय बन गई है, और इसमें बड़े-बड़े सियासी नेता, बिल्डर, और कोचिंग माफिया शामिल हैं।
संवाददाता: इस समस्या का समाधान क्या हो सकता है?
अख्तर खान अकेला: पहला कदम है कोचिंग रेगुलेशन बिल को सख्ती से लागू करना। कोचिंग संस्थानों के लिए पढ़ाई के घंटे तय किए जाएं, फीस को नियंत्रित किया जाए, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए और छात्रों के लिए हेल्पलाइन चलाई जाए। दूसरे, स्कूली शिक्षा को पुनर्जीवित करना होगा—डमी एडमिशन की परंपरा खत्म करनी होगी और स्कूलों में ही मजबूत शिक्षण व्यवस्था स्थापित करनी होगी। तीसरा, प्रशासन को अपनी निष्क्रियता छोड़नी होगी और हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा।
संवाददाता: क्या आपको लगता है कि सरकार या प्रशासन इसमें गंभीरता दिखाएंगे?
अख्तर खान अकेला: जब तक कोचिंग लॉबी के खिलाफ सख्त राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई जाती, तब तक कुछ नहीं बदलेगा। हमें शिक्षा को व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा के रूप में देखना होगा। नहीं तो आने वाले वर्षों में हम सिर्फ आंकड़े गिनते रह जाएंगे—"आज फिर एक और छात्र ने आत्महत्या कर ली।"
संवाददाता: आपका समय देने के लिए धन्यवाद, अख्तर खान अकेला जी। आशा है कि यह आवाज़ ऊपर तक पहुंचेगी।
अख्तर खान अकेला: धन्यवाद। उम्मीद है कि बदलाव आएगा, लेकिन उसके लिए इच्छाशक्ति और सख्त कदम जरूरी हैं।

विज्ञापन के नीचे दबकर रह जाती है कोचिंग छात्रों की असली समस्या

विज्ञापन के नीचे दबकर रह जाती है कोचिंग छात्रों की असली समस्या
कोटा मार्च। कुछ भी तो नहीं किया ऐ हुकूमत तुमने हम बच्चों के लिये, फुल पेज विज्ञापन में चुप हैं अखबार, कोचिंग रेगुलेशन बिल रोक दिया तुमने, यूँ ही हमें मरता हुआ देखने के लियें, जी हां कोटा में यही कुछ आवाज़ है, कोचिंग की मनमानियों के बोझ तले दबे बचवहॉं की, आज भी जवाहर नगर कोटा में रहकर कोचिंग कर रहे बिहार के मासूम की आत्महत्या से मौत की खबर आत्मा को झकझोर देने वाली, कलेक्टर एस पी के साथ के खाने, इनके मोटिवेशन खामोश हो गए , तो मुख्यमंत्री राजस्थान भजन लाल जी का कोचिंग रेगुलेशन बिल , कोचिंग दबाव में कोंग्रेस भाजपा की एकता के आगे घुटनों के बल गिर गया, कोटा सीकर सहित , राजस्थान के कोचिंगों पर लगाम लगाने का कोचिंग रेगुलेशन बिल का सपना धरा का धरा रह गया, जबकि दस वर्षों से राजस्थान हाईकोर्ट में सो मोटो संज्ञान में कल 25 मार्च की सुनवाई भी आश्वासन , उम्मीद के नाम रही, , ,मुख्यमंत्री भजन लाल भी , पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा सिंधिया की तरह इस मामले में फेल्योर साबित हुए , वोह तो थोड़ी बहुत गर्माहट , राजस्थान हाईकोर्ट में विचाराधीन , सो मोटो , स्व प्रेरित प्रसंज्ञान में चल रही , रिट में दिए जा रहे आदेश निर्देशों के तहत चल रही है , जिसका प्रशासन पर ,, कोचिंग पर दबाव है , हाल ही में सुप्रीमकोर्ट ने , उच्च शिक्षण संस्थानों में ख़ुदकुशी रोकने के लिए नेशनल टास्कफ़ोर्स बनाने के निर्देश दिए है , ,कॉलेज में आत्महत्याओं को लेकर , सुप्रीमकोर्ट ने कहा है के ऐसे वक़्त में शिक्षण संस्थानों को , माता पिता की भूमिका निभाना होगी , इसके लिए सुप्रीमकोर्ट ने , एक कमेटी भी गठन की है साथ ही वर्ष 2023 में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों की शिकायत के आधार पर , एफ आई आर दर्ज करने के आदेश जारी किये है , कोटा ,, सीकर, राजस्थान के कोचिंग , स्कूली शिक्षण संस्थाओं में भी ऐसे आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट , या राजस्थान सरकार नज़ीर बनाकर लागू क्यों नहीं करवा सकता , ,
देश भर के कोचिंग संस्थानों के महा माया जाल से आज़ादी की जंग के इन्तिज़ार में बैठे , छात्र , छात्राओं , अभिभावकों , समाजसेवकों को , राजस्थान विधानसभा द्वारा कोचिंग नियंत्रण के लिए बनाया गया बिल , बिना पारित किये , प्रवर समिति को भेजे जाने से बढ़ा झटका लगा है , देश में सियासी दलालों के जानकारों ने इस मामले में पहले ही आशंका व्यक्त की थी, की कोचिंग ताक़त के आगे सियासत नतमस्तक रहेगी और हुआ भी यही , देश भर के कोचिंग की व्यवस्था तो अपनी जगह है , लेकिन राजस्थान में सीकर और कोटा कोचिंग का रूहझान अव्वलीन होने पर , कोचिंग गुरुओं की जो मनमानी हुई , उससे देश भर के बच्चे प्रभावित हुए , उनका जन जीवन अस्त व्यस्त होने लगा , डिप्रेशन की समस्या बढ़ी , स्कूली शिक्षा तो मृतप्राय हो गई , स्कूलों ने भी समझौता कर डमी एडमिशन के नाम पर खूब मज़े किये , नतीजा यह रहा के , मेरिट की प्रतिस्पर्धा के बोझ तले , बच्चों का बचपन खत्म हुआ , उम्मीदें टूटने लगीं और , फिर आत्महत्याओं का दौर डिप्रेशन की समस्याएं , स्कूली शिक्षा का रसातल काल शुरू हुआ , लगातार बढ़ रही आत्महत्याओं की खबरों के दबाव में , डेमेज कंट्रोल का प्रयास हुआ , लेकिन राजस्थान की हायकोर्ट ने वर्ष 2016 में सो मोटो , स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेकर सख्त रुख दिखाया और सरकार को , चेतावनी दी , सुझाव दिए , सरकार के मुख्यमंत्री पद पर कार्यरत पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा सिंधिया ने घोषणा की के हम कोचिंग को नियंत्रित करने , उन्हें मनमानी से रोकने और बच्चों को डिप्रेशन ,, आत्महत्या से बचाने के लिए कारगर क़दम उठाने के साथ , कोचिंग नियंत्रण क़ानून बना रहे हैं , मुख्यमंत्री वसुंधरा सिंधिया का कार्यकाल खत्म हुआ ,, कोचिंग सरपरस्तों ने वसुंधरा का सियासी वुजूद ही , ज़ीरो करने की कोशिशें शुरू कर दीं ,, फिर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक जी गहलोत का नंबर था , हायकोर्ट के आदेश का दबाव था , उन्होंने भी घोषणा की हम कोचिंग को रेगुलेट करेंगे , नियंत्रित ,करेंगे आत्महत्याओं पर हमे अफ़सोस है , लेकिन उन्होंने भी वही दिखावा किया और कोचिंग संस्थानों की जीत हुई , फिर केंद्र सरकार ने एक नीति फेंक दी , वोह भी टांय टांय फिस्स , यानी , चककरबाज़ी और दिखावे का दौर चलता रहा , कोचिंग अज़गर बनकर स्कूली शिक्षा को , बच्चों के बचपन , स्कूली खेलकूद , अनुशासन को निगलते रहे , और नतीजा ,डिप्रेशन , आत्महत्या , आपराधिकरण की तरफ बचपन का रुख होता चला गया ,, राजस्थान हायकोर्ट ने स्व प्रेरित दर्ज जनहित याचिका में , कोचिंग और छात्र छात्राओं की समस्याओं को जाना , जिला प्रशासन के लचरपन को देखा , ,अख़बारों के भ्रामक विज्ञापनों को समझा,बच्चों पर अनावश्यक घंटो पढ़ाई का बोझ , प्रतिसपर्धा के माहौल में , उनके बचपन छीनने की प्रवृत्ति को जाना , ,समझा और राजस्थान सरकार सहित सभी कोचिंग को पक्षकार बनाकर उन्हें उनका पक्ष रखने का अवसर दिया , ताज्जुब है के वर्ष 2016 से चल रही इस स्व प्रेरित प्रसंज्ञान याचिका में राजस्थान हायकोर्ट ने न्याय मित्र भी बनाये , कोचिंग और छात्र छात्रों के डिप्रेशन , प्रबंधन के सभी पहलुओं को जाना , समझा और इन दस सालों के अंतराल में ,, हायकोर्ट ने 65 से भी अधिक आदेश ,, निर्देश , नीतियां , सुझाव जारी किये , कलेक्टर्स , पुलिस अधीक्षक को बुलाकर हालात जाने , लेकिन कोचिंग तो कोचिंग ठहरे , जिला स्तर पर नीतियां बनीं , कमेटियां बनीं , राजस्थान सरकार ने कमेटी भेजी ,और फिर भजन लाल शर्मा मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार ने , कोचिंग नियंत्रण क़ानून को विधानसभा में पेश कर दिया , उम्मीद थी , कुछ तो होगा , लेकिन दावेदारों का कहना था , छोड़िये जनाब यह कोचिंगों के खिलाफ मामला है , ऐसे नहीं चलेगा अभी देखिये , सब मटियामेट होने वाला है , और हुआ भी यही , कोचिंग नियंत्रण के सभी दावे धरे रह गए , कांग्रेस भाजपा के सभी नेता , मंत्री , पूर्व मंत्री एक जुट हो गए , नतीजा कोचिंग नियंत्रण की उम्मीद , टूट गई और यह बिल बिना पारित हुए , विधानसभा स्थगित होने के दिन ,, प्रवर समिति को भेजने की घोषणा कर दी गई , स्कूलों के हालात तो सभी देख रहे हैं , स्कूली शिक्षा खत्म हो गई है , स्कूल रो रहे हैं , कुछ स्कूलों ने कोचिंग द्वारा स्कूली व्यवस्था के तहत घंटों पढ़ाई का मुद्दा उठाया , एक छात्र एक बार में एक ही जगह उपस्थित रहे , स्कूली टाइम के बाद ही कोचिंग व्यवस्था हो , तो ऐसी आवाज़ उठाने वालों को , केंद्र माध्यमिक शिक्षा बोर्ड , राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की आकस्मिक जांच के बाद , सबक़ मिल गया , जबकि ,, कोचिंग में स्कूली शिक्षा की तरह , स्कूली दक्ष ट्रेंड शिक्षकों द्वारा शिक्षा नहीं देकर , तनाव के हालातों में पढ़ाई करने की व्यवस्था पर , केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड , राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कोई आवाज़ नहीं उठाई , कोई जांच व्यवस्था नहीं की , कोटा कोचिंग को सभी जानते है , यहां बढ़ी बढ़ी बिल्डिंगे है , कोचिंग साम्राज्य है ,, कोचिंग गुरुओं के एक इशारे पर प्रॉपर्टी डीलर अफवाहें फैलाकर , करोड़ों करोड़ रूपये प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करवा देते हैं , वैसे तो कोटा के कोचिंग को कोई नुकसान नहीं है , सब्ज़ बाग दिखाकर कोचिंग मालिकों ने तो अपनी बिल्डिंग प्रोपर्टियां बना ली हैं , पार्टनर्स बना लिए है , अलग अलग राज्यों में विकेन्द्रीकरण कर व्यवस्थाएं कर ली हैं , मरण अगर है तो कोटा में मिडिल क्लास लोगों का है जिन्होंने ,, स्टूडेंट के लालच में कई मंज़िला ,, कई सो कमरों के हॉस्टल , मेस बना ली हैं , पी जी बना लिए हैं , लेकिन विकेन्द्रीकरण होने के कारण स्टूडेंट अलग अलग राज्यों में रुक गए है , दूसरे यहां जिला प्रशासन द्वारा बार बार सकारात्मक माहौल बनाने के प्रयास करने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पा रहे हैं , अब कोचिंग रेगुलेशन में , स्कूलों से अलग शिक्षा , पांच घंटे पढ़ाई , कोचिंग पहले छोड़ने पर फीस वापसी , व्यवस्थाएं , अवकाश की समय सीमाएँ , नियम क़ायदे क़ानून से , कोचिंग बंदिशों में बंधना नहीं चाहते इसलिए ,, हायकोर्ट के क़रीब 65 आदेशों के बाद भी राजस्थान विधानसभा में कोचिंग बिल पेश तो हुआ ,लेकिन कांग्रेस भाजपा गठबंधन के साथ ही , एक ही दिन में विधानसभा स्थगित और कोचिंग बिल ,, प्रवर समिति के हवाले के साथ , उसका ढक्क्न बंद हो गया ,, ताज्जुब है ,, के राजस्थान में तीन मुख्यमंत्री वसुंधरा सिंधिया , अशोक गहलोत , और भजनलाल जी अभी तक कई साल गुज़रने पर भी कोचिंग बिल नहीं पारित करवा पाए ,, हाईकोर्ट सो मोटो प्रसंज्ञान के बाद कई जजों के बदलने , सो से भी अधिक सुनवाई के बाद , पेंसठ अलग अलग आदेश ,, निर्देशों के बाद भी ,, कोचिंग व्यवस्था में सुधार नहीं आया है , अख़बार तो फुल पेज विज्ञापन के पार्टनर है , जबकि सियासी लोग भी एडमिशन छूट , फीस माफ़ी , रियायतें और निजी कार्यों की मदद , इलेक्शन मदद , सहित कई मामलों में शामिल होने से , जी हुज़ूरी में हैं , ,राहुल जी आएं तो यहां , मुख्यमंत्री आएं तो यहां , मंत्री आएं तो यहां , योग हो तो इनके ज़रिये , अपराध हो जाए , मर्डर हो जाए तो अपराधी को पकड़ने पर इनाम की घोषणा कोचिंग गुरुओं की तरफ से ना जाने क्या क्या , खेर कोरोना में कोचिंग मदद की भूमिका लाजवाब रही , , मददगार रही , लेकिन कोचिंग को सकारात्मक रुख बनाना होगा , खुद भी कमाए , कोटा के मध्यमवर्गीय लोगों के लिए भी रोज़गार के अवसर फिर से शुरू करवाए , छात्र छात्राओं में प्रतिसपर्धा की जगह , मनोवैज्ञानिक तरीके से , पारिवारिक माहौल में उनका पालन पोषण करते हुए , उन्हें आगे बढ़ाना चाहिए , यूँ तो कोटा में कोचिंग में पढ़े हुए किसी भी स्टूडेंट अधिकारी को , कोटा में किसी भी सरकारी पद पर नियुक्त नहीं करना चाहिए , क्योंकि कई चीज़े प्रभावित होती है , लेकिन कोटा कलेक्टर , पुलिस अधीक्षक ने , कोटा के कोचिंग के छात्र छात्राओं के साथ बैठकर रोज़ मर्रा नहीं तो एक दो दिन बीच , अपन सारा प्रशासनिक कार्य छोड़कर खाना खाया , उन्हें मोटिवेट किया , लेकिन इन सब के बावजूद भी कोचिंग को , क़ानून की बंदिशों में बाँध कर अगर नियम क़ायदे नहीं बनाये तो कोचिंग फिर कोचिंग नहीं , अराजक व्यवस्था का हिस्सा कहलायेंगे , इसलिए खुद कोचिंग को ही खुद को क़ानून की बंदिशों में बाँधने के लिए स्वप्रेरित व्यवस्था देना होगी , नहीं तो , सरकार का तो आलम दो दशक से देश देख रहा है , हायकोर्ट में दस सालों से पेंसठ आदेश हुए , सैकड़ों सुनवाई हुई , लेकिन ,,कोचिंग नियम अभी भी नहीं बन पाए , हर बार हायकोर्ट में बिल लाने , क़ानून बनाने के वायदे बस वायदे , सी पी जोशी पूर्व शिक्षा मंत्री जब कोचिंग को रेगुलेट नहीं कर सके तो कोई भी नहीं कर सकता , सी पी जोशी ने , शिक्षा मंत्री होते हुए , एक घोषणा की थी , जिसमे उन्होंने कोचिंग रेगुलेट करने , और एम बी बी एस ,, बाहरवीं की प्रतिशत रेंक के आधार पर एडमिशन की घोषणा की थी ,बाद में खुद ही कोचिंग कोचिंग घूमते रहे , और वोह घोषणा हवा हवाई हो गई , ,, अभी कोटा ज़िले के विधायक मदन जी दिलावर खुद शिक्षा मंत्री हैं, लेकिन कोचिंग शक्तियों के मुकाबले बच्चों , स्कूली शिक्षा, अभिभावकों का दर्द ना जाने कोई वाली कहावत यहां , लोकसभा अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र में भी चरितार्थ सी लग रही है जिसका एक ही इलाज कोचिंग रेगुलेशन नियंत्रण क़ानून, स्कूली शिक्षा को पुनर्जीवित करने का सख्त कानून, ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

 

ऐ मेरी क़ौम (शाम) की उस मुक़द्दस ज़मीन में जाओ जहाँ ख़ुदा ने तुम्हारी तक़दीर में (हुकूमत) लिख दी है और दुशमन के मुक़ाबले पीठ न फेरो (क्योंकि) इसमें तो तुम ख़ुद उलटा घाटा उठाओगे

 ऐ मेरी क़ौम (शाम) की उस मुक़द्दस ज़मीन में जाओ जहाँ ख़ुदा ने तुम्हारी तक़दीर में (हुकूमत) लिख दी है और दुशमन के मुक़ाबले पीठ न फेरो (क्योंकि) इसमें तो तुम ख़ुद उलटा घाटा उठाओगे (21)
वह लोग कहने लगे कि ऐ मूसा इस मुल्क में तो बड़े ज़बरदस्त (सरकश) लोग रहते हैं और जब तक वह लोग इसमें से निकल न जाए हम तो उसमें कभी पॉव भी न रखेंगे हाँ अगर वह लोग ख़ुद इसमें से निकल जाए तो अलबत्ता हम ज़रूर जाएगे (22)
(मगर) वह आदमी (यूशा क़लिब) जो ख़ुदा का ख़ौफ़ रखते थे और जिनपर ख़ुदा ने ख़ास अपना फ़ज़ल (करम) किया था बेधड़क बोल उठे कि (अरे) उनपर हमला करके (बैतुल मुक़दस के फाटक में तो घुस पड़ो फिर देखो तो यह ऐसे बोदे हैं कि) इधर तुम फाटक में घुसे और (ये सब भाग खड़े हुए और) तुम्हारी जीत हो गयी और अगर सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखो (23)
वह कहने लगे एक मूसा (चाहे जो कुछ हो) जब तक वह लोग इसमें हैं हम तो उसमें हरगिज़ (लाख बरस) पॉव न रखेंगे हाँ तुम जाओ और तुम्हारा ख़ुदा जाए ओर दोनों (जाकर) लड़ो हम तो यहीं जमे बैठे हैं (24)
तब मूसा ने अर्ज़ की ख़ुदावन्दा तू ख़ूब वाकि़फ़ है कि अपनी ज़ाते ख़ास और अपने भाई के सिवा किसी पर मेरा क़ाबू नहीं बस अब हमारे और उन नाफ़रमान लोगों के दरमियान जुदाई डाल दे (25)
हमारा उनका साथ नहीं हो सकता (ख़ुदा ने फ़रमाया) (अच्छा) तो उनकी सज़ा यह है कि उनको चालीस बरस तक की हुकूमत नसीब न होगा (और उस मुद्दते दराज़ तक) यह लोग (मिस्र के) जंगल में सरगरदा रहेंगे तो फिर तुम इन बदचलन बन्दों पर अफ़सोस न करना (26)
(ऐ रसूल) तुम इन लोगों से आदम के दो बेटों (हाबील, क़ाबील) का सच्चा क़स्द बयान कर दो कि जब उन दोनों ने ख़ुदा की दरगाह में नियाज़ें चढ़ाई तो (उनमें से) एक (हाबील) की (नज़र तो) क़ुबूल हुयी और दूसरे (क़ाबील) की नज़र न क़ुबूल हुयी तो (मारे हसद के) हाबील से कहने लगा मैं तो तुझे ज़रूर मार डालूंगा उसने जवाब दिया कि (भाई इसमें अपना क्या बस है) ख़ुदा तो सिर्फ परहेज़गारों की नज़र कु़बूल करता है (27)
अगर तुम मेरे क़त्ल के इरादे से मेरी तरफ़ अपना हाथ बढ़ाओगे (तो ख़ैर बढ़ाओ) (मगर) मैं तो तुम्हारे क़त्ल के ख़्याल से अपना हाथ बढ़ाने वाला नहीं (क्योंकि) मैं तो उस ख़ुदा से जो सारे जहाँन का पालने वाला है ज़रूर डरता हॅू (28)
मैं तो ज़रूर ये चाहता हॅू कि मेरे गुनाह और तेरे गुनाह दोनों तेरे सर हो जाए तो तू (अच्छा ख़ासा) जहन्नुमी बन जाए और ज़ालिमों की तो यही सज़ा है (29)
फिर तो उसके नफ़्स ने अपने भाई के क़त्ल पर उसे भड़का ही दिया आखि़र उस (कम्बख़्त ने) उसको मार ही डाला तो घाटा उठाने वालों में से हो गया (30)

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