तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
10 अगस्त 2026
कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी हिन्दी साहित्य विभूषण तथा कवि योगीराज योगी काव्य कला निधि सम्मान से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई..
जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेगें और तुमको बहुत अच्छी इज़्ज़त की जगह पहुँचा देंगे
जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से
बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेगें और तुमको
बहुत अच्छी इज़्ज़त की जगह पहुँचा देंगे (31)
और ख़ुदा ने जो तुममें से एक दूसरे पर तरजीह दी है उसकी हवस न करो
(क्योंकि फ़ज़ीलत तो आमाल से है) मर्दो को अपने किए का हिस्सा है और औरतों
को अपने किए का हिस्सा और ये और बात है कि तुम ख़ुदा से उसके फज़ल व करम की
ख़्वाहिश करो ख़ुदा तो हर चीज़े से वाकि़फ़ है (32)
और माँ बाप (या) और क़राबतदार (ग़रज़) तो शख़्स जो तरका छोड़ जाए हमने
हर एक का (वाली) वारिस मुक़र्रर कर दिया है और जिन लोगों से तुमने मुस्तहकम
{पक्का} एहद किया है उनका मुक़र्रर हिस्सा भी तुम दे दो बेशक ख़ुदा तो हर
चीज़ पर गवाह है (33)
मर्दो का औरतों पर क़ाबू है क्योंकि (एक तो) ख़ुदा ने बाज़ आदमियों
(मर्द) को बाज़ आदमियों (औरत) पर फ़ज़ीलत दी है औेर (इसके अलावा) चूकी
मर्दो ने औरतों पर अपना माल ख़र्च किया है बस नेक बख़्त बीवियाँ तो शौहरों
की ताबेदारी करती हैं (और) उनके पीठ पीछे जिस तरह ख़ुदा ने हिफ़ाज़त की वह
भी (हर चीज़ की) हिफ़ाज़त करती है और वह औरतें जिनके नाफरमान सरकश होने का
तुम्हें अन्देशा हो तो पहले उन्हें समझाओ और (उसपर न माने तो) तुम उनके साथ
सोना छोड़ दो और (इससे भी न माने तो) मारो मगर इतना कि खू़न न निकले और
कोई अज़ो न (टूटे) बस अगर वह तुम्हारी मुतीइ हो जाए तो तुम भी उनके नुक़सान
की राह न ढूढो ख़ुदा तो ज़रूर सबसे बरतर बुजु़र्ग है (34)
और ऐ हुक्काम (वक़्त) अगर तुम्हें मियाँ बीवी की पूरी नाइत्तेफ़ाक़ी का
तरफै़न से अन्देशा हो तो एक सालिस (पन्च) मर्द के कुनबे में से एक और
सालिस औरत के कुनबे में मुक़र्रर करो अगर ये दोनों सालिस दोनों में मेल
करा देना चाहें तो ख़ुदा उन दोनों के दरमियान उसका अच्छा बन्दोबस्त कर
देगा ख़ुदा तो बेशक वाकि़फ व ख़बरदार है (35)
और ख़ुदा ही की इबादत करो और किसी को उसका शरीक न बनाओ और माँ बाप और
क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों और रिश्तेदारों पड़ोसियों और अजनबी
पड़ोसियों और पहलू में बैठने वाले मुसाहिबों और पड़ोसियों और ज़र ख़रीद
लौन्डी और गुलाम के साथ एहसान करो बेशक ख़ुदा अकड़ के चलने वालों और
शेख़ीबाज़ों को दोस्त नहीं रखता (36)
ये वह लोग हैं जो ख़ुद तो बुख़्ल करते ही हैं और लोगों को भी बुख़्ल का
हुक्म देते हैं और जो माल ख़ुदा ने अपने फ़ज़ल व (करम) से उन्हें दिया है
उसे छिपाते हैं और हमने तो कुफ़राने नेअमत करने वालों के वास्ते सख़्त
जि़ल्लत का अज़ाब तैयार कर रखा है (37)
और जो लोग महज़ लोगों को दिखाने के वास्ते अपने माल ख़र्च करते हैं और न
खुदा ही पर ईमान रखते हैं और न रोजे़ आख़ेरत पर ख़ुदा भी उनके साथ नहीं
क्योंकि उनका साथी तो शैतान है और जिसका साथी शैतान हो तो क्या ही बुरा
साथी है (38)
अगर ये लोग ख़ुदा और रोज़े आखि़रत पर ईमान लाते और जो कुछ ख़ुदा ने
उन्हें दिया है उसमें से राहे ख़ुदा में ख़र्च करते तो उन पर क्या आफ़त आ
जाती और ख़ुदा तो उनसे ख़ूब वाकि़फ़ है (39)
ख़ुदा तो हरगिज़ ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं करता बल्कि अगर ज़र्रा
बराबर भी किसी की कोई नेकी हो तो उसको दूना करता है और अपनी तरफ़ से बड़ा
सवाब अता फ़रमाता है (40)
09 अगस्त 2026
कोटा में इमाम अहमद रज़ा कॉन्फ्रेंस का आयोजन, उलेमा ने दिया तालीम और अमन का संदेश
खि़लवत कर चुका है और बीवियां तुमसे (निकाह के वक़्त नक़फ़ा वगै़रह का) पक्का क़रार ले चुकी हैं
खि़लवत कर चुका है और बीवियां तुमसे (निकाह के वक़्त नक़फ़ा वगै़रह का) पक्का क़रार ले चुकी हैं (21)
और जिन औरतों से तुम्हारे बाप दादाओं से (निकाह) जिमा (अगरचे जि़ना)
किया हो तुम उनसे निकाह न करो मगर जो हो चुका (वह तो हो चुका) वह बदकारी और
ख़ुदा की नाख़ुशी की बात ज़रूर थी और बहुत बुरा तरीक़ा था (22)
(मुसलमानों हसबे जे़ल) औरतें तुम पर हराम की गयी हैं तुम्हारी माएं
(दादी नानी वगै़रह सब) और तुम्हारी बेटियाँ (पोतियाँ ) नवासियाँ (वगै़रह)
और तुम्हारी बहनें और तुम्हारी फुफियाँ और तुम्हारी ख़ालाएं और भतीजियाँ
और भंजियाँ और तुम्हारी वह माएं जिन्होंने तुमको दूध पिलाया है और तुम्हारी
रज़ाई (दूध शरीक) बहनें और तुम्हारी बीवीयों की माँए और वह (मादर जि़लो)
लड़कियां जो तुम्हारी गोद में परवरिश पा चुकी हो और उन औरतों (के पेट) से
(पैदा हुयी) हैं जिनसे तुम हमबिस्तरी कर चुके हो हाँ अगर तुमने उन बीवियों
से (सिर्फ निकाह किया हो) हमबिस्तरी न की तो अलबत्ता उन मादरजि़लों
(लड़कियों से) निकाह (करने में) तुम पर कुछ गुनाह नहीं है और तुम्हारे
सुलबी लड़को (पोतों नवासों वगै़रह) की बीवियाँ (बहुए) और दो बहनों से एक
साथ निकाह करना मगर जो हो चुका (वह माफ़ है) बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला
मेहरबान है (23)
और शौहरदार औरतें मगर वह औरतें जो (जिहाद में कुफ़्फ़ार से) तुम्हारे
कब्ज़े में आ जाएं हराम नहीं (ये) ख़ुदा का तहरीरी हुक्म (है जो) तुमपर
(फ़र्ज़ किया गया) है और उन औरतों के सिवा (और औरतें) तुम्हारे लिए जायज़ हैं
बशर्ते कि बदकारी व जि़ना नहीं बल्कि तुम इफ़्फ़त व पाकदामिनी की ग़रज़ से
अपने माल (व मेहर) के बदले (निकाह करना) चाहो हाँ जिन औरतों से तुमने
मुताअ किया हो तो उन्हें जो मेहर मुअय्यन किया है दे दो और मेहर के
मुक़र्रर होने के बाद अगर आपस में (कमों पर) राज़ी हो जाओ तो उसमें तुमपर
कुछ गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा (हर चीज़ से) वाकि़फ़ और मसलेहतों का पहचानने
वाला है (24)
और तुममें से जो शख़्स आज़ाद इफ़्फ़तदार औरतों से निकाह करने की माली
हैसियत से क़ुदरत न रखता हो तो वह तुम्हारी उन मोमिना लौन्डियों से जो
तुम्हारे कब्ज़े में हैं निकाह कर सकता है और ख़ुदा तुम्हारे ईमान से ख़ूब
वाकि़फ़ है (ईमान की हैसियत से तो) तुममें एक दूसरे का हमजिन्स है बस (बे
ताम्मुल) उनके मालिकों की इजाज़त से लौन्डियों से निकाह करो और उनका मेहर
हुस्ने सुलूक से दे दो मगर उन्हीं (लौन्डियो) से निकाह करो जो इफ़्फ़त के
साथ तुम्हारी पाबन्द रहें न तो खुले आम जि़ना करना चाहें और न चोरी छिपे से
आशनाई फिर जब तुम्हारी पाबन्द हो चुकी उसके बाद कोई बदकारी करे तो जो सज़ा
आज़ाद बीवियों को दी जाती है उसकी आधी (सज़ा) लौन्डियों को दी जाएगी (और
लौन्डियों) से निकाह कर भी सकता है तो वह शख़्स जिसको जि़ना में मुब्तिला
हो जाने का ख़ौफ़ हो और सब्र करे तो तुम्हारे हक़ में ज़्यादा बेहतर है और
ख़ुदा बख़्शने वाला मेहरबान है (25)
ख़ुदा तो ये चाहता है कि (अपने) एहकाम तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान कर
दे और जो (अच्छे) लोग तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनके तरीक़े पर चला दे और
तुम्हारी तौबा कु़बूल करे और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाकि़फ़ और हिकमत वाला
है (26)
और ख़़ुदा तो चाहता है कि तुम्हारी तौबा क़ुबूल (27)
करे और जो लोग नफ़सियानी ख़्वाहिश के पीछे पड़े हैं वह ये चाहते हैं कि
तुम लोग (राहे हक़ से) बहुत दूर हट जाओ और ख़ुदा चाहता है कि तुमसे बार में
तख़फ़ीफ़ कर दें क्योंकि आदमी तो बहुत कमज़ोर पैदा किया गया है (28)
ए ईमानवालों आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खा जाया करो लेकिन (हाँ)
तुम लोगों की बाहमी रज़ामन्दी से तिजारत हो (और उसमें एक दूसरे का माल हो
तो मुज़ाएक़ा नहीं) और अपना गला आप घूट के अपनी जान न दो (क्योंकि) ख़ुदा
तो ज़रूर तुम्हारे हाल पर मेहरबान है (29)
और जो शख़्स जोरो ज़ुल्म से नाहक़ ऐसा करेगा (ख़ुदकुशी करेगा) तो (याद
रहे कि) हम बहुत जल्द उसको जहन्नुम की आग में झोंक देंगे यह ख़ुदा के लिये
आसान है (30)
08 अगस्त 2026
नेत्रदान में,ना चेहरे पर आती विकृति, ना आता है रक्त
नेत्रदान में,ना चेहरे पर आती विकृति, ना आता है रक्त
2. नो बैग डे पर,बच्चों ने जाना,मृत्यु के बाद,किन अंगो का होता है दान
शाइन
इंडिया फाउंडेशन के हाडोती संभाग में चल रहे "नो बैग डे" पर नेत्रदान
अंगदान विषय पर कार्यशाला के अंतर्गत, लगातार हर शनिवार राजकीय विद्यालयों
में जागरूकता कार्यशालाएं प्रारंभ है ।
इसी क्रम में आज, राजकीय
उच्च माध्यमिक विद्यालय,देवली अरब रोड के कक्षा 8 से 12 की विद्यार्थियों
के बीच, संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के सदस्यों ने नेत्रदान के महत्व
उपयोगिता और भ्रांतियों के बारे में विस्तार से चर्चा की ।
प्रमुख
वक्ता डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि, नेत्रदान एक ऐसा पुनीत कार्य है जो
मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे के दौरान संपन्न होता है,जिसमें ना किसी तरह से
चेहरे पर कोई विकृति आती है,ना रक्त निकलता है ।
कार्यशाला के
उपरांत प्रधानाध्यापिका महोदया लोपामुद्रा भाटिया ने अपने विचार प्रकट करते
हुए कहा कि, आज की नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को अपने पास में
ना रखते हुए सभी छात्र घर जाकर अपने परिजनों से इस विषय पर जरूर चर्चा
करेंगे । किसी भी तरह की शंका या सवाल आने पर छात्र उनको लिखकर
लायेंगे,जिससे अगले दिन सही जवाब भेजा जा सके।
कार्यशाला के दौरान
विद्यार्थियों से संबंधित विषय पर प्रश्न भी पूछे गए विद्यार्थियों ने सही
जवाब दिए उन्हें शाइन मेडल द्वारा पुरस्कृत किया गया ।