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10 अगस्त 2026

कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी हिन्दी साहित्य विभूषण तथा कवि योगीराज योगी काव्य कला निधि सम्मान से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई..

 

कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी हिन्दी साहित्य विभूषण तथा कवि योगीराज योगी काव्य कला निधि सम्मान से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई.............
त्रिसुगंधि साहित्य, कला एवं संस्कृति संस्थान, उदयपुर की ओर से आयोजित राष्ट्रीय साहित्य सम्मान समारोह एवं राष्ट्रीय अधिवेशन में कोटा से कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी को 'श्रीमती दुर्गा देवी स्मृति हिन्दी साहित्य विभूषण सम्मान ' तथा कवि योगीराज योगी को ' एडवोकेट प्यारे लाल पारख स्मृति काव्य कला निधि सम्मान' प्रदान करते हुए सम्मान राशि, सम्मान - पत्र, श्रीफल भेंट कर पगड़ी एवं उपर्णा पहनाकर कर सम्मानित किया गया।
श्रृंगी ऋषि भवन, अम्बामाता स्कीम, उदयपुर में चार सत्रों में आयोजित इस एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन एवं सम्मान समारोह के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता समाजसेवी राधेश्याम सिखवाल ने की। त्रिसुगंधी संस्था की संस्थापक - अध्यक्ष आशा पाण्डेय ओझा 'आशा' एवं संस्था-महासचिव संजय गुप्ता 'देवेश' के सान्निध्य में विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र कुमार पाणडेय राजेंद्र शर्मा 'मुसाफिर' , आशीष सिसोदिया तथा मनोज सिखवाल थे। समारोह में साहित्य की विभिन्न विधाओं में सृजनरत सत्रह विशिष्ट साहित्यकारों का सम्मान किया गया तथा विभिन्न विधाओं की आठ पुस्तकों का विमोचन हुआ। इन विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता पूर्व विधायक एवं समाजसेवी श्री धर्म नारायण जोशी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं संपादक, बाल वाटिका के सम्पादक डॉ. भैरूलाल गर्ग तथा मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर में उर्दू विभाग के विभागध्यक्ष डॉ. आशीष सिसोदिया ने की। श्री तिलकेश जोशी एवं श्रीमती सुनीता निमिष सिंह ने संयुक्त रूप से संचालन किया। बृजेश मिश्रा ने गणेश वंदना तथा श्रीमती दीपा पंत 'शीतल' ने सस्वर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
संस्था अध्यक्ष आशा पाण्डेय ओझा 'आशा' ने स्वागत उद्बोधन तथा संजय गुप्ता 'देवेश' ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रीय सम्मान समारोह एवं अधिवेशन में स्थानीय एवं राजस्थान एवं प्रवासी राजस्थानी साहित्यकार उपस्थित रहे

जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेगें और तुमको बहुत अच्छी इज़्ज़त की जगह पहुँचा देंगे

 जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेगें और तुमको बहुत अच्छी इज़्ज़त की जगह पहुँचा देंगे (31)
और ख़ुदा ने जो तुममें से एक दूसरे पर तरजीह दी है उसकी हवस न करो (क्योंकि फ़ज़ीलत तो आमाल से है) मर्दो को अपने किए का हिस्सा है और औरतों को अपने किए का हिस्सा और ये और बात है कि तुम ख़ुदा से उसके फज़ल व करम की ख़्वाहिश करो ख़ुदा तो हर चीज़े से वाकि़फ़ है (32)
और माँ बाप (या) और क़राबतदार (ग़रज़) तो शख़्स जो तरका छोड़ जाए हमने हर एक का (वाली) वारिस मुक़र्रर कर दिया है और जिन लोगों से तुमने मुस्तहकम {पक्का} एहद किया है उनका मुक़र्रर हिस्सा भी तुम दे दो बेशक ख़ुदा तो हर चीज़ पर गवाह है (33)
मर्दो का औरतों पर क़ाबू है क्योंकि (एक तो) ख़ुदा ने बाज़ आदमियों (मर्द) को बाज़ आदमियों (औरत) पर फ़ज़ीलत दी है औेर (इसके अलावा) चूकी मर्दो ने औरतों पर अपना माल ख़र्च किया है बस नेक बख़्त बीवियाँ तो शौहरों की ताबेदारी करती हैं (और) उनके पीठ पीछे जिस तरह ख़ुदा ने हिफ़ाज़त की वह भी (हर चीज़ की) हिफ़ाज़त करती है और वह औरतें जिनके नाफरमान सरकश होने का तुम्हें अन्देशा हो तो पहले उन्हें समझाओ और (उसपर न माने तो) तुम उनके साथ सोना छोड़ दो और (इससे भी न माने तो) मारो मगर इतना कि खू़न न निकले और कोई अज़ो न (टूटे) बस अगर वह तुम्हारी मुतीइ हो जाए तो तुम भी उनके नुक़सान की राह न ढूढो ख़ुदा तो ज़रूर सबसे बरतर बुजु़र्ग है (34)
और ऐ हुक्काम (वक़्त) अगर तुम्हें मियाँ बीवी की पूरी नाइत्तेफ़ाक़ी का तरफै़न से अन्देशा हो तो एक सालिस (पन्च) मर्द के कुनबे में से एक और सालिस औरत के कुनबे में मुक़र्रर करो अगर ये दोनों सालिस दोनों में मेल करा देना चाहें तो ख़ुदा उन दोनों के दरमियान उसका अच्छा बन्दोबस्त कर देगा ख़ुदा तो बेशक वाकि़फ व ख़बरदार है (35)
और ख़ुदा ही की इबादत करो और किसी को उसका शरीक न बनाओ और माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों और रिश्तेदारों पड़ोसियों और अजनबी पड़ोसियों और पहलू में बैठने वाले मुसाहिबों और पड़ोसियों और ज़र ख़रीद लौन्डी और गुलाम के साथ एहसान करो बेशक ख़ुदा अकड़ के चलने वालों और शेख़ीबाज़ों को दोस्त नहीं रखता (36)
ये वह लोग हैं जो ख़ुद तो बुख़्ल करते ही हैं और लोगों को भी बुख़्ल का हुक्म देते हैं और जो माल ख़ुदा ने अपने फ़ज़ल व (करम) से उन्हें दिया है उसे छिपाते हैं और हमने तो कुफ़राने नेअमत करने वालों के वास्ते सख़्त जि़ल्लत का अज़ाब तैयार कर रखा है (37)
और जो लोग महज़ लोगों को दिखाने के वास्ते अपने माल ख़र्च करते हैं और न खुदा ही पर ईमान रखते हैं और न रोजे़ आख़ेरत पर ख़ुदा भी उनके साथ नहीं क्योंकि उनका साथी तो शैतान है और जिसका साथी शैतान हो तो क्या ही बुरा साथी है (38)
अगर ये लोग ख़ुदा और रोज़े आखि़रत पर ईमान लाते और जो कुछ ख़ुदा ने उन्हें दिया है उसमें से राहे ख़ुदा में ख़र्च करते तो उन पर क्या आफ़त आ जाती और ख़ुदा तो उनसे ख़ूब वाकि़फ़ है (39)
ख़ुदा तो हरगिज़ ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं करता बल्कि अगर ज़र्रा बराबर भी किसी की कोई नेकी हो तो उसको दूना करता है और अपनी तरफ़ से बड़ा सवाब अता फ़रमाता है (40)

09 अगस्त 2026

कोटा में इमाम अहमद रज़ा कॉन्फ्रेंस का आयोजन, उलेमा ने दिया तालीम और अमन का संदेश

 

कोटा में इमाम अहमद रज़ा कॉन्फ्रेंस का आयोजन, उलेमा ने दिया तालीम और अमन का संदेश
कोटा। वल्लभ नगर स्थित दरगाह हज़रत जंगलीशाह बाबा में रविवार को इमाम अहमद रज़ा कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ। कार्यक्रम दारुल उलूम फैज़ानूर्रसूल, रज़ा चौक, साजीदेहड़ा, कोटा के तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम सय्यद तफउजुर्रहमान साहब, इमाम शाही जामा मस्जिद, चन्द्रघाटा, कोटा की सरपरस्ती में आयोजित किया गया। दारुल उलूम फैज़ानूर्रसूल के हज़रत अल्लामा मौलाना हाफिज व कारी मोहम्मद इदरीस रज़ा साहब ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न राज्यों से आए उलेमा-ए-किराम और इस्लामी विद्वानों ने शिरकत की। उन्होंने इमाम अहमद रज़ा खान के जीवन, शिक्षा, धार्मिक सेवाओं और समाज के लिए दिए गए संदेश पर विचार रखे। कॉन्फ्रेंस में मेवात, हरियाणा के खतीब-ए-मिल्लत मुफ्ती इस्हाक साहब, मौलाना फ़ज़लेहक, मौलाना अलाउद्दीन अशरफ़ी, मुफ़्ती यामीन, मुफ़्ती सलीम, मौलाना रौनक़, हज़रत अल्लामा मौलाना अज़हर आलम अशरफ़ी, हज़रत अल्लामा मौलाना इरशाद रज़ा, कारी इकबाल निज़ामी, मौलाना नौशाद आलम और यूसुफ़ रज़ा सहित अन्य उलेमा मौजूद रहे। तालीम को बताया तरक्की का जरिया खतीब-ए-मिल्लत मुफ्ती इस्हाक साहब ने कहा कि आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान का पैग़ाम इल्म और तालीम को बढ़ावा देना था। उन्होंने कहा कि ऐसी तालीम हासिल की जानी चाहिए, जिससे ज्ञान के साथ अच्छे अख़लाक़, अनुशासन, देश से मोहब्बत और इंसानियत की सेवा का जज़्बा पैदा हो। शिक्षित और नेक किरदार युवा ही समाज और मुल्क की असली ताकत बन सकता है। मौलाना हाफिज व कारी मोहम्मद इदरीस रज़ा साहब ने बताया कि इमाम आला हज़रत के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए करीब 100 बच्चियों को दीनी तालीम दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा के साथ उनकी तरबियत पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई। इसके बाद उर्स-ए-आला हज़रत के कुल शरीफ का आयोजन हुआ। इसमें देश में अमन-ओ-अमान, खुशहाली और अच्छी बारिश के लिए दुआ की गई।

खि़लवत कर चुका है और बीवियां तुमसे (निकाह के वक़्त नक़फ़ा वगै़रह का) पक्का क़रार ले चुकी हैं

 

खि़लवत कर चुका है और बीवियां तुमसे (निकाह के वक़्त नक़फ़ा वगै़रह का) पक्का क़रार ले चुकी हैं (21)
और जिन औरतों से तुम्हारे बाप दादाओं से (निकाह) जिमा (अगरचे जि़ना) किया हो तुम उनसे निकाह न करो मगर जो हो चुका (वह तो हो चुका) वह बदकारी और ख़ुदा की नाख़ुशी की बात ज़रूर थी और बहुत बुरा तरीक़ा था (22)
(मुसलमानों हसबे जे़ल) औरतें तुम पर हराम की गयी हैं तुम्हारी माएं (दादी नानी वगै़रह सब) और तुम्हारी बेटियाँ (पोतियाँ ) नवासियाँ (वगै़रह) और तुम्हारी बहनें और तुम्हारी फुफियाँ और तुम्हारी ख़ालाएं और भतीजियाँ और भंजियाँ और तुम्हारी वह माएं जिन्होंने तुमको दूध पिलाया है और तुम्हारी रज़ाई (दूध शरीक) बहनें और तुम्हारी बीवीयों की माँए और वह (मादर जि़लो) लड़कियां जो तुम्हारी गोद में परवरिश पा चुकी हो और उन औरतों (के पेट) से (पैदा हुयी) हैं जिनसे तुम हमबिस्तरी कर चुके हो हाँ अगर तुमने उन बीवियों से (सिर्फ निकाह किया हो) हमबिस्तरी न की तो अलबत्ता उन मादरजि़लों (लड़कियों से) निकाह (करने में) तुम पर कुछ गुनाह नहीं है और तुम्हारे सुलबी लड़को (पोतों नवासों वगै़रह) की बीवियाँ (बहुए) और दो बहनों से एक साथ निकाह करना मगर जो हो चुका (वह माफ़ है) बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (23)

और शौहरदार औरतें मगर वह औरतें जो (जिहाद में कुफ़्फ़ार से) तुम्हारे कब्ज़े में आ जाएं हराम नहीं (ये) ख़ुदा का तहरीरी हुक्म (है जो) तुमपर (फ़र्ज़ किया गया) है और उन औरतों के सिवा (और औरतें) तुम्हारे लिए जायज़ हैं बशर्ते कि बदकारी व जि़ना नहीं बल्कि तुम इफ़्फ़त व पाकदामिनी की ग़रज़ से अपने माल (व मेहर) के बदले (निकाह करना) चाहो हाँ जिन औरतों से तुमने मुताअ किया हो तो उन्हें जो मेहर मुअय्यन किया है दे दो और मेहर के मुक़र्रर होने के बाद अगर आपस में (कमों पर) राज़ी हो जाओ तो उसमें तुमपर कुछ गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा (हर चीज़ से) वाकि़फ़ और मसलेहतों का पहचानने वाला है (24)
और तुममें से जो शख़्स आज़ाद इफ़्फ़तदार औरतों से निकाह करने की माली हैसियत से क़ुदरत न रखता हो तो वह तुम्हारी उन मोमिना लौन्डियों से जो तुम्हारे कब्ज़े में हैं निकाह कर सकता है और ख़ुदा तुम्हारे ईमान से ख़ूब वाकि़फ़ है (ईमान की हैसियत से तो) तुममें एक दूसरे का हमजिन्स है बस (बे ताम्मुल) उनके मालिकों की इजाज़त से लौन्डियों से निकाह करो और उनका मेहर हुस्ने सुलूक से दे दो मगर उन्हीं (लौन्डियो) से निकाह करो जो इफ़्फ़त के साथ तुम्हारी पाबन्द रहें न तो खुले आम जि़ना करना चाहें और न चोरी छिपे से आशनाई फिर जब तुम्हारी पाबन्द हो चुकी उसके बाद कोई बदकारी करे तो जो सज़ा आज़ाद बीवियों को दी जाती है उसकी आधी (सज़ा) लौन्डियों को दी जाएगी (और लौन्डियों) से निकाह कर भी सकता है तो वह शख़्स जिसको जि़ना में मुब्तिला हो जाने का ख़ौफ़ हो और सब्र करे तो तुम्हारे हक़ में ज़्यादा बेहतर है और ख़ुदा बख़्शने वाला मेहरबान है (25)
ख़ुदा तो ये चाहता है कि (अपने) एहकाम तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान कर दे और जो (अच्छे) लोग तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनके तरीक़े पर चला दे और तुम्हारी तौबा कु़बूल करे और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाकि़फ़ और हिकमत वाला है (26)
और ख़़ुदा तो चाहता है कि तुम्हारी तौबा क़ुबूल (27)
करे और जो लोग नफ़सियानी ख़्वाहिश के पीछे पड़े हैं वह ये चाहते हैं कि तुम लोग (राहे हक़ से) बहुत दूर हट जाओ और ख़ुदा चाहता है कि तुमसे बार में तख़फ़ीफ़ कर दें क्योंकि आदमी तो बहुत कमज़ोर पैदा किया गया है (28)
ए ईमानवालों आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खा जाया करो लेकिन (हाँ) तुम लोगों की बाहमी रज़ामन्दी से तिजारत हो (और उसमें एक दूसरे का माल हो तो मुज़ाएक़ा नहीं) और अपना गला आप घूट के अपनी जान न दो (क्योंकि) ख़ुदा तो ज़रूर तुम्हारे हाल पर मेहरबान है (29)
और जो शख़्स जोरो ज़ुल्म से नाहक़ ऐसा करेगा (ख़ुदकुशी करेगा) तो (याद रहे कि) हम बहुत जल्द उसको जहन्नुम की आग में झोंक देंगे यह ख़ुदा के लिये आसान है (30)

08 अगस्त 2026

नेत्रदान में,ना चेहरे पर आती विकृति, ना आता है रक्त

 नेत्रदान में,ना चेहरे पर आती विकृति, ना आता है रक्त
2. नो बैग डे पर,बच्चों ने जाना,मृत्यु के बाद,किन अंगो का होता है दान

शाइन इंडिया फाउंडेशन के हाडोती संभाग में चल रहे "नो बैग डे" पर नेत्रदान अंगदान विषय पर कार्यशाला के अंतर्गत, लगातार हर शनिवार राजकीय विद्यालयों में जागरूकता कार्यशालाएं प्रारंभ है ।

इसी क्रम में आज, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय,देवली अरब रोड के कक्षा 8 से 12 की विद्यार्थियों के बीच, संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के सदस्यों ने नेत्रदान के महत्व उपयोगिता और भ्रांतियों के बारे में विस्तार से चर्चा की ।

प्रमुख वक्ता डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि, नेत्रदान एक ऐसा पुनीत कार्य है जो मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे के दौरान संपन्न होता है,जिसमें ना किसी तरह से चेहरे पर कोई विकृति आती है,ना रक्त निकलता है ।

कार्यशाला के उपरांत प्रधानाध्यापिका महोदया लोपामुद्रा भाटिया ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि, आज की नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को अपने पास में ना रखते हुए सभी छात्र घर जाकर अपने परिजनों से इस विषय पर जरूर चर्चा करेंगे । किसी भी तरह की शंका या सवाल आने पर छात्र उनको लिखकर लायेंगे,जिससे अगले दिन सही जवाब भेजा जा सके।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों से संबंधित विषय पर प्रश्न भी पूछे गए विद्यार्थियों ने सही जवाब दिए उन्हें शाइन मेडल द्वारा पुरस्कृत किया गया ।

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