जिन लोगों को हमने किताब (कु़रान) दी है वह लोग उसे इस तरह पढ़ते रहते हैं
जो उसके पढ़ने का हक़ है यही लोग उस पर ईमान लाते हैं और जो उससे इनकार
करते हैं वही लोग घाटे में हैं (121)
बनी इसराईल मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंनं तुम को दी हैं और ये कि मैंने तुमको सारे जहाँन पर फज़ीलत दी (122)
और उस दिन से डरो जिस दिन कोई शख़्स किसी की तरफ से न फिदया हो सकेगा
और न उसकी तरफ से कोई मुआवेज़ा क़ुबूल किया जाएगा और न कोई सिफारिश ही
फायदा पहुचाँ सकेगी, और न लोग मदद दिए जाएँगे (123)
(ऐ रसूल) बनी इसराईल को वह वक़्त भी याद दिलाओ जब इबराहीम को उनके
परवरदिगार ने चन्द बातों में आज़माया और उन्होंने पूरा कर दिया तो खु़दा ने
फरमाया मैं तुमको (लोगों का) पेशवा बनाने वाला हूँ (हज़रत इबराहीम ने)
अजऱ् की और मेरी औलाद में से फरमाया (हाँ मगर) मेरे इस ओहदे पर ज़ालिमों
में से कोई शख़्स फ़ायज़ नहीं हो सकता (124)
(ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब हमने ख़ानए काबा को लोगों के सवाब
और पनाह की जगह क़रार दी और हुक्म दिया गया कि इबराहीम की (इस) जगह को
नमाज़ की जगह बनाओ और इबराहीम व इसमाइल से अहद व पैमान लिया कि मेरे (इस)
घर को तवाफ़ और एतक़ाफ़ और रूकू और सजदा करने वालों के वास्ते साफ सुथरा
रखो (125)
और (ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब इबराहीम ने दुआ माँगी कि ऐ मेरे
परवरदिगार इस (शहर) को पनाह व अमन का शहर बना, और उसके रहने वालों में से
जो खु़दा और रोज़े आखि़रत पर ईमान लाए उसको तरह-तरह के फल खाने को दें
खु़दा ने फरमाया (अच्छा मगर) जो कुफ्र इख़तेयार करेगा उसकी दुनिया में चन्द
रोज़ (उन चीज़ो से) फायदा उठाने दूँगा फिर (आख़ेरत में) उसको मजबूर करके
दोज़ख़ की तरफ खींच ले जाऊँगा और वह बहुत बुरा ठिकाना है (126)
और (वह वक़्त याद दिलाओ) जब इबराहीम व इसमाईल ख़ानाए काबा की बुनियादें
बुलन्द कर रहे थे (और दुआ) माँगते जाते थे कि ऐ हमारे परवरदिगार हमारी (यह
खि़दमत) कु़बूल कर बेशक तू ही (दूआ का) सुनने वाला (और उसका) जानने वाला
है (127)
(और) ऐ हमारे पालने वाले तू हमें अपना फरमाबरदार बन्दा बना और हमारी
औलाद से एक गिरोह (पैदा कर) जो तेरा फरमाबरदार हो, और हमको हमारे हज की
जगहों दिखा दे और हमारी तौबा क़ुबूल कर, बेशक तू ही बड़ा तौबा कु़बूल करने
वाला मेहरबान है (128)
(और) ऐ हमारे पालने वाले मक्के वालों में उन्हीं में से एक रसूल को भेज
जो उनको तेरी आयतें पढ़कर सुनाए और आसमानी किताब और अक़्ल की बातें सिखाए
और उन (के नुफ़ूस) के पाकीज़ा कर दें बेशक तू ही ग़ालिब और साहिबे तदबीर है
(129)
और कौन है जो इबराहीम के तरीक़े से नफरत करे मगर जो अपने को अहमक़ बनाए
और बेशक हमने उनको दुनिया में भी मुन्तखब कर लिया और वह ज़रूर आख़ेरत में
भी अच्छों ही में से होगे (130)
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
28 जून 2026
जिन लोगों को हमने किताब (कु़रान) दी है वह लोग उसे इस तरह पढ़ते रहते हैं जो उसके पढ़ने का हक़ है यही लोग उस पर ईमान लाते हैं और जो उससे इनकार करते हैं वही लोग घाटे में हैं
27 जून 2026
और (यहूद) कहते हैं कि यहूद (के सिवा) और (नसारा कहते हैं कि) नसारा के सिवा कोई बेहिश्त में जाने ही न पाएगा ये उनके ख़्याली पुलाव है (ऐ रसूल) तुम उन से कहो कि भला अगर तुम सच्चे हो कि हम ही बेहिश्त में जाएँगे तो अपनी दलील पेश करो
और (यहूद) कहते हैं कि यहूद (के सिवा) और (नसारा कहते हैं कि) नसारा के
सिवा कोई बेहिश्त में जाने ही न पाएगा ये उनके ख़्याली पुलाव है (ऐ रसूल)
तुम उन से कहो कि भला अगर तुम सच्चे हो कि हम ही बेहिश्त में जाएँगे तो
अपनी दलील पेश करो (111)
हाँ अलबत्ता जिस शख़्स ने खु़दा के आगे अपना सर झुका दिया और अच्छे काम
भी करता है तो उसके लिए उसके परवरदिगार के यहाँ उसका बदला (मौजूद) है और
(आख़ेरत में) ऐसे लोगों पर न किसी तरह का ख़ौफ़ होगा और न ऐसे लोग ग़मग़ीन
होगे (112)
और यहूद कहते हैं कि नसारा का मज़हब कुछ (ठीक) नहीं और नसारा कहते हैं
कि यहूद का मज़हब कुछ (ठीक) नहीं हालाँकि ये दोनों फरीक़ किताबे (खु़दा)
पढ़ते रहते हैं इसी तरह उन्हीं जैसी बातें वह (मुशरेकीन अरब) भी किया करते
हैं जो (खु़दा के एहकाम) कुछ नहीं जानते तो जिस बात में ये लोग पड़े झगड़ते
हैं (दुनिया में तो तय न होगा) क़यामत के दिन खु़दा उनके दरमियान ठीक
फैसला कर देगा (113)
और उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो खु़दा की मसजिदों में उसका नाम लिए
जाने से (लोगों को) रोके और उनकी बरबादी के दर पे हो, ऐसों ही को उसमें
जाना मुनासिब नहीं मगर सहमे हुए ऐसे ही लोगों के लिए दुनिया में रूसवाई है
और ऐसे ही लोगों के लिए आख़ेरत में बड़ा भारी अज़ाब है (114)
(तुम्हारे मसजिद में रोकने से क्या होता है क्योंकि सारी ज़मीन) खु़दा
ही की है (क्या) पूरब (क्या) पच्छिम बस जहाँ कहीं कि़ब्ले की तरफ रूख़ करो
वही खु़दा का सामना है बेशक खु़दा बड़ी गुन्जाइश वाला और खू़ब वाकि़फ है
(115)
और यहूद कहने लगे कि खु़दा औलाद रखता है हालाँकि वह (इस बखेड़े से) पाक
है बल्कि जो कुछ ज़मीन व आसमान में है सब उसी का है और सब उसी के
फ़रमाबरदार हैं (116)
(वही) आसमान व ज़मीन का मोजिद है और जब किसी काम का करना ठान लेता है
तो उसकी निसबत सिर्फ कह देता है कि “हो जा” बस वह (खु़द ब खु़द) हो जाता है
(117)
और जो (मुशरेकीन) कुछ नहीं जानते कहते हैं कि खु़दा हमसे (खु़द) कलाम
क्यों नहीं करता, या हमारे पास (खु़द) कोई निशानी क्यों नहीं आती, इसी तरह
उन्हीं की सी बाते वह कर चुके हैं जो उनसे पहले थे इन सब के दिल आपस में
मिलते जुलते हैं जो लोग यक़ीन रखते हैं उनको तो अपनी निशानियाँ क्यों
साफतौर पर दिखा चुके (118)
(ऐ रसूल) हमने तुमको दीने हक़ के साथ (बेहिश्त की) खु़शख़बरी देने वाला
और (अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है और दोज़खि़यों के बारे में तुमसे
कुछ न पूछा जाएगा (119)
और (ऐ रसूल) न तो यहूदी कभी तुमसे रज़ामंद होगे न नसारा यहाँ तक कि तुम
उनके मज़हब की पैरवी करो (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि बस खु़दा ही की हिदायत तो
हिदायत है (बाक़ी ढकोसला है) और अगर तुम इसके बाद भी कि तुम्हारे पास इल्म
(क़ुरान) आ चुका है उनकी ख़्वाहिशों पर चले तो (याद रहे कि फिर) तुमको
खु़दा (के ग़ज़ब) से बचाने वाला न कोई सरपरस्त होगा न मददगार (120)
26 जून 2026
डाइट कोटा में नेत्रदान एवं अंगदान जनजागरूकता अभियान को लेकर हुई महत्वपूर्ण चर्चा
डाइट कोटा में नेत्रदान एवं अंगदान जनजागरूकता अभियान को लेकर हुई महत्वपूर्ण चर्चा
कोटा, जून।
जिला
शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), कोटा में आयोजित अधिकारियों की बैठक
के दौरान विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में नेत्रदान एवं अंगदान
जागरूकता अभियान संचालित करने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
बैठक
में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों
को नेत्रदान एवं अंगदान के प्रति जागरूक करने के लिए विद्यालय स्तर पर
नियमित कार्यशालाएँ, प्रेरक व्याख्यान एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए
जाएँ। साथ ही समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर कर अधिक से अधिक लोगों को
मानव सेवा के इस महाअभियान से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
शाइन
इंडिया फाउंडेशन ने डाइट प्रशासन के इस सकारात्मक प्रयास का स्वागत करते
हुए कहा कि यदि शिक्षा विभाग के माध्यम से यह अभियान संचालित किया जाता है
तो लाखों विद्यार्थियों एवं उनके परिवारों तक नेत्रदान एवं अंगदान का संदेश
प्रभावी रूप से पहुँच सकेगा। फाउंडेशन ने विद्यालयों में विशेषज्ञों
द्वारा जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित करने तथा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की
भी सहमति व्यक्त की।
फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौर ने कहा कि
"शिक्षा
ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है। यदि विद्यार्थी
नेत्रदान एवं अंगदान के महत्व को समझेंगे तो वे अपने परिवार एवं समाज में
भी इस संदेश को पहुँचाकर अनेक लोगों का जीवन बचाने की प्रेरणा बनेंगे।"
उन्होंने
विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा विभाग एवं सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त
प्रयास से कोटा जिले में नेत्रदान एवं अंगदान के प्रति एक व्यापक
जनजागरूकता अभियान संचालित होगा, जिससे अधिकाधिक लोग इस महादान के लिए
संकल्पित होंगे। सहायक निदेशक महात्मा गांधी प्रकोष्ठ आदित्य विजय ने कोटा
संभाग के सभी विद्यालयों में बच्चों में अंगदान, नेत्रदान के प्रति
जागरूकता के लिए अभियान रूप में शाइन इंडिया फाउंडेशन से सहमति व्यक्त की।
बैठक
में उप निदेशक, महात्मा गांधी प्रकोष्ठ प्रेमचंद अजमेरा, मुख्य जिला
शिक्षा अधिकारी श्री कृष्ण गोपाल जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक)
श्री रूप सिंह मीणा, प्रधानाचार्य डाइट कोटा श्रीमती पवित्रा त्रिपाठी,
सहायक निदेशक श्री आदित्य विजय एवं श्री महेन्द्र चौधरी उपस्थित रहे।
(ऐ रसूल) हम जब कोई आयत मन्सूख़ करते हैं या तुम्हारे ज़ेहन से मिटा देते हैं तो उससे बेहतर या वैसी ही (और) नाजि़ल भी कर देते हैं क्या तुम नहीं जानते कि बेशुबहा खु़दा हर चीज़ पर क़ादिर है
और जब उनके पास खु़दा की तरफ से रसूल (मोहम्मद) आया और उस किताब (तौरेत) की
जो उनके पास है तसदीक़ भी करता है तो उन अहले किताब के एक गिरोह ने किताबे
खु़दा को अपने बस पुश्त फेंक दिया गोया वह लोग कुछ जानते ही नहीं और उस
मंत्र के पीछे पड़ गए (101)
जिसको सुलेमान के ज़माने की सलतनत में शयातीन जपा करते थे हालाँकि
सुलेमान ने कुफ्र नहीं इख़तेयार किया लेकिन शैतानों ने कुफ्र एख़तेयार किया
कि वह लोगों को जादू सिखाया करते थे और वह चीज़ें जो हारूत और मारूत दोनों
फ़रिश्तों पर बाइबिल में नाजि़ल की गई थी हालाँकि ये दोनों फ़रिश्ते किसी
को सिखाते न थे जब तक ये न कह देते थे कि हम दोनों तो फ़क़त (ज़रियाए
आज़माइश) है बस तो (इस पर अमल करके) बेइमान न हो जाना इस पर भी उनसे वह
(टोटके) सीखते थे जिनकी वजह से मिया बीवी में तफ़रक़ा डालते हालाँकि बग़ैर
अज़्ने खु़दा बन्दी वह अपनी इन बातों से किसी को ज़रर नहीं पहुँचा सकते थे
और ये लोग ऐसी बातें सीखते थे जो खु़द उन्हें नुक़सान पहुँचाती थी बावजूद
कि वह यक़ीनन जान चुके थे कि जो शख़्स इन (बुराईयों) का ख़रीदार हुआ वह
आखि़रत में बेनसीब हैं और बेशुबह (मुआवज़ा) बहुत ही बड़ा है जिसके बदले
उन्होंने अपनी जानों को बेचा काश (इसे कुछ) सोचे समझे होते (102)
और अगर वह ईमान लाते और जादू वग़ैरह से बचकर परहेज़गार बनते तो खु़दा
की दरगाह से जो सवाब मिलता वह उससे कहीं बेहतर होता काश ये लोग (इतना तो)
समझते (103)
ऐ ईमानवालों तुम (रसूल को अपनी तरफ मुतावज्जे करना चाहो तो) रआना
(हमारी रिआयत कर) न कहा करो बल्कि उनज़ुरना (हम पर नज़रे तवज्जो रख) कहा
करो और (जी लगाकर) सुनते रहो और काफिरों के लिए दर्दनाक अज़ाब है (104)
ऐ रसूल अहले किताब में से जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार किया वह और
मुशरेकीन ये नहीं चाहते हैं कि तुम पर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से भलाई
(वही) नाजि़ल की जाए और (उनका तो इसमें कुछ इजारा नहीं) खु़दा जिसको चाहता
है अपनी रहमत के लिए ख़ास कर लेता है और खु़दा बड़ा फज़ल (करने) वाला है
(105)
(ऐ रसूल) हम जब कोई आयत मन्सूख़ करते हैं या तुम्हारे ज़ेहन से मिटा
देते हैं तो उससे बेहतर या वैसी ही (और) नाजि़ल भी कर देते हैं क्या तुम
नहीं जानते कि बेशुबहा खु़दा हर चीज़ पर क़ादिर है (106)
क्या तुम नहीं जानते कि आसमान की सलतनत बेशुबहा ख़ास खु़दा ही के लिए
है और खु़दा के सिवा तुम्हारा न कोई सरपरस्त है न मददगार (107)
(मुसलमानों) क्या तुम चाहते हो कि तुम भी अपने रसूल से वैसै ही
(बेढ़ंगे) सवालात करो जिस तरह साबिक़ (पहले) ज़माने में मूसा से (बेतुके)
सवालात किए गए थे और जिस शख़्स ने इमान के बदले कुफ्र एख़तेयार किया वह तो
यक़ीनी सीधे रास्ते से भटक गया (108)
(मुसलमानों) अहले किताब में से अक्सर लोग अपने दिली हसद की वजह से ये
ख़्वाहिश रखते हैं कि तुमको ईमान लाने के बाद फिर काफि़र बना दें (और लुत्फ
तो ये है कि) उन पर हक़ ज़ाहिर हो चुका है उसके बाद भी (ये तमन्ना बाक़ी
है) बस तुम माफ करो और दरगुज़र करो यहाँ तक कि खु़दा अपना (कोई और) हुक्म
भेजे बेशक खु़दा हर चीज़ पर क़ादिर है (109)
और नमाज़ पढ़ते रहो और ज़कात दिये जाओ और जो कुछ भलाई अपने लिए (खु़दा
के यहाँ) पहले से भेज दोगे उस (के सवाब) को मौजूद पाआगे जो कुछ तुम करते हो
उसे खु़दा ज़रूर देख रहा है (110)
25 जून 2026
जिले के नेत्रदानी परिवार होंगे सम्मानित,आई बैंक सोसायटी- बीबीजे चैप्टर और रोटरी क्लब करेगा सम्मान
जिले के नेत्रदानी परिवार होंगे सम्मानित,आई बैंक सोसायटी- बीबीजे चैप्टर और रोटरी क्लब करेगा सम्मान
2. मानवता की मिसाल बने,नेत्रदानी परिवारों का होगा सम्मान
बूंदी।
नेत्रदान के माध्यम से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में प्रकाश का
संचार करने वाले प्रेरणादायी नेत्रदानी परिवारों को सम्मानित करने के
उद्देश्य से,आई बैंक सोसायटी- बीबीजे चैप्टर,रोटरी क्लब, बूंदी एवं शाइन
इंडिया फाउंडेशन,कोटा के संयुक्त तत्वावधान में "नेत्रदानी परिजन सम्मान
समारोह" का आयोजन 28 जून 2026 (रविवार) को रोटरी क्लब सभागार, बूंदी में
किया जाएगा। इसमें वर्ष जनवरी 2025 से जून 2026 तक हुए, नेत्रदाताओं का
सम्मान किया जाएगा ।
इस समारोह में बूंदी जिले सहित आसपास के
क्षेत्रों के उन परिवारों का सार्वजनिक अभिनंदन किया जाएगा, जिन्होंने अपने
दिवंगत परिजनों की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान करवाकर मानवता
की अनुपम सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रत्येक नेत्रदानी परिवार को
प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मान प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम में
सम्माननीय अतिथि के तौर पर विधायक बूंदी श्री हरि मोहन जी शर्मा,शहर जिला
कलेक्टर श्री हर फूल सिंह यादव,शहर पुलिस अधीक्षक अवनिश शर्मा, जिला
अध्यक्ष रामेश्वर मीणा, अध्यक्ष शहरी विकास बैंक श्री सत्येश शर्मा उपस्थित
होंगे ।