कोटा से शुरू होगी अनूठी पहल, स्टूडेंट्स पढ़ेंगे नेत्रदान-अंगदान व रक्तदान का पाठ
राजस्थान में पहला संभाग बनेगा कोटा, कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों को किया जाएगा जागरूक
कोटा संभाग: सरकारी व निजी विद्यालयों में नौ बैग डे पर चलेगा जागरूकता अभियान।
कोटा।
कोटा संभाग के राजकीय एवं गैर-राजकीय विद्यालयों में शनिवार को आयोजित
होने वाले नौ बैग डे के तहत अब विद्यार्थियों को अंगदान, नेत्रदान, देहदान
और स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूक किया जाएगा। राजस्थान में कोटा पहला
संभाग बनेगा, जहां इस तरह की अनूठी जागरूकता पहल शुरू की गई है। संयुक्त
निदेशक (स्कूल शिक्षा), कोटा संभाग ने कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों और समस्त शिक्षा अधिकारियों को विद्यालयों
में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराने के निर्देश दिए हैं।
संयुक्त
निदेशक (स्कूल शिक्षा) ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि शाइन इंडिया फाउंडेशन
के सहयोग से विद्यालयों में शनिवार को आयोजित होने वाले नौ बैग डे के तहत
अब विशेष अवसर पर विद्यार्थियों के लिए अंगदान और नेत्रदान विषयक वार्ताएं
आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को अंगदान,
नेत्रदान एवं रक्तदान के महत्व से अवगत कराया जाएगा।
1100 से अधिक स्कूलों में चलेगा अभियान
यह
अभियान कोटा जिले के 1100 से अधिक विद्यालयों सहित पूरे कोटा संभाग के
सरकारी एवं निजी उच्च प्राथमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में संचालित
किया जाएगा। इस पहल को सफल बनाने के लिए विस्तृत वीडियो विषयक व
प्रचार-प्रसार संबंधी सामग्री भी तैयार की गई है।
निदेशक कार्यालय
से शुक्रवार को संयुक्त निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता, उप निदेशक प्रमोद उपमन्यु,
सहायक निदेशक महेंद्र चौधरी ने फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. मुनींद्र गुप्ता
और सचिव सविता गुप्ता को अभियान संबंधी पत्र सौंपकर इसकी औपचारिक शुरुआत
की।
प्रत्येक व्याख्यान समेत अन्य गतिविधियां होंगी
फाउंडेशन
की ओर से कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 30 से 45 मिनट की
नि:शुल्क जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें विद्यार्थियों के
लिए ऑडियो-वीडियो प्रस्तुति, संवाद, प्रेरक व्याख्यान, प्रश्नोत्तर, पोस्टर
प्रतियोगिताएं तथा अन्य जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
इन
कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को मानवीय मूल्यों, अंगदान और नेत्रदान के
महत्व से परिचित कराया जाएगा, ताकि वे स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ इस
संदेश का प्रभावी प्रसार भी कर सकें।
नेत्रदान व रक्तदान के महत्व से अवगत कराने के साथ ही समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने का भी प्रयास किया जाएगा।
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
04 जुलाई 2026
कोटा से शुरू होगी अनूठी पहल, स्टूडेंट्स पढ़ेंगे नेत्रदान-अंगदान व रक्तदान का पाठ
नो बैग डे पर अब संभाग के स्कूलों में नेत्रदान-अंगदान की अलख जगाएगी,शाइन इंडिया फाउंडेशन
नो बैग डे पर अब संभाग के स्कूलों में नेत्रदान-अंगदान की अलख जगाएगी,शाइन इंडिया फाउंडेशन
2. नो बैग डे पर,विद्यार्थियों में विकसित होगी सेवा, संवेदना और मानवता की सोच।
संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) ने जारी किए निर्देश, कोटा संभाग के सभी सरकारी विद्यालयों में होंगे जागरूकता कार्यक्रम
कोटा,
2 जुलाई। राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक शनिवार आयोजित किए जाने वाले 'नो
बैग डे' के तहत अब कोटा संभाग के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को
नेत्रदान एवं अंगदान जैसे मानव सेवा के महाअभियान से भी जोड़ा जाएगा।
इस
संबंध में संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा), कोटा संभाग ने आदेश जारी कर
संभाग के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों एवं मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को
निर्देशित किया है कि,वे विद्यालयों में आयोजित होने वाले नो बैग डे एवं
विशेष अवसरों के कार्यक्रमों में शाइन इंडिया फाउंडेशन के प्रतिनिधियों को
आमंत्रित कर विद्यार्थियों के लिए जागरूकता वार्ताओं का आयोजन करवाएं।
आदेश
में उल्लेख किया गया है कि,शाइन इंडिया फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से कोटा
संभाग में नेत्रदान एवं अंगदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है।
संस्था द्वारा विद्यार्थियों को मानव सेवा, अंगदान एवं नेत्रदान के महत्व
से परिचित कराने के लिए विद्यालय स्तर पर संवाद, प्रेरक व्याख्यान, शपथ,
पोस्टर गतिविधियां एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
संस्था
सचिव डॉ संगीता गौड़ ने बताया कि,विद्यालय स्तर पर जागरूकता विकसित होने
से बच्चों में सेवा, संवेदनशीलता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना मजबूत
होगी। विद्यार्थी अपने परिवार, रिश्तेदारों एवं समाज को इस पुनीत कार्य के
लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस पहल की शुरुआत,
सहायक निदेशक आदित्य विजय के प्रयासों से हुई थी।
उन्होंने कहा कि
आज के जागरूक विद्यार्थी ही भविष्य में अंगदान और नेत्रदान की संस्कृति को
आगे बढ़ाएंगे। विद्यालयों में बचपन से ही इस विषय पर सकारात्मक सोच विकसित
होने से समाज में अंगदान एवं नेत्रदान के प्रति फैली भ्रांतियां दूर होंगी
और अधिक से अधिक लोग मृत्यु के बाद जीवनदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित
होंगे।
शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यशालाओं में
विद्यार्थियों को नेत्रदान, अंगदान, देहदान, रक्तदान, ब्रेन डेथ, अंग
प्रत्यारोपण की प्रक्रिया, कानूनी प्रावधान, मानवता के मूल्य तथा जीवन
बचाने में दान की भूमिका के बारे में सरल एवं प्रेरणादायक जानकारी दी
जाएगी।
संस्था ने संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा), कोटा संभाग का
आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि,यह पहल आने वाली पीढ़ी में "मृत्यु
के बाद भी जीवन देने" की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
साबित होगी।
फिर जो सुन चुका उसके बाद उसे कुछ का कुछ कर दे तो उस का गुनाह उन्हीं लोगों की गरदन पर है जो उसे बदल डालें बेशक ख़ुदा सब कुछ जानता और सुनता
फिर जो सुन चुका उसके बाद उसे कुछ का कुछ कर दे तो उस का गुनाह उन्हीं लोगों की गरदन पर है जो
उसे बदल डालें बेशक ख़ुदा सब कुछ जानता और सुनता है (181)
(हाँ अलबत्ता) जो शख्स वसीयत करने वाले से बेजा तरफ़दारी या बे इन्साफी
का ख़ौफ रखता है और उन वारिसों में सुलह करा दे तो उस पर बदलने का कुछ
गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (182)
ऐ ईमानदारों रोज़ा रखना जिस तरह तुम से पहले के लोगों पर फर्ज़ था उसी
तरह तुम पर भी फर्ज़ किया गया ताकि तुम उस की वजह से बहुत से गुनाहों से
बचो (183)
(वह भी हमेशा नहीं बल्कि) गिनती के चन्द रोज़ इस पर भी (रोज़े के दिनों
में) जो शख्स तुम में से बीमार हो या सफर में हो तो और दिनों में जितने
क़ज़ा हुए हो) गिन के रख ले और जिन्हें रोज़ा रखने की कू़वत है और न रखें
तो उन पर उस का बदला एक मोहताज को खाना खिला देना है और जो शख्स अपनी ख़ुशी
से भलाई करे तो ये उस के लिए ज़्यादा बेहतर है और अगर तुम समझदार हो तो
(समझ लो कि फिदये से) रोज़ा रखना तुम्हारे हक़ में बहरहाल अच्छा है (184)
(रोज़ों का) महीना रमज़ान है जिस में क़ुरान नाजि़ल किया गया जो लोगों
का रहनुमा है और उसमें रहनुमाई और (हक़ व बातिल के) तमीज़ की रौशन
निषानियाँ हैं (मुसलमानों) तुम में से जो शख्स इस महीनें में अपनी जगह पर
हो तो उसको चाहिए कि रोज़ा रखे और जो शख्स बीमार हो या फिर सफ़र में हो तो
और दिनों में रोज़े की गिनती पूरी करे ख़ुदा तुम्हारे साथ आसानी करना चाहता
है और तुम्हारे साथ सख़्ती करनी नहीं चाहता और (शुमार का हुक्म इस लिए
दिया है) ताकि तुम (रोज़ो की) गिनती पूरी करो और ताकि ख़ुदा ने जो तुम को
राह पर लगा दिया है उस नेअमत पर उस की बड़ाई करो और ताकि तुम शुक्र गुज़ार
बनो (185)
(ऐ रसूल) जब मेरे बन्दे मेरा हाल तुमसे पूछे तो (कह दो कि) मै उन के
पास ही हूँ और जब मुझसे कोई दुआ माँगता है तो मै हर दुआ करने वालों की दुआ
(सुन लेता हूँ और जो मुनासिब हो तो) क़ुबूल करता हूँ बस उन्हें चाहिए कि
मेरा भी कहना माने) और मुझ पर ईमान लाएँ (186)
ताकि वह सीधी राह पर आ जाए (मुसलमानों) तुम्हारे वास्ते रोज़ों की
रातों में अपनी बीवियों के पास जाना हलाल कर दिया गया औरतें (गोया)
तुम्हारी चोली हैं और तुम (गोया उन के दामन हो) ख़ुदा ने देखा कि तुम
(गुनाह) करके अपना नुकसान करते (कि आँख बचा के अपनी बीबी के पास चले जाते
थे) तो उसने तुम्हारी तौबा क़ुबूल की और तुम्हारी ख़ता से दर गुज़र किया बस
तुम अब उनसे हम बिस्तरी करो और (औलाद) जो कुछ ख़ुदा ने तुम्हारे लिए
(तक़दीर में) लिख दिया है उसे माँगों और खाओ और पियो यहाँ तक कि सुबह की
सफेद धारी (रात की) काली धारी से आसमान पर पूरब की तरफ़ तक तुम्हें साफ
नज़र आने लगे फिर रात तक रोज़ा पूरा करो और हाँ जब तुम मस्जि़दों में
एतेकाफ़ करने बैठो तो उन से (रात को भी) हम बिस्तरी न करो ये ख़ुदा की
(मुअय्युन की हुई) हदे हैं तो तुम उनके पास भी न जाना यूँ खुल्लम खुल्ला
ख़ुदा अपने एहकाम लोगों के सामने बयान करता है ताकि वह लोग (नाफ़रमानी से)
बचें (187)
और आबस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खाओ और न माल को (रिश्वत में)
हुक्काम के यहाँ झोंक दो ताकि लोगों के माल में से (जो) कुछ हाथ लगे नाहक़
ख़ुर्द बुर्द कर जाओ हालाकि तुम जानते हो (188)
(ऐ रसूल) तुम से लोग चाँद के बारे में पूछते हैं (कि क्यो घटता बढ़ता
है) तुम कह दो कि इससे लोगों के (दुनयावी) अम्र और हज के अवक़ात मालूम होते
है और ये कोई भली बात नही है कि घरो में पिछवाड़े से फाँद के) आओ बल्कि
नेकी उसकी है जो परहेज़गारी करे और घरों में आना हो तो) उनके दरवाजो़ं की
तरफ से आओ और ख़ुदा से डरते रहो ताकि तुम मुराद को पहुँचो (189)
और जो लोग तुम से लड़े तुम (भी) ख़ुदा की राह में उनसे लड़ो और
ज़्यादती न करो (क्योंकि) ख़ुदा ज़्यादती करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं
रखता (190)
03 जुलाई 2026
पिता के पदचिन्हों पर चले डॉ. राकेश सिंह: एमबीएस अस्पताल के नए अधीक्षक का भव्य सम्मान, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की जताई उम्मीद, चिकित्सा सेवा समिति कोटा के तत्वावधान में पत्रकारों, समाजसेवियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने किया सम्मानित
भाई बहनों के सहयोग से संपन्न हुआ नेत्रदान
भाई बहनों के सहयोग से संपन्न हुआ नेत्रदान
रामपुरा कोटा निवासी
दौलत राम गोयल,(शारदा मिष्ठान भंडार - घेवर वाले) का गुरुवार शाम को
आकस्मिक निधन हो गया । प्रारंभ से ही सामाजिक एवं धार्मिक कार्य में अग्रणी
रहने वाले दौलत राम, विनम्र,स्वभाव और सेवाभावी व्यक्ति थे ।
निधन
के उपरांत उनके बेटे पुखराज, प्रेम, राजेश, भुवनेश, मुनेश, पंकज, नितिन एवं
बेटी लता,यशोदा व लक्ष्मी ने सहमति कविता के नेत्रदान करवाने का निर्णय
लिया,इसके उपरांत समाजसेवी व शाइन इंडिया के ज्योति मित्र पंकज मेहता की
सूचना पर ईबीएसआर,कोटा चैप्टर के टेक्नीशियन, ने नेत्रदान की प्रक्रिया
संपन्न की।