आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
11 अप्रैल 2026
केवल परीक्षा केंद्रित न रहकर, इनोवेशन और क्रिटिकल थिंकिंग आधारित हो शिक्षा -नितिन विजय
कोटा में 12 अप्रैल को भव्य अखिल भारतीय चौरसिया युवक-युवती परिचय सम्मेलन
या (तुम्हारी जि़न्दगी ही में) जिस अज़ाब का हमने उनसे वायदा किया है तुमको दिखा दें तो उन पर हर तरह क़ाबू रखते हैं
या (तुम्हारी जि़न्दगी ही में) जिस अज़ाब का हमने उनसे वायदा किया है तुमको दिखा दें तो उन पर हर तरह क़ाबू रखते हैं (42)
तो तुम्हारे पास जो वही भेजी गयी है तुम उसे मज़बूत पकड़े रहो इसमें शक नहीं कि तुम सीधी राह पर हो (43)
और ये (क़ुरआन) तुम्हारे लिए और तुम्हारी क़ौम के लिए नसीहत है और अनक़रीब ही तुम लोगों से इसकी बाज़पुर्स की जाएगी (44)
और हमने तुमसे पहले अपने जितने पैग़म्बर भेजे हैं उन सब से दरियाफ्त कर
देखो क्या हमने ख़ुदा कि सिवा और माबूद बनाएा थे कि उनकी इबादत की जाए (45)
और हम ही ने यक़ीनन मूसा को अपनी निशानियाँ देकर फ़िरऔन और उसके दरबारियों
के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा था तो मूसा ने कहा कि मैं सारे जहाँन के
पालने वाले (ख़ुदा) का रसूल हूँ (46)
तो जब मूसा उन लोगों के पास हमारे मौजिज़े लेकर आए तो वह लोग उन मौजिज़ों की हँसी उड़ाने लगे (47)
और हम जो मौजिज़ा उन को दिखाते थे वह दूसरे से बढ़ कर होता था और आखि़र
हमने उनको अज़ाब में गिरफ़्तार किया ताकि ये लोग बाज़ आएँ (48)
और (जब) अज़ाब में गिरफ़्तार हुए तो (मूसा से) कहने लगे ऐ जादूगर इस एहद
के मुताबिक़ जो तुम्हारे परवरदिगार ने तुमसे किया है हमारे वास्ते दुआ कर
(49)
(अगर अब की छूटे) तो हम ज़रूर ऊपर आ जाएँगे फिर जब हमने उनसे अज़ाब को हटा दिया तो वह फौरन (अपना) अहद तोड़ बैठे (50)
10 अप्रैल 2026
शाइन इंडिया के जागरूकता अभियानों से,संभाग में बढ़ रहा देहदान
शाइन इंडिया के जागरूकता अभियानों से,संभाग में बढ़ रहा देहदान
2. देहदान की खबरों से प्रेरित होकर,शहर के तीन लोगों ने लिया देहदान संकल्प
विगत
तीन माह में,देहदान के कार्यों से प्रेरित होकर,संभाग के सात दिवंगतों के
परिवार के सदस्यों ने,स्व-प्रेरणा से प्रेरित होकर अपने प्रियजन का
देहदान,क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज में कराया ।
संभाग में देहदान के
लिए कार्य कर रही एकमात्र संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक डॉ
कुलवंत गौड़ के देहदान के लिए किये गए नवाचारों से न सिर्फ देहदान संकल्प
करने वाले लोगों की संख्या बड़ी है,बल्कि शोक का समय आते ही,परिजनों द्वारा
दिवंगत के देहदान करवाने में भी संख्या में वृद्धि हुई है।
इसी
क्रम में कल इंदिरा कॉलोनी,माला रोड निवासी सेवानिवृत्त नकरा में दीपक
कुमार नकरा और उनकी पत्नी मीना नकरा ने अपने दोनों बेटे यामित और जैनित की
सहमति से अपना देहदान का संकल्प पत्र शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से
भरा। मीना ने कहा कि उनके बेटी होती तो कन्यादान से बड़ा कोई दान नहीं
होता,पर बेटी नहीं है तो,देहदान संकल्प किया है ।
इसी तरह आर के
पुरम,बॉम्बे योजना निवासी सुनीता असरानी ने भी अपने बेटे मनीष असरानी, पोते
कनिष्क असरानी की सहमति से अपना आवेदन का संकल्प पत्र भरा ।
सुनीता
ने कहा कि,जीवनपर्यंत स्वयं और परिवार के लिए कार्य करने के बाद जब अंत
समय आता है,तो हमारा फर्ज बनता है कि,हम समाजऔर देश के लिए कुछ नेक कार्य
करके, इस दुनिया से जाएं, उसके लिए देहदान से उपयुक्त कोई कार्य नहीं है ।
संस्था की ओर से तीनों देहदान संकल्पकर्ताओं को, प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया ।
और कहने लगे कि ये क़़ुरआन इन दो बस्तियों (मक्के ताएफ) में से किसी बड़े आदमी पर क्यों नहीं नाजि़ल किया गया
और कहने लगे कि ये क़़ुरआन इन दो बस्तियों (मक्के ताएफ) में से किसी बड़े आदमी पर क्यों नहीं नाजि़ल किया गया (31)
ये लोग तुम्हारे परवरदिगार की रहमत को (अपने तौर पर) बाँटते हैं हमने तो
इनके दरमियान उनकी रोज़ी दुनयावी जि़न्दगी में बाँट ही दी है और एक के
दूसरे पर दर्जे बुलन्द किए हैं ताकि इनमें का एक दूसरे से खि़दमत ले और जो
माल (मतआ) ये लोग जमा करते फिरते हैं ख़ुदा की रहमत (पैग़म्बर) इससे कहीं
बेहतर है (32)
और अगर ये बात न होती कि (आखि़र) सब लोग एक ही तरीक़े के हो जाएँगे तो हम
उनके लिए जो ख़ुदा से इन्कार करते हैं उनके घरों की छतें और वही सीढि़याँ
जिन पर वह चढ़ते हैं (उतरते हैं) (33)
और उनके घरों के दरवाज़े और वह तख़्त जिन पर तकिये लगाते हैं चाँदी और सोने के बना देते (34)
ये सब साज़ो सामान, तो बस दुनियावी जि़न्दगी के (चन्द रोज़ा) साज़ो सामान
हैं (जो मिट जाएँगे) और आख़ेरत (का सामान) तो तुम्हारे परवरदिगार के यहाँ
ख़ास परहेज़गारों के लिए है (35)
और जो शख़्स ख़ुदा की चाह से अन्धा बनता है हम (गोया ख़ुद) उसके वास्ते
शैतान मुक़र्रर कर देते हैं तो वही उसका (हर दम का) साथी है (36)
और वह (शयातीन) उन लोगों को (ख़ुदा की) राह से रोकते रहते हैं बावजूद
इसके वह उसी ख़्याल में हैं कि वह यक़ीनी राहे रास्त पर हैं (37)
यहाँ तक कि जब (क़यामत में) हमारे पास आएगा तो (अपने साथी शैतान से)
कहेगा काश मुझमें और तुममें पूरब पष्चिम का फ़ासला होता ग़रज़ (शैतान भी)
क्या ही बुरा रफीक़ है (38)
और जब तुम नाफ़रमानियाँ कर चुके तो (शैयातीन के साथ) तुम्हारा अज़ाब में
शरीक होना भी आज तुमको (अज़ाब की कमी में) कोई फायदा नहीं पहुँचा सकता (39)
तो (ऐ रसूल) क्या तुम बहरों को सुना सकते हो या अन्धे को और उस शख़्स को
जो सरीही गुमराही में पड़ा हो रास्ता दिखा सकते हो (हरगिज़ नहीं) (40)