आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
19 जून 2026
कोटा कोचिंग तबाह ओर बर्बाद हो रहा है, टैक्सों, मोटी फीस से लोग त्रस्त हैं लेकिन 15 सालों से आज तक कोटा सांसद ने कोचिंग को लाइफ़ सपोर्ट देने के लिए कोई योजना नहीं बनाई,
शहर के बाद,ग्रामीण क्षेत्रों में भी परंपरा बन रहा है,नेत्रदान
शहर के बाद,ग्रामीण क्षेत्रों में भी परंपरा बन रहा है,नेत्रदान
2. शोक होते ही,नेत्रदान के लिए परिजनों संपर्क किया
वार्ड
नम्बर 4,सदर बाजार, नैनवां निवासी स्व० कमल कुमार मारवाडा की धर्मपत्नी
एवं विनोद, सुनील, संजय,व मुकेश मारवाड़ा की माताजी राजकुमारी मारवाड़ा का
इलाज के लिए नैनवा से जयपुर ले जाते समय, बीच रास्ते चाकसू में निधन हो गया
।
बेटे विनोद को जैसे ही माता जी के निधन की सूचना मिली, उन्होंने
तुरंत ही सबसे पहला कॉल शाइन इंडिया फाउंडेशन व ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर के
कोऑर्डिनेटर डॉ कुलवंत गौड़ को किया ।
डॉ गौड़ उस समय बारां से,
नेत्रदानी की शोकसभा में नेत्रदान अंगदान के विषय में संबोधित करके वापस
लौट ही रहे थे, उसी समय नैनवा से यह दुख भरी खबर प्राप्त हुई ।
नैनवां
का यह मारवाड़ा परिवार, काफी समय से शाइन इंडिया फाउंडेशन के साथ जुड़ा हुआ
है,4 वर्ष पूर्व राजकुमारी के पति कमल कुमार मारवाडा का और 2 वर्ष पूर्व
स्व० राजकुमारी की, भतीजा बहू स्व० हेमलता जैन का नेत्रदान भी संस्था के
सहयोग से संपन्न हुआ था।
धर्म-कर्म में आस्था एवं साधु संतों की
सेवा में हमेशा अग्रणी रहने वाली राजकुमारी के अचानक चले जाने से एक तरफ
परिवार में असीम दुख पहुँचा, पर यह सुकून भी रहा कि,नेत्रदान से माताजी
किसी दृष्टिहीन की आँखों में हमेशा रोशनी बनाकर जीवित रहेंगे ।
संस्था
के ज्योति मित्र महावीर जैन मोदीका,ने बताया कि, पिछले 6 वर्ष में
नेत्रदान की प्रति बढ़ती जागरूकता से अभी तक 15 दिवंगतों के नेत्रदान
नैनवां से प्राप्त हुए ।
और (आदम की हक़ीक़त ज़ाहिर करने की ग़रज़ से) आदम को सब चीज़ों के नाम सिखा दिए फिर उनको फरिश्तों के सामने पेश किया और फ़रमाया कि अगर तुम अपने दावे में कि हम मुस्तहके़ खि़लाफ़त हैं। सच्चे हो तो मुझे इन चीज़ों के नाम बताओ
और (आदम की हक़ीक़त ज़ाहिर करने की ग़रज़ से) आदम को सब चीज़ों के नाम सिखा
दिए फिर उनको फरिश्तों के सामने पेश किया और फ़रमाया कि अगर तुम अपने दावे
में कि हम मुस्तहके़ खि़लाफ़त हैं। सच्चे हो तो मुझे इन चीज़ों के नाम
बताओ (31)
तब फ़रिश्तों ने (आजिज़ी से) अजऱ् की तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है
हमे तो जो कुछ तूने बताया है उसके सिवा कुछ नहीं जानते तू बड़ा जानने वाला,
मसलहक़े का पहचानने वाला है (32)
(उस वक़्त खु़दा ने आदम को) हुक्म दिया कि ऐ आदम तुम इन फ़रिश्तों को
उन सब चीज़ों के नाम बता दो बस जब आदम ने फ़रिश्तों को उन चीज़ों के नाम
बता दिए तो खु़दा ने फरिश्तों की तरफ खि़ताब करके फरमाया क्यों, मैं तुमसे न
कहता था कि मैं आसमानों और ज़मीनों के छिपे हुए राज़ को जानता हूँ, और जो
कुछ तुम अब ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपाते थे (वह सब) जानता हूँ (33)
और (उस वक़्त को याद करो) जब हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को सजदा करो
तो सब के सब झुक गए मगर शैतान ने इन्कार किया और ग़ुरूर में आ गया और
काफि़र हो गया (34)
और हमने आदम से कहा ऐ आदम तुम अपनी बीवी समैत बेहिश्त में रहा सहा करो
और जहाँ से तुम्हारा जी चाहे उसमें से ब फराग़त खाओ (पियो) मगर उस दरख़्त
के पास भी न जाना (वरना) फिर तुम अपना आप नुक़सान करोगे (35)
तब शैतान ने आदम व हौव्वा को (धोखा देकर) वहाँ से डगमगाया और आखि़र कार
उनको जिस (ऐश व राहत) में थे उनसे निकाल फेंका और हमने कहा (ऐ आदम व
हौव्वा) तुम (ज़मीन पर) उतर पड़ो तुममें से एक का एक दुशमन होगा और ज़मीन
में तुम्हारे लिए एक ख़ास वक़्त (क़यामत) तक ठहराव और ठिकाना है (36)
फिर आदम ने अपने परवरदिगार से (माज़रत के चन्द अल्फाज़) सीखे बस खु़दा
ने उन अल्फाज़ की बरकत से आदम की तौबा कु़बूल कर ली बेशक वह बड़ा माफ़ करने
वाला मेहरबान है (37)
(और जब आदम को) ये हुक्म दिया था कि यहाँ से उतर पड़ो (तो भी कह दिया
था कि) अगर तुम्हारे पास मेरी तरफ़ से हिदायत आए तो (उसकी पैरवी करना
क्योंकि) जो लोग मेरी हिदायत पर चलेंगे उन पर (क़यामत) में न कोई ख़ौफ होगा
(38)
और न वह रंजीदा होगे और (ये भी याद रखो) जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार
किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो वही जहन्नुमी हैं और हमेशा दोज़ख़ में
पड़े रहेगे (39)
ऐ बनी इसराईल (याक़ूब की औलाद) मेरे उन एहसानात को याद करो जो तुम पर
पहले कर चुके हैं और तुम मेरे एहद व इक़रार (ईमान) को पूरा करो तो मैं
तुम्हारे एहद (सवाब) को पूरा करूँगा, और मुझ ही से डरते रहो (40)
18 जून 2026
27वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर नेत्रदान संकल्प
27वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर नेत्रदान संकल्प
2. शहर में लगातार बढ़ रहा है नेत्रदान संकल्प पत्र भरने का कारवां
शाइन
इंडिया फाउंडेशन व ईबीएसआर- बीबीजे चैप्टर के नेत्रदान जागरुकता अभियान से
प्रेरित होकर, धोबी की गली गुरु नानक कॉलोनी बूंदी निवासी, राजकीय
प्राथमिक विद्यालय बलदेवपुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत मुकेश कुमार शर्मा
एवं उनकी धर्मपत्नी कृष्णा कुमारी गौतम ने 27 वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर
नेत्रदान का संकल्प पत्र भरा ।
मुकेश काफी सारे सामाजिक संगठनों से
जुड़े हुए हैं, शिक्षक संगठन में रहकर भी, शिक्षकों के अधिकार के लिए
हमेशा तैयार रहते हैं, काफी समय से शहर में चल रहे नेत्रदान अभियान से
प्रेरणा लेकर उन्होंने संस्था शाइन इंडिया के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा को
घर बुलाकर, सारी जानकारी लेने के उपरांत सपत्निक नेत्रदान का संकल्प पत्र
भरा ।
शहर के अब तक 2770 लोग,नेत्रदान का संकल्प,और 42 लोग देहदान का संकल्प संस्था के साथ कर चुके हैं
ऐ लोगों अपने परवरदिगार की इबादत करो जिसने तुमको और उन लोगों को जो तुम से पहले थे पैदा किया है अजब नहीं तुम परहेज़गार बन जाओ
ऐ लोगों अपने परवरदिगार की इबादत करो जिसने तुमको और उन लोगों को जो तुम से पहले थे पैदा किया है अजब नहीं तुम परहेज़गार बन जाओ (21)
जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन का बिछौना और आसमान को छत बनाया और आसमान से
पानी बरसाया फिर उसी ने तुम्हारे खाने के लिए बाज़ फल पैदा किए बस किसी को
खु़दा का हमसर न बनाओ हालाँकि तुम खू़ब जानते हो (22)
और अगर तुम लोग इस कलाम से जो हमने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर नाजि़ल
किया है शक में पड़े हो बस अगर तुम सच्चे हो तो तुम (भी) एक सूरा बना लाओ
और खु़दा के सिवा जो भी तुम्हारे मददगार हों उनको भी बुला लो (23)
बस अगर तुम ये नहीं कर सकते हो और हरगिज़ नहीं कर सकोगे तो उस आग से
डरो जिसके ईधन आदमी और पत्थर होंगे और काफि़रों के लिए तैयार की गई है (24)
और जो लोग इमान लाए और उन्होंने नेक काम किए उनको (ऐ पैग़म्बर)
खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए (बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरे
जारी हैं जब उन्हें इन बाग़ात का कोई मेवा खाने को मिलेगा तो कहेंगे ये तो
वही (मेवा है जो पहले भी हमें खाने को मिल चुका है) (क्योंकि) उन्हें मिलती
जुलती सूरत व रंग के (मेवे) मिला करेंगे और बेहिश्त में उनके लिए साफ
सुथरी बीवियाँ होगी और ये लोग उस बाग़ में हमेशा रहेंगे (25)
बेशक खु़दा मच्छर या उससे भी बढ़कर (हक़ीर चीज़) की कोई मिसाल बयान
करने में नहीं झेंपता बस जो लोग ईमान ला चुके हैं वह तो यह यक़ीन जानते हैं
कि ये (मिसाल) बिल्कुल ठीक है और ये परवरदिगार की तरफ़ से है (अब रहे) वह
लोग जो काफि़र है बस वह बोल उठते हैं कि खु़दा का इस मिसाल से क्या मतलब
है, ऐसी मिसाल से ख़ुदा बहुतेरों की हिदायत करता है मगर गुमराही में छोड़ता
भी है तो ऐसे बदकारों को (26)
जो लोग खु़दा के एहदो पैमान को मज़बूत हो जाने के बाद तोड़ डालते हैं
और जिन (ताल्लुक़ात) का खु़दा ने हुक्म दिया है उनको क़ताआ कर देते हैं और
मुल्क में फसाद करते फिरते हैं, यही लोग घाटा उठाने वाले हैं (27)
(हाँए) क्यों कर तुम खु़दा का इन्कार कर सकते हो हालाँकि तुम (माओं के
पेट में) बेजान थे तो उसी ने तुमको ज़िन्दा किया फिर वही तुमको मार डालेगा,
फिर वही तुमको (दोबारा क़यामत में) जि़न्दा करेगा फिर उसी की तरफ लौटाए
जाओगे (28)
वही तो वह (खु़दा) है जिसने तुम्हारे (नफ़े) के ज़मीन की कुल चीज़ों को
पैदा किया फिर आसमान (के बनाने) की तरफ़ मुतावज्जेह हुआ तो सात आसमान
हमवार (व मुसतहकम) बना दिए और वह (खु़दा) हर चीज़ से (खू़ब) वाकि़फ है (29)
और (ऐ रसूल) उस वक़्त को याद करो जब तुम्हारे परवरदिगार ने फ़रिश्तों
से कहा कि मैं (अपना) एक नायब ज़मीन में बनानेवाला हूँ (फरिश्ते ताज्जुब
से) कहने लगे क्या तू ज़मीन में ऐसे शख़्स को पैदा करेगा जो ज़मीन में
फ़साद और खू़ँरेजि़याँ करता फिरे हालाँ तो कि (अगर) ख़लीफा बनाना है (तो
हमारा ज़्यादा हक़ है) क्योंकि हम तेरी तारीफ व तसबीह करते हैं और तेरी
पाकीज़गी साबित करते हैं तब खु़दा ने फरमाया इसमें तो शक ही नहीं कि जो मैं
जानता हूँ तुम नहीं जानते (