कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा के महापौर, उप महापौर निर्वाचन, क्रोसवोटिंग के ऐतिहासिक, आश्चार्यजनक किंतु सत्य का अनुकरणीय खेल के बाद, कोटा उपमहापौर को पार्षद से उपमहापौर को पॉवरफुल बनाने के लिये, कोंग्रेस प्रतिकार को फुस्स कर समर्पण की सम्भावनाये ज़्यादा है, सभी जानते हैं कोटा नगर निगम उपमहापौर , भाजपा के अलावा कोंग्रेसियों में भी हर दिल अज़ीज़ , कारोबारी मददगार मित्र हैं, उपमहापौर यूं तो सिर्फ एक पार्षद होते है, ओर नगर पालिका क़ानून विधि नियम के तहत महापौर के ऑफिशियल अवकाश पर रहने, अनुपस्थित रहने पर ही वोह कार्य कर सकते है, लेकिन नगर निगम बोर्ड बैठक में उप महापौर को महापौर के प्रस्ताव पर नगर पालिका अधिनियम की धारा 48(2) 55(4) अन्य नियमों के तहत कार्य विभाजन के प्रस्ताव कर कुछ कार्य की पॉवर स्थाई रूप से डेलीगेट कर देतेभैं, जिसका अनुमोदन नगर निगम बोर्ड द्वारा किया जाना अनिवार्य है, उक्त प्रस्ताव के बाद ही निगम आयुक्त उप महापौर को पॉवर देने सम्बंधित आदेश निकालता है, सभी जानते है जिनके दोस्त होते हैं उनके दुश्मन , आंतरिक विरोधी भी होते है, ऐसे में भाजपा की रणनीति है के वोह कोंग्रेस मित्रों के ज़रिये बोर्ड की पहली बैठक होने तक कोंग्रेस को प्रतिपक्ष नेता का चयन नहीं होने दे, अगर ऐसा होता है तो बिना प्रतिपक्ष नेता के नेतृत्वविहीन कोंग्रेस पार्षद उपमहापौर के पॉवर मामले में विरोध नहीं कर पाएंगे, दूसरा भाजपा प्लान है, अगर फिर भी विरोध करना हो तो हा हुल्लड़ कर बहिष्कार कर दें , ताकि बहुमत से उपमहापौर कार्य विभाजन पॉवर प्रस्ताव बिना गुप्त मतदान के या हाथ खड़े किए बगैर ही पारित हो जाये, अगर कोंग्रेस नेता प्रतिपक्ष में देरी नहीं करती तुरन्त नेमें असमंजस की ता प्रतिपक्ष , सचेतक, बना देती है, तो कोंग्रेसी पार्षद प्रस्ताव पर बहस की मांग कर सकते है, गुप्त मतविभाजन की मांग कर सकते है, जिससे भाजपा में असमंजस की स्थिति हो सकती है अब देखते हैं , भाजपा के कोंग्रेस में रह रहे फूल छापी कोंग्रेसी वोटर्स, ओर रणनीति के तहत भाजपा को प्रतिपक्ष के नाते मुश्किलों में डालने वाली ओरिजनल कोंग्रेस इस मामले में क्या रणनीति अपनाती है, देखते हैं एक ब्रेक के बाद,, अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
29 सितंबर 2026
कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा के महापौर, उप महापौर निर्वाचन, क्रोसवोटिंग के ऐतिहासिक, आश्चार्यजनक किंतु सत्य का अनुकरणीय खेल के बाद, कोटा उपमहापौर को पार्षद से उपमहापौर को पॉवरफुल बनाने के लिये, कोंग्रेस प्रतिकार को फुस्स कर समर्पण की सम्भावनाये ज़्यादा है,
देहदानी पति के बाद देहदान संकल्पित पत्नि का भी हुआ देहदान
2. संस्था शाइन इंडिया के सहयोग से संपन्न हुआ, 78 वाँ देहदान
शाइन इंडिया फाउंडेशन व मेडिकल कॉलेज कोटा के साथ 6 वर्ष पूर्व, बेटी नीता शाह और आरती शाह (आचार्य जेडीबी कॉलेज) के पिता जयंतीलाल शाह और उनकी पत्नी प्रेमलता शाह ने नेत्रदान और देहदान का संकल्प पत्र भरा था । 2 वर्ष पूर्व, जयंतीलाल शाह के आकस्मिक निधन के उपरांत दोनों बेटियों और दामाद कमलेश कुमार शाह ने उनका देहदान संपन्न करवाया था।
आज जब प्रेमलता शाह का आकस्मिक निधन हुआ, तो आरती ने तुरंत ही संस्था शाइन इंडिया को संपर्क किया, इसके उपरांत घर पर नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई और उसके बाद सांई सेवा समिति के मोक्ष रथ की निःशुल्क सेवा से प्रेमलता शाह का पार्थिव शव मेडिकल कॉलेज कोटा में भावी चिकित्सकों के अध्ययन के लिए दान किया गया ।
संस्थापक डॉ कुलवंत गौड़ में बताया कि,संस्था के देहदान जागरूकता के राष्ट्रव्यापी अभियान से अभी तक 78 दिवंगतों के देहदान,वहाँ से सम्बन्धित मेडिकल कॉलेज में संपन्न कराए गए हैं। देहदान के इस पुनीत कार्य में लॉयन्स क्लब कोटा हाड़ौती के सदस्य कमल शर्मा,अलका शर्मा, उपेंद्र जैन का भी सहयोग रहा।
देहदान के समय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल निलेश जैन,एडिशनल प्रिंसिपल डॉ सुमित गुप्ता, एनाटॉमी प्रोफेसर डॉ आरुषि जैन मौजूदथे। मेडिकल कॉलेज में यह इस वर्ष का छठा देहदान है ।
और उन लोगों के ऐसे न हो जाओं जो (मुँह से तो) कहते थे कि हम सुन रहे हैं हालाकि वह सुनते (सुनाते ख़ाक) न थे
और उन लोगों के ऐसे न हो जाओं जो (मुँह से तो) कहते थे कि हम सुन रहे हैं हालाकि वह सुनते (सुनाते ख़ाक) न थे (21)
इसमें शक नहीं कि ज़मीन पर चलने वाले तमाम हैवानात से बदतर ख़ुदा के नज़दीक वह बहरे गूँगे (कुफ्फार) हैं जो कुछ नहीं समझते (22)
और अगर ख़़ुदा उनमें नेकी (की बू भी) देखता तो ज़रूर उनमें सुनने की क़ाबलियत अता करता मगर ये ऐसे हैं कि अगर उनमें सुनने की क़ाबिलयत भी देता तो मुँह फेर कर भागते। (23)
ऐ ईमानदार जब तुम को हमारा रसूल (मोहम्मद) ऐसे काम के लिए बुलाए जो तुम्हारी रूहानी जि़न्दगी का बाइस हो तो तुम ख़ुदा और रसूल के हुक्म दिल से कुबूल कर लो और जान लो कि ख़ुदा वह क़ादिर मुतलिक़ है कि आदमी और उसके दिल (इरादे) के दरमियान इस तरह आ जाता है और ये भी समझ लो कि तुम सबके सब उसके सामने हाजि़र किये जाओगे (24)
और उस फितने से डरते रहो जो ख़ास उन्हीं लोगों पर नही पड़ेगा जिन्होने तुम में से ज़ुल्म किया (बल्कि तुम सबके सब उसमें पड़ जाओगे) और यक़ीन मानों कि ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब करने वाला है (25)
(मुसलमानों वह वक़्त याद करो) जब तुम सर ज़मीन (मक्के) में बहुत कम और बिल्कुल बेबस थे उससे सहमे जाते थे कि कहीं लोग तुमको उचक न ले जाए तो ख़ुदा ने तुमको (मदीने में) पनाह दी और ख़ास अपनी मदद से तुम्हारी ताईद की और तुम्हे पाक व पाकीज़ा चीज़े खाने को दी ताकि तुम शुक्र गुज़ारी करो (26)
ऐ ईमानदारों न तो ख़़ुदा और रसूल की (अमानत में) ख़्यानत करो और न अपनी अमानतों में ख़्यानत करो हालाँकि समझते बूझते हो (27)
और यक़ीन जानों कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुम्हारी आज़माइश (इम्तेहान) की चीज़े हैं कि जो उनकी मोहब्बत में भी ख़ुदा को न भूले और वह दीनदार है (28)
और यक़ीनन ख़़ुदा के हाँ बड़ी मज़दूरी है ऐ ईमानदारों अगर तुम ख़़ुदा से डरते रहोगे तो वह तुम्हारे वास्ते इम्तियाज़ पैदा करे देगा और तुम्हारी तरफ से तुम्हारे गुनाह का कफ़्फ़ारा क़रार देगा और तुम्हें बख़्ष देगा और ख़़ुदा बड़ा साहब फज़ल (व करम ) है (29)
और (ऐ रसूल वह वक़्त याद करो) जब कुफ़्फ़ार तुम से फरेब कर रहे थे ताकि तुमको क़ैद कर लें या तुमको मार डाले तुम्हें (घर से ) निकाल बाहर करे वह तो ये तद्बीर (चालाकी) कर रहे थे और ख़़ुदा भी (उनके खि़लाफ) तद्बीर कर रहा था (30)
28 सितंबर 2026
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