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29 सितंबर 2026

कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा के महापौर, उप महापौर निर्वाचन, क्रोसवोटिंग के ऐतिहासिक, आश्चार्यजनक किंतु सत्य का अनुकरणीय खेल के बाद, कोटा उपमहापौर को पार्षद से उपमहापौर को पॉवरफुल बनाने के लिये, कोंग्रेस प्रतिकार को फुस्स कर समर्पण की सम्भावनाये ज़्यादा है,

कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा के महापौर, उप महापौर निर्वाचन, क्रोसवोटिंग के ऐतिहासिक, आश्चार्यजनक किंतु सत्य का अनुकरणीय खेल के बाद, कोटा उपमहापौर को पार्षद से उपमहापौर को पॉवरफुल बनाने के लिये, कोंग्रेस प्रतिकार को फुस्स कर समर्पण की सम्भावनाये ज़्यादा है, सभी जानते हैं कोटा नगर निगम उपमहापौर , भाजपा के अलावा कोंग्रेसियों में भी हर दिल अज़ीज़ , कारोबारी मददगार मित्र हैं, उपमहापौर यूं तो सिर्फ एक पार्षद होते है, ओर नगर पालिका क़ानून विधि नियम के तहत महापौर के ऑफिशियल अवकाश पर रहने, अनुपस्थित रहने पर ही वोह कार्य कर सकते है, लेकिन नगर निगम बोर्ड बैठक में उप महापौर को महापौर के प्रस्ताव पर नगर पालिका अधिनियम की धारा 48(2) 55(4) अन्य नियमों के तहत कार्य विभाजन के प्रस्ताव कर कुछ कार्य की पॉवर स्थाई रूप से डेलीगेट कर देतेभैं, जिसका अनुमोदन नगर निगम बोर्ड द्वारा किया जाना अनिवार्य है, उक्त प्रस्ताव के बाद ही निगम आयुक्त उप महापौर को पॉवर देने सम्बंधित आदेश निकालता है, सभी जानते है जिनके दोस्त होते हैं उनके दुश्मन , आंतरिक विरोधी भी होते है, ऐसे में भाजपा की रणनीति है के वोह कोंग्रेस मित्रों के ज़रिये बोर्ड की पहली बैठक होने तक कोंग्रेस को प्रतिपक्ष नेता का चयन नहीं होने दे, अगर ऐसा होता है तो बिना प्रतिपक्ष नेता के नेतृत्वविहीन कोंग्रेस पार्षद उपमहापौर के पॉवर मामले में विरोध नहीं कर पाएंगे, दूसरा भाजपा प्लान है, अगर फिर भी विरोध करना हो तो हा हुल्लड़ कर बहिष्कार कर दें , ताकि बहुमत से उपमहापौर कार्य विभाजन पॉवर प्रस्ताव बिना गुप्त मतदान के या हाथ खड़े किए बगैर ही पारित हो जाये, अगर कोंग्रेस नेता प्रतिपक्ष में देरी नहीं करती तुरन्त नेमें असमंजस की ता प्रतिपक्ष , सचेतक, बना देती है, तो कोंग्रेसी पार्षद प्रस्ताव पर बहस की मांग कर सकते है, गुप्त मतविभाजन की मांग कर सकते है, जिससे भाजपा में असमंजस की स्थिति हो सकती है अब देखते हैं , भाजपा के कोंग्रेस में रह रहे फूल छापी कोंग्रेसी वोटर्स, ओर रणनीति के तहत भाजपा को प्रतिपक्ष के नाते मुश्किलों में डालने वाली ओरिजनल कोंग्रेस इस मामले में क्या रणनीति अपनाती है, देखते हैं एक ब्रेक के बाद,, अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339 

देहदानी पति के बाद देहदान संकल्पित पत्नि का भी हुआ देहदान

 

देहदानी पति के बाद देहदान संकल्पित पत्नि का भी हुआ देहदान
2. संस्था शाइन इंडिया के सहयोग से संपन्न हुआ, 78 वाँ देहदान

शाइन इंडिया फाउंडेशन व मेडिकल कॉलेज कोटा के साथ 6 वर्ष पूर्व, बेटी नीता शाह और आरती शाह (आचार्य जेडीबी कॉलेज) के पिता जयंतीलाल शाह और उनकी पत्नी प्रेमलता शाह ने नेत्रदान और देहदान का संकल्प पत्र भरा था । 2 वर्ष पूर्व, जयंतीलाल शाह के आकस्मिक निधन के उपरांत दोनों बेटियों और दामाद कमलेश कुमार शाह ने उनका देहदान संपन्न करवाया था।

आज जब प्रेमलता शाह का आकस्मिक निधन हुआ, तो आरती ने तुरंत ही संस्था शाइन इंडिया को संपर्क किया, इसके उपरांत घर पर नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई और उसके बाद सांई सेवा समिति के मोक्ष रथ की निःशुल्क सेवा से प्रेमलता शाह का पार्थिव शव मेडिकल कॉलेज कोटा में भावी चिकित्सकों के अध्ययन के लिए दान किया गया ।

संस्थापक डॉ कुलवंत गौड़ में बताया कि,संस्था के देहदान जागरूकता के राष्ट्रव्यापी अभियान से अभी तक 78 दिवंगतों के देहदान,वहाँ से सम्बन्धित मेडिकल कॉलेज में संपन्न कराए गए हैं। देहदान के इस पुनीत कार्य में लॉयन्स क्लब कोटा हाड़ौती के सदस्य कमल शर्मा,अलका शर्मा, उपेंद्र जैन का भी सहयोग रहा।

देहदान के समय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल निलेश जैन,एडिशनल प्रिंसिपल डॉ सुमित गुप्ता, एनाटॉमी प्रोफेसर डॉ आरुषि जैन मौजूदथे। मेडिकल कॉलेज में यह इस वर्ष का छठा देहदान है ।

और उन लोगों के ऐसे न हो जाओं जो (मुँह से तो) कहते थे कि हम सुन रहे हैं हालाकि वह सुनते (सुनाते ख़ाक) न थे

 और उन लोगों के ऐसे न हो जाओं जो (मुँह से तो) कहते थे कि हम सुन रहे हैं हालाकि वह सुनते (सुनाते ख़ाक) न थे (21)
इसमें शक नहीं कि ज़मीन पर चलने वाले तमाम हैवानात से बदतर ख़ुदा के नज़दीक वह बहरे गूँगे (कुफ्फार) हैं जो कुछ नहीं समझते (22)
और अगर ख़़ुदा उनमें नेकी (की बू भी) देखता तो ज़रूर उनमें सुनने की क़ाबलियत अता करता मगर ये ऐसे हैं कि अगर उनमें सुनने की क़ाबिलयत भी देता तो मुँह फेर कर भागते। (23)
ऐ ईमानदार जब तुम को हमारा रसूल (मोहम्मद) ऐसे काम के लिए बुलाए जो तुम्हारी रूहानी जि़न्दगी का बाइस हो तो तुम ख़ुदा और रसूल के हुक्म दिल से कुबूल कर लो और जान लो कि ख़ुदा वह क़ादिर मुतलिक़ है कि आदमी और उसके दिल (इरादे) के दरमियान इस तरह आ जाता है और ये भी समझ लो कि तुम सबके सब उसके सामने हाजि़र किये जाओगे (24)
और उस फितने से डरते रहो जो ख़ास उन्हीं लोगों पर नही पड़ेगा जिन्होने तुम में से ज़ुल्म किया (बल्कि तुम सबके सब उसमें पड़ जाओगे) और यक़ीन मानों कि ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब करने वाला है (25)
(मुसलमानों वह वक़्त याद करो) जब तुम सर ज़मीन (मक्के) में बहुत कम और बिल्कुल बेबस थे उससे सहमे जाते थे कि कहीं लोग तुमको उचक न ले जाए तो ख़ुदा ने तुमको (मदीने में) पनाह दी और ख़ास अपनी मदद से तुम्हारी ताईद की और तुम्हे पाक व पाकीज़ा चीज़े खाने को दी ताकि तुम शुक्र गुज़ारी करो (26)
ऐ ईमानदारों न तो ख़़ुदा और रसूल की (अमानत में) ख़्यानत करो और न अपनी अमानतों में ख़्यानत करो हालाँकि समझते बूझते हो (27)
और यक़ीन जानों कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुम्हारी आज़माइश (इम्तेहान) की चीज़े हैं कि जो उनकी मोहब्बत में भी ख़ुदा को न भूले और वह दीनदार है (28)
और यक़ीनन ख़़ुदा के हाँ बड़ी मज़दूरी है ऐ ईमानदारों अगर तुम ख़़ुदा से डरते रहोगे तो वह तुम्हारे वास्ते इम्तियाज़ पैदा करे देगा और तुम्हारी तरफ से तुम्हारे गुनाह का कफ़्फ़ारा क़रार देगा और तुम्हें बख़्ष देगा और ख़़ुदा बड़ा साहब फज़ल (व करम ) है (29)
और (ऐ रसूल वह वक़्त याद करो) जब कुफ़्फ़ार तुम से फरेब कर रहे थे ताकि तुमको क़ैद कर लें या तुमको मार डाले तुम्हें (घर से ) निकाल बाहर करे वह तो ये तद्बीर (चालाकी) कर रहे थे और ख़़ुदा भी (उनके खि़लाफ) तद्बीर कर रहा था (30)

28 सितंबर 2026

कोटा नगर निगम के अच्छे दिन शुरू, विनम्र महापौर अनुसुइया मेडम की विनम्रता, कार्यकुशलता, बोल्डनेस रहेगी सब पर भारी, मिलेगी समझदारों, वफादारों को ज़िम्मेदारी

 

कोटा नगर निगम के अच्छे दिन शुरू, विनम्र महापौर अनुसुइया मेडम की विनम्रता, कार्यकुशलता, बोल्डनेस रहेगी सब पर भारी, मिलेगी समझदारों, वफादारों को ज़िम्मेदारी
कोटा 27 सितंबर कोटा नगर निगम की नवनिर्वाचित महापौर अनुसईया गोस्वामी ,, अपनी बोल्डनेस ,,फेयरनेस वर्किंग के लिए पहचान रखती है , उनके महापौर के इस निर्वाचन से , उनसे ईर्ष्या रखने वाले ऐसे लोग , जिनकी वजह से बाड़ेबंदी का पार्षदों को दर्द सहना पढ़ा , वोह ईर्ष्यालु लोग , चाहे उन्हें असफल करने के कितने ही प्रयास करें , लेकिन अनुसईया की जो प्रतिभा है , जो कार्यशैली है , वोह उन्हें दूसरे महापौरों से बेहतर, अलग ,, लोकप्रिय बना सकते है , महापौर अनुसईया के विज़न में अपने बढे , वृद्ध भाजपाइयों , सहित आम लोगों के प्रति श्रद्धा है , और वोह चाहती है , के कोटा नगर निगम की कार्यशैली , आम जनता के प्रति जवाबदारी , साफ़ सफाई व्यवस्था , आम नागरिकों के लिए सुविधाएं , सौदंर्यकरण , विकास कार्य , गार्डनों की खूबसूरती में निखार , चंबल क्रूज संचालन ,,चंबल शुद्धिकरण , हर गली हर मोहल्ले की व्यवस्थित सफाई व्यवस्था , अतिक्रमण मुक्त कोटा , आवारा जानवरों , आवारा हिंसक स्ट्रीट डॉग्स से मुक्त कोटा , नालियों के ढकान , टूटी सड़कों की मरम्मत , ट्रेफिक पॉइंट्स पर जाम से लोगों की मुक्ति के लिए के डी ऐ से समन्वय स्थापित कर कोटा में विकास , सोंदर्यकरण , सुख सुविधाओं की व्यवस्था , अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ उनके कार्यकाल में ऐतिहासिक रूप से विकसित कर रिकॉर्ड कीर्तिमान बनाये ज़ाहिर है , जब कोई अच्छा करना चाहता है , खासकर वोह जिसे कुछ लोग, हरगिज़ पसंद नहीं करते तो अड़ंगेबाज , अड़ंगे लगाते है , अधिकारीयों के अड़ंगे होते है , लेकिन महापौर अनुसुईया की जो जीवन शैली , कार्यशैली है उससे स्पष्ट है के पहले वोह विनम्रता से समझाइश करेंगी , हाथ जोड़ेंगी , और फिर भी कोटा के विकास , सोंदर्यकरण ,कार्यों में कोई बाधा बना, तो फिर चाहे वोह जो भी हो , उससे वोह उनके गर्म मिजाज़ से निपटना भी जानती है और निपट भी लेंगी , इसलिए सावधान ,, महापौर के विकास सोंदर्यकरण विज़न में जो अड़ंगा लगाकर उन्हें असफल करने , खुद को उनसे बहतर साबित करने के प्रयास करने का विचार बना रहे हों, तो वोह पहले ही सावधान हो जाएँ , इधर नगर निगम में कांग्रेस के क्रॉस वोटर्स को क्या पुरस्कार मिलता है , राजस्व समिति , निर्माण समिति , अतिक्रमण समिति , नए कियोस्क वगेरा आवंटन समिति , पट्टा समिति , मेला समिति , गार्डन समिति , वगेरा वगेरा देखते हैं एक ब्रेक के बाद ,
नगर निगम कोटा के चुनाव पूरे हुए , श्रीमती अनुसूईया गोस्वामी महापौर , विवेक राजवंशी उप महापौर निर्वाचित हुए है ,, कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों की खरीद फरोख्त के साथ नगर निगम का यह खेल अभी और कहाँ तक किस तरह से चलेगा पता नहीं ,, लेकिन वरिष्ठ पार्षद भाई नाचते गाते ,, पूर्व मंत्री शांति कुमार धारीवाल के जुमले कोटा नरक निगम हो गया है , उसे दोहराते हुए कहते के शांति कुमार धारीवाल कोटा नगर निगम को नरक निगम कहते है , लेकिन अब महापौर , उप महापौर की जोड़ी , कोटा को स्वर्ग निगम बनाएंगे , काश ऐसा हो जाए , काश , कोटा नगर निगम पर अव्यवस्थाओ , भ्रष्टाचार , भाई भतीजावाद , रिमोट से संचालित होने का दाग मिट जाए , काश ऐसा हो जाए ,, कोटा नगर निगम के चुनाव किस तरह से हुए , पार्टियों ने किस तरह से चुनाव लड़ा , कोटा का बच्चा बच्चा जानता है , एक तरफ कोटा भाजपा के सभी टिकिट एकल नेतृत्व के पास थे , भाजपा चुनाव रणनीति में अनुशासन था , व्यवस्थाएं थीं , सरकारी अधिकारीयों की खुली मदद थी , जबकि कांग्रेस टुकड़े टुकड़े थी , कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याक्षी को अलग थलग कर दिया गया था , इलाक़े कोटा उत्तर , कोटा दक्षिण ,, लाडपुरा में बांटकर बटवारा हो गया था , जिन्हे टिकिट दिया गया , उन्हें टिकिट देकर लावारिस की तरह छोड़ दिया गया था , वोह खुद अपने स्तर पर चुनाव लड़ रहे थे , कोटा कांग्रेस जिला अध्यक्ष , जिला अध्यक्ष होने के नाते कई वार्डों में गईं ,, शांति धारीवाल भी कुछ वार्डों में गए , प्रह्लाद गुजंल ऑन डिमांड होने से इलाक़े के ठेकेदार बने टिकिट देने वालों की सहमति से गए ,, कई जगह पर कांग्रेस की रसमलाई खाने वाले कुछ लोग , पंजे की जगह कमल पर वोट देने के समर्थन में भी जा रहे थे , ऐसी अफवाहे भी चलीं ,, इन सब गुटबाजियों के बावजूद भी कांग्रेस , भाजपा के खिलाफ आम जनता की नाराज़गी ,, भाजपा की नीतियों के खिलाफ आम जनता के गुस्से की वजह से भाजपा धन ,बल , तोड़फोड़ के बावजूद भी सिर्फ 100 में से 59 पर सिमट कर रह गयी , और सभी अव्यवस्थाओं , सरकारी दबाव , मनमर्ज़ी , गुटबाज़ी , भीतरघातियों , गुटबाज़ी के बावजूद भी कांग्रेस 39 सीटों पर जीत गई , यह आंकड़ा आश्चर्यचकित करने वाला था , कांग्रेस को ऑक्सीजन देने वाला था , दो निर्दलीय कोंग्रेस समर्थक थे ,, तो भाजपा ने दो निर्दलीयों को भाजपा के साथ महापौर चुनाव पूर्व ही मिलाकर अपनी जीत का आंकड़ा 51 के मुक़ाबले 59 होने पर भी , 61 कर लिया , ,, भाजपा में दो शीर्ष पदों की अंदरूनी लड़ाई थी , महापौर उम्मीदवार का नाम चुनाव पूर्व ही घोषित सा था , लेकिन अचानक , महापौर और एक अन्य जिन्हे महापौर नहीं बनाया उनके वार्ड में ,, भाजपा के कुछ चाणक्य लोगों ने , अपने कांटे को हटाने की कोशिशों में शुरुआत की , बात लीक हुई , तो प्रत्याक्षी सजग और सतर्क हो गए , महापौर क्षेत्र के चुनाव में युवा साथियों , निजी वफादार मित्रो , रिश्तेदारों के हाथो में रहा , जो लोग महापौर को पार्षद में ही हराने की कोशिश करना चाहते थे , वोह प्रत्याक्षी की कवच के रूप में बनाई गई रणनीति के आगे विफल रहे , लेकिन बहुत चेहरे , बेनक़ाब हो गए , आखिर में जिसे अल्लाह रखे उसे कौन चखे वाली कहावत चरितार्थ हुई , और महापौर अपने वार्ड में उनकी कुशल इलेक्शन नीति से निर्वाचित हुई , बस पूर्व घोषित प्रत्याक्षी के नाम पर अड़ंगे लगे , तो ज़ाहिर है , क्रॉस वोटिंग का खौफ था , भाजपा ने कोई भी रिस्क नहीं ली , एक कुशल रणनीति के तहत , अपने पार्षदों को तो बाड़े बंदी में रखा, लेकिन कांग्रेस के पार्षद जो खुले छोड़ दिए गये थे , ओवर कॉन्फीडेंट अलग अलग गुट नेतृत्व में थे , उन पर डोरें डाली जाने लगी , धमकाया जाने लगा , बहुत कुछ हुआ , कॉग्रेस ओवर कॉन्फिडेंट रही , और नतीजा , स्पष्ट बहुमत के बाद भी , भाजपा ने कॉग्रेस के पांच पार्षद चोरी कर , कांग्रेस के इलेक्शन प्रबंधन के मुख पर कालिख पोत दी ,, एक सुचना के मुताबिक़ भाजपा के भी सभी पार्षदों में भाजपा के निर्देश पर वोट दिए हो गारंटी नहीं , इसलिए कांग्रेस के कितने पार्षद टूटे स्पष्ट नहीं है , इधर कोटा दक्षिण की महापोर , तो कोटा उत्तर का उप महापौर होना चाहिए , , वेचारिक सैद्धांतिक विवाद छिड़ गया , भाजपा को इस मुद्दे पर सावधानी बरतना थी , भाजपा का उत्तर दक्षिण विधानसभा नेतृत्व संतुलन वोटिंग में था , लेकिन विवेक राजवंशी के अनुभव के आगे भाजपा ने घुटने टेके , उत्तर दक्षिण संतुलन फार्मूले को धता बताई , क्योंकि अब भाजपा के सामने कोई उम्मीदवार ही नहीं था , जबकि उप महापौर के एक दिन पहले की रात भाजपा के लिए संकट की रात होती जा रही थी , अंदर खूब बगावत , रूसा रासी थी , दावेदार तो बाड़ेबंदी से आउट ही हो गए , और खुला मैदान होने से भाजपा ने विवेक राजवंशी का आवेदन करवा दिया , निर्विरोध निर्वाचन हो गया , कोटा ने देखा है , के कोटा महापोर पद पर श्रीमती अनुसुइया के निर्वाचन पर इतनी खुशियां नहीं बनाई गईं ,,, जितनी खुशिया , विवेक राजवंशी के निर्विरोध निर्वाचन पर पार्षदों ने बनाई , इधर अनुसईया महापौर की सादगी ,, ईश्वरीय आस्था के चलते जो उन्होंने कार्य किया , उसे दुष्प्रचारित कर विवादित करने का प्रयास किया ,, खेर कांग्रेस जीती हुई बाज़ी हारी , भाजपा हारी हुई बाज़ी जीती ओर वोह भी , बहुमत के आंकड़े से बहुत अधिक होने पर भी कांग्रेस के वोटों की ऐतिहासिक बढ़ोतरी के साथ , ऐतिहासिक बढ़ोतरी इसलिए के कांग्रेस के इतनी ही संख्या के पार्षदों ने कमोबेश दूसरी बार भाजपा के प्रत्याक्षी के पक्ष में नगर निगम में वोटिंग की है , इसके पहले , जब प्रह्लाद गुंजल ने उप महापौर पद पर , ब्रजेश शर्मा नीटू का फार्म भरवाकर , उप महापौर चुनाव भाजपा वर्सेज़ भाजपा कर दिया था , तब , प्रह्लाद गुंजल चाहते थे , के कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद भाजपा के पक्ष में वोटिंग नहीं कर , निर्दलीय के पक्ष में वोटिंग करें , लेकिन कांग्रेस के निर्वाचितों ने ना जाने किस मन से ,, भाजपा के प्रत्याक्षी को वोट दिया , खेर जो होना था हुआ , पहले भी जिला परिषद के चुनाव में नईमुद्दीन गुड्डू के टाइम पर कांग्रेस के निर्वाचित जिला परिषद सदस्यों ने क्रॉस वोटिंग कर भाजपा के पक्ष में मतदान कर कांग्रेस की जीती हुई बाज़ी शर्मनाक हार में बदल दी थी , यह तो सिस्सट की बात हुई ,, लेकिन महापौर अनुसुइया गोसवामी समझदार है , कुशल नेतृत्व है , बोल्ड है , ,, नाकारा और गुमराह करने वाले अधिकारीयों की चालबाजियां समझकर उन्हें सुधारने की क्षमतावान है , कोटा की नब्ज़ से वाक़िफ़ है , कोटा में अतिक्रमण , साफ़ सफाई , नाली , पटान , टूटफूट , पट्टे मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया से खूब वक़्फ़ियत होने से , बेहतर काम करने का मास्टर प्लान बना चुकी है , और वोह अपने अनुभव के आधार पर , अब तक के महापौरों में से खुद को सबसे बहतर , कुशल प्रबंधक , हर वर्ग , हर समाज , हर वार्ड की समस्याओं के समाधान करते हुए ,, अपनी अलग पहचान बनाने की कार्ययोजना को सम्पादित करने की व्यवस्था जुटा रही है , लेकिन कुछ लोग है , जो होते है , वोह हो सकता है , अड़ंगेबाजी लगाएंगे , आंतरिक चालबाजियां चलेंगे , पॉवरबाज़ी की जंग में मामलों को उलझाने की कोशिश कर सकते है , तो सभी जानते है के अनुसुइया जितनी विनम्र है , उनके सकारात्मक कार्य , कोटा शहर को सुंदर , साफ सुथरा बनाने की कार्ययोजना में अड़ंगा अगर कोई लगाएगा तो फिर ऐसे अड़ंगेबाज़ों को , विनम्र सी दिखने वाली , विनम्रता से हाथ जोड़ने वाली बहन अनुसुइया कोटा के विकास कार्यों के हक़ समर्थन में , गर्म भी हो जाएँगी , और ऐसे लोगों को सबक़ भी सिखाएंगी , खेर कांग्रेस में फिर से एक जंग प्रतिपक्ष के नेता की छिड़ गई है , और जब जंग छिड़ती है , तो कांग्रेस के लोग जब क्रॉसवोटिंग कर सकते है , अभी तक उन पर , निर्दलीयों पर ,कांग्रेस प्रत्याक्षियों को डंके की चोट पर चुनाव हराने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं कर पाती है तो फिर नेता प्रतिपक्ष तो यह कांग्रेस तुरंत किये हुए इस निर्णय को , हफ्तों , महीनों , सालों तक अटका कर भाजपा नगर निगम बोर्ड को , नेता प्रतिपक्ष के बगैर वाकओवर भी काफी टाइम तक दे ही सकती है , खेर अनुसुइया तो कमसे कम उनके वार्ड के वोटर्स , उनके उन्हें इस मुक़ाम तक पहुंचाने वाले लीडर्स की कसौटी पर तो खरी उतरेंगी , लेकिन अनुभव अनुभव के नाम पर वरिष्ठ कहो , या अनुभवी कहो , उनके जुमलों से उनके कान उन्हें ज़रूर क्रोधित करने पर मजबूर कर सकते हैं , ,, कोटा में कांग्रेस के टिकिट पर जीतकर भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले कोंग्रेसी पार्षद , और अपने अपने वार्डों में निर्वाचित पार्षद के वोटर्स के लिए यह अल्फ़ाज़ कभी तो सही साबित होंगे ,, और वोटर्स हों , चाहे क्रॉस वोटर्स पार्षद हों , कभी तो सच इन्ही अल्फ़ाज़ों में समझेंगे ,, ,निगम से पीड़ित हम वोटर्स की तकलीफ भी देखा करो ,,साहिब ऐ कोटा कभी फुटपाथ , अतिक्रमण भी देखा करो , वोट लेकर खानदानी आदमी धोखा नहीं देता कभी , वोटरों , वोट देते वक़्त , तुम जिसे वोट दे रहे हो उसकी औक़ात भी देखा करो , ,, ,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

विश्व पर्यटन दिवस पर संगोष्ठी डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से

 

विश्व पर्यटन दिवस पर संगोष्ठी
डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से
चमकेगा विश्व पर्यटन
विश्व पर्यटन दिवस पर कोटा में रविवार को ऑन लाइन राज्य स्तरीय पर्यटन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्कृति,साहित्य, मीडिया फोरम की ओर से आयोजित संगोष्ठी के संयोजक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल ने प्रारंभ में सभी का स्वागत करते हुए बताया कि इस वर्ष पर्यटन विकास की थीम पर्यटन को फिर से डिज़ाइन करने के लिए डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग रखा गया है। इसका उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर यात्रियों को सहज और बेहतर सेवाएं उपलब्ध करवाना है। पर्यटन की थीम से विश्व पर्यटन को अधिक से अधिक लोगों से जोड़ना है। ए आई से कई केंद्र और राज्य सरकारों ने यात्री सुविधाएं आरामदेह बनाने और अपनी पर्यटन नीतियों और कार्यक्रमों को पुन: डिजाइन करने का कार्य प्रारम्भ कर दिया है। इस थीम पर कार्य करते हुए राजस्थान भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थान दिखाने के लिए सक्रिय हैं।
सार्वजनिक पुस्तकालय -कोटा संभाग के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा इंटरनेट और स्मार्टफोन ने जहाँ पर्यटन को पहले ही आसान बनाया है, वहीं अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर्यटन की पूरी व्यवस्था को एक नए दौर में ले जाने की क्षमता रखती है। आने वाले समय में ए आई सभी यात्री सेवाओं को एकीकृत करके पर्यटक के लिए व्यक्तिगत डिजिटल यात्रा सहायक की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने पुस्तकालय पर्यटन की आधुनिक अवधारणा पर पर भी विस्तार से विचार व्यक्त किए।
राजस्थान तकनीकी विश्विद्यालय के कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने कहा कि ए आई का के उपयोग से एक अच्छा पर्यटक यात्री बनने भी मदद मिलेगी। पर्यटन विकास की दिशा में एक अच्छा यात्री बनने के लिए जरूरी है कि पर्यटन शिक्षा को सभी सरकारें आवश्यक रूप से पाठ्यक्रम में शामिल करें। कई देशों में ऐसा किया जा चुका है और भारत में इस दिशा में पहल स्वागत योग्य है।
भारतीय रेल सेवा के सेवा निवृत इंजीनियर अनुज कुच्छल ने कहा कि आधुनिक, सुरक्षित, पारदर्शी और पर्यटक-केंद्रित बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन बुकिंग, स्मार्ट गाइड, ए आई चैटबॉट, वर्चुअल टूर, बहुभाषी सहायता एवं डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं को विस्तार देने की दिशा में कार्य किया जाएगा। ए आई का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग व्यक्तिगत पर्यटन योजना तैयार करने में कर सकेंगे ।
साहित्यकार विजय जोशी ने पर्यटन और भारतीय संस्कृति के साथ मनोरंजन, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ए आई का लाभ स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प, होम-स्टे, छोटे होटल, स्थानीय परिवहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है। पर्यटक बढ़ेंगे, स्थानीय व्यवसाय बढ़ेंगे, रोजगार बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
एडवोकेट अख्तर खान अकेला ने एडवेंचर टूरिज्म के बढ़ते क्रेज की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि ए आई का उपयोग करते समय सावधानी भी बरतनी होगी। प्रत्येक जानकारी सही हो, यह जरूरी नहीं है। ऐतिहासिक तथ्यों, कीमतों, मौसम, मार्ग और स्थानीय सूचनाओं में त्रुटि संभव है। इसके अतिरिक्त पर्यटक के व्यक्तिगत आँकड़े, स्थान, पसंद और यात्रा इतिहास की गोपनीयता भी महत्वपूर्ण विषय होंगे। इसलिए भविष्य का पर्यटन कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित होने के साथ-साथ मानवीय सत्यापन और गोपनीयता के प्रति सजग भी होना चाहिए।
वन्यजीव प्रेमी विजय प्रकाश माहेश्वरी ने पर्यटन में वन्यजीव अभयारण्यों का महत्व प्रतिपादित कर कहा कि आज पर्यटन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसे बढ़ावा देने में ए आई से इन्हें अधिक आकर्षक रूप से प्रदर्शित किया जा सकेगा।
सलूंबर की बाल साहित्यकार डॉ. विमला भंडारी ने कहा कि पर्यटन बच्चों में जिज्ञासा बढ़ता है और सोचने समझने का प्रबल माध्यम बनता है। पर्यटन बच्चों में समय, यात्रा का प्रबंधन, सहकार भावना, आपात समय में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। इसमें ए आई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
झालावाड़ के इतिहासविद ललित शर्मा ने राजस्थान के हाड़ौती अंचल की भव्य पुरासंपदा की विस्तार से जानकारी देते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा इस दिशा में तेजी से प्रयास नहीं किए गए तो यह संपदा नष्ट हो जाएगी। ए आई से इसके संरक्षण की योजना बनाई जानी चाहिए। इतिहासविद डॉ. सुषमा आहूजा ने पर्यटन में परम्परागत लघु चित्र शैलियों की भूमिका और इतिहासविद फिरोज़ अहमद में हाड़ौती में पर्यटन पर विचार व्यक्त किए।
साहित्यकार श्वेता शर्मा ने पर्यटन विकास में विभिन्न प्रांतों की वेशभूषा का महत्व, राम मोहन कौशिक ने पर्यटन में सहायक परिवहन माध्यम, विजय कुमार शर्मा ने लजीज व्यंजनों का पर्यटन विकास में महत्व, संदीप द्विवेदी ने धार्मिक पर्यटन और मंदिरों की पर्यटन में भूमिका ,डॉ. कृष्णा कुमारी ने पर्यटन यात्राओं का महत्व, देवेंद्र सक्सेना ने देश के संगीत समारोहों की भूमिका,राजेंद्र कुमार जैन ने जैन मंदिरों की भूमिका, शिक्षाविद् .राजेंद्र कुमार निर्मल ने विश्व पर्यटन में बूंदी का स्थान पर विचार व्यक्त किए । अंत में फोरम की सह संयोजक डॉ. वैदेही गौतम ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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आयोजक
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल, कोटा

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