छत्तीस क़ौमों के ऐतिहासिक कोटा मेले को दागदार करके , समुदाय ,, भाषा के आधार पर , बदनाम करने की साज़िश करने वालों के मुख पर कालिख पुती है ,, महापौर कोटा अनुसुइया गोस्वामी ने खुद अपने हाथों में व्यवस्थाएं नियंत्रित की है , जो मेले को दागदार बनाने के साज़िशकर्ता रहे , उन्हें , मेले की व्यवस्थाओं को छूने भी नहीं दिया ,, महापौर कोटा ने बता दिया कि ,,महापोर का पद ही सर्वोपरि है , धन , बल , अनुभवों का रोना रोकर कोई भी महापौर के हक़ , अधिकार , रुतबे को कम करते हुए अतिक्रमित नहीं कर सकता , और यही वजह रही की मेले की शुरआत के पहले दशहरे में विजयादशमी के दिन ,, जो पहले रावण के पुतले को सर्वाधिक ऊँचा बनाने का अनुभवहीन जूनून था , जिसकी वजह से कोटा दशहरे में मुख्यमंत्री भजनलाल जी के सामने कोटा की किरकरी हुई ,, रावण जला नहीं , घटनाओं के साथ दुर्घटनायें होती होती बचीं ,,, और मेले के बाद कार्यक्रमों के कारण भी बदनामी हुई , दुकानों में लूटपाट ,, की शिकायतें आम हुईं , कई लोगों ने कोटा मेले के आमद , खर्च , दूकान आवंटन , कार्यक्रम खर्च वगेरा के मामले में , ऐंटी करप्पशन से भी जांच कराने की भी मांग की , लेकिन इस बार खुद महापौर अनुसईया गोस्वामी के हाथों में अधिकारों का अतिक्रमण करने वालों से अलग हटकर , सम्पूर्ण व्यवस्थाएं है , खुद महापौर अपने अधीनस्थों और तजुर्बेकारों से मशवरा कर व्यवस्थाएं देख रही हैं , ऐसे में उन्होंने कई व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का प्रयास किया है , मेले के कई बिगड़े हालातों में सकारात्मक सुधार किया है , ,कार्यक्रमों की सूचि रेडीमेड बनाकर उनके हाथों में सौंपी गई थी , तो उसमे तो वोह क्या पर पातीं , लेकिन कवि सम्मेलन में उर्दू शायरा ,, मशहूर शायर स्वर्गीय राहत इन्दोरी की पूर्व पत्नी श्रीमती अंजुम रहबर को बुलाने की स्वीकृति ,, कवि सम्मेलन कार्य्रकम में चार चाँद लगा देने जैसा है यह मेला छत्तीस क़ौमों का है यह तो नहीं कहा जा सकता , लेकिन जिन हालातों में उनके हाथों में कार्यक्रमों की सूचि थी , उसमे मेले को छत्तीस क़ौमों की तरह बनांने का प्रयास तो है , अन्य कार्यक्रमों की छीजत को भी उन्होंने जांचा है, निजी तौर पर खंगाला है, खेर ,,कहते हैं , ना लड़की हूँ कर सकती हूँ , वही काम महापौर अनुसुइया गोस्वामी कर रही हैं , उन्हें अबला समझकर कोई अनुभवों के नाम पर , उनके अधिकारों को पूर्व की तरह अतिक्रमित कर खुद को कोई बढ़ा साबित करना चाहे तो यह गलत फहमियां उन्होंने निकाल दी है , उन्होंने साबित कर दिया है के वोह बेहतर प्रबंधन जानती है , बेहतर मेला भरवा सकती हैं , पार्टी ,, पार्टी के नेताओं और विपक्ष में भी सामंजस्य बिठाकर कोटा के संरक्षण , सफाई व्यवस्था , मेले के बेहतर प्रबंधन के लिए अपने ,, अपने निजी सलाहकारों के दम पर पहले के लोगों से बेहतर कर सकती है , उन्हें चमचे , चापलूसों , अधिकारों का अतिक्रमण कर खुद को ही ,, हम ही सब कर रहे ,हैं ऐसे प्रचारको से अलग रखकर वोह बेहतर करने का प्रयास कर रही हैं , और अगर ऐसा ही कठोर नियंत्रित प्रबन्धन चला तो ठेकेदारों की कमीशन खोरी , ठेके दिलाने के नाम पर रुतबागीरी , वगेरा वगेरा जैसे कई लोगों की दुकाने बंद हो जाएंगी , और अनुसुइया गोस्वामी बेहतर प्रबंधक के रूप में बोल्ड महापौर के रूप में अपनी इमेज बनाकर सर्वश्रेष्ठ खुद को साबित करने में सफल हो जाएंगी ,, ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
23 अक्टूबर 2026
राजस्थान में अधिस्वीकृत पत्रकारों को राजस्थान रोडवेज में मुफ्त यात्रा की सुविधा, दिल्ली तक मिलेगा लाभ
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे
(और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मषग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौषन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है (61)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे (62)
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़़ुदा से) डरते थे (63)
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की जि़न्दगी में भी और आखि़रत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है (64)
और (ऐ रसूल) उन (कुफ़्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक नहीं कि सारी इज़्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है (65)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फजऱ्) शररीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख़्याली बातें किया करते हैं (66)
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं) (67)
लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यूही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो (68)
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें (69)
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आखि़र हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख़्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें (70)
22 अक्टूबर 2026
अशफाक़-बिस्मिल: आज़ादी की लड़ाई में एकता की मिसाल
अशफाक़-बिस्मिल: आज़ादी की लड़ाई में एकता की मिसाल
कोटा आज विज्ञान नगर स्थित एक निजी शिक्षण संस्थान वाई, जी, एन इंस्टीट्यूट में अमर शहीद अशफाकउल्लाह खान का जन्म दिन मनाया गया। इस अवसर पर बोलते हुए उम्मीद एक सेवा संस्था के अध्यक्ष डॉ. रियाज़ खान ने बताया कि, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल संघर्ष और बलिदान की गाथा नहीं है, बल्कि यह उस भारत की तस्वीर भी पेश करता है जिसमें धर्म और मजहब से ऊपर उठकर देश की आज़ादी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। शहीद अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ और राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती इसी भावना का एक ऐतिहासिक उदाहरण है।
22 अक्टूबर 1900 को शाहजहाँपुर में जन्मे अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ युवावस्था में ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ गए। वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य बने। इसी संगठन के माध्यम से उनकी निकटता राम प्रसाद बिस्मिल से हुई। दोनों की विचारधारा और धार्मिक पृष्ठभूमि अलग थी, लेकिन देश की स्वतंत्रता का लक्ष्य दोनों को एक सूत्र में बांधता था।
इस अवसर पर बोलते हुए ए एम पी कोटा प्रभारी सिराज अहमद अंसारी ने कहा कि, 9 अगस्त 1925 का काकोरी ट्रेन एक्शन भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन की महत्वपूर्ण घटना बना। इस कार्रवाई के बाद अंग्रेजी सरकार ने क्रांतिकारियों पर शिकंजा कस दिया। अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ को गिरफ्तार किया गया और काकोरी षड्यंत्र मामले में उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया।
19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद जेल में अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ को फाँसी दे दी गई। उसी दिन राम प्रसाद बिस्मिल और रोशन सिंह को भी फाँसी दी गई। तीनों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
अशफाक़ और बिस्मिल की मित्रता आज भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि स्वतंत्रता आंदोलन की ताकत केवल हथियार या संगठन नहीं थे, बल्कि साझा राष्ट्रीय उद्देश्य भी था। वाई जी एन इंस्टीट्यूट के निदेशक अरशद अंसारी ने कहा कि, एक मुसलमान क्रांतिकारी अशफाक़ और एक हिंदू क्रांतिकारी बिस्मिल का साथ उस दौर में एक ऐसा संदेश था जिसे अंग्रेजी शासन की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के संदर्भ में भी देखा जाता है।
अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ शायर भी थे। उनकी रचनाओं में वतन से मोहब्बत और बलिदान की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उनका जीवन इस बात की याद दिलाता है कि आज़ादी केवल किसी एक समुदाय की उपलब्धि नहीं थी; इसके लिए भारत के अलग-अलग धर्मों और वर्गों के लोगों ने साथ मिलकर संघर्ष किया था।
कार्यक्रम का संचालन नूर अहमद पठान ने किया। उन्होंने कहा कि, आज जब हम स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को याद करते हैं, तो अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ और राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती केवल अतीत का एक अध्याय नहीं रह जाती। यह उस साझा भारतीय विरासत की याद दिलाती है जिसमें देश पहले था और बाकी पहचानें उसके बाद।
अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ का बलिदान इसलिए अमर है कि उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया कि वतन की मोहब्बत किसी मजहब की मोहताज नहीं होती।
सादर प्रकाशनार्थ
दैनिक....
सद्भावी
नूर अहमद पठान
मो. 9571310137
फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर इमान लाओगे (आहा) क्या अब (इमान लाए) हालाकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे
फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर इमान लाओगे (आहा) क्या अब (इमान लाए) हालाकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे (51)
फिर (क़यामत के दिन) ज़ालिम लोगों से कहा जाएगा कि (अब हमेशा के अज़ाब के मजे़ चखो (दुनिया में) जैसी तुम्हारी करतूतें तुम्हें (आखि़रत में) वैसा ही बदला दिया जाएगा (52)
(ऐ रसूल) तुम से लोग पूछतें हैं कि क्या (जो कुछ तुम कहते हो) वह सब ठीक है तुम कह दो (हाँ) अपने परवरदिगार की कसम ठीक है और तुम (ख़ुदा को) हरा नहीं सकते (53)
और (दुनिया में) जिस जिसने (हमारी नाफरमानी कर के) ज़ुल्म किया है (क़यामत के दिन) अगर तमाम ख़ज़ाने जो जमीन में हैं उसे मिल जाएँ तो अपने गुनाह के बदले ज़रुर फिदया दे निकले और जब वह लोग अज़ाब को देखेगें तो इज़हारे निदामत करेगें (शर्मिंदा होंगें) और उनमें बाहम इन्साफ़ के साथ हुक्म दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा (बराबर ज़ुल्म न किया जाएगा (54)
आगाह रहो कि जो कुछ आसमानों में और ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है आग़ाह राहे कि ख़ुदा का वायदा यक़ीनी ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं (55)
वही जि़न्दा करता है और वही मारता है और तुम सब के सब उसी की तरफ लौटाए जाओगें (56)
लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से नसीहत (किताबे ख़़ुदा आ चुकी और जो (मरज़ शिर्क वगै़रह) दिल में हैं उनकी दवा और ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत (57)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (ये क़़ुरान) ख़़ुदा के फज़ल व करम और उसकी रहमत से तुमको मिला है (ही) तो उन लोगों को इस पर खुश होना चाहिए (58)
और जो कुछ वह जमा कर रहे हैं उससे कहीं बेहतर है (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम्हारा क्या ख़्याल है कि ख़ुदा ने तुम पर रोज़ी नाजि़ल की तो अब उसमें से बाज़ को हराम बाज़ को हलाल बनाने लगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या ख़ुदा ने तुम्हें इजाज़त दी है या तुम ख़ुदा पर बोहतान बाँधते हो (59)
और जो लोग ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बाधा करते हैं रोजे़ क़यामत का क्या ख़्याल करते हैं उसमें शक नहीं कि ख़़ुदा तो लोगों पर बड़ा फज़ल व (करम) है मगर उनमें से बहुतेरे शुक्र गुज़ार नहीं हैं (60)