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23 जुलाई 2026

ऐ अहले किताब तुम क्यो हक़ व बातिल को गड़बड़ करते और हक़ को छुपाते हो हालांकि तुम जानते हो

 ऐ अहले किताब तुम क्यो हक़ व बातिल को गड़बड़ करते और हक़ को छुपाते हो हालांकि तुम जानते हो (71)
और अहले किताब से एक गिरोह ने (अपने लोगों से) कहा कि मुसलमानों पर जो किताब नाजि़ल हुयी है उसपर सुबह सवेरे ईमान लाओ और आखि़र वक़्त इन्कार कर दिया करो शायद मुसलमान (इसी तदबीर से अपने दीन से) फिर जाए (72)
और तुम्हारे दीन की पैरवरी करे उसके सिवा किसी दूसरे की बात का ऐतबार न करो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बस ख़ुदा ही की हिदायत तो हिदायत है (यहूदी बाहम ये भी कहते हैं कि) उसको भी न (मानना) कि जैसा (उम्दा दीन) तुमको दिया गया है, वैसा किसी और को दिया जाय या तुमसे कोई शख़्स ख़ुदा के यहाँ झगड़ा करे (ऐ रसूल तुम उनसे) कह दो कि (ये क्या ग़लत ख़्याल है) फ़ज़ल (व करम) ख़ुदा के हाथ में है वह जिसको चाहे दे और ख़ुदा बड़ी गुन्जाईश वाला है (और हर शै को) जानता है (73)
जिसको चाहे अपनी रहमत के लिये ख़ास कर लेता है और ख़ुदा बड़ा फ़ज़लों करम वाला हे (74)
और एहले किताब कुछ ऐसे भी हैं कि अगर उनके पास रूपए की ढेर अमानत रख दो तो भी उसे (जब चाहो) वैसे ही तुम्हारे हवाले कर देंगे और बाज़ ऐसे हें कि अगर एक अशरफी भी अमानत रखो तो जब तक तुम बराबर (उनके सर) पर खड़े न रहोगे तुम्हें वापस न देंगे ये इस वजह से है कि उन का तो ये क़ौल है कि (अरब के) जाहिलो (का हक़ मार लेने) में हम पर कोई इल्ज़ाम की राह ही नहीं और जान बूझ कर खुदा पर झूठ (तूफ़ान) जोड़ते हैं (75)
हाँ (अलबत्ता) जो शख़्स अपने अहद को पूरा करे और परहेज़गारी इख़्तेयार करे तो बेशक ख़ुदा परहेज़गारों को दोस्त रखता है (76)
बेशक जो लोग अपने अहद और (क़समे) जो ख़ुदा (से किया था उसके) बदले थोड़ा (दुनयावी) मुआवेज़ा ले लेते हैं उन ही लोगों के वास्ते आखि़रत में कुछ हिस्सा नहीं और क़यामत के दिन ख़ुदा उनसे बात तक तो करेगा नहीं ओर न उनकी तरफ़ नज़र (रहमत) ही करेगा और न उनको (गुनाहों की गन्दगी से) पाक करेगा और उनके लिये दर्दनाम अज़ाब है (77)
और एहले किताब से बाज़ ऐसे ज़रूर हैं कि किताब (तौरेत) में अपनी ज़बाने मरोड़ मरोड़ के (कुछ का कुछ) पढ़ जाते हैं ताकि तुम ये समझो कि ये किताब का जुज़ है हालांकि वह किताब का जुज़ नहीं और कहते हैं कि ये (जो हम पढ़ते हैं) ख़ुदा के यहाँ से (उतरा) है हालांकि वह ख़ुदा के यहाँ से नहीं (उतरा) और जानबूझ कर ख़ुदा पर झूठ (बोहतान) जोड़ते हैं (78)
किसी आदमी को ये ज़ेबा न था कि ख़ुदा तो उसे (अपनी) किताब और हिकमत और नबूवत अता फ़रमाए और वह लोगों से कहता फिरे कि ख़ुदा को छोड़कर मेरे बन्दे बन जाओ बल्कि (वह तो यही कहेगा कि) तुम अल्लाह वाले बन जाओ क्योंकि तुम तो (हमेशा) किताबे ख़ुदा (दूसरो) को पढ़ाते रहते हो और तुम ख़ुद भी सदा पढ़ते रहे हो (79)
और वह तुमसे ये तो (कभी) न कहेगा कि फ़रिश्तों और पैग़म्बरों को ख़ुदा बना लो भला (कहीं ऐसा हो सकता है कि) तुम्हारे मुसलमान हो जाने के बाद तुम्हें कुफ्र का हुक्म करेगा (80)

22 जुलाई 2026

कोटा के रियार्थ ने कराटे में जीता स्वर्ण

 

कोटा के रियार्थ ने कराटे में जीता स्वर्ण
गुरुग्राम। सेक्टर-27 स्थित कम्युनिटी सेंटर में स्पोर्ट्स शितोकाई कराटे फेडरेशन इंडिया के तत्वावधान में प्रथम अंतर्राज्यीय शितोकाई कराटे चैंपियनशिप आयोजन किया गया , जिसमें हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित विभिन्न प्रदेशों के खिलाडिय़ों ने भाग लिया। साई कराटे अकादमी के खिलाडिय़ों ने काता और कुमिते स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए 39 पदक अपने नाम किए और ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। कोटा के रियार्थ माहेश्वरी,7वर्ष, पुत्र परेश माहेश्वरी ने कुमिते वर्ग में स्वर्ण और काता में ब्रोंज मेडल अपने नाम किया।साई कराटे अकादमी के संस्थापक सुनील सैनी ने बताया कि कार्यक्रम में अतिथियों के रुप में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज अखिल कुमार, पद्मश्री सुनील डबास, खेलो इंडिया के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर सुनील राठी, वसुधैव कुटुम्बकम् सेवा संस्थान के संरक्षक सुरेंद्र सैनी, कोच विक्की यादव, भाजपा नेता युगवीर सिंह, देव समाज विद्या निकेतन के प्रबंधक कांडास्वामी नटराजन, अधिवक्ता जितेंद्र सैनी, अंशुल सैनी, रैफरी हरीश सिराधन शामिल हुए। सभी ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अकादमी युवाओं को खेलों के लिए प्रशिक्षत कर आगे बढऩे के लिए बेहतर मार्ग प्रशस्त कर रही है। भविष्य में ये खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व कर नाम रोशन करेंगे। सुनील का कहना है कि कोच विक्रम और कोच बंटी के साथ मिलकर खिलाडिय़ों ने 3 माह तक कड़ा अभ्यास किया। कड़े अनुशासन, कड़ी मेहनत से ही यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हो सकी है। कार्यक्रम को सफल बनाने में धर्मेन्द्र फौजी, धर्मेन्द्र, सुकेश सैनी, सतीजा, अशोक सैनी का सहयोग रहा।

मौत बनकर नाक में फंसी खुली सेफ्टी पिन,

 

मौत बनकर नाक में फंसी खुली सेफ्टी पिन,
डॉ. राजकुमार जैन, डॉ. शेमेन्द्र कुमार, डॉ. मुकेश सोमवंशी एवं डॉ. शिल्पी की टीम ने बचाई ढाई साल के नितिन की जान
के डी अब्बासी
कोटा। नैनवा निवासी मुकेश के ढाई वर्षीय पुत्र नितिन की जान कोटा के चिकित्सकों की सूझबूझ और कुशलता से बच गई। मासूम की नाक के पीछे, जहां दिमाग और गला (एडिनॉइड क्षेत्र) मिलता है, वहां एक खुली हुई सेफ्टी पिन फंस गई थी। अत्यंत जटिल एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के बाद चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक पिन निकालकर बच्चे को सुरक्षित बचा लिया।
जानकारी के अनुसार, बच्चा 20 जुलाई की शाम से ही इस समस्या से जूझ रहा था। पहले उसे नैनवा में दिखाया गया, जहां से बूंदी और फिर कोटा रेफर किया गया। बूंदी में भी पिन नहीं निकल सकी। इसके बाद 21 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजे बच्चे को कोटा लाया गया।
जांच में पता चला कि सेफ्टी पिन नाक के पीछे एडिनॉइड क्षेत्र में फंसी हुई थी। चिकित्सकों ने एंडोस्कोपी शुरू की, लेकिन नाक के भीतर काफी मात्रा में खून जमा होने के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। डॉक्टरों ने पहले सक्शन के माध्यम से खून हटाकर रास्ता साफ किया, तब जाकर खुली हुई सेफ्टी पिन दिखाई दी।
चूंकि पिन खुली हुई थी, इसलिए उसे निकालने के दौरान गंभीर चोट (ट्रॉमा) का खतरा बना हुआ था। चिकित्सकों ने अत्यंत सावधानी और कुशलता से ऑपरेशन करते हुए शाम करीब 6 बजे सेफ्टी पिन सफलतापूर्वक बाहर निकाल दी। वर्तमान में बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है।
इस सफल उपचार में डॉ. राजकुमार जैन, डॉ. शेमेन्द्र कुमार, डॉ. मुकेश सोमवंशी एवं डॉ. शिल्पी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
चिकित्सकों की सलाह
डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को सेफ्टी पिन, साधारण पिन, मूंगफली, मटर, चना, गेहूं के दाने, मोती-माला के मोती, रबर के टुकड़े जैसी छोटी या नुकीली वस्तुएं खेलने के लिए न दें। ऐसी वस्तुओं को हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर रखें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है

चलती ट्रेन में मौत को मात: ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे ने अपनी जान जोखिम में डालकर यात्री को बचाया

 

चलती ट्रेन में मौत को मात: ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे ने अपनी जान जोखिम में डालकर यात्री को बचाया
के डी अब्बासी
कोटा/इटारसी। भारतीय रेल की सेवा भावना और मानवता का प्रेरणादायक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब गाड़ी संख्या 12753 में यात्रा कर रहे एक यात्री की जान ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे की सूझबूझ और साहस से बच गई।
जानकारी के अनुसार, यात्री सुशील पाटिल मनमाड़ से भोपाल सामान्य कोच में यात्रा कर रहे थे। इटारसी यार्ड में ट्रेन रुकने पर वे पानी लेने के लिए नीचे उतरे। इसी दौरान उनका बैग, जिसमें नकदी, टिकट और अन्य आवश्यक सामान रखा था, चोरी हो गया। बैग की तलाश में वे व्यस्त हो गए और तभी ट्रेन चल पड़ी।
घबराहट में सुशील पाटिल ने चलती ट्रेन के अंतिम डिब्बे पर चढ़ने का प्रयास किया। ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे ने उन्हें ऐसा करने से मना किया, लेकिन यात्री ने जल्दबाजी में छलांग लगा दी और संतुलन बिगड़ने से ट्रेन के साथ घिसटने लगे। स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी।
ऐसे संकटपूर्ण क्षण में ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे ने अपनी जान की परवाह किए बिना यात्री का हाथ मजबूती से पकड़कर उन्हें ट्रेन के अंदर खींच लिया। इस दौरान स्वयं रोमेश चौबे भी गिर पड़े, लेकिन उन्होंने यात्री का हाथ नहीं छोड़ा। उनकी बहादुरी और तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।
घटना में यात्री के पैर में चोट और सूजन आ गई। उनके पास खाने के लिए भी कुछ नहीं था, इसलिए ट्रेन मैनेजर ने उन्हें केले उपलब्ध कराए और हरसंभव मानवीय सहायता प्रदान की।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भारतीय रेल केवल यात्रियों को उनके गंतव्य तक ही नहीं पहुंचाती, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनके जीवन की रक्षा के लिए भी पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता से खड़ी रहती है।
उल्लेखनीय है कि रोमेश चौबे वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के जोनल मीडिया हेड एवं मंडल उपाध्यक्ष हैं। इसके साथ ही वे ऑल इंडिया ट्रेन मैनेजर ग्रुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
"मानवता सबसे बड़ा धर्म है और यात्री की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता।"
रोमेश चौबे की यह साहसिक एवं मानवीय पहल भारतीय रेल की सेवा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण बन गई है।

जिस तरह युवा लाठियों,

 

जिस तरह युवा लाठियों, बंदूकों के आगे खड़े हैं और कह रहे हैं कि क्या करोगे भाई दो चार हड्डियाँ तोड़ लोगे, हम तो निहत्थे हैं, तोड़ लो , मगर यहाँ से हटेंगे नहीं, यहीं रहेंगे.
और कोई लीडर नही इनका
बिना नेता के यह एकजुटता?
यह जज़्बा?
भरोसा नही हो रहा
यह इक्कीसवीं सदी के
25 वें साल की युवा पीढ़ी है
वे गाँधी को गोली से नहीं मार पाए,
गाँधी अब तक जिंदा है और
इस देश में हमेशा ज़िंदा रहेंगे,

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