आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
01 मार्च 2026
समरस संस्थान की झालावाड़ इकाई गठित
ऐसा नहीं की सिर्फ मेरी नहीं सुनता..
मुख्यमंत्री का 7 मार्च को प्रस्तावित कोटा दौरा*
शाइन इंडिया के सहयोग से कोटा और चेचट में संपन्न हुए नेत्रदान
शाइन इंडिया के सहयोग से कोटा और चेचट में संपन्न हुए नेत्रदान
2. कोटा में नेत्रदान संपन्न करवाने के बाद, 70 किलोमीटर दूर,चेचट में डॉ गौड़ ने लिया नेत्रदान
15
वर्ष पूर्व कोटा से प्रारंभ हुआ,शाइन इंडिया फाउंडेशन का नेत्रदान
अभियान,अब हाडोती के 200 किलोमीटर के दायरे में एक अच्छी पहचान बना चुका है
। शोक की घड़ी में परिजनों से,यदि कोई व्यक्ति नेत्रदान के बारे में चर्चा
करता है तो,परिवार से तुरंत सहमति मिल जाती हैं ।
इसी क्रम में आज
सुबह रामपुरा निवासी पदम कुमार टोंगिया की धर्मपत्नी गुणमाला जैन का
आकस्मिक निधन हुआ । पदम के करीबी मित्र, प्रदीप पाटनी ने तुरंत ही पदम और
उनके बेटे मनोज निलेश से गुणमाला के नेत्रदान करवाने की चर्चा की,जिस पर
सभी ने सहमति दे दी । इसके उपरांत,संस्था शाइन इंडिया के सहयोग से,निवास
स्थान पर नेत्रदान प्रक्रिया संपन्न हुई ।
इसी नेत्रदान के ठीक
उपरांत, शाइन इंडिया की रामगंजमंडी शाखा के शहर संयोजक संजय विजावत ने
सूचना दी कि उनके मित्र,सुशील व अनिल डागा की समझाइश पर,ब्राह्मणों के
चौक,चेचट निवासी अरविंद कुमार जैन का निधन हुआ है ,और उनकी पत्नी तेजकुमारी
और बेटे योगेश ने नेत्रदान के लिए सहमति दे दी है ।
सूचना प्राप्त
होते ही,कोटा से डॉ कुलवंत गौड़ 70 किलोमीटर दूर,चेचट पहुंचे,परिवार के सभी
सदस्यों के बीच में डॉ गौड़ ने परिजनों के बीच अरविंद के पार्थिव देव से
नेत्र संकलित किये। नेत्रदान के उपरांत संस्था की ओर से शोकाकुल परिवार के
सदस्यों को प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया
और अपने ख़ास बन्दों पैग़म्बरों से हमारी बात पक्की हो चुकी है
और अपने ख़ास बन्दों पैग़म्बरों से हमारी बात पक्की हो चुकी है (171)
कि इन लोगों की (हमारी बारगाह से) यक़ीनी मदद की जाएगी (172)
और हमारा लश्कर तो यक़ीनन ग़ालिब रहेगा (173)
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे एक ख़ास वक़्त तक मुँह फेरे रहो (174)
और इनको देखते रहो तो ये लोग अनक़रीब ही (अपना नतीजा) देख लेगे (175)
तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं (176)
फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडे़गा तो जो लोग डराए जा चुके हैं उनकी भी क्या बुरी सुबह होगी (177)
और उन लोगों से एक ख़ास वक़्त तक मुँह फेरे रहो (178)
और देखते रहो ये लोग तो खु़द अनक़रीब ही अपना अन्जाम देख लेगें (179)
ये लोग जो बातें (खु़दा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज़्ज़त का मालिक पाक साफ है (180)
और पैग़म्बरों पर (दुरूद) सलाम हो (181)
और कुल तारीफ खु़दा ही के लिए सज़ावार हैं जो सारे जहाँन का पालने वाला है (182)