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23 सितंबर 2026

राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा विभिन्न सहयोग योजनान्तर्गत 16.74 लाख रुपये का सहयोग स्वीकृत

 

साहित्य जगत की खुशखबर
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आर्थिक सहायता स्वीकृत
सभी को हार्दिक बधाई.......
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राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर
सेक्टर 4. हिरणमगरी उदयपुर (राज.) 313 002 दूरभाष (0294) 2461717
दिनांक : 01.05.2026
राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा विभिन्न सहयोग योजनान्तर्गत 16.74
लाख रुपये का सहयोग स्वीकृत
पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग योजना में कुल 112 पांडुलिपियों (11.95 लाख रुपये). प्रकाशित ग्रंथों पर सहयोग योजना में 21 पुस्तकों पर (1.74 लाख रुपये), साहित्यिक पत्र-पत्रिका सहयोग योजना में जुल 09 पत्र-पत्रिकाओं पर (1.80 लाख रूपये) एवं साहित्यकार आर्थिक सहयोग योजना में 05 साहित्यकारों को (1.25 लाख रु) के सहयोग स्वीकृत किए गए।
अकादमी सचिव डॉ. बंसत सिंह सोलंकी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-2026 में अकादमी द्वारा पांडुलिपि प्रकाश सहयोग योजनान्तर्गत अग्राकिंत 112 पाण्डुलिपियों को स्वीकृत किया गया है। काव्य विधा में (84) कथा/उपन्यास विधा में (21), निंबंध / आलोचना में (02), नाटक-एंकाकी-विविध (05) काव्य विधा में अग्रांकित
पाण्डुलिपियां स्वीकृत हुई है- बातों ही बातों में (गिरजा शंकर त्रिवेदी, उदयपुर), प्रकृति के प्रतिबिम्ब (डॉ. प्रहलाद राय, उदयपुर), मौग प्रस्थान (डॉ. मनीष सक्सेना, उदयपुर), सितारे मीर के रंग के (प्रेरणा सारवान, अजमेर), उम्मीद अभी जिन्दा है (सन्जू श्रृंगी, कोटा), मन वृन्दावन (डॉ. राधिका लबा, उदयपुर), सौभद्र (हेमराज सिंह हेम, कोटा), भीष्म फिर नौन क्या? (मृदुल पुरोहित, बांसवाडा), सराबोर (डॉ. मीना बया, उदयपुर), भाव सुमन कृष्णार्पण (वीणा मावर, अजमेर), नय रस गगरी छलकी जाएं (सुश्री लता शर्मा, अजमेर), प्रेमरूप (अनुराग सिहरा, करौली), अलसाया तन-मन (राम गोपाल गौतम, कोटा) एक मों, एक मैं, एक सफर (नन्दनी शर्मा, उदयपुर), चेतना के गवाक्ष डॉ. (सुरेश चतुर्वेदी, सुमनेश, भरतपुर), फिर शाम हो गई (दमन त्रिपाठी, बालोतरा), ये सफर कहाँ रखूँ (श्याम लाल निर्मोही चींगरा, बीकानेर), शुभम् सौदर्य (देवीलाल जोशी, डूंगरपुर), रंग बदलते चेहरे (अशीष कुमार मीना, जोधपुर), सत्य के करीब हूँ में (अद्विका सांचीहर नाथद्वारा), किवाड़ पर दस्तक (डॉ. संजीदा (चन्द्रवीर गर्ग, आबदार, बाड़मेर), लहरों से सीखा नौका ने (हरिओम शर्मा हरि, भरतपुर) बहते बहते दरिया बोला खानन, 'शाहीन, जोधपुर), रण ग्यालाएँ (सोनू सुरीला, बारां), अन्तर्मन की गठरी (शैलजा विजयवर्गीय, कोटा), काव्य गंगोत्री (डॉ. शंकर लाल शर्मा, उदयपुर), संवेदनाओं की खनक (विनोद कुमार उपाध्याय, उदयपुर), शबरी के घर आए राम (नाथूलाल निर्भय, बारा), मन की उम्मीद हार ना माने (किरण सांधव, बूंदी), कोमल कोमल प्यारे फूल (सुरेशचन्द्र निगम, झालावाड), दिल की गली से (सुनील दीक्षित, उदयपुर), प्रयास (गजेन्द्र सिंह राजपुरोहित, मावली), कामिनी की रागनी (डॉ. कामिनी व्यास रावल, उदयपुर), चलो चलें उस पार (घतूर सिंह कृष्णा, भरतपुर), सेतु-बंध
(रामलाल चौधरी, जयपुर), प्यास पनघट की (हरीशचन्द्र शर्मा हरि, डीग), इस जीत को अनाम रहने दो (मीनाक्षी नागदा, उदयपुर), तुमसे होकर... (डॉ. मनीषा शर्मा, नाथद्वारा), आजादी के बाद (ओमप्रकाश साहू, बारा), प्रेम गली अत्ति सौकरी (प्रेम प्रकाश शर्मा, अलवर), रंगीन काँच की खिड़कियों (डॉ. रमेशचन्द्र मीणा, दौसा), नन्हा जोकर (डॉ. प्रियंका, शर्मा, उदयपुर), तेरे शहर में... (श्रीमती कुन्दन सिंह कंचन, जयपुर), सहज बाल पहेली कोष (अनीला शर्मा, अजमेर), सोचा ना था (पूजा अग्रवाल, जोधपुर), थोड़ी जमी थोड़ा आसमान (डॉ. प्रीति शर्मा, झालावाड), कैसे भुला दूँ (अनुराग प्रेमी, दौसा), पानी लिखता रहा आग की कहानी (भविष्य दत्त भविष्य, उदयपुर), नन्हें मुन्ने चमन के फूल (रामकरण प्रमाती, कोटा), अस्तित्व स्पन्दन (प्रो निर्मल गर्ग, उदयपुर), मांटी की गंध (श्याम सिंह, भरतपुर), आठ अरब प्रेम-पत्र और अन्य कविताएं (गोपाल नामेन्द्र, कोटा), मयंकोदय (विनीत स्यामी विनोद, चूरू), मेरा प्यारा गांव (सुरेश कुमार गौतम, कोटा), आँगन के फूल (रविकान्त पारीक रवि, जयपुर), रूपोदय (रूपनारायण शर्मा, कोटा), यदि संभव हो (आनंद कुमार पुरोहित, बीकानेर), यादों के सफर में था तू (डॉ. छगनराज राव 'दीप', जोधपुर), शब्दों की सौरभ (नन्दकिशोर निर्भर, चित्तौडगढ़), साथ मेरे रहीं मेरी तन्हाइयों (खुर्शीद शेख युाशीद, उदयपुर), एक कविता सुनोगे (डॉ. पीयूष गर्ग, उदयपुर), आओ स्त्री बोलो (यानु चौबीसा, उदयपुर), आशाओं के पंख (सुनील कुमार चाष्टा, सलूम्बर), आवाज नहीं देते आंसू (मनोज कुमार, हनुमानगड), खिड़की वाली सीट से देखते हुए (हर्षिल पाटीदार, डूंगरपुर), कुछ मेरी भी (डॉ. सुबोध पालीवाल, उदयपुर), कल्पनाएं बाल मन की (मेघा शर्मा, डूंगरपुर), जीवन का लट्टू (अरूण कुमार सक्सेना, अजमेर), परवाज ए-सुखन (नईम खां पठान हारिस, सवाईमाधोपुर), कमल की कस्तूरी (भंवर लाल डांगी, जोधपुर), समय चुप है हमारे भीतर तक (डॉ. नविन दये मानावल, जालोर), पत्रांजन (कुसुम भारद्वाज, उदयपुर), परिंदों के डोरे (सुभाष शर्मा, उदयपुर), गंतव्य (तारावती सैनी नरज, जयपुर), काव्य रारिता (डॉ. नम्रता जैन, उदयपुर), नदी बार-बार मुड़ती है (प्यार चंद साथी, भीलवाडा) शब्दों की सरगम (कपिला पालीवाल, बीकानेर) काव्यामर्थ (सीमा लोहिया, झुंझुनू), मेरे तटबंध (दीक्षा त्यागी, धौलपुर), कायनात (अब्दुल वहीद खिलजी 'वाहिद', मकराना), गुरु थे हिन्द की यादर (शिवराज भारतीय, हनुमानगढ़) अनकी (महेन्द्र सिंह शेखावत, श्रीगंगानगर) खरोंच (शिवगपाल दुरताबा, डीडवाना) कथा/उपन्यास रेत का झरना (रिडमलदान, बाड़मेर), अन्त्येक्ष (संतोष ताकर, जोधपुर), दादाजी की कहानियां (श्याम बिहारी जोशी, जयपुर) गुल्लक और उसकी रजाई (अंजना मनोज गर्ग, कोटा) दमयन्ती (शिखा मंनमोहन शर्मा, जयपुर) अनजाने फरिश्ते (गजेन्द्र भट्ट, उदयपुर) प्लीज हेल्प मी (विजय पड्या, डूंगरपुर) वेलेंटाइन डे गिफ्ट (गोविन्द सिंह राव, जालौर) कुरुक्षेत्र / दो फूल (सुमेर
कहूँ शशि पाठक, जयपुर ऋणं कृत्या घृत पिवेत् (लक्ष्मी, सोलंकी, उदयपुर) सचमुच का परी देर सपन जैन संजू उदयपुर) नीली कीमा बोलिया, भीलवाडा) वो कागज की कश्ती (अशोक मुखर्जी, जयपुर) आओ सुनें कहानी (प्रस्तुति महावर, कोटा) आरील पंछी (श्रीमती आरती चित्तौडा, उदयपुर) कितने मन-कितने दरवाजे (डॉ. बजरंग सोनी, जयपुर) देहरी पार (मंजु शर्मा जांगिड, मनी, जोधपुर) मन की धूप (सुमन लता शर्मा, बूंदी)
निबन्ध / आलोचना में हूं कोरोना इक्कीसवीं सदी का (कासिम अली कासिम कावेरी, बीकानेर), सिनेमा, सबाल्टर्न और साहित्य (डॉ. सुनिता अवस्थी, अजमेर)
नाटक-एकाकी-विविध विधा: जज़्बा (योग्यता इसरानी, टोक) एकांकी-विविधा (प्रेमांशुराम मेहता 'प्रेम', डूंगरपुर), अरे ये तो मैं हूंअिमित शाह, बांसवाडा) दो बीसी व्यंग्य (छगन लाल व्यास, बालोतरा) मानवीय आंतरिक महा भारत (शंकर लाल तिवारी, अलाय) ।
21 पुस्तकों पर सहयोग स्वीकृत किया गया है। बेटी की अभिलाषा (मधु माहेश्वरी, सलूम्बर), ख्वाबों की दुनिया (ज्योति वधवा, बीकानेर), धूप और धरती का प्रेम (कुलदीप सिंह भाटी, जोधपुर), मंदोदरी (अवधेश शर्मा, जयपुर), रंगबिरंगी तितली रानी (योगीराज योगी, कोटा), जानिए अक्षर वर्ण (देवकी दर्पण, बूंदी), मेरा उपयन (महेश पंचोली, कोटा), सतसई प्रेम की (प्रेम शास्त्री, कोटा), अंतर्मन की कहानियां (एम.एल.चतुर्वेदी निशांत, अजमेर), ब्रह्मपुत्र से सांगपो (दयाराम वर्मा, जयपुर), गीत मेरे भीत मेरे (सुभाष चंद्र शर्मा, जयपुर), अर्द्ध विराम (डॉ. योगेश कुमार पाठक, उदयपुर), भज गोविन्दम (साकार श्रीवास्तव 'फलक', जयपुर), मोटा शेर मवाए शोर (काली चरण राजपूत, कोटा), रिटायर्ड सुदामा (कमल रंगा, बीकानेर), गीतामृतम् (राधेश्याम शर्मा, कोटा), जीवन साधना (राकेश 'राजस्थानी, भरतपुर). बगीचे में हलचल (सत्येन्द्र छिब्बर जोधपुर), सपने देखती लडकीयां (पवन सिहाग 'अनाम', हनुमानगढ़), अस्तोदय (प्रशांत टेहल्यानी, कोटा), यर्तिका (वीणा मावर 'वर्तिका', किशनगढ़)।
राजस्थान साहित्यकार आर्थिक सहयोग वर्ष 2025-2026 में कुल 05 साहित्य कारों को आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। सर्वश्री श्री राजाराम भादू, जयपुर श्री ब्रह्मानन्द बाबा, बोरी चित्तौडगढ़, श्रीमती पूर्णिमा मित्रा, बीकानेर, श्री रामस्वरूप किसान, नोहर, श्री गोविन्द जोशी, बीकानेर।
साहित्यिक पत्र-पत्रिका सहयोग योजना में कुल 09 पत्रिकाओं को सहयोग योजना में (1.25 लाख रुपये) स्वीकृत किया गया है। अक्षय लोकजन, अलख दृष्टि (त्रैमासिक), नवसृजन (छः माही), बाल वाटिका (मासिक), अरावली उद्‌घोष (त्रैमासिक), माही संदेश (मासिक), मरू नयकिरण (त्रैमासिक), साहित्यांचल (द्विमासिक), बच्चों का देश (मासिक)।
(डॉ.बसंत सिंह सोलंकी) सचिव

​कोटा के रहने वाले विकास सक्सेना को राजस्थानी फिल्म 'बैरन' के लिए मिला सर्वश्रेष्ठ डीओपी (बेस्ट सिनेमैटोग्राफर) का सम्मान*

 

​कोटा के रहने वाले विकास सक्सेना को राजस्थानी फिल्म 'बैरन' के लिए मिला सर्वश्रेष्ठ डीओपी (बेस्ट सिनेमैटोग्राफर) का सम्मान*
​कोटा (विशेष संवाददाता):
हाड़ौती की धरा और कोटा शहर के लिए एक बेहद गर्व और हर्ष का विषय है। कोटा के निवासी और प्रख्यात सिनेमैटोग्राफर (DOP) विकास सक्सेना को राजस्थानी फिल्म 'बैरन' में उत्कृष्ट छायांकन (Cinematography) के लिए राजस्थान सिनेमा अवॉर्ड्स (RCA 2026) में सर्वश्रेष्ठ डीओपी के सम्मान से नामांकित किया गया है।
​राजस्थान सिनेमा अवॉर्ड्स के 7वें वार्षिकोत्सव समारोह का भव्य आयोजन 'द विंटेज विलेज रिसॉर्ट', चौमूं (जयपुर) में आयोजित किया गया। इस राज्यस्तरीय समारोह में राजस्थान सिनेमा जगत की कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की।
​फिल्म 'बैरन' में दिखी बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी
*​निर्देशक जी. नटराज* के निर्देशन में बनी राजस्थानी फिल्म ' *बैरन* ' में *विकास सक्सेना* ने अपनी बेहतरीन और जीवंत सिनेमैटोग्राफी से हर दृश्य को पर्दे पर खूबसूरती से उकेरा है। फिल्म के दृश्यों, लाइटिंग और कैमरे के प्रयोग को समीक्षकों एवं दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया है।
​इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में रिया सैनी, अभिषेक शर्मा, राखी रंगीली, हंसा रंगीली और विशा पाराशर मुकेश छैला और संतोष कंवर. जैसे लोकप्रिय कलाकारों ने अपने अभिनय का जलवा बिखेरा है। कलाकारों के सशक्त अभिनय उत्कृष्ट कैमरा वर्क ने फिल्म को एक अलग ही ऊंचाई प्रदान की है।
​विकास सक्सेना को मिले इस राज्यस्तरीय सम्मान की खबर मिलते ही कोटा शहर के कला एवं सिनेमा जगत में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय कलाकारों, शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी और भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
​विकास सक्सेना ने इस सफलता का श्रेय फिल्म के निर्देशक जी. नटराज, समस्त स्टार कास्ट, क्रू मेंबर्स तथा कोटावासियों के अटूट प्रेम और आशीर्वाद को दिया है।

कोटा विश्वविद्यालय में मानवता की मिसाल: भूगोल सम्मेलन में लगा नेत्रदान-अंगदान- देहदान का स्टॉल, 23 छात्रों ने भरे नेत्रदान संकल्प पत्र



कोटा विश्वविद्यालय में मानवता की मिसाल: भूगोल सम्मेलन में लगा नेत्रदान-अंगदान- देहदान का स्टॉल, 23 छात्रों ने भरे नेत्रदान संकल्प पत्र

कोटा, 17 सितंबर। ICSSR द्वारा प्रायोजित राजस्थान भूगोल परिषद (RGA) के 52वें राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के अवसर पर कोटा विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष मानवता का स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहा।

"विकसित भारत 2047 - एक भौगोलिक दृष्टिकोण" विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में जहाँ देशभर के भूगोलवेत्ता विकसित भारत की रूपरेखा पर मंथन कर रहे थे, वहीं शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा द्वारा नेत्रदान, अंगदान और देहदान जागरूकता के लिए स्टॉल लगाकर विकसित भारत के लिए सबसे जरूरी - मानवीय दृष्टिकोण की अलख जगाई गई।

सम्मेलन में पधारे मुख्य अतिथि श्री हनुमान सिंह राठौड़, मुख्य वक्ता प्रो. एच.एस. शर्मा, कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत सहित सभी फैकल्टी, प्रोफेसर्स और छात्र-छात्राओं ने स्टॉल पर पहुंचकर जानकारी ली।

युवाओं में दिखा जबरदस्त उत्साह:

इस अवसर पर युवाओं में सेवा भाव का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला।

कुल 23 विद्यार्थियों ने नेत्रदान के संकल्प पत्र भरकर मृत्यु के बाद भी दो लोगों की जिंदगी में रोशनी बनने का प्रण लिया, वहीं 12 युवाओं ने अंगदान का संकल्प लेकर मानवता की सबसे बड़ी सेवा के लिए हाथ बढ़ाया।

फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने बताया कि "विकसित भारत सिर्फ सड़कों और इमारतों से नहीं बनेगा, बल्कि तब बनेगा जब युवा मृत्यु के बाद भी जीवन देने की सोच रखेगा। कोटा विश्वविद्यालय के छात्रों ने आज यह साबित कर दिया।"

कार्यक्रम में प्रो. संतोष आनंद (अध्यक्ष RGA), प्रो. एस.एस. भट्ट (महासचिव RGA) सहित आयोजन मंडल ने इस पहल की सराहना की।

या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो बाप दादाओं ही ने पहले शिर्क किया था और हम तो उनकी औलाद थे (कि) उनके बाद दुनिया में आए तो क्या हमें उन लेागों के ज़ुर्म की सज़ा में हलाक करेगा जो पहले ही बातिल कर चुके

 

तो (ऐ रसूल यहूद को याद दिलाओ) जब हम ने उन (के सरों) पर पहाड़ को इस तरह लटका दिया कि गोया साएबान (छप्पर) था और वह लोग समझ चुके थे कि उन पर अब गिरा और हमने उनको हुक्म दिया कि जो कुछ हमने तुम्हें अता किया है उसे मज़बूती से पकड़ लो और जो कुछ उसमें लिखा है याद रखो ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ (171)
और उसे रसूल वह वक़्त भी याद (दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने आदम की औलाद से बस्तियों से (बाहर निकाल कर) उनकी औलाद से खुद उनके मुक़ाबले में एक़रार कर लिया (पूछा) कि क्या मैं तुम्हारा परवरदिगार नहीं हूँ तो सब के सब बोले हाँ हम उसके गवाह हैं ये हमने इसलिए कहा कि ऐसा न हो कहीं तुम क़यामत के दिन बोल उठो कि हम तो उससे बिल्कुल बे ख़बर थे (172)
या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो बाप दादाओं ही ने पहले शिर्क किया था और हम तो उनकी औलाद थे (कि) उनके बाद दुनिया में आए तो क्या हमें उन लेागों के ज़ुर्म की सज़ा में हलाक करेगा जो पहले ही बातिल कर चुके (173)
और हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं और ताकि वह लोग (अपनी ग़लती से) बाज़ आए (174)
और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्स का हाल पढ़ कर सुना दो जिसे हमने अपनी आयतें अता की थी फिर वह उनसे निकल भागा तो शैतान ने उसका पीछा पकड़ा और आखि़रकार वह गुमराह हो गया (175)
और अगर हम चाहें तो हम उसे उन्हें आयतों की बदौलत बुलन्द मरतबा कर देते मगर वह तो ख़ुद ही पस्ती (नीचे) की तरफ झुक पड़ा और अपनी नफसानी ख़्वाहिश का ताबेदार बन बैठा तो उसकी मसल है कि अगर उसको धुत्कार दो तो भी ज़बान निकाले रहे और उसको छोड़ दो तो भी ज़बान निकले रहे ये मसल उन लोगों की है जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो (ऐ रसूल) ये कि़स्से उन लोगों से बयान कर दो ताकि ये लोग खुद भी ग़ौर करें (176)
जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया है उनकी भी क्या बुरी मसल है और अपनी ही जानों पर सितम ढाते रहे (177)

राह पर बस वही शख़्स है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे और जिनको गुमराही में छोड़ दे तो वही लोग घाटे में हैं (178)
और गोया हमने (ख़ुदा) बहुतेरे जिन्नात और आदमियों को जहन्नुम के वास्ते पैदा किया और उनके दिल तो हैं (मगर कसदन) उन से देखते ही नहीं और उनके कान भी है (मगर) उनसे सुनने का काम ही नहीं लेते (खुलासा) ये लोग गोया जानवर हैं बल्कि उनसे भी कहीं गए गुज़रे हुए यही लोग (अमूर हक़) से बिल्कुल बेख़बर हैं (179)

और अच्छे (अच्छे) नाम ख़ुदा ही के ख़ास हैं तो उसे उन्हीं नामों में पुकारो और जो लेाग उसके नामों में कुफ्र करते हैं उन्हें (उनके हाल पर) छोड़ दो और वह बहुत जल्द अपने करतूत की सज़ाए पाएगें (180)

22 सितंबर 2026

कोटा में कई वारिसों के होने के बावजूद भी , कोटा का लावारिस हुआ जर्नलिज़्म

 

कोटा में कई वारिसों के होने के बावजूद भी , कोटा का लावारिस हुआ जर्नलिज़्म
कोटा 22 सितम्बर ,, कोटा की पत्रकारिता जो कभी आग उगला करती थी , मंत्री हो चाहे मुख्यमंत्री हों , चाहै वरिष्ठ से भी वरिष्ठ अधिकारी हों , प्रेस कॉन्फ्रेंस में थोड़ी भी देरी होने पर, उनके कार्यक्रम , उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस का बायकॉट कर उन्हें झुकाने की ताक़त रखती थी , आज वही पत्रकारिता जी हुज़ूरी में फंसी हुई है , हालात यह हैं के कोटा में कई दर्जन पत्रकार संरक्षण संगठन होने के बावजूद भी , कोटा के कई वारिसों के बावजूद भी , कोटा का जर्नलिज़्म लावारिस सा नज़र आने लगा है , जी हाँ दोस्तों , चाहे राजीव गाँधी की कोटा यात्रा हो , मोरारजी देसाई ,, वी पी सिंह ,, चंद्रशेखर ,,लालकृष्ण आडवाणी सहित कोई भी वी वी आई पी यात्रा हो , उस वक़्त भी कोटा की पत्रकारिता रिपोर्टिंग सिद्धांतों के नाम पर प्रशासन हो , कांग्रेस ,भाजपा के नेता हों उन पर, हमेशा हावी रही है , लेकिन अब हालात बदल गए है , पत्रकारिता बदल गई है , पत्रकारिता में नेताओं के बगलगीर , स्पोक्सपर्सन , सर्विस प्रोवाइडर , प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजक , कार्यक्रम ईवेंट मैंनेजमेंट वर्कर या फिर पार्टी प्रचारक , पत्र प्रकाशन संस्थान में संस्थान के मालिक , सम्पादक के हुक्म की मर्ज़ी से लिखने वाले नौकर बन गए है , पहले भी जब पत्रकारों पर ऊँगली उठती थी , ज़ुल्म , ज़्यादती होती थी , नेताओं द्वारा कुछ दलालों के ज़रिये पत्रकार बहिष्कार अभियान का डेमेज कंट्रोल होता था , इक्का दुक्का ज़रूर ऐसे होते थे , जो कहते थे , हम तो पत्रकार नहीं , बढे संस्थान के नौकर हैं , इसलिए हम इस बहिष्कार में साथ नहीं देंगे ,, क्योंकि हमारी तो नौकरी है , और नौकरी नहीं करेंगे तो नौकरी को खतरा होगा , लेकिन इक्का , दुक्का इन लोगों की नेताओं की नौकरी के बावजूद भी , नेता कोई भी हो पत्रकारों का सम्मान करते थे , उनकी सुनते थे , और उनकी जो भी दुःख , तकलीफ , या अपमानकारी वारदात होती थी , उसके लिए लिखित में , मौखिक, सार्वजनिक क्षमा मांगकर मामला रफा दफा करते थे , और अगर कोई हमला , कोई धमकी की वारदात होती थी , तो उसे निष्पक्ष रूप से तुरन्त उसके कृत्य के अनुरूप दंडित भी किया जाता था , लेकिन आज वोह दिन हवा हो गए , वैसे भी पत्रकारिता के गुट हो गए , अलग अलग कई दर्जन संगठन हो गए , कुछ के भाई साहब हो गए , तो कुछ के नियंत्रक दूसरे हो गए , संगठन कहने को तो पत्रकारों के हैं , लेकिन पत्रकारों के हित , संवर्धन , संरक्षण ,उत्साहवर्धन , सुविधा , पत्रकारिता प्रशिक्षण , सुरक्षात्मक व्यवस्थाओं के मामले में ,, कोटा जर्नलिज़्म लावारिस जर्नलिज़्म सा हो गया है , यू ट्यूबर , दैनिक , साप्तहिक , अधिस्वीकृत , गैर अधीस्वीवक़ृत , साप्ताहिक , पाक्षिक , मासिक, दैनिक , हिंदी , अंग्रेजी , स्वतन्त्र, वगेरा वगेरा ना जाने कितने दलों में पत्रकार बटे हुए हैं , लेकिन उन्हें सोचना चाहिए , अलग अलग टुकड़ों में बंट जाने से कोई फ़र्क़ नहीं पढ़ता , पत्रकार तो पत्रकार ही है , क़लम उसकी सिफ़्त है ,, फिर सभी एकजुट होकर , पत्रकार पर हमला होने , उनके साथ मारपीट , धक्का मुक्की होने , मोबाइल छीनने , छीनकर फेंक देने जैसी घटनाये हों , रिपोर्टिंग से रोका जाए , धमकाया जाए , पत्रकारों को थाना घेरना पढ़े , एफ आई आर तक लिखने के लाले पढ़ जाएँ , एफ आई आर कैसे लिखना चाहिए इसका प्रशिक्षण तक ना हो , आपात स्थिति में हमला होने पर किन किन नंबर से मदद मांगे , किस किस ई मेल आई डी पर हमलावरों की शिकायत करें , वगेरा वगेरा का एडवांस प्रशिक्षण तो है ही नहीं , उलटे यह मेरा सदस्य नहीं , यह पत्रकार नहीं , यह फलाना है , इससे हमे क्या लेना देना , जैसे जुमलों के साथ बढ़ी घटनाओं पर भी उपेक्षित व्यवहार होता है ,और इसीलिए कोटा जर्नलिज़्म जो कभी सभी को झुकाने की हिम्मत रखती थी , कोटा जर्नलिज़्म जिसका बढे बढे सूरमाओं से टकराकर उन्हें झुकाने का इतिहास रहा है आज वोह खुद , लावारिस सी , टूटी फूटी सी हो रही है , ज्ञापन देने वाले , पुलिस अधीक्षक , आई जी , कलेक्टर , मंत्री , मुख्यमंत्री , सांसद , नताओं से पत्रकारों पर हुए हमले को लेकर जवाब तलब करने के हिम्मत वाले भी नहीं है ,, , हाल ही में कोटा में एक गंभीर घटना हुई , वार्ड 87 कोटा नगर निगम उप चुनाव में भाग संख्या 99 के पुनर्मतदान में रिपोर्टिंग करते वक़्त ,, एक पत्रकार पर हमला, फिर दूसरे पत्रकार पर हमला हुआ ,, मोबाइल रिपोर्टिंग करते वक़्त छीना गया , छिनवाया गया , छीनकर फेंका गया , धक्का मुक्की , धमकिया हुईं , खुद पत्रकार के साथ की जा रही हमलावर हरकतों का विडिओ बनाने के निर्देश हुए , ,, फिर पत्रकार एक जुट हुए ,, गूगल , ऐ आई का सहारा लेकर , एफ आई आर दर्ज करवाई गई , एफ आई दर्ज हुई , कार्यवाही नहीं होने , तुरंत नामज़द लोगों के गिरफ्तार नहीं होने पर पत्रकारों को थाने के बाहर धरने पर बैठना पढ़ा , लेकिन एफ आई आर नंबर 383 / 2026 पुलिस थाना महावीर नगर , सामान्य धाराओं में नामज़द मनीष महावर , मनीष खींची ,, देवेंद्र मामा के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज हुई , जांच अभी भी चल रही है , कोई भी एफ आई आर आम आदमी की भी होती है , तो कार्यवाही होती है , अगर एफ आई आर के तथ्य सही होते हैं , तो आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही होती है , और अगर गलत तथ्यों पर एफ आई आर होती है , तो एफ आई आर करवाने वाले के खिलाफ कार्यवाही का प्रावधान है , इस मामले में , पत्रकारों के धरने के वक़्त , सत्ता पक्ष की तरफ से खुला वायदा किया गया , लेकिन कार्यवाही अभी तक ठंडे बस्ते में बंद है , पुलिस तो इंस्ट्रूमेंट है , अधिकारी इंस्ट्रूमेंट बने है , रात्रि मनोरंजन विश्राम पर चले जाते हैं, अगर वोह निष्पक्ष जांच करना चाहते तो पुनर्मतदान के वक़्त उनके अपने कैमरे भी चालू थे , उसमे सच देख लेते , खेर सभी अपने अपने लोगों को बचाते है , लेकिन पत्रकारों को यह किया हो गया है , अलग , अलग दलों अलग अलग संगठनों में बंट गए हैं , बंटे रहो , लेकिन अगर पत्रकारिता पर रिपोर्टिंग के वक़्त हमला हो , तो फिर तो एक जुट होना ज़रूरी है , वोह राहत इन्दोरी का शेर है ना , के लगेगी आग तो तुम्हारे घर भी आएंगे ज़द में , यहां कोई अकेला मेरा ही मकान थोड़ी है ,, पत्रकारों में कोई छोटा कोई बढ़ा नहीं होता, पत्रकार तो पत्रकार ही होता है, ऐसे में पत्रकार संगठन कोई भी हो पत्रकारों के अधिस्वीकरण, डी पी आर, डी ऐ वी पी, रजिस्ट्रार पत्रकार कार्यालय, विज्ञापन, हमले जैसी कोई भी समस्या हो सभी को एक जुट होना चाहिए, यह वक़्त एक दूसरे को छोटा, बढ़ा, ब्लेकमेलर, असली, फ़र्ज़ी कहने का नहीं संघर्ष का है, रियायती दर पर भूखण्ड दिलवाने, चाणक्यपुरी आवास योजना बहाल करवाने, पत्रकारों पर हमले के वक़्त हमलावरों को क़ानूनी सबक़ सिखाने, पत्रकार क़ानूनी ओर पत्रकारिता हित संवर्धन प्रशिक्षण दिलवाने सहित कई काम है वोह करवाओ तो सही, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

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