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05 अप्रैल 2026

जीवन भर देश सेवा, मरणोपरांत भावी चिकित्सकों के लिये किया देहदान

 

जीवन भर देश सेवा, मरणोपरांत भावी चिकित्सकों के लिये किया देहदान
2. छुट्टी के दिन,देहदानी के सम्मान में,मेडिकल कॉलेज खुला, संपन्न हुआ देहदान

शनिवार देर रात गुरु नानक धाम कॉलोनी ,झालीपुरा,बारां रोड निवासी सेवानिवृत्ति डिप्टी एसपी सुबोध कुमार सिंह का आकस्मिक निधन शहर के एक निजी अस्पताल में हुआ । सुबोध आईजी ऑफिस,कोटा से सेवानिवृत हुए थे । इससे पहले वह झालावाड़,बूंदी और भरतपुर क्षेत्र में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे । 

अपने काम से लोहा मनवाने वाले,सुबोध ने अपना पूरा जीवन सत्य और ईमानदारी के साथ देश सेवा में लगा दिया । एक वर्ष पूर्व ही उन्होंने अपना देहदान संकल्प पत्र परिजनों की सहमति से भर दिया था । आज देहांत के उपरांत सुबोध की पत्नी सरिता,बेटा प्रभात रघुवंशी ने कोटा मेडिकल कॉलेज को कई बार संपर्क किया, परिवार के सदस्य मेडिकल कॉलेज कोटा भी गए,परंतु कोई रिस्पांस नहीं मिलने के बाद, कोटा की संस्था शाइन इंडिया को संपर्क किया। 

सूचना मिलते ही संस्था शाइन इंडिया से डॉ कुलवंत गौड़, दिवंगत के निवास स्थान पर पहुंचे और देह चिकित्सा सेवा के लिए उपयोगी है या नहीं इस बारे में जानकारी प्राप्त की । देह की उपयुक्तता को देखते हुए, डॉ गौड़ ने बेटे प्रभात से पिता की देह को मेडिकल कॉलेज,बारां ले जाने का अनुरोध किया। 

थोड़ी देर बाद परिजनों की सहमति प्राप्त होते ही, दिवंगत सुबोध के भाई वैभव रघुवंशी,अतुल रघुवंशी,हेमंत पराशर,प्रमोद कुमार,और सिद्धार्थ लोधा के सहमति से शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम मृत देह को कोटा से 80 किलोमीटर दूर, बारां मेडिकल कॉलेज में ससम्मान भावी चिकित्सकों के अध्ययन के लिए दान करके आयी ।

क्या उन लोगों के (बनाए हुए) ऐसे शरीक हैं जिन्होंने उनके लिए ऐसा दीन मुक़र्रर किया है जिसकी ख़़ुदा ने इजाज़त नहीं दी और अगर फ़ैसले (के दिन) का वायदा न होता तो उनमें यक़ीनी अब तक फैसला हो चुका होता और ज़ालिमों के वास्ते ज़रूर दर्दनाक अज़ाब है

 क्या उन लोगों के (बनाए हुए) ऐसे शरीक हैं जिन्होंने उनके लिए ऐसा दीन मुक़र्रर किया है जिसकी ख़़ुदा ने इजाज़त नहीं दी और अगर फ़ैसले (के दिन) का वायदा न होता तो उनमें यक़ीनी अब तक फैसला हो चुका होता और ज़ालिमों के वास्ते ज़रूर दर्दनाक अज़ाब है (21)
(क़यामत के दिन) देखोगे कि ज़ालिम लोग अपने आमाल (के वबाल) से डर रहे होंगे और वह उन पर पड़ कर रहेगा और जिन्होने ईमान क़़ुबूल किया और अच्छे काम किए वह बेहिष्त के बाग़ों में होंगे वह जो कुछ चाहेंगे उनके लिए उनके परवरदिगार की बारगाह में (मौजूद) है यही तो (ख़़ुदा का) बड़ा फज़ल है (22)
यही (ईनाम) है जिसकी ख़़ुदा अपने उन बन्दों को ख़ुशख़बरी देता है जो ईमान लाए और नेक काम करते रहे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं इस (तबलीग़े रिसालत) का अपने क़रातबदारों (एहले बैत) की मोहब्बत के सिवा तुमसे कोई सिला नहीं मांगता और जो शख़्स नेकी हासिल करेगा हम उसके लिए उसकी ख़ूबी में इज़ाफा कर देंगे बेशक वह बड़ा बख्शने वाला क़दरदान है (23)
क्या ये लोग (तुम्हारी निस्बत कहते हैं कि इस (रसूल) ने ख़़ुदा पर झूठा बोहतान बाँधा है तो अगर (ऐसा) होता तो) ख़़ुदा चाहता तो तुम्हारे दिल पर मोहर लगा देता (कि तुम बात ही न कर सकते) और ख़ुदा तो झूठ को नेस्तनाबूद और अपनी बातों से हक़ को साबित करता है वह यक़ीनी दिलों के राज़ से ख़ूब वाकि़फ है (24)
और वही तो है जो अपने बन्दों की तौबा क़ुबूल करता है और गुनाहों को माफ़ करता है और तुम लोग जो कुछ भी करते हो वह जानता है (25)
और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे उनकी (दुआ) क़़ुबूल करता है फज़ल व क़रम से उनको बढ़ कर देता है और काफ़िरों के लिए सख़्त अज़ाब है (26)
और अगर ख़ुदा ने अपने बन्दों की रोज़ी में फराख़ी कर दे तो वह लोग ज़रूर (रूए) ज़मीन से सरकशी करने लगें मगर वह तो बाक़दरे मुनासिब जिसकी रोज़ी (जितनी) चाहता है नाजि़ल करता है वह बेषक अपने बन्दों से ख़बरदार (और उनको) देखता है (27)
और वही तो है जो लोगों के नाउम्मीद हो जाने के बाद मेंह बरसाता है और अपनी रहमत (बारिश की बरकतों) को फैला देता है और वही कारसाज़ (और) हम्द व सना के लायक़ है (28)
और उसी की (क़ु़दरत की) निशानियों में से सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करना और उन जानदारों का भी जो उसने आसमान व ज़मीन में फैला रखे हैं और जब चाहे उनके जमा कर लेने पर (भी) क़ादिर है (29)
और जो मुसीबत तुम पर पड़ती है वह तुम्हारे अपने ही हाथों की करतूत से और (उस पर भी) वह बहुत कुछ माफ़ कर देता है (30)

04 अप्रैल 2026

अंगदान के जागरूकता प्रयासों से बचाए जा सकते हैं कई अनमोल जीवन - डॉ गौड़

 अंगदान के जागरूकता प्रयासों से बचाए जा सकते हैं कई अनमोल जीवन - डॉ गौड़
2. शाइन इंडिया के नेत्रदान अंगदान के नवाचारों को मिली राष्ट्रीय पहचान

आईआईएम इंस्टीट्यूट अहमदाबाद में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अंगदान महादान विषय पर विशेष आयोजित कॉन्फ्रेंस (एम्प्लीफाइंग वॉयसेस) का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ।

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों से आए ट्रांसप्लांट सर्जन, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए तथा भविष्य की रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

कॉन्फ्रेंस में राजस्थान का प्रतिनिधित्व शाइन इंडिया फाउंडेशन,कोटा के संस्थापक डॉ कुलवंत गौड़ ने किया। उन्होंने नेत्रदान,अंगदान एवं देहदान के क्षेत्र में अपनाए गए नवाचारों को  प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर,सभी प्रतिभागियों का ध्यान इस और आकर्षित किया कि,दान दाता परिवार के सदस्यों को राज्य या केंद्र सरकार व निजी संस्थानो के सम्मिलित प्रयासों से कुछ विशेषाधिकार या चिकित्सा,शिक्षा, रोजगार में प्राथमिकता मिले तो,यह दानदाता के प्रति यह सबसे बड़ा सम्मान व उसके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।  

संस्था की ओर से नेत्रदान,देहदान के बाद घरों पर लगाए जाने वाली गौरव पट्टीका, बच्चों को खेल-खेल में नेत्रदान,अंगदान देहदान सिखाए जाने वाला सांप सीढ़ी का खेल, वैवाहिक समारोह में दूल्हे दुल्हन का अंगदान संकल्प, अंगदानी परिवारों का प्रशासन के द्वारा रजत पत्र देकर सम्मान,निजी बसों में अंगदानी परिवारों के लिए नि:शुल्क यात्रा जैसे सराहनीय, प्रेरणादायी प्रयासों ने पूरे भारत में एक अलग पहचान बनाई है ।

उनकी प्रस्तुति को उपस्थित विशेषज्ञों ने विशेष सराहना दी और इसे “जन-सेवा से जुड़ा हुआ एक सशक्त एवं व्यवहारिक मॉडल” बताया। उल्लेखनीय है कि,राजस्थान सरकार द्वारा संस्था को दो बार राज्य-स्तरीय सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है, जो इसकी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

सम्मेलन के समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों ने सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने, प्रतीक्षा-सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा जागरूकता अभियानों को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया।

इस अवसर पर डॉ. गौड़ ने अपने प्रेरक विचार रखते हुए कहा— “अब समय केवल प्रेरणा तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि उसे व्यवस्थित प्रोटोकॉल में बदलने का है, ताकि हर शपथ एक नए जीवन का आधार बन सके। यह सम्मेलन अंगदान के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग, नवाचार और जन-जागरूकता को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।

दो दिवसीय इस कांफ्रेंस में, दुबई श्रीलंका बांग्लादेश मलेशिया नेपाल और लंदन से काफी प्रतिभागियों ने भाग लिया था ।

सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करने वाला (वही) है उसी ने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिन्स के जोड़े बनाए और चारपायों के जोड़े भी (उसी ने बनाए) उस (तरफ़) में तुमको फैलाता रहता है कोई चीज़ उसकी मिसल नहीं और वह हर चीज़ को सुनता देखता है

 सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करने वाला (वही) है उसी ने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिन्स के जोड़े बनाए और चारपायों के जोड़े भी (उसी ने बनाए) उस (तरफ़) में तुमको फैलाता रहता है कोई चीज़ उसकी मिसल नहीं और वह हर चीज़ को सुनता देखता है (11)
सारे आसमान व ज़मीन की कुन्जियाँ उसके पास हैं जिसके लिए चाहता है रोज़ी को फराख़ कर देता है (जिसके लिए) चाहता है तंग कर देता है बेशक वह हर चीज़ से ख़ूब वाकि़फ़ है (12)
उसने तुम्हारे लिए दीन का वही रास्ता मुक़र्रर किया जिस (पर चलने का) नूह को हुक्म दिया था और (ऐ रसूल) उसी की हमने तुम्हारे पास वही भेजी है और उसी का इबराहीम और मूसा और ईसा को भी हुक्म दिया था (वह) ये (है कि) दीन को क़ायम रखना और उसमें तफ़रक़ा न डालना जिस दीन की तरफ़ तुम मुशरेकीन को बुलाते हो वह उन पर बहुत याक़ ग़ुज़रता है ख़़ुदा जिसको चाहता है अपनी बारगाह का बरगुज़ीदा कर लेता है और जो उसकी तरफ़ रूजू करे (अपनी तरफ़ (पहुँचने) का रास्ता दिखा देता है (13)
और ये लोग मुतफ़र्रिक़ हुए भी तो इल्म (हक़) आ चुकने के बाद और (वह भी) महज़ आपस की जि़द से और अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से एक वक़्ते मुक़र्रर तक के लिए (क़यामत का) वायदा न हो चुका होता तो उनमें कबका फैसला हो चुका होता और जो लोग उनके बाद (ख़़ुदा की) किताब के वारिस हुए वह उसकी तरफ़ से बहुत सख़्त शुबहे में (पड़े हुए) हैं (14)
तो (ऐ रसूल) तुम (लोगों को) उसी (दीन) की तरफ़ बुलाते रहे जो और जैसा तुमको हुक्म हुआ है (उसी पर क़ायम रहो और उनकी नफ़सियानी ख़्वाहिशों की पैरवी न करो और साफ़ साफ़ कह दो कि जो किताब ख़़ुदा ने नाजि़ल की है उस पर मैं ईमान रखता हूँ और मुझे हुक्म हुआ है कि मैं तुम्हारे एख़्तेलाफात के (दरमेयान) इन्साफ़ (से फ़ैसला) करूँ ख़़ुदा ही हमारा भी परवरदिगार है और वही तुम्हारा भी परवरदिगार है हमारी कारगुज़ारियाँ हमारे ही लिए हैं और तुम्हारी कारस्तानियाँ तुम्हारे वास्ते हममें और तुममें तो कुछ हुज्जत (व तक़रार की ज़रूरत) नहीं ख़़ुदा ही हम (क़यामत में) सबको इकट्ठा करेगा (15)
और उसी की तरफ़ लौट कर जाना है और जो लोग उसके मान लिए जाने के बाद ख़ुदा के बारे में (ख़्वाहमख़्वाह) झगड़ा करते हैं उनके परवरदिगार के नज़दीक उनकी दलील लग़ो बातिल है और उन पर (ख़ु़दा का) ग़ज़ब और उनके लिए सख़्त अज़ाब है (16)
ख़़ुदा ही तो है जिसने सच्चाई के साथ किताब नाजि़ल की और अदल (व इन्साफ़ भी नाजि़ल किया) और तुमको क्या मालूम शायद क़यामत क़रीब ही हो (17)
(फिर ये ग़फ़लत कैसी) जो लोग इस पर ईमान नहीं रखते वह तो इसके लिए जल्दी कर रहे हैं और जो मोमिन हैं वह उससे डरते हैं और जानते हैं कि क़यामत यक़ीनी बरहक़ है आगाह रहो कि जो लोग क़यामत के बारे में शक किया करते हैं वह बड़े परले दर्जे की गुमराही में हैं (18)
और ख़ुदा अपने बन्दों (के हाल) पर बड़ा मेहरबान है जिसको (जितनी) रोज़ी चाहता है देता है वह ज़ेार वाला ज़बरदस्त है (19)
जो शख़्स आख़ेरत की खेती का तालिब हो हम उसके लिए उसकी खेती में अफ़ज़ाइश करेंगे और दुनिया की खेती का ख़ास्तगार हो तो हम उसको उसी में से देंगे मगर आखे़रत में फिर उसका कुछ हिस्सा न होगा (20)

03 अप्रैल 2026

(उनकी बातों से) क़रीब है कि सारे आसमान (उसकी हैबत के मारे) अपने ऊपर वार से फट पड़े और फ़रिश्ते तो अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करते हैं और जो लोग ज़मीन में हैं उनके लिए (गुनाहों की) माफी माँगा करते हैं सुन रखो कि ख़़ुदा ही यक़ीनन बड़ा बक्शने वाला मेहरबान है

 

42 सूरए अश शूरा

सूरए यूरा
सूरए अश शूरा मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी (53) तिरपन आयतें है
ख़ुदा के नाम से शुरू करता हूँ जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
हा मीम (1)
ऐन सीन काफ़ (2)
(ऐ रसूल) ग़ालिब व दाना ख़़ुदा तुम्हारी तरफ़ और जो (पैग़म्बर) तुमसे पहले गुज़रे उनकी तरफ़ यूँ ही वही भेजता रहता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है ग़रज़ सब कुछ उसी का है (3)
और वह तो (बड़ा) आलीशान (और) बुज़ुर्ग है (4)
(उनकी बातों से) क़रीब है कि सारे आसमान (उसकी हैबत के मारे) अपने ऊपर वार से फट पड़े और फ़रिश्ते तो अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करते हैं और जो लोग ज़मीन में हैं उनके लिए (गुनाहों की) माफी माँगा करते हैं सुन रखो कि ख़़ुदा ही यक़ीनन बड़ा बक्शने वाला मेहरबान है (5)
और जिन लोगों ने ख़़ुदा को छोड़ कर (और) अपने सरपरस्त बना रखे हैं ख़़ुदा उनकी निगरानी कर रहा है (ऐ रसूल) तुम उनके निगेहबान नहीं हो (6)
और हमने तुम्हारे पास अरबी क़़ुरआन यूँ भेजा ताकि तुम मक्का वालों को और जो लोग इसके इर्द गिर्द रहते हैं उनको डराओ और (उनको) क़यामत के दिन से भी डराओ जिस (के आने) में कुछ भी शक नहीं (उस दिन) एक फरीक़ (मानने वाला) जन्नत में होगा और फरीक़ (सानी) दोज़ख़ में (7)
और अगर ख़़ुदा चाहता तो इन सबको एक ही गिरोह बना देता मगर वह तो जिसको चाहता है (हिदायत करके) अपनी रहमत में दाखि़ल कर लेता है और ज़ालिमों का तो (उस दिन) न कोई यार है और न मददगार (8)
क्या उन लोगों ने ख़़ुदा के सिवा (दूसरे) कारसाज़ बनाए हैं तो कारसाज़ बस ख़़ुदा ही है और वही मुर्दों को जि़न्दा करेगा और वही हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है (9)
और तुम लोग जिस चीज़ में बाहम एख़्तेलाफ़ात रखते हो उसका फैसला ख़ुदा ही के हवाले है वही ख़ुदा तो मेरा परवरदिगार है मैं उसी पर भरोसा रखता हूँ और उसी की तरफ़ रूजू करता हूँ (10)

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