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19 सितंबर 2026

प्राथमिक शिक्षकों की हुंकार—मांगें पूरी करो, संगठन मजबूत करो

प्राथमिक शिक्षकों की हुंकार—मांगें पूरी करो, संगठन मजबूत करो
प्राथमिक शिक्षकों की हुंकार—मांगें पूरी करो, संगठन मजबूत करो
के डी अब्बासी
कोटा, 19 सितंबर। प्राथमिक अध्यापक संघ (लेवल प्रथम) कोटा-बूंदी का संयुक्त जिला स्तरीय शैक्षिक अधिवेशन शगुन रिसॉर्ट, बोरखेड़ा में संपन्न हुआ। दो दिवसीय अधिवेशन में शिक्षकों की लंबित मांगों और सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की गई तथा संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
प्रदेश कोषाध्यक्ष इंद्रजीत चौधरी ने बीएसटीसी शिक्षकों को अनुभव के आधार पर पदोन्नति, बी.एड. इंटर्नशिप में वेतन कटौती के आदेश वापस लेने, तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले खोलने और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने की मांग उठाई।
अधिवेशन में रेवती रमण नागर को संभाग अध्यक्ष, रविन्द्र पाल को कोटा जिलाध्यक्ष और अक्षय नागर को झालावाड़ जिलाध्यक्ष मनोनीत करने का प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्य अतिथि प्रकाश जायसवाल, जिला शिक्षा अधिकारी रामचरण मीणा एवं पूर्व सीबीईओ रामावतार रावल ने शिक्षक संगठन की एकजुटता और प्राथमिक शिक्षा में शिक्षकों की भूमिका पर विचार रखे। बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर संगठन को और सक्रिय एवं मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
 

कांस्टेबल मोहित और विनोद की मदद से माला फाटक पर नशे की खेप का भंडाफोड़!

 

कांस्टेबल मोहित और विनोद की मदद से
माला फाटक पर नशे की खेप का भंडाफोड़!
11 किलो सो ग्राम गांजे के साथ तस्कर गिरफ्तार
के. डी. अब्बासी
कोटा। शहर में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बीच भीमगंजमंडी थाना पुलिस ने गांजे की बड़ी खेप पकड़कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। माला फाटक पुलिया के नीचे पुलिस ने एक ऑटो से 11 किलो 100 ग्राम गांजा बरामद किया। आरोपी गांजा लेकर जा रहा था और पुलिस वाहन को देखते ही उसने ऑटो पुलिया के नीचे खड़ा कर दिया। पुलिस को उसकी हरकत संदिग्ध लगी और जांच में पूरा मामला खुल गया।
जिला पुलिस अधीक्षक आईपीएस तेजस्विनी गौतम के निर्देश पर चलाए जा रहे मादक पदार्थ विरोधी अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाष मिश्रा के निर्देशन, पुलिस उपाधीक्षक राजेश कुमार टेलर के सुपरविजन तथा थाना प्रभारी दामोदर प्रसाद वर्मा के निर्देशन में पुलिस टीम 17 सितंबर को इलाके में गश्त कर रही थी।
पुलिस को देखा तो बदल गई चाल
पुलिस टीम माला फाटक पुलिया के नीचे पहुंची तो एक व्यक्ति ऑटो में बैठा नजर आया। पुलिस वाहन को अपनी ओर आते देखकर उसने ऑटो अचानक पुलिया के नीचे रोक दिया। पुलिस टीम ने संदेह के आधार पर ऑटो को घेरा और चालक से पूछताछ की।
उसने अपना नाम दिनेश वर्मा (50) पुत्र किशन, निवासी रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी, भदाना, थाना रेलवे कॉलोनी, कोटा बताया। ऑटो में रखे सफेद प्लास्टिक के कट्टे के बारे में पूछने पर वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
कट्टा खुला तो सामने था गांजा
पुलिस ने कट्टे को खोलकर देखा तो उसमें गांजे की कलियां, डंठल और पत्तियां भरी हुई मिलीं। मौके पर तौल कराने पर गांजे का वजन 11 किलो 100 ग्राम निकला। पुलिस ने गांजे को जब्त कर सीलबंद कर दिया।
आरोपी की तलाशी में 600 रुपए नकद और वीवो कंपनी का मोबाइल फोन मिला। गांजा परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे ऑटो RJ20PB0245 को भी पुलिस ने जब्त कर लिया।
कार्रवाई में उप निरीक्षक दामोदर प्रसाद वर्मा, शिवकुमार, कपिल और प्रेमप्रकाश शामिल रहे। कांस्टेबल मोहित 658 और विनोद 1970 की विशेष भूमिका रही।
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और फिरआऊन के लोग मूसा से एक मरतबा कहने लगे कि तुम हम पर जादू करने के लिए चाहे जितनी निषानियाँ लाओ मगर हम तुम पर किसी तरह ईमान नहीं लाएँगें

और फिरआऊन के लोग मूसा से एक मरतबा कहने लगे कि तुम हम पर जादू करने के लिए चाहे जितनी निषानियाँ लाओ मगर हम तुम पर किसी तरह ईमान नहीं लाएँगें (132)
तब हमने उन पर (पानी को) तूफान और टिड़डियाँ और जुए और मेंढ़कों और खून (का अज़ाब भेजा कि सब जुदा जुदा (हमारी कुदरत की) निषानियाँ थी उस पर भी वह लोग तकब्बुर ही करते रहें और वह लोग गुनेहगार तो थे ही (133)
(और जब उन पर अज़ाब आ पड़ता तो कहने लगते कि ऐ मूसा तुम से जो ख़ुदा ने (क़बूल दुआ का) अहद किया है उसी की उम्मीद पर अपने ख़ुदा से दुआ माँगों और अगर तुमने हम से अज़ाब को टाल दिया तो हम ज़रूर भेज देगें (134)
फिर जब हम उनसे उस वक़्त के वास्ते जिस तक वह ज़रूर पहुँचते अज़ाब को हटा लेते तो फिर फौरन बद अहदी करने लगते (135)
तब आखि़र हमने उनसे (उनकी शरारत का) बदला लिया तो चूकि वह लोग हमारी आयतों को झुटलाते थे और उनसे ग़ाफिल रहते थे हमने उन्हें दरिया में डुबो दिया (136)
और जिन बेचारों को ये लोग कमज़ोर समझते थे उन्हीं को (मुल्क कयाम की) ज़मीन का जिसमें हमने (ज़रखेज़ होने की) बरकत दी थी उसके पूरब पच्छिम (सब) का वारिस (मालिक) बना दिया और चूकि बनी इसराईल नें (फिरआऊन के ज़ालिमों) पर सब्र किया था इसलिए तुम्हारे परवरदिगार का नेक वायदा (जो उसने बनी इसराइल से किया था) पूरा हो गया और जो कुछ फिरआऊन और उसकी क़ौम के लोग करते थे और जो ऊँची ऊँची इमारते बनाते थे सब हमने बरबाद कर दी (137)
और हमने बनी ईसराइल को दरिया के उस पार उतार दिया तो एक ऐसे लोगों पर से गुज़रे जो अपने (हाथों से बनाए हुए) बुतों की परसतिष पर जमा बैठे थे (तो उनको देख कर बनी ईसराइल से) कहने लगे ऐ मूसा जैसे उन लोगों के माबूद (बुत) हैं वैसे ही हमारे लिए भी एक माबूद बनाओ मूसा ने जवाब दिया कि तुम लोग जाहिल लोग हो (138)
(अरे कमबख़्तो) ये लोग जिस मज़हब पर हैं (वह यक़ीनी बरबाद होकर रहेगा) और जो अमल ये लोग कर रहे हैं (वह सब मिटिया मेट हो जाएगा) (139)
(मूसा ने ये भी) कहा क्या तुम्हारा ये मतलब है कि ख़ुदा को छोड़कर मै दूसरे को तुम्हारा माबूद तलाश करू (140)  

18 सितंबर 2026

ऐडवोकेट हाजी अख्तर खान अकेला द्वारा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी शिकायत सुझावों को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लेते हुए

ऐडवोकेट हाजी अख्तर खान अकेला द्वारा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी शिकायत सुझावों को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लेते हुए , हर सुझावों को स्वीकारोक्ति दी है, जबकि शिकायतों के निवारण के प्रयास के तहत आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए है, इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके कार्यालय ने अख्तर खान अकेला द्वारा हज सुधार में सकारात्मक सुझाव देने , ओर भ्रष्टाचार की तथ्यात्मक शिकायत पर अख्तर खान अकेला को धन्यवाद देते हुए उनका आभार भी जताया है, सभी सुझाव शत प्रतिशत लागू करने के लिये हज ऑफिसर को आवश्यक निर्देश के साथ भेजे गए हैं, डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़
हज पॉलिसी 2027 पर अख्तर खान अकेला के तीखे सवाल
पूरी रकम वसूली, फिर भी हाजी परेशान! हज पॉलिसी पर अख्तर खान अकेला ने उठाए तीखे सवाल
“स्मार्ट वॉच से लेकर हवाई किराए तक हिसाब दो, सुविधा नहीं मिली तो पैसा लौटाओ” — प्रधानमंत्री, अल्पसंख्यक मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को भेजे 16 सुझाव
के डी अब्बासी
कोटा, 17 सितम्बर। “हज यात्रियों से पूरी राशि वसूलने के बाद भी अगर सुविधाएं अधूरी मिलें तो जवाबदेही किसकी?” इसी सवाल के साथ एडवोकेट अख्तर खान अकेला ने हज पॉलिसी 2027 को लेकर केंद्र सरकार के सामने 16 सूत्रीय सुझाव रखे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को सुझाव भेजकर हज व्यवस्था में आमूलचूल सुधार और वर्ष 2026 में अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलने पर राशि की समीक्षा कर अनावश्यक वसूली वापस करने की मांग की है।
अख्तर खान अकेला ने कहा कि हज कोई सामान्य पर्यटन यात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा पवित्र सफर है। इसलिए “पैसा पूरा तो सुविधा भी पूरी” के सिद्धांत पर हज व्यवस्था चलनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2027 की हज पॉलिसी संसद में बहुपक्षीय चर्चा, विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों के सुझावों के बाद तैयार की जाए तथा हर खर्च और हर सुविधा की जिम्मेदारी तय हो।
स्मार्ट वॉच पर सबसे बड़ा सवाल
अख्तर खान अकेला ने वर्ष 2026 में स्मार्ट वॉच के नाम पर ली गई राशि पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व घोषित हज पॉलिसी में यदि इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं था तो बाद में इसे यात्रियों पर क्यों थोपा गया? उनका दावा है कि कई यात्रियों के अनुभव में यह घड़ी अपेक्षित उपयोगी साबित नहीं हुई।
उन्होंने मांग की कि स्मार्ट वॉच के नाम पर ली गई राशि और पूरी व्यवस्था की जांच हो तथा यदि वसूली अनुचित पाई जाए तो पैसा लौटाया जाए।
उनका सुझाव है कि हर हाजी के पास स्मार्टफोन होने के कारण सरकार सऊदी अरब में आवश्यक अवधि के लिए सिम और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे। इससे संपर्क, लोकेशन और आपात स्थिति में यात्री को खोजने में मदद मिल सकती है।
हवाई किराया पूरा, सुविधा अधूरी तो किराया भी हो कम
अख्तर खान अकेला ने हवाई किराए को लेकर भी तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि यात्रियों से एक निर्धारित स्तर की एयरलाइन सुविधा के अनुरूप राशि ली जाती है तो उन्हें उसी स्तर की सेवा मिलनी चाहिए।
उन्होंने उड़ानों में सीट व्यवस्था, स्टाफ, लगेज, प्राथमिक चिकित्सा सामग्री और अन्य सुविधाओं को लेकर शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सुविधा कम है तो किराया भी उसी अनुपात में कम होना चाहिए।
उन्होंने प्रत्येक यात्री को पूर्व निर्धारित सीट पर ही बैठाने की सख्त व्यवस्था करने की मांग की।
हज इंस्पेक्टर—जिम्मेदारी भी तय हो, हिसाब भी
उन्होंने हज इंस्पेक्टरों की संख्या, चयन और कार्यप्रणाली की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि यात्रियों से संबंधित खर्च का भार उन्हीं पर पड़ता है, इसलिए इंस्पेक्टरों की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
हर इंस्पेक्टर अपने जिम्मे के यात्रियों के साथ लगातार संपर्क में रहे, डिजिटल ग्रुप बनाए जाएं और शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था हो।
कुर्बानी के ₹17 हजार पर भी समीक्षा की मांग
अख्तर खान अकेला ने कुर्बानी की निर्धारित राशि की भी समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर इससे कम राशि में कुर्बानी की व्यवस्था उपलब्ध है तो सरकार बल्क कॉन्ट्रेक्ट के जरिए लागत कम करने की संभावनाएं तलाशे।
साथ ही कुर्बानी पूरी होने के बाद प्रत्येक हाजी को तत्काल डिजिटल सूचना मिले, ताकि तकनीकी समस्या के कारण यात्रियों को असमंजस का सामना न करना पड़े।
“शिकायत लेकर जाओ तो मुख्यालय क्यों भेजते हो?”
उन्होंने मक्का-मदीना में शिकायत निवारण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई हाजी स्थानीय शिकायत केंद्र पहुंचता है तो उसे दूर मुख्यालय भेजने की बजाय उसी केंद्र को शिकायत का अंतिम निस्तारण करने का अधिकार दिया जाए।
उन्होंने अजीजिया सहित प्रमुख क्षेत्रों में प्रभावी कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा फोन, ई-मेल और डिजिटल शिकायत प्रणाली शुरू करने का सुझाव दिया।
बसों की लेटलतीफी और बख्शीश पर सख्ती
अख्तर खान अकेला ने परिवहन व्यवस्था में कथित अव्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब परिवहन का भुगतान पहले ही किया जा चुका है तो हज यात्रियों से अतिरिक्त बख्शीश मांगने की शिकायतें गंभीरता से ली जानी चाहिए।
उन्होंने बसों के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने और यात्रियों को बार-बार बस बदलने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए सीधे गंतव्य तक परिवहन और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित करने की मांग की।
मीना में शौचालय से लेकर भोजन तक—व्यवस्था सुधरे
उन्होंने मीना के खेमों में गद्दों की चौड़ाई बढ़ाने, भोजन की गुणवत्ता सुधारने तथा शौचालय, स्नानघर और वुजू की पर्याप्त व्यवस्था करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि लंबी कतारों और अपर्याप्त सुविधाओं से हज यात्रियों को अनावश्यक परेशानी होती है।
हज भवन के नाम पर वसूली, भवन कहां है?
अख्तर खान अकेला ने हज भवन के नाम पर यात्रियों से ली जाने वाली राशि की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि हर बार हज यात्रियों से हज भवन के नाम पर राशि ली जा रही है तो उसके उपयोग और निर्माण की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
इसी तरह हज प्रशिक्षण के नाम पर ली जाने वाली राशि की भी समीक्षा की मांग की गई है।
खाने की समस्या खत्म हो—होटल में ही भोजन मिले
उन्होंने मक्का-मदीना में हज यात्रियों के होटल में ही चाय, नाश्ता और दोनों समय भोजन की व्यवस्था कराने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि भोजन की तलाश में यात्रियों को लाइन में लगना पड़ता है और अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ती है, जिससे इबादत का समय भी प्रभावित होता है।
जमजम, लगेज, मेडिकल सुविधा—हर मद का हो हिसाब
अख्तर खान अकेला ने आबे-जमजम की मात्रा बढ़ाने, लगेज व्यवस्था में सुधार, चोरी या जेब कटने की स्थिति में तत्काल सहायता बढ़ाने और भारतीय मेडिकल स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं का प्राथमिक स्तर पर ही इलाज उपलब्ध कराया जाए, ताकि हज यात्रियों को अनावश्यक रूप से अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें।
हज पॉलिसी पर संसद में हो खुली बहस
अख्तर खान अकेला ने कहा कि हज पॉलिसी सिर्फ कागजों पर तैयार करने के बजाय लोकसभा में बहुपक्षीय चर्चा होनी चाहिए। हज यात्री, विशेषज्ञ, बुद्धिजीवी, हज कमेटियां और संबंधित क्षेत्र के अनुभवी लोग अपने सुझाव दें और उसके बाद ऐसी नीति बने जिसमें—
कम खर्च, पूरी सुविधा, पारदर्शी वसूली और तय जवाबदेही सुनिश्चित हो।
उन्होंने मांग की कि वर्ष 2026 में जिन मदों में राशि ली गई लेकिन उसके अनुरूप सुविधा नहीं मिली, उनकी मदवार जांच और ऑडिट कराया जाए। जहां अतिरिक्त अथवा अनावश्यक राशि वसूली गई हो, वहां नियमानुसार राशि वापस की जाए।
अख्तर खान अकेला ने कहा कि “हाजी से पैसा लेना आसान नहीं, उस पैसे का पूरा हिसाब और उसके बदले पूरी सुविधा देना भी सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।” उन्होंने वर्ष 2027 के हज यात्रियों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिसमें हज यात्रा किफायती, सुरक्षित, सुविधायुक्त और सम्मानजनक हो।
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आदरणीय, दर्जनों सुझावात्मक पत्र भेजने, पत्र की पावती, की निरंतर निरुत्तरता,

 आदरणीय, दर्जनों सुझावात्मक पत्र भेजने, पत्र की पावती, की निरंतर निरुत्तरता, आम कांग्रेस जन की संवाद, मुलाक़ात, फेक्ट चेकिंग, कठोर अनुशासन , आयाराम, गयाराम पर रोक, संगठन सर्वोपरि, बी एल ऐ बूथ कार्यकर्ता मज़बूती, सक्रियता, ज़िला संगठनों पर सत्ता धारियो, विधायक, सांसद , पूर्व लोगों की कठपुतली का खेल, आप का कार्यकर्ताओं से दूर रहना, मुलाक़ात नहीं करना, इवेंट , कॉमरेड अधीनस्थों के ज़रिए संगठन कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा, वगेरा वगेरा के बाद ही , बोझिल मन से पत्र लिखने के अलावा, इस कड़वे सच को , इस दुआ के साथ के खुदा सद्बुद्धि दे, दृढ़संकल्प दे के इन सुझावों की क्रियान्विति से कोंग्रेस संगठन फिर से हर शहर, हर राज्य, लोकसभा क्षेत्रों में ज़िंदाबाद हो, लेकिन आप कार्यकर्ताओं से रूबरू मिलने का टाइम ही नही देते, इवेंट कम्पनियों से सारा काम करा रहे है, कार्यकर्ताओं से आपके पास मिलने का टाइम नहीं, उनके पत्र , मेसेज पढ़ने उन पर संज्ञान लेकर जवाब देने का टाइम नही, कोंग्रेस कार्यालय में बैठने का टाइम नहीं , कमल छाप कोंग्रेसियों के खिलाफ सुनवाई कार्यक्रम का टाइम नही, बूथ इंचार्ज बी एल ऐ व्यवस्था जुड़ाव, सुधार, व्यक्ति की जगह संगठन के प्रति निष्ठा जवाबदारी के अभियान का टाइम नही , पार्टी के गद्दारो को फिर वापस लेकर समर्पित कोंग्रेसियों की छाती पर मूंग दलते है सोचने का टाइम नहीं, कोंग्रेस संगठन पर सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री सन्तरी, सत्ता धारी क्यों हावी है, ज़िला अध्यक्षों से विधायक, सांसद खुद को ऊपर क्यों समझकर संगठन मटियामेट कर रहे है इसका टाइम नही, राष्ट्रीय, प्रदेश , ज़िला, ब्लॉक कोंग्रेस कार्यालय पर ही हर बैठक हो, विधायक, सांसद, पूर्व पेंशनधारी कोंग्रेसी अपने ज़िले के कोंग्रेस कार्यालय में महीने में कम से कम एक हफ्ता उपस्थित रहकर कार्यकर्ताओं की सुने यह व्यवस्था करने का भी आपके पास टाइम नही, आप कुछ नया करे तो पहले अनुशासित तऱीके से कोंग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से अनुमति लेकर अनुशासन की बाध्यता का उदाहरण दें आपके पास इतना टाइम नहीं, कोंग्रेस विधान को शत प्रतिशत लागू करे , कोंग्रेस चुनाव चिन्ह ओर कोंग्रेस झंडे में चरखे ओर हाथ के निशान के फ़र्क़ को मिटाये इतना टाइम भी नहीं, संगठन बातों, भाषणों, इवेंट से नहीं व्यवहार में आम कार्यकर्ताओं से वन टू वन मिलनसारिता से चलता है, इतना भी टाइम नहीं, अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

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