आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
09 अगस्त 2026
कोटा में इमाम अहमद रज़ा कॉन्फ्रेंस का आयोजन, उलेमा ने दिया तालीम और अमन का संदेश
खि़लवत कर चुका है और बीवियां तुमसे (निकाह के वक़्त नक़फ़ा वगै़रह का) पक्का क़रार ले चुकी हैं
खि़लवत कर चुका है और बीवियां तुमसे (निकाह के वक़्त नक़फ़ा वगै़रह का) पक्का क़रार ले चुकी हैं (21)
और जिन औरतों से तुम्हारे बाप दादाओं से (निकाह) जिमा (अगरचे जि़ना)
किया हो तुम उनसे निकाह न करो मगर जो हो चुका (वह तो हो चुका) वह बदकारी और
ख़ुदा की नाख़ुशी की बात ज़रूर थी और बहुत बुरा तरीक़ा था (22)
(मुसलमानों हसबे जे़ल) औरतें तुम पर हराम की गयी हैं तुम्हारी माएं
(दादी नानी वगै़रह सब) और तुम्हारी बेटियाँ (पोतियाँ ) नवासियाँ (वगै़रह)
और तुम्हारी बहनें और तुम्हारी फुफियाँ और तुम्हारी ख़ालाएं और भतीजियाँ
और भंजियाँ और तुम्हारी वह माएं जिन्होंने तुमको दूध पिलाया है और तुम्हारी
रज़ाई (दूध शरीक) बहनें और तुम्हारी बीवीयों की माँए और वह (मादर जि़लो)
लड़कियां जो तुम्हारी गोद में परवरिश पा चुकी हो और उन औरतों (के पेट) से
(पैदा हुयी) हैं जिनसे तुम हमबिस्तरी कर चुके हो हाँ अगर तुमने उन बीवियों
से (सिर्फ निकाह किया हो) हमबिस्तरी न की तो अलबत्ता उन मादरजि़लों
(लड़कियों से) निकाह (करने में) तुम पर कुछ गुनाह नहीं है और तुम्हारे
सुलबी लड़को (पोतों नवासों वगै़रह) की बीवियाँ (बहुए) और दो बहनों से एक
साथ निकाह करना मगर जो हो चुका (वह माफ़ है) बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला
मेहरबान है (23)
और शौहरदार औरतें मगर वह औरतें जो (जिहाद में कुफ़्फ़ार से) तुम्हारे
कब्ज़े में आ जाएं हराम नहीं (ये) ख़ुदा का तहरीरी हुक्म (है जो) तुमपर
(फ़र्ज़ किया गया) है और उन औरतों के सिवा (और औरतें) तुम्हारे लिए जायज़ हैं
बशर्ते कि बदकारी व जि़ना नहीं बल्कि तुम इफ़्फ़त व पाकदामिनी की ग़रज़ से
अपने माल (व मेहर) के बदले (निकाह करना) चाहो हाँ जिन औरतों से तुमने
मुताअ किया हो तो उन्हें जो मेहर मुअय्यन किया है दे दो और मेहर के
मुक़र्रर होने के बाद अगर आपस में (कमों पर) राज़ी हो जाओ तो उसमें तुमपर
कुछ गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा (हर चीज़ से) वाकि़फ़ और मसलेहतों का पहचानने
वाला है (24)
और तुममें से जो शख़्स आज़ाद इफ़्फ़तदार औरतों से निकाह करने की माली
हैसियत से क़ुदरत न रखता हो तो वह तुम्हारी उन मोमिना लौन्डियों से जो
तुम्हारे कब्ज़े में हैं निकाह कर सकता है और ख़ुदा तुम्हारे ईमान से ख़ूब
वाकि़फ़ है (ईमान की हैसियत से तो) तुममें एक दूसरे का हमजिन्स है बस (बे
ताम्मुल) उनके मालिकों की इजाज़त से लौन्डियों से निकाह करो और उनका मेहर
हुस्ने सुलूक से दे दो मगर उन्हीं (लौन्डियो) से निकाह करो जो इफ़्फ़त के
साथ तुम्हारी पाबन्द रहें न तो खुले आम जि़ना करना चाहें और न चोरी छिपे से
आशनाई फिर जब तुम्हारी पाबन्द हो चुकी उसके बाद कोई बदकारी करे तो जो सज़ा
आज़ाद बीवियों को दी जाती है उसकी आधी (सज़ा) लौन्डियों को दी जाएगी (और
लौन्डियों) से निकाह कर भी सकता है तो वह शख़्स जिसको जि़ना में मुब्तिला
हो जाने का ख़ौफ़ हो और सब्र करे तो तुम्हारे हक़ में ज़्यादा बेहतर है और
ख़ुदा बख़्शने वाला मेहरबान है (25)
ख़ुदा तो ये चाहता है कि (अपने) एहकाम तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान कर
दे और जो (अच्छे) लोग तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनके तरीक़े पर चला दे और
तुम्हारी तौबा कु़बूल करे और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाकि़फ़ और हिकमत वाला
है (26)
और ख़़ुदा तो चाहता है कि तुम्हारी तौबा क़ुबूल (27)
करे और जो लोग नफ़सियानी ख़्वाहिश के पीछे पड़े हैं वह ये चाहते हैं कि
तुम लोग (राहे हक़ से) बहुत दूर हट जाओ और ख़ुदा चाहता है कि तुमसे बार में
तख़फ़ीफ़ कर दें क्योंकि आदमी तो बहुत कमज़ोर पैदा किया गया है (28)
ए ईमानवालों आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खा जाया करो लेकिन (हाँ)
तुम लोगों की बाहमी रज़ामन्दी से तिजारत हो (और उसमें एक दूसरे का माल हो
तो मुज़ाएक़ा नहीं) और अपना गला आप घूट के अपनी जान न दो (क्योंकि) ख़ुदा
तो ज़रूर तुम्हारे हाल पर मेहरबान है (29)
और जो शख़्स जोरो ज़ुल्म से नाहक़ ऐसा करेगा (ख़ुदकुशी करेगा) तो (याद
रहे कि) हम बहुत जल्द उसको जहन्नुम की आग में झोंक देंगे यह ख़ुदा के लिये
आसान है (30)
08 अगस्त 2026
नेत्रदान में,ना चेहरे पर आती विकृति, ना आता है रक्त
नेत्रदान में,ना चेहरे पर आती विकृति, ना आता है रक्त
2. नो बैग डे पर,बच्चों ने जाना,मृत्यु के बाद,किन अंगो का होता है दान
शाइन
इंडिया फाउंडेशन के हाडोती संभाग में चल रहे "नो बैग डे" पर नेत्रदान
अंगदान विषय पर कार्यशाला के अंतर्गत, लगातार हर शनिवार राजकीय विद्यालयों
में जागरूकता कार्यशालाएं प्रारंभ है ।
इसी क्रम में आज, राजकीय
उच्च माध्यमिक विद्यालय,देवली अरब रोड के कक्षा 8 से 12 की विद्यार्थियों
के बीच, संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के सदस्यों ने नेत्रदान के महत्व
उपयोगिता और भ्रांतियों के बारे में विस्तार से चर्चा की ।
प्रमुख
वक्ता डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि, नेत्रदान एक ऐसा पुनीत कार्य है जो
मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे के दौरान संपन्न होता है,जिसमें ना किसी तरह से
चेहरे पर कोई विकृति आती है,ना रक्त निकलता है ।
कार्यशाला के
उपरांत प्रधानाध्यापिका महोदया लोपामुद्रा भाटिया ने अपने विचार प्रकट करते
हुए कहा कि, आज की नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को अपने पास में
ना रखते हुए सभी छात्र घर जाकर अपने परिजनों से इस विषय पर जरूर चर्चा
करेंगे । किसी भी तरह की शंका या सवाल आने पर छात्र उनको लिखकर
लायेंगे,जिससे अगले दिन सही जवाब भेजा जा सके।
कार्यशाला के दौरान
विद्यार्थियों से संबंधित विषय पर प्रश्न भी पूछे गए विद्यार्थियों ने सही
जवाब दिए उन्हें शाइन मेडल द्वारा पुरस्कृत किया गया ।
जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के पाबन्द हैं उनको तो उसके ज़रिए से राहे निजात की हिदायत करता है और अपने हुक्म से (कुफ़्र की) तारीकी से निकालकर (ईमान की) रौशनी में लाता है और राहे रास्त पर पहँचा देता है
ऐ इमानदारों ख़ुदा ने जो एहसानात तुमपर किए हैं उनको याद करो और ख़ूसूसन जब
एक क़बीले ने तुम पर दस्त दराज़ी का इरादा किया था तो ख़ुदा ने उनके हाथों
को तुम तक पहँचने से रोक दिया और ख़ुदा से डरते रहो और मोमिनीन को ख़ुदा
ही पर भरोसा रखना चाहिए (11)
और इसमें भी शक नहीं कि ख़ुदा ने बनी इसराईल से (भी ईमान का) एहद व पैमान
ले लिया था और हम (ख़ुदा) ने इनमें के बारह सरदार उनपर मुक़र्रर किए और
ख़ुदा ने बनी इसराईल से फ़रमाया था कि मैं तो यक़ीनन तुम्हारे साथ हॅू अगर
तुम भी पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते और ज़कात देते रहो और हमारे पैग़म्बरों पर
ईमान लाओ और उनकी मदद करते रहो और ख़ुदा (की ख़ुशनूदी के वास्ते लोगों को)
क़र्जे हसना देते रहो तो मैं भी तुम्हारे गुनाह तुमसे ज़रूर दूर करूंगा और
तुमको बेहिश्त के उन (हरे भरे ) बाग़ों में जा पहँच जाऊंगा जिनके (दरख़्तों
के) नीचे नहरें जारी हैं फिर तुममें से जो शख़्स इसके बाद भी इन्कार करे
तो यक़ीनन वह राहे रास्त से भटक गया (12)
बस हमने उनकी एहद शिकनी की वजह से उनपर लानत की और उनके दिलों को (गोया)
हमने ख़ुद सख़्त बना दिया कि (हमारे) कलमात को उनके असली मायनों से बदल कर
दूसरे मायनो में इस्तेमाल करते हैं और जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की
गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा भुला बैठे और (ऐ रसूल) अब तो उनमें से चन्द
आदमियों के सिवा एक न एक की ख़्यानत पर बराबर मुत्तेला होते रहते हो तो
तुम उन (के क़सूर) को माफ़ कर दो और (उनसे) दरगुज़र करो (क्योंकि) ख़ुदा
एहसान करने वालों को ज़रूर दोस्त रखता है (13)
और जो लोग कहते हैं कि हम नसरानी हैं उनसे (भी) हमने इमान का एहद (व
पैमान) लिया था मगर जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक
बड़ा हिस्सा (रिसालत) भुला बैठे तो हमने भी (उसकी सज़ा में) क़यामत तक
उनमें बाहम अदावत व दुशमनी की बुनियाद डाल दी और ख़ुदा उन्हें बहुत जल्द
(क़यामत के दिन) बता देगा कि वह क्या क्या करते थे (14)
ऐ एहले किताब तुम्हारे पास हमारा पैगम्बर (मोहम्मद स0) आ चुका जो किताबे
ख़ुदा की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़
बयान कर देगा और बहुतेरी से (अमदन) दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो ख़ुदा की
तरफ़ से एक (चमकता हुआ) नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब (कु़रान) आ
चुकी है (15)
जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के पाबन्द हैं उनको तो उसके ज़रिए से राहे
निजात की हिदायत करता है और अपने हुक्म से (कुफ़्र की) तारीकी से निकालकर
(ईमान की) रौशनी में लाता है और राहे रास्त पर पहँचा देता है (16)
जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे मसीह बस ख़ुदा हैं वह ज़रूर
काफि़र हो गए (ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि भला अगर ख़ुदा मरियम के बेटे मसीह
और उनकी माँ को और जितने लोग ज़मीन में हैं सबको मार डालना चाहे तो कौन ऐसा
है जिसका ख़ुदा से भी ज़ोर चले (और रोक दे) और सारे आसमान और ज़मीन में और
जो कुछ भी उनके दरम्यिान में है सब ख़ुदा ही की सल्तनत है जो चाहता है
पैदा करता है और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है (17)
और नसरानी और यहूदी तो कहते हैं कि हम ही ख़ुदा के बेटे और उसके चहेते
हैं (ऐ रसूल) उनसे तुम कह दो (कि अगर ऐसा है) तो फिर तुम्हें तुम्हारे
गुनाहों की सज़ा क्यों देता है (तुम्हारा ख़्याल लग़ो है) बल्कि तुम भी
उसकी मख़लूक़ात से एक बशर हो ख़ुदा जिसे चाहेगा बख्श देगा और जिसको चाहेगा
सज़ा देगा आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के दरम्यिान में है सब ख़ुदा
ही का मुल्क है और सबको उसी की तरफ़ लौट कर जाना है (18)
ऐ एहले किताब जब पैग़म्बरों की आमद में बहुत रूकावट हुयी तो हमारा रसूल
तुम्हारे पास आया जो एहकामे ख़ुदा को साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम कहीं
ये न कह बैठो कि हमारे पास तो न कोई ख़ुशख़बरी देने वाला (पैग़म्बर) आया न
(अज़ाब से) डराने वाला अब तो (ये नहीं कह सकते क्योंकि) यक़ीनन तुम्हारे
पास ख़ुशख़बरी देने वाला और डराने वाला पैग़म्बर आ गया और ख़ुदा हर चीज़ पर
क़ादिर है (19)
ऐ रसूल उनको वह वक़्त याद (दिलाओ) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा था कि ऐ
मेरी क़ौम जो नेअमते ख़ुदा ने तुमको दी है उसको याद करो इसलिए कि उसने
तुम्हीं लोगों से बहुतेरे पैग़म्बर बनाए और तुम ही लोगों को बादशाह (भी)
बनाया और तुम्हें वह नेअमतें दी हैं जो सारी ख़ुदायी में किसी एक को न दीं
(20)
07 अगस्त 2026
कोटा शहर में जागरूकता से 12 घंटे में पांच नेत्रदान संपन्न
कोटा शहर में जागरूकता से 12 घंटे में पांच नेत्रदान संपन्न
2. बिना कमर सीधी किये,12 घंटे की दौड़ भाग से, पाँच नेत्रदान सपन्न, दस को मिलेगी नई रौशनी
शाइन
इंडिया फाउंडेशन के जागरूकता अभियान से प्रेरित होकर गुरुवार देर रात से
शुक्रवार सुबह तक 12 घंटे में 6 दिवंगतों के नेत्रदान हाडोती संभाग में
संपन्न हुए हैं।
सर्वप्रथम, गुरुवार को शॉपिंग सेंटर निवासी मुक्ता
जेठवानी की माताजी धनवंती जेठवानी का आकस्मिक निधन हुआ । संस्था सदस्यों
की ओर से परिवार को नेत्रदान के लिये संपर्क करने पर, सहमति मिलने पर
नेत्रदान संपन्न हुआ।
इसी क्रम मे, गुरुवार को देर रात स्टेशन
क्षेत्र निवासी सुनील जैन के आकस्मिक निधन के उपरांत संस्था के ज्योति
मित्र नवीन तोतलानी के प्रयास से बेटे हर्षित की सहमति मिलने पर नेत्रदान
संपन्न हुआ ।
सुनील के नेत्रदान के ठीक बाद देवली अरब रोड निवासी
श्रीमाल सिंह शेखावत की धर्मपत्नी सुशीला कंवर के आकस्मिक निधन की सूचना
संस्था के ज्योति मित्र चंद्र प्रकाश जैन से प्राप्त हुयी,उन्हीं की
प्रेरणा से परिजनों ने नेत्रदान का कार्य संपन्न कराया।
शुक्रवार
सुबह 4:00 संस्था के ज्योति मित्र डॉ अशोक मेहता की धर्मपत्नी आशा मेहता,
के आकस्मिक निधन के उपरांत परिजनों की सहमति से नेत्रदान का कार्य, शिवाजी
नगर,रायपुरा स्थित निवास स्थान पर ही संपन्न हुआ ।
आज सुबह 9:00
बजे, समाजसेवी एवं सिंधी जनरल पंचायत के मंत्री शमशेर परमानी ने, अपने पिता
एडवोकेट भगवान दास परमानी, के आकस्मिक निधन के उपरांत, संस्था शाइन इंडिया
फाउंडेशन को संपर्क कर ईबीएसआर कोटा चैप्टर टेक्नीशियन के सहयोग से
नेत्रदान का कार्य संपन्न करवाया । भगवान दास काफी लंबे समय तक कई
प्रशासनिक विभाग में निजी सचिव के पद पर कार्यरत रहे हैं, वह सेवानिवृत्ति
के बाद से अपने स्वयं के पैसों से गरीब,निर्धन,असहाय लोगों के अदालती काम
को पूरा करते थे ।
शाइन इंडिया फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया
कि,प्रत्येक नेत्रदान से दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को नई रोशनी मिलने की
संभावना होती है। संस्था ने नागरिकों से अपील की कि,अपने परिवार में
नेत्रदान की इच्छा के बारे में पहले से चर्चा करें और मृत्यु के बाद इस
महान मानव सेवा के कार्य में सहयोग देकर किसी के जीवन में प्रकाश लाने का
संकल्प लें।