नो बैग डे बना जीवनदान का दिन: स्कूलों में गूंजा अंगदान का संदेश
2. राज्य सरकार के ‘अंगदान संजीवनी अभियान’ के तहत संभाग के विद्यालयों में जागरूकता कार्यशालाएं जारी
कोटा।
राजस्थान सरकार द्वारा जुलाई माह को अंगदान जागरूकता माह के रूप में मनाते
हुए प्रदेशभर में अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न
विभागों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही
हैं। इसी क्रम में ‘नो बैग डे’ को विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और जीवनदान
से जोड़ते हुए राजकीय विद्यालयों में अंगदान एवं नेत्रदान विषय पर विशेष
जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
संभाग की सक्रिय
सामाजिक संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन भी राज्य सरकार के अंगदान संजीवनी
अभियान को सफल बनाने और अंगदान-नेत्रदान के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अभियान के तहत बीते माह संयुक्त निदेशक
प्रारंभिक शिक्षा आशा मंडावत द्वारा सभी राजकीय विद्यालयों में ‘नो बैग डे’
के अवसर पर अंगदान एवं नेत्रदान विषय पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने
के निर्देश जारी किए गए थे।
इसी क्रम में ग्राम मूंडला, तहसील
दीगोद स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य रेखा शर्मा के
नेतृत्व में अंगदान-नेत्रदान जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला
में प्रमुख वक्ता डॉ. संगीता गौड़ ने विद्यार्थियों को सरल और सहज भाषा में
नेत्रदान एवं अंगदान की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने
विद्यार्थियों से जुड़े सवालों के जवाब देते हुए अंगदान को लेकर समाज में
फैली विभिन्न भ्रांतियों और गलत धारणाओं का भी समाधान किया।
इसके
पश्चात समीपस्थ ग्राम कोटसुवां के पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय
में प्रधानाचार्य अनुराधा खंडेलवाल के नेतृत्व में कक्षा 8 से 12 तक के
विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर डॉ.
कुलवंत गौड़ ने विद्यार्थियों को ब्रेन डेड अवस्था के बारे में विस्तार से
समझाया और बताया कि ऐसी स्थिति में अंगदान का निर्णय कई जरूरतमंद मरीजों को
नया जीवन दे सकता है।
डॉ. गौड़ ने विद्यार्थियों से कहा कि “अंगदान
केवल मृत्यु के बाद किया जाने वाला दान नहीं, बल्कि यह जीवन के बाद भी
किसी के जीवन में रोशनी, सांस और उम्मीद छोड़ जाने का संकल्प है।” उन्होंने
विद्यार्थियों से स्वयं जागरूक बनने और अपने परिवार एवं समाज में अंगदान
का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।
शाइन इंडिया फाउंडेशन वर्ष 2016
से संभाग स्तर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में
नेत्रदान एवं अंगदान जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन कर रही है। संस्था का
उद्देश्य है कि बच्चों और युवाओं को अंगदान के प्रति वैज्ञानिक जानकारी
देकर उन्हें समाज में जागरूकता के दूत के रूप में तैयार किया जाए।
आज ‘नो बैग डे’ पर बच्चे किताबों का बोझ लेकर नहीं, बल्कि जीवन बचाने का संदेश लेकर अपने घर लौटे।
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
25 जुलाई 2026
नो बैग डे बना जीवनदान का दिन: स्कूलों में गूंजा अंगदान का संदेश
विश्व ओआरएस दिवस पर जागरूकता अभियान, आधारशिला पर्यटक स्थल पर लोगों को पिलाया गया ओआरएस घोल
बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइखि़्तयार किया और कुफ्रकी हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी {छुटकारा पाने} में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कु़बूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा
बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइखि़्तयार किया और कुफ्रकी हालत में मर गये तो
अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी {छुटकारा पाने} में दिया जाए कि
ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कु़बूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए
दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा (91)
(लोगों) जब तक तुम अपनी पसन्दीदा चीज़ों में से कुछ राहे ख़ुदा में
ख़र्च न करोगे हरगिज़ नेकी के दरजे पर फ़ायज़ नहीं हो सकते और तुम कोई (92)
सी चीज़ भी ख़र्च करो ख़ुदा तो उसको ज़रूर जानता है तौरैत के नाजि़ल
होने के क़ब्ल याकू़ब ने जो जो चीज़े अपने ऊपर हराम कर ली थीं उनके सिवा
बनी इसराइल के लिए सब खाने हलाल थे (ऐ रसूल उन यहूद से) कह दो कि अगर तुम
(अपने दावे में सच्चे हो तो तौरेत ले आओ (93)
और उसको (हमारे सामने) पढ़ो फिर उसके बाद भी जो कोई ख़ुदा पर झूठ तूफ़ान जोड़े तो (समझ लो) कि यही लोग ज़ालिम (हठधर्म) हैं (94)
(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा ने सच फ़रमाया तो अब तुम मिल्लते इबराहीम
(इस्लाम) की पैरवी करो जो बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से न थे
(95)
लोगों (की इबादत) के वास्ते जो घर सबसे पहले बनाया गया वह तो यक़ीनन
यही (काबा) है जो मक्के में है बड़ी (खै़र व बरकत) वाला और सारे जहान के
लोगों का रहनुमा (96)
इसमें (हुरमत की) बहुत सी वाज़े और रौशन निशानिया हैं (उनमें से)
मुक़ाम इबराहीम है (जहाँ आपके क़दमों का पत्थर पर निशान है) और जो इस घर
में दाखि़ल हुआ अमन में आ गया और लोगों पर वाजिब है कि महज़ ख़ुदा के लिए
ख़ानाए काबा का हज करें जिन्हे वहां तक पहुँचने की इस्तेताअत है और जिसने
बावजूद कु़दरत हज से इन्कार किया तो (याद रखे) कि ख़ुदा सारे जहान से
बेपरवाह है (97)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब खुदा की आयतो से क्यो मुन्किर हुए
जाते हो हालांकि जो काम काज तुम करते हो खु़दा को उसकी (पूरी) पूरी इत्तेला
है (98)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब दीदए दानिस्ता (जान बुझ कर) खुदा
की (सीधी) राह में (नाहक़ की) कज़ी ढॅूढो (ढूढ) के ईमान लाने वालों को उससे
क्यों रोकते हो ओर जो कुछ तुम करते हो खु़दा उससे बेख़बर नहीं है (99)
ऐ ईमान वालों अगर तुमने एहले किताब के किसी फि़रके़ का भी कहना माना तो
(याद रखो कि) वह तुमको ईमान लाने के बाद (भी) फिर दुबारा काफि़र बना
छोडेंगे (100)
24 जुलाई 2026
*खाद बीज व नहरी पानी की मांग व केडीए की तानाशाही के विरोध मे बूंदी में हजारों किसान उतरे सड़कों पर*
और तुम्हारे साथ मैं भी एक गवाह हॅू फिर उसके बाद जो शख़्स (अपने क़ौल से) मुँह फेरे तो वही लोग बदचलन हैं
और ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब ख़ुदा ने पैग़म्बरों से इक़रार लिया
कि हम तुमको जो कुछ किताब और हिकमत (वगै़रह) दे उसके बाद तुम्हारे पास कोई
रसूल आए और जो किताब तुम्हारे पास उसकी तसदीक़ करे तो (देखो) तुम ज़रूर उस
पर ईमान लाना, और ज़रूर उसकी मदद करना (और) ख़ुदा ने फ़रमाया क्या तुमने
इक़रार कर लिया तुमने मेरे (अहद का) बोझ उठा लिया सबने अर्ज़ की हमने
इक़रार किया इरशाद हुआ (अच्छा) तो आज के क़ौल व (क़रार के) आपस में एक
दूसरे के गवाह रहना (81)
और तुम्हारे साथ मैं भी एक गवाह हॅू फिर उसके बाद जो शख़्स (अपने क़ौल से) मुँह फेरे तो वही लोग बदचलन हैं (82)
तो क्या ये लोग ख़ुदा के दीन के सिवा (कोई और दीन) ढूढते हैं हालांकि
जो (फ़रिश्ते) आसमानों में हैं औेर जो (लोग) ज़मीन में हैं सबने ख़ुशी
ख़ुशी या ज़बरदस्ती उसके सामने अपनी गर्दन डाल दी है और (आखि़र सब) उसकी
तरफ़ लौट कर जाएंगे (83)
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि हम तो ख़ुदा पर ईमान लाए और जो किताब हम
पर नाजि़ल हुयी और जो (सहीफ़े) इबराहीम और इस्माईल और इसहाक़ और याकू़ब और
औलादे याकू़ब पर नाजि़ल हुये और मूसा और ईसा और दूसरे पैग़म्बरों को जो
(जो किताब) उनके परवरदिगार की तरफ़ से इनायत हुयी (सब पर ईमान लाए) हम तो
उनमें से किसी एक में भी फ़क्र नहीं करते(84)
और हम तो उसी (यकता ख़ुदा) के फ़रमाबरदार हैं और जो शख़्स इस्लाम के
सिवा किसी और दीन की ख़्वाहिश करे तो उसका वह दीन हरगिज़ कुबूल ही न किया
जाएगा और वह आखि़रत में सख़्त घाटे में रहेगा (85)
भला ख़ुदा ऐसे लोगों की क्योंकर हिदायत करेगा जो इमाने लाने के बाद फिर
काफि़र हो गए हालांकि वह इक़रार कर चुके थे कि पैग़म्बर (आखि़रूज़ज़मा)
बरहक़ हैं और उनके पास वाज़ेह व रौशन मौजिज़े भी आ चुके थे और ख़ुदा ऐसी
हठधर्मी करने वाले लोगों की हिदायत नहीं करता (86)
ऐसे लोगों की सज़ा यह है कि उनपर ख़ुदा और फ़रिश्तों और (दुनिया जहान के) सब लोगों की फिटकार हैं (87)
और वह हमेशा उसी फिटकार में रहेंगे न तो उनके अज़ाब ही में तख़्फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी और न उनको मोहलत दी जाएगी (88)
मगर (हां) जिन लोगों ने इसके बाद तौबा कर ली और अपनी (ख़राबी की)
इस्लाह कर ली तो अलबत्ता ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (89)
जो अपने ईमान के बाद काफि़र हो बैठे फि़र (रोज़ बरोज़ अपना)
कुफ्रबढ़ाते चले गये तो उनकी तौबा हरगिज़ न कु़बूल की जाएगी और यही लोग
(पल्ले दरजे के) गुमराह हैं (90)