आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

09 दिसंबर 2022

 कारवां गुज़रता गया और हम कार्यकर्ता गुबार देखते रहे , , ना दिल्ली रही , ना गुजरात मिला ,, ना नफरत कम हुई , ना भारत जुड़ा , ,करोड़ों करोड़ खर्च के बाद भी , असंतोष , ,गुटबाज़ी हम देखते रहे,

 कारवां गुज़रता गया और हम कार्यकर्ता गुबार देखते रहे , , ना दिल्ली रही , ना गुजरात मिला ,, ना नफरत कम हुई , ना भारत जुड़ा , ,करोड़ों करोड़ खर्च के बाद भी , असंतोष , ,गुटबाज़ी हम देखते रहे,,,  कुछ कार्यकताओं की कमोबेश यही विचारधारा हो , लेकिन राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा का इम्पेक्ट आज नहीं तो कल , अगर हम लगातार इसी थीम  पर काम करते रहे , तो कांग्रेस के हक़ में ज़रूर मिलकर ,रहेगा  राहुल गाँधी , और उनके साथ चल रहे , हज़ारों हज़ार कार्यकर्ताओं , उनका स्वागत सत्कार कर रहे लाखों लाख कार्यर्ताओं की क़ुर्बानी जाया नहीं ,, जायेगी ,, कुछ लोग है , जो राहुलगांधी की इस भारत जोड़ो यात्रा के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं ,  कुछ लोग हैं , जो इस इस यात्रा में अपनी सियासत की गोटियां सेंकने की कोशिशें कर रहे हैं , कुछ लोग हैं , जो खुद को , राहुल गांधी जी का निकटतम प्रचारित कर,  सत्ता पलटने का संदेश अपने साथियों के ज़रिये दुष्प्रचारक ट्वीट , दुष्प्रचारक पोस्टों के ज़रिये देना चाहते हैं , वोह कुछ लोग है , तो गलत  हैं , लेकिन जो बाक़ी लोग है , उनमे भी तो कुछ लोग गलत   हैं , जब जोड़ो जोड़ो ,भारत जोड़ो , छोडो छोडो नफरत छोडो का नारा है , राहुल गाँधी का सपना है ,उनकी कोशिशें है , तो फिर दूरियां कम करना, गले  मिलो ना , कांग्रेस को मज़बूत करो ना ,, यात्रा के दुष्प्रचार में शामिल हैं , उन पर निगाह रखों ना यात्रा प्रभारी , रफ़ीक़ खान ,के खिलाफ राहुल गाँधी ने फटकार लगाकर , उन्हें अलग कर दिया , ,की खबरों के साथ खूब दुष्प्रचार किया गया , रफ़ीक़ खान विधायक , आदर्शनगर एक बहाना थे , और इस पर , पूरी क़ौम की उपेक्षा पूरी कॉम को धक्का देने का दुष्प्रचार कर,  कांग्रेस के खिलाफ सरकार के खिलाफ सिस्टम के खिलाफ  भड़काने की कोशिशें की गयीं,   राहुल गांधी के सामने , व्यक्तिगत महमामंडन वाले नारे योजनाबद्ध लगवाए ,गए ,, पॉवर गेम  दिखाने की कोशिश की गई , एक वर्ग वोह था , जो अपने अपने लोगों को सम्मानजनक तरीके से  बुलाकर उनका परिचय करा रहे थे , दूसरा वर्ग वोह था , जो अपने कार्यर्कताओं को पास हस्ताक्षर कर देने में भी आनाकानी कर रहे थे ,सड़कें चौराहे , व्यवस्थाएं एस पी जी के हाथों में थीं , सुरक्षा के कारण थे, ,इसलिए कहाँ पोस्टर ,लगेंगे  कैसे पोस्टर लगेंगे इसकी , रेकी , निर्देशानुसार अधिकारीयों की थी और आधिकारिक स्तर पर ही , पोस्टरों को हटाने , की व्यवस्था अधगिकारिक स्तर पर ,हुई  तो कुछ लोगों ने बवाल  खड़ा कर दिया , यात्री के पास देने में नख़रेबाज़ी शुरू हुई,  जयपुर से प्रदेश  कांग्रेस कमेटी पास देने के नाम पर मनमानी शुरू हुई , ,अव्यस्थाओं की भरमार थी , लेकिन कोटा ,, कोचिंग सीटी कोटा , जहाँ कम्प्यूटर क्रान्ति के जनक , राहुल गांधी के वालिद शहीद स्वर्गीय राजीव गाँधी की , सबसे बढ़ी ,, आकर्षक ,  कम्प्यूटर  क्रान्ति का  संदेश  देती मूर्ति  शान्ति कुमार धारीवाल  के नेतृत्व में निर्मित हुई , ,राहुल गाँधी की दादी शहीद  इन्द्रा गाँधी की आदमक़द ,मूर्ति  गुमानपुरा व्यस्तम इलाक़े में , शांति कुमार धारीवाल के प्रयासों से लगी ,,हैं,,,, जहां करोड़ों करोड़ के विकास कार्य चल रहे हैं , भारत को जोड़ने का फ्लाई ओवर , जहाँ भारत जोड़ो ,, फ्लाई ओवर का नामकरण हुआ , उस शहर  में जहां श्रवण कुमार की लोक कथा हैं ,  उस शहर कोचिंग सिटी कोटा के कार्यकर्ताओं को , राहुल गाँधी से , कोटा उम्मेदकलब में आमने सामने उनका संदेश सुनाने का कार्यकम  रखा गया ,, लेकिन गज़ब किया ,, सारे कार्यक्रम , रद्द ,, कुछ लोग इसे  मंथरा की कुटिलता चाहे कहें , लेकिन ऐसा होना नहीं चाहिए था  ,,कार्यकर्ताओं का मनोबल  टूटना,  उनकी तैयारियों को झटका लगना यक़ीनन , उन्हें निराश करता , हैं ,  झूंठी खबरें फैलाई , गयी ,,, और कोटा कॉमर्स  कॉलेज के पास स्थित  राजीव गाँधी की मूर्ति पर राहुल गांधी के माल्यार्पण कार्य्रकम में अचनाक व्यवधान के , लिए,,, एक प्लांड युवक द्वारा ,, कड़े सुरक्षा के घेरे में घुसकर आत्महत्या का प्रयास ,, बदनाम करने की साज़िश , कोटा के कार्यक्रम में व्यवधान करने की साज़िश हैं, ऐसे साज़िश कर्ताओं की परत दर परत ,  अनुसंधान  के नाम पर पोल खोलना ज़रूरी हो गया है , ऐसे चेहरों को एक्सपोज़   करना ज़रूरी है , अफ़सोस जब हुआ , जब , एक केबिनेट मंत्री स्तर के , मंत्री की यात्रा को सफल बनाने , की सभी सम्मानजनक कोशिशों को , एक वर्ग द्वारा ,  योजनाबद्ध तरीके से , नेगेटिव प्रचार के ज़रिये अपमानकारी तरीके से प्रचारित करने का प्रयास ,किया ,, सिक्युरिटी सिस्टम स्क्रीनिंग रोका टोकि , ,को , ,योजनाबद्ध तरीके से ,, मनमानी एडिटिंग कर ,, वाइरल किया गया , आम कार्यकर्ता यह सब करता तो ठीक था,  लेकिन उत्तर प्रदेश में बैठे एक संत महाराज , जो सपा से कांग्रेस में आने के बाद ,  राज्य सभा के इच्छुक रहे हैं ,,  प्रयासरत हैं , ,कोटा स्टेडियम में जहाँ राहुल जी की सभा  साज़िश कर्ताओं ने केंसिल करवाई , इसी स्टेडियम के एक कार्यक्रम में ,, केबिनेट मंत्री ,, की क़दम बोसी चापलूसी क़सीदागिरि के बाद जब वोह केबिनेट मंत्री , चले गए तो इन साधू महाराज ,ने , दुआ करवाई के अमुक व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाने की दुआ हो , ,अल्लाह सभी को इज़्ज़त देता है , बस तभी से यह साधू महाराज पगला गए ,हैं  , राज्य सभा की कोशिशें नाकाम होने के बाद , बकवासबाजी  जुमले लेकर , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , और केबिनेट मंत्री के खिलाफ , बकवासबाजी के षड्यंत्र रच रहे , हैं ,, आज भी दुष्प्रचार में  इन्होने कोई मौक़ा नहीं ,छोड़ा  और , हमारे वेणुगोपाल जी कहते हैं , के अगर अब अनुशानहीनता की , बकवासबाजी की , तो वोह  वहां नहीं रहेगा, जहाँ है , तो फिर ,  इन संत महाराज , आचार्य जी ,  की इस तरह की पार्टी तोड़ने , वाली पोस्ट , इस तरह , पार्टी के  एक केबिनेट मंत्री और राहुल गाँधी जैसे वरिष्ठ सम्मानीय नेता की उपस्थिति की तस्वीर , एडिट  करके,बकवास जुमलों के साथ वाइरल करने  पर,उन्हें ,  अभी तक प्रवक्ता से हटाया क्यों नहीं गया ,, क्यों उनकी कांग्रेस को तोड़ने की बकवास को , शेयर किया जा रहा हैं , वोह फ़र्ज़ी आचार्य जिनके लिए बकवास प्रकाशित कर रहे  हैं, ,कांग्रेस के लिए पीडियों से उनकी क़ुर्बानियों , ,उनके विकास विज़न , संगठन को मज़बूती देने के इरादों के मुक़ाबिल तो वोह , उनके  पैर की धुल के बराबर भी नहीं हैं,,  लेकिन ऐसा  लगता हैं,  इन फ़र्ज़ी आचार्य जी की कोटा में करवाई गई दुआ पूरी  नहीं होने  पर, ,यह  कांग्रेस के वरिष्ठ  ,नेताओं ,, हाईकमान द्वारा तयशुदा ,, ,मुख्यमंत्री  मंत्रियों को अपमानित करते रहेंगे, ,, लेकिन आसमान पर थूकने से आसमान गंदा नहीं होता ,, उलटा थूक खुद पर ही आकर गिरता , है ,, कोटा तो विकसित है , सुंदर है , कोचिंग गुरु हैं , राहुल गांधी जी यहां के कांग्रेस कार्यर्कताओं की प्रेरणा हैं , यहां के कोचिंग छात्रों के संरक्षक है , वोह कोटा का विकास ,, यहां का बदलाव , यहां की , महमानवाज़िश देखकर ,गए हैं , फिर आएंगे,  बार बार ,  आएंगे और ऐसे  अनुशानहीनता करने वाले  ,, संत आचार्यों को सबक़  सिखाएंगे    ,, कोटा के और ऐतिहासिक विकास के लिए ,, कोटा के विकास के लिए जी जान से , जुटे कांग्रेस के कोटा के समर्पित सिपाही को , फिर से जिताएंगे, फिर से मंत्री   बनाएंगे,,, तुम जैसे  गद्दारों के खिलाफ अनुशानहीनता की कार्यवाही भी जल्द ही  , करवाएंगे,, या तो कोंग्रेसी, ओरिजनल कोंग्रेसी हो जाओ , गुटबाज़ी छोडो , नहीं तो बोरिया बिस्तर बांधकर , बाहर का रास्ता अगर दिखाया गया  तो तुम्हे भी तकलीफ होगी, हमें भी तकलीफ होगी, आश्रम वगेरा , कैसे   बनते ,हैं  क्या उसकी गतिविधियां , हैं, सभी की परतें , परत दर परत बाहर आएगी , सो प्लीज़  राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा का  अपमान मत करो , कानफुसी , गुटबाज़ी के षड्यंत्र  में ,, देश को जोड़ने ,, नफरत के खिलाफ मोहब्बत की इस जंग के जंगजू सिपाही , का सम्मान करो , राहुल गांधी को ज़िंदाबाद करो,  एक जुट होकर , राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री बनाने के सपनों को साकार करो ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

 देश में पहली बार दूल्हे की निकासी में,नैत्रदान की झाँकी

 देश में पहली बार दूल्हे की निकासी में,नैत्रदान की झाँकी

2. दूल्हे और बारातियों ने निकासी में दिया नेत्रदान का संदेश
3. दो सौ से ज्यादा लोग,दूल्हे-दुल्हन को उपहार में दे गये अपनी आँखें दान 

शाइन इंडिया फाउंडेशन और आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में नैत्रदान के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संस्था के ज्योति मित्र,राठौर सौशल ग्रुप के अध्यक्ष श्री सोनू साहू लाडला ने अपने विवाह समारोह को ही वृहद नेत्रदान जागरूकता शिविर का रूप दे दिया है ।

2 माह पूर्व विवाह तय होते ही उन्होंने अपनी होने वाली पत्नी अंतिमा साहू और दोनों परिवारों के सदस्यों से विवाह समारोह में नेत्रदान संकल्प पत्र शिविर लगाने एवं नेत्रदान संकल्प लेने की बात कर ली थी,इस बात पर सभी ने सहर्ष स्वीकृति प्रदान की ।

परिवार में नेत्रदान के प्रति जागरूकता को बढ़ते हुए देखने पर सोनू ने एक और अनोखा निर्णय लिया, कि उन्होंने अपनी पूरी बारात को ही नेत्रदान का संदेश देती झांकी में बदल दिया । गुरुवार को सोनू और अंतिमा का विवाह संपन्न हुआ,पूरे दिन और रात विवाह समारोह में अन्य किसी शुभ कार्य की चर्चा कम थी पर नेत्रदान की चर्चा सभी जगह थी ।

घर परिवार के छोटे-छोटे बच्चों ने भी अपने माता-पिता से मनुहार करके नेत्रदान के संकल्प पत्र भरवाए दूरदराज से आने वाले लोग नेत्रदान संकल्प के लिए काउंटर पर आये, और पहली बार उन्होंने जाना कि मृत्यु के बाद भी आँखे काफी समय तक जीवित रहती हैं,और वह किसी की आँखों में रोशनी पहुंचा सकती है ।

बारात में दूल्हे के हाथ में नेत्रदान महादान का संदेश देते हुए एक कटआउट था, इसी तरह बारात में आए हुए मेहमानों के पास भी नेत्रदान महादान का संदेश देते हुए तख्तियाँ मौजूद थी, शादी में आये हुए मेहमानों और रास्ते में आने वाले लोगों को शाइन इंडिया फाउंडेशन की ओर से नेत्रदान जागरूकता के पम्पलेट भी बाँटे गए ।

बारात में नेत्रदान का संदेश देती हुई,एक झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही,जिस पर "नेत्रदान को परिवार में परंपरा बनायें" का संदेश लिखा हुआ था । इसके साथ ही शादी समारोह में दो जोकर भी सभी मेहमानों के बीच जाकर नेत्रदान महादान का संदेश दे रहे थे ।

दूल्हे के तोरण मारने से पहले जितने भी मेहमान उपस्थित थे उन सभी के लिए एलईडी पर नेत्रदान जागरूकता का संदेश देते हुए वीडियो और नेत्रदान के कार्य को प्रेरित करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं के संदेश लगाए गए थे । 

शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि, उनकी संस्था का ही पहला प्रयास था,जब पहली बार 3 वर्ष पूर्व दूल्हा दुल्हन ने अपने विवाह समारोह में नेत्रदान संकल्प शिविर रखा था । उसके उपरांत देश के कई सारे वैवाहिक समारोह में इसी आयोजन को दोहराया गया।

अब इस बार संस्था की ओर से दूल्हे की बारात के माध्यम से नेत्रदान का संदेश देते हुए जागरूकता का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया,इस तरह का आयोजन भी देश में पहली बार किया जा रहा है ।

दूल्हे ने इस कार्यक्रम को आयोजित करने के पीछे अपना उद्देश्य बताते हुए कहा कि,जिस तरह से ईश्वर ने मेरी दुनिया में रंग भरे हैं, मैं चाहता हूँ कि, मेरे इस दुनिया से जाने के बाद किसी और की दुनिया भी रंगीन हो और यह संदेश समाज के लोगों में जा सके । इसलिए विवाह उत्सव में जहां समाज के सभी लोग इकट्ठे होते हैं,मैंने यह नेत्रदान संकल्प शिविर और सपत्निक स्वयं के नेत्रदान संकल्प का निर्णय लिया ।

देर रात तक विवाह समारोह में 230 व्यक्तियों ने नैत्रदान के संकल्प पत्र भरे गये। ज्यादातर लोग नैत्रदान के बारे में जानते समझते थे,पर संकल्प भरने का मौका इस विवाह समारोह में ही संभव हो पाया है। राठौर समाज के सभी पदाधिकारियों ने सोनू जी के इस प्रयास की खूब सराहना की ।

 जो ग़फलत में भूले हुए (पड़े) हैं पूछते हैं कि जज़ा का दिन कब होगा

 जो ग़फलत में भूले हुए (पड़े) हैं पूछते हैं कि जज़ा का दिन कब होगा (11)
उस दिन (होगा) (12)
जब इनको (जहन्नुम की) आग में अज़ाब दिया जाएगा (13)
(और उनसे कहा जाएगा) अपने अज़ाब का मज़ा चखो ये वही है जिसकी तुम जल्दी मचाया करते थे (14)
बेशक परहेज़गार लोग (बेहिश्त के) बाग़ों और चश्मों में (ऐश करते) होगें (15)
जो उनका परवरदिगार उन्हें अता करता है ये (ख़ुश ख़ुश) ले रहे हैं ये लोग इससे पहले (दुनिया में) नेको कार थे (16)
(इबादत की वजह से) रात को बहुत ही कम सोते थे (17)
और पिछले पहर को अपनी मग़फि़रत की दुआएं करते थे (18)
और उनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले (दोनों) का हिस्सा था (19)
और यक़ीन करने वालों के लिए ज़मीन में (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं (20)

08 दिसंबर 2022

 सुखविंदर सिंह रंधावा ,, राजस्थान कांग्रेस प्रभारी के रूप में , सुलझा हुआ नेतृत्व है , राजनीती की क ख ग ही नहीं ,पूरी बारह खडी में पारंगत हैं , वोह अपने राजस्थान प्रभार के कार्यभार ग्रहण की शुरुआत , राजस्थान के हाड़ोती में कोटा संभाग के कोटा ज़िले से कर रहे हैं

 सुखविंदर सिंह रंधावा ,, राजस्थान कांग्रेस प्रभारी के रूप में , सुलझा हुआ नेतृत्व है , राजनीती की क ख ग ही नहीं ,पूरी बारह खडी में पारंगत हैं , वोह अपने राजस्थान प्रभार के कार्यभार ग्रहण की शुरुआत , राजस्थान के हाड़ोती में कोटा संभाग के कोटा ज़िले से कर रहे हैं , यह कोटा के लिए , गर्व की बात हैं , यूँ भी, खुद प्रभारी सुखविदंर सिंह जी रंधावा , का कोटा संभाग के बूंदी ज़िले से पैतृक संबंध है, उनके दादा श्री बूंदी में ही बढे कृषक के रूप में ,, रहे हैं , कोटा से इनका गहरा संबंध रहा हैं,, , सुखविदंर सिंह रंधावा से बातचीत में कोई भी प्रभावित हुए बगैर नहीं रहता हैं ,,  वोह लोगों की सुनते हैं, धैर्य और संयम रखकर, अपने फैसले बहुपक्षीय सुनवाई के बाद लेते हैं , कटटर कोंग्रेसी , ज़मीन से जुड़े हैं , पहले वालों की तरह , हारे हुए , फिर हार से डर कर विदेशों में जाने वाले नहीं हैं , अपने क्षेत्र की भाग संख्याओं में , बार बार ज़मानत ज़ब्त करवाकर  आने वाले नहीं हैं , यक़ीनन , सुखविदंर सिंह रंधावा का राजस्थान प्रभारी के लिए ,चयन , कांग्रेस हाईकमान का  प्रारम्भिक तोर पर परीपकव् फैसला नज़र आ रहा हैं, , सुखविंदर सिंह रंधावा से बातचीत में ही , लगता है के यह सुलझे हुए , समझदार , निष्पक्ष , और निर्भीक , हाईकमान के वफादार साथी हैं , इसलिए राजस्थान में जब आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहटें हैं , अल्पसंखयक समाज के खिलाफ , उनके प्रतिनिधित्व उनके इदारों में नियुक्तियां नहीं होने , उनके खिलाफ ज़ुल्म ज़्यादती की जो शिकायतें हैं , इस मामले में रंधावा कांग्रेस के खिलाफ इनकी नाराज़गी दूर करने वाले , निष्पक्ष ज़िम्मेदार साबित हो सकेंगे , और कांग्रेस से  रूठे हुए अल्सपंख्यकों को फिर से जोड़ने में कामयाब होते दिखेंगे , ,खुद मुख्यमंत्री के दावेदार थे , पुरान , पैतृक कोंग्रेसी , प्रभाव था , लेकिन जब हाईकमान ने , इन्हे उप मुख्यमंत्री ही  रखकर, मुख्यमंत्री दूसरा ही बना दिया , तो इनकी बगावत नहीं थी, यह कभी भी , उचक  कर,अपने कारकर्ताओं , समर्थकों के साथ , इन्हे मुख्यमंत्री बनाने के संघर्ष में , आगे नहीं आये , इन्होने हाईकमान के फैसले के  खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई , और वफादार सिपाही की तरह से उप मुख्यमंत्री की ज़िम्मेदारी भी ईमानदारी से निभाई ,, इसीलिए राजस्थान में कोई बहुत बढ़ा संकट अब इनकी नज़र में नहीं हैं , जिसकी जो ताक़त हैं , जो हैसियत है , जो सम्मान है , उसे सम्मान के साथ वोह ज़िम्मेदारी ज़रूर मिलेगी ,, युवा कोंग्रेस की रीढ़ की हड्डी है , तो बुज़ुर्ग , अनुभवी कांग्रेस की धरोहर हैं, दोनों के तालमेल में , अल्पसंख्यक , ,खासकर अल्पसंख्यकों में बहुसंख्यक वोटर्स का तड़का लगाकर, यह दी बेस्ट करने के संकल्प के साथ , राजस्थान की धरती पर,  कांग्रेस ज़िंदाबाद का सपना लेकर आये हैं , और ख़ुशी की बात  है के कोटा की धरती से ही , राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के साथ , इनका यह संकल्प , शुरू हुआ हैं ,, अल्लाह इन्हे इनके इस संकल्प में अशोक गहलोत के नेतृत्व में उनकी कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार की कामयाबी के साथ , कहो दिल से कांग्रेस फिर से के नारे के साथ , राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनवाने में कामयाबी अता फरमाए , राजस्थान में , कांग्रेस संगठन प्रभारियों का इतिहास विवादित रहा हैं , ,यहां अभी भी सह प्रभारियों को लेकर असमंजस है , उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया या नहीं , कोई आदेश नहीं हैं, ,लेकिन फिर भी,  चाहे मुकुल वासनिक हों , चाहे , गुरुदास कामत , सह प्रभारी , इरशाद साहब हों , अविनाश पांडेय हों , उनके सह प्रभारी हों , फिर अजय माकन हों , सभी पर , विवादों के बाद गाज गिरती रही हैं, , सह प्रभारियों पर तो मोबाइल , ट्रेक सूट , , कुर्ते पायजामें,  और  जयपुर की कारों की शिकायतें , अख़बारों की सुर्खियां रही हैं , हर बार राजस्थान में प्रभारी बदले गए, यहां तक के उनके द्वारा बनाये गए कुछ मंत्रियों को ,बर्खास्त तक करने का राजस्थान में इतिहास रहा हैं , ,मासिक चौथवसूली की अखबारी सुर्खियां रहे हैं , , जो लोग अपने इलाक़े के चुनावों में लगातार ज़मानत ज़ब्त कराकर , हारते हुए,  इतिहास बनाते रहे हैं , उन तक को , राजस्थान में प्रभारी बनाकर,  कार्य्रकर्ताओं से जी हुज़ूरी करवाई गई हैं  ,लेकिन अब , राजस्थान में , बरसों बाद, क़रीब , पच्चीस साल बाद , एक निर्विवाद , हर बार अपने क्षेत्र से चुनाव जीतकर आने वाला ,,जांबाज़ नेतृत्व हमे प्रभारी के रूप में मिला हैं , वोह कार्यर्कताओं का दर्द समझते हैं , हार जीत की व्यवहारिक परिस्थितियां समझते हैं , सुखविंदर सिंह रंधावा , अल्पसंख्यकों के साथ हो रही ना इंसाफ़ी भी सुनेंगे , उनके इबादत घरों की मरम्मत में रोड़ा अटकाने वाले अधिकारीयों के खिलाफ कार्यवाही का मेंडेट भी देंगे , मदरसा पैराटीचर्स को , उनका हक़ ,देंगे  उर्दू  के साथ इन्साफ  होगा,तो वक़्फ़ में , जो वक़्फ़ सम्पत्ति के क़ब्ज़ेदार हैं, उन्हें ही ,वक़्फ़ कमेटियों में पदाधिकारी बनाने वाले , ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्यवाही का बिगुल भी रंधावा ज़रूर बजायेंगे, , कांग्रेस के वोटर्स के रूप में , जो , वोटर्स कांग्रेस का सरमाया हैं , कांग्रेस का सो में से सो फीसदी वोटर है,  उसके साथ ना इंसाफ़ी ना हो, उसे राजनितिक , नियुक्तियों , संगठनात्मक नियुक्तियों और टिकिट वितरण में  पूरा ईमानदाराना हक़ मिले , वोह इस मामले में भी कसौटी पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे, राजस्थान के वर्तमान हालतों में जब , भारत जोड़ो यात्रा के पूर्व ,टूटी हुई ,बिखरी हुई कांग्रेस  एक साथ हाथ ऊँचे कर, कांग्रेस ज़िंदाबाद कर रही है , पोस्टर वार व्यक्तिगत ज़िंदाबाद के नारों के शक्ति प्रदर्शन की खबर के बाद , खुद राहुल गांधी सावचेत होकर,  यात्रा कार्यक्रम में परिवर्तन कर रहे हैं , स्थानीय नेतृत्व को सुधरने , बदलने का संकेत दे रहे हैं , ऐसे में चाहे , रंधावा साहब के लिए , ,राजस्थान प्रभार , मेंढ़क तोलने जैसा  मुश्किल काम हो , राजस्थान में फिर से कांग्रेस की सरकार बहुमत के साथ बनाने की चुनौती हो , बातचीत में वोह मुस्कुरा कर इस चुनौती को स्वीकार भी करते हैं, और राजस्थान में , गुटबाज़ी समाप्ति के साथ ,सभी को ,, हर वर्ग को उनके हिस्सेदारी मिले , इस इन्साफ के साथ , राजस्थान में कांग्रेस की सरकार फिर से , के  इरादे , कुशल प्रबंधन के प्रयासों के साथ , नए राजस्थान प्रभारी , कोटा के रास्ते , हमारे ज़िम्मेदार बनकर आये हैं , उनका स्वागत है , अल्लाह से दुआ है, के वोह उनके कांग्रेस को ज़िंदाबाद करने के संकल्प में , प्रयासों में कामयाब हों , हमे सब को उनकी ताक़त , उनकी आवाज़ हाईकमान के निर्देशों , कांग्रेस के संविधान के निर्देशों के साथ हर हाल में बनना ही होगा ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

उन (हवाओं की क़सम) जो (बादलों को) उड़ा कर तितर बितर कर देती हैं

 सूरए अज ज़ारियात मक्का में नाजि़ल हुआ और उसकी साठ (60) आयते है
ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
उन (हवाओं की क़सम) जो (बादलों को) उड़ा कर तितर बितर कर देती हैं (1)
फिर (पानी का) बोझ उठाती हैं (2)
फिर आहिस्ता आहिस्ता चलती हैं (3)
फिर एक ज़रूरी चीज़ (बारिश) को तक़सीम करती हैं (4)
कि तुम से जो वायदा किया जाता है ज़रूर बिल्कुल सच्चा है (5)
और (आमाल की) जज़ा (सज़ा) ज़रूर होगी (6)
और आसमान की क़सम जिसमें रहते हैं (7)
कि (ऐ एहले मक्का) तुम लोग एक ऐसी मुख़्तलिफ़ बेजोड़ बात में पड़े हो (8)
कि उससे वही फेरा जाएगा (गुमराह होगा) (9)
जो (ख़ुदा के इल्म में) फेरा जा चुका है अटकल दौड़ाने वाले हलाक हों (10)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...