आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

21 फ़रवरी 2026

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में कैथून के चिकित्सक एवं चिकित्सा कार्मिक हुए सम्मानित

 

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में कैथून के चिकित्सक एवं चिकित्सा कार्मिक हुए सम्मानित
के डी अब्बासी
कोटा,फरवरी। कैथून सीएचसी प्रभारी डॉ राजेश सामर ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने पर सीएचसी कैथून के अधिकारी एवं कार्मिकों को जिला स्तरीय समारोह में सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह जिला मुख्यालय पर आयोजित हुआ, जिसमें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशस्ति पत्र एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
डॉ सामर ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में प्रभावी क्रियान्वयन, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित फॉलोअप तथा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सा संस्थानों, चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ नरेंद्र नागर तथा जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी (RCHO) डॉ रमेश कारगवाल द्वारा सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में जिला मेंटर अधिकारी इरशाद मिर्जा ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस प्रत्येक माह की 9, 18 एवं 27 तारीख को आयोजित किया जाता है। इन तिथियों पर जिले के सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में विशेष शिविर लगाकर गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क एएनसी (Ante Natal Care) जांच की जाती है।
इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर की जांच आवश्यक लैब जांच एवं अल्ट्रासाउंड ,एनीमिया, हाई बीपी, गर्भकालीन मधुमेह जैसी जटिलताओं की पहचान कर
आयरन, कैल्शियम एवं आवश्यक दवाओं का वितरण
पोषण एवं स्वच्छता संबंधी परामर्श संस्थागत प्रसव के लिए मार्गदर्शन सुनिश्चित किया जाता है।।।।।।।
क्या है प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
जिला कार्यक्रम प्रबंधक नरेंद्र वर्मा ने बताया कि यह भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण मातृ स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह है कि प्रत्येक गर्भवती महिला की कम से कम एक बार विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा जांच अवश्य हो, ताकि संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान की जा सके और उचित उपचार सुनिश्चित हो।
क्यों मनाया जाता है?
जिला प्रजनन शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ रमेश कारगवाल ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना इस अभियान का मूल उद्देश्य है। गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताएं यदि समय पर सामने नहीं आतीं तो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।निश्चित तिथियों पर विशेष दिवस आयोजित कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी गर्भवती महिला जांच से वंचित न रहे सभी को विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हों हाई रिस्क मामलों की समय पर पहचान हो आवश्यकता पड़ने पर उच्च केंद्र पर रेफरल किया जा सके जच्चा-बच्चा को हो रहे लाभ।
सीएमएचओ डॉ नरेंद्र नागर ने बताया कि अभियान के परिणामस्वरूप जिले में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं—✔️ उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान में वृद्धि
✔️ जटिलताओं का प्रारंभिक अवस्था में उपचार
✔️ संस्थागत प्रसव दर में बढ़ोतरी
✔️ मातृ मृत्यु दर में कमी
✔️ नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार
✔️ गर्भवती महिलाओं में पोषण एवं स्वास्थ्य जागरूकता में वृद्धि उन्होंने कहा कि नियमित मॉनिटरिंग, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग तथा ब्लॉक स्तर की समीक्षा बैठकों के माध्यम से अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है।
सीएचसी प्रभारी डॉ राजेश सामर ने कहा कि सम्मानित कार्मिक (लाडपुरा ब्लॉक) me
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य हेतु सीएचसी कैथून से डॉ नीतू अग्रवाल,रश्मि ओझा (बीपीएम),रवीना बेरवा (नर्सिंग ऑफिसर),गीता शर्मा (एचवी)
को सम्मानित किया गया। इन कार्मिकों ने हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान, नियमित फॉलोअप, समय पर रेफरल एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में उपस्थिति में सीएचसी कैथून प्रभारी डॉ राजेश सामर, बीसीएमओ डॉ जयकिशन मीणा, डॉ सुधींद्र श्रृंगी, डॉ अनिल मीणा, डॉ राजेंद्र मीणा, नर्सिंग ऑफिसर उमेश वर्मा, बीपीएम राजेश चौकनिवाल, बीपीएम कुलश्रेष्ठ सहित निजी चिकित्सालयों के चिकित्सक, जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारी एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

जाम लगा तो गाड़ी रास्ते में पार्क,फिर ट्रेन से जाकर लिया नेत्रदान

 जाम लगा तो गाड़ी रास्ते में पार्क,फिर ट्रेन से जाकर लिया नेत्रदान

लीला देवी गुप्ता की मृत्यु ने दूर किया नेत्रहीनों का अंधेरा, परिवार ने किया नेत्रदान-

जब इरादे अटल होते हैं,तो बाधाएँ रास्ता रोक नहीं सकती, शनिवार को रामगंजमंडी में लीला देवी गुप्ता के नेत्रदान के लिए कोटा से आई हुई शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम जब दरा के जाम में फस गई, तो टीम के डॉ कुलवंत गौड़ 3 किलोमीटर पैदल चलकर दरा स्टेशन पर पहुंचें ,और ट्रेन से रामगंजमंडी पहुंचकर नेत्रदान प्राप्त किया।

संस्था के नगर संयोजक संजय विजावत ने बताया कि,एक विवाह समारोह में भारत विकास परिषद के सदस्य जितेंद्र गुप्ता एवं उनकी धर्म पत्नी शकुंतला गुप्ता को ओम गुप्ता की पत्नी लीला देवी के निधन का समाचार प्राप्त हुआ वहीं पर उनके साथ भवानीमंडी के नेत्रदान प्रभारी कमलेश गुप्ता दलाल मौजूद थे, दोनों ने जब परिवार से नेत्रदान के लिए चर्चा की तो समाजसेवी परिवार के द्वारा तुरंत नेत्रदान की सहमति प्राप्त हो गई ।

सूचना मिलते ही कोटा से डॉ कुलवंत गौड़ ज्योति-रथ को लेकर रामगंजमंडी को रवाना हो गए । परिवार के द्वारा पर्याप्त समय को देखते हुए दोपहर 4:00 बजे का अंतिम संस्कार का समय निर्धारित किया हुआ था परंतु डॉ गौड़ की गाड़ी दरा के जाम में फंस गई और समय निकलता जा रहा था, ऐसे में डॉ गौड़ 3 किलोमीटर पैदल चलकर दरा रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से ट्रेन से समय पर रामगंजमंडी पहुंचकर परिवार एवं उपस्थित समाज सदस्यों के सामने नेत्रदान प्रक्रिया संपादित करके कॉर्निया प्राप्त किया तथा उसके बाद अंतिम यात्रा रवाना हुई।

नेत्रदान प्रक्रिया में राधेश्याम गुप्ता, मोनु माहेश्वरी, प्रेमचंद गुप्ता इत्यादि ने सहयोग किया। मोनू माहेश्वरी व संजय विजावत के अनुसार शाइन इंडिया फाउंडेशन की लगातार कार्यशालाओं एवं जागरूकता गोष्ठियों के कारण अब नेत्रदान विषय घर घर तक पहुंच गया है ,एवम शोक के समय परिवार से छोटे से निवेदन पर ही नेत्रदान के लिए सहमति प्राप्त हो जाती है।

प्रेषक,
शाइन इंडिया फाउंडेशन,

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद केवल व्यक्ति नहीं आजाद भारत की साझा विरासत जीवित चेतना थे।

 

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद केवल व्यक्ति नहीं आजाद भारत की साझा विरासत जीवित चेतना थे।
कोटा मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की पुण्य तिथि की पूर्व संध्या पर आज विज्ञान नगर स्थित एक निजी स्कूल मे कार्यक्रम आयोजित कर देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को याद किया गया।
मुख्य वक्ता कोटा ए. एम. पी. के संयोजक इंजिनियर सिराज अंसारी ने कहा कि, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद केवल एक व्यक्ति नहीं थे, वे भारत की साझा विरासत की जीवित चेतना थे। ऐसे समय में जब धर्म को सत्ता का औज़ार बनाया जा रहा है, आज़ाद का जीवन हमें याद दिलाता है कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को जोड़ना है, बाँटना नहीं।
आज़ाद ने इस्लाम को संकीर्ण पहचान की दीवारों में क़ैद नहीं किया, बल्कि उसे इंसानियत, ज्ञान और नैतिक साहस से जोड़ा। उन्होंने साफ़ कहा था कि “अगर कोई व्यक्ति मज़हब के नाम पर इंसान से नफ़रत करना सिखाता है, तो वह मज़हब नहीं, सियासत कर रहा है।” आज यह वाक्य सत्ता के गलियारों में सबसे असहज सत्य बन चुका है।
एक उम्मीद सेवा संस्था के अध्यक्ष डॉ. रियाज अहमद ने कहा कि, स्वतंत्रता आंदोलन में मौलाना आज़ाद की भूमिका अक्सर सुविधाजनक ढंग से कम करके दिखाई जाती है। जबकि सच्चाई यह है कि वे गांधी और नेहरू के समकक्ष विचार-स्तंभ थे। कांग्रेस के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष होने के बावजूद उन्होंने सत्ता की नहीं, सिद्धांतों की राजनीति की। विभाजन के समय उन्होंने मुसलमानों से कहा—डरकर भागना समाधान नहीं है, भारत तुम्हारा भी उतना ही है जितना किसी और का। यह साहसिक वक्तव्य आज भी अल्पसंख्यकों को आईना दिखाता है।
देश के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में आज़ाद ने आधुनिक भारत की बुनियाद रखी। आईआईटी, यूजीसी, साहित्य अकादमी और वैज्ञानिक संस्थानों की कल्पना उनके बिना अधूरी थी। उन्होंने समझ लिया था कि अज्ञान सबसे खतरनाक गुलामी है—और शिक्षा ही सबसे बड़ी आज़ादी।
आज जब इतिहास को सुविधा के अनुसार बदला जा रहा है, तब मौलाना आज़ाद को याद करना एक राजनीतिक नहीं, नैतिक ज़रूरत है। वे उन चंद नेताओं में थे जिनकी पहचान धर्म से नहीं, राष्ट्र और विवेक से तय होती थी। वे मुसलमान थे, लेकिन संप्रदायवादी नहीं; राष्ट्रवादी थे, लेकिन उग्र नहीं; आधुनिक थे, लेकिन अपनी जड़ों से कटे नहीं।
Y G न ग्रुप के निदेशक अरशद अंसारी ने कहा कि, मौलाना आज़ाद का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा राष्ट्रवाद शोर नहीं करता, बल्कि समाज को शिक्षित करता है; नफ़रत नहीं फैलाता, बल्कि भरोसा पैदा करता है। आज जब देश को सबसे ज़्यादा उसी भरोसे की ज़रूरत है, तब मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को पढ़ना नहीं—समझना ज़रूरी है। इस अवसर पर जावेद खान, जाहिद निजामी आदि भी मौजूद रहे.
सादर प्रकाशनार्थ 
दैनिक........
नूर अहमद पठान 
मो. 9571310137, 9460237310

बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे

 बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे (111)
और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खु़शख़बरी दी थी (112)
जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खु़द इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाजि़ल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला (113)
और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए हैं (114)
और खु़द दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख़्त) मुसीबत से नजात दी (115)
और (फिरऔन के मुक़ाबले में) हमने उनकी मदद की तो (आखि़र) यही लोग ग़ालिब रहे (116)
और हमने उन दोनों को एक वाज़ेए उलम तालिब किताब (तौरेत) अता की (117)
और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई (118)
और बाद को आने वालों में उनका जि़क्रे ख़ैर बाक़ी रखा (119)
कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है (120)

20 फ़रवरी 2026

शोक की घड़ी में परिजनों ने संपन्न कराया नेत्रदान

  शोक की घड़ी में परिजनों ने संपन्न कराया नेत्रदान
2. नेत्रदान कर,नाम सार्थक कर गए समाजसेवी सूरजमल बंसल

शहर के प्रमुख समाजसेवी,प्रबुद्ध व्यवसायी बूंदी सिलिका,कोटा निवासी सूरजमल बंसल का आज सुबह आकस्मिक निधन हो गया।

सहज,सरल और विनम्र स्वभाव के सेवाभावी सूरजमल न सिर्फ अपने परिवार के लिए चहेते थे, बल्कि शहर,समाज और पत्थर व्यापार मंडल के लिए भी वह हमेशा सभी के चहेते रहे । धर्म कर्म में आस्था रखने वाले सूरजमल सेवा कार्यों में हमेशा अग्रणी रहते थे।

अचानक हुई इस घटना से शहर में शोक की लहर आ गयी,क्योंकि परिवार काफी समय से सामाजिक कार्यों में सदा अग्रणी रहा है,अतः पुत्र कृष्णकांत ने स्व प्रेरणा से,माँ मानवती से सहमति लेकर नेत्रदान के लिए सहमति दे दी।

सहमति के उपरांत डॉ कुलवंत गौड़ ने,बूंदी सिलिका स्थित निवास पर पहुंचकर सूरजमल के नेत्रदान प्रक्रिया सम्पन्न की ।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...