आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
22 फ़रवरी 2026
निःशुल्क सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन सम्पन्न,15 जोड़े प्रणय सूत्र में बंधे
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं (121)
बेशक ये दोनों हमारे (ख़ालिस ईमानदार बन्दों में से थे) (122)
और इसमें शक नहीं कि इलियास यक़ीनन पैग़म्बरों में से थे (123)
जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते (124)
क्या तुम लोग बाल (बुत) की परसतिश करते हो और खु़दा को छोड़े बैठे हो जो सबसे बेहतर पैदा करने वाला है (125)
और (जो) तुम्हारा परवरदिगार और तुम्हारे अगले बाप दादाओं का (भी) परवरदिगार है (126)
तो उसे लोगों ने झुठला दिया तो ये लोग यक़ीनन (जहन्नुम) में गिरफ्तार किए जाएँगे (127)
मगर खु़दा के निरे खरे बन्दे महफूज़ रहेंगे (128)
और हमने उनका जि़क्र ख़ैर बाद को आने वालों में बाक़ी रखा (129)
कि (हर तरफ से) आले यासीन पर सलाम (ही सलाम) है (130)
21 फ़रवरी 2026
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जाम लगा तो गाड़ी रास्ते में पार्क,फिर ट्रेन से जाकर लिया नेत्रदान
जाम लगा तो गाड़ी रास्ते में पार्क,फिर ट्रेन से जाकर लिया नेत्रदान
लीला देवी गुप्ता की मृत्यु ने दूर किया नेत्रहीनों का अंधेरा, परिवार ने किया नेत्रदान-
जब
इरादे अटल होते हैं,तो बाधाएँ रास्ता रोक नहीं सकती, शनिवार को रामगंजमंडी
में लीला देवी गुप्ता के नेत्रदान के लिए कोटा से आई हुई शाइन इंडिया
फाउंडेशन की टीम जब दरा के जाम में फस गई, तो टीम के डॉ कुलवंत गौड़ 3
किलोमीटर पैदल चलकर दरा स्टेशन पर पहुंचें ,और ट्रेन से रामगंजमंडी पहुंचकर
नेत्रदान प्राप्त किया।
संस्था के नगर संयोजक संजय विजावत ने बताया
कि,एक विवाह समारोह में भारत विकास परिषद के सदस्य जितेंद्र गुप्ता एवं
उनकी धर्म पत्नी शकुंतला गुप्ता को ओम गुप्ता की पत्नी लीला देवी के निधन
का समाचार प्राप्त हुआ वहीं पर उनके साथ भवानीमंडी के नेत्रदान प्रभारी
कमलेश गुप्ता दलाल मौजूद थे, दोनों ने जब परिवार से नेत्रदान के लिए चर्चा
की तो समाजसेवी परिवार के द्वारा तुरंत नेत्रदान की सहमति प्राप्त हो गई ।
सूचना
मिलते ही कोटा से डॉ कुलवंत गौड़ ज्योति-रथ को लेकर रामगंजमंडी को रवाना हो
गए । परिवार के द्वारा पर्याप्त समय को देखते हुए दोपहर 4:00 बजे का अंतिम
संस्कार का समय निर्धारित किया हुआ था परंतु डॉ गौड़ की गाड़ी दरा के जाम
में फंस गई और समय निकलता जा रहा था, ऐसे में डॉ गौड़ 3 किलोमीटर पैदल चलकर
दरा रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से ट्रेन से समय पर रामगंजमंडी पहुंचकर
परिवार एवं उपस्थित समाज सदस्यों के सामने नेत्रदान प्रक्रिया संपादित करके
कॉर्निया प्राप्त किया तथा उसके बाद अंतिम यात्रा रवाना हुई।
नेत्रदान
प्रक्रिया में राधेश्याम गुप्ता, मोनु माहेश्वरी, प्रेमचंद गुप्ता इत्यादि
ने सहयोग किया। मोनू माहेश्वरी व संजय विजावत के अनुसार शाइन इंडिया
फाउंडेशन की लगातार कार्यशालाओं एवं जागरूकता गोष्ठियों के कारण अब
नेत्रदान विषय घर घर तक पहुंच गया है ,एवम शोक के समय परिवार से छोटे से
निवेदन पर ही नेत्रदान के लिए सहमति प्राप्त हो जाती है।
प्रेषक,
शाइन इंडिया फाउंडेशन,
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद केवल व्यक्ति नहीं आजाद भारत की साझा विरासत जीवित चेतना थे।