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11 फ़रवरी 2026

*बजट से राजस्थान की जनता को मिली निराशा : गुंजल*

 

*बजट से राजस्थान की जनता को मिली निराशा : गुंजल*
के डी अब्बासी
कोटा : कोटा उत्तर पूर्व विधायक व कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने कहा कि बजट से राजस्थान की जनता को निराशा के अलावा कुछ नहीं मिला। गुंजल ने कहा कि सरकार अपने तीसरे बजट में भी पूर्व के बजट व चुनाव में जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं कर पाई। गुंजल ने कहा कि दूसरे पूर्ण बजट में युवाओं के लिए सवा लाख भर्ती उपलब्ध कराने की बात करने वाली सरकार अब शिक्षित बेरोजगारों के साथ धोखा कर काम चलाऊ भर्ती का जुगाड़ कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार केंद्रीय बजट काल्पनिक था उसी प्रकार राज्य का बजट भी काल्पनिक है। उन्होंने कहा कि सरकार लाखों युवाओं को रोजगार देने की बात कर रही हैं स्टार्टअप को लेकर बड़े बड़े दावे करने वाली सरकार बताए कि युवाओं के स्टार्टअप से लेकर, उद्योगों के लिए सरल ऋण उपलब्ध करवाने से लेकर क्या किया। गुंजल ने कहा सरकार ने सवा दो साल मे किन किन विभागों में कितने कितने युवाओं व शिक्षित बेरोजगारों को नौकरियां उपलब्ध करवाई। सरकार की काल्पनिक घोषणाओं को प्रदेश की जनता जान चुकी हैं। उन्होंने कहा कि बजट में कुछ नया नहीं है। किसानों से किया एमएसपी का वादा आज भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बजट पूरी तरह से जन विरोधी है । गुंजल ने कहा कि केंद्रीय बजट मे राजस्थान को कुछ नहीं मिलने के बाद हर वर्ग को राजस्थान के बजट से बहुत आशाएं थी पर किसानों, युवाओं, शिक्षित बेरोजगारों सहित प्रदेश के आमजन को बजट से जो आशा थी जो निराशा में बदल गई है।

28 फरवरी तक साहित्यकार अपना परिचय 9413350242 पर भेजें...... 11. मोहनलाल वर्मा , झालावाड़

 

28 फरवरी तक साहित्यकार अपना परिचय 9413350242 पर भेजें......
11. मोहनलाल वर्मा , झालावाड़
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मोहनलाल वर्मा का जन्म कोटा जिले के गांव धौरी ननिहाल में 3 मई 1956 को पिता श्रीनाथ वर्मा के परिवार में हुआ। आपका पैतृक गांव: कनवास है। आपने कला वर्ग में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। आपको संस्कृत, हिंदी,अंग्रेजी,राजस्थानी हाड़ौती भाषाओं का ज्ञान है। आप गद्य विधा में कहानी,उपन्यास, प्रहसन,निबंध एवं आलेख तथा पद्य विधा में गीत,ग़जल कुंडलियां ,छंद, लिखते हैं। आपकी हिंदी में दो कृतियां "मैं एक माटी का दीया" ( 2024) एवं हकीक़त ( 2025 ) में प्रकाशित हुई हैं। विभिन्न पत्रों एवं 10 साझा संकलनों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। आत्मा परमात्मा,के अदृश्य स्मरण द्वैत अद्वेत का संगम जीव और जगत मिलन की परिकल्पना की उडान पर "गिलहरी" नामक उपन्यास लेखन प्रक्रिया में है।आपको बुलंदी अंतरराष्ट्रीय साहित्य संस्था उत्तराखंड द्वारा साहित्य गौरव और हिंदी गौरव सम्मान,साहित्य सृजन मंच बुलंदशहर द्वारा साहित्य शिरोमणि सम्मान, साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा की ओर से काव्य रत्न , प्रिंस जी वेलफेयर प्रकाशन ट्रस्ट आगरा से प्रिंस भक्ति कवि सम्मान, श्री लोहागढ़ साहित्य एवं समाज सेवा समिति द्वारा शान ए राजस्थान तथा प्रतियोगिता में बिजयी होने पर संस्कृति, साहित्य, मीडिया फोरम कोटा द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया है।
संपर्क :
श्रीसदन वार्ड नंबर.11 शहीद भगतसिंह काॅलोनी ,म.न.221 समीप मंशापूरण हनुमानजी का मंदिर, झालावाड़ ( राज.)
:मोबाइल. 8107261866
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संकलन : डॉ. प्रभात कुमार सिंघल,कोटा

पिता-पुत्रों ने सहमति से संपन्न कराया नेत्रदान

  पिता-पुत्रों ने सहमति से संपन्न कराया नेत्रदान

मंगलवार दिन रात लाल बिहारी जी का चौक, चौमुखा बाजार,बूंदी निवासी पंडित श्रीकांत शर्मा की धर्मपत्नी गीता शर्मा,का आकस्मिक निधन हुआ,जिसके उपरांत बेटे लक्ष्मीकांत,शिवकांत और बेटी अनीता ने स्वप्रेरणा से गीता के नेत्रदान करवाने का निर्णय लिया ।

सभी की सहमति से ऋतुराज कोठीवाला स्मृति संस्थान,के मधुसूदन गुप्ता को नेत्रदान प्रक्रिया संपन्न करवाने के लिए, संपर्क किया संस्था के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा की सूचना पर देर रात 12:00 श्रीकांत के निवास पर, डॉ कुलवंत गौड़ ने नेत्रदान प्रक्रिया सम्पन्न की।

डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि,जन सहयोग से अभी तक बूंदी शहर में 77 नेत्रदान हो चुके हैं । नेत्रदान लेने के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम 24 घंटे पूरे हाडोती संभाग में तैयार रहती है ।

परिवार में परंपरा बना नेत्रदान

परिवार में परंपरा बना नेत्रदान
2. पत्नी,बेटों ने सहमति कर संपन्न कराया नेत्रदान

दो माह पूर्व विज्ञान नगर,निवासी ट्रांसपोर्ट व्यवसायी विनय कुमार छाबड़ा के बड़े भाई राजेंद्र छाबड़ा के आकस्मिक निधन के उपरांत संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से उनका नेत्रदान संपन्न हुआ था।

आज सुबह विनय का भी हृदयाघात से आकस्मिक निधन हो गया । नेत्रदान की, सरल और रक्त विहीन प्रक्रिया को, प्रारंभ से ही परिवार के सदस्य जानते थे । इसीलिए जैसे ही संस्था के ज्योति मित्र श्याम दीवाना ने विनय कुमार की पत्नी सविता,बेटे मनीष और अंकुश से नेत्रदान की चर्चा की तो परिवार ने तुरंत सहमति दे दी ।

श्याम की सूचना पर संस्था सदस्यों की ओर से घर पर नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई । विनय के अचानक देवलोक गमन जाने से पंजाबी समाज में शोक की लहर आ गई। 

(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे

 (जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे (21)
(और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे उनको और उनके साथियों को और खु़दा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं (22)
उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ (23)
और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है (24)
(अरे कमबख़्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते (25)
(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं (26)
और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे (27)
(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे (28)
वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खु़द ईमान लाने वाले न थे (29)
और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खु़द सरकश लोग थे (30)

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