नेत्रदान की संख्या नहीं, गुणवत्ता बढ़ाना हमारा उद्देश्य : डॉ. संगीता गौड़
दो राज्यों के 20 शहरों से जुड़े ‘ज्योति मित्रों’ को दिया नेत्रदान प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रशिक्षण
कोटा। नेत्रदान अभियान को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक दिवसीय “आत्मविश्लेषण, चिंतन एवं मंथन—संदर्भ व्यक्ति प्रशिक्षण कार्यशाला” संपन्न हुई। इसमें राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के करीब 20 शहरों से जुड़े ज्योति मित्रों एवं संदर्भ व्यक्तियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में ज्योति मित्रों को नेत्रदान के दौरान उनकी भूमिका, परिवार के साथ संवेदनशील संवाद तथा नेत्रदान टीम के पहुंचने तक मृतक की आंखों एवं कॉर्निया की सुरक्षा के संबंध में व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बताया गया कि मृतक की आंखें पूरी तरह बंद रखें और आंखों पर लगातार गीली पट्टी रखें, ताकि नमी बनी रहे और कॉर्निया की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
शाइन इंडिया फाउंडेशन की संस्थापक सचिव डॉ. संगीता गौड़ ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल नेत्रदान की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्राप्त होने वाले कॉर्निया की गुणवत्ता बनाए रखना भी है, ताकि दानदाता की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए अधिक से अधिक जरूरतमंदों को दृष्टि का लाभ मिल सके।
कार्यशाला में विभिन्न शहरों से आए ज्योति मित्रों ने अपने मैदानी अनुभव साझा किए। रामगंज मंडी के संजय विजावत, गरोठ के नरेंद्र राय चौधरी एवं श्योपुर के ज्ञानचंद जैन सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रों में किए जा रहे जागरूकता प्रयासों की जानकारी दी।
कार्यशाला के दूसरे चरण में हाड़ौती के कॉर्निया ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अरनव सरोया ने कॉर्निया एवं आंखों की सुरक्षा से संबंधित चिकित्सकीय जानकारी दी। उन्होंने बच्चों में बढ़ रहे किराटोकोनस के मामलों और समय पर पहचान एवं उपचार के महत्व पर भी जानकारी दी।
कार्यशाला में बूंदी, खानपुर, भवानी मंडी, रामगंज मंडी, बारां, इटावा सहित राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से जुड़े ज्योति मित्रों ने भाग लिया।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्रदान जागरूकता को बढ़ाने के लिए कार्यशालाओं के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं आशा सहयोगिनियों के साथ सामूहिक बैठकें भी आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल ज्योति मित्रों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक ज्योति मित्र को सही जानकारी, संवेदनशील व्यवहार और जिम्मेदार कार्यप्रणाली के साथ अभियान की मजबूत कड़ी बनाना है।
शाइन इंडिया फाउंडेशन का संदेश है—
“नेत्रदान की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है नेत्रदान की गुणवत्ता, क्योंकि हर दानदाता की अंतिम इच्छा किसी के जीवन में रोशनी बनकर पहुंचनी चाहिए।”
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
21 सितंबर 2026
नेत्रदान की संख्या नहीं, गुणवत्ता बढ़ाना हमारा उद्देश्य : डॉ. संगीता गौड़
और जिन लोगों ने बुरे काम किए फिर उसके बाद तौबा कर ली और इमान लाए तो बेशक तुम्हारा परवरदिगार तौबा के बाद ज़रूर बख़्शने वाला मेहरबान है
तब) मूसा ने कहा ऐ मेरे परवरदिगार मुझे और मेरे भाई को बख़्श दे और हमें अपनी रहमत में दाखि़ल कर और तू सबसे बढ़के रहम करने वाला है (151)
बेषक जिन लोगों ने बछड़े को (अपना माबूद) बना लिया उन पर अनक़रीब ही उनके परवरदिगार की तरफ से अज़ाब नाजि़ल होगा और दुनियावी जि़न्दगी में जि़ल्लत (उसके अलावा) और हम बोहतान बाधने वालों की ऐसी ही सज़ा करते हैं (152)
और जिन लोगों ने बुरे काम किए फिर उसके बाद तौबा कर ली और इमान लाए तो बेशक तुम्हारा परवरदिगार तौबा के बाद ज़रूर बख़्शने वाला मेहरबान है (153)
और जब मूसा का गुस्सा ठण्डा हुआ तो (तौरैत) की तख़्तियों को (ज़मीन से) उठा लिया और तौरैत के नुस्खे में जो लोग अपने परवरदिगार से डरते है उनके लिए हिदायत और रहमत है (154)
और मूसा ने अपनी क़ौम से हमारा वायदा पूरा करने को (कोहतूर पर ले जाने के वास्ते) सत्तर आदमियों को चुना फिर जब उनको ज़लज़ले ने आ पकड़ा तो हज़रत मूसा ने अजऱ् किया परवरदिगार अगर तू चाहता तो मुझको और उन सबको पहले ही हलाक़ कर डालता क्या हम में से चन्द बेवकूफों की करनी की सज़ा में हमको हलाक़ करता है ये तो सिर्फ तेरी आज़माइश थी तू जिसे चाहे उसे गुमराही में छोड़ दे और जिसको चाहे हिदायत दे तू ही हमारा मालिक है तू ही हमारे कुसूर को माफ कर और हम पर रहम कर और तू तो तमाम बख़्षने वालों से कहीं बेहतर है (155)
और तू ही इस दुनिया (फ़ानी) और आखि़रत में हमारे वास्ते भलाई के लिए लिख ले हम तेरी ही तरफ रूझू करते हैं ख़ुदा ने फरमाया जिसको मैं चाहता हूँ (मुस्तहक़ समझकर) अपना अज़ाब पहुँचा देता हूँ और मेरी रहमत हर चीज़ पर छाई हैं मै तो उसे बहुत जल्द ख़ास उन लोगों के लिए लिख दूँगा (जो बुरी बातों से) बचते रहेंगे और ज़कात दिया करेंगे और जो हमारी बातों पर ईमान रखा करेंगे (156)
(यानि) जो लोग हमारे बनी उल उम्मी पैग़म्बर के क़दम बा क़दम चलते हैं जिस (की बशारत) को अपने हा तौरैत और इन्जील में लिखा हुआ पाते है (वह नबी) जो अच्छे काम का हुक्म देता है और बुरे काम से रोकता है और जो पाक व पाकीज़ा चीजे़ तो उन पर हलाल और नापाक गन्दी चीजे़ उन पर हराम कर देता है और (सख़्त एहकाम का) बोझ जो उनकी गर्दन पर था और वह फन्दे जो उन पर (पड़े हुए) थे उनसे हटा देता है पस (याद रखो कि) जो लोग (नबी मोहम्मद) पर इमान लाए और उसकी इज़्ज़त की और उसकी मदद की और उस नूर (क़ुरान) की पैरवी की जो उसके साथ नाजि़ल हुआ है तो यही लोग अपनी दिली मुरादे पाएगें (157)
(ऐ रसूल) तुम (उन लोगों से) कह दो कि लोगों में तुम सब लोगों के पास उस ख़ुदा का भेजा हुआ (पैग़म्बर) हूँ जिसके लिए ख़ास सारे आसमान व ज़मीन की बादशाहत (हुकूमत) है उसके सिवा और कोई माबूद नहीं वही जि़न्दा करता है वही मार डालता है पस (लोगों) ख़ुदा और उसके रसूल नबी उल उम्मी पर ईमान लाओ जो (ख़ुद भी) ख़़ुदा पर और उसकी बातों पर (दिल से) ईमान रखता है और उसी के क़दम बा क़दम चलो ताकि तुम हिदायत पाओ (158)
और मूसा की क़ौम के कुछ लोग ऐसे भी है जो हक़ बात की हिदायत भी करते हैं और हक़ के (मामलात में) इन्साफ़ भी करते हैं (159)
और हमने बनी ईसराइल के एक एक दादा की औलाद को जुदा जुदा बारह गिरोह बना दिए और जब मूसा की क़ौम ने उनसे पानी मागा तो हमने उनके पास वही भेजी कि तुम अपनी छड़ी पत्थर पर मारो (छड़ी मारना था) कि उस पत्थर से पानी के बारह चश्मे फूट निकले और ऐसे साफ साफ अलग अलग कि हर क़बीले ने अपना अपना घाट मालूम कर लिया और हमने बनी ईसराइल पर अब्र (बादल) का साया किया और उन पर मन व सलवा (सी नेअमत) नाजि़ल की (लोगों) जो पाक (पाकीज़ा) चीज़े तुम्हें दी हैं उन्हें (शौक से खाओ पियो) और उन लोगों ने (नाफरमानी करके) कुछ हमारा नहीं बिगाड़ा बल्कि अपना आप ही बिगाड़ते हैं (160)
20 सितंबर 2026
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और हमने (तौरैत की) तख़्तियों में मूसा के लिए हर तरह की नसीहत और हर चीज़ का तफसीलदार बयान लिख दिया था तो (ऐ मूसा) तुम उसे मज़बूती से तो (अमल करो) और अपनी क़ौम को हुक्म दे दो कि उसमें की अच्छी बातों पर अमल करें और बहुत जल्द तुम्हें बदकिरदारों का घर दिखा दूँगा (कि कैसे उजड़ते हैं)
हालाकि उसने तुमको सारी खुदाई पर फज़ीलत दी है (ऐ बनी इसराइल वह वक़्त याद करो) जब हमने तुमको फिरआऊन के लोगों से नजात दी जब वह लोग तुम्हें बड़ी बड़ी तकलीफें पहुचाते थे तुम्हारे बेटों को तो (चुन चुन कर) क़त्ल कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को (लौन्डिया बनाने के वास्ते जि़न्दा रख छोड़ते) और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे (सब्र की) सख़्त आज़माइश थी (141)
और हमने मूसा से तौरैत देने के लिए तीस रातों का वायदा किया और हमने उसमें दस रोज़ बढ़ाकर पूरा कर दिया ग़रज़ उसके परवरदिगार का वायदा चालीस रात में पूरा हो गया और (चलते वक़्त) मूसा ने अपने भाई हारून कहा कि तुम मेरी क़ौम में मेरे जानशीन रहो और उनकी इसलाह करना और फसाद करने वालों के तरीक़े पर न चलना (142)
और जब मूसा हमारा वायदा पूरा करते (कोहेतूर पर) आए और उनका परवरदिगार उनसे हम कलाम हुआ तो मूसा ने अजऱ् किया कि ख़ुदाया तू मेझे अपनी एक झलक दिखला दे कि मैं तूझे देख्ँ ख़ुदा ने फरमाया तुम मुझे हरगिज़ नहीं देख सकते मगर हा उस पहाड़ की तरफ देखो (हम उस पर अपनी तजल्ली डालते हैं) पस अगर (पहाड़) अपनी जगह पर क़ायम रहे तो समझना कि अनक़रीब मुझे भी देख लोगे (वरना नहीं) फिर जब उनके परवरदिगार ने पहाड़ पर तजल्ली डाली तो उसको चकनाचूर कर दिया और मूसा बेहोश होकर गिर पड़े फिर जब होश में आए तो कहने लगे ख़़ुदा वन्दा तू (देखने दिखाने से) पाक व पाकीज़ा है-मैने तेरी बारगाह में तौबा की और मै सब से पहले तेरी अदम रवायत का यक़ीन करता हूँ (143)
ख़ुदा ने फरमाया ऐ मूसा मैने तुमको तमाम लोगों पर अपनी पैग़म्बरी और हम कलामी (का दरजा देकर) बरगूज़ीदा किया है तब जो (किताब तौरैत) हमने तुमको अता की है उसे लो और शुक्रगुज़ार रहो (144)
और हमने (तौरैत की) तख़्तियों में मूसा के लिए हर तरह की नसीहत और हर चीज़ का तफसीलदार बयान लिख दिया था तो (ऐ मूसा) तुम उसे मज़बूती से तो (अमल करो) और अपनी क़ौम को हुक्म दे दो कि उसमें की अच्छी बातों पर अमल करें और बहुत जल्द तुम्हें बदकिरदारों का घर दिखा दूँगा (कि कैसे उजड़ते हैं) (145)
जो लोग (ख़ुदा की) ज़मीन पर नाहक़ अकड़ते फिरते हैं उनको अपनी आयतों से बहुत जल्द फेर दूगा और मै क्या फेरूगा ख़ुदा (उसका दिल ऐसा सख़्त है कि) अगर दुनिया जहान के सारे मौजिज़े भी देखते तो भी ये उन पर इमान न लाएगें और (अगर) सीधा रास्ता भी देख पाए तो भी अपनी राह न जाएगें और अगर गुमराही की राह देख लेगें तो झटपट उसको अपना तरीक़ा बना लेगें ये कजरवी इस सबब से हुयी कि उन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया और उनसे ग़फलत करते रहे (146)
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को और आखि़रत की हुज़ूरी को झूठलाया उनका सब किया कराया अकारत हो गया, उनको बस उन्हीं आमाल की जज़ा या सज़ा दी जाएगी जो वह करते थे (147)
और मूसा की क़ौम ने (कोहेतूर पर) उनके जाने के बाद अपने जे़वरों को (गलाकर) एक बछड़े की मूरत बनाई (यानि) एक जिस्म जिसमें गाए की सी आवाज़ थी (अफसोस) क्या उन लोगों ने इतना भी न देखा कि वह न तो उनसे बात ही कर सकता और न किसी तरह की हिदायत ही कर सकता है (खुलासा) उन लोगों ने उसे (अपनी माबूद बना लिया) (148)
और आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते थे और जब वह पछताए और उन्होने अपने को यक़ीनी गुमराह देख लिया तब कहने लगे कि अगर हमारा परदिगार हम पर रहम नहीं करेगा और हमारा कुसूर न माफ़ करेगा तो हम यक़ीनी घाटा उठाने वालों में हो जाएगें (149)
और जब मूसा पलट कर अपनी क़ौम की तरफ आए तो (ये हालत देखकर) रंज व गुस्से में (अपनी क़ौम से) कहने लगे कि तुम लोगों ने मेरे बाद बहुत बुरी हरकत की-तुम लोग अपने परवरदिगार के हुक्म (मेरे आने में) किस कदर जल्दी कर बैठे और (तौरैत की) तख़्तियों को फेंक दिया और अपने भाई (हारून) के सर (के बालों को पकड़ कर अपनी तर फ खींचने लगे) उस पर हारून ने कहा ऐ मेरे मांजाए (भाई) मै क्या करता क़ौम ने मुझे हक़ीर समझा और (मेरा कहना न माना) बल्कि क़रीब था कि मुझे मार डाले तो मुझ पर दुश्मनों को न हॅसवाइए और मुझे उन ज़ालिम लोगों के साथ न करार दीजिए (150)