40 वर्ष पूर्व,गुरु द्वारा लिया गया नेत्रदान संकल्प शिष्य के सहयोग से हुआ पूरा
2. देर रात,सेवानिवृत शिक्षक का हुआ नेत्रदान, मांगरोल क्षेत्र का पहला नेत्रदान संपन्न
माहेश्वरी
किराना , कपड़ा भंडार,मांगरोल निवासी सेवानिवृत अध्यापक बृजराज माहेश्वरी
का शुक्रवार शाम 8:00 बजे निवास स्थान पर आकस्मिक निधन हो गया ।
गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध, सौम्य वाणी के
सहज
सरल विनम्र और हंसमुख स्वभाव के ब्रजराज जी विलक्षण प्रतिभाओं के धनी थे ।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने अपने पूरे जीवन काल में कई ऐसे
विद्यार्थियों को शिक्षा दी जो आज देश में काफी उच्च स्थान पर प्रतिष्ठित
हैं । सेवा एवं धार्मिक कार्य में उनकी अत्यंत रुचि थी,रामचरितमानस पूरी
कंठस्थ थी ।
उन्होंने नई दिल्ली की संस्था टाइम्स आई रिसर्च
फाउंडेशन के साथ,40,वर्ष पूर्व वर्ष 1986 में अपना नेत्रदान संकल्प पत्र
भरा हुआ था, बीच-बीच में अपने घर के सदस्यों को भी वह अपने नेत्रदान संकल्प
की याद दिलाते रहते थे।
ब्रजराज जी अपने कार्यों के प्रति काफी
संकल्पित थे, शायद 7 दिन पहले ही उन्हें अपनी मृत्यु का आभास कर लिया
था,इसलिए उन्होंने अपने प्रिय शिष्य पीयूष विजय को,अपनी मृत्यु के बाद
नेत्रदान संपन्न करवाने की जिम्मेदारी सौंपी।
पीयूष विजय ने पूर्व
से ही संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन से संपर्क किया हुआ था, बृजराज जी के
देहांत होते ही उन्होंने संस्था के डॉ कुलवंत गौड़ (कॉर्डिनेटर
ईबीएसआर-बीबीजे चैप्टर) को संपर्क किया । डॉ गौड़ तुरंत ही कोटा से अपने
सहयोगी एडवोकेट जय मेहरा को लेकर,रात 10:00 बजे, नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति
रथ को से मांगरोल स्थित निवास स्थान पर पहुंचे ।
परिवार के सभी
सदस्यों ने नेत्रदान की प्रक्रिया को देखा और जाना की,नेत्रदान प्रक्रिया
में पूरी आंख नहीं ली जाती है,सिर्फ आंख के सामने की पारदर्शी झिल्ली जिसे
पुतली कहा जाता है,उसे लिया जाता है,जिसमें 10 से 15 मिनट का समय लगता है ।
उपस्थित लोगों ने यह भी देखा कि,नेत्रदान प्रक्रिया में किसी तरह का रक्त
स्राव नहीं हुआ और न चेहरे पर कोई विकृति आई है ।
डॉ कुलवंत गौड़ ने
नेत्रदानी परिवारों का धन्यवाद देते हुए कहा कि, गर्मियों में नेत्रदान की
प्रक्रिया 6 से 8 घंटे में एवं सर्दियों में 10 से 12 घंटे में पूरी हो
जानी चाहिए । नेत्रदान के उपरांत संस्था की ओर से शोकाकुल परिवार के
सदस्यों को प्रशस्ति पत्र भी भेंट किया गया।
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
18 अप्रैल 2026
40 वर्ष पूर्व,गुरु द्वारा लिया गया नेत्रदान संकल्प शिष्य के सहयोग से हुआ पूरा
(और) लोगों को ढाँक लेगा ये दर्दनाक अज़ाब है
(और) लोगों को ढाँक लेगा ये दर्दनाक अज़ाब है (11)
कुफ़्फ़ार भी घबराकर कहेंगे कि परवरदिगार हमसे अज़ाब को दूर दफ़ा कर दे हम भी ईमान लाते हैं (12)
(उस वक़्त) भला क्या उनको नसीहत होगी जब उनके पास पैग़म्बर आ चुके जो साफ़ साफ़ बयान कर देते थे (13)
इस पर भी उन लोगों ने उससे मुँह फेरा और कहने लगे ये तो (सिखाया) पढ़ाया हुआ दीवाना है (14)
(अच्छा ख़ैर) हम थोड़े दिन के लिए अज़ाब को टाल देते हैं मगर हम जानते हैं तुम ज़रूर फिर कुफ्र करोगे (15)
हम बेशक (उनसे) पूरा बदला तो बस उस दिन लेगें जिस दिन सख़्त पकड़ पकड़ेंगे (16)
और उनसे पहले हमने क़ौमे फ़िरऔन की आज़माइश की और उनके पास एक आली क़दर पैग़म्बर (मूसा) आए (17)
(और कहा) कि ख़ुदा के बन्दों (बनी इसराईल) को मेरे हवाले कर दो मैं (ख़ुदा की तरफ़ से) तुम्हारा एक अमानतदार पैग़म्बर हूँ (18)
और ख़ुदा के सामने सरकशी न करो मैं तुम्हारे पास वाज़ेए व रौशन दलीलें ले कर आया हूँ (19)
और इस बात से कि तुम मुझे संगसार करो मैं अपने और तुम्हारे परवरदिगार (ख़ुदा) की पनाह मांगता हूँ (20)
17 अप्रैल 2026
विद्यार्थियों के साथ अंगदान महादान पर विशेष चर्चा
विद्यार्थियों के साथ अंगदान महादान पर विशेष चर्चा
2. रोटरी क्लब कोटा नॉर्थ व शाइन इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में अंगदान महादान पर कार्यशाला
शाइन
इंडिया फाउंडेशन द्वारा रोटरी क्लब कोटा नॉर्थ के रोटरी सप्ताह “अविरल” के
अंतर्गत सोगरिया स्थित केबीएस गुरुकुल में अंगदान-नेत्रदान जागरूकता पर
विद्यार्थियों के साथ, एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संस्था
के संस्थापक व मुख्य वक्ता डॉ संगीता गौड़ ने बताया कि,विद्यार्थियों के
साथ कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में कम उम्र से ही
संवेदनशीलता, मानवता और सेवा भाव को जागृत करना था, ताकि अंगदान-नेत्रदान
जैसे महान कार्यों को समाज में सामान्य बनाया जा सके।
डॉ. संगीता
गौड़ ने नेत्रदान के महत्व और वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर प्रकाश
डाला। उन्होंने बच्चों को सरल भाषा में बताया कि,भारत में लाखों लोग
कॉर्निया की अंधता से पीड़ित हैं। इसका मुख्य कारण संक्रमण, चोट या
विटामिन-A की कमी है, और इसका एकमात्र निवारण मरणोपरांत नेत्रदान ही है। एक
व्यक्ति के नेत्रदान से न्यूनतम दो लोगों को रोशनी मिल सकती है।
कार्यशाला
में डॉ. कुलवंत गौड़ ने अंगदान के महत्व को बताते हुए जानकारी दी कि कैसे
एक ब्रेन डेड व्यक्ति,जीवन के अंतिम क्षणों में अपने हृदय, फेफड़े, लीवर,
किडनी, पैन्क्रियाज और आंखे दान करके 9 लोगों को जीवनदान दे सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि,अंगदान सबसे बड़ा पुण्य है और इसमें शरीर विरूपित
नहीं होता।
कार्यशाला में रोटरी क्लब कोटा नॉर्थ के अध्यक्ष विनय
अग्निहोत्री एवं परियोजना समन्वयक हेमलता गुप्ता ने शाइन इंडिया फाउंडेशन
के प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस तरह के संयुक्त कार्यक्रम समाज में
सकारात्मक बदलाव की नींव रखते हैं। इस अवसर पर रोटरी क्लब के निर्वाचित
अध्यक्ष डॉ. प्रवीण गुप्ता एवं प्रथम महिला पुनीत अग्निहोत्री भी उपस्थित
रहे। केबीएस गुरुकुल की ओर से प्राचार्य दिनेश गुप्ता एवं समन्वयक गरिमा ने
संस्था का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे आयोजन कराने का संकल्प
लिया।
संगोष्ठी के अंत में, विद्यार्थियों से कार्यशाला में दी गई
जानकारी से जुड़े सवाल किये गए,सही जवाब देने वाले बच्चों को संस्था की ओर
से शाइन मेडल लेकर पुरस्कृत भी किया गया।
हमने इसको मुबारक रात (शबे क़द्र) में नाजि़ल किया बेशक हम (अज़ाब से) डराने वाले थे
सूरए अद दुख़ान मक्का में नाजि़ल हुआ और इसमें (59) उनसठ आयतें हैं
ख़ुदा के नाम से शुरू करता हूँ जो बड़ा मेहरबान निहायत रहमवाला है
हा मीम (1)
वाज़ेए व रौशन किताब (कु़रआन) की क़सम (2)
हमने इसको मुबारक रात (शबे क़द्र) में नाजि़ल किया बेशक हम (अज़ाब से) डराने वाले थे (3)
इसी रात को तमाम दुनिया के हिक़मत व मसलेहत के (साल भर के) काम फ़ैसले किये जाते हैं (4)
यानि हमारे यहाँ से हुक्म होकर (बेशक) हम ही (पैग़म्बरों के) भेजने वाले हैं (5)
ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी है, वह बेशक बड़ा सुनने वाला वाकि़फ़कार है (6)
सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है सबका मालिक (7)
अगर तुममें यक़ीन करने की सलाहियत है (तो करो) उसके सिवा कोई माबूद नहीं -
वही जिलाता है वही मारता है तुम्हारा मालिक और तुम्हारे (अगले) बाप दादाओं
का भी मालिक है (8)
लेकिन ये लोग तो शक में पड़े खेल रहे हैं (9)
तो तुम उस दिन का इन्तेज़ार करो कि आसमान से ज़ाहिर ब ज़ाहिर धुआँ निकलेगा (10)
15 अप्रैल 2026
आज़ाद भारत को जिओ और जीने दो का सलीक़ा सिखाने वाले , मानवधर्म संविधान निर्माता ,, डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी को श्रद्धाजंलि