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11 जुलाई 2026

योगिनी एकादशी पर कोटा जंक्शन से निकली भव्य प्रभात फेरी, श्रीराम-कृष्ण कीर्तन से भक्तिमय हुआ बजरिया क्षेत्र,

 

योगिनी एकादशी पर कोटा जंक्शन से निकली भव्य प्रभात फेरी, श्रीराम-कृष्ण कीर्तन से भक्तिमय हुआ बजरिया क्षेत्र,
श्री राम मंदिर प्रबंध समिति ने प्रभात फेरी में शामिल श्रद्धालुओं का किया स्वागत, सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का दिया संदेश
के डी अब्बासी
कोटा। योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर स्टेशन क्षेत्र के श्रद्धालुओं द्वारा श्री राम मंदिर, कोटा जंक्शन से संपूर्ण बजरिया क्षेत्र में भव्य प्रभात फेरी निकाली गई। प्रभात फेरी के दौरान श्रद्धालु श्रीराम और श्रीकृष्ण के भजनों एवं संकीर्तन का गुणगान करते हुए पूरे क्षेत्र में धर्म और भक्ति का संदेश देते चले। भक्ति और उत्साह से सराबोर इस आयोजन में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
श्री राम मंदिर समिति के हरि कुमार शर्मा ने बताया कि प्रभात फेरी के माध्यम से सभी श्रद्धालुओं ने भक्ति की एक अनूठी मिसाल प्रस्तुत करते हुए सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, एकता और संस्कारों को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
प्रभात फेरी के समापन पर श्री राम मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं का जोरदार स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। समिति ने आयोजन को सफल बनाने वाले सभी भक्तों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें योगिनी एकादशी की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर श्रीमती शीला चावला, संतोष लोधा, राजेश मेहंदीरत्ता, सुरेश कुमार शर्मा, युवराज सिंह, महावीर शर्मा, जगदीश बागड़, भेरूलाल, हरि कुमार शर्मा, कन्हैया लाल मेवाड़ा, रघुनंदन विजय, भारत भूषण खत्री, ललित तिवारी, राजेश दीक्षित तथा आचार्य पंडित श्री राम बाबूजी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

स्व. सुमेर सिंह की 27वीं पुण्यतिथि पर गौसेवा और रक्तदान शिविर का आयोजन, बड़ी संख्या में लोगों ने दी श्रद्धांजलि,

 

स्व. सुमेर सिंह की 27वीं पुण्यतिथि पर गौसेवा और रक्तदान शिविर का आयोजन, बड़ी संख्या में लोगों ने दी श्रद्धांजलि,
माता श्रीमती गायत्री देवी ने दीप प्रज्वलित कर किया शुभारंभ, सामाजिक संगठनों और युवाओं ने निभाई सेवा की मिसाल
के डी अब्बासी
कोटा, 11 जुलाई। समाजसेवी हिम्मत सिंह के पिता स्वर्गीय सुमेर सिंह की 27वीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को सेवा और समर्पण को समर्पित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कायन हाउस गौशाला में गौसेवा तथा तलवंडी में विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वर्गीय सुमेर सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती गायत्री देवी ने दीप प्रज्वलित एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया।
सुबह 9 बजे गौशाला में गौमाताओं की सेवा कर उनके लिए हरा चारा एवं आवश्यक सामग्री अर्पित की गई। इसके बाद सुबह 11 बजे तलवंडी में आयोजित रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में युवाओं ने उत्साहपूर्वक रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया।
रक्तदान शिविर में युवराज सिंह, श्रीमती निधि सिंह, लक्ष्मी सिंह, अमर धामोनिया, देवेंद्र सिंह, भीम सुमन, गौरव शर्मा, मनीष रामावत, दानिश खान, दीपेंद्र राजावत, राकेश कुमार, चेतन्य सिंह, रोहित राजावत, नईम खान, गौरव प्रजापति, कपिल मेहता, भेरूलाल सुमन, मितेंद्र सोलंकी, कुलदीप शर्मा, लोकेश सहित अनेक युवाओं ने रक्तदान कर जरूरतमंदों की सहायता का संकल्प लिया।
इस दौरान स्वर्गीय सुमेर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में समाजसेवी, जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से विवेक राजवंशी, विशाल सिंह, YGN कॉलेज के अरशद अंसारी, तारीख खान, मोनी माखीजा, जितेंद्र पंवार, सगीर खान, आफताब अंसारी, मुजाहिद हुसैन मिंटू, वीरेंद्र राठौड़, लोकेश मेहरा, मोहित चावला, सलाम सब्बाब, कुणाल संगत, विजय चौहान, भेरूलाल गुर्जर, कार्तिक मेहरा, जावेद अंसारी, गोविंद नायक, भेरू शर्मा, हितेश शर्मा, कमल चतुर्वेदी, चंदा बरवाडिया सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने पुष्पांजलि अर्पित कर स्वर्गीय सुमेर सिंह के व्यक्तित्व एवं समाजसेवा को याद किया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि स्वर्गीय सुमेर सिंह का जीवन समाजसेवा, मानवीय मूल्यों और जनकल्याण के प्रति समर्पित रहा। उनकी स्मृति में आयोजित गौसेवा और रक्तदान जैसे सेवा कार्य समाज में मानवता और परोपकार की प्रेरणा देते रहेंगे। पूरे आयोजन का वातावरण श्रद्धा, सेवा और सामाजिक एकता की भावना से ओत-प्रोत रहा।
 
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ऐ रसूल ये ख़ुदा की सच्ची आयतें हैं जो हम तुम को ठीक ठीक पढ़के सुनाते हैं और बेशक तुम ज़रुर रसूलों में से हो

 फिर तो उन लोगों ने ख़़ुदा के हुक्म से दुश्मनों को शिकस्त दी और दाऊद ने जालूत को क़त्ल किया और ख़़ुदा ने उनको सल्तनत व तदबीर तम्द्दुन अता की और इल्म व हुनर जो चाहा उन्हें गोया घोल के पिला दिया और अगर ख़ुदा बाज़ लोगों के ज़रिए से बाज़ का दफाए (शर) न करता तो तमाम रुए ज़मीन पर फ़साद फैल जाता मगर ख़़ुदा तो सारे जहाँन के लोगों पर फज़ल व रहम करता है (251)
ऐ रसूल ये ख़ुदा की सच्ची आयतें हैं जो हम तुम को ठीक ठीक पढ़के सुनाते हैं और बेशक तुम ज़रुर रसूलों में से हो (252)
यह सब रसूल (जो हमने भेजे) उनमें से बाज़ को बाज़ पर फज़ीलत दी उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जिनसे ख़ुद ख़ुदा ने बात की उनमें से बाज़ के (और तरह पर) दर्जे बुलन्द किये और मरियम के बेटे ईसा को (कैसे कैसे रौशन मौजिज़े अता किये) और रूहुलकुदस (जिबरईल) के ज़रिये से उनकी मदद की और अगर ख़ुदा चाहता तो लोग इन (पैग़़म्बरों) के बाद हुये वह अपने पास रौशन मौजिज़े आ चुकने पर आपस में न लड़ मरते मगर उनमें फूट पड़ गई बस उनमें से बाज़ तो ईमान लाये और बाज़ काफि़र हो गये और अगर ख़ुदा चाहता तो यह लोग आपस में न लड़ते मगर ख़ुदा वही करता है जो चाहता है (253)
ऐ ईमानदारों जो कुछ हमने तुमको दिया है उस दिन के आने से पहले (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करो जिसमें न तो ख़रीदो फरोख़्त होगी और न यारी (और न आशनाई) और न सिफ़ारिश (ही काम आयेगी) और कुफ़्र करने वाले ही तो जुल्म ढाते हैं (254)
ख़ुदा ही वो ज़ाते पाक है कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वह) जि़न्दा है (और) सारे जहान का संभालने वाला है उसको न ऊँघ आती है न नींद जो कुछ आसमानो में है और जो कुछ ज़मीन में है (गरज़ सब कुछ) उसी का है कौन ऐसा है जो बग़ैर उसकी इजाज़त के उसके पास किसी की सिफ़ारिश करे जो कुछ उनके सामने मौजूद है (वह) और जो कुछ उनके पीछे (हो चुका) है (खुदा सबको) जानता है और लोग उसके इल्म में से किसी चीज़ पर भी अहाता नहीं कर सकते मगर वह जिसे जितना चाहे (सिखा दे) उसकी कुर्सी सब आसमानों और ज़मीनों को घेरे हुये है और उन दोनों (आसमान व ज़मीन) की निगाहदाश्त उसपर कुछ भी मुश्किल नहीं और वह आलीशान बुजु़र्ग मरतबा है (255)
दीन में किसी तरह की जबरदस्ती नहीं क्योंकि हिदायत गुमराही से (अलग) ज़ाहिर हो चुकी तो जिस शख़्स ने झूठे खुदाओं (बुतों) से इंकार किया और खुदा ही पर ईमान लाया तो उसने वो मज़बूत रस्सी पकड़ी है जो टूट ही नहीं सकती और ख़ुदा सब कुछ सुनता और जानता है (256)
ख़ुदा उन लोगों का सरपरस्त है जो ईमान ला चुके कि उन्हें (गुमराही की) तारीकि़यों से निकाल कर (हिदायत की) रौशनी में लाता है और जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया उनके सरपरस्त शैतान हैं कि उनको (ईमान की) रौशनी से निकाल कर (कुफ़्र की) तारीकियों में डाल देते हैं यही लोग तो जहन्नुमी हैं (और) यही उसमें हमेशा रहेंगे (257)
(ऐ रसूल) क्या तुम ने उस शख़्स (के हाल) पर नज़र नहीं की जो सिर्फ़ इस बिरते पर कि ख़ुदा ने उसे सल्तनत दी थी इब्राहीम से उनके परवरदिगार के बारे में उलझ पड़ा कि जब इब्राहीम ने (उससे) कहा कि मेरा परवरदिगार तो वह है जो (लोगों को) जिलाता और मारता है तो वो भी (शेख़ी में) आकर कहने लगा मैं भी जिलाता और मारता हॅू (तुम्हारे ख़ुदा ही में कौन सा कमाल है) इब्राहीम ने कहा (अच्छा) खुदा तो आफ़ताब को पूरब से निकालता है भला तुम उसको पश्चिम से निकालो इस पर वह काफि़र हक्का बक्का हो कर रह गया (मगर ईमान न लाया) और ख़ुदा ज़ालिमों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुॅचाया करता (258)
(ऐ रसूल तुमने) मसलन उस (बन्दे के हाल पर भी नज़र की जो एक गाँव पर से होकर गुज़रा औेर वो ऐसा उजड़ा था कि अपनी छतों पर से ढह के गिर पड़ा था ये देखकर वह बन्दा (कहने लगा) अल्लाह अब इस गाँव को ऐसी वीरानी के बाद क्योंकर आबाद करेगा इस पर ख़ुदा ने उसको (मार डाला) सौ बरस तक मुर्दा रखा फिर उसको जिला उठाया (तब) पूछा तुम कितनी देर पड़े रहे अर्ज़ की एक दिन पड़ा रहा या एक दिन से भी कम फ़रमाया नहीं तुम (इसी हालत में) गाव सौ बरस पड़े रहे अब ज़रा अपने खाने पीने (की चीज़ों) को देखो कि बुसा तक नहीं और ज़रा अपने गधे (सवारी) को तो देखो कि उसकी हड्डियाँ ढेर पड़ी हैं और सब इस वास्ते किया है ताकि लोगों के लिये तुम्हें क़ुदरत का नमूना बनाये और अच्छा अब (इस गधे की) हड्डियों की तरफ़ नज़र करो कि हम क्योंकर उन को जोड़ जाड़ कर ढाँचा बनाते हैं फिर उनपर गोश्त चढ़ाते हैं बस जब ये उनपर ज़ाहिर हुआ तो बेसाख़्ता बोल उठे कि (अब) मैं ये यक़ीने कामिल जानता हॅू कि ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (259)
और (ऐ रसूल) वह वाके़या भी याद करो जब इबराहीम ने (खुदा से) दरख़्वास्त की कि ऐ मेरे परवरदिगार तू मुझे भी तो दिखा दे कि तू मुर्दों को क्योंकर जि़न्दा करता है ख़़ुदा ने फ़रमाया क्या तुम्हें (इसका) यक़ीन नहीं इबराहीम ने अर्ज की (क्यों नहीं) यक़ीन तो है मगर आँख से देखना इसलिए चाहता हॅू कि मेरे दिल को पूरा इत्मिनान हो जाए फ़रमाया (अगर ये चाहते हो) तो चार परिन्दे लो और उनको अपने पास मॅगवा लो और टुकड़े टुकड़े कर डालो फिर हर पहाड़ पर उनका एक एक टुकड़ा रख दो उसके बाद उनको बुलाओ (फिर देखो तो क्यों कर वह सब के सब तुम्हारे पास दौड़े हुए आते हैं और समझ रखो कि ख़ुदा बेशक ग़ालिब और हिकमत वाला है (260)

10 जुलाई 2026

यादों के झरोखों में...

यादों के झरोखों में....
मैंने जो झांका,
मुझे तेरी सूरत मिली,
न था कोई दूजा ...
ना है , कोई होगा ,
तू ही पहला ,
तू ही आख़िरी
 

शहर में दो परिवारों ने निभाई नेत्रदान की परंपरा

 शहर में दो परिवारों ने निभाई नेत्रदान की परंपरा

बीते दो दिनों में शाइन इंडिया फाउंडेशन के जागरूकता अभियान से प्रेरित होकर शहर में दो नेत्रदानी परिवारों में शोक की घड़ी आने पर नेतराम का पुनीत कार्य संपन्न कराया ।

गुरुवार शाम वल्लभबाड़ी निवासी, सुरेंद्र सिंह,हरमिंदर सिंह,की माताजी उत्तम जीत कौर का आकस्मिक निधन हुआ।  परिवार पहले से ही नेत्रदान के कार्यों में अग्रणी रहा है, दुख की घड़ी में वर्ष 2014 में उत्तम जीत के पोते अंगद का और पति अमरीक सिंह का वर्ष 2019 में भी नेत्रदान संस्था के सहयोग से संपन्न हुआ था । परिवार ने नेत्रदान को परंपरा बनाते हुए दिवंगत उत्तम जी का नेत्रदान भी संपन्न कराया ।

इसी क्रम में आज शुक्रवार को स्टेशन क्षेत्र निवासी आलोक और नीलेश जैन के पिता विमल कुमार जैन का आकस्मिक निधन हुआ,जिसके उपरांत, उनकी पत्नी विमला जैन की सहमति से नेत्रदान का पुनीत कार्य ईबीएसआर कोटा चैप्टर के सहयोग से संपन्न हुआ। ज्ञात हो कि अभी, कुछ माह पूर्व ही विमल जी के दोहते वैभव जैन का नेत्रदान भी संस्था के सहयोग से संपन्न हुआ था ।

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