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25 जुलाई 2026

नो बैग डे बना जीवनदान का दिन: स्कूलों में गूंजा अंगदान का संदेश

 नो बैग डे बना जीवनदान का दिन: स्कूलों में गूंजा अंगदान का संदेश

2. राज्य सरकार के ‘अंगदान संजीवनी अभियान’ के तहत संभाग के विद्यालयों में जागरूकता कार्यशालाएं जारी

कोटा। राजस्थान सरकार द्वारा जुलाई माह को अंगदान जागरूकता माह के रूप में मनाते हुए प्रदेशभर में अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में ‘नो बैग डे’ को विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और जीवनदान से जोड़ते हुए राजकीय विद्यालयों में अंगदान एवं नेत्रदान विषय पर विशेष जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

संभाग की सक्रिय सामाजिक संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन भी राज्य सरकार के अंगदान संजीवनी अभियान को सफल बनाने और अंगदान-नेत्रदान के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अभियान के तहत बीते माह संयुक्त निदेशक प्रारंभिक शिक्षा आशा मंडावत द्वारा सभी राजकीय विद्यालयों में ‘नो बैग डे’ के अवसर पर अंगदान एवं नेत्रदान विषय पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए थे।

इसी क्रम में ग्राम मूंडला, तहसील दीगोद स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य रेखा शर्मा के नेतृत्व में अंगदान-नेत्रदान जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रमुख वक्ता डॉ. संगीता गौड़ ने विद्यार्थियों को सरल और सहज भाषा में नेत्रदान एवं अंगदान की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से जुड़े सवालों के जवाब देते हुए अंगदान को लेकर समाज में फैली विभिन्न भ्रांतियों और गलत धारणाओं का भी समाधान किया।

इसके पश्चात समीपस्थ ग्राम कोटसुवां के पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य अनुराधा खंडेलवाल के नेतृत्व में कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर डॉ. कुलवंत गौड़ ने विद्यार्थियों को ब्रेन डेड अवस्था के बारे में विस्तार से समझाया और बताया कि ऐसी स्थिति में अंगदान का निर्णय कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दे सकता है।

डॉ. गौड़ ने विद्यार्थियों से कहा कि “अंगदान केवल मृत्यु के बाद किया जाने वाला दान नहीं, बल्कि यह जीवन के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी, सांस और उम्मीद छोड़ जाने का संकल्प है।” उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं जागरूक बनने और अपने परिवार एवं समाज में अंगदान का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।

शाइन इंडिया फाउंडेशन वर्ष 2016 से संभाग स्तर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में नेत्रदान एवं अंगदान जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन कर रही है। संस्था का उद्देश्य है कि बच्चों और युवाओं को अंगदान के प्रति वैज्ञानिक जानकारी देकर उन्हें समाज में जागरूकता के दूत के रूप में तैयार किया जाए।

आज ‘नो बैग डे’ पर बच्चे किताबों का बोझ लेकर नहीं, बल्कि जीवन बचाने का संदेश लेकर अपने घर लौटे।

विश्व ओआरएस दिवस पर जागरूकता अभियान, आधारशिला पर्यटक स्थल पर लोगों को पिलाया गया ओआरएस घोल

 

विश्व ओआरएस दिवस पर जागरूकता अभियान, आधारशिला पर्यटक स्थल पर लोगों को पिलाया गया ओआरएस घोल
कोटा। विश्व ओआरएस दिवस के अवसर पर मदनी वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आधारशिला पर्यटक स्थल पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों को ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का घोल पिलाकर इसके महत्व के बारे में जागरूक किया गया।
मदनी वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक सदस्य शेर खान ने बताया कि डायरिया, उल्टी, गर्मी और अन्य कारणों से होने वाले निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) से बचाव के लिए ओआरएस सबसे सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपाय है। उन्होंने कहा कि समय पर ओआरएस का सेवन करने से शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी को पूरा किया जा सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव है।
इस अवसर पर डॉ. अविनाश बंसल ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए ओआरएस किसी जीवनरक्षक उपचार से कम नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि दस्त या उल्टी होने पर तुरंत ओआरएस का घोल देना शुरू करें और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। उन्होंने ओआरएस घोल बनाने और उसके सही उपयोग की विधि की भी जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को ओआरएस घोल पिलाया गया तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी देकर जागरूक किया गया। लोगों ने इस जनहित अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मदनी वेलफेयर सोसाइटी ने भविष्य में भी जनस्वास्थ्य से जुड़े जागरूकता अभियान निरंतर चलाने का संकल्प व्यक्त किया।

बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइखि़्तयार किया और कुफ्रकी हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी {छुटकारा पाने} में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कु़बूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा

 बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइखि़्तयार किया और कुफ्रकी हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी {छुटकारा पाने} में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कु़बूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा (91)
(लोगों) जब तक तुम अपनी पसन्दीदा चीज़ों में से कुछ राहे ख़ुदा में ख़र्च न करोगे हरगिज़ नेकी के दरजे पर फ़ायज़ नहीं हो सकते और तुम कोई (92)
सी चीज़ भी ख़र्च करो ख़ुदा तो उसको ज़रूर जानता है तौरैत के नाजि़ल होने के क़ब्ल याकू़ब ने जो जो चीज़े अपने ऊपर हराम कर ली थीं उनके सिवा बनी इसराइल के लिए सब खाने हलाल थे (ऐ रसूल उन यहूद से) कह दो कि अगर तुम (अपने दावे में सच्चे हो तो तौरेत ले आओ (93)
और उसको (हमारे सामने) पढ़ो फिर उसके बाद भी जो कोई ख़ुदा पर झूठ तूफ़ान जोड़े तो (समझ लो) कि यही लोग ज़ालिम (हठधर्म) हैं (94)
(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा ने सच फ़रमाया तो अब तुम मिल्लते इबराहीम (इस्लाम) की पैरवी करो जो बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से न थे (95)
लोगों (की इबादत) के वास्ते जो घर सबसे पहले बनाया गया वह तो यक़ीनन यही (काबा) है जो मक्के में है बड़ी (खै़र व बरकत) वाला और सारे जहान के लोगों का रहनुमा (96)
इसमें (हुरमत की) बहुत सी वाज़े और रौशन निशानिया हैं (उनमें से) मुक़ाम इबराहीम है (जहाँ आपके क़दमों का पत्थर पर निशान है) और जो इस घर में दाखि़ल हुआ अमन में आ गया और लोगों पर वाजिब है कि महज़ ख़ुदा के लिए ख़ानाए काबा का हज करें जिन्हे वहां तक पहुँचने की इस्तेताअत है और जिसने बावजूद कु़दरत हज से इन्कार किया तो (याद रखे) कि ख़ुदा सारे जहान से बेपरवाह है (97)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब खुदा की आयतो से क्यो मुन्किर हुए जाते हो हालांकि जो काम काज तुम करते हो खु़दा को उसकी (पूरी) पूरी इत्तेला है (98)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब दीदए दानिस्ता (जान बुझ कर) खुदा की (सीधी) राह में (नाहक़ की) कज़ी ढॅूढो (ढूढ) के ईमान लाने वालों को उससे क्यों रोकते हो ओर जो कुछ तुम करते हो खु़दा उससे बेख़बर नहीं है (99)
ऐ ईमान वालों अगर तुमने एहले किताब के किसी फि़रके़ का भी कहना माना तो (याद रखो कि) वह तुमको ईमान लाने के बाद (भी) फिर दुबारा काफि़र बना छोडेंगे (100)

24 जुलाई 2026

*खाद बीज व नहरी पानी की मांग व केडीए की तानाशाही के विरोध मे बूंदी में हजारों किसान उतरे सड़कों पर*

 

*खाद बीज व नहरी पानी की मांग व केडीए की तानाशाही के विरोध मे बूंदी में हजारों किसान उतरे सड़कों पर*
*फसले नष्ट होती है तो किसान के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा हो जाता है : गुंजल*
के डी अब्बासी
कोटा/बूंदी : छात्रों पर हुए बर्बरता पूर्ण लाठीचार्ज, लोकसभा में नेता प्रतीक्षा राहुल गांधी जी के साथ की गई बदसलूकी, केडीए की ज्यादतियों व बूंदी जिले के किसानों की खाद, बीज, बिजली व नहरी पानी छोड़ने की मांग को लेकर पूर्व विधायक व कोटा लोकसभा प्रत्याशी प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व मे आयोजित जनसभा में हजारों की संख्या में किसान व युवाओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बूंदी धानमंडी परिसर में हुई जनसभा के बाद विशाल जनसमूह हाथों में सरकार विरोधी नारों की तख्तियां लिए गगनचुंबी नारों के साथ रैली के रूप में जिला कलेक्टर कार्यालय बूंदी की ओर रवाना हुआ जहां कलेक्ट्रेट पहुंचकर उन्होंने विभिन्न मांगों को लेकर जिला कलेक्टर बूंदी को ज्ञापन सोपा। जनसभा में बूंदी विधायक हरिओम शर्मा, खानपुर विधायक सुरेश गुर्जर, बूंदी जिला अध्यक्ष महावीर मीणा सहित बड़ी संख्या में नेतागण उपस्थित रहे ।
जनसमूह को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि यह फसल नहीं है किसान का जीवन है, फसल नष्ट होती है तो किसान के सपनों का ताना-बाना नष्ट हो जाता है, फसल नष्ट होती है तो किसान के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा हो जाता है, किसान पिछले दो माह से नहरी पानी छोड़ने की मांग कर रहा है। खाद बीज के लिए लाइनों में लग रहा है लाठियां खा रहा है। तब हमने कहा हम बूंदी आ रहे हैं सरकार की ईंट से ईट बजा देंगे। तो यहां के सांसद किसानों की झूठी वाह वाही लूटने के लिए उनको मोहरा बनाते रहे यहां के सांसद ने किसानों से कहा मैंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से बात कर ली गांधी सागर से पानी छोड़ रहे हैं और जो पानी छोड़ा गया वह नेहरो के पेदो से भी ऊपर तक नहीं आया और किसान का खेत फिर सूखा का सूखा रह गया। उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा ही चुनी हुई सरकार के सामने भारत का भाग्य विधाता, इस मुल्क का अन्नदाता जो पसीने की बूंदे बहाता है, धरती का सीना फाड़कर अन्न पैदा करता है, देश को पालता है, समाज को पालता है वह किसान रोता रहे और सरकार मद-मस्त होकर घूमती रहे इससे बड़ा मजाक इस मुल्क के भाग्य विधाता के साथ हो नहीं सकता।
*केडीए पर बोले गुंजल*
प्रहलाद गुंजल ने कहा कि केडीए के नाम पर बूंदी के किसानों व ग्रामीणों को उजाड़ा जा रहा है, उनकी जमीनों को अतिक्रमण बताकर उनसे छिना जा रहा है और उन्हीं जमीनों को कोटा सहित आसपास के धन्ना सेठ अपनी अय्याशियों का अड्डा बनाने व मौज मस्ती के लिए फार्म हाउस बनाने के लिए खरीद रहे हैं उन्होंने चेतावनी दी की यदि केडीए ने किसानों व ग्रामीणों के साथ ज्यादती की तो केडीए सहित सरकार की नींद हराम कर देंगे।
*खाद के कट्टे के साथ अटैचमेंट पर बोले गुंजल*
प्रहलाद गुंजल ने कहा कि 1300 रुपए का खाद का कट्टा किसानों को नहीं मिल रहा यदि वह खाद के कट्टे के साथ अटैचमेंट खरीद कर 2400 रुपए देता है तो जिस किसान को एक कट्टा नहीं मिल रहा अटैचमेंट के साथ वह जितने कट्टे चाहे ले सकता है, क्या यह किसानों के साथ खुली लूट नहीं है। उन्होंने कहा कि खाद के काम में यह मोनोपोली यहां के धनपतियों के कारण चल रही है। गुंजल ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत का किसान खेत में जितना पसीना बहाता है उसे उसकी कीमत नहीं मिलती। और यह धनपति लोग कालाबाजारी कर रहे हैं।
*छात्रों के आंदोलन व राहुल गांधी बदसलूकी पर बोले गुंजल*
गुंजल ने कहा दिल्ली की धरती पर पिछले एक महीने से नन्ही नन्ही बच्चीया, नन्हे नन्हे बच्चे शिक्षा व्यवस्था में सुधार व पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने के लिए प्रदर्शन करें तो सरकार देश के नौजवानों पर बर्बरता पूर्वक लाठियां चलाये, हमारी बेटियों पर अत्याचार किया जाए, जिस तरह से अमित शाह की पुलिस ने बच्चियों को लाठियां से ठोसे मारे, उनकी छाती पर पैर रखकर उन्हें मारा तब सारा देश शर्मसार हो गया। और जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी छात्रों की आवाज बनकर आगे आए और छात्रों पर हुई बर्बरता पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगने उनके निवास पहुंचे तब उनके साथ भी बदसलूकी की जाए यह लोकतंत्र की हत्या नहीं तो क्या है।
बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा ने कहा कि प्रहलाद गुंजल जी के आव्हान पर आज यह जन सैलाब बताता है कि लोकतंत्र बचाओ अभियान की शुरुआत आज बूंदी से होने जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ महीनो में नगरी निकाय व पंचायत चुनाव होने वाले हैं हमें एकजुट होकर इन चुनाव में कांग्रेस को विजय दिलानी है तभी हम राजस्थान सरकार को उखाड़ फेंकने में सफल होंगे।
खानपुर विधायक सुरेश गुर्जर ने कहा कि यह सरकार किसान विरोधी है, यह सरकार गाँव विरोधी है, इस सरकार मे बैठे लोग लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं ऐसे मे देश राहुल गांधी जी की तरफ देख रहा है।
बूंदी जिला अध्यक्ष महावीर मीणा ने कहा कि है तानाशाही सरकार लोकतंत्र की हत्या करना चाहती है। केडीए के नाम पर बूंदी के किसानों को, ग्रामीणों को उजाड़ा जा रहा है बूंदी का किसान, ग्रामीण व आमजन सरकार की नीतियों से त्रस्त है आज यह सैलाब उसका प्रमाण है।
जनसभा को बूंदी सहप्रभारी वीरेंद्र सिंह झाला, प्रदेश कांग्रेस कमेटी सचिव गुड्डू कादरी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य सत्येश शर्मा, चर्मेश शर्मा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी एससी प्रकोष्ठ महामंत्री डीके मेघवाल, उपाध्यक्ष मोडूलाल वर्मा, महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव संतोष भाकल, पूर्व प्रधान तालेड़ा मोहन गुर्जर, जय किशन मीणा, पूर्व प्रधान बूंदी मधु वर्मा, ओबीसी प्रकोष्ठ बूंदी अध्यक्ष बृजमोहन यादव, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन अध्यक्ष जगदीश पारेता, पूर्व ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष बाबूलाल वर्मा, चेतराम मीणा जगरूप सिंह रंधावा ने भी संबोधित किया।


और तुम्हारे साथ मैं भी एक गवाह हॅू फिर उसके बाद जो शख़्स (अपने क़ौल से) मुँह फेरे तो वही लोग बदचलन हैं

 और ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब ख़ुदा ने पैग़म्बरों से इक़रार लिया कि हम तुमको जो कुछ किताब और हिकमत (वगै़रह) दे उसके बाद तुम्हारे पास कोई रसूल आए और जो किताब तुम्हारे पास उसकी तसदीक़ करे तो (देखो) तुम ज़रूर उस पर ईमान लाना, और ज़रूर उसकी मदद करना (और) ख़ुदा ने फ़रमाया क्या तुमने इक़रार कर लिया तुमने मेरे (अहद का) बोझ उठा लिया सबने अर्ज़ की हमने इक़रार किया इरशाद हुआ (अच्छा) तो आज के क़ौल व (क़रार के) आपस में एक दूसरे के गवाह रहना (81)
और तुम्हारे साथ मैं भी एक गवाह हॅू फिर उसके बाद जो शख़्स (अपने क़ौल से) मुँह फेरे तो वही लोग बदचलन हैं (82)
तो क्या ये लोग ख़ुदा के दीन के सिवा (कोई और दीन) ढूढते हैं हालांकि जो (फ़रिश्ते) आसमानों में हैं औेर जो (लोग) ज़मीन में हैं सबने ख़ुशी ख़ुशी या ज़बरदस्ती उसके सामने अपनी गर्दन डाल दी है और (आखि़र सब) उसकी तरफ़ लौट कर जाएंगे (83)
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि हम तो ख़ुदा पर ईमान लाए और जो किताब हम पर नाजि़ल हुयी और जो (सहीफ़े) इबराहीम और इस्माईल और इसहाक़ और याकू़ब और औलादे याकू़ब पर नाजि़ल हुये और मूसा और ईसा और दूसरे पैग़म्बरों को जो (जो किताब) उनके परवरदिगार की तरफ़ से इनायत हुयी (सब पर ईमान लाए) हम तो उनमें से किसी एक में भी फ़क्र नहीं करते(84)
और हम तो उसी (यकता ख़ुदा) के फ़रमाबरदार हैं और जो शख़्स इस्लाम के सिवा किसी और दीन की ख़्वाहिश करे तो उसका वह दीन हरगिज़ कुबूल ही न किया जाएगा और वह आखि़रत में सख़्त घाटे में रहेगा (85)
भला ख़ुदा ऐसे लोगों की क्योंकर हिदायत करेगा जो इमाने लाने के बाद फिर काफि़र हो गए हालांकि वह इक़रार कर चुके थे कि पैग़म्बर (आखि़रूज़ज़मा) बरहक़ हैं और उनके पास वाज़ेह व रौशन मौजिज़े भी आ चुके थे और ख़ुदा ऐसी हठधर्मी करने वाले लोगों की हिदायत नहीं करता (86)
ऐसे लोगों की सज़ा यह है कि उनपर ख़ुदा और फ़रिश्तों और (दुनिया जहान के) सब लोगों की फिटकार हैं (87)
और वह हमेशा उसी फिटकार में रहेंगे न तो उनके अज़ाब ही में तख़्फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी और न उनको मोहलत दी जाएगी (88)
मगर (हां) जिन लोगों ने इसके बाद तौबा कर ली और अपनी (ख़राबी की) इस्लाह कर ली तो अलबत्ता ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (89)
जो अपने ईमान के बाद काफि़र हो बैठे फि़र (रोज़ बरोज़ अपना) कुफ्रबढ़ाते चले गये तो उनकी तौबा हरगिज़ न कु़बूल की जाएगी और यही लोग (पल्ले दरजे के) गुमराह हैं (90)

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