पत्नी,बेटे की सहमति पर संपन्न हुआ नेत्रदान
रविवार को, बृजबाला कॉलोनी देवी अब रोड रायपुर निवासी श्रीमती राकेश सक्सेना के पति भगवान स्वरूप सक्सेना का आकस्मिक निधन हुआ । अचानक हुई इस घटना से एक परिवार में काफी शोक आ गया ।
स्वयं भगवान भी, हमेशा से दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर रहे । निर्बल असाहयों की मदद करना उनकी दैनिक प्रवृत्ति में था ।
बेटा मोहित काफी समय से शाइन इंडिया के नेत्रदान अभियान से परिचित था, वह जानता था कि,पिता के शोक को, नेत्रदान के पुनीत कार्य से ही कम किया जा सकता था । इसलिए उन्होंने तुरंत शाइन इंडिया की ज्योति मित्र राकेश विजय को नेत्रदान के लिए संपर्क किया,इसके उपरांत परिवार की सहमति से निवास स्थान पर ही नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
19 अक्टूबर 2026
पत्नी,बेटे की सहमति पर संपन्न हुआ नेत्रदान
और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज़्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिशते) लिखते जाते हैं
और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज़्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिशते) लिखते जाते हैं (21)
वह वही ख़़ुदा है जो तुम्हें खुश्की और दरिया में सैर कराता फिरता है यहाँ तक कि जब (कभी) तुम कश्तियों पर सवार होते हो और वह उन लोगों को बाद मुवाफिक़ (हवा के धारे) की मदद से लेकर चली और लोग उस (की रफ्तार) से ख़ुश हुए (यकायक) कश्ती पर हवा का एक झोंका आ पड़ा और (आना था कि) हर तरफ से उस पर लहरें (बढ़ी चली) आ रही हैं और उन लोगों ने समझ लिया कि अब घिर गए (और जान न बचेगी) तब अपने अक़ीदे को उसके वास्ते निरा खरा करके खुदा से दुआएँ मागँने लगते हैं कि (ख़ुदाया) अगर तूने इस (मुसीबत) से हमें नजात दी तो हम ज़रुर बड़े शुक्र गुज़ार होंगें (22)
फिर जब ख़ुदा ने उन्हें नजात दी तो वह लोग ज़मीन पर (कदम रखते ही) फौरन नाहक़ सरकशी करने लगते हैं (ऐ लोगों तुम्हारी सरकशी का वबाल) तो तुम्हारी ही जान पर है - (ये भी) दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी का फायदा है फिर आखि़र हमारी (ही) तरफ तुमको लौटकर आना है तो (उस वक़्त) हम तुमको जो कुछ (दुनिया में) करते थे बता देगे (23)
दुनियावी जि़दगी की मसल तो बस पानी की सी है कि हमने उसको आसमान से बरसाया फिर ज़मीन के साग पात जिसको लोग और चैपाए खा जाते हैं (उसके साथ मिल जुलकर निकले यहाँ तक कि जब ज़मीन ने (फसल की चीज़ों से) अपना बनाओ सिंगार कर लिया और (हर तरह) आरास्ता हो गई और खेत वालों ने समझ लिया कि अब वह उस पर यक़ीनन क़ाबू पा गए (जब चाहेंगे काट लेगे) यकायक हमारा हुक्म व अज़ाब रात या दिन को आ पहुँचा तो हमने उस खेत को ऐसा साफ कटा हुआ बना दिया कि गोया कुल उसमें कुछ था ही नहीं जो लोग ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके वास्ते हम आयतों को यूँ तफसीलदार बयान करते है (24)
और ख़ुदा तो आराम के घर (बेहाशत की तरफ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत करता है (25)
जिन लोगों ने दुनिया में भलाई की उनके लिए (आखि़रत में भी) भलाई है (बल्कि) और कुछ बढ़कर और न (गुनेहगारों की तरह) उनके चेहरों पर कालिक लगी हुयी होगी और न (उन्हें जि़ल्लत होगी यही लोग जन्नती हैं कि उसमें हमेशा रहा सहा करेंगे (26)
और जिन लोगों ने बुरे काम किए हैं तो गुनाह की सज़ा उसके बराबर है और उन पर रुसवाई छाई होगी ख़ुदा (के अज़ाब) से उनका कोई बचाने वाला न होगा (उनके मुह ऐसे काले होंगे) गोया उनके चेहरे यबों यज़ूर (अंधेरी रात) के टुकड़े से ढक दिए गए हैं यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये उसमें हमेषा रहेंगे (27)
(ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को इकट्ठा करेगें-फिर मुशरेकीन से कहेगें कि तुम और तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीक ज़रा अपनी जगह ठहरो फिर हम वाहम उनमें फूट डाल देगें और उनके शररीक उनसे कहेंगे कि तुम तो हमारी परसतिश करते न थे (28)
तो (अब) हमारे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है हम को तुम्हारी परसतिश की ख़बर ही न थी (29)
(ग़रज़) वहाँ हर शख़्स जो कुछ जिसने पहले (दुनिया में) किया है जाँच लेगा और वह सब के सब अपने सच्चे मालिक ख़ुदा की बारगाह में लौटकर लाए जाएँगें और (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाजि़या (झूठी बातें) करते थे सब उनके पास से चल चंपत हो जाएगें (30)
18 अक्टूबर 2026
और तुमसे पहली उम्मत वालों को जब उन्होंने शरारत की तो हम ने उन्हें ज़रुर हलाक कर डाला हालाकि उनके (वक़्त के) रसूल वाजेए व रौशन मोजि़ज़ात लेकर आ चुके थे और वह लोग ईमान (न लाना था) न लाए हम गुनेहगार लोगों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं
और जिस तरह लोग अपनी भलाई के लिए जल्दी कर बैठे हैं उसी तरह अगर ख़ुदा उनकी शरारतों की सज़ा में बुराई में जल्दी कर बैठता है तो उनकी मौत उनके पास कब की आ चुकी होती मगर हम तो उन लोगों को जिन्हें (मरने के बाद) हमारी हुज़ूरी का खटका नहीं छोड़ देते हैं कि वह अपनी सरकशी में आप सरगि़रदा रहें (11)
और इन्सान को जब कोई नुकसान छू भी गया तो अपने पहलू पर (लेटा हो) या बैठा हो या ख़ड़ा (गरज़ हर हालत में) हम को पुकारता है फिर जब हम उससे उसकी तकलीफ को दूर कर देते है तो ऐसा खिसक जाता है जैसे उसने तकलीफ के (दफा करने के) लिए जो उसको पहुँचती थी हमको पुकारा ही न था जो लोग ज़्यादती करते हैं उनकी कारस्तानियाँ यूँ ही उन्हें अच्छी कर दिखाई गई हैं (12)
और तुमसे पहली उम्मत वालों को जब उन्होंने शरारत की तो हम ने उन्हें ज़रुर हलाक कर डाला हालाकि उनके (वक़्त के) रसूल वाजेए व रौशन मोजि़ज़ात लेकर आ चुके थे और वह लोग ईमान (न लाना था) न लाए हम गुनेहगार लोगों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं (13)
फिर हमने उनके बाद तुमको ज़मीन में (उनका) जानषीन बनाया ताकि हम (भी) देखें कि तुम किस तरह काम करते हो (14)
और जब उन लोगों के सामने हमारी रौशन आयते पढ़ीं जाती हैं तो जिन लोगों को (मरने के बाद) हमारी हुजूरी का खटका नहीं है वह कहते है कि हमारे सामने इसके अलावा कोई दूसरा (कुरान लाओ या उसका रद्दो बदल कर डालो (ऐ रसूल तुम कह दो कि मुझे ये एख़्तेयार नहीं कि मै उसे अपने जी से बदल डालूँ मै तो बस उसी का पाबन्द हूँ जो मेरी तरफ वही की गई है मै तो अगर अपने परवरदिगार की नाफरमानी करु तो बड़े (कठिन) दिन के अज़ाब से डरता हूँ (15)
(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा चाहता तो मै न तुम्हारे सामने इसको पढ़ता और न वह तुम्हें इससे आगाह करता क्योंकि मै तो (आखि़र) तुमने इससे पहले मुद्दतों रह चुका हूँ (और कभी ‘वही’ का नाम भी न लिया) (16)
तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते तो जो शख़्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाधे या उसकी आयतो को झुठलाए उससे बढ़ कर और ज़ालिम कौन होगा इसमें शक नहीं कि (ऐसे) गुनाहगार कामयाब नहीं हुआ करते (17)
या लोग ख़ुदा को छोड़ कर ऐसी चीज़ की परसतिश करते है जो न उनको नुकसान ही पहुँचा सकती है न नफा और कहते हैं कि ख़ुदा के यहाँ यही लोग हमारे सिफारिषी होगे (ऐ रसूल) तुम (इनसे) कहो तो क्या तुम ख़़ुदा को ऐसी चीज़ की ख़बर देते हो जिसको वह न तो आसमानों में (कहीं) पाता है और न ज़मीन में ये लोग जिस चीज़ को उसका शरीक बनाते है (18)
उससे वह पाक साफ और बरतर है और सब लोग तो (पहले) एक ही उम्मत थे और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से एक बात (क़यामत का वायदा) पहले न हो चुकी होती जिसमें ये लोग एख़्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला उनके दरम्यिान (कब न कब) कर दिया गया होता (19)
और कहते हैं कि उस पैग़म्बर पर कोई मोजिज़ा (हमारी ख़्वाहिष के मुवाफिक़) क्यों नहीं नाजि़ल किया गया तो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ग़ैब (दानी) तो सिर्फ ख़ुदा के वास्ते ख़ास है तो तुम भी इन्तज़ार करो और तुम्हारे साथ मै (भी) यक़ीनन इन्तज़ार करने वालों में हूँ (20)
17 अक्टूबर 2026
क्या लोगों को इस बात से बड़ा ताज्जुब हुआ कि हमने उन्हीं लोगों में से एक आदमी के पास वही भेजी कि (बे ईमान) लोगों को डराओ और ईमानदारो को इसकी ख़ुश ख़बरी सुना दो कि उनके लिए उनके परवरदिगार की बारगाह में बुलन्द दर्जे है (मगर) कुफ्फार (उन आयतों को सुनकर) कहने लगे कि ये (शख़्स तो यक़ीनन सरीही जादूगर) है
सूरए यूनुस मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी एक सौ नौ (109) आयतें है
मै उस ख़़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है
अलिफ़ लाम रा (1)
ये आयतें उस किताब की हैं जो अज़सरतापा (सर से पैर तक) हिकमत से मलूउ (भरी) है (2)
क्या लोगों को इस बात से बड़ा ताज्जुब हुआ कि हमने उन्हीं लोगों में से एक आदमी के पास वही भेजी कि (बे ईमान) लोगों को डराओ और ईमानदारो को इसकी ख़ुश ख़बरी सुना दो कि उनके लिए उनके परवरदिगार की बारगाह में बुलन्द दर्जे है (मगर) कुफ्फार (उन आयतों को सुनकर) कहने लगे कि ये (शख़्स तो यक़ीनन सरीही जादूगर) है (3)
इसमें तो शक ही नहीं कि तुमरा परवरदिगार वही ख़ुदा है जिसने सारे आसमान व ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया फिर उसने अर्श को बुलन्द किया वही हर काम का इन्तज़ाम करता है (उसके सामने) कोई (किसी का) सिफारिषी नहीं (हो सकता) मगर उसकी इजाज़त के बाद वही ख़ुदा तो तुम्हारा परवरदिगार है तो उसी की इबादत करो तो क्या तुम अब भी ग़ौर नही करते (4)
तुम सबको (आखि़र) उसी की तरफ लौटना है ख़ुदा का वायदा सच्चा है वही यक़ीनन मख़लूक को पहली मरतबा पैदा करता है फिर (मरने के बाद) वही दुबारा जिन्दा करेगा ताकि जिन लोगों ने इमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको इन्साफ के साथ जज़ाए (ख़ैर) अता फरमाएगा और जिन लोगों ने कुफ्र एख़्तियार किया उन के लिए उनके कुफ्र की सज़ा में पीने को खौलता हुआ पानी और दर्दनाक अज़ाब होगा (5)
वही वह (ख़़ुदाए क़ादिर) है जिसने आफ़ताब को चमकदार और महताब को रौषन बनाया और उसकी मंजि़लें मुक़र्रर की ताकि तुम लोग बरसों की गिनती और हिसाब मालूम करो ख़़ुदा ने उसे हिकमत व मसलहत से बनाया है वह (अपनी) आयतों का वाकि़फ़कार लोगों के लिए तफ़सीलदार बयान करता है (6)
इसमें ज़रा भी शक नहीं कि रात दिन के उलट फेर में और जो कुछ ख़़ुदा ने आसमानों और ज़मीन में बनाया है (उसमें) परहेज़गारों के वास्ते बहुतेरी निषानियाँ हैं (7)
इसमें भी शक नहीं कि जिन लोगों को (क़यामत में) हमारी (बारगाह की) हुज़ूरी का ठिकाना नहीं और दुनिया की (चन्द रोज़) जि़न्दगी से निहाल हो गए और उसी पर चैन से बैठे हैं और जो लोग हमारी आयतों से ग़ाफिल हैं (8)
यही वह लोग हैं जिनका ठिकाना उनकी करतूत की बदौलत जहन्नुम है (9)
बेषक जिन लोगों ने इमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन्हें उनका परवरदिगार उनके इमान के सबब से मंजि़ल मक़सूद तक पहुँचा देगा कि आराम व आसाइश के बाग़ों में (रहेगें) और उन के नीचे नहरें जारी होगी उन बाग़ों में उन लोगों का बस ये कौल होगा ऐ ख़ुदा तू पाक व पाकीज़ा है और उनमें उनकी बाहमी (आपसी) खै़रसलाही (मुलाक़ात) सलाम से होगी और उनका आखि़री क़ौल ये होगा कि सब तारीफ ख़ुदा ही को सज़ावार है जो सारे जहाँन का पालने वाला है (10)
16 अक्टूबर 2026
कोटा मंडल में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स एवं युवाओं के साथ 'रेल जन संवाद' आयोजित
कोटा मंडल में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स एवं युवाओं के साथ 'रेल जन संवाद' आयोजित*
*विशेष अभियान 6.0 के तहत यात्री जागरूकता, स्वच्छता एवं रेलवे सेवाओं में सुधार के लिए डिजिटल क्रिएटर्स ने साझा किए सुझाव*
के डी अब्बासी
कोटा। पश्चिम मध्य रेल के कोटा मंडल में विशेष अभियान 6.0 के अंतर्गत शुक्रवार, 16 अक्टूबर को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स एवं जेन-जी (Gen-Z) युवाओं के साथ 'रेल जन संवाद' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने की।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने प्रतिभागियों को भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली, कोटा मंडल की संरचना, रेल परिचालन, यात्री सुविधाओं एवं रेलवे नियमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से यात्रियों तक सही जानकारी पहुँचाने और जनजागरूकता बढ़ाने में डिजिटल क्रिएटर्स महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
*संवाद में युवाओं ने रखे सुझाव, अधिकारियों से सीधे पूछे सवाल*
कार्यक्रम में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने खुलकर अपने विचार रखे। रेलवे नियमों के प्रति जागरूकता, स्टेशनों एवं ट्रेनों में स्वच्छता, यात्री सुविधाओं में सुधार तथा रेलवे के अच्छे कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुँचाने के लिए रील्स, शॉर्ट वीडियो और डिजिटल अभियानों जैसे कई रचनात्मक सुझाव सामने आए।
श्री जैन ने प्रतिभागियों के सवालों का मौके पर जवाब दिया तथा उनके सुझावों को गंभीरता से लेते हुए व्यावहारिक क्रियान्वयन की संभावनाओं पर कार्य करने की बात कही।
*रेलवे और डिजिटल क्रिएटर्स के बीच सहयोग पर सहमति*
संवाद के दौरान रेलवे प्रशासन और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने मिलकर यात्री जागरूकता बढ़ाने, स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने और रेलवे की सकारात्मक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर पहुँचाने के लिए आपसी सहयोग से कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।
कार्यक्रम में सहायक मंडल यांत्रिक इंजीनियर (ईएनएचएम) श्री प्रवीण कुमार भी उपस्थित रहे। यह आयोजन रेलवे प्रशासन और युवा डिजिटल समुदाय के बीच सीधे संवाद एवं जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल रहा।
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