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04 अक्टूबर 2026

पंकज मेहता की अगुवाई में गूंजा ‘एक नया सवेरा’, युवाओं को संस्कार और परिवार से जुड़ने का संदेश

 

पंकज मेहता की अगुवाई में एक नया सवेरा
पंकज मेहता की अगुवाई में गूंजा ‘एक नया सवेरा’, युवाओं को संस्कार और परिवार से जुड़ने का संदेश
सारस्वत बोले—कैरियरिस्ट और टेररिस्ट दोनों प्रवृत्तियों से बचें युवा, राजेन्द्र जैन ने कहा—मत अलग हों, मन नहीं
के डी अब्बासी
कोटा। सकल जैन समाज को एकजुटता, सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक सोच से जोड़ने के उद्देश्य से श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्री संघ रामपुरा के अध्यक्ष पंकज मेहता के नेतृत्व में ‘एक नया सवेरा’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन सत्यार्थ एलेन ऑडिटोरियम, जवाहर नगर में किया गया। श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ एवं श्री जैन रत्न युवक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में देश, धर्म, समाज और परिवार के प्रति दायित्वों का बोध कराया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज युवा वर्ग को कैरियरिस्ट और टेररिस्ट दोनों प्रवृत्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कैरियर की दौड़ में परिवार और वृद्ध माता-पिता पीछे नहीं छूटने चाहिए तथा आतंकवाद जैसी विनाशकारी प्रवृत्तियों से युवाओं को पूरी तरह दूर रहना चाहिए। सोशल मीडिया और रील्स की अंधी दौड़ से बचकर शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी पर ध्यान देने का आह्वान किया।
पंकज मेहता ने कहा कि ‘एक नया सवेरा’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की सोच है। इसका उद्देश्य समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर संवाद, आपसी प्रेम, सकारात्मक सोच और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करना है।
राजेन्द्र जैन बोले—परिवार में मत अलग हो सकते हैं, मन नहीं
अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर राजेन्द्र जैन (राजू भाई) ने अपनी प्रभावशाली और संवादपूर्ण शैली में परिवार एवं रिश्तों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिवार केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने और सुनने का नाम है। मत अलग हो सकते हैं, लेकिन मन अलग नहीं होने चाहिए।
मुख्य वक्ता सुनीता जैन ने संयुक्त परिवार, बहू-बेटियों के रिश्तों, प्रेम, धैर्य और सकारात्मक सोच पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि बदलते समय में संयुक्त परिवार की आत्मीयता और संस्कारों को नए रूप में जीवित रखने की जरूरत है।
वक्ताओं ने कहा कि जैन दर्शन केवल मोक्ष का मार्ग नहीं दिखाता, बल्कि जीवन जीने की दृष्टि भी प्रदान करता है। अनेकांत, क्षमा, मैत्री, संयम और अपरिग्रह के सिद्धांत बेहतर पारिवारिक और सामाजिक जीवन की आधारशिला बन सकते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ जय जिनेन्द्र एवं गुरु भगवंतों के चरणों में वंदन के साथ हुआ। स्वागत भाषण पंकज मेहता ने दिया, संचालन जोली भंडारी ने किया तथा आभार हनुमान प्रसाद जैन ने जताया। कार्यक्रम में सवाई माधोपुर, हाउसिंग बोर्ड, कुशतला, बजरिया, देई, अलीगढ़, रामपुरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा-युवतियों एवं समाजबंधुओं ने भाग लिया।

फैज़ल बैग ‘कोकी’ की युवा कांग्रेस में धमाकेदार एंट्री, 5573 वोटों के साथ कोटा उत्तर विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित

 

फैज़ल बैग ‘कोकी’ की युवा कांग्रेस में धमाकेदार एंट्री, 5573 वोटों के साथ कोटा उत्तर विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित
युवा शक्ति ने जताया भरोसा, कोकी की जीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश; नेतृत्व में संगठन को नई धार देने की उम्मीद
के डी अब्बासी
कोटा। युवा कांग्रेस के चुनाव परिणाम में कोटा उत्तर विधानसभा क्षेत्र से फैज़ल बैग (कोकी) ने शानदार जीत दर्ज कर अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया। फैज़ल बैग को 5573 वोट मिले। उनकी जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है।
फैज़ल बैग की जीत को कोटा उत्तर में कांग्रेस की युवा राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। समर्थकों ने कहा कि युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कोकी के नेतृत्व में संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और युवाओं को कांग्रेस से जोड़ने के साथ जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा।
चुनाव परिणाम में कौशल किशोर शर्मा को 1447 वोट मिले और वे उपाध्यक्ष (ओपन) पद पर निर्वाचित हुए। परिणाम सामने आने के बाद समर्थकों ने फैज़ल बैग को फूलमालाओं से स्वागत कर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कांग्रेस के युवा नेता विष्णु मेवाड़ा ने फैजल की जीत पर बधाई देते हुए कहा कि इसे कांग्रेस और मजबूत होगी।
कार्यकर्ताओं ने विश्वास जताया कि फैज़ल बैग ‘कोकी’ के नेतृत्व में युवा कांग्रेस संगठनात्मक रूप से मजबूत होगी और युवा शक्ति को एकजुट कर कांग्रेस के विचारों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विकास, युवा शक्ति और संगठन की मजबूती को लेकर फैज़ल बैग की जीत को कांग्रेस के लिए नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।

अचानक गौशाला पहुंचे मेयर-डिप्टी मेयर, व्यवस्थाओं की खुली पोल—विस्तार में तेजी के निर्देश

 

अचानक गौशाला पहुंचे मेयर-डिप्टी मेयर, व्यवस्थाओं की खुली पोल—विस्तार में तेजी के निर्देश
क्षमता से ज्यादा गोवंश, जगह की कमी पर निगम गंभीर; गर्भवती और बीमार गायों की अलग व्यवस्था मिली
के डी अब्बासी
कोटा। नगर निगम की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए महापौर अनुसुईया गोस्वामी और उपमहापौर विवेक राजवंशी रविवार सुबह बिना सूचना बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला पहुंच गए। अचानक हुए निरीक्षण से गौशाला प्रशासन में हलचल मच गई। दोनों जनप्रतिनिधियों ने करीब एक घंटे तक गौशाला में रहकर गोवंश के रखरखाव, चारे की गुणवत्ता और उपचार व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया।
महापौर अनुसुईया गोस्वामी ने कहा कि नगर निगम की गौशाला को लेकर अक्सर नकारात्मक खबरें सामने आती हैं। ऐसे में वास्तविक व्यवस्थाओं को जानने के लिए बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में गौशाला में क्षमता से अधिक गोवंश होने के कारण जगह की कमी सामने आई।
उन्होंने अधिकारियों को गौशाला विस्तार के कार्य में तेजी लाने तथा गोवंश के रखरखाव और सुविधाओं में किसी भी तरह की कमी नहीं रहने देने के निर्देश दिए।
गर्भवती और बीमार गोवंश के लिए अलग व्यवस्था
उपमहापौर विवेक राजवंशी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान गर्भवती एवं बीमार गोवंश के लिए अलग व्यवस्था मिली। मौके पर दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थीं और बीमार गोवंश का उपचार भी किया जा रहा था। गोवंश को दिए जा रहे भूसे की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई।
हालांकि खल-चूरी की गुणवत्ता में मामूली कमी नजर आई, जिस पर संबंधित कार्मिकों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि गौशाला में गोवंश की संख्या, चारा, उपचार और साफ-सफाई सहित सभी व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखी जाए।
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(ऐ मुसलमानों) जिन मुशरिकों से तुम लोगों ने सुलह का एहद किया था अब ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ से उनसे (एक दम) बेज़ारी है

 सूरए तौबा मदीना में नाजि़ल हुआ और इसमें एक सौ उनतीस (129) आयतें हैं
(ऐ मुसलमानों) जिन मुशरिकों से तुम लोगों ने सुलह का एहद किया था अब ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ से उनसे (एक दम) बेज़ारी है (1)
तो (ऐ मुशरिकों) बस तुम चार महीने (ज़ीकादा, जिल हिज्जा, मुहर्रम रजब) तो (चैन से बेख़तर) रूए ज़मीन में सैरो सियाहत (घूम फिर) कर लो और ये समझते रहे कि तुम (किसी तरह) ख़़ुदा को आजिज़ नहीं कर सकते और ये भी कि ख़़ुदा काफि़रों को ज़रूर रूसवा करके रहेगा (2)
और ख़़ुदा और उसके रसूल की तरफ से हज अकबर के दिन (तुम) लोगों को मुनादी की जाती है कि ख़़ुदा और उसका रसूल मुशरिकों से बेज़ार (और अलग) है तो (मुशरिकों) अगर तुम लोगों ने (अब भी) तौबा की तो तुम्हारे हक़ में यही बेहतर है और अगर तुम लोगों ने (इससे भी) मुह मोड़ा तो समझ लो कि तुम लोग ख़़ुदा को हरगिज़ आजिज़ नहीं कर सकते और जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उनको दर्दनाक अज़ाब की ख़ुश ख़बरी दे दो (3)
मगर (हाँ) जिन मुशरिकों से तुमने एहदो पैमान किया था फिर उन लोगों ने भी कभी कुछ तुमसे (वफ़ा एहद में) कमी नहीं की और न तुम्हारे मुक़ाबले में किसी की मदद की हो तो उनके एहद व पैमान को जितनी मुद्द्त के वास्ते मुक़र्रर किया है पूरा कर दो ख़़ुदा परहेज़गारों को यक़ीनन दोस्त रखता है (4)
फिर जब हुरमत के चार महीने गुज़र जाएँ तो मुशरिको को जहाँ पाओ (बे ताम्मुल) कत्ल करो और उनको गिरफ्तार कर लो और उनको कै़द करो और हर घात की जगह में उनकी ताक में बैठो फिर अगर वह लोग (अब भी शिर्क से) बाज़ आए और नमाज़ पढ़ने लगें और ज़कात दे तो उनकी राह छोड़ दो (उनसे ताअरूज़ न करो) बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (5)
और (ऐ रसूल) अगर मुशरिकीन में से कोई तुमसे पनाह मागें तो उसको पनाह दो यहाँ तक कि वह ख़़ुदा का कलाम सुन ले फिर उसे उसकी अमन की जगह वापस पहुँचा दो ये इस वजह से कि ये लोग नादान हैं (6)

(जब) मुशरिकीन ने ख़ुद एहद शिकनी (तोड़ा) की तो उन का कोई एहदो पैमान ख़़ुदा के नज़दीक और उसके रसूल के नज़दीक क्योंकर (क़ायम) रह सकता है मगर जिन लोगों से तुमने खानाए काबा के पास मुआहेदा किया था तो वह लोग (अपनी एहदो पैमान) तुमसे क़ायम रखना चाहें तो तुम भी उन से (अपना एहद) क़ायम रखो बेशक ख़ुदा (बद एहदी से) परहेज़ करने वालों को दोस्त रखता है (7)
(उनका एहद) क्योंकर (रह सकता है) जब (उनकी ये हालत है) कि अगर तुम पर ग़लबा पा जाए तो तुम्हारे में न तो रिश्ते नाते ही का लिहाज़ करेगें और न अपने क़ौल व क़रार का ये लोग तुम्हें अपनी ज़बानी (जमा खर्च में) खुश कर देते हैं हालाँकि उनके दिल नहीं मानते और उनमें के बहुतेरे तो बदचलन हैं (8)
और उन लोगों ने ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फायदे) हासिल करके (लोगों को) उसकी राह से रोक दिया बेशक ये लोग जो कुछ करते हैं ये बहुत ही बुरा है (9)
ये लोग किसी मोमिन के बारे में न तो रिश्ता नाता ही कर लिहाज़ करते हैं और न क़ौल का क़रार का और (वाक़ई) यही लोग ज़्यादती करते हैं (10)

03 अक्टूबर 2026

और अगर ये लोग तुमसे फरेब करना चाहते है तो ख़़ुदा से पहले ही फरेब कर चुके हैं तो (उसकी सज़ा में) ख़़ुदा ने उन पर तुम्हें क़ाबू दे दिया और ख़़ुदा तो बड़ा वाकि़फकार हिकमत वाला है

और अगर ये लोग तुमसे फरेब करना चाहते है तो ख़़ुदा से पहले ही फरेब कर चुके हैं तो (उसकी सज़ा में) ख़़ुदा ने उन पर तुम्हें क़ाबू दे दिया और ख़़ुदा तो बड़ा वाकि़फकार हिकमत वाला है (71)
जिन लोगों ने ईमान क़़ुबूल किया और हिजरत की और अपने अपने जान माल से ख़ुदा की राह में जिहाद किया और जिन लोगों ने (हिजरत करने वालों को जगह दी और हर (तरह) उनकी ख़बर गीरी (मदद) की यही लोग एक दूसरे के (बाहम) सरपरस्त दोस्त हैं और जिन लेागों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत नहीं की तो तुम लोगों को उनकी सरपरस्ती से कुछ सरोकार नहीं-यहाँ तक कि वह हिजरत एख़्तियार करें और (हा) मगर दीनी अम्र में तुम से मदद के ख़्वाहा हो तो तुम पर (उनकी मदद करना लाजि़म व वाजिब है मगर उन लोगों के मुक़ाबले में (नहीं) जिनमें और तुममें बाहम (सुलह का) एहदो पैमान है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा (सबको) देख रहा है (72)
और जो लोग काफि़र हैं वह भी (बाहम) एक दूसरे के सरपरस्त हैं अगर तुम (इस तरह) वायदा न करोगे तो रूए ज़मीन पर फि़तना (फ़साद) बरपा हो जाएगा और बड़ा फ़साद होगा (73)
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और ख़़ुदा की राह में लड़े भिड़े और जिन लोगों ने (ऐसे नाज़ुक वक़्त में मुहाजिरीन को जगह ही और उनकी हर तरह ख़बरगीरी (मदद) की यही लोग सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के वास्ते मग़फिरत और इज़्ज़त व आबरु वाली रोज़ी है (74)
और जिन लोगों ने (सुलह हुदैबिया के) बाद ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की और तुम्हारे साथ मिलकर जिहाद किया वह लोग भी तुम्हीं में से हैं और साहबाने क़राबत ख़़ुदा की किताब में बाहम एक दूसरे के (बनिस्बत औरों के) ज़्यादा हक़दार हैं बेशक ख़़ुदा हर चीज़ से ख़ूब वाकि़फ हैं (75) 

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