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25 मार्च 2026

देश भर में कांग्रेस की फ़ज़ीहत और लगातार हार के पीछे अगर रिसर्च रिपोर्ट्स को तलाशें , तो कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग का निकम्मा पन , अल्पसंख्यकों से संगठन की दूरी, पूरी तरह से ज़िम्मेदार है ,

 

देश भर में कांग्रेस की फ़ज़ीहत और लगातार हार के पीछे अगर रिसर्च रिपोर्ट्स को तलाशें , तो कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग का निकम्मा पन , अल्पसंख्यकों से संगठन की दूरी, पूरी तरह से ज़िम्मेदार है , देश जानता है ,के उत्तर प्रदेश , केरल , दक्षिणी भारत , महाराष्ट्र , मध्य्प्रदेश , दिल्ली, पंजाब, आसाम , उड़ीसा , गुजरात , पश्चिमी बंगाल सहित , कई ऐसे राज्य हैं , जहाँ अल्पसंख्यक वोटर्स को कांग्रेस का अल्पसंख्यक विभाग पूरी तरह से फिसड्डी ही नहीं बल्कि कांग्रेस से अल्पसंख्यकों की दूरी और अधिक बढ़ाने वाला साबित हुआ है , ओर यहां कोंग्रेस के हीरो से ज़ीरो बनने की स्थिति भी यही है,, राजस्थान में कमोबेश वही हालात प्रारम्भिक स्थिति में शुरू हो गए हैं , अलग अलग ज़िलों में , विधानसभा , लोकसभा चुनाव के वक़्त , इसका असर भी नज़र आता है , कई जगह पर सिर्फ अल्पसंख्यकों की क्रॉस वोटिंग, निर्दलीय उम्मीदवारी, वोटिंग प्रतिशत में कमी की वजह से ही , कांग्रेस भाजपा से जीती हुई बाज़ी हार रही है , वजह साफ़ है , कांग्रेस का मूल संगठन और अल्पसंख्यक वोटर्स को कांग्रेस संगठन से जोड़ने के लिए बनाया गया है , लेकिन कांग्रेस का अल्पसंख्यक विभाग राजस्थान में पूरी तरह से फिसड्डी साबित होता जा रहा है , राजस्थान के अल्पसंख्यक कोंग्रेस सियासी इतिहास पर अगर नज़र डालें तो, कई साल पहले जब अल्पसंख्यक विभाग नहीं , अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ हुआ करता था , तब राजस्थान अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक अब्दुल सत्तार एडवोकेट की क़यादत में अल्पसंख्यक खुद को सुरक्षित महसूस करते थे , उस वक़्त लोग देखते थे , के कांग्रेस में संगठन या फिर सरकारी स्तर पर अल्पसंख्यकों की उपेक्षा करने पर स्वर्गीय अब्दुल सत्तार एडवोकेट मंत्रियों , अधिकारीयों , और संगठन के नेताओं की आँखों में आँखे डालकर अल्पसंख्यकों की समस्याओं के समाधान की बात करने की ताक़त रखते थे , यह बात अलग है के उनकी इस दिलेरी की वजह से उनकी क़ाबलियत के बावजूद भी , उन्हें निजी तोर पर सियासी ओहदेदारी में उपेक्षित रखकर नुकसान दिया जाता रहा था , इसके बाद एक निज़ाम कुरैशी जो खेल विकास प्राधिकरण के चेयरमेन भी राह चुके , उन्हें जब कोंग्रेस अल्पसंख्यक विभाग बन गया था तब , उनकी नियुक्ति के बाद अल्पसंख्यक विभाग का थोड़ा दबदबा शुरू हुआ था , पूरे राजस्थान में अल्पसंख्यक विभाग की संभागीय स्तर पर विकेन्द्रीकरण की नियमावली के तहत , संभागीय अध्यक्ष , जिला अध्यक्ष , जिला कार्यकारिणी थी , ब्लोक अध्यक्ष थे, हर दो तीन माह में संभागीय सम्मेलन , जिला सम्मेलन और प्रदेश स्तरीय बैठकें आयोजित होती थी , अल्पसंख्यकों की समस्या उनके समाधान पर चर्चा होती थी , कोंग्रेस के नीति निर्धारक नेताओं से बैठक कर अल्पसंख्यकों के सियासी प्रतिनिधित्व , समस्याओं उनके समाधान पर चर्चा होती थी, जो लिखित में , मांगपत्र होते थे, मंत्रियों को नेताओं को , संगठन से जुड़े ज़िम्मेदार नेताओं को , अल्पसंख्यकों को उचित प्रतिनिधित्व देने ,, निकाय , पंचायत , विधानसभा में टिकिट देने के लिए सर्वेक्षण रिपोर्ट देकर , साफ तोर पर चेतावनी दी जाती थी के , अगर रिपोर्ट के विपरीत कुछ हुआ तो , कांग्रेस को करारी हार हो सकती है , इन दो कार्यकाल में राजस्थान और जिला स्तरीय नियुक्तियों में खुली छूट थी, प्रदेश चेयरमेन, सम्भागीय चेयरमेन आज़ादी के साथ नियुक्ति पत्र जारी करने में सक्षम थे , स्वतन्त्र थे, एक अच्छे कार्यकर्ता को नियुक्त करने के लिये उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की गुलामाना स्वीकृति की बंदिशे नहीं थी ,उन्हें पूरी अपने क्षेत्र में काम करने नियुक्तियां करने की खुली आज़ादी थी, जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष भी अल्पसंख्यकों की उपेक्ष की शिकायतों का संज्ञान लेकर, प्रदेश अध्यक्षों, मुख्यमंत्री या फिर वरिष्ठ नेताओं से खुलकर बात करते थे, राजस्थान में इन दो के अलावा , अलबत्ता आबिद कागज़ी के कार्यकाल में कोरोना में घर घर दवा, चिकित्सा, खाने के पैकिट अभियान चला, ईद के अवसर पर क़ोमी एकता कार्यक्रम हुए, लेकिन सचिन पायलट की बगावत के बाद सभी विभाग भंग हो जाने से स्थिति असमंजस रही, इनके अलावा, अल्पसंख्यक विभाग से जुड़े लोग, सिर्फ रस्म अदायगी से बाहर नहीं निकले ,, अजमेर चादर पोशी के अलावा, कभी भी एक भी उदाहरण ऐसा नहीं मिला के ऐसे नेतृत्व ने , अल्पसंख्यकों के हक़ के लिए कोई संघर्ष किया हो , कोई आवाज़ उठाई हो ,विपक्ष में रहे तो अपनी मांगों के समर्थन में कोई आंदोलन किया हो ,,सरकार में रहे तो अल्पसंख्यकों को उचित प्रतिनिधित्व दिलवाया हो , मदरसा पैराटीचर्स की नियुक्तियां हुई हो , जो नियुक्त है उन्हें प्रबोधक बनाया हो , उर्दू , वक़्फ़ सम्पत्तियों , अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम की ऋण योजनाए , रोज़गार के अवसर , आरक्षण ,, पक्षपात पूर्ण नीतियों के खिलाफ कोई भी आवाज़ उठाई हो ,बस मुझे राज्य सभा में ले लो , मुझे यह दे दो , मुझे वोह दे दो , इससे बाहर अल्पसंख्यक का नेतृत्व नहीं निकला है , एक पूर्व अध्यक्ष जी की तो दिलेरी देखिए उन्होंने तो पदों की बोली लगाई, कोटा के पत्रकार जी तक इसके गवाह हैं , कुछ के रुपये तक लोटवाना पड़े, यही वजह रही है के अल्पसंख्यक विभाग कांग्रेस के लिए एक फायदे की जगह नुकसान का विभाग साबित होने लगा है , मूल संगठन में इनको , प्रॉपर सम्मान नहीं मिलता , टिकिट की दावेदारी के वक़्त या किसी अन्य मुख्य नीति निर्धारण बैठकों में , इन्हे अहमियत नहीं मिलती , अल्पसंख्यक विभाग अपने अपने ज़िले की समस्याओं के बारे में कोई आंदोलन नहीं कर पाते , संगठन में अल्पसंसख्यकों की समस्याएं समाधान पर कोई चर्चा नहीं होती , सिर्फ ज़िंदाबाद , मुर्दाबाद , भीड़ इसका निदान नहीं , ज़िले वार , क्षेत्रवार , पूरे राज्य की समस्याओं पर चिंतन होना ज़रूरी है ,, पिछले दिनों जयपुर के पास के ज़िले में हालात बिगड़े थे , अल्पसंख्यक विभाग की टीम गठित हुई थी , वोह तो वहां गई ही नहीं, फिर खुद प्रदेश कांग्रेस कमेटी की टीम गठित हुई , क्या हुआ , क्या रिपोर्ट आई किसी को आज तक पता नहीं ,, कोटा में वक़्फ़ सम्पत्ति बरकत उद्यान मस्जिद में मरम्मत कार्य तो छोडो , रमज़ानुल मुबारक के शब् ऐ क़द्र मौके पर ,, तबरेज़ पठान , सोनू अब्बासी और अन्य की कोशिशों के बावजूद भी वहां कोई समाधान नहीं निकला , ऐसे में कोटा के जम्बो जेट दिग्गज अल्पसंख्यक विभाग ने कोई आवाज़ ही नहीं उठाई ,,, यहां तक के रोज़े इफ्तार के कार्यक्रम तक नहीं हो पाए ,, जबकि अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से हर बार प्रदेश , ज़िला स्तरीय कार्यक्रम होते रहे हैं, सभी जानते हैं हर ज़िले , हर कस्बे , राजस्थान की कई जगह पर अल्पसंख्यकों की समस्याएं तो बहुत है , लेकिन इन समस्याओं के समाधान के लिए विभाग की कोई पहल , कोई सर्वेक्षण नहीं है , अगर हर ज़िले के अल्पसंख्यक विभाग से जुड़े पदाधिकारी स्थानीय मुख्य कांग्रेस संगठन के नेतृत्व , पूर्व विधायक या विधायकों के ना नुकुर करने के बाद भी , उनसे उनकी समस्याओं के समाधान की आवाज़ उठाने के लिए जवाब तलब करे , तो ही ऐसा लगेगा , के अल्पसंख्यकों की आवाज़ के लिए कांग्रेस गम्भीर है कांग्रेस का अल्पसंख्यक विभाग गंभीर है ,, और अगर अल्पसंख्यकों में पोलिटिकल साक्षरता ,, समझ आ गई और वोह कांग्रेस और अल्पसंख्यक विभाग की बन्दर बाँट उपेक्षित व्यवस्था को समझ गए, तो फिर राजस्थान को भी बिहार , उत्तर प्रदेश , आसाम , उड़ीसा बनाने से कोई रोक नहीं सकेगा , हम कोटा में एक बार इस बगावत का खीमियाज़ा एक दिग्गज के चुनाव हार जाने का परिणाम देख चुके है , तो फिर क्या कांग्रेस के मूल संगठन को , कांग्रेस के सो में से सो फीसदी वोटर्स के दुःख दर्द , और उनके लिए पृथक से अल्पसंख्यक विभाग बनने के बाद भी उनकी उपेक्षा , उनकी समस्याओं पर खामोशी , टालमटोल , उनके प्रतिनिधित्व की उपेक्षा का दौर चलता ही रहा तो फिर , सो में से सो फीसदी वोट डालने वाला वर्ग अगर बिखर गया तो ,, इस संगठन का अल्लाह ही मालिक है , इसलिए कहता हूँ , अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा , कस्बे , ज़िले , और पुरे राजस्थान में अल्पसंख्यक विभाग को सक्रिय करें , अल्पसंख्यक समस्याओं के लिए संघर्षरत लोगों को जोड़े , उनके पुराने होमवर्क को समझें , और संगठन में नए लोगों को जगह दिलवाएं , मुख्य कांग्रेस में भी अलपसख्यक समाज से जुड़े लोगों को प्रतिनिधत्व दिलवाएं , उनके लिए आवाज़ उठायें उन्हें दूसरे समाज के वोट कट जाएंगे इस डर से उपेक्षित कर अछूत जैसा व्यवहार ना करें , और हो सके तो राजस्थान के अल्पसंख्यकों का विभाजन कांग्रेस से अलग होने से रोकने के लिए राजस्थान से राज्य सभा में किसी एक्टिव , हर दिल अज़ीज़ चेहरे को राज्य सभा में निर्वाचित करवाएं , वर्ना फिर मत कहना के पहले तो सावचेत ही नहीं किया , पहले तो बताया ही नहीं , अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

हाड़ौती रचनाकार परिचय कोश 85. मंजू किशोर रश्मि, कोटा ************************** रचनाकार 30 मार्च तक व्हाट्सअप न. 9413350242 पर अपना परिचय भेजे..

 

हाड़ौती रचनाकार परिचय कोश
85. मंजू किशोर रश्मि, कोटा
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रचनाकार 30 मार्च तक व्हाट्सअप न. 9413350242 पर अपना परिचय भेजे..
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मंजू कुमारी मेघवाल साहित्यिक उप नाम मंजू किशोर रश्मि का जन्म 29 दिसंबर 1972 को पिता किशन लाल राथलिया एवं माता जगन्नाथी बाई के परिवार में कोटा में हुआ। आपने समाजशास्त्र में एम. ए. की शिक्षा प्राप्त की है। हिन्दी और राजस्थानी में गीत, गजल, लेख, कविता, समीक्षा, कहानी, लघुकथा लिखती हैं। आपकी तीन पुस्तकें दूर कहीं आस' कविता संग्रह, भावों का स्पंदन' कविता संग्रह!( राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के आर्थिक सहयोग से ), राजस्थानी कविता संग्रह "थंसूं मिलतांई( राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर के आर्थिक सहयोग से ) एवं राजस्थानी भाषा अजंस बेब साईड पर कवितावां प्रकाशित हुई हैं। देश विदेश के पत्र पत्रिकाओं एवं साझा संकलनों में रचनाएं प्रकाशित होती हैं।
आपको विभिन्न संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित किया गया है। प्रमुख रूप से नेम प्रकाशन डेह नागौर राजस्थानी भाषा साहित्य द्वारा - कमला देवी भंवर पृथ्वीराज साहित्य पुरस्कार ,अदबी उड़ान विशिष्ट साहित्यकार सम्मान,चरखी दादरी,कुरूक्षेत्र, हरियाणा से निर्मला हिंदी साहित्य रत्न पुरस्कार, श्री भारतेन्दु समिति कोटा द्वारा साहित्य श्री सम्मान, साहित्य समर्था द्वारा अखिल भारतीय डाॅ.कुमुद टिक्कू कहानी प्रतियोगिता पुरस्कार,अंतराष्ट्रीय महिला मंच द्वारा राजस्थान नारी गौरव सम्मान ,श्री कर्म योगी साहित्य गौरव सम्मान, समरस श्री काव्य शिरोमणि सम्मान, दलित साहित्यक अकादमी द्वारा झलकारी बाई राष्ट्रीय शिरोमणिअवार्ड,काव्य सम्राट हरिवंशराय बच्चन स्मृति सम्मान, महाकवि रामचरण "मित्र" स्मृति सम्मान ,काव्य शिरोमणि माखन लाल चतुर्वेदी स्मृति सम्मान काव्य कुमुद सम्मान, काव्य शिखर तुलसीदास सम्मान, काव्य सरोवर सम्मान सहित कई अन्य पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। आप राबाउमावि. रंगबाड़ी कोटा में टीचर हैं और साहित्य सृजन में क्रियाशील हैं।
संपर्क :
वीएचई - 119 विवेकानन्द नगर ,कोटा ,पिन - 324005 राजस्थान
मो-8441019846
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संपादन : डॉ. प्रभात कुमार सिंघल, कोटा

राजस्थान सेवानिवृत पुलिस कल्याण संस्थान ने कलेक्ट्री पर प्रदर्शन कर केंद्र की पेंशन विरोधी नीतियों का विरोध किया

 

राजस्थान सेवानिवृत पुलिस कल्याण संस्थान ने कलेक्ट्री पर प्रदर्शन कर केंद्र की पेंशन विरोधी नीतियों का विरोध किया
के डी अब्बासी
कोटा, मार्च। राजस्थान सेवानिवृत पुलिस कल्याण संस्थान ने कलेक्ट्री पर प्रदर्शन कर केंद्र की पेंशन विरोधी नीतियों का विरोध किया।
राजस्थान सेवानिवृत पुलिस कल्याण संस्थान ने आज 2026 को केंद्र सरकार की पेंशन विरोधी नितियो के खिलाफ काला दिवस मनाया तथा प्रधानमंत्री,
को जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन देकर प्रस्तुत कर वित्त विधेयक- 2025 के आपत्तिजनक प्रावधानों को रद्द करने की मांग की।
संगठन के संभागीय अध्यक्ष नवनीत महर्षि ने बताया कि यदि यह अधिनियम लागू होता है तो पेंशन भोगियों की सेवानिवृत्ति की तिथि, पेंशन पात्रता के संबंध में वर्गीकरण और उनके बीच के अंतर का आधार होगा जिससे केंद्रीय वेतन आयोग (या किसी भी वेतन आयोग) के कार्यकाल से पहले के पेंशनर्स वेतन आयोग की सिफारिश के लाभ से वंचित हो जाएंगे । मौजूदा पेंशन भोगियों को इस कठिन समय में पेंशन वृद्धि का लाभ न मिलने के कारण आर्थिक हानि उठानी पड़ेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रकरण संख्या- 5939-41/1980 - डी. एस. नाकरा व अन्य बनाम भारत संघ में आदेशित किया था कि पेंशन एक सामाजिक कल्याणकारी व्यवस्था है जो उन लोगों को सामाजिक आर्थिक न्याय प्रदान करती है जिन्होंने अपने जीवन के सुनहरे दिनों में नियोक्ता अर्थात केंद्र अथवा राज्य सरकार के लिए इस आश्वासन के साथ कि वृद्धावस्था में उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा, अथक परिश्रम किया है। इस निर्णय में यह भी स्पष्ट किया गया था कि पेंशन योजना का उद्देश्य पेंशन भोगियों को अभाव मुक्त, सम्मान
जनक, स्वतंत्र और सेवानिवृत्ति से पहले के स्तर के समकक्ष जीवन स्तर प्रदान करना है। यह अधिनियम 01 जनवरी, 2026 से पहले सेवानिवृत हुए मौजूदा पेंशनर्स के लिए अपूरणीय क्षतिकारक सिद्ध होगा। अतः
संगठन ज्ञापन के माध्यम से भारत सरकार से अनुरोध किया गया है कि जिस प्रकार सातवें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा 01 जनवरी, 2016 से पहले सेवानिवृत हुए और
01 जनवरी, 2016 को या उसके बाद सेवानिवृत हुए पेंशनर्स के बीच समानता की सिफारिश की गई थी और केंद्र सरकार द्वारा इसे जनवरी, 2016 से स्वीकार भी किया गया था, ठीक उसी प्रकार आठवे केंद्रीय वेतन आयोग में भी इस सिद्धांत को यथावत रखा जाए।

रेलवे मजदूर संघ का आज सहायक मण्डल इन्जीनियर कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन,14 अप्रेल से भूखहड़ताल

 

रेलवे मजदूर संघ का आज सहायक मण्डल इन्जीनियर कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन,14 अप्रेल से भूखहड़ताल
के डी अब्बासी
कोटा, मार्च। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के बैनर तले कोटा मंडल मे इंजीनियरिंग विभाग से जुड़ी विभिन्न लंबित समस्याओं को लेकर आज सभी सहायक मंडल इंजीनियर कार्यालयों के समक्ष रेल मजदूर संघ के बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया गया।
वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ के मंडल सचिव अब्दुल खालिक ने बताया कि इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों को लंबे समय से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ द्वारा समय समय पर इन समस्याओं पर प्रकाश डाला गया एवं प्रशासन को अवगत कराया गया था, परंतु प्रशासन द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया गया था। कोटा स्टेशन पर सहायक मण्डल इन्जीनियर (मध्य) कार्यालय पर सैकड़ो कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन मण्डल अध्यक्ष महेन्द्र सिंह खींची के नेतृत्व मे किया गया। प्रदर्शन का संचालन के.के. गौतम एवं भूपेन्द्र धाकड़ द्वारा किया गया। इन्जीनियरिंग विभाग की 30 समस्याओं का ज्ञापन सहायक मण्डल इन्जीनियर (मध्य) को सौंपा गया।
विरोध प्रदर्शन मे मण्डल अध्यक्ष महेन्द्र सिंह खींची, चेतन शर्मा, के.के. गौतम, भूपेन्द्र धाकड़, विनोद महावर, चेतराम घोड़ेला, अनिल मीना, अशोक मीना, कुलदीप गरवा, मो. रेहान, मो. फिरोज, आशुतोष, नासिर हुसैन, उबन सिंह, मंगलचंद रोज, अब्दुल कलाम, धीरज कुमार शर्मा, धनराज मीना, पवन गोचर, गोकुल धाकड़, अविनाश वर्मा, ज्ञानचंद, बबलू गोचर, अनोखी लाल, राजेन्द्र मीना समेत सैकड़ों कर्मचारी उपस्थित रहे।

हम अपने पैग़म्बरों की और इमान वालों की दुनिया की जि़न्दगी में भी ज़रूर मदद करेंगे और जिस दिन गवाह (पैग़म्बर फ़रिश्ते गवाही को) उठ खड़े होंगे

 हम अपने पैग़म्बरों की और इमान वालों की दुनिया की जि़न्दगी में भी ज़रूर मदद करेंगे और जिस दिन गवाह (पैग़म्बर फ़रिश्ते गवाही को) उठ खड़े होंगे (51)
(उस दिन भी) जिस दिन ज़ालिमों को उनकी माज़ेरत कुछ भी फायदे न देगी और उन पर फिटकार (बरसती) होगी और उनके लिए बहुत बुरा घर (जहन्नुम) है (52)
और हम ही ने मूसा को हिदायत (की किताब तौरेत) दी और बनी इसराईल को (उस) किताब का वारिस बनाया (53)
जो अक़्लमन्दों के लिए (सरतापा) हिदायत व नसीहत है (54)
(ऐ रसूल) तुम (उनकी शरारत) पर सब्र करो बेशक ख़़ुदा का वायदा सच्चा है, और अपने (उम्मत की) गुनाहों की माफी माँगो और सुबह व शाम अपने परवरदिगार की हम्द व सना के साथ तसबीह करते रहो (55)
जिन लोगों के पास (ख़़ुदा की तरफ से) कोई दलील तो आयी नहीं और (फिर) वह ख़़ुदा की आयतों में (ख़्वाह मा ख़्वाह) झगड़े निकालते हैं, उनके दिल में बुराई (की बेजां हवस) के सिवा कुछ नहीं हालाँकि वह लोग उस तक कभी पहुँचने वाले नहीं तो तुम बस ख़़ुदा की पनाह माँगते रहो बेशक वह बड़ा सुनने वाला (और) देखने वाला है (56)
सारे आसमान और ज़मीन का पैदा करना लोगों के पैदा करने की ये निस्बत यक़ीनी बड़ा (काम) है मगर अक्सर लोग (इतना भी) नहीं जानते (57)
और अँधा और आँख वाला (दोनों) बराबर नहीं हो सकते और न मोमिनीन जिन्होने अच्छे काम किए और न बदकार (ही) बराबर हो सकते हैं बात ये है कि तुम लोग बहुत कम ग़ौर करते हो, कयामत तो ज़रूर आने वाली है (58)
इसमें किसी तरह का षक नहीं मगर अक्सर लोग (इस पर भी) ईमान नहीं रखते (59)
और तुम्हारा परवरदिगार इरशाद फ़रमाता है कि तुम मुझसे दुआएं माँगों मैं तुम्हारी (दुआ) क़ुबूल करूँगा जो लोग हमारी इबादत से अकड़ते हैं वह अनक़रीब ही ज़लील व ख़्वार हो कर यक़ीनन जहन्नुम वासिल होंगे (60)

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