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12 अगस्त 2026

विश्व अंगदान दिवस पर,ग्रामीण पुलिस अधीक्षक द्वारा अंगदान जागरूकता पोस्टर का विमोचन

 विश्व अंगदान दिवस पर,ग्रामीण पुलिस अधीक्षक द्वारा अंगदान जागरूकता पोस्टर का विमोचन
2. अंगदान जागरूकता बढ़े तो,बच सकते हैं कई जीवन

13 अगस्त का दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर,विश्व अंगदान दिवस के रूप में मनाया जाता है । इसको मनाने के पीछे मूल उद्देश्य यही रहता है कि,अधिक से अधिक लोगों को, अंगदान के बारे में जागरूक किया जाये और अंगदान से संबंधित जो भी भ्रांतियां हैं, उनको समय रहते दूर किया जाए ।

विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के जागरूकता अभियान के पोस्टर का विमोचन आज ग्रामीण पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर ने किया । उन्होंने अंगदान के प्रति अपने विचार बताते हुए कहा कि, अंगदान वर्तमान समय की माँग है, जागरूकता प्रतिशत बढ़े तो अंगदान के माध्यम से मृत्यु के करीब आए लोगों का जीवन बचाया जा सकता है । विमाचन के दौरान अनुरोध फाउंडेशन के संस्थापक नितिन गौतम, शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ और विकास दीक्षित मौजूद थे ।

इसी क्रम में शाइन इंडिया फाउंडेशन भी पिछले 15 वर्षों से नेत्रदान,अंगदान,त्वचादान और देहदान के लिए कार्य कर रहा है । हाडोती संभाग के पहले वरिष्ट ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि,भारत में प्रतिवर्ष 5 लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु, अंगों के अभाव के कारण हो रही है । इन सभी व्यक्तियों का जीवन ब्रेन डेड हुए मरीज के,अंगो के दान से बचाया जा सकता है । एक ब्रेन डेड व्यक्ति के किडनी,लिवर, इंटेस्टाइन, पेनक्रियाज,आँखें और हार्ट  से कम से कम 9 लोगों का जीवन बचाया जा सकता है ।

ज्ञात हो कि, संस्था सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'जुग जुग जियो' अभियान को घर-घर पहुंचाने के उद्देश्य से कई ऐसे नवाचार किए हैं,जिनके कारण अंगदान महादान का संदेश हर उम्र और वर्ग तक पहुंचा है ।

कोटा में ‘लाखों दो, करोड़ों की संपत्ति पाओ’ का खेल! सरकारी रिकॉर्ड और सेटिंग के नाम पर ठगी के नए जाल से सावधान

 

कोटा में ‘लाखों दो, करोड़ों की संपत्ति पाओ’ का खेल! सरकारी रिकॉर्ड और सेटिंग के नाम पर ठगी के नए जाल से सावधान
कोटा।भूखंडों के पट्टे, कैंसिल संपत्तियों को पुनर्जीवित कराने, दुकान-मकान आवंटन और फॉरेस्ट भूमि को डी-फॉरेस्ट कराने के नाम पर लाखों की ठगी के आरोप
अख्तर खान अकेला, कोटा राजस्थान
कोटा में गोलीबारी, चाकूबाजी, चेन स्नेचिंग और चोरी जैसी वारदातों से पुलिस लगातार निपट रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अपराध का एक ऐसा चेहरा भी सामने आया है, जो आम आदमी की मेहनत की कमाई पर सीधा वार कर रहा है। यह है सरकारी विभागों में कथित सेटिंग, दस्तावेजों और अधिकारियों तक पहुंच का झांसा देकर संपत्ति संबंधी काम करवाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का खेल।
भूखंडों के पट्टे दिलवाने, हाउसिंग बोर्ड, नगर विकास न्यास और केडीए में कैंसिल संपत्तियों, दुकानों, प्लॉट और मकानों को दोबारा आवंटित करवाने, विवादित जमीनों के पट्टे बनवाने तथा फॉरेस्ट भूमि को डी-फॉरेस्ट कराने के नाम पर लोगों से बड़ी रकम लेने के मामले सामने आते रहे हैं। इतना ही नहीं, कलर्ड जेरॉक्स या संदिग्ध दस्तावेज दिखाकर विवादित संपत्ति को बेचने के आरोपों में भी मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
कोटा शहर के विभिन्न थानों में ऐसे मामलों में प्रकरण दर्ज हुए और आरोपियों की गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इसके बावजूद सवाल यह है कि क्या कार्रवाई के बाद भी ठगी का यह नेटवर्क पूरी तरह खत्म हुआ है?
आश्वासनों के चक्कर में फंसे पीड़ित
सबसे बड़ी समस्या उन लोगों की है, जो कथित बिचौलियों या एजेंटों को लाखों रुपये दे चुके हैं। रकम देने के बाद महीनों और वर्षों तक उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलते रहते हैं—“काम हो जाएगा”, “फाइल चल रही है”, “अधिकारी से बात हो गई है”, “अगले सप्ताह पट्टा मिल जाएगा।”
कई पीड़ित इसी उम्मीद में पुलिस में शिकायत या एफआईआर दर्ज कराने से भी बचते हैं। उन्हें डर रहता है कि मामला दर्ज हुआ तो रकम वापस मिलेगी या नहीं, आरोपी जमानत पर बाहर आ जाएगा या फिर लेन-देन का पर्याप्त सबूत नहीं होने से मामला कमजोर पड़ जाएगा।
यही चुप्पी कथित ठगों के हौसले को बढ़ाने का काम करती है।
‘लाखों के बदले करोड़ों’ का सपना
ऐसे मामलों में कथित ठग सबसे पहले व्यक्ति की लालच और उसकी संपत्ति संबंधी जरूरत को पहचानते हैं। फिर उसे बताया जाता है कि संबंधित विभाग में उनकी “सेटिंग” है, अधिकारी उनके संपर्क में हैं और कुछ लाख रुपये खर्च करके करोड़ों रुपये कीमत की संपत्ति, प्लॉट, मकान या दुकान हासिल की जा सकती है।
यहीं से शुरू होता है ‘लाखों लगाओ और करोड़ों की संपत्ति पाओ’ का सपना।
लेकिन कई मामलों में सपना दिखाने वाले लोग रकम लेने के बाद पीड़ित को कार्यालयों और तारीखों के चक्कर लगवाते रहते हैं।
पुलिस को सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, नेटवर्क की तह तक जाना होगा
कोटा पुलिस ने पिछले दो वर्षों में संपत्ति संबंधी ठगी के कई मामलों में कार्रवाई की है। आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है। लेकिन अब जरूरत सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि ऐसे मामलों की आर्थिक जांच और नेटवर्क की पहचान करने की है।
यदि किसी आरोपी पर गंभीर आर्थिक ठगी का आरोप है तो जांच के दौरान उसकी नामी-बेनामी संपत्तियों, बैंक खातों, लेन-देन और संपत्ति खरीदने के स्रोत की भी जांच होनी चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि उसने संपत्तियां किस आय से खरीदीं और कहीं ठगी की रकम से संपत्ति अर्जित तो नहीं की गई।
यदि कानूनन ऐसा पाया जाता है कि अपराध से अर्जित धन से संपत्ति बनाई गई है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत संपत्ति जब्ती/कुर्की की कार्रवाई और पीड़ितों को राहत दिलाने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
कोटा में जागरूकता अभियान की जरूरत
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ऐसी ठगी से आम आदमी को बचाने के लिए जागरूकता अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा?
पुलिस, प्रशासन, केडीए, नगर निगम और अन्य संबंधित विभाग संयुक्त रूप से लोगों को यह जानकारी दे सकते हैं कि संपत्ति से संबंधित किसी भी काम के लिए आधिकारिक प्रक्रिया क्या है, कौन से दस्तावेज वैध हैं और किन परिस्थितियों में किसी एजेंट या बिचौलिए को पैसा देना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद सावधानी जरूरी
आज के समय में केडीए, पूर्व नगर विकास न्यास और नगर निगम सहित कई सरकारी सेवाओं में ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति को अपनी जगह एसएसओ आईडी, मोबाइल नंबर या अन्य लॉगिन संबंधी जानकारी का इस्तेमाल करने देना भी जोखिमपूर्ण हो सकता है।
किसी संपत्ति संबंधी काम में यदि कोई व्यक्ति यह कहे कि “आपको कार्यालय आने की जरूरत नहीं, हम सब करवा देंगे”, तो सावधान हो जाना चाहिए। संबंधित फाइल और आवेदन की स्थिति स्वयं आधिकारिक माध्यम से जांचना बेहतर है।
बुद्धिजीवी और आम नागरिक भी लालच से बचें
इस पूरे मामले का दूसरा पहलू नागरिकों की जिम्मेदारी भी है। लाखों रुपये देकर करोड़ों की संपत्ति हासिल करने का लालच अक्सर व्यक्ति को बिना पर्याप्त जांच के फैसले लेने पर मजबूर कर देता है।
किसी भी विवादित जमीन, प्लॉट, मकान या दुकान के मामले में दस्तावेजों की स्वतंत्र कानूनी जांच कराए बिना रकम देना खतरनाक हो सकता है। दस्तावेज असली हैं या नहीं, संपत्ति का वास्तविक मालिक कौन है, उस पर कोई विवाद या प्रतिबंध तो नहीं, सरकारी रिकॉर्ड में उसकी स्थिति क्या है—इन सभी सवालों की जांच जरूरी है।
किसी भी बड़ी रकम के लेन-देन से पहले दस्तावेज किसी योग्य विधिक विशेषज्ञ को दिखाकर उनकी वास्तविकता और कानूनी स्थिति समझना चाहिए।
अब समय है ‘सेटिंग’ के दावों की जांच का
कोटा में यदि कोई व्यक्ति या संस्था लगातार सरकारी विभागों में अपनी कथित पहुंच और सेटिंग के नाम पर लोगों से लाखों रुपये ले रही है, तो उसकी गतिविधियों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
पुलिस को ऐसे मामलों में सिर्फ एक पीड़ित की शिकायत तक सीमित न रहकर यह भी पता लगाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति ने कितने लोगों से रकम ली, कितनी संपत्तियों का सौदा कराया, किन-किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा।
आम नागरिकों को भी यह समझना होगा कि “लाखों रुपये देकर करोड़ों की संपत्ति हासिल करने” का दावा अवसर नहीं, बल्कि ठगी का संकेत भी हो सकता है।
इसलिए लालच में आकर पैसा देने के बजाय पहले दस्तावेजों की जांच करें, सरकारी रिकॉर्ड स्वयं सत्यापित करें, कानूनी सलाह लें और संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर समय रहते पुलिस या संबंधित विभाग को सूचना दें।
सावधानी ही ऐसी संपत्ति संबंधी ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
अख्तर खान अकेला
कोटा, राजस्थान
मो.: 9829086339

काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) ने सभी स्टेट बार काउंसिल के चुने हुए सदस्यों से कहा कि वे 16 अगस्त को महिला सदस्यों के प्रस्तावित को-ऑप्शन पर चर्चा करने और चार योग्य महिला वकीलों के पैनल की सामूहिक रूप से सिफारिश करने के लिए बैठकें करें।

काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) ने सभी स्टेट बार काउंसिल के चुने हुए सदस्यों से कहा कि वे 16 अगस्त को महिला सदस्यों के प्रस्तावित को-ऑप्शन पर चर्चा करने और चार योग्य महिला वकीलों के पैनल की सामूहिक रूप से सिफारिश करने के लिए बैठकें करें।
BCI के प्रधान सचिव श्रीमंतो सेन द्वारा जारी सूचना में सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त के उस आदेश का ज़िक्र है, जिसमें हाईकोर्ट के चीफ जस्टिसों को संबंधित स्टेट बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया गया था। ये सदस्य या तो पूर्व हाई कोर्ट जज हो सकते हैं या बार की वरिष्ठ महिला सदस्य।
सूचना के अनुसार, हर स्टेट बार काउंसिल के चुने हुए सदस्यों को उचित विचार-विमर्श के बाद चार उपयुक्त महिला वकीलों के पैनल की पहचान करनी है और उसकी सिफारिश करनी है।
संबंधित स्टेट बार काउंसिल के सचिव को यह पैनल, चर्चा के नतीजों और (जहां उचित समझा जाए) चुने हुए सदस्यों की राय के साथ, संबंधित हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजना होगा।
BCI ने कहा कि उम्मीदवारों की पहचान करते समय चुने हुए सदस्यों को उनके पेशेवर रुतबे, वरिष्ठता, ईमानदारी और अनुभव के साथ-साथ भौगोलिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखना चाहिए।
सदस्यों से यह भी कहा गया कि वे उन क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर विचार करें, जिनका अभी स्टेट बार काउंसिल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, और ऐसा सुप्रीम कोर्ट द्वारा बताए गए पैमानों के अनुसार किया जाए।
 

वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ ने रेल कर्मचारियों की समस्याओं पर उठाई आवाज - पीसीईई को सौंपा ज्ञापन।

 

वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ ने रेल कर्मचारियों की समस्याओं पर उठाई आवाज - पीसीईई को सौंपा ज्ञापन।
के डी अब्बासी
कोटा। वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ ने पीसीईई को सौंपा ज्ञापन, बिजली विभाग की समस्याओं पर जताई चिंता।
वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ के प्रवक्ता विमल मित्तल ने बताया कि मण्डल सचिव अब्दुल खालिक के नेतृत्व मे वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ के प्रतिनिधि मण्डल ने कोटा दौरे पर आये पश्चिम मध्य रेलवे के प्रधान मुख्य विद्युत अभियंता श्री मुकेश से भंेट की एवं विद्युत विभाग के कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराते हुए ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधि मंडल ने कोटा मंडल में विद्युत सामग्री की पर्याप्त आपूर्ति मे हो रही परेशानी से पीसीईई को अवगत कराया, वर्तमान मे कोटा मण्डल में बिजली संबंधी सामग्री की सप्लाई भण्डार डिपो भोपाल से की जाती रही है किन्तु वर्तमान में भोपाल मण्डल से बिजली संबंधी उपकरणों की आपूर्ति नही होने के कारण कोटा मण्डल में बिजली संबंधी मरम्मत कार्य अनावश्यक रूप से प्रभावित हो रहा है। कोटा कारखाना मे रिसीविंग सब स्टेशन पर कार्यरत कर्मचारियों को इंसेंटिव का भुगतान नहीं किया जाता है, जिसके भुगतान के लिए मजदूर संघ ने पीसीईई को अवगत कराया। वर्तमान मे भरतपुर सारस विहार काॅलोनी मे विद्युत आपूर्ति की काफी समस्या चल रही है, बार बार विद्युत सप्लाई बंद कर दी जाती है, जिससे कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनो को परेशानी हो रही है। इसके साथ ही मजदूर संघ ने अवगत कराया कि कोटा मण्डल से लोको रनिंग स्टाफ का क्रू रिव्यू मुख्यालय भेज दिया गया है पंरतु उसे अभी तक स्वीकृत कर वापस नहीं भेजा गया है। साथ ही संघ ने मुद्दा उठाया कि मण्डल के प्रत्येक स्टेशन पर पावर विभाग के कर्मचारी की पदस्थापना की जाये। इसके साथ ही टीआरडी विभाग के कर्मचारियों को यूनिफाॅर्म भत्ता दिलवाने की मांग को भी इस ज्ञापन मे उठाया गया है।
वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ के प्रतिनिधि मण्डल मे मंडल अध्यक्ष श्री महेंद्र खींची एवं मंडल सचिव श्री अब्दुल खालिक के साथ सुशील वर्मा, विपिन बिहारी शर्मा, के.के. गौतम तथा अमरनाथ पाण्डेय उपस्थित रहे

(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के (हाल पर) नज़र नहीं की जिन्हें किताबे ख़ुदा का कुछ हिस्सा दिया गया था और (फिर) शैतान और बुतों का कलमा पढ़ने लगे और जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया है उनकी निस्बत कहने लगे कि ये तो इमान लाने वालों से ज़्यादा राहे रास्त पर हैं

(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के (हाल पर) नज़र नहीं की जिन्हें किताबे ख़ुदा का कुछ हिस्सा दिया गया था और (फिर) शैतान और बुतों का कलमा पढ़ने लगे और जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया है उनकी निस्बत कहने लगे कि ये तो इमान लाने वालों से ज़्यादा राहे रास्त पर हैं (51)
(ऐ रसूल) यही वह लोग हैं जिनपर ख़ुदा ने लानत की है और जिस पर ख़ुदा ने लानत की है तुम उनका मददगार हरगिज़ किसी को न पाओगे (52)
क्या (दुनिया) की सल्तनत में कुछ उनका भी हिस्सा है कि इस वजह से लोगों को भूसी भर भी न देंगे (53)
यह ख़ुदा ने जो अपने फ़ज़ल से (तुम) लोगों को (कु़रान) अता फ़रमाया है इसके रश्क पर जले जाते हैं (तो उसका क्या इलाज है) हमने तो इबराहीम की औलाद को किताब और अक़्ल की बातें अता फ़रमायी हैं और उनको बहुत बड़ी सल्तनत भी दी (54)

फिर कुछ लोग तो इस (किताब) पर ईमान लाए और कुछ लोगों ने उससे इन्कार किया और इसकी सज़ा के लिए जहन्नुम की दहकती हुयी आग काफ़ी है (55)
(याद रहे) कि जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया उन्हें ज़रूर अनक़रीब जहन्नुम की आग में झोंक देंगे (और जब उनकी खालें जल कर) जल जाएंगी तो हम उनके लिए दूसरी खालें बदल कर पैदा करे देंगे ताकि वह अच्छी तरह अज़ाब का मज़ा चखें बेशक ख़ुदा हरचीज़ पर ग़ालिब और हिकमत वाला है (56)
और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए हम उनको अनक़रीब ही (बेहिश्त के) ऐसे ऐसे (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुँचाएंगे जिन के नीचे नहरें जारी होंगी और उनमें हमेशा रहेंगे वहां उनकी साफ़ सुथरी बीवियाँ होंगी और उन्हे घनी छाव में ले जाकर रखेंगे (57)
ऐ ईमानदारों ख़ुदा तुम्हें हुक्म देता है कि लोगों की अमानतें अमानत रखने वालों के हवाले कर दो और जब लोगों के बाहमी झगड़ों का फै़सला करने लगो तो इन्साफ़ से फै़सला करो (ख़ुदा तुमको) इसकी क्या ही अच्छी नसीहत करता है इसमें तो शक नहीं कि ख़ुदा सबकी सुनता है (और सब कुछ) देखता है (58)
ऐ ईमानदारों ख़ुदा की इताअत करो और रसूल की और जो तुममें से साहेबाने हुकूमत हों उनकी इताअत करो और अगर तुम किसी बात में झगड़ा करो बस अगर तुम ख़ुदा और रोज़े आखि़रत पर इमान रखते हो तो इस अम्र में ख़ुदा और रसूल की तरफ़ रूजू करो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है और अन्जाम की राह से बहुत अच्छा है (59)
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों की (हालत) पर नज़र नहीं की जो ये ख़्याली पुलाओ पकाते हैं कि जो किताब तुझ पर नाजि़ल की गयी और जो किताबें तुम से पहले नाजि़ल की गयी (सब पर) ईमान लाए और दिली तमन्ना ये है कि सरकशों को अपना हाकिम बनाएं हालांकि उनको हुक्म दिया गया कि उसकी बात न मानें और शैतान तो यह चाहता है कि उन्हें बहका के बहुत दूर ले जाए (60)

 

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