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03 अप्रैल 2026

(उनकी बातों से) क़रीब है कि सारे आसमान (उसकी हैबत के मारे) अपने ऊपर वार से फट पड़े और फ़रिश्ते तो अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करते हैं और जो लोग ज़मीन में हैं उनके लिए (गुनाहों की) माफी माँगा करते हैं सुन रखो कि ख़़ुदा ही यक़ीनन बड़ा बक्शने वाला मेहरबान है

 

42 सूरए अश शूरा

सूरए यूरा
सूरए अश शूरा मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी (53) तिरपन आयतें है
ख़ुदा के नाम से शुरू करता हूँ जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
हा मीम (1)
ऐन सीन काफ़ (2)
(ऐ रसूल) ग़ालिब व दाना ख़़ुदा तुम्हारी तरफ़ और जो (पैग़म्बर) तुमसे पहले गुज़रे उनकी तरफ़ यूँ ही वही भेजता रहता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है ग़रज़ सब कुछ उसी का है (3)
और वह तो (बड़ा) आलीशान (और) बुज़ुर्ग है (4)
(उनकी बातों से) क़रीब है कि सारे आसमान (उसकी हैबत के मारे) अपने ऊपर वार से फट पड़े और फ़रिश्ते तो अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करते हैं और जो लोग ज़मीन में हैं उनके लिए (गुनाहों की) माफी माँगा करते हैं सुन रखो कि ख़़ुदा ही यक़ीनन बड़ा बक्शने वाला मेहरबान है (5)
और जिन लोगों ने ख़़ुदा को छोड़ कर (और) अपने सरपरस्त बना रखे हैं ख़़ुदा उनकी निगरानी कर रहा है (ऐ रसूल) तुम उनके निगेहबान नहीं हो (6)
और हमने तुम्हारे पास अरबी क़़ुरआन यूँ भेजा ताकि तुम मक्का वालों को और जो लोग इसके इर्द गिर्द रहते हैं उनको डराओ और (उनको) क़यामत के दिन से भी डराओ जिस (के आने) में कुछ भी शक नहीं (उस दिन) एक फरीक़ (मानने वाला) जन्नत में होगा और फरीक़ (सानी) दोज़ख़ में (7)
और अगर ख़़ुदा चाहता तो इन सबको एक ही गिरोह बना देता मगर वह तो जिसको चाहता है (हिदायत करके) अपनी रहमत में दाखि़ल कर लेता है और ज़ालिमों का तो (उस दिन) न कोई यार है और न मददगार (8)
क्या उन लोगों ने ख़़ुदा के सिवा (दूसरे) कारसाज़ बनाए हैं तो कारसाज़ बस ख़़ुदा ही है और वही मुर्दों को जि़न्दा करेगा और वही हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है (9)
और तुम लोग जिस चीज़ में बाहम एख़्तेलाफ़ात रखते हो उसका फैसला ख़ुदा ही के हवाले है वही ख़ुदा तो मेरा परवरदिगार है मैं उसी पर भरोसा रखता हूँ और उसी की तरफ़ रूजू करता हूँ (10)

02 अप्रैल 2026

अंगदान की अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करेंगे डॉ गौड़

 

अंगदान की अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करेंगे डॉ गौड़
2. नेत्रदान-अंगदान में हुए प्रेरक प्रयासों को, अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में दिखाएंगे डॉ गौड़

अंगदान जागरूकता अभियान के अंतर्गत कल से अहमदाबाद के आईआईएम इंस्टीट्यूट में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस (3-4 अप्रैल) का आयोजन किया जा रहा है । इस कांफ्रेंस में न सिर्फ भारत के बल्कि,देश विदेश से भी कई सारे ट्रांसप्लांट सर्जन, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं ।

अंगदान अभियान को, जन जागरूकता के साथ-साथ, उसे प्रेरणादायी व गौरवशाली कार्य बनाकर आम जन को सेवा की भावना से जोड़ने के उद्देश्य से, संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन,कोटा के डॉ कुलवंत गौड़ भी इस अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में देश विदेश से आए हुए सभी प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव और प्रेरक प्रयासों को शेयर करेंगे ।

ज्ञात हो कि,पूरे राजस्थान में, संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन को उसके उत्कृष्ट प्रयासों के लिए राजस्थान राज्य सरकार के चिकित्सा विभाग ने अंगदान अभियान के कार्यों के लिये दो बार राज्य स्तरीय सम्मान दिया है ।

डॉ गौड़ ने नेत्रदान,अंगदान और देहदान के अभियान को,अपने नवाचारों से इतना प्रेरणादायक बनाया है कि,आज उनके नवाचारों को राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है।

चलो शुक्र है ख़ुदा का के, इमरान जी प्रतापगढ़ी अल्पसंख्यकों के विधान, संरक्षण, सलाह मामले में अकेले सक्षम नहीं हैं

 चलो शुक्र है ख़ुदा का के, इमरान जी प्रतापगढ़ी अल्पसंख्यकों के विधान, संरक्षण, सलाह मामले में अकेले सक्षम नहीं हैं , यह राष्ट्रीय कोंग्रेस हाईकमान ने आंतरिक रूप से स्वीकार कर लिया है, अब अल्पसंख्यक विभाग के विधान, संरक्षण, सलाह मशवरे के लियें देश भर के 60 अज़ीम हस्तियां जिन्होंने आज तक अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिम समाज के हक़ संघर्ष के लिये कोंग्रेस के भीतर या बहार कोई आवाज़ नहीं उठाई उन्हें सलाहकार घोषित कर भाई इमरान प्रतापगढ़ी को अधिकृत रूप से सूचित किया है, चलो देखते है, कोंग्रेस के इन लोगों की उपेक्षा से कोसों दूर जा रहे अल्पसंख्यक, मुस्लिम वोटर्स को फिर साथ लाने के लिए यह लोग उन्हें प्रतिनिधित्व, सम्मान , मूल संगठन में ओहदेदारी, राजस्थान में राज्यसभा सीट फिक्सिंग पर क्या कुछ करते हैं, एक ब्रेक के बाद , या फिर यह कागज़ी लिस्ट यूँ ही रद्दी में कचोरी वगेरा खाने के काम की रहेगी, अख़्तर

जिन लोगों ने नसीहत को जब वह उनके पास आयी न माना (वह अपना नतीजा देख लेंगे) और ये क़़ुरआन तो यक़ीनी एक आली मरतबा किताब है

 जिन लोगों ने नसीहत को जब वह उनके पास आयी न माना (वह अपना नतीजा देख लेंगे) और ये क़़ुरआन तो यक़ीनी एक आली मरतबा किताब है (41)
कि झूठ न तो उसके आगे फटक सकता है और न उसके पीछे से और खूबियों वाले दाना (ख़ुदा) की बारगाह से नाजि़ल हुयी है (42)
(ऐ रसूल) तुमसे भी बस वही बातें कहीं जाती हैं जो तुमसे और रसूलों से कही जा चुकी हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार बख्शने वाला भी है और दर्दनाक अज़ाब वाला भी है (43)
और अगर हम इस क़ु़रआन को अरबी ज़बान के सिवा दूसरी ज़बान में नाजि़ल करते तो ये लोग ज़रूर कह न बैठते कि इसकी आयतें (हमारी) ज़बान में क्यों तफ़सीलदार बयान नहीं की गयी क्या (खू़ब क़़ुरान तो) अजमी और (मुख़ातिब) अरबी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि इमानदारों के लिए तो ये (कु़रआन अज़सरतापा) हिदायत और (हर मर्ज़ की) शिफ़ा है और जो लोग ईमान नहीं रखते उनके कानों (के हक़) में गिरानी (बहरापन) है और वह (कु़रआन) उनके हक़ में नाबीनाई (का सबब) है तो गिरानी की वजह से गोया वह लोग बड़ी दूर की जगह से पुकारे जाते है (44)
(और नहीं सुनते) और हम ही ने मूसा को भी किताब (तौरैत) अता की थी तो उसमें भी इसमें एख़्तेलाफ किया गया और अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से एक बात पहले न हो चुकी होती तो उनमें कब का फैसला कर दिया गया होता, और ये लोग ऐसे शक में पड़े हुए हैं जिसने उन्हें बेचैन कर दिया है (45)
जिसने अच्छे अच्छे काम किये तो अपने नफे़ के लिए और जो बुरा काम करे उसका बवाल भी उसी पर है और तुम्हारा परवरदिगार तो बन्दों पर (कभी) ज़ुल्म करने वाला नहीं (46)
क़यामत के इल्म का हवाला उसी की तरफ़ है (यानि वही जानता है) और बगै़र उसके इल्म व (इरादे) के न तो फल अपने पौरों से निकलते हैं और न किसी औरत को हमल रखता है और न वह बच्चा जनती है और जिस दिन (ख़़ुदा) उन (मुशरेकीन) को पुकारेगा और पूछेगा कि मेरे शरीक कहाँ हैं- वह कहेंगे हम तो तुझ से अर्ज़ कर चूके हैं कि हम में से कोई (उनसे) वाकिफ़ ही नहीं (47)
और इससे पहले जिन माबूदों की परसतिश करते थे वह ग़ायब हो गये और ये लोग समझ जाएगें कि उनके लिए अब मुख़लिसी नहीं (48)
इन्सान भलाई की दुआए मांगने से तो कभी उकताता नहीं और अगर उसको कोई तकलीफ़ पहुँच जाए तो (फौरन) न उम्मीद और बेआस हो जाता है (49)
और अगर उसको कोई तकलीफ़ पहुँच जाने के बाद हम उसको अपनी रहमत का मज़ा चखाएँ तो यक़ीनी कहने लगता है कि ये तो मेरे लिए ही है और मैं नहीं ख़याल करता कि कभी क़यामत बरपा होगी और अगर (क़यामत हो भी और) मैं अपने परवरदिगार की तरफ़ लौटाया भी जाऊँ तो भी मेरे लिए यक़ीनन उसके यहाँ भलाई ही तो है जो आमाल करते रहे हम उनको (क़यामत में) ज़रूर बता देंगें और उनको सख़्त अज़ाब का मज़ा चख़ाएगें (50)
(वह अलग) और जब हम इन्सान पर एहसान करते हैं तो (हमारी तरफ़ से) मुँह फेर लेता है और मुँह बदलकर चल देता है और जब उसे तकलीफ़ पहुँचती है तो लम्बी चैड़ी दुआएँ करने लगता है (51)
(ऐ रसूल) तुम कहो कि भला देखो तो सही कि अगर ये (क़़ुरआन) ख़ुदा की बारगाह से (आया) हो और फिर तुम उससे इन्कार करो तो जो (ऐसे) परले दर्जे की मुख़ालेफ़त में (पड़ा) हो उससे बढ़कर और कौन गुमराह हो सकता है (52)
हम अनक़रीब ही अपनी (क़ु़दरत) की निशानियाँ अतराफ़ (आलम) में और ख़़ुद उनमें भी दिखा देगें यहाँ तक कि उन पर ज़ाहिर हो जाएगा कि वही यक़ीनन हक़ है क्या तुम्हारा परवरदिगार इसके लिए काफ़ी नहीं कि वह हर चीज़ पर क़ाबू रखता है (53)
देखो ये लोग अपने परवरदिगार के रूबरू हाजि़र होने से शक में (पड़े) हैं सुन रखो वह हर चीज़ पर हावी है (54)

सूरए हा मीम अस सजदह ख़त्म

01 अप्रैल 2026

अब छोटे शहरों के परिवारों में परंपरा बन रहा नेत्रदान

  अब छोटे शहरों के परिवारों में परंपरा बन रहा नेत्रदान
2. 80 किलोमीटर दूर, कोटा से आयी टीम ने लिया इंद्रगढ़ क्षेत्र का पांचवा नेत्रदान

शोक की घड़ी में, परिजनों द्वारा नेत्रदान का कार्य संपन्न कराने की पहल अब इंदरगढ़ क्षेत्र में भी परंपरा के रूप में दिखने लगी है ।

बूंदी जिले के इंदरगढ़ क्षेत्र में संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन और ईबीएसआर के बीबीजे चैप्टर द्वारा चलाए जा रहे नेत्रदान जागरुकता अभियान से क्षेत्र में आज पांचवा नेत्रदान आज संपन्न हुआ ।

वर्ष 2019 में, इंदरगढ़ निवासी महावीर प्रसाद जैन की पत्नी मंजू, और 2025 में इन्हीं के पोते मनन जैन का आकस्मिक निधन हुआ,जिसके उपरांत  परिजनों ने नेत्रदान का पुनीत कार्य संपन्न करवाया था ।

आज इसी परिवार की बड़े मुखिया महावीर प्रसाद जैन का भी हृदयघात से आकस्मिक निधन हो गया, उनके निधन के ठीक उपरांत बहनोई महावीर जैन ने तुरंत कोटा की संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन को दिवंगत महावीर प्रसाद जैन के नेत्रदान के लिए संपर्क किया ।

सूचना मिलते ही कोटा से डॉ कुलवंत गौड़ तुरंत ही नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ लेकर 80 किलोमीटर दूर इंदरगढ़ के लिए रवाना हो गए, दिवंगत के नेत्रदान हो सके,इसके लिए शोकाकुल परिवार के सदस्यों ने अंतिम संस्कार का समय भी थोड़ा देरी से कर दिया ।

तय समय पर डॉ गौड़ ने परिवार के सभी सदस्यों के बीच में नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया, प्रक्रिया के दौरान नेत्रदान से जुड़ी सावधानी और जरूरी बातों को भी विस्तार से बताया ।

डॉ गौड़ ने बताया कि,गर्मियों में प्राप्त होने वाले नेत्रदानों में कॉर्निया की गुणवत्ता ठीक बनी रहे उसके लिए ध्यान रहे की,दान दाता की आंखों को पूरी तरह बंद कर,उन पर गीला रुमाल रख दें ।
आंखों में जितनी नमी बनी रहेगी कॉर्निया की गुणवत्ता उतनी ही अच्छी रहेगी ।

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