विश्व अंगदान दिवस पर,ग्रामीण पुलिस अधीक्षक द्वारा अंगदान जागरूकता पोस्टर का विमोचन
2. अंगदान जागरूकता बढ़े तो,बच सकते हैं कई जीवन
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अगस्त का दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर,विश्व अंगदान दिवस के रूप में मनाया
जाता है । इसको मनाने के पीछे मूल उद्देश्य यही रहता है कि,अधिक से अधिक
लोगों को, अंगदान के बारे में जागरूक किया जाये और अंगदान से संबंधित जो भी
भ्रांतियां हैं, उनको समय रहते दूर किया जाए ।
विश्व अंगदान दिवस
के अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के जागरूकता अभियान के पोस्टर का विमोचन
आज ग्रामीण पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर ने किया । उन्होंने अंगदान के प्रति
अपने विचार बताते हुए कहा कि, अंगदान वर्तमान समय की माँग है, जागरूकता
प्रतिशत बढ़े तो अंगदान के माध्यम से मृत्यु के करीब आए लोगों का जीवन बचाया
जा सकता है । विमाचन के दौरान अनुरोध फाउंडेशन के संस्थापक नितिन गौतम,
शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ और विकास दीक्षित मौजूद थे ।
इसी
क्रम में शाइन इंडिया फाउंडेशन भी पिछले 15 वर्षों से
नेत्रदान,अंगदान,त्वचादान और देहदान के लिए कार्य कर रहा है । हाडोती संभाग
के पहले वरिष्ट ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि,भारत
में प्रतिवर्ष 5 लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु, अंगों के अभाव के कारण हो
रही है । इन सभी व्यक्तियों का जीवन ब्रेन डेड हुए मरीज के,अंगो के दान से
बचाया जा सकता है । एक ब्रेन डेड व्यक्ति के किडनी,लिवर, इंटेस्टाइन,
पेनक्रियाज,आँखें और हार्ट से कम से कम 9 लोगों का जीवन बचाया जा सकता है ।
ज्ञात
हो कि, संस्था सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'जुग जुग जियो'
अभियान को घर-घर पहुंचाने के उद्देश्य से कई ऐसे नवाचार किए हैं,जिनके
कारण अंगदान महादान का संदेश हर उम्र और वर्ग तक पहुंचा है ।
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
12 अगस्त 2026
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(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के (हाल पर) नज़र नहीं की जिन्हें किताबे ख़ुदा का कुछ हिस्सा दिया गया था और (फिर) शैतान और बुतों का कलमा पढ़ने लगे और जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया है उनकी निस्बत कहने लगे कि ये तो इमान लाने वालों से ज़्यादा राहे रास्त पर हैं
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के (हाल पर) नज़र नहीं की जिन्हें किताबे
ख़ुदा का कुछ हिस्सा दिया गया था और (फिर) शैतान और बुतों का कलमा पढ़ने
लगे और जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया है उनकी निस्बत कहने लगे कि ये
तो इमान लाने वालों से ज़्यादा राहे रास्त पर हैं (51)
(ऐ रसूल) यही वह लोग हैं जिनपर ख़ुदा ने लानत की है और जिस पर ख़ुदा ने लानत की है तुम उनका मददगार हरगिज़ किसी को न पाओगे (52)
क्या (दुनिया) की सल्तनत में कुछ उनका भी हिस्सा है कि इस वजह से लोगों को भूसी भर भी न देंगे (53)
यह ख़ुदा ने जो अपने फ़ज़ल से (तुम) लोगों को (कु़रान) अता फ़रमाया है
इसके रश्क पर जले जाते हैं (तो उसका क्या इलाज है) हमने तो इबराहीम की औलाद
को किताब और अक़्ल की बातें अता फ़रमायी हैं और उनको बहुत बड़ी सल्तनत भी
दी (54)
फिर कुछ लोग तो इस (किताब) पर ईमान लाए और कुछ लोगों ने उससे इन्कार
किया और इसकी सज़ा के लिए जहन्नुम की दहकती हुयी आग काफ़ी है (55)
(याद रहे) कि जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया उन्हें ज़रूर
अनक़रीब जहन्नुम की आग में झोंक देंगे (और जब उनकी खालें जल कर) जल जाएंगी
तो हम उनके लिए दूसरी खालें बदल कर पैदा करे देंगे ताकि वह अच्छी तरह अज़ाब
का मज़ा चखें बेशक ख़ुदा हरचीज़ पर ग़ालिब और हिकमत वाला है (56)
और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए हम उनको अनक़रीब ही
(बेहिश्त के) ऐसे ऐसे (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुँचाएंगे जिन के नीचे
नहरें जारी होंगी और उनमें हमेशा रहेंगे वहां उनकी साफ़ सुथरी बीवियाँ
होंगी और उन्हे घनी छाव में ले जाकर रखेंगे (57)
ऐ ईमानदारों ख़ुदा तुम्हें हुक्म देता है कि लोगों की अमानतें अमानत
रखने वालों के हवाले कर दो और जब लोगों के बाहमी झगड़ों का फै़सला करने लगो
तो इन्साफ़ से फै़सला करो (ख़ुदा तुमको) इसकी क्या ही अच्छी नसीहत करता है
इसमें तो शक नहीं कि ख़ुदा सबकी सुनता है (और सब कुछ) देखता है (58)
ऐ ईमानदारों ख़ुदा की इताअत करो और रसूल की और जो तुममें से साहेबाने
हुकूमत हों उनकी इताअत करो और अगर तुम किसी बात में झगड़ा करो बस अगर तुम
ख़ुदा और रोज़े आखि़रत पर इमान रखते हो तो इस अम्र में ख़ुदा और रसूल की
तरफ़ रूजू करो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है और अन्जाम की राह से बहुत
अच्छा है (59)
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों की (हालत) पर नज़र नहीं की जो ये ख़्याली
पुलाओ पकाते हैं कि जो किताब तुझ पर नाजि़ल की गयी और जो किताबें तुम से
पहले नाजि़ल की गयी (सब पर) ईमान लाए और दिली तमन्ना ये है कि सरकशों को
अपना हाकिम बनाएं हालांकि उनको हुक्म दिया गया कि उसकी बात न मानें और
शैतान तो यह चाहता है कि उन्हें बहका के बहुत दूर ले जाए (60)