आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
21 फ़रवरी 2026
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में कैथून के चिकित्सक एवं चिकित्सा कार्मिक हुए सम्मानित
जाम लगा तो गाड़ी रास्ते में पार्क,फिर ट्रेन से जाकर लिया नेत्रदान
जाम लगा तो गाड़ी रास्ते में पार्क,फिर ट्रेन से जाकर लिया नेत्रदान
लीला देवी गुप्ता की मृत्यु ने दूर किया नेत्रहीनों का अंधेरा, परिवार ने किया नेत्रदान-
जब
इरादे अटल होते हैं,तो बाधाएँ रास्ता रोक नहीं सकती, शनिवार को रामगंजमंडी
में लीला देवी गुप्ता के नेत्रदान के लिए कोटा से आई हुई शाइन इंडिया
फाउंडेशन की टीम जब दरा के जाम में फस गई, तो टीम के डॉ कुलवंत गौड़ 3
किलोमीटर पैदल चलकर दरा स्टेशन पर पहुंचें ,और ट्रेन से रामगंजमंडी पहुंचकर
नेत्रदान प्राप्त किया।
संस्था के नगर संयोजक संजय विजावत ने बताया
कि,एक विवाह समारोह में भारत विकास परिषद के सदस्य जितेंद्र गुप्ता एवं
उनकी धर्म पत्नी शकुंतला गुप्ता को ओम गुप्ता की पत्नी लीला देवी के निधन
का समाचार प्राप्त हुआ वहीं पर उनके साथ भवानीमंडी के नेत्रदान प्रभारी
कमलेश गुप्ता दलाल मौजूद थे, दोनों ने जब परिवार से नेत्रदान के लिए चर्चा
की तो समाजसेवी परिवार के द्वारा तुरंत नेत्रदान की सहमति प्राप्त हो गई ।
सूचना
मिलते ही कोटा से डॉ कुलवंत गौड़ ज्योति-रथ को लेकर रामगंजमंडी को रवाना हो
गए । परिवार के द्वारा पर्याप्त समय को देखते हुए दोपहर 4:00 बजे का अंतिम
संस्कार का समय निर्धारित किया हुआ था परंतु डॉ गौड़ की गाड़ी दरा के जाम
में फंस गई और समय निकलता जा रहा था, ऐसे में डॉ गौड़ 3 किलोमीटर पैदल चलकर
दरा रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से ट्रेन से समय पर रामगंजमंडी पहुंचकर
परिवार एवं उपस्थित समाज सदस्यों के सामने नेत्रदान प्रक्रिया संपादित करके
कॉर्निया प्राप्त किया तथा उसके बाद अंतिम यात्रा रवाना हुई।
नेत्रदान
प्रक्रिया में राधेश्याम गुप्ता, मोनु माहेश्वरी, प्रेमचंद गुप्ता इत्यादि
ने सहयोग किया। मोनू माहेश्वरी व संजय विजावत के अनुसार शाइन इंडिया
फाउंडेशन की लगातार कार्यशालाओं एवं जागरूकता गोष्ठियों के कारण अब
नेत्रदान विषय घर घर तक पहुंच गया है ,एवम शोक के समय परिवार से छोटे से
निवेदन पर ही नेत्रदान के लिए सहमति प्राप्त हो जाती है।
प्रेषक,
शाइन इंडिया फाउंडेशन,
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद केवल व्यक्ति नहीं आजाद भारत की साझा विरासत जीवित चेतना थे।
बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे
बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे (111)
और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खु़शख़बरी दी थी (112)
जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खु़द इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत
नाजि़ल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी
करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला (113)
और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए हैं (114)
और खु़द दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख़्त) मुसीबत से नजात दी (115)
और (फिरऔन के मुक़ाबले में) हमने उनकी मदद की तो (आखि़र) यही लोग ग़ालिब रहे (116)
और हमने उन दोनों को एक वाज़ेए उलम तालिब किताब (तौरेत) अता की (117)
और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई (118)
और बाद को आने वालों में उनका जि़क्रे ख़ैर बाक़ी रखा (119)
कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है (120)
20 फ़रवरी 2026
शोक की घड़ी में परिजनों ने संपन्न कराया नेत्रदान
शोक की घड़ी में परिजनों ने संपन्न कराया नेत्रदान
2. नेत्रदान कर,नाम सार्थक कर गए समाजसेवी सूरजमल बंसल
शहर के प्रमुख समाजसेवी,प्रबुद्ध व्यवसायी बूंदी सिलिका,कोटा निवासी सूरजमल बंसल का आज सुबह आकस्मिक निधन हो गया।
सहज,सरल
और विनम्र स्वभाव के सेवाभावी सूरजमल न सिर्फ अपने परिवार के लिए चहेते
थे, बल्कि शहर,समाज और पत्थर व्यापार मंडल के लिए भी वह हमेशा सभी के चहेते
रहे । धर्म कर्म में आस्था रखने वाले सूरजमल सेवा कार्यों में हमेशा
अग्रणी रहते थे।
अचानक हुई इस घटना से शहर में शोक की लहर आ
गयी,क्योंकि परिवार काफी समय से सामाजिक कार्यों में सदा अग्रणी रहा है,अतः
पुत्र कृष्णकांत ने स्व प्रेरणा से,माँ मानवती से सहमति लेकर नेत्रदान के
लिए सहमति दे दी।
सहमति के उपरांत डॉ कुलवंत गौड़ ने,बूंदी सिलिका स्थित निवास पर पहुंचकर सूरजमल के नेत्रदान प्रक्रिया सम्पन्न की ।