आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
28 जुलाई 2026
नेहा ने आज प्रेस कांफ्रेंस कर बड़ी बात और चौकाने वाली बातें बताई, बिहार के बेऊर जेल में बंद बिहार भर से 600 से ज्यादा छात्र छात्राओं से मिलने पहुंची थी जिसमें 300 छात्र छात्राएं ऐसे है जो नाबालिक है
ऐ ईमान वालों ख़ुदा से डरो जितना उससे डरने का हक़ है और तुम (दीन) इस्लाम के सिवा किसी और दीन पर हरगिज़ न मरना
और (भला) तुम क्योंकर काफि़र बन जाओगे हालांकि तुम्हारे सामने ख़ुदा की
आयतें (बराबर) पढ़ी जाती हैं और उसके रसूल (मोहम्मद) भी तुममें (मौजूद) हैं
और जो शख़्स ख़ुदा से वाबस्ता हो वह (तो) जरूर सीधी राह पर लगा दिया गया
(101)
ऐ ईमान वालों ख़ुदा से डरो जितना उससे डरने का हक़ है और तुम (दीन) इस्लाम के सिवा किसी और दीन पर हरगिज़ न मरना (102)
और तुम सब के सब (मिलकर) ख़ुदा की रस्सी मज़बूती से थामे रहो और आपस
में (एक दूसरे) के फूट न डालो और अपने हाल (ज़ार) पर ख़ुदा के एहसान को तो
याद करो जब तुम आपस में (एक दूसरे के) दुश्मन थे तो ख़ुदा ने तुम्हारे
दिलों में (एक दूसरे की) उलफ़त पैदा कर दी तो तुम उसके फ़ज़ल से आपस में
भाई भाई हो गए और तुम गोया सुलगती हुयी आग की भट्टी (दोज़ख) के लब पर
(खडे़) थे गिरना ही चाहते थे कि ख़ुदा ने तुमको उससे बचा लिया तो ख़ुदा
अपने एहकाम यू वाजे़ह करके बयान करता है ताकि तुम राहे रास्त पर आ जाओ
(103)
और तुमसे एक गिरोह ऐसे (लोगों का भी) तो होना चाहिये जो (लोगों को)
नेकी की तरफ़ बुलाए अच्छे काम का हुक्म दे और बुरे कामों से रोके और ऐसे ही
लोग (आख़ेरत में) अपनी दिली मुरादें पायेंगे (104)
औेर तुम (कहीं) उन लोगों के ऐसे न हो जाना जो आपस में फूट डाल कर बैठ
रहे और रौशन (दलील) आने के बाद भी एक मुँह एक ज़बान न रहे और ऐसे ही लोगों
के वास्ते बड़ा (भारी) अज़ाब है (105)
(उस दिन से डरो) जिस दिन कुछ यू लोगों के चेहरे तो सफेद नूरानी होंगे
और कुछ (लोगो) के चेहरे सियाह जिन लोगों के मुहॅ में कालिक होगी (उनसे कहा
जायेगा) हाए क्यों तुम तो इमान लाने के बाद काफि़र हो गए थे अच्छा तो (लो)
(अब) अपने कुफ्रकी सज़ा में अज़ाब (के मजे़) चखो (106)
और जिनके चेहरे पर नूर बरसता होगा वह तो ख़ुदा की रहमत (बहिश्त) में होंगे (और) उसी में सदा रहेंगे (107)
(ऐ रसूल) ये ख़ुदा की आयतें हैं जो हम तुमको ठीक (ठीक) पढ़ के सुनाते
हैं और ख़ुदा सारे जहांन के लोगों (से किसी) पर जु़ल्म करना नहीं चाहता
(108)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा ही का है और (आखि़र) सब कामों की रूज़ु ख़ुदा ही की तरफ़ है (109)
तुम क्या अच्छे गिरोह हो कि (लोगों की) हिदायत के वास्ते पैदा किये गए
हो तुम (लोगों को) अच्छे काम का हुक्म करते हो और बुरे कामों से रोकते हो
और ख़ुदा पर ईमान रखते हो और अगर एहले किताब भी (इसी तरह) ईमान लाते तो
उनके हक़ में बहुत अच्छा होता उनमें से कुछ ही तो इमानदार हैं और अक्सर
बदकार (110)
27 जुलाई 2026
छेड़छाड़ के मामले में कोटा ग्रामीण पुलिस के कनवास थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर सुरेश चंद शर्मा को सस्पेंड कर दिया
कोटा में बस यात्रा के दौरान एक युवती से छेड़छाड़ के मामले में कोटा ग्रामीण पुलिस के कनवास थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर सुरेश चंद शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया है। एसआई के खिलाफ नयापुरा थाने में छेड़छाड़ और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। डीएसपी पूनम चौहान ने बताया कि एसआई सुरेश चंद (57) अपने गांव से बस में कोटा आ रहे थे। उनके पास दो सीटें खाली थीं। बूंदी में एक युवती (18) और उसकी नानी भी उसी बस में सवार हुईं और उनके पास आकर बैठ गईं। तीनों कोटा आ रहे थे। आरोप है कि यात्रा के दौरान सुरेश चंद ने युवती से बातचीत शुरू की और बाद में उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। युवती का आरोप है कि आरोपी ने अपना हाथ धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ाने की कोशिश की। इस पर युवती ने विरोध करते हुए शोर मचाया, जिसके बाद दोनों के बीच कहासुनी भी हुई।
और (ऐ रसूल) एक वक़्त वो भी था जब तुम अपने बाल बच्चों से तड़के ही निकल खड़े हुए और मोमिनीन को लड़ाई के मोर्चों पर बिठा रहे थे और खुदा सब कुछ जानता औेर सुनता है
और (ऐ रसूल) एक वक़्त वो भी था जब तुम अपने बाल बच्चों से तड़के ही निकल
खड़े हुए और मोमिनीन को लड़ाई के मोर्चों पर बिठा रहे थे और खुदा सब कुछ
जानता औेर सुनता है (121)
ये उस वक़्त का वाक़या है जब तुममें से दो गिरोहों ने ठान लिया था कि
पसपाई करें और फिर (सॅभल गए) क्योंकि ख़ुदा तो उनका सरपरस्त था और मोमिनीन
को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिये (122)
यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की (बावजूद के) तुम (दुश्मन
के मुक़ाबले में) बिल्कुल बे हक़ीक़त थे (फिर भी) ख़ुदा ने फतेह दी (123)
बस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस
वक़्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि
तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे
हाँ (ज़रूर काफ़ी है) (124)
बल्कि अगर तुम साबित क़दम रहो और (रसूल की मुख़ालेफ़त से) बचो और
कुफ़्फ़ार अपने (जोश में) तुमपर चढ़ भी आये तो तुम्हारा परवरदिगार ऐसे
पांचहज़ार फ़रिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा जो निशाने जंग लगाए हुए डटे
होंगे और ख़ुदा ने ये मदद सिर्फ़ तुम्हारी ख़ुशी के लिए की है (125)
और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये तो ज़ाहिर है कि) मदद जब
होती है तो ख़ुदा ही की तरफ़ से जो सब पर ग़ालिब (और) हिकमत वाला है (126)
(और यह मदद की भी तो) इसलिए कि काफि़रों के एक गिरोह को कम कर दे या
ऐसा चैपट कर दे कि (अपना सा) मुँह लेकर नामुराद अपने घर वापस चले जायें
(127)
(ऐ रसूल) तुम्हारा तो इसमें कुछ बस नहीं चाहे ख़ुदा उनकी तौबा कु़बूल करे या उनको सज़ा दे क्योंकि वह ज़ालिम तो ज़रूर हैं (128)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब ख़ुदा ही का है
जिसको चाहे बख़्शे और जिसको चाहे सज़ा करे और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला
मेहरबान है (129)
ऐ ईमानदारों सूद दूनादून खाते न चले जाओ और ख़ुदा से डरो कि तुम छुटकारा पाओ (130)
26 जुलाई 2026
जवान बेटे ने की आत्महत्या, परिजनों ने संपन्न कराया नेत्रदान
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