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27 सितंबर 2026

कोटा की बॉक्सर अरुंधति चौधरी बनीं एशिया बॉक्सिंग कमेटी की निर्विरोध वाइस चेयरमैन

 

कोटा की बॉक्सर अरुंधति चौधरी बनीं एशिया बॉक्सिंग कमेटी की निर्विरोध वाइस चेयरमैन
कोटा। कोटा महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी की प्रतिभाशाली बॉक्सर अरुंधति चौधरी ने एशिया बॉक्सिंग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अरुंधती के कोच अशोक गौतम ने बताया कि चौधरी को एशिया बॉक्सिंग कमेटी का वाइस चेयरमैन निर्विरोध चुना गया है। चुनाव में उनकी प्रतिद्वंद्वी कजाकिस्तान की करीना इब्राहिमोवा ने अरुंधति के समर्थन में चुनाव से हटने का निर्णय लिया, जिसके बाद अरुंधति चौधरी निर्विरोध निर्वाचित हुईं।
4 वर्षों का होगा कार्यकाल.....अरुंधति के पिता व कोटा वूशु एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश चौधरी ने बताया कि उसका कार्यकाल चार वर्ष का रहेगा। वह 28 सितंबर को जापान के आइची-नागोया पहुंचकर पद की शपथ लेंगी।
एशिया में होने वाली बॉक्सिंग प्रतियोगिताओं को लेकर भी अब अरुंधति की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। अंतरराष्ट्रीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं से संबंधित विषयों पर पहले बैठक कर अरुंधति से चर्चा की जाएगी। यह जिम्मेदारी एशियाई बॉक्सिंग में उनके बढ़ते कद को दर्शाती है।
भारत के खिलाड़ियों को मिलेगा लाभ...अरुंधति चौधरी के इस महत्वपूर्ण पद पर पहुंचने से भारत के उभरते हुए बॉक्सिंग खिलाड़ियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। खिलाड़ियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों, प्रतियोगिताओं और बॉक्सिंग के विकास को लेकर उन्हें अपनी बात रखने का महत्वपूर्ण मंच मिलेगा।
अरुंधति चौधरी के निर्विरोध निर्वाचित होने पर बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया, राजस्थान बॉक्सिंग संघ, कोटा बॉक्सिंग संघ और महाबली स्पोर्ट्स अकादमी कोटा में खुशी की लहर है। खेल प्रेमियों और बॉक्सिंग जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी।
इस अवसर पर राजस्थान बॉक्सिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार निर्वाण, कोटा बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष धीरेंद्र चौधरी तथा चेयरमैन देवी सिंह, कोच सूरज गौतम , देवेंद्र मालव सहित खेल जगत से जुड़े लोगों ने अरुंधति चौधरी को शुभकामनाएं दीं।

सफाईकर्मियों को रोज चाय-नाश्ता, जरूरतमंदों के लिए हमेशा खुले दरवाजे… इंसानियत की मिसाल हैं मेल एक्सप्रेस ट्रेन मैनेजर रविन्द्र शर्मा

 

सफाईकर्मियों को रोज चाय-नाश्ता, जरूरतमंदों के लिए हमेशा खुले दरवाजे… इंसानियत की मिसाल हैं मेल एक्सप्रेस ट्रेन मैनेजर
रविन्द्र शर्मा
रेलवे की ड्यूटी के साथ समाजसेवा का जुनून, बिना भेदभाव हर जरूरतमंद की मदद; मिलनसार और हंसमुख स्वभाव से मोहल्ले से लेकर समाज तक में बनाई खास पहचान
के. डी. अब्बासी
कोटा। किसी की मदद के लिए आगे बढ़ना, हर चेहरे पर मुस्कान लाना और बिना किसी भेदभाव के इंसानियत का रिश्ता निभाना ही सच्ची समाजसेवा है। इसी भावना को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाकर चल रहे हैं रेलवे के मेल एक्सप्रेस ट्रेन मैनेजर रविन्द्र शर्मा। मिलनसार, हंसमुख, निडर, धार्मिक और मददगार व्यक्तित्व के धनी शर्मा अपने सेवाभाव और आत्मीय व्यवहार से लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए हैं। उनके लिए समाजसेवा कोई दिखावा नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है।
सफाईकर्मियों के सम्मान में रोज सजती है चाय-नाश्ते की मेज
रविन्द्र शर्मा के सेवाभाव की सबसे अनूठी मिसाल उनके मोहल्ले में देखने को मिलती है। रोजाना बिना नागा सफाई करने आने वाले कर्मचारियों के लिए वे चाय-नाश्ते की व्यवस्था करते हैं। सफाईकर्मियों को केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानकर उनका सम्मान करते हैं।
उनका यह छोटा-सा लेकिन दिल छू लेने वाला प्रयास समाज को बड़ा संदेश देता है कि इंसान की पहचान उसके पद या काम से नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व और कर्मों से होती है। समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी मदद करना और उसे अपनापन देना ही रविन्द्र शर्मा की असली पहचान है।
हर सुख-दुख में साथ, बिना भेदभाव मदद के लिए तत्पर
शर्मा का स्वभाव ऐसा है कि जो भी उनके संपर्क में आता है, वह उनसे आत्मीयता महसूस करता है। जरूरतमंद हो या परिचित, हर किसी की परेशानी को अपनी परेशानी समझकर समाधान के लिए प्रयास करना उनकी आदत में शुमार है। धार्मिक उत्सवों और सामाजिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेना, लोगों को साथ लेकर चलना और समाज में प्रेम-सद्भाव बनाए रखना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा है।
उनकी नजर में समाजसेवा के लिए न कोई जाति का बंधन है, न धर्म का और न ही किसी बड़े-छोटे का भेद। यही वजह है कि वे विभिन्न वर्गों के लोगों के बीच सम्मान और विश्वास के पात्र बने हुए हैं।
1990 में शुरू हुआ रेलवे का सफर, आज भी रेलकर्मियों की आवाज बने है,
हरियाणा के रेवाड़ी में जन्मे रविन्द्र शर्मा के पिता स्वर्गीय मनोहर लाल शर्मा का निधन उस समय हो गया था, जब वे महज 10 वर्ष के थे। कम उम्र में पिता का साया उठ जाने के बाद भी उन्होंने मेहनत, लगन और संघर्ष के साथ जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता चुना।
उनकी शिक्षा नदबई के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने बीजीएमसी, कोटा यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1990 में ट्रेन क्लर्क के रूप में रेलवे में उनकी पहली पोस्टिंग हुई। अपने सेवाकाल में आगे बढ़ते हुए आज वे कोटा में मेल एक्सप्रेस ट्रेन मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं।
रेलवे की व्यस्त जिम्मेदारियों के बावजूद समाजसेवा के प्रति उनका समर्पण कम नहीं हुआ। रेल मजदूर संघ में सहायक मंडल सचिव के पद पर रहते हुए वे रेल कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान और उनके हितों के लिए सक्रिय भूमिका निभाते हैं। रेलकर्मियों की आवाज उठाना और उनकी समस्याओं को संबंधित स्तर तक पहुंचाना भी उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
परिवार में संस्कार, जीवन में सेवा और साहित्य से लगाव
रविन्द्र शर्मा के व्यक्तित्व में सामाजिक सरोकारों के साथ धार्मिक आस्था और साहित्य के प्रति रुचि भी झलकती है। धार्मिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। खाली समय में साहित्य पढ़ना और शतरंज खेलना उन्हें पसंद है।
पारिवारिक जीवन में भी उन्होंने बच्चों को शिक्षा और संस्कारों से जोड़कर आगे बढ़ाया है। उनके बेटे मैकिंज़ी कंपनी में टाउन प्लानर कंसल्टेंट हैं और बहू फिजियोथैरेपी डॉक्टर हैं। बेटी गौरवी शर्मा प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़ी हैं, जबकि दामाद बैंक में मैनेजर हैं।
रविन्द्र शर्मा का व्यक्तित्व बताता है कि असली सम्मान पद से नहीं, बल्कि उस व्यवहार से मिलता है, जो दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाए। सफाईकर्मियों को रोज चाय-नाश्ता कराना हो, जरूरतमंद की मदद करना हो या रेलकर्मियों की समस्या के लिए आवाज उठाना—हर जगह उनका सेवाभाव दिखाई देता है। समाज के हर वर्ग को अपना समझने और बिना किसी भेदभाव के प्यार बांटने की यही सोच उन्हें लोगों के दिलों में खास स्थान दिलाती है।

कोटा स्टेशन के प्लेटफॉर्म-3 का होगा पुनर्विकास, कई ट्रेनों के प्लेटफॉर्म बदलेंगे,चार ट्रेनें कोटा नहीं आएंगी, सोगरिया होकर चलेंगी; तीन ट्रेनें सोगरिया तक और एक वहीं से होगी रवाना

 

कोटा स्टेशन के प्लेटफॉर्म-3 का होगा पुनर्विकास, कई ट्रेनों के प्लेटफॉर्म बदलेंगे,चार ट्रेनें कोटा नहीं आएंगी, सोगरिया होकर चलेंगी; तीन ट्रेनें सोगरिया तक और एक वहीं से होगी रवाना
कोटा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-3 पर जल्द ही प्रमुख पुनर्विकास कार्य शुरू करने की तैयारी है। सक्षम स्वीकृति मिलने के बाद कार्य के लिए ब्लॉक की तिथि और अवधि घोषित की जाएगी। इस दौरान प्लेटफॉर्म-3 ट्रेनों के आवागमन के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा। ऐसे में यात्रियों को असुविधा न हो, इसके लिए रेलवे ने ट्रेनों के संचालन में होने वाले संभावित बदलाव की अग्रिम योजना तैयार की है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने बताया कि ब्लॉक के दौरान प्लेटफॉर्म-3 पर आने वाली ट्रेनों को आवश्यकता और उपलब्धता के अनुसार प्लेटफॉर्म संख्या 4, 2, 1, 1-ए अथवा अन्य उपलब्ध प्लेटफॉर्म से संचालित किया जाएगा। चार ट्रेनें कोटा स्टेशन नहीं आएंगी: ब्लॉक अवधि में गाड़ी संख्या 14813 जोधपुर-भोपाल, 14814 भोपाल-जोधपुर, 12181 जबलपुर-अजमेर और 12182 अजमेर-जबलपुर को परिवर्तित मार्ग से सोगरिया होकर चलाने की योजना है। ये चारों ट्रेनें इस दौरान कोटा स्टेशन नहीं आएंगी। सोगरिया से बदलेगा चार ट्रेनों का संचालन: गाड़ी संख्या 19812 इटावा-कोटा, 22984 इंदौर-कोटा और 61634 बीना-कोटा को कोटा के बजाय सोगरिया स्टेशन पर यात्रा समाप्त कराने की योजना है। वहीं गाड़ी संख्या 61633 कोटा-बीना को कोटा के बजाय सोगरिया स्टेशन से रवाना किया जाएगा। रेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह यात्रियों को पहले से सतर्क और यात्रा की योजना बनाने में मदद करने के लिए अग्रिम सूचना है। ब्लॉक की तिथि एवं अवधि तय होने के बाद प्रभावित ट्रेनों और प्लेटफॉर्म संबंधी विस्तृत सूचना अलग से जारी की जाएगी। यात्रियों से अनुरोध है कि ब्लॉक अवधि में स्टेशन आने से पहले एनटीईएस, रेल मदद 139 अथवा स्टेशन सूचना प्रणाली से अपनी ट्रेन और प्लेटफॉर्म की अद्यतन जानकारी अवश्य जांच लें।

(ऐ रसूल) तुम से लोग अनफाल (माले ग़नीमत) के बारे में पूछा करते हैं तुम कह दो कि अनफाल मख़सूस ख़ुदा और रसूल के वास्ते है तो ख़़ुदा से डरो (और) अपने बाहमी (आपसी) मामलात की असलाह करो और अगर तुम सच्चे (ईमानदार) हो तो ख़़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो

 

08 सूरए अनफ़ाल
सूरए अनफ़ाल मदीना में नाजि़ल हुआ और इसमें पच्हत्तर (75) आयतें हैं
ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
(ऐ रसूल) तुम से लोग अनफाल (माले ग़नीमत) के बारे में पूछा करते हैं तुम कह दो कि अनफाल मख़सूस ख़ुदा और रसूल के वास्ते है तो ख़़ुदा से डरो (और) अपने बाहमी (आपसी) मामलात की असलाह करो और अगर तुम सच्चे (ईमानदार) हो तो ख़़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो (1)
सच्चे ईमानदार तो बस वही लोग हैं कि जब (उनके सामने) ख़़ुदा का जि़क्र किया जाता है तो उनके दिल हिल जाते हैं और जब उनके सामने उसकी आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनके इमान को और भी ज़्यादा कर देती हैं और वह लोग बस अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं (2)
नमाज़ को पाबन्दी से अदा करते हैं और जो हम ने उन्हें दिया हैं उसमें से (राहे ख़़ुदा में) ख़र्च करते हैं (3)
यही तो सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के लिए उनके परवरदिगार के हाँ (बड़े बड़े) दरजे हैं और बक्शीश और इज़्ज़त और आबरू के साथ रोज़ी है (ये माले ग़नीमत का झगड़ा वैसा ही है) (4)
जिस तरह तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें बिल्कुल ठीक (मसलहत से) तुम्हारे घर से (जंग बदर) में निकाला था और मोमिनीन का एक गिरोह (उससे) नाखुष था (5)
कि वह लोग हक़ के ज़ाहिर होने के बाद भी तुमसे (ख़्वाह माख़्वाह) सच्ची बात में झगड़तें थें और इस तरह (करने लगे) गोया (ज़बरदस्ती) मौत के मुँह में ढकेले जा रहे हैं (6)
और उसे (अपनी आँखों से) देख रहे हैं और (ये वक़्त था) जब ख़़ुदा तुमसे वायदा कर रहा था कि (कुफ्फार मक्का) दो जमाअतों में से एक तुम्हारे लिए ज़रूरी हैं और तुम ये चाहते थे कि कमज़ोर जमाअत तुम्हारे हाथ लगे (ताकि बग़ैर लड़े भिड़े माले ग़नीमत हाथ आ जाए) और ख़ुदा ये चाहता था कि अपनी बातों से हक़ को साबित (क़दम) करें और काफिरों की जड़ काट डाले (7)
ताकि हक़ को (हक़) साबित कर दे और बातिल का मिटियामेट कर दे अगर चे गुनाहगार (कुफ्फार उससे) नाखुश ही क्यों न हो (8)
(ये वह वक़्त था) जब तुम अपने परवदिगार से फरियाद कर रहे थे उसने तुम्हारी सुन ली और जवाब दे दिया कि मैं तुम्हारी लगातार हज़ार फरिष्तों से मदद करूँगा (9)
और (ये इमदाद ग़ैबी) ख़़ुदा ने सिर्फ तुम्हारी ख़ातिर (ख़ुशी) के लिए की थी और तुम्हारे दिल मुतमइन हो जाय और (याद रखो) मदद ख़़ुदा के सिवा और कहीं से (कभी) नहीं होती बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है (10)

26 सितंबर 2026

वो झुंड में चुगते कबूतर,

वो झुंड में चुगते कबूतर,
वो झुंड में उड़ते कबूतर,
वो ठंडी हवा,
नदी की लहरों का धीमा-सा शोर,
दाने पर अचानक टूट पड़ती
मछलियों की वो बेचैन-सी भीड़…
वो पुल,
वो बाँध,
वो बंद होते-बुलाते दरवाज़े,
वो मटमैली-सी,
धूल में सनी सीढ़ियाँ—
हाँ, सब याद है मुझे।
मगर तुम्हें…
तुम्हें तो शायद इनमें से कुछ भी याद नहीं।
तुम्हें तो अभी बहुत कुछ देखना है,
बहुत दूर जाना है,
बहुत-सी खूबसूरत मंज़िलों को
अपनी आँखों में भरना है।
तो फिर…
तुम क्यों याद रखो
इन छोटी-छोटी बातों को?
तुम्हारा यह विराम नहीं,
यह आराम नहीं—
बस सफ़र थोड़ा लंबा है,
रास्ता थोड़ा मुश्किल है।
इसलिए फिक्र रहेगी तुम्हारी…
ज़रा सँभलकर,
ज़रा एहतियात से चलना।
और हाँ—
क्यों याद रखो तुम
वो मटमैली-सी सीढ़ियाँ,
वो धूल से अटी राहें,
दाना चुगते कबूतर,
हवा में फड़फड़ाते उनके पर,
नदी की लहरें
और पानी पर झुकता हुआ वो पुल…
क्यों याद रखो तुम?
शायद इसलिए कि
कुछ जगहें रास्तों में नहीं होतीं,
वे इंसान के भीतर बस जाती हैं।
और कुछ सफ़र
मंज़िल तक पहुँचकर भी ख़त्म नहीं होते—
वे यादों में चलते रहते हैं।
हाँ…
क्यों याद रखो तुम?
याद तो मुझे रखना है।
तुम्हें नहीं।
— अख़्तर
 

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