आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
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कोटा विश्वविद्यालय में मानवता की मिसाल: भूगोल सम्मेलन में लगा नेत्रदान-अंगदान- देहदान का स्टॉल, 23 छात्रों ने भरे नेत्रदान संकल्प पत्र
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कोटा, 17 सितंबर। ICSSR द्वारा प्रायोजित राजस्थान भूगोल परिषद (RGA) के 52वें राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के अवसर पर कोटा विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष मानवता का स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहा।
"विकसित भारत 2047 - एक भौगोलिक दृष्टिकोण" विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में जहाँ देशभर के भूगोलवेत्ता विकसित भारत की रूपरेखा पर मंथन कर रहे थे, वहीं शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा द्वारा नेत्रदान, अंगदान और देहदान जागरूकता के लिए स्टॉल लगाकर विकसित भारत के लिए सबसे जरूरी - मानवीय दृष्टिकोण की अलख जगाई गई।
सम्मेलन में पधारे मुख्य अतिथि श्री हनुमान सिंह राठौड़, मुख्य वक्ता प्रो. एच.एस. शर्मा, कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत सहित सभी फैकल्टी, प्रोफेसर्स और छात्र-छात्राओं ने स्टॉल पर पहुंचकर जानकारी ली।
युवाओं में दिखा जबरदस्त उत्साह:
इस अवसर पर युवाओं में सेवा भाव का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला।
कुल 23 विद्यार्थियों ने नेत्रदान के संकल्प पत्र भरकर मृत्यु के बाद भी दो लोगों की जिंदगी में रोशनी बनने का प्रण लिया, वहीं 12 युवाओं ने अंगदान का संकल्प लेकर मानवता की सबसे बड़ी सेवा के लिए हाथ बढ़ाया।
फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने बताया कि "विकसित भारत सिर्फ सड़कों और इमारतों से नहीं बनेगा, बल्कि तब बनेगा जब युवा मृत्यु के बाद भी जीवन देने की सोच रखेगा। कोटा विश्वविद्यालय के छात्रों ने आज यह साबित कर दिया।"
कार्यक्रम में प्रो. संतोष आनंद (अध्यक्ष RGA), प्रो. एस.एस. भट्ट (महासचिव RGA) सहित आयोजन मंडल ने इस पहल की सराहना की।
या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो बाप दादाओं ही ने पहले शिर्क किया था और हम तो उनकी औलाद थे (कि) उनके बाद दुनिया में आए तो क्या हमें उन लेागों के ज़ुर्म की सज़ा में हलाक करेगा जो पहले ही बातिल कर चुके
तो (ऐ रसूल यहूद को याद दिलाओ) जब हम ने उन (के सरों) पर पहाड़ को इस तरह लटका दिया कि गोया साएबान (छप्पर) था और वह लोग समझ चुके थे कि उन पर अब गिरा और हमने उनको हुक्म दिया कि जो कुछ हमने तुम्हें अता किया है उसे मज़बूती से पकड़ लो और जो कुछ उसमें लिखा है याद रखो ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ (171)
और उसे रसूल वह वक़्त भी याद (दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने आदम की औलाद से बस्तियों से (बाहर निकाल कर) उनकी औलाद से खुद उनके मुक़ाबले में एक़रार कर लिया (पूछा) कि क्या मैं तुम्हारा परवरदिगार नहीं हूँ तो सब के सब बोले हाँ हम उसके गवाह हैं ये हमने इसलिए कहा कि ऐसा न हो कहीं तुम क़यामत के दिन बोल उठो कि हम तो उससे बिल्कुल बे ख़बर थे (172)
या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो बाप दादाओं ही ने पहले शिर्क किया था और हम तो उनकी औलाद थे (कि) उनके बाद दुनिया में आए तो क्या हमें उन लेागों के ज़ुर्म की सज़ा में हलाक करेगा जो पहले ही बातिल कर चुके (173)
और हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं और ताकि वह लोग (अपनी ग़लती से) बाज़ आए (174)
और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्स का हाल पढ़ कर सुना दो जिसे हमने अपनी आयतें अता की थी फिर वह उनसे निकल भागा तो शैतान ने उसका पीछा पकड़ा और आखि़रकार वह गुमराह हो गया (175)
और अगर हम चाहें तो हम उसे उन्हें आयतों की बदौलत बुलन्द मरतबा कर देते मगर वह तो ख़ुद ही पस्ती (नीचे) की तरफ झुक पड़ा और अपनी नफसानी ख़्वाहिश का ताबेदार बन बैठा तो उसकी मसल है कि अगर उसको धुत्कार दो तो भी ज़बान निकाले रहे और उसको छोड़ दो तो भी ज़बान निकले रहे ये मसल उन लोगों की है जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो (ऐ रसूल) ये कि़स्से उन लोगों से बयान कर दो ताकि ये लोग खुद भी ग़ौर करें (176)
जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया है उनकी भी क्या बुरी मसल है और अपनी ही जानों पर सितम ढाते रहे (177)
राह पर बस वही शख़्स है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे और जिनको गुमराही में छोड़ दे तो वही लोग घाटे में हैं (178)
और गोया हमने (ख़ुदा) बहुतेरे जिन्नात और आदमियों को जहन्नुम के वास्ते पैदा किया और उनके दिल तो हैं (मगर कसदन) उन से देखते ही नहीं और उनके कान भी है (मगर) उनसे सुनने का काम ही नहीं लेते (खुलासा) ये लोग गोया जानवर हैं बल्कि उनसे भी कहीं गए गुज़रे हुए यही लोग (अमूर हक़) से बिल्कुल बेख़बर हैं (179)
और अच्छे (अच्छे) नाम ख़ुदा ही के ख़ास हैं तो उसे उन्हीं नामों में पुकारो और जो लेाग उसके नामों में कुफ्र करते हैं उन्हें (उनके हाल पर) छोड़ दो और वह बहुत जल्द अपने करतूत की सज़ाए पाएगें (180)
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