आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
12 मार्च 2026
15वें दीक्षांत समारोह में 9237 डिग्रियों, 1 कुलाधिपति एवं 1 कुलपति स्वर्ण पदक सहित कुल 29 स्वर्ण पदक बांटे
निगम ने सीज किए दो मैरिज गार्डन, तीन शो रूम* -यूडी टैक्स जमा नहीं करवाने पर कार्रवाई
अगर खु़दा किसी को (अपना) बेटा बनाना चाहता तो अपने मख़लूक़ात में से जिसे चाहता मुन्तखिब कर लेता (मगर) वह तो उससे पाक व पाकीज़ा है वह तो यकता बड़ा ज़बरदस्त अल्लाह है
खु़दा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
(इस) किताब (क़ुरान) का नाजि़ल करना उस खु़दा की बारगाह से है जो (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है (1)
(ऐ रसूल) हमने किताब (कु़रान) को बिल्कुल ठीक नाजि़ल किया है तो तुम इबादत को उसी के लिए निरा खुरा करके खु़दा की बन्दगी किया करो (2)
आगाह रहो कि इबादत तो ख़ास खु़दा ही के लिए है और जिन लोगों ने खु़दा के सिवा (औरों को अपना) सरपरस्त बना रखा है और कहते हैं कि हम तो उनकी परसतिश सिर्फ़ इसलिए करते हैं कि ये लोग खु़दा की बारगाह में हमारा तक़र्रब बढ़ा देगें इसमें शक नहीं कि जिस बात में ये लोग झगड़ते हैं (क़यामत के दिन) खु़दा उनके दरम्यिान इसमें फै़सला कर देगा बेशक खु़दा झूठे नाशुक्रे को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता (3)
अगर खु़दा किसी को (अपना) बेटा बनाना चाहता तो अपने मख़लूक़ात में से जिसे चाहता मुन्तखिब कर लेता (मगर) वह तो उससे पाक व पाकीज़ा है वह तो यकता बड़ा ज़बरदस्त अल्लाह है (4)
उसी ने सारे आसमान और ज़मीन को बजा (दुरूस्त) पैदा किया वही रात को दिन पर ऊपर तले लपेटता है और वही दिन को रात पर तह ब तह लपेटता है और उसी ने आफताब और महताब को अपने बस में कर लिया है कि ये सबके सब अपने (अपने) मुक़रर्र वक़्त चलते रहेगें आगाह रहो कि वही ग़ालिब बड़ा बख़्शने वाला है (5)
उसी ने तुम सबको एक ही शख़्स से पैदा किया फिर उस (की बाक़ी मिट्टी) से उसकी बीबी (हौव्वा) को पैदा किया और उसी ने तुम्हारे लिए आठ कि़स्म के चारपाए पैदा किए वही तुमको तुम्हारी माँओं के पेट में एक कि़स्म की पैदाइश के बाद दूसरी कि़स्म (नुत्फे जमा हुआ खू़न लोथड़ा) की पैदाइश से तेहरे तेहरे अँधेरों (पेट) रहम और झिल्ली में पैदा करता है वही अल्लाह तुम्हारा परवरदिगार है उसी की बादशाही है उसके सिवा माबूद नहीं तो तुम लोग कहाँ फिरे जाते हो (6)
अगर तुमने उसकी नाशुक्री की तो (याद रखो कि) खु़दा तुमसे बिल्कुल बेपरवाह है और अपने बन्दों से कुफ्र और नाशुक्री को पसन्द नहीं करता और अगर तुम शुक्र करोगे तो वह उसको तुम्हारे वास्ते पसन्द करता है और (क़यामत में) कोई किसी (के गुनाह) का बोझ (अपनी गर्दन पर) नहीं उठाएगा फिर तुमको अपने परवरदिगार की तरफ लौटना है तो (दुनिया में) जो कुछ (भला बुरा) करते थे वह तुम्हें बता देगा वह यक़ीनन दिलों के राज़ (तक) से खू़ब वाकि़फ है (7)
और आदमी (की हालत तो ये है कि) जब उसको कोई तकलीफ पहुँचती है तो उसी की तरफ रूझू करके अपने परवरदिगार से दुआ करता है (मगर) फिर जब खु़दा अपनी तरफ से उसे नेअमत अता फ़रमा देता है तो जिस काम के लिए पहले उससे दुआ करता था उसे भुला देता है और बल्कि खु़दा का शरीक बनाने लगता है ताकि (उस ज़रिए से और लोगों को भी) उसकी राह से गुमराह कर दे (ऐ रसूल ऐसे शख़्स से) कह दो कि थोड़े दिनों और अपने कुफ्र (की हालत) में चैन कर लो (8)
(आखि़र) तू यक़ीनी जहन्नुमियों में होगा क्या जो शख़्स रात के अवक़ात में सजदा करके और खड़े-खड़े (खु़दा की) इबादत करता हो और आख़ेरत से डरता हो अपने परवरदिगार की रहमत का उम्मीदवार हो (नाशुक्रे) काफिर के बराबर हो सकता है (ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि भला कहीं जानने वाले और न जाननेवाले लोग बराबर हो सकते हैं (मगर) नसीहत इबरतें तो बस अक़्लमन्द ही लोग मानते हैं (9)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे ईमानदार बन्दों अपने परवरदिगार (ही) से डरते रहो (क्योंकि) जिन लोगों ने इस दुनिया में नेकी की उन्हीं के लिए (आख़ेरत में) भलाई है और खु़दा की ज़मीन तो कुशादा है (जहाँ इबादत न कर सको उसे छोड़ दो) सब्र करने वालों ही की तो उनका भरपूर बेहिसाब बदला दिया जाएगा (10)
11 मार्च 2026
शीतला अष्टमी पर हुआ निधन,पुत्रों ने संपन्न कराया नेत्रदान
शीतला अष्टमी पर हुआ निधन,पुत्रों ने संपन्न कराया नेत्रदान
2. साली की शादी बीच में छोड़,रात 2:30 बजे कोटा से आयी टीम ने लिया नेत्रदान
देर
रात एक बजे,तिलक चौक,बूंदी निवासी स्व० मदनलाल जैन एडवोकेट की धर्मपत्नी
खानी बाई जैन का आकस्मिक निधन हुआ। धर्म कर्म में आस्था रखने वाली खानी बाई
नेत्रदान की प्रबल समर्थक थी पोते डॉ मोहित जैन को भी उन्होंने अपने
नेत्रदान करवाने की सहमति दे रखी थी ।
देर रात 1:00 बजे जब यह दुखद
घटना घटी, तो उन्होंने तुरंत ही संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति
मित्र इदरीस बोहरा को सूचना कर दादी मां के नेत्रदान करवाने के लिए कहा ।
इदरीस
की सूचना पर कोटा से,ईबीएसआर-बीबी चैप्टर के कोऑर्डिनेटर, डॉ कुलवंत गौड़
नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ स्वयं चलाकर 40 किलोमीटर दूर बूंदी पहुंचे और
देर रात 2:00 बजे परिवार के सभी सदस्यों के बीच नेत्रदान का कार्य संपन्न
किया । सूचना के दौरान डॉ गौड़, अपनी साली गौरक्षा दाधीच की शादी समारोह
में मौजूद थे,वहीं से सीधा नेत्रदान लेने बूंदी पहुंचे ।
नेत्रदान
के इस पुनीत कार्य में,खानी बाई के बेटे जैनेन्द्र,ओमप्रकाश, कमल
कुमार,राजकुमार का पूरा सहयोग रहा । नेत्रदान के बारे में अधिक जानकारी
देते हुए डॉ गौड़ में बताया कि, गर्मियों के दिनों में अब जरूरी सावधानी यह
रखना है कि, आँखों को पूरी तरह बंद कर,उनपर रखने वाले गीले रुमाल को हर
आधे घंटे में बदलते रहे ।
(वह बहस ये थी कि) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं गीली मिट्टी से एक आदमी बनाने वाला हूँ
(वह बहस ये थी कि) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं गीली मिट्टी से एक आदमी बनाने वाला हूँ (71)
तो जब मैं उसको दुरूस्त कर लूँ और इसमें अपनी (पैदा) की हुयी रूह फूँक दो तो तुम सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना (72)
तो सब के सब कुल फरिश्तों ने सजदा किया (73)
मगर (एक) इबलीस ने कि वह शेख़ी में आ गया और काफिरों में हो गया (74)
ख़ुदा ने (इबलीस से) फरमाया कि ऐ इबलीस जिस चीज़ को मैंने अपनी ख़ास
कु़दरत से पैदा किया (भला) उसको सजदा करने से तुझे किसी ने रोका क्या तूने
तक़ब्बुर किया या वाकई तू बड़े दरजे वालें में है (75)
इबलीस बोल उठा कि मैं उससे बेहतर हूँ तूने मुझे आग से पैदा किया और इसको तूने गीली मिट्टी से पैदा किया (76)
(कहाँ आग कहाँ मिट्टी) खु़दा ने फरमाया कि तू यहाँ से निकल (दूर हो) तू यक़ीनी मरदूद है (77)
और तुझ पर रोज़ जज़ा (क़यामत) तक मेरी फिटकार पड़ा करेगी (78)
शैतान ने अज्र की परवरदिगार तू मुझे उस दिन तक की मोहलत अता कर जिसमें सब लोग (दोबारा) उठा खड़े किए जायेंगे(79)
फरमाया तुझे एक वक़्त मुअय्यन के दिन तक की मोहलत दी गयी (80)
वह बोला तेरी ही इज़्ज़त व जलाल की क़सम (81)
उनमें से तेरे ख़ालिस बन्दों के सिवा सब के सब को ज़रूर गुमराह करूँगा (82)
खु़दा ने फरमाया तो (हम भी) हक़ बात (कहे देते हैं) (83)
और मैं तो हक़ ही कहा करता हूँ (84)
कि मैं तुझसे और जो लोग तेरी ताबेदारी करेंगे उन सब से जहन्नुम को ज़रूर भरूँगा (85)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो तुमसे न इस (तबलीग़े रिसालत) की मज़दूरी माँगता हूँ और न मैं (झूठ मूठ) बनावट करने वाला हूँ (86)
ये (क़ुरान) तो बस सारे जहाँन के लिए नसीहत है (87)
और कुछ दिनों बाद तुमको इसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी (88)