शाइन इंडिया के पायलेट प्रोजेक्ट मिशन सबल भारत की शुरुआत, विद्यार्थियों की नि:शुल्क जांच शुरू
2. चिकित्सा शिविर में आँख और दांतों की समस्या से ग्रसित मिले विद्यार्थी
"मुस्कान भी तब ही अच्छी ,जब दाँत हो साफ़ और आँखों में रोशनी अच्छी..."
स्वस्थ,समृद्ध भारत व अंधत्व निवारण के केंद्र सरकार के अभियान में सहयोग देने के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा, कोटा शहर के राजकीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की आंखों की नि:शुल्क जांच एवं नि:शुल्क चश्मा वितरण के साथ-साथ उनका नि:शुल्क दंत परीक्षण किया गया।
संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ में बताया कि, शाइन इंडिया फाउंडेशन के दो माह के पायलट प्रोजेक्ट, मिशन सबल भारत के तहत आगामी दो माह में, संस्था के द्वारा राजकीय विद्यालयों में कक्षा 8 से 12 के छात्र-छात्राओं का नि:शुल्क नेत्र एवं दंत चिकित्सा परीक्षण किया गया,साथ ही दृष्टि दोष युक्त चयनित बच्चों को नि:शुल्क चश्मा का वितरण भी किया गया।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत विज्ञान नगर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में ऑप्टोमेट्रिस्ट जी डी गुप्ता के सहयोग से बच्चों में दृष्टि दोष की जांच की गई,और दंत चिकित्सक डॉ ज्योति चौरसिया ने बच्चों के दांतों की जाँच की, और बच्चों को सही तरह से दांतों की देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।
प्रधानाचार्य अनीता शर्मा ने अंत में संस्था सदस्यों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि,सही उम्र में सही इलाज मिलने से, काफी हद तक कम उम्र में होने वाली अंधता को रोका जा सकता है। अच्छे आत्मविश्वास और अच्छी लीडरशिप के लिए, जीवन में आगे बढ़ने के लिए मन और शरीर दोनों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है।
डॉ ज्योति ने कहा कि,जब चेहरे पर अच्छी मुस्कान रहेगी और आँखों में अच्छी रोशनी रहेगी, तो बच्चे में अपने आप ही एक अच्छा कॉन्फिडेंस दिखेगा। ऐसा बच्चा न सिर्फ स्कूल में अच्छा स्कोर करेगा, बल्कि जीवन में भी बहुत अच्छे कार्य कर सकेगा।
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
30 अक्टूबर 2026
शाइन इंडिया के पायलेट प्रोजेक्ट मिशन सबल भारत की शुरुआत, विद्यार्थियों की नि:शुल्क जांच शुरू
(ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं
(ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं (101)
तो ये लोग भी उन्हें सज़ाओं के मुन्तिज़र (इन्तजार में) हैं जो उनसे क़ब्ल (पहले) वालो पर गुज़र चुकी हैं (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अच्छा तुम भी इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ यक़ीनन इन्तज़ार करता हूँ (102)
फिर (नुज़ूले अज़ाब के वक़्त) हम अपने रसूलों को और जो लोग ईमान लाए उनको (अज़ाब से) तलूउ बचा लेते हैं यूँ ही हम पर लाजि़म है कि हम इमान लाने वालों को भी बचा लें (103)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर तुम लोग मेरे दीन के बारे में शक में पड़े हो तो (मैं भी तुमसे साफ कहें देता हूँ) ख़़ुदा के सिवा तुम भी जिन लेागों की परसतिश करते हो मै तो उनकी परसतिश नहीं करने का मगर (हाँ) मै उस ख़ुदा की इबादत करता हूँ जो तुम्हें (अपनी कुदरत से दुनिया से) उठा लेगा और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मोमिन हूँ (104)
और (मुझे) ये भी (हुक्म है) कि (बातिल) से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ कायम रख और मुशरेकीन से हरगिज़ न होना (105)
और ख़ुदा को छोड़ ऐसी चीज़ को पुकारना जो न तुझे नफा ही पहुँचा सकती हैं न नुक़सान ही पहुँचा सकती है तो अगर तुमने (कहीं ऐसा) किया तो उस वक़्त तुम भी ज़ालिमों में (षुमार) होगें (106)
और (याद रखो कि) अगर ख़ुदा की तरफ से तुम्हें कोई बुराई छू भी गई तो फिर उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं होगा और अगर तुम्हारे साथ भलाई का इरादा करे तो फिर उसके फज़ल व करम का लपेटने वाला भी कोई नहीं वह अपने बन्दों में से जिसको चाहे फायदा पहुँचाएँ और वह बड़ा बख़्षने वाला मेहरबान है (107)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ लोगों तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) आ चुका फिर जो शख़्स सीधी राह पर चलेगा तो वह सिर्फ अपने ही दम के लिए हिदायत एख़्तेयार करेगा और जो गुमराही एख़्तेयार करेगा वह तो भटक कर कुछ अपना ही खोएगा और मैं कुछ तुम्हारा जि़म्मेदार तो हूँ नहीं (108)
और (ऐ रसूल) तुम्हारे पास जो ‘वही’ भेजी जाती है तुम बस उसी की पैरवी करो और सब्र करो यहाँ तक कि ख़ुदा तुम्हारे और काफिरों के दरम्यिान फैसला फरमाए और वह तो तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है (109)
29 अक्टूबर 2026
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