आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
24 मार्च 2026
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श्रद्धांजलि सभा में,देहदानियों को मिले राजकीय सम्मान पर हस्ताक्षर अभियान
श्रद्धांजलि सभा में,देहदानियों को मिले राजकीय सम्मान पर हस्ताक्षर अभियान
2. देहदानियों को मिले राजकीय सम्मान,इसके लिए शहर के लोगों ने किया हस्ताक्षर
3. श्रद्धांजलि सभा में, 400 लोगों ने हस्ताक्षर कर,देहदानियों को मिले राजकीय सम्मान पर उठाई माँग
4. कोटा से शाइन इंडिया ने उठाई आवाज़,प्रदेश के देहदानियों को मिले राजकीय सम्मान
शाइन
इंडिया फाउंडेशन के अनवरत सतत प्रयासों से नेत्रदान के बाद,अब कोटा
शहर,देहदान के क्षेत्र में प्रदेश में,नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। शाइन
इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से अब शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी
नेत्रदान और देहदान का कार्य बढ़ने लगा है ।
बीते दिनों रविवार
को,शाइन इंडिया के सहयोग से बजरंग नगर निवासी डॉ राजश्री गोहदकर के देहदान
के लिए संकल्पित,पिता प्रभाकर लक्ष्मण गोहदकर (प्रसिद्ध गायक और संगीतज्ञ)
के आकस्मिक निधन के उपरांत परिजनों ने उनका देहदान संपन्न कराया था ।
मूलत:
ग्वालियर,मध्य प्रदेश के रहने वाले एवं मध्यप्रदेश सरकार के शिखर सम्मान
से सम्मानित प्रभाकर का पूरा जीवन संगीत को समर्पित रहा। उनकी बड़ी
बेटी,प्रोफेसर स्मिता सहस्त्रबुद्धे वर्तमान में ग्वालियर के श्री राजा
मानसिंह संगीत विश्वविद्यालय में कुलपति के पद पर कार्यरत हैं ।
पिता
के देहदान के बाद में,जब उनकी जानकारी में आया कि,राजस्थान सरकार में
देहदानी को, प्रशासन के माध्यम से "गार्ड ऑफ ऑनर" का सम्मान नहीं दिया जाता
है,तब उनका मन काफी आहत हुआ । उन्होंने कहा कि यदि, हमें पहले यह जानकारी
होती तो,पिता का देहदान राजस्थान में ना कर,शायद ग्वालियर के किसी मेडिकल
कॉलेज में करते ।
ग्वालियर से संगीत घराने से आए कई प्रबुद्ध नागरिक
संगीतज्ञ,शिक्षाविद,प्रोफेसर और शोधार्थीयों को भी जब इस बात का पता चला
तो सभी ने कहा कि, इस तरह की पुण्य कार्यों में राजस्थान सरकार को भी
अंगदानी और देहदानी परिवारों के लिए "गार्ड ऑफ ऑनर" का प्रावधान करना चाहिए
।
सभी की मंशा को जानकर शाइन इंडिया फाउंडेशन ने, देहदानी स्व०
प्रभाकर गोहदकर की श्रद्धांजलि सभा में,अंगदानी और देहदानी को "गार्ड ऑफ
ऑनर" का सम्मान मिले इस क्रम में एक हस्ताक्षर अभियान गीता भवन में आयोजित
किया गया। जिसमें 400 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर देहदानियों को राजकीय
सम्मान देने की मांग की है। ज्ञात हो कि, संस्था शाइन इंडिया, कोटा की खूबी
सिक्योरिटीज के साथ मिलकर वर्तमान में हो रहे सभी देहदानी परिवारों को
सेरिमनी कार्ड के माध्यम से गार्ड ऑफ़ ऑनर देने का कार्य कर रही है ।
शाइन
इंडिया फाउंडेशन के सदस्यों ने कहा, "हमारा उद्देश्य है कि अंगदानी
देहदानी को एक सम्मानित कार्य बनाया जाए और उनको राजकीय सम्मान दिया जाए।
इससे लोगों में अंगदान देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और अधिक से अधिक
लोग इस कार्य में आगे आएंगे।" जल्द ही प्रदेश के मुख्यमंत्री,मुख्य सचिव,
चिकित्सा सचिव, पुलिस महानिदेशक को भी संस्था की ओर से, राजस्थान प्रदेश
में भी "गार्ड ऑफ ऑनर" को लागू करने के लिये,अनुरोध पत्र भेजा जाएगा ।
और ऐ मेरी क़ौम मुझे क्या हुआ है कि मैं तुमको नजाद की तरफ बुलाता हूँ और तुम मुझे दोज़ख़ की तरफ बुलाते हो
और ऐ मेरी क़ौम मुझे क्या हुआ है कि मैं तुमको नजाद की तरफ बुलाता हूँ और तुम मुझे दोज़ख़ की तरफ बुलाते हो (41)
तुम मुझे बुलाते हो कि मै ख़ुदा के साथ कुफ़्र करूं और उस चीज़ को उसका
शरीक बनाऊ जिसका मुझे इल्म में भी नहीं, और मैं तुम्हें ग़ालिब (और) बड़े
बख़्शने वाले ख़़ुदा की तरफ बुलाता हूँ (42)
बेशक तुम जिस चीज़ की तरफ़ मुझे बुलाते हो वह न तो दुनिया ही में
पुकारे जाने के क़ाबिल है और न आखि़रत में और आखि़र में हम सबको ख़़ुदा ही
की तरफ़ लौट कर जाना है और इसमें तो शक ही नहीं कि हद से बढ़ जाने वाले
जहन्नुमी हैं (43)
तो जो मैं तुमसे कहता हूँ अनक़रीब ही उसे याद करोगे और मैं तो अपना काम
ख़़ुदा ही को सौंपे देता हूँ कुछ शक नहीं की ख़ुदा बन्दों ( के हाल ) को
ख़ूब देख रहा है (44)
तो ख़़ुदा ने उसे उनकी तद्बीरों की बुराई से महफूज़ रखा और फिरऔनियों को बड़े अज़ाब ने ( हर तरफ ) से घेर लिया (45)
और अब तो कब्र में दोज़ख़ की आग है कि वह लोग (हर) सुबह व शाम उसके
सामने ला खड़े किए जाते हैं और जिस दिन क़यामत बरपा होगी (हुक्म होगा)
फ़िरऔन के लोगों को सख़्त से सख़्त अज़ाब में झोंक दो (46)
और ये लोग जिस वक़्त जहन्नुम में बाहम झगड़ेंगें तो कम हैसियत लोग बड़े
आदमियों से कहेंगे कि हम तुम्हारे ताबे थे तो क्या तुम इस वक़्त (दोज़ख़
की) आग का कुछ हिस्सा हमसे हटा सकते हो (47)
तो बड़े लोग कहेंगे (अब तो) हम (तुम) सबके सब आग में पड़े हैं ख़़ुदा
(को) तो बन्दों के बारे में (जो कुछ) फैसला (करना था) कर चुका (48)
और जो लोग आग में (जल रहे) होंगे जहन्नुम के दरोग़ाओं से दरख़्वास्त
करेंगे कि अपने परवरदिगार से अज्र करो कि एक दिन तो हमारे अज़ाब में
तख़फ़ीफ़ कर दें (49)
वह जवाब देंगे कि क्या तुम्हारे पास तुम्हारे पैग़म्बर साफ व रौशन
मौजिज़े लेकर नहीं आए थे वह कहेंगे (हाँ) आए तो थे, तब फ़रिश्ते तो कहेंगे
फिर तुम ख़़ुद (क्यों) न दुआ करो, हालाँकि काफि़रों की दुआ तो बस बेकार ही
है (50)