जेन ज़ी का हव्वा भारत में खड़ा तो हो गया है ,, कांग्रेस ,, भाजपा ,, खासकर आज़ाद ओरिजनल भारतीय विचार के लोग ,, और भाजपा के ज़रिये राजनिती में एन्ट्री कर अपने संघ के लोगों को राजसत्ता का सुख दिलवाने वाला आर एस एस संगठन सभी ने जेन ज़ी की अंगड़ाई को देखकर डेमेज कंट्रोल करते हुए खुद को इस आयु वर्ग के लोगों का हमदर्द बताने की फ़र्ज़ी और झूंठी कोशिशों का अभियान छेड़ दिया है , सियाही फिकवाना , पुलिस से पिटवाना ,, करंट लगवाना ,, मुक़दमे दर्ज करवाना , पुलिस से उत्पीड़ित करवाना यह सब तो इस आयु वर्ग के लोगों की अंगड़ाई की कामयाबी की निशानी है , सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान के इस्तीफे की शर्त पर झुकी ,, लेकिन सरकार और सरकार में बैठे लोग , सरकार बनाने वाले अग्रिम संगठन तो आग बबूला है ,वोह दोहरी बातें कर रहे हैं , एक तरफ तो डरा रहे हैं , स्याही फेंक रहे हैं ,, हुड़दंग मचा रहे हैं ,गरिया रहे हैं ,,सोशल मिडिया पर गंदी गंदी पोस्टें डालकर बदनामी की साज़िशों में लगे है , लेकिंन जो लोग बच्चे पैदा नही करते , शादी नहीं करते , वोह लोग बच्चों की परवरिश , उनके रोज़गार ,, उनकी पढ़ाई लिखाई ,, केरियर का दर्द क्या जाने , जेन ज़ी आयु वर्ग से जुड़े लोगों को रोज़गार , पढ़ाई की मुश्किलों से बे खबर रखने के लिये, सिर्फ हिन्दू मुस्लिम , मस्जिद , मंदिर की नफरत में झोंक कर ,, नफरत के नाम पर सरकार बनाने वाले बहुत खुब थे , लेकिन युवा तो युवा है ,, किसी के बस में वोह फिलहाल तो नहीं ,, उसे रोटी चाहिए , रोज़ी चाहिए , सस्ती शिक्षा चाहिए ,,, यूवा संघर्ष अगर नहीं करता है ,, नफरत के षड्यंत्र भटककर देश को टुकड़ों में कमज़ोर करने की साज़िशों में शामिल होता है तो फिर ऐसे जैन ज़ी को लानत लानत लानत ,, इसे भी बढ़ी लानत कांग्रेस और भाजपा सहित सभी राजनितिक संगठनों के नेताओं को जिन्होंने इस आयु वर्ग के जेन ज़ी को सिर्फ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, उससे भी ज़्यादा लाखों गुना लानत उन अभिभावकों पर जिन्होंने जेन ज़ी की परवरिश , उनकी शिक्षा के नाम पर लूट , फिर नौकरियों के नाम पर भटकाव व्यवस्थाओं के खिलाफ कभी आवाज़ ही नहीं उठाई , इससे भी बढ़कर लानत देश के उन संगठनों पर जो कहते हैं ,हम राजनीति नहीं करते , हम राष्ट्रभक्त है , लेकिन ऐसे लोग झूंठे हैं, देश का युवा कितना बेबस , लाचार है , कितने बोझ तले दबा हुआ है , कम उम्र में ही युवा किन दुःख तकलीफों से संघर्ष में हारकर आत्महत्या कर रहा है , इस बारे में किसी ने भी ना तो सोचा है , ना ही आवाज़ उठाई है , हाँ सरकार के खर्च इनके नाम पर जैसे युवा कल्याण बोर्ड , भर्ती बोर्ड , वगेरा वगेरा के खर्च बढे हुए हैं ,, लोग कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर मंत्री बनकर , अलग अलग मंत्री दर्जा पदों पर बैठकर मज़े कर रहे हैं, रो रहा है तो सिर्फ जैन ज़ी और उनका अभिभावक वर्ग ही रो रहा है ,,,,,कांग्रेस हो, चाहे भाजपा हो , चाहे दूसरे संगठन हो , इनमे से सभी सिर्फ राज कैसे आये और हम राज में कैसे बने रहे , इस लालच में इन सियासी लोगों ने देश के युवाओं को बेच दिया , चाणक्य निति के तहत, शासन के खिलाफ बगावत ना हो, तो आम जनता को किसी ना किसी व्यवस्थाओं में इतना व्यस्त कर दो के वोह राशन कार्ड , आधार कार्ड , मार्कशीट ,, शपथ पत्रों जैसे माया जाल में उलझ कर रह जाए और उसे सरकार युवाओं को , उनके अधिकारों को , उनके प्रति कर्तव्यों को नज़र अंदाज़ कर कैसे लूट रही है उन्हें सोचने तक का मौक़ा ना मिले ,,इसलिए आप देखिये , पहले टुवेल्थ की मार्कशीट के आधार पर डॉक्टर , इंजीनियर बनते थे नौकरियों में कोई परीक्षाएं नहीं होती थीं मार्कशीट के अंकों के आधार पर नोकरियां मिलती थीं ,, इंटरविव और परीक्षाओं ,, पेपर लिक के नाम पर घोटाले नहीं होते थे , , अब तो राज्य सेवा आयोग , भर्ती बोर्ड के नियुक्त लोग ही चोर साबित हैं , तो फिर यूवाओं की नौकरियों का उनमे ईमानदारी का क्या होगा , क्या कभी किसी अभिभावक , किसी युवा छात्र ,,बेरोज़गार ने ,सरकार ने, कांग्रेस , भाजपा के संगठन से जुड़े ईमानदार लोगों ने सोचा है ,, आवाज़ उठाई है , के अगर स्टूडेंट के टूवेल्थ में मेरिट में नंबर हैं, तो उसे डक्टर के कोर्स के लिए ,, इंजीनियरिंग के कोर्स के लिए अलग से नीट , जे ई ई, परीक्षा क्यों दिलवाई जा रही है , इस नाम पर कोचिंग उद्योगों को बढ़ावा क्यों दिया गया है, फिर नीट , जे ई ई , परीक्षा के नाम पर हज़ारों की फीस लेकर , अरबों रूपये इकट्ठे करना ,, स्टूडेंट्स को एक्ज़ाम के नाम पर कोसों दूर भेजना , फिर पेपर आउट हो जाना , और अगर एक्ज़ाम हो भी जाएँ तो 750 में से 600 नंबर लाने वालों का ही एडमिशन होना ,, बाक़ी लोगों को प्राइवेट कॉलेजों की लूट के लिए जहां एक करोड़ से कम में कहीं भी फीस डोनेशन के नाम पर डॉक्टरी का कोर्स ही नहीं है, यही हाल पोस्ट ग्रेजुएट में है , दस नंबर वाला सर्जरी में पी जी और छह सो नंबर वाला रो रहा है , क्योंकि उसके पास सीट खरीदने के लिए रूपये नहीं हैं ,खेर छोडो बी ऐड को ही लो , एक मास्टर बनने के लिए पहले बी ऐड की परीक्षा , कोचिंग खर्च , फिर कौन्सिलिंग ,फिर कॉलेज में एडमिशन हो जाए तो महंगी फीस ,जबरिया होस्टल शुल्क वसूली ,,फिर अगर कॉलेज में कभी नहीं आओ तो एब्सेंट डोनेशन हज़ारों हज़ार में , तो क्या यह ईमानदारी है , फिर बी ऐड भी हो गया तो पहले रीट , फिर पास हुए तो शिक्षा लेवल परीक्षा में बैठो , चपरासी ,,पटवारी , बाबू तक बनने के लिए पहले पात्रता परीक्षा , फिर नौकरियों की परीक्षा फिर इंटरविव लूट ,, फिर पेपर लीक का दर्द , फिर पोस्टिंग में लूट , स्कूलों से कॉलेज एडमिशन में , लूट फीस में लूट , आखिर बेरोज़गार बूढ़ा हो जाता है , ऐसे स्कूल के ,कॉलेज के जो टॉपर होते है ,वोह तो चपरासी भी नहीं बन पाते, लेकिन जो लोग पेपर खरीद लेते हैं ,सेटिंग कर लेते है ,वोह मनचाही नौकरी पर बैठे होते है , यह सड़ा गला लूट खसोट का सिस्टम अंधा भी देख रहा हैं , बहरा भी सुन रहा है, और फिर बेरोज़गार की अगर चपरासी में भी नौकरी लग जाए तो अविवाहित , विवाहित , दो संतान , कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं ,, दहेज़ नहीं लूँगा ,दहेज़ नहीं लिया ,ससुर के सास के हस्ताक्षर करवाकर शपथ पत्र दो ,अरे इतनी बंदिशें तो राष्ट्रपपति , प्रधानमंत्री , मंत्री ,सांसद , विधायक बनने में भी नहीं है,बस युवा ,, बेरोज़गार और उनके अभिभावकों को इन आवेदन ,परीक्षाओं , इंटरविव , परीक्षा सेंटर्स पर आने जाने , पेपर लीक मामले में व्यस्त रखो और खूब मिलजुल कर देश का राज्य का सत्यानास करो बस यही सिस्टम अब चल गया है , ज़रा सोचो जब भारत में स्कूल है , सी बी एस ई ज़िम्मेदार हैं , हर राज्य में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड है तो फिर स्कूलों, कोलेजों में पढ़कर मेरिट में आने वाले बच्चों को नौकरियों में कम्पीटिशन के नाम पर , कोचिंगों के खर्च में क्यों धकेल रहे हो ,, आवेदन मांगों ,,, जिसके स्कूली , कॉलेज शिक्षा में मेरिट ज़्यादा हो उसे नौकरी दो , खर्चीला कार्यक्रम क्यों करते हो , क्यों लूटने का मौक़ा देते हो , पारदर्शिता क्यों नहीं रखते , भर्ती बोर्ड , फलाना बोर्ड , वगेरा वगेरा का खर्च क्यों करते हो ,, बेरोज़गार बेरोज़गारी भत्ता तो नहीं देते , उलटे उनसे एक्ज़ाम के नाम पर अवैध चौथ वसूली , फिर इंटरविव के नाम पर बेईमानी , अरे जो स्टूडेंट अव्वल है , प्रतिभावान है , उसका केसा एक्ज़ाम केसा इंटरविव , उसे आगे डोक्टरी , इनिजीनयरिंग वगेरा वगेरा एडमिशन में इसी आधार पर वरीयता दो ,, क्यों नीट ,, जे ई ई के नाम पर देश के युवाओं को लूट रहे हैं , प्रतिभावान को हतोत्साहित कर पेपर खरीदने वाले , बेकडोर एन्ट्री वालों को उत्साहित कर रहे हो ,, इस व्यवस्था पर ना तो अभिभावक ध्यान दे रहे हैं , ना ही , स्टूडेंट्स ने कभी सोचा है , और राष्ट्रवादी संगठन को तो पता ही नहीं , जिन्होंने शादी नहीं की , जिनके बच्चे नहीं है , जिन्होंने बच्चे पालते कैसे है , पढ़ाते केसे हैं , इसका अनुभव ही नहीं लिया वोह क्या ख़ाक बच्चों का कल्याण करेंगे , और फिर भाजपा हो , चाहे कांग्रेस हो , चाहे दूसरे दल हों युवाओं को भटकाने , उनका ध्यान सरकार से स्टूडेंट और उनके अभिभावक सवाल नहीं कर सकें , इसीलिए पढ़ाई के बाद भी कोचिंग , मेरिट के बाद भी फ़र्ज़ी पेपर लीक होने वाले एक्ज़ाम फिर एडमिशन के बाद , कई फोर्मलिटियां ,, नौकरी मिलने के बाद दर्जनों शपथ पत्र के नाम उलझाकर रखना ,, फिर नौकरी अगर लग जाए तो पोस्टिंग और ट्रांसफर निति नहीं होने से , पोस्टिंग और ट्रांसफर के नाम पर प्रताड़ित करना , तो जेन ज़ी युवा वर्ग , उनके अभिभावक लूटें जा रहे हैं , या यूँ कहो के वोह खुद बकरा बनकर सरकार के सामने क़ुर्बानी दे रहे हैं , इसलिए ऐसे मुद्दों पर खामोश रहने वाले , व्यवस्था बदलकर फिर से स्कूली शिक्षा की मार्कशीटों के आधार पर , कॉलेज शिक्षा की मार्कशीटों के आधार पर मेरिट बनाकर नौकरियां देने की कोई मांग ही नहीं कर रहा ,, हाँ प्रशासनिक सेवाओं की बात लग हो सकती है , लेकिन न्यायिक सेवा में भी परीक्षाएं खत्म कर मेरिट के आधार पर नौकरी का नियम फिर से बनाया जाए ,, क्या जेन ज़ी , उनके अभिभावक , देश के ओरिजनल राष्ट्रभक्त क्या इस तरफ सोचेंगे ,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
akhtar khan akela
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