आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

22 जुलाई 2026

कोटा के रियार्थ ने कराटे में जीता स्वर्ण

 

कोटा के रियार्थ ने कराटे में जीता स्वर्ण
गुरुग्राम। सेक्टर-27 स्थित कम्युनिटी सेंटर में स्पोर्ट्स शितोकाई कराटे फेडरेशन इंडिया के तत्वावधान में प्रथम अंतर्राज्यीय शितोकाई कराटे चैंपियनशिप आयोजन किया गया , जिसमें हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित विभिन्न प्रदेशों के खिलाडिय़ों ने भाग लिया। साई कराटे अकादमी के खिलाडिय़ों ने काता और कुमिते स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए 39 पदक अपने नाम किए और ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। कोटा के रियार्थ माहेश्वरी,7वर्ष, पुत्र परेश माहेश्वरी ने कुमिते वर्ग में स्वर्ण और काता में ब्रोंज मेडल अपने नाम किया।साई कराटे अकादमी के संस्थापक सुनील सैनी ने बताया कि कार्यक्रम में अतिथियों के रुप में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज अखिल कुमार, पद्मश्री सुनील डबास, खेलो इंडिया के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर सुनील राठी, वसुधैव कुटुम्बकम् सेवा संस्थान के संरक्षक सुरेंद्र सैनी, कोच विक्की यादव, भाजपा नेता युगवीर सिंह, देव समाज विद्या निकेतन के प्रबंधक कांडास्वामी नटराजन, अधिवक्ता जितेंद्र सैनी, अंशुल सैनी, रैफरी हरीश सिराधन शामिल हुए। सभी ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अकादमी युवाओं को खेलों के लिए प्रशिक्षत कर आगे बढऩे के लिए बेहतर मार्ग प्रशस्त कर रही है। भविष्य में ये खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व कर नाम रोशन करेंगे। सुनील का कहना है कि कोच विक्रम और कोच बंटी के साथ मिलकर खिलाडिय़ों ने 3 माह तक कड़ा अभ्यास किया। कड़े अनुशासन, कड़ी मेहनत से ही यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हो सकी है। कार्यक्रम को सफल बनाने में धर्मेन्द्र फौजी, धर्मेन्द्र, सुकेश सैनी, सतीजा, अशोक सैनी का सहयोग रहा।

मौत बनकर नाक में फंसी खुली सेफ्टी पिन,

 

मौत बनकर नाक में फंसी खुली सेफ्टी पिन,
डॉ. राजकुमार जैन, डॉ. शेमेन्द्र कुमार, डॉ. मुकेश सोमवंशी एवं डॉ. शिल्पी की टीम ने बचाई ढाई साल के नितिन की जान
के डी अब्बासी
कोटा। नैनवा निवासी मुकेश के ढाई वर्षीय पुत्र नितिन की जान कोटा के चिकित्सकों की सूझबूझ और कुशलता से बच गई। मासूम की नाक के पीछे, जहां दिमाग और गला (एडिनॉइड क्षेत्र) मिलता है, वहां एक खुली हुई सेफ्टी पिन फंस गई थी। अत्यंत जटिल एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के बाद चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक पिन निकालकर बच्चे को सुरक्षित बचा लिया।
जानकारी के अनुसार, बच्चा 20 जुलाई की शाम से ही इस समस्या से जूझ रहा था। पहले उसे नैनवा में दिखाया गया, जहां से बूंदी और फिर कोटा रेफर किया गया। बूंदी में भी पिन नहीं निकल सकी। इसके बाद 21 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजे बच्चे को कोटा लाया गया।
जांच में पता चला कि सेफ्टी पिन नाक के पीछे एडिनॉइड क्षेत्र में फंसी हुई थी। चिकित्सकों ने एंडोस्कोपी शुरू की, लेकिन नाक के भीतर काफी मात्रा में खून जमा होने के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। डॉक्टरों ने पहले सक्शन के माध्यम से खून हटाकर रास्ता साफ किया, तब जाकर खुली हुई सेफ्टी पिन दिखाई दी।
चूंकि पिन खुली हुई थी, इसलिए उसे निकालने के दौरान गंभीर चोट (ट्रॉमा) का खतरा बना हुआ था। चिकित्सकों ने अत्यंत सावधानी और कुशलता से ऑपरेशन करते हुए शाम करीब 6 बजे सेफ्टी पिन सफलतापूर्वक बाहर निकाल दी। वर्तमान में बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है।
इस सफल उपचार में डॉ. राजकुमार जैन, डॉ. शेमेन्द्र कुमार, डॉ. मुकेश सोमवंशी एवं डॉ. शिल्पी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
चिकित्सकों की सलाह
डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को सेफ्टी पिन, साधारण पिन, मूंगफली, मटर, चना, गेहूं के दाने, मोती-माला के मोती, रबर के टुकड़े जैसी छोटी या नुकीली वस्तुएं खेलने के लिए न दें। ऐसी वस्तुओं को हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर रखें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है

चलती ट्रेन में मौत को मात: ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे ने अपनी जान जोखिम में डालकर यात्री को बचाया

 

चलती ट्रेन में मौत को मात: ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे ने अपनी जान जोखिम में डालकर यात्री को बचाया
के डी अब्बासी
कोटा/इटारसी। भारतीय रेल की सेवा भावना और मानवता का प्रेरणादायक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब गाड़ी संख्या 12753 में यात्रा कर रहे एक यात्री की जान ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे की सूझबूझ और साहस से बच गई।
जानकारी के अनुसार, यात्री सुशील पाटिल मनमाड़ से भोपाल सामान्य कोच में यात्रा कर रहे थे। इटारसी यार्ड में ट्रेन रुकने पर वे पानी लेने के लिए नीचे उतरे। इसी दौरान उनका बैग, जिसमें नकदी, टिकट और अन्य आवश्यक सामान रखा था, चोरी हो गया। बैग की तलाश में वे व्यस्त हो गए और तभी ट्रेन चल पड़ी।
घबराहट में सुशील पाटिल ने चलती ट्रेन के अंतिम डिब्बे पर चढ़ने का प्रयास किया। ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे ने उन्हें ऐसा करने से मना किया, लेकिन यात्री ने जल्दबाजी में छलांग लगा दी और संतुलन बिगड़ने से ट्रेन के साथ घिसटने लगे। स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी।
ऐसे संकटपूर्ण क्षण में ट्रेन मैनेजर रोमेश चौबे ने अपनी जान की परवाह किए बिना यात्री का हाथ मजबूती से पकड़कर उन्हें ट्रेन के अंदर खींच लिया। इस दौरान स्वयं रोमेश चौबे भी गिर पड़े, लेकिन उन्होंने यात्री का हाथ नहीं छोड़ा। उनकी बहादुरी और तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।
घटना में यात्री के पैर में चोट और सूजन आ गई। उनके पास खाने के लिए भी कुछ नहीं था, इसलिए ट्रेन मैनेजर ने उन्हें केले उपलब्ध कराए और हरसंभव मानवीय सहायता प्रदान की।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भारतीय रेल केवल यात्रियों को उनके गंतव्य तक ही नहीं पहुंचाती, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनके जीवन की रक्षा के लिए भी पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता से खड़ी रहती है।
उल्लेखनीय है कि रोमेश चौबे वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के जोनल मीडिया हेड एवं मंडल उपाध्यक्ष हैं। इसके साथ ही वे ऑल इंडिया ट्रेन मैनेजर ग्रुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
"मानवता सबसे बड़ा धर्म है और यात्री की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता।"
रोमेश चौबे की यह साहसिक एवं मानवीय पहल भारतीय रेल की सेवा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण बन गई है।

जिस तरह युवा लाठियों,

 

जिस तरह युवा लाठियों, बंदूकों के आगे खड़े हैं और कह रहे हैं कि क्या करोगे भाई दो चार हड्डियाँ तोड़ लोगे, हम तो निहत्थे हैं, तोड़ लो , मगर यहाँ से हटेंगे नहीं, यहीं रहेंगे.
और कोई लीडर नही इनका
बिना नेता के यह एकजुटता?
यह जज़्बा?
भरोसा नही हो रहा
यह इक्कीसवीं सदी के
25 वें साल की युवा पीढ़ी है
वे गाँधी को गोली से नहीं मार पाए,
गाँधी अब तक जिंदा है और
इस देश में हमेशा ज़िंदा रहेंगे,

कोटा में प्रदर्शनकरियों को राहत, तहसीलदार का आदेश निरस्त*

कोटा में प्रदर्शनकरियों को राहत, तहसीलदार का आदेश निरस्त*
कोटा, 22 जुलाई 2026। अपर सत्र न्यायाधीश क्रम-3, कोटा ने छह प्रदर्शनकारियों की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए तहसीलदार एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट, लाडपुरा, कोटा द्वारा 1 अप्रैल 2025 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने माना कि अधीनस्थ न्यायालय का आदेश विधिक प्रक्रिया, अनिवार्य कारण-उल्लेख और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों के समुचित परीक्षण के बिना पारित किया गया था । याचिकाकर्ताओं की ओर से आबिद अख्तर लॉयर्स एसोसिएट के एडवोकेट अख़्तर खान अकेला और एडवोकेट अंसार इंदौरी ने तर्क रखा कि आदेश साइक्लोस्टाइल/मुद्रित प्रारूप पर आधारित था, उसमें तलब करने के कारण स्पष्ट नहीं थे, तथा रोज़नामचा रिपोर्ट और इस्तगासा की तारीखों में भी गंभीर विरोधाभास था । राज्य पक्ष ने आदेश को वैध बताते हुए पुनरीक्षण खारिज करने का निवेदन किया था ।
एडवोकेट अंसार इंदौरी ने बताया की न्यायालय ने रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद पाया कि नोटिस के साथ आवश्यक आदेश की प्रति संलग्न नहीं थी और दंड प्रक्रिया संहिता/बीएनएसएस के अनिवार्य प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया गया । अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पूर्व-मुद्रित प्रारूप में आदेश पारित करना पर्याप्त नहीं है; न्यायिक आदेश में उचित मनन और कारणों का उल्लेख अनिवार्य है । एडवोकेट अख़्तर खान अकेला ने अदालत में तर्क देते हुए कहा की कार्यवाही प्रारम्भ करने का आदेश प्रारम्भ से ही शून्य है क्योंकि कार्यपालक मजिस्ट्रेट का दिनांक 01/04/2025 का आदेश शक्ति का यांत्रिक प्रयोग है, जो साइक्लोस्टाइल प्रोफार्मा पर पारित किया गया है, बिना किसी न्यायिक विवेक के। जबकि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने के लिए न्यायिक विवेक का प्रयोग अनिवार्य है। एडवोकेट अंसार इंदौरी ने अदालत में तर्क देते हुए कहा शिकायत में केवल यह कहा गया है कि प्रदर्शनकारी "साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की बात करते है" और अपने राजनीतिक संबंधों के कारण शांति भंग कर सकते है। इसमें किसी भाषण या उकसावे की एक भी विशिष्ट तारीख, समय, स्थान या विषय-वस्तु का उल्लेख नहीं है।प्रदर्शनकारियों की सामान्य प्रतिष्ठा अच्छी नहीं है जैसे आरोप व्यक्तिपरक और कानूनी रूप से निरर्थक हैं। अज्ञात सूचनादाताओं से प्राप्त ऐसे खाली और गैर-विशिष्ट दावों के आधार पर कार्यवाही प्रारम्भ करना शक्ति का मनमाना प्रयोग है। उन्होंने कहा की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध शिकायत दिनांक 01/04/2025 को दर्ज की। जबकि सामान्य डायरी जिसे इस शिकायत का आधार बताया गया है, एक दिन बाद दिनांक 02/04/2025 को दर्ज की गई। यह कानूनी और तार्किक असंगति है कि कोई कार्रवाई उस दस्तावेज़ पर आधारित हो जो कार्रवाई के समय अस्तित्व में ही नहीं था। यह निर्विवाद विसंगति सिद्ध करती है कि पूरा मामला प्रदर्शनकारियों को झूठा फंसाने के लिए पूर्वव्यापी रूप से गढ़ा गया था। जो दुर्भावनापूर्ण अभियोजन का स्पष्ट उदाहरण है।दोनो वकीलों द्वारा दिए गए तर्कों के आधार पर न्यायालय ने 1 अप्रैल 2025 का विवादित आदेश रद्द करते हुए पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली।
जारीकर्ता:
एडवोकेट अंसार इंदौरी
8955994260
See less
 

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...