आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
15 मार्च 2026
*नारायण बारेठ स्मृति पुरस्कार की घोषणा* *ग्रेटर कोटा प्रेस क्लब ने श्रद्धांजलि सभा का किया आयोजन*
आगामी 18 मार्च को आमजन के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता उतरेगा सड़कों पर*
प्रगति इंटरनेशनल एजुकेशन ग्रुप कोटा ओर प्रदेश कोंग्रेस कमेटी सदस्य डॉक्टर मोहम्मद ज़फर की मेज़बानी में आयोजित रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम
प्रगति इंटरनेशनल एजुकेशन ग्रुप कोटा ओर प्रदेश कोंग्रेस कमेटी सदस्य डॉक्टर मोहम्मद ज़फर की मेज़बानी में आयोजित रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम में , रोजेदारों के सम्मान और इफ्तियारी प्रबन्धन परफेक्ट रहा, व्यवस्थित इफ्तियारी वितरण व्यवस्था, महमानों का गुलपोशी के साथ शॉल उड़ा कर सम्मान, फिर बाद इफ्तियारी नमाज़ का साफ सुथरा इंतिज़ाम काबिल ऐ तारीफ रहा, इफ्तार कार्यक्रम की सदारत क़ाज़ी ऐ शहर जुबेर अहमद, मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री कोटा उत्तर विधायक शांति कुमार धारीवाल रहे, इफ्तियार कार्यक्रम में कोटा , बूंदी, बारां, झालावाड़ के कोंग्रेस पदाधिकारी उपस्थित थे, कोटा ज़िला कोंग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम, पूर्व जिला कोंग्रेस अध्यक्ष रविन्द्र त्यागी, पूर्व जिला कोंग्रेस अध्यक्ष पंडित गोविंद शर्मा , सहित सभी पदाधिकारी , गणमान्य नागरिक, आलिम ऐ दीन उपस्थित रहे , प्रगति एजुकेशन ग्रुप के निदेशक डॉक्टर परवेज़, जुबेर अहमद, समीर अहमद, मिर्ज़ा नजीब अहमद, बशीर भाई पार्षद सहित पूरी टीम ने महमानों का महमानों का खेरमक़दम किया, अख़्तर
इतिहास में एक ऐसा राजा भी हुआ जिसकी दौलत का अंदाजा आज के बड़े से बड़े अरबपति भी नहीं लगा सकते।
इतिहास में एक ऐसा राजा भी हुआ जिसकी दौलत का अंदाजा आज के बड़े से बड़े अरबपति भी नहीं लगा सकते। माली साम्राज्य का राजा मनसा मूसा जब 1324 में अपनी प्रसिद्ध हज यात्रा पर निकला था तो उसने दुनिया को अपनी रईसी से दंग कर दिया था। उसके साथ 60,000 सैनिकों का काफिला और दर्जनों ऊंट थे जिन पर 18 टन से भी ज्यादा शुद्ध सोना लदा हुआ था। वह जिस भी शहर से गुजरता था वहां के गरीबों और जरूरतमंदों को मुट्ठी भर-भर के सोना दान करता जाता था। उसने मिस्र की राजधानी काहिरा में इतना ज्यादा सोना दान कर दिया कि वहां की पूरी अर्थव्यवस्था में सोने की प्रचुरता के कारण कीमतें औंधे मुंह गिर गई थीं। सोने की वैल्यू कम होने के कारण वहां सालों तक मुद्रास्फीति बनी रही जो इतिहास में किसी एक व्यक्ति द्वारा किया गया सबसे बड़ा आर्थिक बदलाव है। आज के एलन मस्क या जेफ बेजोस की संपत्ति भी मनसा मूसा की उस बेहिसाब दौलत के सामने फीकी नजर आती है। उसका यह वैभव और उदारता आज भी कहानियों में जिंदा है जो उस दौर के अफ्रीका की समृद्धि का सबसे बड़ा सबूत है। यह यात्रा आज भी दुनिया की सबसे महंगी और प्रभावशाली धार्मिक यात्रा मानी जाती है।
और ये लोग भी यक़ीनन मरने वाले हैं फिर तुम लोग क़यामत के दिन अपने परवरदिगार की बारगाह में बाहम झगड़ोगे
और ये लोग भी यक़ीनन मरने वाले हैं फिर तुम लोग क़यामत के दिन अपने परवरदिगार की बारगाह में बाहम झगड़ोगे (31)
तो इससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो ख़ुदा पर झूठ (तूफान) बाँधे और जब उसके
पास सच्ची बात आए तो उसको झुठला दे क्या जहन्नुम में काफिरों का ठिकाना
नहीं है (32)
(ज़रूर है) और याद रखो कि जो षख़्स (रसूल) सच्ची बात लेकर आया वह और जिसने उसकी तसदीक़ की यही लोग तो परहेज़गार हैं (33)
ये लोग जो चाहेंगे उनके लिए परवर दिगार के पास (मौजूद) है, ये नेकी करने वालों की जज़ाए ख़ैर है (34)
ताकि ख़ुदा उन लोगों की बुराइयों को जो उन्होने की हैं दूर कर दे और उनके
अच्छे कामों के एवज़ जो वह कर चुके थे उसका अज्र (सवाब) अता फरमाए (35)
क्या ख़ुदा अपने बन्दों (की मदद) के लिए काफ़ी नहीं है (ज़रूर है) और (ऐ
रसूल) तुमको लोग ख़ुदा के सिवा (दूसरे माबूदों) से डराते हैं और ख़ुदा जिसे
गुमराही में छोड़ दे तो उसका कोई राह पर लाने वाला नहीं है (36)
और जिस शख़्स की हिदायत करे तो उसका कोई गुमराह करने वाला नहीं। क्या ख़दा ज़बरदस्त और बदला लेने वाला नहीं है (ज़रूर है) (37)
और (ऐ रसूल) अगर तुम इनसे पूछो कि सारे आसमान व ज़मीन को किसने पैदा किया
तो ये लोग यक़ीनन कहेंगे कि ख़ुदा ने, तुम कह दो कि तो क्या तुमने ग़ौर
किया है कि ख़ुदा को छोड़ कर जिन लोगों की तुम इबादत करते हो अगर ख़ुदा
मुझे कोई तक़लीफ पहुँचाना चाहे तो क्या वह लोग उसके नुक़सान को (मुझसे) रोक
सकते हैं या अगर ख़ुदा मुझ पर मेहरबानी करना चाहे तो क्या वह लोग उसकी
मेहरबानी रोक सकते हैं (ऐ रसूल) तुम कहो कि ख़ुदा मेरे लिए काफ़ी है उसी पर
भरोसा करने वाले भरोसा करते हैं (38)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरी क़ौम तुम अपनी जगह (जो चाहो) अमल किए जाओ मै (39)
भी (अपनी जगह) कुछ कर रहा हूँ, फिर अनक़रीब ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि
किस पर वह आफत आती है जो उसको (दुनिया में) रूसवा कर देगी और (आखि़र में)
उस पर दायमी अज़ाब भी नाजि़ल होगा (40)