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05 नवंबर 2026

स्काउटिंग सिखाती है जीवन जीने की कला, सेवा और संस्कारों से होता है राष्ट्र निर्माण

स्काउटिंग सिखाती है जीवन जीने की कला, सेवा और संस्कारों से होता है राष्ट्र निर्माण
7 नवम्बर स्काउट-गाइड स्थापना दिवस पर विशेष : अनुशासन, आत्मनिर्भरता और मानव सेवा का संदेश
डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़
के डी अब्बासी
कोटा। स्काउटिंग केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन, समर्पण और संस्कारों की ऐसी पाठशाला है, जो बच्चों एवं युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का बोध कराती है। स्काउट-गाइड का मूल मंत्र सेवा है। इसी उद्देश्य को लेकर प्रतिवर्ष 7 नवम्बर को भारत में स्काउट-गाइड स्थापना दिवस मनाया जाता है।
सेवा, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास की पाठशाला
स्काउटिंग आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1907 में इंग्लैंड में लॉर्ड रॉबर्ट बेडेन पॉवेल ने की थी। भारत में इसकी शुरुआत 1909 में हुई। स्वतंत्रता के बाद 7 नवम्बर 1950 को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स का गठन किया गया। इसके बाद 15 अगस्त 1951 को गर्ल गाइड्स का भी इसमें विलय हुआ। आज यह संगठन युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
स्काउटिंग के माध्यम से बच्चों में ईमानदारी, आत्मनिर्भरता, नेतृत्व क्षमता, सहयोग, समय की पाबंदी और राष्ट्रप्रेम जैसे गुण विकसित किए जाते हैं। शिविर, रैलियां, पदयात्राएं, प्राथमिक उपचार, गांठें लगाना, दिशा ज्ञान और आपदा प्रबंधन जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य एवं आत्मविश्वास के साथ कार्य करना सिखाती हैं।
आपदा और सामाजिक कार्यों में निभाते हैं अग्रणी भूमिका
प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, भूकंप और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में स्काउट-गाइड स्वयंसेवक प्रशासन एवं आमजन की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। धार्मिक आयोजनों, मेलों, यातायात व्यवस्था, स्वच्छता अभियान, नशामुक्ति, जल संरक्षण, पौधारोपण और जनजागरण कार्यक्रमों में भी इनकी सक्रिय भागीदारी रहती है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कर रहे प्रेरित
वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण, जल संकट और घटते वन क्षेत्र गंभीर चुनौतियां हैं। ऐसे में स्काउट-गाइड संगठन पौधारोपण, परिंडा अभियान, जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त अभियान के माध्यम से नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहा है। पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल कर उन्हें वृक्ष बनाने का संदेश भी दिया जा रहा है।
कोटा में स्काउट-गाइड गतिविधियों को मिल रहा विस्तार
कोटा जिले में राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड के स्थानीय संघ सुल्तानपुर, रामगंजमंडी, सांगोद, इटावा, कनवास, कोटा एवं कोटा दक्षिण के माध्यम से विभिन्न विद्यालयों में सेवा, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
स्थानीय संघ कोटा दक्षिण द्वारा शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा लिमिटेड-696 आर (कोटा-बारां) के सहयोग से पौधारोपण, जल संरक्षण, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, स्वच्छता और जनजागरण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। शिक्षा सहकारी-स्काउट गाइड वाटिका, परिंडा अभियान और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।
युवाओं को जोड़ना समय की आवश्यकता
भारत युवा आबादी वाला देश है। ऐसे में युवाओं में सेवा, समर्पण, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करना बेहद जरूरी है। प्रत्येक विद्यालय में स्काउट-गाइड गतिविधियों को प्रोत्साहित कर अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इससे जोड़ना चाहिए। इससे विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।
स्काउट-गाइड स्थापना दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन में सेवा, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम अपनाने का संकल्प लेने का दिन है। लॉर्ड बेडेन पॉवेल का संदेश भी यही है कि दुनिया को पहले से बेहतर स्थिति में छोड़कर जाना चाहिए।
सेवा ही धर्म है, सेवा ही पहचान है और सेवा ही स्काउटिंग की सबसे बड़ी शान है।
लेखक : प्रकाश जायसवाल
कब मास्टर एवं जिला प्रधान, राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड, कोटा।
 

राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर बच्चों के कल्याण , संरक्षण, निरीक्षण के लिए बनी कमेटी में संभागीय आयुक्त चेयरमेन , ऐ सी बी जज को चेयरमेन , प्रिंसिपल मेफिकल कॉलेज, हरप्रीत कौर सहित अन्य सदस्य नियुक्त सभी को बधाई, मुबारकबाद,

 

राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर बच्चों के कल्याण , संरक्षण, निरीक्षण के लिए बनी कमेटी में संभागीय आयुक्त चेयरमेन , ऐ सी बी जज को चेयरमेन , प्रिंसिपल मेफिकल कॉलेज, हरप्रीत कौर सहित अन्य सदस्य नियुक्त सभी को बधाई, मुबारकबाद,
कोटा 5 नवम्बर ,, कोटा संभाग में संचालित चाइल्ड केयर सेंटर और उसके बाद बच्चों के संरक्षण निगरानी सहित अन्य संरक्षित मामलों के लिए माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के दिशा निर्देश पर कोटा संभाग के संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक संभागीय बाल आयोग कमेटी का गठन किया गया है ,, जिसमे बल विशेषज्ञ के रूप में बाल कल्याण समिति सदस्य श्रीमती हरप्रीत कोर , बाबूलाल महरा को भी सदस्य बनाया गया है , राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार , उच्चन्यायलय के अधीनस्थ नियंत्रण में गठित इस कमेटी के चेयरमेन संभागीय आयुक्त , को चेयरमेन कोटा जिला भ्रष्टाचार निरोधक मामलात जज अश्वनी शर्मा को चेयरमेन ,,सचिव जिला विधिक न्यायिक प्राधिकरण संयोजक बनाये गए है , जबकि समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक ,प्रिंसिपल गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज कोटा , डॉक्टर मिथिलेश खींची प्रोफेसर साइक्रेटरी डिपार्टमें , बाबूलाल मेहरा ,,हरप्रीत कोर , सदस्य बाल कल्याण समिति सदस्य बनाये गए है , ,बाल कल्याण समिति सदस्य हर हर प्रीत कोर इसके पूर्व कोटा जिला बाल न्यायालय में न्यायिक सदस्य भी रही हैं वर्तमानं में वोह बाल कल्याण समिति सदस्य है उन्हें बालक , बालिकाओं की समस्याओं , उनके मनोविज्ञान , समाधान के बारे में विशेष अनुभव है , उनकी इस पद पर नियुक्ति पर बधाई , मुबारकबाद , माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ द्वारा दिनांक 03.09.2026 को एस.बी. आपराधिक विविध याचिका संख्या 6874/2024, दीपक
कुमार बनाम राजस्थान राज्य में पारित आदेश के अनुपालन में,
और राजस्थान
राज्य विधि सेवा प्राधिकरण, जयपुर से दिनांक 28.10.2026 के पत्र और जिला विधि सेवा प्राधिकरण, कोटा से दिनांक 30.10.2026 के पत्र के माध्यम से संभागीय स्तर किशोर न्याय आयोग (डीयूजेसी) के गठन और प्रभावी कार्यप्रणाली के संबंध में प्राप्त संचार के अनुसरण ,
और संबंधित अधिकारियों से नामांकन प्राप्त होने पर,
कोटा संभाग के लिए संभागीय स्तर किशोर न्याय आयोग का गठन किया गया जिसमें, उक्त चेयरमेन सदस्य नियुक्त हुए,
आयोग का मुख्य कार्य बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) में रहने वाले किशोरों और 18 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके तथा पारिवारिक सहायता से वंचित किशोरों की व्यक्तिगत शिकायतों और समस्याओं का समाधान करना। सरकारी विद्यालयों/कॉलेजों/आईटीआई में तत्काल आश्रय उपलब्ध कराना और कौशल विकास को बढ़ावा देना। . सभी बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई), सुरक्षित स्थानों और देखभाल गृहों का मासिक निरीक्षण करना और राज्य किशोर न्याय परिषद को रिपोर्ट प्रस्तुत करना। . पुनर्वास के लिए बच्चे, उसके परिवार और राज्य के बीच सेतु का काम करना। यह सुनिश्चित करना कि किसी भी देखभाल से मुक्त हुए बच्चे को उचित योजना के बिना संस्था से छुट्टी न दी जाए, जैसा कि आदर्श नियम 2016 के नियम 25 के तहत अनिवार्य है। आयोग के सभी सदस्य माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार उपरोक्त कार्यों का प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित करेंगे और आयोग के प्रभावी कामकाज के लिए पूर्ण सहयोग और समन्वय प्रदान करेंगे।

वह लोग कहने लगे ऐ सालेह इसके पहले तो तुमसे हमारी उम्मीदें वाबस्ता थी तो क्या अब तुम जिस चीज़ की परसतिश हमारे बाप दादा करते थे उसकी परसतिश से हमें रोकते हो और जिस दीन की तरफ तुम हमें बुलाते हो हम तो उसकी निस्बत ऐसे शक में पड़े हैं

 और (हमने) क़ौमे समूद के पास उनके भाई सालेह को (पैग़म्बर बनाकर भेजा) तो उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़़ुदा ही की परसतिश करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं उसी ने तुमको ज़मीन (की मिट्टी) से पैदा किया और तुमको उसमें बसाया तो उससे मग़फिरत की दुआ माँगों फिर उसकी बारगाह में तौबा करो (बेशक मेरा परवरदिगार (हर शख़्स के) क़रीब और सबकी सुनता और दुआ क़ुबूल करता है (61)
वह लोग कहने लगे ऐ सालेह इसके पहले तो तुमसे हमारी उम्मीदें वाबस्ता थी तो क्या अब तुम जिस चीज़ की परसतिश हमारे बाप दादा करते थे उसकी परसतिश से हमें रोकते हो और जिस दीन की तरफ तुम हमें बुलाते हो हम तो उसकी निस्बत ऐसे शक में पड़े हैं (62)
कि उसने हैरत में डाल दिया है सालेह ने जवाब दिया ऐ मेरी क़ौम भला देखो तो कि अगर मैं अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन दलील पर हूँ और उसने मुझे अपनी (बारगाह) मे रहमत (नबूवत) अता की है इस पर भी अगर मै उसकी नाफ़रमानी करुँ तो ख़ुदा (के अज़ाब से बचाने में) मेरी मदद कौन करेगा-फिर तुम सिवा नुक़सान के मेरा कुछ बढ़ा दोगे नहीं (63)
ऐ मेरी क़ौम ये ख़ुदा की (भेजी हुयी) ऊँटनी है तुम्हारे वास्ते (मेरी नबूवत का) एक मौजिज़ा है तो इसको (उसके हाल पर) छोड़ दो कि ख़ुदा की ज़मीन में (जहाँ चाहे) खाए और उसे कोई तकलीफ न पहुँचाओ (64)
(वरना) फिर तुम्हें फौरन ही (ख़ुदा का) अज़ाब ले डालेगा इस पर भी उन लोगों ने उसकी कूँचे काटकर (मार) डाला तब सालेह ने कहा अच्छा तीन दिन तक (और) अपने अपने घर में चैन (उड़ा लो) (65)
यही ख़़ुदा का वादा है जो कभी झूठा नहीं होता फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने सालेह और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दी और उस दिन की रुसवाई से बचा लिया इसमें शक नहीं कि तेरा परवरदिगार ज़बरदस्त ग़ालिब है (66)
और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक सख़्त चिघाड़ ने ले डाला तो वह लोग अपने अपने घरों में औंधें पड़े रह गये (67)
और ऐसे मर मिटे कि गोया उनमें कभी बसे ही न थे तो देखो क़ौमे समूद ने अपने परवरदिगार की नाफरमानी की और (सज़ा दी गई) सुन रखो कि क़ौमे समूद (उसकी बारगाह से) धुत्कारी हुई है (68)
और हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) इबराहीम के पास खुषख़बरी लेकर आए और उन्होंने (इबराहीम को) सलाम किया (इबराहीम ने) सलाम का जवाब दिया फिर इबराहीम एक बछड़े का भुना हुआ (गोष्त) ले आए (69)
(और साथ खाने बैठें) फिर जब देखा कि उनके हाथ उसकी तरफ नहीं बढ़ते तो उनकी तरफ से बदगुमान हुए और जी ही जी में डर गए (उसको वह फरिश्ते समझे) और कहने लगे आप डरे नहीं हम तो क़ौम लूत की तरफ (उनकी सज़ा के लिए) भेजे गए हैं (70)

04 नवंबर 2026

जवान बेटे की असामयिक मृत्यु,परिजनों ने संपन्न कराया नेत्रदान

 जवान बेटे की असामयिक मृत्यु,परिजनों ने संपन्न कराया नेत्रदान

आज सुबह, नम्रता आवास बजरंग नगर,निवासी सरदार जगजीव सिंह के 24 वर्षीय इकलौते सुपुत्र दमन दीप सिंह के आकस्मिक निधन की सूचना से पूरे बजरंग नगर क्षेत्र में शोक की लहर आ गई ।

देर रात परिवार के साथ,खाना खाने के बाद दमनदीप सोने चले गए और सुबह जब उनकी माँ रुपिंदर कौर जगाने गई,तो वह नहीं उठे । कम उम्र में इस तरह की घटना ने पूरे परिवार को सदमे में ला दिया ।

दमन दीप कम उम्र से ही सेवा कार्यों में जुड़े रहे, वह एक नियमित रक्तदाता भी थे। परिजनों ने उनके सेवा कार्यों को देखते हुए, उनके नेत्रदान करवाने का निर्णय लिया और सुबह जल्दी ही संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ को संपर्क किया ।

डॉ गौड़ के मार्गदर्शन और दिशानिर्देश पर टैक्नीशियन ने शोक भरे माहौल में,नेत्रदान की प्रक्रिया सम्पन्न कि ।
इस दुखद घटना पर सिख समाज, व्यापार मंडल और शहर के कई सारे सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने शोक व्यक्त किया है ।

ऐ मेरी क़ौम मै उस (समझाने पर तुमसे कुछ मज़दूरी नहीं माँगता मेरी मज़दूरी तो बस उस शख़्स के जि़म्मे है जिसने मुझे पैदा किया तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते

 ऐ मेरी क़ौम मै उस (समझाने पर तुमसे कुछ मज़दूरी नहीं माँगता मेरी मज़दूरी तो बस उस शख़्स के जि़म्मे है जिसने मुझे पैदा किया तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते (51)
और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ माँगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न हेागी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों (52)
वह लोग कहने लगे ऐ हूद तुम हमारे पास कोई दलील लेकर तो आए नहीं और तुम्हारे कहने से अपने ख़़ुदाओं को तो छोड़ने वाले नहीं और न हम तुम पर ईमान लाने वाले हैं (53)
हम तो बस ये कहते हैं कि हमारे ख़ुदाओं में से किसने तुम्हें मजनून (दीवाना) बना दिया है (इसी वजह से तुम) बहकी बहकी बातें करते हो हूद ने जवाब दिया बेशक मै ख़ुदा को गवाह करता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि तुम ख़़ुदा के सिवा (दूसरों को) उसका शरीक बनाते हो (54)
इसमे मै बेज़ार हूँ तो तुम सब के सब मेरे साथ मक्कारी करो और मुझे (दम मारने की) मोहलत भी न दो तो मुझे परवाह नहीं (55)
मै तो सिर्फ ख़़ुदा पर भरोसा रखता हूँ जो मेरा भी परवरदिगार है और तुम्हारा भी परवरदिगार है और रुए ज़मीन पर जितने चलने वाले हैं सबकी चोटी उसी के साथ है इसमें तो शक ही नहीं कि मेरा परवरदिगार (इन्साफ की) सीधी राह पर है (56)
इस पर भी अगर तुम उसके हुक्म से मुँह फेरे रहो तो जो हुक्म दे कर मैं तुम्हारे पास भेजा गया था उसे तो मैं यक़ीनन पहुँचा चुका और मेरा परवरदिगार (तुम्हारी नाफरमानी पर तुम्हें हलाक करें) तुम्हारे सिवा दूसरी क़ौम को तुम्हारा जानशीन करेगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते इसमें तो शक नहीं है कि मेरा परवरदिगार हर चीज़ का निगेहबान है (57)
और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने हूद को और जो लोग उसके साथ इमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दिया और उन सबको सख़्त अज़ाब से बचा लिया (58)
(ऐ रसूल) ये हालात क़ौमे आद के हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार की आयतों से इन्कार किया और उसके पैग़म्बरों की नाफ़रमानी की और हर सरकश (दुश्मन ख़़ुदा) के हुक्म पर चलते रहें (59)
और इस दुनिया में भी लानत उनके पीछे लगा दी गई और क़यामत के दिन भी (लगी रहेगी) देख क़ौमे आद ने अपने परवरदिगार का इन्कार किया देखो हूद की क़ौमे आद (हमारी बारगाह से) धुत्कारी पड़ी है (60)

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