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06 मई 2021

हाड़ोती पत्रकारिता के भीष्म पितामह भंवर शर्मा अटल को ,,,( 06/05/2021)हार्दिक श्रद्धांजली

हाड़ोती पत्रकारिता के भीष्म पितामह भंवर शर्मा अटल को ,,,( 06/05/2021)हार्दिक श्रद्धांजली,, हाड़ोती पत्रकारिता के भीष्म पितामह भंवर शर्मा अटल को कौन नहीं जानता ,,,,विज्ञान के इस कम्प्यूटर युग के पत्रकारिता के परिवर्तन दौर में आज भी भवंर शर्मा अटल की पत्रकारिता गाइड लाइन जस की तस है ,,और उनके दैनिक समाचार पत्र जननायक में प्रशिक्षित पत्रकारों की एक लम्बी फौज पुरे राजस्थान में अपनी प्रतिभा दिखा रही है ,,,जी हाँ दोस्तों खाण्डल विप्र ब्राह्मण परिवार में पन्द्राह मई उन्नीस सो बयालीस में जयपुर के पास जन्मे भंवर शर्मा अटल बालपन से ही संवेदनशील ,,जुझारू ,,संघरशील ,,इरादों के पक्के रहे ,,भंवर शर्मा अटल कोटा में आये और उन्होंने कोटा में हिंदी पत्रकारिता में विविध अयं स्थापित करते हुए ऐतिहासिक परिवर्तन प्रक्रिया के तहत कोटा से आज़ाद भारत का हिंदी का पहला दैनिक ,,जननायक ,,अख़बार का प्रकाशन शुरू किया ,,दैनिक जननायक पहले कोटा फिर सवाईमाधोपुर ,,चित्तोड़ से प्रकाशित होने लगा जो पुरे हाड़ोती में सबकी खबर लेता था सबको खबर देता था ,,,ट्रेडिल ,,कम्पोज़िंग के ज़माने से शुरू होकर कम्प्यूटर ऑफसेट युग तक जननायक का सफलतम प्रकाशन हुआ ,,,,भंवर शर्मा अटल ने कोटा में सांध्य दैनिक प्रकाशन के रूप में पहला सांध्य दैनिक अमर नायक समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया और काफी हद तक सफलतम पत्रकारिता के आयाम स्थापित किये ,,भंवर शर्मा अटल की बेबाक लेखनी ,,बेबाक प्रकाशन ,,निर्भीक आचरण ,,गरीबों ,,शोषितो ,,पीड़ितों को न्याय दिलवाने के स्वभाव ने भवंर शर्मा अटल को पत्रकारिता का युग पुरुष बना दिया ,,,,भंवर शर्मा अटल ने कई सरकार बनते बिगड़ती देखी ,,उन्होंने भेरोसिंह शेखावत , बरकतुल्लाह , हरिदेव जोशी , शिवचरण माथुर के किस्से नज़दीक से देखे है , कोटा आगमन पर वोह जननायक ज़रूर रुकते थे , अशोक गहलोत सहित वर्तमान दिग्गजों के भी वोह नज़दीकी थे , भंवर शर्मा अटल पत्रकारिता संघरध में कई बार हमले के शिकार हुए , अधिकारियों , सरकारों की प्रताड़ना उन्होंने झेली , लेकिन पत्रकारिता इक़बाल उन्होंने हमेशां बुलन्द रखा , कभी समझौता नहीं किया ,, मुझे उनके साथ डेढ़ दशक से भी ज़्यादा , सम्पादन , रिपोर्टिंग कार्य का अनुभव मिला , दंगे फसाद , युद्ध रिपोर्टिंग , मेले , ठेले , आंदोलन , चुनाव विश्लेषण , बेबाक खबरों की इन्वेस्टिगेशन , फॉलोअप , फ़िल्म फेस्टिवल रिपोर्टिंग , औद्योगिक आंदोलनों , उनके उतार चढ़ाव की रिपोर्टिंग , में , उन्होंने मुझे कुंदन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी ,, सम्पादन क्षेत्र में फ्री हेंड , उनका कोई हस्तक्षेप नहीं , खबर खूफ की भी छपवाना हो तो आजिज़ी , के साथ , खबर का खंडन लाख दबाव के बाद भी कभी नहीं , बहुत कुछ यादें हैं ,, एक तरफ जहां भवंर शर्मा अटल ने सेकड़ो पत्रकारों को प्रशिक्षित किया तो दूसरी तरफ कोटा में हज़ारो लोगों को सियासत सिखाई जो जनप्रतिनिधि के रूप में सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर रहे ,,,,,कोटा में दैनिक राजस्थान पत्रिका ,,दैनिक भास्कर के प्रकाशन होने तक हाड़ोती में जननायक के भंवर शर्मा अटल का एक छत्र पत्रकारिता का राज था ,,,उनके प्रकाशन में खबर का खंडन प्रतिबंधित था ,,,,पत्रकारिता की निर्भीक रिपोर्टिंग के कारण उन्हें काफी संघर्ष करना पढ़े लेकिन आखिर में जीत सिर्फ उन्ही की हुई ,,,,,,कोटा में प्रेस क्लब के स्थापना करने वाले भंवर शर्मा अटल ने पत्रकारिता की परिभाषा बदलने ,,उसके बाज़ारो और बिकाऊ होने के बाद पत्रकारिता से सन्यास लेना मुनासिब समझा और उन्होंने दैनिक जननायक का प्रकाशन दूसरे हाथो में दे दिया ,,,, भंवर शर्मा अटल आज चाहे हमारे बीच मौजूद नहीं है , लेकिन उनकी देह , उनका पार्थिव शरीर , मेडिकल कॉलेज को डोनेट होने से , वो आज भी चिकित्सा शिक्षा के लिये उपयोगों बने है ,, लेकिन उनका दिल ,, उनका दिमाग ,,उनकी ज़ुबान मरते दम तक भी एक नौजवान पत्रकार की तरह तेज़ तर्रार रही ,,,,खबर को देखना उनकी पेनी निगाह में शामिल था ,,तो खबर को निर्भीकता से लिखना उनकी बेबाक क़लम की तासीर थी ,,,,उनकी निर्भीकता ,,निडरता ,, न्यायप्रियता और शोषित ,,उत्पीड़ितों के लिए उनका दर्द मज़लूमों को आज भी याद है और इनके ज़माने के लोग आज भी भंवरशर्मा अटल की जननायक पत्रकारिता को याद कर क़िस्से सुनाते है ,,भंवर शर्मा अटल रेडक्रॉस के योद्धा थे , पत्रकारों की कई राष्ट्रीय , प्रादेशिक समितियों में थे , कोटा प्रेस क्लब के संस्थापक थे , रोटेरियन थे , क़लम के योद्धा थे हाडौती में पहले दैनिक जननायक , पहले सांध्य दैनिक अमर नायक के प्रकाशक , सम्पादक का इतिहास है ,,,हाड़ोती पत्रकारिता के भीष्म पितामह भंवर शर्मा अटल को श्रद्धांजलि सेल्यूट ,,, ,,,,,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

लोकडाउन समर्थकों

 लोकडाउन समर्थकों , सभी के घरों के बाहर ताले चाहे लटकवा दो , लेकिन अस्पतालों में ऑक्सीजन , दवाइयां , वेंटिलेटर , व्यवस्थाएं करवा दो , अस्पतालों की लूट रुकवा दो, लोकडाउन , शतुरमुर्ग की तरह , रेत में मुंह छूपाने जैसा है , नाकामयाबी छुपाने जैसा है , घर से कोई फालतू नहीं , ऐसी में बैठकर लोकडाउन लोकडाउन कहना आसान है , अख़्तर

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब , जज साहिब की टिप्पणी

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब , जज साहिब की टिप्पणी , फैसले या आदेश का हिस्सा नहीं होती, तो क्या ऐसी टिप्पणी का कोई न्यायिक हक़ है , न्याय के देवता ने सुनवाई में जो महसूस किया , वो ऑर्डर शीट पर होना ही चाहिए , बार कौंसिल , पूर्व न्यायाधीश साहिब क्या कहते है , सियासत ओर न्यायिक वार्तालाप में फर्क तो होना ही चाहिए , अख्तर

कोटा में सर्वसमाज नारा ,, नेताओं में नेता , पंकज मेहता ,, को हाड़ोती संभाग में हर दिल अज़ीज़ नेतृत्व साबित करने के लिए काफी है , अखिल भारतीय कोंग्रेस स कमेटी के सदस्य पूर्व प्रदेश महासचिव , प्रवक्ता ,, हाड़ोती के गांधी की एक पहचान रखते है , भाई पंकज मेहता को उनके जन्म दिन पर , कामयाबी , खुशहाली , सह्तयाबी , उम्रदराज़ी की ढेरों दुआओं के साथ ,, शुभकामनाये , बधाई

कोटा में सर्वसमाज नारा ,, नेताओं में  नेता , पंकज मेहता ,, को  हाड़ोती संभाग में हर दिल अज़ीज़ नेतृत्व साबित करने के लिए काफी है , अखिल भारतीय कोंग्रेस स कमेटी के सदस्य पूर्व प्रदेश महासचिव , प्रवक्ता ,, हाड़ोती के गांधी की एक पहचान रखते है , भाई पंकज मेहता को उनके जन्म दिन पर , कामयाबी , खुशहाली , सह्तयाबी , उम्रदराज़ी की ढेरों दुआओं के साथ ,, शुभकामनाये , बधाई ,, मुबारकबाद ,, जी हाँ दोस्तों , हर दुःख दर्द , के वक़्त ,  जब कोई कार्यकर्ता अपना हमदर्द तलाशता है , तो उसके मुंह से एक ही नारा ,, नेताओं में नेता , पंकज मेहता ही बेसाख्ता निकलता है ,, यारों के यार , कार्यकर्तों के हमदर्द ,,  हर दिल अज़ीज़ , पंकज मेहता , हमेशा फोन पर , भौतिक रूप से , अपने निवास पर , या फिर गुमानपुरा स्थित चौकी के पास , विजयवर्गीय भवन में अपने कार्यालय में ,, हमेशा मौजूद मिलते है ,, एक सरकारी नौकरी की तरह , सेवा की नौकरी , नियमित दस से पांच बजे कार्यालय पर ,बैठना , ज़रूरतमंद , पीड़ितों , कार्यकर्तों  की जन सुनवाई करना , उनके लिए सिफारिशी पत्र लिखना , कोटा जिला कलेक्टर , पुलिस अधीक्षक , कोटा रेंज आई जी , सहित ज़रूरत मंदों की ज़रूरत के मुताबिक़ तुरंत , फोन कर , उनकी समस्याओं का समाधान करना ,, लेकिन  जो आये , पहले ,, ठंडा पानी , फिर   पंकज मेहता के प्यार की चाय ,, फिर उसके काम के बारे में सुनवाई कर , उसकी समस्या का समाधान , इनके कार्यालय में कोई शख्स , प्रताड़ित , रोता हुआ आये और , हँसता हुआ वापस जाए ,बस यही उनकी हर सम्भव कोशिश बनी रहती है ,  कोटा कांग्रेस में , छात्र कांग्रेस ऍन एस यू आई , फिर यूथ कांग्रेस ,,  के कुशल आक्रामक नेतृत्व के बाद , पंकज मेहता  कई सालों तक कोटा जिला कांग्रेस शहर जिला अध्यक्ष रहे , इनके अध्यक्षीय कार्यकाल में ,, जिला कांग्रेस कमेटी में कार्यकर्ताओं का जमावड़ा , इनकी नियमित उपस्थित और हर आने वाले की , चाय नाश्ते से मेहमानवाज़ी इनके खुद के खर्च  पर इनकी ज़िम्मेदारी थी , यह हर रोज़ नियमित कांग्रेस कार्यालय में , कार्यकर्ताओं के लिए उपस्थित मिलते थे ,, , इनके कार्यकाल में , कांग्रेस की कई महत्वपूर्ण रेलिया  , ,आक्रामक धरने , प्रदर्शन हुए  ,, पूर्व  मंत्री स्वर्गीय रामकिशन वर्मा के नेतृत्व में राजनीति का पाठ पढ़कर , ईमानदारी , चरित्रवान राजनीति के साथ , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नज़दीकियों  के चलते , पंकज  मेहता , गाँधीवादी विचारक बने , आज वोह राजस्थान में गाँधी मिशन से जुड़े है , वोह खुद , अपने कार्यक्रमों , स्वभाव , विचारधारा के चलते , हाड़ोती के गांधी के रूप में अपनी पहचान बना चुके है ,, पंकज मेहता , कोटा जिला कांग्रेस अध्यक्ष की सफलतम  दो परियों के बाद , प्रदेश कांग्रेस में मुखर प्रवक्ता बनाये गया , उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव बनाकर , टोंक , बूंदी ,  झालावाड़ , सहित कई महत्वपूर्ण ज़िलों में , संगठन  प्रभारी बनाया गया ,, पंकज मेहता ज़मीनी कार्यर्कता है , वोह ज़मीन से जुड़े है , वोह कार्यर्कताओं का दर्द समझते है , उनमे वी आई पी ठसका नहीं है , कार्यकर्ताओं से वोह रोज़  मिलने की कोशिश करते है , फोन करते है , उन्हें उनके जन्म दिन , सहित हर ख़ुशी के मौके पर बधाइयां देते है , जबकि उनके दुःख दर्द में सबसे अव्वल , सर्वप्रथम खड़े नज़र आते है ,  मुख्यमत्री अशोक जी गहलोत ,, कई अवसरों पर ,उनसे चर्चा करते हैं , उनके सुझावों को क्रियान्वित भी करते है ,,  पंकज मेहता ,, महात्मा गांधी मिशन से , दो दशक से ,, लगातार जुड़कर , गांधी विचारधारा पर , हाड़ोती में , सैकड़ों गोष्ठियां करवा चुके है , गाँधी विचारक , सुब्बराराव ,, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , सहित कई वरिष्ठ गांधी वादी विचारकों को ,, कोटा में बुलाकर , कई , राष्ट्रव्यापी , राज्य व्यापी मोटिवेशनल व्याख्यान करवाए है ,, सेमिनारें आयोजित की है ,, पंकज मेहता को मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत ने , गांधी दर्शन कार्यक्रम का कोटा जिला संयोजक भी बना रखा है , वोह अपने इस दायित्व को जिला प्रशासन के ज़िम्मेदार अधिकारीयों के साथ , चाहे कोटा जेल हो , कोटा के अलग अलग स्कूल हो , कॉलेज हों ,, कार्यकर्ताओं की बैठकें हो , दलित बस्तियां हों , अल्पसंख्यक बस्तियां हो , छत्तीस क़ौमों के साथ ,  लगातार कार्यक्रम कर रहे है , पंकज मेहता ,, कोटा जिला कांग्रेस न्यास के सक्रिय सदस्य भी है , जबकि इनके नेतृत्व ,  माइक्रो , इलेक्शन प्रबंधन को देखते हुए ,  इन्हे सभी  बढे चुनाव में , आसाम , बंगाल , बिहार , उत्तर प्रदेश , मध्य्प्रदेश , हरियाणा , दिल्ली सहित , कई राज्यों के प्रमुख ज़िलों में , चुनाव प्रबंधन के लिए पर्वेक्षक बनाकर भेजा है , झालावाड़ प्रभारी कार्यकाल में ,जब , पंकज मेहता के सामने ,, वसुंन्धरा सिंधिया के मुख्यमंत्री रहते , झालावाड़ में नगर निगम चुनाव में , कांग्रेस का बोर्ड बनाने की चुनौती थी , तब   पंकज मेहता ने , इस चुनौती को स्वीकार किया , और झालावाड़ में , वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री कार्यकाल में ,  सभी दम खत्म के प्रयासों को विफल करते हुए ,,, झालावाड़ में ,, कांग्रेस निगम का बोर्ड बनाकर , कांग्रेस का चेयरमेन बनाने में सफलता हांसिल की ,, पंकज मेहता ,कुशल वक्ता है , हर कार्यकर्ता के लिए हमेशा एवेलेबल है , अपने कार्यकर्तों के लिए , संघर्ष करना इनका स्वभाव है , उनकी तन , मन , धन ,से मदद करना , पंकज मेहता को उनके कार्यकर्ताओं के लिए , उनका अपना पारिवारिक नेतृत्व बनाने के लिए काफी है ,, छतीस कोमो के साथ , उनकी समस्याओं के लिए संघर्ष इनकी पहचान है , विवादों से अलग थलग , सभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के सम्मान के साथ , उनके नेतृत्व के प्रति विनम्र स्वीकारोक्ति , इनकी पहचान है , भाजपा के नेतृत्व में भी इनकी सहज ह्रदयता के चलते ,, इनके प्रति सभी का सम्मान है , यही वजह है ,के पंकज मेहता जब ,, हार्ट अटेक आने से , कोटा हार्ट अस्पताल में भर्ती हुए , तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ साथ ,भाजपा के भी सभी छोटे बढे नेता , उनके स्वास्थ्य की कुशल क्षेम को तत्काल पहुंचे ,, पंकज मेहता कोटा दक्षिण से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे है , लेकिन विकट हालातों के चलते वोह चुनाव तो हार गए , लेकिन वोह हार कर भी जीत गए , क्योंकि कोटा दक्षिण सहित कोटा की जनता के बीच आज भी वोह लाडले है , कोटा की जनता को लगातार , जनता के बीच रहने वाले इस , पंकज मेहता से हमदर्दी है वोह सभी , पंकज मेहता को , राज्य स्तर पर ,, बेहतरीन नेतृत्व , बेहतरीन पद मिले  ,  ऐसी दुआएं भी करते है , क्योंकि उनका मानना है के जो शख्स अभी , इन हालातों में , लोगों के दुखदर्द में साथी बन कर खड़ा है ,, जो शख्स , बीमारी ,, या किसी भी ज़रूरत के लिए हर वक़्त तय्यार है , जिसका फोन , जिसके घर और कार्यालय के दरवाज़े हर शख्स के लिए हमेशा खुले है ,, जिसके कार्यालय में हर रोज़ दो सो से भी अधिक ज़रूरतमंद आते है , जिनके काम होते है , इनमे से दो दर्जन से भी अधिक तो वोह होते है ,  जो पंकज मेहता को नहीं जानते , बस उनके सभी का काम करने की ख्याति के चलते वोह उम्मीद लेकर उनके पास आते है ,, इनमे कई लोग भाजपा वैचारिक वोटर भी होते ,है  लेकिन पंकज मेहता उनकी ज़रूरत देखते है ,, और बिना किसी ना नुकुर के उनकी समस्या के समाधान में जुट जाते है , अभी कोरोना , महामारी के वक़्त सैकड़ों मरीज़ों को भर्ती कराने से लेकर , जांच  वगेरा की व्यवस्था के लिए पंकज मेहता मसीहा साबित हुए है , प्राइवेट हॉस्पिटल में भी कई मरीज़ों का ,, रियायती दर पर ,, इलाज करवाया है ,, कोटा नगर निगम , महापौर चुनाव कार्यकाल में , एक दशक पूर्व जब , बेईमानी हुई , और गड़बड़ी की शिकायतें आयीं ,, तो पंकज मेहता के नेतृत्व में विरोध होने पर , पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ने ज़्यादती की , लाठियां भांजी , लेकिन , पंकज मेहता की शिकायत पर , ऐसे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारीयों को चौबीस घंटे में , हटाया गया ,,, यूँ तो पंकज मेहता के व्यक्तित्व , कृतित्त्व ,, यारबाजी , कुशल नेतृत्व , हमदर्दाना मदद के क़िस्सों की लम्बी से भी लम्बी फहरिस्त है ,, राजस्थान रोडवेज में निदेशक के पद पर रहते , पंकज मेहता ने कई बेरोज़गारों को रोज़गार भी दिलवाये है , जबकि जिला और राज्य स्तर की समितियों में रहते , पंकज मेहता के कार्यकाल ,में , कई घोटालों को भी पंकज मेहता ने उजागर कर , दोषी अधिकारीयों को सज़ा दिलवाई है ,, पंकज मेहता को अगर कोई ज़िम्मेदारी मिलती है , अगर कोई गाइड लाइन बनती है , तो फिर इनके नेतृत्व में उस गाइड लाइन की पालना सुनिश्चित किया जाना इनकी ज़िम्मेदारी हो जाती है , और इसीलिए अनेको बार , प्रोटोकॉल निर्विवाद व्यवस्था में , कई लोग इनसे नाराज़  भी हो जाते है ,, और ऐसे नाराज़ लोगों में ,, इनके अपने  भी होते है , क्योंकि यह गाइडलाइन की पालना के वक़्त , अपना पराया देखे बगैर निष्पक्ष , निर्विवाद तरीके से उसकी पालना करते है , ऐसी  शख्सियत , जो मेरे स्कूली सखा भी है , उन्हें , दिल से सेल्यूट , सलाम ,, सालगिरह , जन्म दिन की बेशुमार दुआएं , अल्लाह उन्हें , महत्वपूर्ण राजकीय पद की ज़िम्मेदारी दिलवाये ताके , राजस्थान स्तर के प्रताड़ित , पीड़ित लोगों की , गांधीवादी तरीके से , अशोक गहलोत के नेतृत्व में उनके निर्देशानुसार ,, बिना किसी हील हुज्जत , रोक टोक के , हर ज़रूरत मंद की मदद हो सके ,, ,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान  

अगर हम चाहें तो उसे खारी बना दें तो तुम लोग शुक्र क्यों नहीं करते

 अगर हम चाहें तो उसे खारी बना दें तो तुम लोग शुक्र क्यों नहीं करते (70)
तो क्या तुमने आग पर भी ग़ौर किया जिसे तुम लोग लकड़ी से निकालते हो (71)
क्या उसके दरख़्त को तुमने पैदा किया या हम पैदा करते हैं (72)
हमने आग को (जहन्नुम की) याद देहानी और मुसाफिरों के नफ़े के (वास्ते पैदा किया) (73)
तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो (74)
तो मैं तारों के मनाजि़ल की क़सम खाता हूँ (75)
और अगर तुम समझो तो ये बड़ी क़सम है (76)
कि बेशक ये बड़े रूतबे का क़ुरआन है (77)
जो किताब (लौहे महफूज़) में (लिखा हुआ) है (78)
इसको बस वही लोग छूते हैं जो पाक हैं (79)
सारे जहाँ के परवरदिगार की तरफ से (मोहम्मद पर) नाजि़ल हुआ है (80)

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