आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

01 दिसंबर 2021

एकमात्र माध्यम जिसने हर छोटे से बड़े व्यवसाय को अपनी पारी खेलने की अनुमति दी है, वह है BNPL Payment Model।

 

भारत में BNPL कंपनी कैसे शुरू करें? Start a BNPL Payment Model In India

Posted: 01 Dec 2021 12:06 AM PST

एकमात्र माध्यम जिसने हर छोटे से बड़े व्यवसाय को अपनी पारी खेलने की अनुमति दी है, वह है BNPL Payment Model।

यह समझने से पहले कि भारत में BNPL Payment Model Company स्थापित करने के लिए क्या आवश्यक है। भारत में BNPL शुरू करने के लिए इस बिजनेस मॉडल के मूल सिद्धांतों (Fundamentals) के साथ खुद को शिक्षित करें।

बीएनपीएल व्यवसाय शुरू करने के लिए, Smart तकनीकों के साथ एक रणनीतिक योजना की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, विदेश की सबसे बड़ी बीएनपीएल कंपनी जिसका नाम ‘आफ्टरपे’ है, ग्राहकों को चार भुगतानों में चीजों के लिए भुगतान करने की अनुमति देती है। यह 50k से अधिक ऑनलाइन व्यापारियों के साथ सहयोग करता है जिन्होंने इसकी भुगतान विधियों को स्वीकार करना चुना है।

बाद में खरीदें (बीएनपीएल) सेवा, जो ग्राहकों को चार किस्तों के दौरान चीजों के लिए भुगतान करने की अनुमति देती है। उपभोक्ता वित्त का सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बीएनपीएल है।

ऐसी बीएनपीएल कंपनियां ग्राहकों को अपने पार्टनर Merchant से खरीदारी करने के लिए अपनी भुगतान योजनाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। कंपनी एक एफिलिएट मार्केटिंग बिजनेस मॉडल की तरह काम करती ह। जिसमें बिजनेस को एफिलिएट कमीशन से मुनाफा होता है।


BNPL Payment Model से ग्राहकों को लाभ

भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए BNPL Payment Model के अनगिनत लाभ हैं।

  1. Registration प्रक्रिया आसान है। कोई सेट-अप शुल्क की आवश्यकता नहीं ह।
  2. सेवा एक App के माध्यम से सुलभ ह।
  3. Customer कई किश्तों में (4 से 10) के बीच भुगतान कर सकता है।
  4. बीएनपीएल मॉडल ऐप का उपयोग सेवा के साथ सौंपे गए किसी भी स्टोर (किराने की दुकानों सहित) में किया जा सकता है।
  5. लेन-देन पर कोई ब्याज नहीं लिया जाता है (ZERO/NO-INTEREST)
  6. इसका Credit Score पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है (हालांकि, चुकौती प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए कुछ सख्त नियम बनाए गए है)।

BNPL App के माध्यम से भुगतान कैसे किया जाता है?

बीएनपीएल ऐप में एक ‘Pay’ विकल्प है, जिसके इस्तेमाल से एक Barcode Scanner खोला जाता है। एक स्टोर ऑपरेटर या कैशियर अपने Software System में भुगतान करने के लिए राशि दर्ज करेगा।

फिर एक बारकोड प्रदर्शित करने वाली हैंड स्क्रीन या Pay Machine प्रस्तुत करेगा। आपको बस कोड को Scan करने की आवश्यकता है, और भुगतान स्वीकृत (Approve) हो जाएगा।

आपके खाते से पहली किस्त तुरंत काट ली जाएगी। शेष किश्तें आपके खाते से मासिक या निर्धारित आधार पर Debit की जाएंगी।


BNPL Model के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान कैसे करें?

बीएनपीएल सेवा की ऑनलाइन भुगतान प्रक्रिया Net Banking या EMI के समान है। हालाँकि, कुछ परिवर्तन हैं:

  • सबसे पहले, ग्राहक को सेवा का आनंद लेने के लिए बीएनपीएल सिस्टम में पंजीकरण (Register) करना होगा
  • एक eCommerce स्टोर बीएनपीएल भुगतान विकल्प प्रदर्शित करेगा जैसे:

FLX Shoes Price: ₹999/-

BNPL के साथ 6 किश्तों में उपलब्ध: 999/6 = ₹166.5

तो ₹166.5 का भुगतान ग्राहक द्वारा मासिक या अनुसूचित (Scheduled) आधार पर किया जाना है, जैसा कि कहा गया है।

  • जब कोई उपयोगकर्ता किसी उत्पाद या सेवा को ऑनलाइन खरीदना चाहता है, तो उसे लॉगिन Credentials दर्ज करना होग।
  • ₹166.5 की पहली किस्त का अग्रिम (Upfront) भुगतान करना होगा। और बाकी बाद में

कुछ बीएनपीएल कंपनियां भुगतान करने के लिए आधार राशि के रूप में ₹50/- की रणनीति के साथ आ सकती हैं। और शेष किश्तों की संख्या में विभाजित किया गया।


किराना खरीदारी (Grocery), Restaurant भोजन और यात्रा (Travel) को आसान बनाया गया

BNPL Payment Model ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जिसने हर छोटे से बड़े व्यवसाय को अपनी पारी खेलने की अनुमति दी है।

पहले, एक नए शहर में, क्रेडिट के आधार पर किराना खरीदने के बारे में सोचना भी काफी मुश्किल था। और अब हम केवल Barcode Scan करके कुछ भी खरीद सकते हैं।

तनख्वाह नहीं मिलने पर भी परिवार के साथ Restaurant में खाना खा रहे हैं। क्या यह पहले संभव था?

यहां तक ​​कि बिना अग्रिम भुगतान (Upfront Payment) किए बस, Taxi या किसी Transit का उपयोग करके स्थानीय रूप से यात्रा करना भी मुश्किल था।

BNPL model में सबके लिए कुछ न कुछ है।


क्या छात्र (Students) बाद में अपनी Fees का भुगतान कर सकते हैं?

भारत में बीएनपीएल भुगतान मॉडल की सभी आनंद सेवाओं के अलावा। छात्रों के लिए बीएनपीएल अभी तक शुरू नहीं किया गया है।

इसका एकमात्र जोखिम यह है कि क्या कोई छात्र राशि चुकाने के योग्य है या नहीं। और यह जोखिम भारत में बेरोजगारी की उच्च दर के कारण मौजूद है। साथ ही शिक्षा की भारी मांग और आपूर्ति भी प्रमुख कारण हैं।

इस अवसर को अस्तित्व में लाने के लिए, BNPL Companies को अधिक वित्तीय साक्ष्य (Financial Evidences) प्राप्त करने की आवश्यकता है।

एक कंपनी Bank Statement और वेतन पर्ची (Salary Slips) के रूप में माता-पिता की वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) दस्तावेज प्रदान करने के लिए कह सकती है।

आवश्यक दस्तावेज़ों (Necessary Docs) के लिए एक प्रावधान हैं की; एक छात्र तब पढ़ाई के लिए खरीदें-अभी-भुगतान-बाद में सेवा प्राप्त करने के लिए उत्तरदायी (Liable) होगा।


हलाल समुदाय (Community) के लिए ब्याज के बिना खरीदारी के लिए उपयुक्त

बीएनपीएल बिना ब्याज के प्रदान किया गया एक अस्थायी (Temporary) या अल्पकालिक ऋण (Short-Term Loan) है। इस्लाम के समुदाय ने कभी भी दुनिया भर में ऋण प्रक्रियाओं (Loan Procedures) का समर्थन नहीं किया है। यह ब्याज-आधारित पुनर्भुगतान (Interest-Based Repayments) के कारण था, जिसे वे पसंद नहीं कर सकते।

बिल्कुल नया BNPL Payment Model बिना ब्याज चुकाए ऋण प्राप्त करने का अवसर लेकर आया है।


भारत में BNPL Payment Model से व्यापारियों को लाभ

यहां बताया गया है कि व्यापारियों को आपके व्यवसाय के लिए BNPL पर विचार क्यों करना चाहिए:

  • आपके ग्राहकों के लिए जोखिम-मुक्त लेनदेन
  • BNPL Business Portal के भीतर व्यावसायिक उपस्थिति
  • ग्राहक किश्तों (Installments) में भुगतान करते हैं (अच्छे और बुरे समय में)
  • नए ग्राहकों को अधिक बार देखें
  • व्यापारी को यथाशीघ्र भुगतान (असप Payments)

व्यापारियों से अपेक्षित प्रतिशत (Expected Percent)

व्यापारियों के अनुसार, आम तौर पर, खुदरा विक्रेताओं (Retailers) से बीएनपीएल का अपेक्षित शुल्क लगभग ₹12 प्रति लेनदेन (पैर Transaction) होता है। और लेन-देन की मात्रा शुल्क 4 से 8 प्रतिशत (%) के बीच भिन्न होता है।


भारत में बीएनपीएल मॉडल के अपेक्षित राजस्व स्रोत (Expected Revenue Sources) क्या हैं?

बीएनपीएल के साथ, विचार करने के लिए दो शुल्क विधियां हैं। आप जो चीज खरीद रहे हैं उसकी कीमत उनमें से एक है। दूसरा देर से भुगतान (Late Fee) के लिए जुर्माना है।

यदि कोई कटौती (Deduction) असफल होती है तो आपको सूचित किया जाएग। और आपके पास Login करने और वैकल्पिक भुगतान (Alternate Pay) पद्धति का चयन करने का विकल्प होगा। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपसे ₹300 का विलंब शुल्क (Late Fee Charges) लिया जाएगा।

यदि आप 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करते हैं तो आपसे अतिरिक्त ₹200 का शुल्क लिया जाएगा। प्रत्येक बीएनपीएल आदेश के लिए आपसे अधिकतम $300 विलंब शुल्क लिया जा सकता है।

मूल खरीद का 28% या अधिकतम ₹2500 का विलंब दंड – जो भी अधिक हो। इसे ₹2000 या उससे अधिक के किसी भी ऑर्डर पर लागू किया जा सकता है। यदि आप अपने बिलों का भुगतान नहीं करते हैं, तो बीएनपीएल के पास आपको क्रेडिट Bureau को Report करने का अधिकार है।


शामिल जोखिम

एक व्यापारी तीन कारणों से अपनी वेबसाइट पर BNPL की अनुमति दे सकता है। व्यापारी ऐसी बिक्री करने में सक्षम हो सकता है जो उसने अन्यथा नहीं की होती, जिसके परिणामस्वरूप आय में वृद्धि होती है। यह नकद अग्रिम जमा कर रहा है, जो इसकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद करता है।

इसके अलावा, ग्राहक के विफल होने पर व्यापारी भुगतान न होने के खतरे से बचता है। हालांकि, अगर ग्राहक विफल रहता है और बकाया राशि का भुगतान नहीं करता है, तो बीएनपीएल को जोखिम का सामना करना पड़ता है। यह व्यापार रणनीति गैर-सहारा फैक्टरिंग के समान है।

यदि कोई ग्राहक भुगतान करने में विफल रहता है, तो कंपनी इस व्यवहार को रोकने के लिए ₹300 विलंब शुल्क और पंद्रह दिनों के बाद एक और ₹200 लगाती है। यदि ग्राहक भुगतान नहीं करने में विफल रहता है, तो कंपनी मूल ऋण और दंड दोनों को बट्टे खाते में डाल देगी।

बीएनपीएल मॉडल की किताबों में, जुर्माना फिर भी आय के रूप में दर्ज किया जाता है। ऐसे व्यवसाय मॉडल के लिए सबसे बड़ा खतरा उन उपभोक्ताओं से नहीं है जो अपने ऋण पर असफल होते हैं, बल्कि उन लोगों से होते हैं जो इस कार्यक्रम का बिल्कुल भी उपयोग नहीं करते हैं।


अपने ‘BNPL व्यवसाय से संबंधित’ प्रश्नों को लिखें

भारत में बीएनपीएल व्यवसाय शुरू करने से पहले कुछ प्रश्न हैं जो आपको खुद से पूछने की जरूरत है। य़े हैं:

प्रश्न 1: यदि मैं यह व्यवसाय करता हूँ तो क्या मैं अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आर्थिक रूप से स्वस्थ हूँ?

प्रश्न 2: क्या मैं अपनी वर्तमान व्यावसायिक गतिविधियों (यदि कोई हो) का प्रबंधन कर पाऊंगा?

प्रश्न 3: क्या मेरे पास जोखिम और हानियों (Risks) को प्रबंधित (Manage) करने के लिए पर्याप्त धन है?

प्रश्न 4: भारत में बीएनपीएल व्यवसाय शुरू करने में क्या जोखिम हैं?

नीचे कमेंट करके इन सवालों के सुझाव प्राप्त करें, ताकि हम विस्तृत उत्तर प्रदान कर सकें।


भारत में BNPL Payment Model Company पंजीकृत (Register) करें

एक व्यवसाय को एक Private Limited Company के रूप में पंजीकृत (Register) करें।

  • न्यूनतम (Min) 2 निदेशक (Directors)
  • न्यूनतम (Min) 2 शेयरधारक (Shareholders)
    निदेशक और शेयरधारक समान हो सकते हैं।
  • PAN Details और Address Proof होना चाहिए।

पंजीकरण की प्रक्रिया – Registration Process

  • Digital Signature Certificate (DSC) और Director Identification Number (DIN) के लिए आवेदन करें।
  • नाम अनुमोदन के लिए आवेदन करें और अन्य ई-फॉर्म भरने के लिए या आप INC 29 एकीकृत फॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।
  • निगमन प्रमाणपत्र (Cert Of Incorporation) जारी करे।
  • कंपनी PAN के लिए आवेदन करें और एक चालू (Current) बैंक खाता खोलें।
  • TAX Registrations and PCI DSS Compliance के लिए आवेदन करें।

Note: सबसे बड़ी BNPL कंपनी व्यापारियों को एक Set और परिवर्तनीय शुल्क (%), साथ ही देर से भुगतान लागत Charge करके पैसा कमाती है। व्यापारियों और ग्राहकों के साथ इन आंतरिक संबंधपरक लेन-देन के समान, इसने इसे सबसे आधुनिक बना दिया है

The post भारत में BNPL कंपनी कैसे शुरू करें? Start a BNPL Payment Model In India appeared first on Adaalat.in.

4 ट्रैफिक नियम जिनका पालन भारतीय नहीं करते vs. विदेशी (Foreign) Rules | Traffic Rules In India

Posted: 29 Nov 2021 11:13 PM PST

1. पैदल यात्री का अनादर करना – Disrespecting Pedestrians

विचारों में अंतर

विदेश में: पैदल यात्री प्रथम, हम प्रतीक्षा करेंगे (Pedestrian First, We’ll Wait As Long As It Takes)

परिस्थिति कैसी भी हो, कितनी भी जरूरी क्यों न हो।

पैदल चलने वालों को हमेशा सड़क पार करने को प्राथमिकता (Priority) दी जाती है।

हालांकि वाहन प्राथमिक सड़क उपयोगकर्ता (Primary Road Users) हैं, फिर भी पैदल चलने वालों को पहले रास्ता दिया जाता है।

Shopping Areas के पास भी, वाहन 10 kmph से अधिक गति से नहीं चला सकते, भले ही कोई पैदल यात्री मौजूद न हो।

दोनों आंखें व्यापक रूप से खुली रखना महत्वपूर्ण है। बाएँ और दाएँ दोनों सिरों पर Mind को Alert रखें।

यदि इस कानून को तोड़ा जाता है तो गंभीर जुर्माना है, लाइसेंस भी लिया जासकता है।

विदेशों में पैदल यात्री Pedestrian Crossing (Zebra Crossing) सिग्नल बटन का भी उपयोग करते हैं। और यह सेवा भारत में उपलब्ध नहीं है।

भारत में: पहले हम निकलेंगे, तुम अपनी जान संभालो (I’ll Move First, You Safeguard Your Life)

भारत के सड़क उपयोगकर्ता (Road Users) अपने स्वयं के मार्ग के नियम बनाते हैं। अगर उन्हें किसी व्यक्ति को रास्ता देने का मन करता है, तो वे करते हैं।

सड़क के कुछ हद तक Clear होने तक ज्यादातर समय पैदल चलने वालों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।

भले ही कोई सड़क पार करने के लिए थोड़ी सुरक्षित हो, फिर भी भारत में पैदल चलने वालों को दूसरे End तक पहुंचने के लिए Rush या दौड़ना पड़ता है। क्यों? क्योंकि वाहन चालक धीमा करने के लिए बमुश्किल (Barely) ब्रेक का उपयोग करता है।

वह खुद को ड्राइवर होने को प्राथमिकता (Prioritize) देना चाहता है, दुर्भाग्य से, सड़क पार करने वाले व्यक्ति को माध्यमिक (Secondary) माना जाता है।


2. Speed Is The Matter

विदेश में: We’ll follow the speed limit signs, maintaining safety for ourselves and others

संयुक्त राज्य The United States, UK, Australia, Canada, और इसी तरह के देशों में विभिन्न क्षेत्रों में एक निर्धारित सीमा (Set Limit) होती है।

उदाहरण के लिए, आवासीय क्षेत्र (Residential Area) की Speed Limit 30 या 50 km प्रति घंटे होगी।

मुख्य सेवा सड़कें लगभग 80 किमी प्रति घंटे। Freeway में 100 km प्रति घंटा। और Country-Side की सड़कें 60 से 110 kmph के बीच होती है।

सड़क उपयोगकर्ता जहां भी Drive करते हैं, गति सीमा के संकेतों का पालन करते हैं।
गति का पता लगाने वाले Camera भी ड्राइवरों को गति सीमित (Speed Control) करने के लिए मजबूर करने में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इस कानून को तोड़ने की सजा गंभीर है।

भारत में: Speed Limit, वो क्या होता है?

आपको आश्चर्य होगा! जब मैं पहली बार Australia आना हुआ, तो मुझे नहीं पता था कि यहां लोग Speed Limit के Signs का पालन करते हैं।

क्योंकि हमने भारत में होने के कारण किसी भी ड्राइवर को गति सीमा के बारे में बात करते हुए मुश्किल से सुना है।

यहां तक ​​कि मैंने ट्रैफिक पुलिस द्वारा Speed Limit Sign का पालन नहीं करने वाले वाहन को दंडित करने के बारे में कभी नहीं सुना।

आपका इस बारे में क्या कहना है?


3. Overloaded Goods Carried By Heavy Vehicles

निर्माता (Manufacturer) द्वारा निर्धारित प्रत्येक वाहन का अपना GVM (सकल वाहन द्रव्यमान – Gross Vehicle Mass) होता है।

इसमें वाहन का वजन, यात्री, सामान और ईंधन शामिल है।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके वाहन में अतिरिक्त जगह (Extra Space) है या नहीं। भार वहन (Carried Weight) उपलब्ध स्थान (Space) से नहीं बल्कि उत्पादन कंपनी द्वारा निर्धारित क्षमता (Set Capacity) से निर्धारित होता है।

विदेश में: GVW – Done!

भारी वाहनों को GVW (सकल वाहन भार – Gross Vehicle Weight) Calculator से गुजरना पड़ता है।

यह कदम एक निश्चित किलो कार्गो द्वारा किया जाता है। वह माल जो किसी वाहन पर लादना हो। यह पूरी तरह से लोड किए जाने वाले वाहन की अधिकतम सीमा (Maximum Capacity) पर आधारित है।

इससे बड़े वाहन आसानी से वाहन को नियंत्रित (Control) कर सकते है। और बिना किसी दुर्घटना के अपने गंतव्य (Destination) तक पहुंच सकते हैं।

अतिरिक्त सामान खींचते (Towing) समय भी यही नियम लागू होता है।

यह सड़क की अच्छी स्थिति बनाए रखने में भी मदद करता है।

अतिरिक्त: विदेश में, जब एक अत्यंत भारी और विशाल वाहन सड़क पर होता है। केवल अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं को चेतावनी देने के लिए नियुक्त 2 कारों की मदद सौंपने का नियम है। एक कार बड़े वाहन के आगे और दूसरी उसके पीछे चलती है।

दोनों कारों के ऊपर ‘Heavy Vehicle On The Road’ या ‘Heavy Vehicle Ahead’ जैसा एक चेतावनी चिन्ह होता है।

भारत में: और छडाओ, बोहोत जगह है गाड़ी में।

भारत में भारी वाहन Operators को इसे Overload करने की परवाह नहीं होती है। वे लोड करने के लिए सोचते हैं, जितना ज्यादा लोड उतनी कम यात्रा (Lesser Trip)।

उन्हें नहीं पता कि यह नियंत्रण (Control) के मामले में वाहन के कामकाज (Functioning) को कितना बुरी तरह प्रभावित करेगा।

और अक्सर आप Highway पर टायर फटने की भयानक आवाज सुनेंगे।

यह आमतौर पर तब होता है जब वाहन ओवरलोड हो जाता है, और तेज गति से चलाया जाता है।

भारतीय वाहनों में कोई विशेष चेतावनी या संकेत नहीं होते हैं। लेकिन पुराने जमाने का बना हुआ मुहावरा ‘हॉर्न प्लीज ओके’ ज़रूर होता है।


4. Vehicle Maintenance

भारत में

एक Headlight काम नहीं कर रही है? जवाब आता है: कोई समस्या नहीं है, दूसरा अच्छा काम कर रहा है।

धुंआ छोड़ने वाली एक गैर-सेवारत कार के बारे में क्या? इसे बाद में ठीक कर देंगे।

क्या horn, mirror, और brake सभी ठीक से काम कर रहे हैं? ऐसी आशा है!

आपने पिछली बार कार कब धोई थी? 2 महीने पहले।

अभी भी गंदा और मैला क्यों? प्रदूषण भाई, प्रदूषण!

सभी भारतीय Drivers लापरवाह नहीं हैं, लेकिन कुछ निश्चित रूप से हैं।

नोट: वाहन की स्थिति को बनाए रखने का इरादा अपने वाहन से प्यार करना और पैसे बचाना नहीं है। लेकिन अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की परवाह करने के लिए Vehicle Maintenance जरूरी है।

विदेश में

अनुसूचित रखरखाव (Scheduled Maintenance) का पालन किया जाता है। यदि एक टूटा हुआ Mirror या गैर-कार्यशील (Non-Functioning) Headlight देखा गया तोह पुलिस द्वारा आप मुश्किल में आ सकते हैं।

वे कुछ सवाल पूछते हैं:

License, please!

Did you realize your vehicle’s headlight ain’t working?

क्या आपको एहसास हुआ कि आपके वाहन की हेडलाइट काम नहीं कर रही है?

How long have you been driving in this condition?

आप कब से इस हालत में गाड़ी चला रहे हैं?

You are aware of how dangerous it is, right?

आप जानते हैं कि यह कितना खतरनाक है, है ना?

और चालक को गंभीरता के आधार पर जुर्माना मिलता है।

जब आप दोषी हों तो गलती को स्वीकार करें और कहें कि आप इसे जल्द से जल्द ठीक कर देंगे। जितना अधिक आप बहस करेंगे, उतना ही आप परेशानी में पड़ेंगे।

हो सकता है कि किसी को घर वापस कार चलाने के लिए भी न मिले। वाहन की स्थिति खराब होने पर उसे Tow किया जाता है।


Conclusion On ट्रैफिक नियम जिनका पालन भारतीय नहीं करते (4 Traffic Rules In India Are’t Followed)

Road Rules में बदला लाने के लिए हमें अपनी Driving में सुधार लाने की जरूरत है। Drive करते समय हमारा स्वभाव विनम्र (Polite) और शांत (Calm) होना चाहिए।

आपके नियम पालन करने से अगर दसरे वाहन उपयोगकर्ताओं को समस्या होती है तो होने दे। चाहे वो आप पर गरजे या गालियों की बौछार करदे। आप किसी भी बात पर प्रतिक्रिया (React) ना करे।

किसी भी वजह से कहीं आपको जवाब ना देने पर खतरा महसूस हो। तो तुरंत 100 डायल करे। अंजान शहर में, हो सके तो पुलिस स्टेशन की ओर अपना नक्शा (Map) Navigate करे।

क्या आप इन 4 Traffic Rules In India (यातायात नियमों) में से किसी एक से भी Relate करते हो?

अपनी राय Share करें। आइए भारतीय ड्राइवरों के लिए मूल्य (Value) और कुछ शिक्षाएं (Teachings) जोड़ें!

आपराधिक संहिता की धारा 120ए और 120बी आपराधिक साजिशों से संबंधित है।

 

आपराधिक संहिता की धारा 120ए और 120बी आपराधिक साजिशों से संबंधित है।

आगे यह समझने के लिए कि Criminal Conspiracy क्या होती है, आइए भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की IPC Section 120A को देखें।

अपने लिए वार्ता, ‘conspire’ का अर्थ है संयुक्त रूप से एक हानिकारक या गैरकानूनी कार्य करने के लिए गुप्त योजना बनाना।

आपराधिक साजिश यह है कि दो या दो से अधिक लोग किसी भी गैरकानूनी कार्य और किसी भी वैध कार्य को अवैध रूप से संचालित करने; प्रेरित करने या प्राप्त करने के लिए सहमत होते हैं ताकि कोई अपराध हो।

इसके अलावा, दो या दो से अधिक लोगों का उद्देश्य साजिश का अपराध नहीं बनाता है, लेकिन साजिश का अपराध बनने से पहले दो या दो से अधिक लोगों को गैरकानूनी कार्य करने या अवैध तरीके से वैध आचरण करने के लिए सहमत होना चाहिए।

भले ही कोई वास्तविक अपराध नहीं किया गया हो, एक आपराधिक साजिश तब बनती है जब दो या दो से अधिक लोग ऐसे आचरण में शामिल होने के लिए सहमत होते हैं जो गैरकानूनी है लेकिन कानून द्वारा दंडनीय नहीं है।

सिर्फ इसलिए कि दो या दो से अधिक लोग किसी गैरकानूनी काम को करने या करने के लिए सहमत होते हैं, एक अपराध का कमीशन बनता है। इसलिए दूसरों के साथ षडयंत्र करना अपराध है।

षडयंत्र के लिए यह आवश्यक नहीं है कि अब कथित समझौता प्रत्यक्ष साक्ष्य द्वारा सिद्ध हो, क्योंकि ऐसे साक्ष्य आमतौर पर उपलब्ध नहीं होते हैं।

भारतीय दंड संहिता की IPC Section 120B का उल्लंघन करने पर सात साल तक की कैद की सजा हो सकती है।

मृत्यु, आजीवन कारावास, या दो वर्ष से अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध करने की साजिश; को मृत्यु, आजीवन कारावास, या दो वर्ष से अधिक के कारावास से दंडित किया जा सकता है यदि इस तरह के दंड के लिए संहिता के अंदर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। षड़यंत्र।

यह किसी आपराधिक साजिश में भाग लेने के लिए कारावास या छह महीने से अधिक का जुर्माना, या दोनों से दंडनीय अपराध है, सिवाय इसके कि ऊपर वर्णित अपराध को धोखा देने की आपराधिक साजिश को छोड़कर। यह सब जाने के लिए तैयार है।

क्योंकि षडयंत्र जैसे जघन्य अपराध में कम से कम दो लोगों की भागीदारी की आवश्यकता होती है, शेष प्रतिवादी पर भारतीय दंड लागू किया जाएगा यदि साजिश के आरोपित अन्य सभी में से एक को छोड़कर सभी दोषी नहीं पाए जाते हैं। संहिता की धारा 120-बी के तहत, उस व्यक्ति को अपने दम पर साजिश के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

खुदा का इनाम है ,,खुदा का शुक्र है के ,,कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ,,कोटा के हर धर्म ,,मज़हब ,,समाज की मुसीबतों की एक मात्र मास्टर की हैं

 

खुदा का इनाम है ,,खुदा का शुक्र है के ,,कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ,,कोटा के हर धर्म ,,मज़हब ,,समाज की मुसीबतों की एक मात्र मास्टर की हैं ,,जिनसे हम हमारे मसाइल ,,खुद आपस में बैठकर ,,या फिर प्रशासन ,,सरकार के सामने इन मुद्दों पर चर्चा करके ,,या फिर दबाव बनाकर सुलझवालेते ही ,,अल्लाह ऐसी शख्सियत को सेहतयाबी ,,उम्रदराजी ,, खुशहाली कामयाबी से नवाज़े ,,ऐसी शख्सियत का साया अभी कई सालो तक सेहतयाबी के साथ हम लोगो के सर पर बना रहे ,,ऐसी खुदा से दुआ ,,ऐसी खुदा से इल्तिजा है ,,,आप से भी गुज़ारिश है क़ोम के रहनुमा ,,क़ोम के सरपरस्त ,, तहरीक ऐ उर्दू राजस्थान के सरपरस्त ,,,,,कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद की सेहतयाबी ,,उम्रदराजी के लिए खुदा से दुआ करें ,,,अल्लाह का शुक्र ज़ेरे इलाज कोटा शहर काजी ,, थोड़ा आराम के बाद, अब वह नॉर्मल है ,,लेकिन दोस्तो यह शख्सियत हमारी हर दुख तकलीफ के लिएं, हमारे ऊपर आने वाली परेशानियों को रोकने वाली एक दीवार है ,, एक छतरी है जो हमे मुसीबतों की बारिश से बचाती रही है , आगे भी हमें इनकी सरपरस्ती इन के साथ की अज़हद ज़रूरी है, ,,क़ाज़ी ऐ शहर कोटा,हमारी हर बुराई के वक़्त एक इस्लाह हैं ,,एक सुझाव हैं ,,हमे हर बुराई से बचाने के लिए एक प्रेरणा है ,,एक चौकीदार हैं ,,,यह शख्सियत एक ऐसा धागा हैं जिसने हमारे क़ोम के कई बिखरे हुए मोतियों को, एक ही धागे में पिरोकर ,,क़ोम की एक खूबसूरत माला तैयार की हुई है ,,हम हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में फख्र के साथ , सर ऊंचा बुलंद कर कह सकते है ,,अल्लाह ने हमे एक मागर्दर्शक , ,,एक सलाहकार ,,,एक संरक्षक के रूप में, एक पाकीज़ा ,,एक ईमानदार ,,एक निर्भीक ,,,एक ख़ुलूस भरी शख्सियत ,,,एक इस्लाम का चलता फिरता एनसाइक्लोपीडिया दिया है ,, सभी से गुज़ारिश ,,सभी से इल्तिजा है ,,अल्लाह रहम करे ,,कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद को तंदरुस्ती दे ,,सेहतयाबी दे ,,उम्रदराजी दे ,,खुशहाली दे ,,उन्हें तंदरुस्त रखे ,,उनका साया हमेशा हमारे सर पर रहे ,,उनका हाथ हमारे ऊपर रहे ,,उनकी बुलंद आवाज़ हमेशा, हमे अपनी बुराइयों से बचाने के लिए सुनाई आती रहे ,,,अल्लाह तू कोटा शहर क़ाज़ी अनवारअहमद की सरपरस्ती , सेहतयाबी ,, उम्र दराज़ी के साथ हमारे सर पर हमेशा रख ,, ,,जो छोटी मोटी बीमारी है उसे ठीक कर ,,आमीन सुम्मा आमीन ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

नेशनल राईटर्स एन्ड कल्चर फोरम के कुँवर अनुराग जी द्वारा तैयार मेरा ,, कीर्तिवर्धन सर, जीवन चित्र, धन्यवाद अनुराग जी--

 

दोस्तो नमस्कार
नेशनल राईटर्स एन्ड कल्चर फोरम के कुँवर अनुराग जी द्वारा तैयार मेरा ,, कीर्तिवर्धन सर, जीवन चित्र, धन्यवाद अनुराग जी--
*परिवार को जाने* श्रृंखला की *उन्नीसवीं कड़ी* में आज *राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त*, मुजफ्फरनगर (उ.प्र.) के साहित्यकार व समाजसेवक, *श्री अ कीर्तिवर्धन*, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति से हमारा ये परिवार गौरवान्वित है..., का जीवनवृत प्रस्तुत करते हुए हार्दिक प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है।
*कीर्तिवर्धन जी* का जन्म 9 अगस्त, 1956 को शामली (उ.प्र.) में हुआ था। आपके पिता *श्री विद्या राम अग्रवाल*, इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल थे।
आपकी प्रारंभिक शिक्षा (12वीं कक्षा तक) *शामली* में ही पूर्ण हुई। यद्यपि आपकी माँ निरक्षर थी, तथापि न केवल वह घर के बच्चों वरन, पास- पड़ोस के बच्चों को भी पढ़ने के लिए बहुत प्रोत्साहित करती थी, तथा अपने घर मे पढ़ने के लिए बुलाती थीं। *माँ के प्रोत्साहन ने आपको सदैव पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।*
70 के दशक में, उन दिनों गांव में मेले लगा करते थे, जिसमें शाम को *कवि सम्मेलन* भी हुआ करते थे। आप प्रत्येक कवि सम्मेलन को सुनने जाया करते थे। अपने साथ, आप कागज़ व पेन भी ले जाया करते थे, व इन कविताओं को लिखने की कोशिश करते थे। इन कवि सम्मेलनों से सीखकर, आपने तुकबंदी करनी शुरु कर दी, तथा छोटी छोटी कवितायें लिखने लगे।
उन दिनों फोन तथा मोबाइल नहीं हुआ करते थे, तो रिश्तेदारों को चिट्ठियां लिखी जाती थीं। आपके घर में, आपकी लेखन प्रतिभा से प्रभावित होकर, पिता जी ने, रिश्तेदारों को चिट्ठियां लिखने का दायित्व आपको ही दे दिया था। इन चिट्ठियों ने, आपकी लेखन प्रतिभा को काफी विकसित किया। आप बड़े रोचक रूप से काव्यात्मक चिट्ठियां लिखा करते थे। आपकी चिट्ठियां इतनी रोचक होती थी, कि पास- पड़ोस के लोग भी आपसे चिट्ठी लिखवाने आया करते थे।
वर्ष 1972 में जब आप दसवीं कक्षा में थे, तब आप की बुआ, जो अध्यापिका थी, के विद्यालय में *काव्य प्रतियोगिता* का आयोजन किया गया, जिसमें आपकी बुआ ने भाग लिया। इस काव्य प्रतियोगिता के लिए, आपकी बुआ ने आपसे एक कविता लिखकर देने के लिए कहा। इस कविता का मुखड़ा *"हम तुमसे जुदा होकर, रोते हैं बहारों में"* विद्यालय द्वारा दिया गया था।
आपने इस मुखड़े पर, कविता लिखी, जिसको *प्रथम पुरस्कार* प्राप्त हुआ। इस वजह से, पूरे घर- खानदान में आपकी *काव्य प्रतिभा* का सिक्का जम गया तथा बहुत तारीफ हुई।
आपका लेखन इसी तरह से चलता रहा, और आप इधर-उधर कॉपी पर लिखते रहे, पर ये लेखन संकलित नहीं हो पाया।
वर्ष 1974 में इंजीनियरिंग की परीक्षा देने आप आगरा आए तथा आगरा किला घूमने गए। तब तक आप सोचते थे कि किला पत्थरों से बना है। पर यहाँ आपको पता चला कि ये लाहौरी ईंटों से बना है और उसके ऊपर पत्थर लगाए गए हैं। ये जानकर आप अचंभित हुए और आपने इस पर तुरंत एक कविता लिखी, जिसकी दो पंक्तियाँ निम्न हैं-
*किले की दीवारों में कितना पत्थर लगा है,*
*अंदर तो ईंटे हैं, बाहर पत्तर लगा है।*
आपकी आगरा यात्रा के बाद ही, असल रूप से आपकी साहित्यिक यात्रा शुरू हुई।
आपने *बी.एस.सी.* व *एम.एस.सी. (गणित)*, अपने चाचा जी के पास रहते हुए, *हिंदू कॉलेज, मुरादाबाद* से किया। कॉलेज में आप स्टूडेंट यूनियन व *ट्रेड यूनियन* से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे तथा लेखन भी चलता रहा।
एम.एस.सी. करने के दौरान ही, आपकी नौकरी *नैनीताल बैंक* में लग गई तथा आपकी प्रथम पोस्टिंग *रामनगर* में हुई। *बैंक की पत्रिका* में, समय समय पर आपकी अनेकों रचनाएं छपती रही। साथ ही आप, अपने लेखन को डायरी में भी लिखते रहे।
वर्ष 1983 में आपका तबादला *मुजफ्फरनगर* हो गया। मुजफ्फरनगर आकर, आप की कविताएं व रचनाएं, *स्थानीय समाचार पत्रों* में नियमित रूप से छपने लगी।
वर्ष 1985- 86 में आप *बैंक की पत्रिका के संपादक* भी रहे। इसी दौरान आप, सक्रिय रूप से बैंक में *ट्रेड यूनियन* से भी जुड़े रहे तथा काफी लंबे समय तक *राष्ट्रीय सचिव* भी रहे।
वर्ष 1987 में आपका विवाह *रजनी अग्रवाल* जी से हुआ। रजनी जी ने, आपको आपकी साहित्यिक यात्रा में सदैव सहयोग किया। आप बताते हैं कि, *आपकी पत्नी ही आपकी प्रथम श्रोता है* तथा आपका हमेशा उत्साहवर्धन करती रहती हैं।
वर्ष 1983 से वर्ष 1999 तक, आपकी रचनाएँ, अनवरत स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहीं। परंतु इस दौरान आपकी कोई भी रचना किसी पत्रिका में नहीं छपी।
वर्ष 1999 में आपका दिल्ली ट्रांसफर हो गया। उन दिनों आप, *दीवाली व नववर्ष के शुभकामना संदेश*, प्रतिवर्ष *एक सामाजिक विषय पर कविता लिखकर*, अपने मित्रों, संबंधियों तथा बैंक की करीबन 100 शाखाओं को भेजा करते थे। इसने भी आपकी लेखन प्रतिभा को एक नया आयाम दिया।
जनवरी, 2000 में, जब आपने नववर्ष का संदेश बनाया और आप फोटोस्टेट करवाने गए, तो फोटोस्टेट दुकान वाले ने आपसे आपका संदेश मांग कर अपने दुकान के शीशे पर चिपका दिया। संदेश पर एक व्यक्ति की नजर पड़ी और उसने फोटो स्टेट वाले से पूछा कि यह किसने लिखा है। तो उसने बताया कि मेरे यहाँ, एक व्यक्ति फोटोस्टेट करवाने आते हैं, वही कविताएं लिखते हैं। तो उस व्यक्ति ने आपका कांटेक्ट नंबर मांगा। परंतु फोटोस्टेट वाले के पास आपका कांटेक्ट नंबर उपलब्ध नहीं था।
करीब छह माह पश्चात उसी फोटोस्टेट वाले के ज़रिये, आपकी उस व्यक्ति से मुलाकात हुई, और आपको पता चला कि वो बिहार के एक बहुत बड़े साहित्यकार *रमेश नीलकमल* जी हैं। वो प्रत्येक 6 महीने में, अपने बेटे से मिलने दिल्ली आया करते थे। दिसंबर- जनवरी में वो दिल्ली में ही थे जब उन्होंने, आपका शुभकामना संदेश, फोटोस्टेट की दुकान पर देखा था। तत्पश्चात वो 6 माह बाद दिल्ली आए और इस तरह से आपकी, उनसे मुलाकात हो पाई। बाद में पता लगा कि वो आपके पड़ोस वाले घर में ही रहते थे।
उनसे मिलने के पश्चात, नियमित रूप से, उनके साथ आपकी बैठक होने लगी। उन्होंने ही *आपको अनेक पत्र-पत्रिकाओं के बारे में बताया तथा उनका पता दिया, और आपसे अपनी रचनाएं व कविताएं, इन पत्रिकाओं में भेजने के लिए कहा।*
पहले आप *कीर्तिवर्धन* के नाम से लिखा करते थे, तत्पश्चात कुछ दिन आपने *कीर्तिवर्धन आजाद* के नाम से भी लिखा।
*नीलकमल जी* अंक शास्त्र के भी ज्ञाता थे, तो उन्होंने आपको सुझाव दिया कि आप अपना नाम बदल कर *अ कीर्तिवर्धन* कर ले, तो यह नाम आपके लिए बहुत उपयुक्त होगा तथा इस नाम से आपको बहुत यशकीर्ति प्राप्त होगी।
यह अक्षरशः सत्य साबित हुआ। नाम बदलने के बाद आपके लेखन को एक नया आयाम मिला, और बहुत यश भी प्राप्त हुआ। अब तक आपकी रचनाएं *करीबन 1500 पत्र-पत्रिकाओं* में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसी बीच दिल्ली साहित्यजगत में भी आपको अनेक साहित्यकार जानने और मानने लगे तथा आपको हिंदी साहित्य सभी कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाने लगा।
आपकी व्यस्तता बढ़ जाने के कारण वर्ष 2005 में अपने ट्रेड यूनियन से संयास ले लिया। वर्ष 2005 से अब तक आपकी *12 पुस्तकें* प्रकाशित हो चुकी हैं, तथा अनेक पुस्तकों का अनुवाद *नेपाली, कन्नड़, व मैथिली भाषा* में हो चुका है।
आप मुख्यरूप से *हाइकु, मुक्तक, कविताएं (फ्रीवर्स), निबंध व आलेख* लिखते हैं।
अपनी फ्रीवर्स की कविताओं के बारे में, आप एक रोचक घटना का ज़िक्र करते हैं, कि एक बार आपने, अपनी एक कविता भोपाल की पत्रिका *साहित्य परिक्रमा* को भेजी। वहाँ से जवाब आया कि आपकी कविता छंद में नही है और पत्रिका में केवल छंदयुक्त कविताओं को ही प्रकाशित किया जाता है। आपको ये जानकर, अपने ऊपर निराशा हुई कि, आपको छंदों का ज्ञान नहीं है। परंतु इसी बात ने आपको एक कविता लिखने को प्रेरित किया, जिसकी कुछ पंक्तियाँ निम्न हैं-
*नहीं जानता गीत किसे कहते हैं,*
*छंदों की वह रीत किसे कहते हैं,*
*क्या छंद बिना कोई भावों को नहीं कह पाएगा,*
*दृष्टिहीन, नागरिक का अधिकार नहीं पाएगा,*
*केवल मीठा खाने से क्या पता चलेगा,*
*कभी कसैला, कभी हो खट्टा, स्वाद बनेगा,*
*मीठे को महिमामंडित करने का, आधार बनेगा।*
यह कविता लिखकर, आपने पत्रिका संपादक को भेज दी। कुछ दिन पश्चात संपादक का फोन आपके पास आया, और उन्होंने कहा कि, आपने बिल्कुल उपयुक्त कहा है, मैं आपसे अक्षरशः सहमत हूँ। तत्पश्चात उस पत्रिका में आप की अनेकानेक रचनाओं को स्थान दिया गया।
वर्ष 2000 से 2005 तक, आपने तीन डिप्लोमा भी किये- *मर्चेंट बैंकिग, एक्सपोर्ट मैनेजमेंट तथा मानव संसाधन विकास* में।
*मर्चेंट बैंकिंग* में डिप्लोमा के दौरान आपने एक शोध पत्र लिखा - *शेयर मार्केट में ग्रामीण क्षेत्र का योगदान*। इस विषय पर पहले कभी भी शोध नहीं किया गया था। इस शोध लेख की बहुत प्रशंसा हुई। आज भी *नाबार्ड (NABARD)* में इस शोध लेख को पढ़ाया जाता है।
*श्री नीलकमल जी* से आपका संपर्क, जीवन पर्यंत बना रहा। वो आपको समय-समय पर लेखन संबंधित दिशानिर्देश देते रहे, जिससे आपके लेखन में बहुत सुधार हुआ और वह आपके लिए वरदान साबित हुआ।
इसी समय के दौरान आप, कई शहरों की, अनेक साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ गए तथा साहित्य कार्यक्रमों में भी नियमित रूप से जाने लगे। आपको *व्याख्यान देने व पेपर पढ़ने* के लिए देश के विभिन्न भागों से आमंत्रित भी किया जाने लगा।
आपने कई *शोध लेख* भी लिखे जिसमें से एक शोध लेख *शूद्र भी क्षत्रिय हैं*, करीबन *50 पत्रिकाओं* में प्रकाशित हुआ।
बिहार की एक साहित्यिक संस्था ने आपको *विद्या वाचस्पति* की उपाधि से सम्मानित भी किया।
वर्ष 2012 में आपका तबादला मुजफ्फरनगर हो गया, तथा वर्ष 2016 में आप सेवानिवृत्त हो गए।
सेवानिवृत्त होने के पश्चात आप *समाज सेवा* में जुट गए, तथा मुजफ्फरनगर में *ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 20 25 विद्यालयों* से जुड़ गए और अभी तक जुड़े हुए हैं। इन विद्यालयों में आप *मोटिवेटर* के रूप में नियमित रूप से जाते हैं और बच्चों को *भाषण कला तथा अन्य विषयों पर दिशानिर्देश देते हैं व उत्साहवर्धन करते हैं।*
अब तक आपको कई विश्वविद्यालयों/ संस्थानों में *शोध पत्र* पढ़ने तथा *व्याख्यान* देने के लिए आमंत्रित किया जा चुका है, जिसमें *सिक्किम विश्वविद्यालय, नेपाल प्रेस क्लब, राजस्थान के कई विश्वविद्यालय* शामिल हैं।
आपकी बाल कविताओं की एक पुस्तक *सुबह सवेरे* कर्नाटक व उत्तराखंड के पाठ्यक्रम में भी शामिल है।
आपका *नवोदित लेखकों* को यह संदेश है कि, *अनवरत लेखनरत रहें... समय के साथ लेखन में सुधार होता जाएगा*... और धीरे धीरे आपकी पहचान बनने लगेगी। कोशिश करनी चाहिए कि, *लेखन सामाजिक विषयों पर हो, जिससे कि समाज जागृति व समाज का उत्थान हो सके।*
************************
*© नेशनल राइटर्स व कल्चरल फोरम*
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
*//जीवन परिचय//*
नाम- *अ कीर्तिवर्धन*
पिताजी का नाम- *श्री विद्या राम अग्रवाल*
जन्मतिथि- *09 अगस्त 1956*
जन्मस्थान- *शामली (उ.प्र.)*
*शिक्षा*
*******
*परास्नातक (गणित)*, हिन्दु कॉलेज, मुरादाबाद
*मर्चेन्ट बैंकिंग* ( इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मर्चेंट बैंकिंग , दिल्ली )
*एक्सपोर्ट मैनेजमेंट* (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एक्सपोर्ट मैनेजमेंट, चेन्नई )
*मानव संसाधन विकास* ( नेशनल कॉउन्सिल फॉर लेबर मैनेजमेंट, चेन्नई )
सेवा- *नैनीताल बैंक लिमिटेड* से सेवानिवृत
*प्रकाशित पुस्तकें*
*****************
- *मेरी उड़ान*
- *सच्चाई का परिचय पत्र*
- *मुझे इंसान बना दो*
- *सुबह सवेरे*
- *दलित चेतना के उभरते स्वर*
- *जतन से ओढ़ी चदरिया* (अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध वर्ष 2009) पर वृद्ध भारत का साक्ष्य)
- *चिंतन बिंदु*
- *हिन्दू राष्ट्र भारत* ( निबंध संग्रह)
- *मानवता की ओर*
- *दृष्टि संसार*
- *नरेंद्र से नरेंद्र की ओर* (प्रकाशनाधीन)।
*विशेष*
********
- कल्पांत पत्रिका का विशेषांक-*साहित्य का कीर्तिवर्धन* (प्रकाशित)
- व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर *सुरसरि* का विशेषांक *निष्णात आस्था का प्रतिस्वर* कीर्तिवर्धन
*अनुवाद*
**********
- *सुबह सवेरे* का मैथिलि व कन्नड़ में अनुवाद व प्रकाशन
- *मुझे इंसान बना दो* का उर्दू में अनुवाद
- *सच्चाई का परिचय पत्र* का कन्नड़ में अनुवाद
- अनेक रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद व *वर्ल्ड ऑफ़ पोएट्री* प्रकाशन
- अनेक रचनाओं का *तमिल, अंगिका व अन्य भाषाओं में अनुवाद*
- अनेक चुनिंदा कविताओं का नेपाली अनुवाद *अक्षरार्थ*
*संपादन*
**********
- नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसियेशन की पत्रिका *स्मारिका*
- डॉ हनुमंत रनखाम्ब पर केन्द्रित *कल्पान्त* का विशेषांक
*पत्र वाचन*
************
- अनेक विषयों पर पत्र वाचन (लगभग 12)
- अनेक सामाजिक विषयों पर *शोध लेख*
*सम्मान एवं उपाधियाँ*
*********************
*100 से अधिक सम्मान व उपाधियाँ, प्रशस्ति पत्र , विद्यावाचस्पति (Doctorate) एवं विद्यासागर (D.Lit.)की उपाधि* सहित।
*अन्य*
*******
- ट्रेड यूनियन लीडर, समाज सेवी, अनेको संस्थाओं से जुड़ाव व पदाधिकारी, अनेक पत्रिकाओं में सहयोगी सम्पादक, सम्पादक मंडल सदस्य, प्रदेश संयोजक, आदि।
- वर्तमान में विभिन्न विद्यालयों में प्रेरक के रूप में सक्रिय, अनेक विषयों पर शोध कार्य जारी व समाज सेवा में सक्रिय।
दरिया हूँ नही चाहता, समंदर में समा जाऊँ,
मिटाकर वजूद खुद का, समंदर मैं कहलाऊँ।
जब तक मैं रहूँ दरिया, किसी के काम आऊँ,
मिटाऊँ प्यास जन जन की, खार से बच जाऊँ।
*अ कीर्तिवर्धन*
******************
*जमाने को खल गया*
नजरें उठाकर चलना, जमाने को खल गया,
सरे राह मुस्कराना, जमाने को खल गया।
नूर ए फलक कहाती, जो लब सिले रहते,
गलत का विरोध करना, जमाने को खल गया।
सिर पर रही ओढनी, जिस्म नंगा कर दिया,
सच को बताना सच, जमाने को खल गया।
झुककर सलाम करना, हर जुल्म चुप ही सहना,
गर्दन उठाकर चलना, जमाने को खल गया।
खेलते जो जिस्म से, रहनुमा थे कौम के,
नफरत मेरा दिखाना, जमाने को खल गया।
कर दिया जुदा मुझको, तीन तलाक बोलकर,
हलाला पर आवाज उठाना, जमाने को खल गया।
*अ कीर्तिवर्धन*
**************************
हौसला हो पास जिसके, पंख की जरुरत नहीं,
प्रीत का विश्वास संग हो, साथ की जरुरत नहीं।
आस्था ने सदा जिसे, जीने का संबल दिया हो,
हर दिवस खुशियाँ मिलें, मधुमास की जरुरत नहीं।
दिल मिलें न मिलें कभी, ख्याल भी हों जुदा जुदा,
साथ फिर भी चल रहे, अलगाव की जरुरत नहीं।
एक हो मंजिल अगर, मुसाफिर हों अलग अलग,
अजनबी अपनों से लगें, अपनों की जरुरत नही।
हो दिवाना इश्क में, ख्यालों में खोया हुआ,
भीड में रहकर भी तन्हां, तन्हाई की जरूरत नही।
आस्था और विश्वास का, हो मधुर मिलन जहाँ,
हो गया सब खुद समर्पित, समर्पण की जरूरत नही।
*डॉ अ कीर्तिवर्धन*
************************
होते हैं गुनाह यूँ ही, अक्सर इस जमाने में,
उम्र बीत जाती है, किसी रूठे को मनाने में।
खो जाती हैं खुशियाँ, इसी जद्दोजहद में,
फूलों का कत्ल हुआ, पत्थर को मनाने में।
*अ कीर्तिवर्धन*
***********************
चंदामामा शाम ढले जब, तू मेरी छत पर आता है,
रूप बदलना तेरा नित दिन, मेरे मन को भरमाता है।
कभी तू बच्चा, कभी बडा बन, खेल खेलता रातों में,
कभी निकलता पूर्ण रात में और एक दिन छिप जाता है।
तारों के संग आँख मिचौली, बादल के पीछे छिप जाना,
तम हरने का तेरा साहस, मुझमें हिम्मत भर जाता है।
*अ कीर्तिवर्धन*
**************************
*******************************

धारीवाल ने किया विकास कार्यों का निरीक्षण

 

धारीवाल ने किया विकास कार्यों का निरीक्षण,,
धीमी प्रगति पर किसी को डांटा तो किसी को फटकारा
कोटा ।चार दिवसीय कोटा प्रवास पर पहुंचे नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने प्रवास के दौरान कोटा में चल रहे विकास कार्यो के निरीक्षण से शुरुआत की।
यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल सुबह से ही कोटा में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण करने निकले। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जहां पर भी विकास कार्यों में धीमी गति देखी तो वहां संवेदकों को फटकार भी लगाई और नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।
मंत्री शांति धारीवाल ने अदालत चौराहे पर चल रहे सौंदर्यीकरण के निर्माण कार्य के निरीक्षण से अपने दौरे की शुरुआत की इसके बाद उन्होंने एमबीएस अस्पताल के चल रहे विस्तार कार्य जेके लोन अस्पताल में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण कर गुणवत्ता के साथ समय पर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए ,इसके बाद यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल का काफिला राजकीय महाविद्यालय की हेरिटेज इमारत पर पहुंचा जिसका प्राचीन स्वरूप को वापस खूबसूरती के साथ आकर्षक बनाने का कार्य जारी है वही नयापुरा क्षेत्र में विवेकानंद सर्किल और उसके आसपास के एरिया में खूबसूरती देकर आकर्षक बनाने के चल रहे कार्यो का निरीक्षण किया। कोटा को ट्रेफिक लाइट फ्री सिटी बनाने के लिए चल रहे फ्लाईओवर और अंडरपास के निर्माण कार्यों को भी मंत्री धारीवाल ने मौके पर पहुंचकर प्रगति रिपोर्ट ली। उन्होंने अंटाघर अंडरपास ,गुमानपुरा फ्लाईओवर ,एरोड्रम अंडरपास का भी निरीक्षण किया साथ ही कोटा के घोड़े वाले बाबा पर चल रहे सौन्दर्यकरण के कार्यो को देखा। यही नहीं कोटा में 71 एकड़ में तैयार किए जा रहे हैं अनूठे सिटी पार्क ऑक्सीजोन का भी मंत्री शांति धारीवाल ने दौरा किया यह प्रोजेक्ट भी अब अंतिम दौर में है जहां सिर्फ 12 फीसदी हिस्से में पक्का निर्माण किया जा रहा हैं जबकि 72 फीसदी में सघन वन से आच्छादित किया गया है जहां हजारों की तादाद में पेड़ लगाए गए हैं साथ ही विभिन्न प्रजातियों के देसी विदेशी फूलों के पौधे लगाए गए है। 16 फ़ीसदी से में जल संरचनाओं को तैयार किया गया जिसमें तालाब नहर शामिल है।
मंत्री धारीवाल ने गोबरिया बावड़ी अंडरपास अनंतपूरा एलिवेटेड रोड, का भी निरीक्षण किया इस दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष रविंद्र त्यागी, नगर विकास न्यास के विशेषाधिकारी आर डी मीणा आर्किटेक्ट अनूप भरतरिया, एवं प्रोजेक्ट्स साइड पर इंजीनियर, एवं संवेदक मौजूद रहे।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...