NSS स्थापना दिवस पर "स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर" पर एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर संपन्न
कोटा, 24 सितंबर 2026। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को कोटा विश्वविद्यालय के वाचस्पति भवन, में एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का सफल आयोजन किया गया।
जागरूकता शिविर का विषय "स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर — स्वस्थ एवं समर्थ भारत" रहा। शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में गोल्ड मेडलिस्ट डॉ संगीता गौड़, माइंड सेट कोच और मुख्य अतिथि शाइन इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ कुलवंत गौड़ ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।
शिविर का सफल संचालन एवं आयोजन *राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. श्वेता व्यास एवं डॉ आशीष आसोपा के नेतृत्व में किया गया। डॉ आसोपा ने आए हुये अतिथियों का स्वागत भाषण से अभिवादन किया । मंच संचालन युवराज सिंह एवं श्रेया शर्मा ने किया।
डॉ संगीता गौड़ ने एनएसएस के युवा साथियों को कहा कि, स्वस्थ भारत के लिए केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और तनाव प्रबंधन सबसे ज्यादा जरूरी है। विद्यार्थी जीवन में माइंडसेट ही सफलता तय करता है। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं को मानसिक तनाव से बचने, आत्मविश्वास बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के व्यावहारिक टिप्स दिए।
शिविर के दूसरे चरण में डॉ कुलवंत गौड़ ने, एनएसएस के युवाओं से कहा कि, सभी के सम्मिलित प्रयासों से हम नेत्रदान,अंगदान और देहदान की जागरूकता को जमीनी स्तर पर, छोटे-छोटे गांव ढाणियों में पहुंचा सकते हैं । इसके साथ ही डॉ कुलवंत गौड़ ने नेत्रदान से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां उपस्थित छात्र छात्रों को दी ।
डॉ. व्यास ने बताया कि NSS का उद्देश्य युवाओं में सेवा भाव के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाना है, ताकि वे स्वयं स्वस्थ रहकर समाज को भी स्वस्थ बना सकें।
इस जन-जागरूकता शिविर के आयोजन में शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा का विशेष सहयोग रहा। फाउंडेशन की टीम ने विद्यार्थियों को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने में सराहनीय भूमिका निभाई। ज्ञात हो कि,अभी एक माह पूर्व ही, सामाजिक सेवा से युवाओं को जोड़ने के उद्देश्य से संस्था का एमओयू कोटा यूनिवर्सिटी से हुआ है ।
शिविर के अंत में NSS समन्वयक एवं आयोजक डॉ. श्वेता व्यास द्वारा सभी अतिथियों, वक्ता डॉ. संगीता गौड़ एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में NSS स्वयंसेवक, विद्यार्थी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
24 सितंबर 2026
NSS स्थापना दिवस पर "स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर" पर एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर संपन्न
कोंग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की उपेक्षा, कमज़ोरी का उदाहरण इससे बढ़ा और क्या होगा
कोंग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की उपेक्षा, कमज़ोरी का उदाहरण इससे बढ़ा और क्या होगा, के कोटा में अल्पसंख्यक विभाग के ज़िला अध्यक्ष तक को वोह पार्षद का टिकिट दिलवाने में नाकामयाब रहे, वोह भी तब जब , राष्ट्रीय स्तर के दो दो नेता अल्पसंख्यक विभाग में कोटा से ही है, दर्जन से भी ज़्यादा सलाहकार है, कोटा ज़िला अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष, जो पूर्व में यूथ कोंग्रेस के निर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष भी रहे हैं उनको उनके अपने वार्ड में लोकप्रिय होने के बाद भी अल्पसंख्यक विभाग द्वारा टिकिट नहीं दिलवा पाना बग़ावत की वजह रहा, सभी जानते है, अल्पसंख्यक विभाग के जिला अध्यक्ष ज़ुबैर अपने वार्ड श्रीपुरा में ज़मीन से जुड़े है, स्थानीय हिन्दू, मुस्लिम सभी 36 क़ोमों की दिलों की धड़कन है, आज से पांच साल पहले भी, जब यह विधानसभा यूथ कोंग्रेस अध्यक्ष थे त। भी इनकी टिकिट की , मजबूत दावेदारी थी, लेकिन इन्हें टिकिट नहीं मिला, इन्होंने इनके समर्थकों द्वारा दबाव बनाने पर पार्षद का निर्दलीय फार्म भरा, लेकिन कोंग्रेस की एकता अनुशासन का वास्ता देकर इनका नामांकन वापस लिवा लिया गया, इनसे रिकॉर्डेड , जो मोबाइल रिकॉर्डिंग है, वायदा किया गया कि इन्हें सहवरित पार्षद बना दिया जाएगा, सहवरित पार्षदों की सूचि में इनका नाम रिकॉर्डेड वायदे के बाद भी नहीं रहा तो सभी इस वायदा खिलाफ़ी पर चकित थे, जुबेर कोंग्रेस के प्रति समर्पित रहे, समर्पित हैं, लेकिन अब इस बार फिर इनकी पत्नी की दावेदारी , इनकी एक तरफा लोकप्रियता के चलते मजबूत थी, लेकिन इन्हें टिकिट नहीं दिया, इनके वार्डवासी क्यों मानते, ज़ोर ज़बरदस्ती कर पत्नी का नामांकन हुआ, ओर इनकी लोकप्रियता की वजह से इनकी पत्नी एक तरफा चुनाव जीतीं, कोंग्रेस की जमानत जब्त हुई, आखिर अल्पसंख्यक बस्तियों मे लोकप्रिय होने, पूर्व वायदा होने के बाद भी टिकिट नहीं , वोह भी अल्पसंख्यक विभाग के जिला पदाधिकारी, निर्वाचित यूथ कोंग्रेस अध्यक्ष को, तो यह निश्चित तोर पर अल्पसंख्यक नेतृत्व की असफलता, अल्पसंख्यकों को नेतृत्व ओर इंसाफ दिलाने के, कर्तव्यों की उपेक्षा है, खेर जुबेर के तो रोम रोम में कोंग्रेस है, लेकिन कोंग्रेस ने तो उन्हें सहवरित पार्षद बनाने, पार्षद का टिकिट देने के मामले में अछूत ही समझा है ना, ऐसा इसलिये हुआ है, होता है, ओर आगे भी होता आएगा, क्योंकि इस विभाग को, इस विभाग के लोगों को टिश्यू पेपर, सिर्फ ढेला समझने की भूल की जाती रही है, ओर अल्पसंख्यक विभाग, नेतृत्व इस ना इंसाफी का जवाब नहीं मांगता, जी हुज़ूरी में लगा रहता है, वर्तमान की सैकड़ों की लिस्ट में कसम ख़ाकर, दिल पर हाथ रखकर लोग बताएं, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एम डी चोपदार, लतीफ आर को, अमीन पठान, ओर इक्का दुक्का अधिकतम एक दर्जन लोगों के अलावा एक शख्स भी कोई ऐसा है, जिसने आंखों में आंखे डालकर अल्पसंख्यकों की समस्या, समाधान , नेतृत्व के मुद्दे अपने अपने भाई साहबों के सामने उठाये हों, या प्रशासन के सामने कभी मुद्दों पर बात की हो, एक अखबार की विज्ञप्ति , अल्पसंख्यको की समस्या समाधान , नेतृत्व देने के अधिकार का बयान भी मिल जाये तो में ऐसे लोगों को सेल्यूट करूंगा, बस में अल्पसंख्यक हूँ , मुझे अल्पसंख्यक बाहुल्य वोटर सीट से टिकिट दे दो, इसके अलावा इनका कोई और एजेंडा हो तो बताओ, बीकानेर में महापोर जीतता है, उप महापोर मुस्लिम है तो उन्ही वोटों में बुरी तरह हार जाता है, टोंक का उदाहरण देख लो, लेकिन ज़मीर इनके जागते नहीं, शर्म इनको आती नहीं , अल्लाह इन्हें जी हुज़ूरी गुलामी से आज़ादी देकर इंसाफाना, हक़ बात कहने , लिखने की तौफ़ीक़ अता फरमाये, कोटा मेले दशहरे में मुशायरा, क़व्वाली, ग़ज़ल कार्यक्रमों को खत्म करने के खिलाफ उर्दू सहाय राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व की इस अल्पसंख्यक कोंग्रेस की ज़ुबान हलक़ में अटकी रही, अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
और हमारी मख़लूक़ात से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दीने हक़ की हिदायत करते हैं और हक़ से इन्साफ़ भी करते हैं
और हमारी मख़लूक़ात से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दीने हक़ की हिदायत करते हैं और हक़ से इन्साफ़ भी करते हैं (181)
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया हम उन्हें बहुत जल्द इस तरह आहिस्ता आहिस्ता (जहन्नुम में) ले जाएगें कि उन्हें ख़बर भी न होगी (182)
और मैं उन्हें (दुनिया में) ढील दूगा बेशक मेरी तद्बीर (पुख़्ता और) मज़बूत है (183)
क्या उन लोगों ने इतना भी ख़्याल न किया कि आखि़र उनके रफीक़ (मोहम्मद ) को कुछ जुनून तो नहीं वह तो बस खुल्लम खुल्ला (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाले हैं (184)
क्या उन लोगों ने आसमान व ज़मीन की हुकूमत और ख़ुदा की पैदा की हुयी चीज़ों में ग़ौर नहीं किया और न इस बात में कि शायद उनकी मौत क़रीब आ गई हो फिर इतना समझाने के बाद (भला) किस बात पर ईमान लाएगें (185)
जिसे ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे फिर उसका कोई राहबर नहीं और उन्हीं की सरकशी (व शरारत) में छोड़ देगा कि सरगरदा रहें (186)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग क़यामत के बारे में पूछा करते हैं कि कहीं उसका कोई वक़्त भी तय है तुम कह दो कि उसका इल्म बस फक़त पररवदिगार ही को है वही उसके वक़्त मुअय्युन पर उसको ज़ाहिर कर देगा। वह सारे आसमान व ज़मीन में एक कठिन वक़्त होगा वह तुम्हारे पास पस अचानक आ जाएगी तुमसे लोग इस तरह पूछते हैं गोया तुम उनसे बखूबी वाकि़फ हो तुम (साफ) कह दो कि उसका इल्म बस ख़ुदा ही को है मगर बहुतेरे लोग नहीं जानते (187)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै ख़ुद अपना आप तो एख़तियार रखता ही नहीं न नफे़ का न ज़रर का मगर बस वही ख़ुदा जो चाहे और अगर (बग़ैर ख़ुदा के बताए) गै़ब को जानता होता तो यक़ीनन मै अपना बहुत सा फ़ायदा कर लेता और मुझे कभी कोई तकलीफ़ भी न पहुँचती मै तो सिर्फ ईमानदारों को
(अज़ाब से डराने वाला) और वेहशत की खुशख़बरी देने वाला हूँ
(188)
वह ख़ुदा ही तो है जिसने तुमको एक शख़्स (आदम) से पैदा किया और उसकी बची हुयी मिट्टी से उसका जोड़ा भी बना डाला ताकि उसके साथ रहे सहे फिर जब इन्सान अपनी बीबी से हम बिस्तरी करता है तो बीबी एक हलके से हमल से हमला हो जाती है फिर उसे लिए चलती फिरती है फिर जब वह (ज़्यादा दिन होने से बोझल हो जाती है तो दोनो (मिया बीबी) अपने परवरदिगार ख़ुदा से दुआ करने लगे कि अगर तो हमें नेक फरज़न्द अता फरमा तो हम ज़रूर तेरे शुक्रगुज़ार होंगे (189)
फिर जब ख़़ुदा ने उनको नेक (फरज़न्द) अता फ़रमा दिया तो जो (औलाद) ख़ुदा ने उन्हें अता किया था लगे उसमें ख़़ुदा का शरीक बनाने तो ख़़ुदा (की शान) शिर्क से बहुत ऊँची है (190)
23 सितंबर 2026
राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा विभिन्न सहयोग योजनान्तर्गत 16.74 लाख रुपये का सहयोग स्वीकृत
कोटा के रहने वाले विकास सक्सेना को राजस्थानी फिल्म 'बैरन' के लिए मिला सर्वश्रेष्ठ डीओपी (बेस्ट सिनेमैटोग्राफर) का सम्मान*