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24 सितंबर 2026

NSS स्थापना दिवस पर "स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर" पर एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर संपन्न

 NSS स्थापना दिवस पर "स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर" पर एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर संपन्न

कोटा, 24 सितंबर 2026। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को कोटा विश्वविद्यालय के वाचस्पति भवन, में एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का सफल आयोजन किया गया।

जागरूकता शिविर का विषय "स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर — स्वस्थ एवं समर्थ भारत" रहा। शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में गोल्ड मेडलिस्ट डॉ संगीता गौड़, माइंड सेट कोच और मुख्य अतिथि शाइन इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ कुलवंत गौड़ ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।

शिविर का सफल संचालन एवं आयोजन *राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. श्वेता व्यास एवं डॉ आशीष आसोपा के नेतृत्व में किया गया। डॉ आसोपा ने आए हुये अतिथियों का स्वागत भाषण से अभिवादन किया । मंच संचालन युवराज सिंह एवं श्रेया शर्मा ने किया।

डॉ संगीता गौड़ ने एनएसएस के युवा साथियों को कहा कि, स्वस्थ भारत के लिए केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और तनाव प्रबंधन सबसे ज्यादा जरूरी है। विद्यार्थी जीवन में माइंडसेट ही सफलता तय करता है। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं को मानसिक तनाव से बचने, आत्मविश्वास बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के व्यावहारिक टिप्स दिए।

शिविर के दूसरे चरण में डॉ कुलवंत गौड़ ने, एनएसएस के युवाओं से कहा कि, सभी के सम्मिलित प्रयासों से हम नेत्रदान,अंगदान और देहदान की जागरूकता को जमीनी स्तर पर, छोटे-छोटे गांव ढाणियों में पहुंचा सकते हैं । इसके साथ ही डॉ कुलवंत गौड़ ने नेत्रदान से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां उपस्थित छात्र छात्रों को दी ।

डॉ. व्यास ने बताया कि NSS का उद्देश्य युवाओं में सेवा भाव के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाना है, ताकि वे स्वयं स्वस्थ रहकर समाज को भी स्वस्थ बना सकें।

इस जन-जागरूकता शिविर के आयोजन में शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा का विशेष सहयोग रहा। फाउंडेशन की टीम ने विद्यार्थियों को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने में सराहनीय भूमिका निभाई। ज्ञात हो कि,अभी एक माह पूर्व ही, सामाजिक सेवा से युवाओं को जोड़ने के उद्देश्य से संस्था का एमओयू कोटा यूनिवर्सिटी से हुआ है ।

शिविर के अंत में NSS समन्वयक एवं आयोजक डॉ. श्वेता व्यास द्वारा सभी अतिथियों, वक्ता डॉ. संगीता गौड़ एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में NSS स्वयंसेवक, विद्यार्थी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

कोंग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की उपेक्षा, कमज़ोरी का उदाहरण इससे बढ़ा और क्या होगा

कोंग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की उपेक्षा, कमज़ोरी का उदाहरण इससे बढ़ा और क्या होगा, के कोटा में अल्पसंख्यक विभाग के ज़िला अध्यक्ष तक को वोह पार्षद का टिकिट दिलवाने में नाकामयाब रहे, वोह भी तब जब , राष्ट्रीय स्तर के दो दो नेता अल्पसंख्यक विभाग में कोटा से ही है, दर्जन से भी ज़्यादा सलाहकार है, कोटा ज़िला अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष, जो पूर्व में यूथ कोंग्रेस के निर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष भी रहे हैं उनको उनके अपने वार्ड में लोकप्रिय होने के बाद भी अल्पसंख्यक विभाग द्वारा टिकिट नहीं दिलवा पाना बग़ावत की वजह रहा, सभी जानते है, अल्पसंख्यक विभाग के जिला अध्यक्ष ज़ुबैर अपने वार्ड श्रीपुरा में ज़मीन से जुड़े है, स्थानीय हिन्दू, मुस्लिम सभी 36 क़ोमों की दिलों की धड़कन है, आज से पांच साल पहले भी, जब यह विधानसभा यूथ कोंग्रेस अध्यक्ष थे त। भी इनकी टिकिट की , मजबूत दावेदारी थी, लेकिन इन्हें टिकिट नहीं मिला, इन्होंने इनके समर्थकों द्वारा दबाव बनाने पर पार्षद का निर्दलीय फार्म भरा, लेकिन कोंग्रेस की एकता अनुशासन का वास्ता देकर इनका नामांकन वापस लिवा लिया गया, इनसे रिकॉर्डेड , जो मोबाइल रिकॉर्डिंग है, वायदा किया गया कि इन्हें सहवरित पार्षद बना दिया जाएगा, सहवरित पार्षदों की सूचि में इनका नाम रिकॉर्डेड वायदे के बाद भी नहीं रहा तो सभी इस वायदा खिलाफ़ी पर चकित थे, जुबेर कोंग्रेस के प्रति समर्पित रहे, समर्पित हैं, लेकिन अब इस बार फिर इनकी पत्नी की दावेदारी , इनकी एक तरफा लोकप्रियता के चलते मजबूत थी, लेकिन इन्हें टिकिट नहीं दिया, इनके वार्डवासी क्यों मानते, ज़ोर ज़बरदस्ती कर पत्नी का नामांकन हुआ, ओर इनकी लोकप्रियता की वजह से इनकी पत्नी एक तरफा चुनाव जीतीं, कोंग्रेस की जमानत जब्त हुई, आखिर अल्पसंख्यक बस्तियों मे लोकप्रिय होने, पूर्व वायदा होने के बाद भी टिकिट नहीं , वोह भी अल्पसंख्यक विभाग के जिला पदाधिकारी, निर्वाचित यूथ कोंग्रेस अध्यक्ष को, तो यह निश्चित तोर पर अल्पसंख्यक नेतृत्व की असफलता, अल्पसंख्यकों को नेतृत्व ओर इंसाफ दिलाने के, कर्तव्यों की उपेक्षा है, खेर जुबेर के तो रोम रोम में कोंग्रेस है, लेकिन कोंग्रेस ने तो उन्हें सहवरित पार्षद बनाने, पार्षद का टिकिट देने के मामले में अछूत ही समझा है ना, ऐसा इसलिये हुआ है, होता है, ओर आगे भी होता आएगा, क्योंकि इस विभाग को, इस विभाग के लोगों को टिश्यू पेपर, सिर्फ ढेला समझने की भूल की जाती रही है, ओर अल्पसंख्यक विभाग, नेतृत्व इस ना इंसाफी का जवाब नहीं मांगता, जी हुज़ूरी में लगा रहता है, वर्तमान की सैकड़ों की लिस्ट में कसम ख़ाकर, दिल पर हाथ रखकर लोग बताएं, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एम डी चोपदार, लतीफ आर को, अमीन पठान, ओर इक्का दुक्का अधिकतम एक दर्जन लोगों के अलावा एक शख्स भी कोई ऐसा है, जिसने आंखों में आंखे डालकर अल्पसंख्यकों की समस्या, समाधान , नेतृत्व के मुद्दे अपने अपने भाई साहबों के सामने उठाये हों, या प्रशासन के सामने कभी मुद्दों पर बात की हो, एक अखबार की विज्ञप्ति , अल्पसंख्यको की समस्या समाधान , नेतृत्व देने के अधिकार का बयान भी मिल जाये तो में ऐसे लोगों को सेल्यूट करूंगा, बस में अल्पसंख्यक हूँ , मुझे अल्पसंख्यक बाहुल्य वोटर सीट से टिकिट दे दो, इसके अलावा इनका कोई और एजेंडा हो तो बताओ, बीकानेर में महापोर जीतता है, उप महापोर मुस्लिम है तो उन्ही वोटों में बुरी तरह हार जाता है, टोंक का उदाहरण देख लो, लेकिन ज़मीर इनके जागते नहीं, शर्म इनको आती नहीं , अल्लाह इन्हें जी हुज़ूरी गुलामी से आज़ादी देकर इंसाफाना, हक़ बात कहने , लिखने की तौफ़ीक़ अता फरमाये, कोटा मेले दशहरे में मुशायरा, क़व्वाली, ग़ज़ल कार्यक्रमों को खत्म करने के खिलाफ उर्दू सहाय राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व की इस अल्पसंख्यक कोंग्रेस की ज़ुबान हलक़ में अटकी रही, अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339 

और हमारी मख़लूक़ात से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दीने हक़ की हिदायत करते हैं और हक़ से इन्साफ़ भी करते हैं

 

और हमारी मख़लूक़ात से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दीने हक़ की हिदायत करते हैं और हक़ से इन्साफ़ भी करते हैं (181)
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया हम उन्हें बहुत जल्द इस तरह आहिस्ता आहिस्ता (जहन्नुम में) ले जाएगें कि उन्हें ख़बर भी न होगी (182)
और मैं उन्हें (दुनिया में) ढील दूगा बेशक मेरी तद्बीर (पुख़्ता और) मज़बूत है (183)
क्या उन लोगों ने इतना भी ख़्याल न किया कि आखि़र उनके रफीक़ (मोहम्मद ) को कुछ जुनून तो नहीं वह तो बस खुल्लम खुल्ला (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाले हैं (184)
क्या उन लोगों ने आसमान व ज़मीन की हुकूमत और ख़ुदा की पैदा की हुयी चीज़ों में ग़ौर नहीं किया और न इस बात में कि शायद उनकी मौत क़रीब आ गई हो फिर इतना समझाने के बाद (भला) किस बात पर ईमान लाएगें (185)
जिसे ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे फिर उसका कोई राहबर नहीं और उन्हीं की सरकशी (व शरारत) में छोड़ देगा कि सरगरदा रहें (186)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग क़यामत के बारे में पूछा करते हैं कि कहीं उसका कोई वक़्त भी तय है तुम कह दो कि उसका इल्म बस फक़त पररवदिगार ही को है वही उसके वक़्त मुअय्युन पर उसको ज़ाहिर कर देगा। वह सारे आसमान व ज़मीन में एक कठिन वक़्त होगा वह तुम्हारे पास पस अचानक आ जाएगी तुमसे लोग इस तरह पूछते हैं गोया तुम उनसे बखूबी वाकि़फ हो तुम (साफ) कह दो कि उसका इल्म बस ख़ुदा ही को है मगर बहुतेरे लोग नहीं जानते (187)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै ख़ुद अपना आप तो एख़तियार रखता ही नहीं न नफे़ का न ज़रर का मगर बस वही ख़ुदा जो चाहे और अगर (बग़ैर ख़ुदा के बताए) गै़ब को जानता होता तो यक़ीनन मै अपना बहुत सा फ़ायदा कर लेता और मुझे कभी कोई तकलीफ़ भी न पहुँचती मै तो सिर्फ ईमानदारों को

(अज़ाब से डराने वाला) और वेहशत की खुशख़बरी देने वाला हूँ (188)
वह ख़ुदा ही तो है जिसने तुमको एक शख़्स (आदम) से पैदा किया और उसकी बची हुयी मिट्टी से उसका जोड़ा भी बना डाला ताकि उसके साथ रहे सहे फिर जब इन्सान अपनी बीबी से हम बिस्तरी करता है तो बीबी एक हलके से हमल से हमला हो जाती है फिर उसे लिए चलती फिरती है फिर जब वह (ज़्यादा दिन होने से बोझल हो जाती है तो दोनो (मिया बीबी) अपने परवरदिगार ख़ुदा से दुआ करने लगे कि अगर तो हमें नेक फरज़न्द अता फरमा तो हम ज़रूर तेरे शुक्रगुज़ार होंगे (189)
फिर जब ख़़ुदा ने उनको नेक (फरज़न्द) अता फ़रमा दिया तो जो (औलाद) ख़ुदा ने उन्हें अता किया था लगे उसमें ख़़ुदा का शरीक बनाने तो ख़़ुदा (की शान) शिर्क से बहुत ऊँची है (190)

23 सितंबर 2026

राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा विभिन्न सहयोग योजनान्तर्गत 16.74 लाख रुपये का सहयोग स्वीकृत

 

साहित्य जगत की खुशखबर
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आर्थिक सहायता स्वीकृत
सभी को हार्दिक बधाई.......
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राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर
सेक्टर 4. हिरणमगरी उदयपुर (राज.) 313 002 दूरभाष (0294) 2461717
दिनांक : 01.05.2026
राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा विभिन्न सहयोग योजनान्तर्गत 16.74
लाख रुपये का सहयोग स्वीकृत
पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग योजना में कुल 112 पांडुलिपियों (11.95 लाख रुपये). प्रकाशित ग्रंथों पर सहयोग योजना में 21 पुस्तकों पर (1.74 लाख रुपये), साहित्यिक पत्र-पत्रिका सहयोग योजना में जुल 09 पत्र-पत्रिकाओं पर (1.80 लाख रूपये) एवं साहित्यकार आर्थिक सहयोग योजना में 05 साहित्यकारों को (1.25 लाख रु) के सहयोग स्वीकृत किए गए।
अकादमी सचिव डॉ. बंसत सिंह सोलंकी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-2026 में अकादमी द्वारा पांडुलिपि प्रकाश सहयोग योजनान्तर्गत अग्राकिंत 112 पाण्डुलिपियों को स्वीकृत किया गया है। काव्य विधा में (84) कथा/उपन्यास विधा में (21), निंबंध / आलोचना में (02), नाटक-एंकाकी-विविध (05) काव्य विधा में अग्रांकित
पाण्डुलिपियां स्वीकृत हुई है- बातों ही बातों में (गिरजा शंकर त्रिवेदी, उदयपुर), प्रकृति के प्रतिबिम्ब (डॉ. प्रहलाद राय, उदयपुर), मौग प्रस्थान (डॉ. मनीष सक्सेना, उदयपुर), सितारे मीर के रंग के (प्रेरणा सारवान, अजमेर), उम्मीद अभी जिन्दा है (सन्जू श्रृंगी, कोटा), मन वृन्दावन (डॉ. राधिका लबा, उदयपुर), सौभद्र (हेमराज सिंह हेम, कोटा), भीष्म फिर नौन क्या? (मृदुल पुरोहित, बांसवाडा), सराबोर (डॉ. मीना बया, उदयपुर), भाव सुमन कृष्णार्पण (वीणा मावर, अजमेर), नय रस गगरी छलकी जाएं (सुश्री लता शर्मा, अजमेर), प्रेमरूप (अनुराग सिहरा, करौली), अलसाया तन-मन (राम गोपाल गौतम, कोटा) एक मों, एक मैं, एक सफर (नन्दनी शर्मा, उदयपुर), चेतना के गवाक्ष डॉ. (सुरेश चतुर्वेदी, सुमनेश, भरतपुर), फिर शाम हो गई (दमन त्रिपाठी, बालोतरा), ये सफर कहाँ रखूँ (श्याम लाल निर्मोही चींगरा, बीकानेर), शुभम् सौदर्य (देवीलाल जोशी, डूंगरपुर), रंग बदलते चेहरे (अशीष कुमार मीना, जोधपुर), सत्य के करीब हूँ में (अद्विका सांचीहर नाथद्वारा), किवाड़ पर दस्तक (डॉ. संजीदा (चन्द्रवीर गर्ग, आबदार, बाड़मेर), लहरों से सीखा नौका ने (हरिओम शर्मा हरि, भरतपुर) बहते बहते दरिया बोला खानन, 'शाहीन, जोधपुर), रण ग्यालाएँ (सोनू सुरीला, बारां), अन्तर्मन की गठरी (शैलजा विजयवर्गीय, कोटा), काव्य गंगोत्री (डॉ. शंकर लाल शर्मा, उदयपुर), संवेदनाओं की खनक (विनोद कुमार उपाध्याय, उदयपुर), शबरी के घर आए राम (नाथूलाल निर्भय, बारा), मन की उम्मीद हार ना माने (किरण सांधव, बूंदी), कोमल कोमल प्यारे फूल (सुरेशचन्द्र निगम, झालावाड), दिल की गली से (सुनील दीक्षित, उदयपुर), प्रयास (गजेन्द्र सिंह राजपुरोहित, मावली), कामिनी की रागनी (डॉ. कामिनी व्यास रावल, उदयपुर), चलो चलें उस पार (घतूर सिंह कृष्णा, भरतपुर), सेतु-बंध
(रामलाल चौधरी, जयपुर), प्यास पनघट की (हरीशचन्द्र शर्मा हरि, डीग), इस जीत को अनाम रहने दो (मीनाक्षी नागदा, उदयपुर), तुमसे होकर... (डॉ. मनीषा शर्मा, नाथद्वारा), आजादी के बाद (ओमप्रकाश साहू, बारा), प्रेम गली अत्ति सौकरी (प्रेम प्रकाश शर्मा, अलवर), रंगीन काँच की खिड़कियों (डॉ. रमेशचन्द्र मीणा, दौसा), नन्हा जोकर (डॉ. प्रियंका, शर्मा, उदयपुर), तेरे शहर में... (श्रीमती कुन्दन सिंह कंचन, जयपुर), सहज बाल पहेली कोष (अनीला शर्मा, अजमेर), सोचा ना था (पूजा अग्रवाल, जोधपुर), थोड़ी जमी थोड़ा आसमान (डॉ. प्रीति शर्मा, झालावाड), कैसे भुला दूँ (अनुराग प्रेमी, दौसा), पानी लिखता रहा आग की कहानी (भविष्य दत्त भविष्य, उदयपुर), नन्हें मुन्ने चमन के फूल (रामकरण प्रमाती, कोटा), अस्तित्व स्पन्दन (प्रो निर्मल गर्ग, उदयपुर), मांटी की गंध (श्याम सिंह, भरतपुर), आठ अरब प्रेम-पत्र और अन्य कविताएं (गोपाल नामेन्द्र, कोटा), मयंकोदय (विनीत स्यामी विनोद, चूरू), मेरा प्यारा गांव (सुरेश कुमार गौतम, कोटा), आँगन के फूल (रविकान्त पारीक रवि, जयपुर), रूपोदय (रूपनारायण शर्मा, कोटा), यदि संभव हो (आनंद कुमार पुरोहित, बीकानेर), यादों के सफर में था तू (डॉ. छगनराज राव 'दीप', जोधपुर), शब्दों की सौरभ (नन्दकिशोर निर्भर, चित्तौडगढ़), साथ मेरे रहीं मेरी तन्हाइयों (खुर्शीद शेख युाशीद, उदयपुर), एक कविता सुनोगे (डॉ. पीयूष गर्ग, उदयपुर), आओ स्त्री बोलो (यानु चौबीसा, उदयपुर), आशाओं के पंख (सुनील कुमार चाष्टा, सलूम्बर), आवाज नहीं देते आंसू (मनोज कुमार, हनुमानगड), खिड़की वाली सीट से देखते हुए (हर्षिल पाटीदार, डूंगरपुर), कुछ मेरी भी (डॉ. सुबोध पालीवाल, उदयपुर), कल्पनाएं बाल मन की (मेघा शर्मा, डूंगरपुर), जीवन का लट्टू (अरूण कुमार सक्सेना, अजमेर), परवाज ए-सुखन (नईम खां पठान हारिस, सवाईमाधोपुर), कमल की कस्तूरी (भंवर लाल डांगी, जोधपुर), समय चुप है हमारे भीतर तक (डॉ. नविन दये मानावल, जालोर), पत्रांजन (कुसुम भारद्वाज, उदयपुर), परिंदों के डोरे (सुभाष शर्मा, उदयपुर), गंतव्य (तारावती सैनी नरज, जयपुर), काव्य रारिता (डॉ. नम्रता जैन, उदयपुर), नदी बार-बार मुड़ती है (प्यार चंद साथी, भीलवाडा) शब्दों की सरगम (कपिला पालीवाल, बीकानेर) काव्यामर्थ (सीमा लोहिया, झुंझुनू), मेरे तटबंध (दीक्षा त्यागी, धौलपुर), कायनात (अब्दुल वहीद खिलजी 'वाहिद', मकराना), गुरु थे हिन्द की यादर (शिवराज भारतीय, हनुमानगढ़) अनकी (महेन्द्र सिंह शेखावत, श्रीगंगानगर) खरोंच (शिवगपाल दुरताबा, डीडवाना) कथा/उपन्यास रेत का झरना (रिडमलदान, बाड़मेर), अन्त्येक्ष (संतोष ताकर, जोधपुर), दादाजी की कहानियां (श्याम बिहारी जोशी, जयपुर) गुल्लक और उसकी रजाई (अंजना मनोज गर्ग, कोटा) दमयन्ती (शिखा मंनमोहन शर्मा, जयपुर) अनजाने फरिश्ते (गजेन्द्र भट्ट, उदयपुर) प्लीज हेल्प मी (विजय पड्या, डूंगरपुर) वेलेंटाइन डे गिफ्ट (गोविन्द सिंह राव, जालौर) कुरुक्षेत्र / दो फूल (सुमेर
कहूँ शशि पाठक, जयपुर ऋणं कृत्या घृत पिवेत् (लक्ष्मी, सोलंकी, उदयपुर) सचमुच का परी देर सपन जैन संजू उदयपुर) नीली कीमा बोलिया, भीलवाडा) वो कागज की कश्ती (अशोक मुखर्जी, जयपुर) आओ सुनें कहानी (प्रस्तुति महावर, कोटा) आरील पंछी (श्रीमती आरती चित्तौडा, उदयपुर) कितने मन-कितने दरवाजे (डॉ. बजरंग सोनी, जयपुर) देहरी पार (मंजु शर्मा जांगिड, मनी, जोधपुर) मन की धूप (सुमन लता शर्मा, बूंदी)
निबन्ध / आलोचना में हूं कोरोना इक्कीसवीं सदी का (कासिम अली कासिम कावेरी, बीकानेर), सिनेमा, सबाल्टर्न और साहित्य (डॉ. सुनिता अवस्थी, अजमेर)
नाटक-एकाकी-विविध विधा: जज़्बा (योग्यता इसरानी, टोक) एकांकी-विविधा (प्रेमांशुराम मेहता 'प्रेम', डूंगरपुर), अरे ये तो मैं हूंअिमित शाह, बांसवाडा) दो बीसी व्यंग्य (छगन लाल व्यास, बालोतरा) मानवीय आंतरिक महा भारत (शंकर लाल तिवारी, अलाय) ।
21 पुस्तकों पर सहयोग स्वीकृत किया गया है। बेटी की अभिलाषा (मधु माहेश्वरी, सलूम्बर), ख्वाबों की दुनिया (ज्योति वधवा, बीकानेर), धूप और धरती का प्रेम (कुलदीप सिंह भाटी, जोधपुर), मंदोदरी (अवधेश शर्मा, जयपुर), रंगबिरंगी तितली रानी (योगीराज योगी, कोटा), जानिए अक्षर वर्ण (देवकी दर्पण, बूंदी), मेरा उपयन (महेश पंचोली, कोटा), सतसई प्रेम की (प्रेम शास्त्री, कोटा), अंतर्मन की कहानियां (एम.एल.चतुर्वेदी निशांत, अजमेर), ब्रह्मपुत्र से सांगपो (दयाराम वर्मा, जयपुर), गीत मेरे भीत मेरे (सुभाष चंद्र शर्मा, जयपुर), अर्द्ध विराम (डॉ. योगेश कुमार पाठक, उदयपुर), भज गोविन्दम (साकार श्रीवास्तव 'फलक', जयपुर), मोटा शेर मवाए शोर (काली चरण राजपूत, कोटा), रिटायर्ड सुदामा (कमल रंगा, बीकानेर), गीतामृतम् (राधेश्याम शर्मा, कोटा), जीवन साधना (राकेश 'राजस्थानी, भरतपुर). बगीचे में हलचल (सत्येन्द्र छिब्बर जोधपुर), सपने देखती लडकीयां (पवन सिहाग 'अनाम', हनुमानगढ़), अस्तोदय (प्रशांत टेहल्यानी, कोटा), यर्तिका (वीणा मावर 'वर्तिका', किशनगढ़)।
राजस्थान साहित्यकार आर्थिक सहयोग वर्ष 2025-2026 में कुल 05 साहित्य कारों को आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। सर्वश्री श्री राजाराम भादू, जयपुर श्री ब्रह्मानन्द बाबा, बोरी चित्तौडगढ़, श्रीमती पूर्णिमा मित्रा, बीकानेर, श्री रामस्वरूप किसान, नोहर, श्री गोविन्द जोशी, बीकानेर।
साहित्यिक पत्र-पत्रिका सहयोग योजना में कुल 09 पत्रिकाओं को सहयोग योजना में (1.25 लाख रुपये) स्वीकृत किया गया है। अक्षय लोकजन, अलख दृष्टि (त्रैमासिक), नवसृजन (छः माही), बाल वाटिका (मासिक), अरावली उद्‌घोष (त्रैमासिक), माही संदेश (मासिक), मरू नयकिरण (त्रैमासिक), साहित्यांचल (द्विमासिक), बच्चों का देश (मासिक)।
(डॉ.बसंत सिंह सोलंकी) सचिव

​कोटा के रहने वाले विकास सक्सेना को राजस्थानी फिल्म 'बैरन' के लिए मिला सर्वश्रेष्ठ डीओपी (बेस्ट सिनेमैटोग्राफर) का सम्मान*

 

​कोटा के रहने वाले विकास सक्सेना को राजस्थानी फिल्म 'बैरन' के लिए मिला सर्वश्रेष्ठ डीओपी (बेस्ट सिनेमैटोग्राफर) का सम्मान*
​कोटा (विशेष संवाददाता):
हाड़ौती की धरा और कोटा शहर के लिए एक बेहद गर्व और हर्ष का विषय है। कोटा के निवासी और प्रख्यात सिनेमैटोग्राफर (DOP) विकास सक्सेना को राजस्थानी फिल्म 'बैरन' में उत्कृष्ट छायांकन (Cinematography) के लिए राजस्थान सिनेमा अवॉर्ड्स (RCA 2026) में सर्वश्रेष्ठ डीओपी के सम्मान से नामांकित किया गया है।
​राजस्थान सिनेमा अवॉर्ड्स के 7वें वार्षिकोत्सव समारोह का भव्य आयोजन 'द विंटेज विलेज रिसॉर्ट', चौमूं (जयपुर) में आयोजित किया गया। इस राज्यस्तरीय समारोह में राजस्थान सिनेमा जगत की कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की।
​फिल्म 'बैरन' में दिखी बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी
*​निर्देशक जी. नटराज* के निर्देशन में बनी राजस्थानी फिल्म ' *बैरन* ' में *विकास सक्सेना* ने अपनी बेहतरीन और जीवंत सिनेमैटोग्राफी से हर दृश्य को पर्दे पर खूबसूरती से उकेरा है। फिल्म के दृश्यों, लाइटिंग और कैमरे के प्रयोग को समीक्षकों एवं दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया है।
​इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में रिया सैनी, अभिषेक शर्मा, राखी रंगीली, हंसा रंगीली और विशा पाराशर मुकेश छैला और संतोष कंवर. जैसे लोकप्रिय कलाकारों ने अपने अभिनय का जलवा बिखेरा है। कलाकारों के सशक्त अभिनय उत्कृष्ट कैमरा वर्क ने फिल्म को एक अलग ही ऊंचाई प्रदान की है।
​विकास सक्सेना को मिले इस राज्यस्तरीय सम्मान की खबर मिलते ही कोटा शहर के कला एवं सिनेमा जगत में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय कलाकारों, शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी और भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
​विकास सक्सेना ने इस सफलता का श्रेय फिल्म के निर्देशक जी. नटराज, समस्त स्टार कास्ट, क्रू मेंबर्स तथा कोटावासियों के अटूट प्रेम और आशीर्वाद को दिया है।

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