आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
11 फ़रवरी 2026
*बजट से राजस्थान की जनता को मिली निराशा : गुंजल*
28 फरवरी तक साहित्यकार अपना परिचय 9413350242 पर भेजें...... 11. मोहनलाल वर्मा , झालावाड़
पिता-पुत्रों ने सहमति से संपन्न कराया नेत्रदान
पिता-पुत्रों ने सहमति से संपन्न कराया नेत्रदान
मंगलवार दिन रात
लाल बिहारी जी का चौक, चौमुखा बाजार,बूंदी निवासी पंडित श्रीकांत शर्मा की
धर्मपत्नी गीता शर्मा,का आकस्मिक निधन हुआ,जिसके उपरांत बेटे
लक्ष्मीकांत,शिवकांत और बेटी अनीता ने स्वप्रेरणा से गीता के नेत्रदान
करवाने का निर्णय लिया ।
सभी की सहमति से ऋतुराज कोठीवाला स्मृति
संस्थान,के मधुसूदन गुप्ता को नेत्रदान प्रक्रिया संपन्न करवाने के लिए,
संपर्क किया संस्था के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा की सूचना पर देर रात 12:00
श्रीकांत के निवास पर, डॉ कुलवंत गौड़ ने नेत्रदान प्रक्रिया सम्पन्न की।
डॉ
कुलवंत गौड़ ने बताया कि,जन सहयोग से अभी तक बूंदी शहर में 77 नेत्रदान हो
चुके हैं । नेत्रदान लेने के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम 24 घंटे
पूरे हाडोती संभाग में तैयार रहती है ।
परिवार में परंपरा बना नेत्रदान
परिवार में परंपरा बना नेत्रदान
2. पत्नी,बेटों ने सहमति कर संपन्न कराया नेत्रदान
दो
माह पूर्व विज्ञान नगर,निवासी ट्रांसपोर्ट व्यवसायी विनय कुमार छाबड़ा के
बड़े भाई राजेंद्र छाबड़ा के आकस्मिक निधन के उपरांत संस्था शाइन इंडिया
फाउंडेशन के माध्यम से उनका नेत्रदान संपन्न हुआ था।
आज सुबह विनय
का भी हृदयाघात से आकस्मिक निधन हो गया । नेत्रदान की, सरल और रक्त विहीन
प्रक्रिया को, प्रारंभ से ही परिवार के सदस्य जानते थे । इसीलिए जैसे ही
संस्था के ज्योति मित्र श्याम दीवाना ने विनय कुमार की पत्नी सविता,बेटे
मनीष और अंकुश से नेत्रदान की चर्चा की तो परिवार ने तुरंत सहमति दे दी ।
श्याम
की सूचना पर संस्था सदस्यों की ओर से घर पर नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न
हुई । विनय के अचानक देवलोक गमन जाने से पंजाबी समाज में शोक की लहर आ गई।
(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे
(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे (21)
(और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे
उनको और उनके साथियों को और खु़दा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं (22)
उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ (23)
और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है (24)
(अरे कमबख़्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते (25)
(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं (26)
और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे (27)
(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे (28)
वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खु़द ईमान लाने वाले न थे (29)
और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खु़द सरकश लोग थे (30)