ऑनलाइन सत्र में योग से जाना, बढ़ती उम्र में कैसे दिखें युवा
2. योग दिवस पर ऑनलाइन सत्र आयोजित, युवाओं ने सीखे 'हेल्दी एजिंग' के गुर
12वें
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को रेवा योगा ग्रुप * एवं
*शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा के संयुक्त तत्वावधान में,इस वर्ष की थीम योगा
फॉर हेल्थी एजिंग पर एक विशेष ऑनलाइन योग सत्र का आयोजन किया गया। ऑनलाइन
रखने के पीछे उद्देश्य यही था कि, कई युवा बच्चे और बुजुर्ग, जो घर से बाहर
नहीं निकाल सकते थे उनको भी यह सेहत भरी जानकारी मिल सके ।
गूगल
मीट के माध्यम से इस सत्र में, अलग-अलग राज्य के 15 शहरों के विभिन्न
कॉलेजों के विद्यार्थी, समाजसेवी, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, मेडिटेशन
एवं योग में जिज्ञासा रखने वाले 90 लाभार्थी जुड़े ।
सत्र का
प्रारंभ संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन की संस्थापिका डॉ संगीता गौड़ ने
किया,जिसके उपरांत,संचालन प्रसिद्ध योग प्रशिक्षिका एवं एनएलपी ट्रेनर
अनिता नारुका ने किया। यह पिछले 6+ वर्षों से योग एवं मानसिक स्वास्थ्य के
क्षेत्र में कार्यरत हैं।
सत्र में देश के विभिन्न कॉलेजों के
विद्यार्थियों, समाजसेवियों तथा मेडिटेशन एवं योग में जिज्ञासा रखने वाले
90+ युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अनीता ने 'हेल्दी एजिंग' पर केंद्रित योगासन, प्राणायाम एवं सरल ध्यान तकनीकों का अभ्यास करवाया।
उन्होंने बताया कि,कैसे नियमित योग से बढ़ती उम्र में भी शरीर स्वस्थ,और मन शांत रखा जा सकता है।
योग
केवल एक्सरसाइज नहीं,जीवन जीने की कला है। युवा अवस्था से ही इसे अपनाकर
हम बढ़ती उम्र को,कुछ और वर्ष पीछे कर सकते है,और सही समय आने पर एक उत्सव
बना सकते हैं।"
सत्र के अंत में डॉ संगीता ने, योग प्रशिक्षक अनीता
नरूका का आभार व्यक्त करते हुये,कहा कि संस्था का उद्देश्य युवाओं को
शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जोड़ना है। भविष्य में
भी ऐसे जागरूकता सत्र आयोजित किए जाते रहेंगे।
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
22 जून 2026
ऑनलाइन सत्र में योग से जाना, बढ़ती उम्र में कैसे दिखें युवा
ज्योति मित्रों ने संपन्न कराए नेत्रदान
ज्योति मित्रों ने संपन्न कराए नेत्रदान
कोटा शहर में, रविवार को संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्रों के माध्यम से दो देवलोकगामियों के नेत्रदान संपन्न हुये ।
गायत्री
विहार, बजरंग नगर,निवासी मधु पालीवाल के पति सुरेश चंद्र पालीवाल (परचेज
ऑफीसर श्री राम रेयांश) के आकस्मिक निधन के उपरांत उनके सुपुत्र व ज्योति
मित्र मनोज पालीवाल ने तुरंत संस्था के डॉ कुलवंत गौड़ को संपर्क किया ।
बेटे अनुराग,मनोज और जयेश की सहमति पर नेत्रदान सम्पन्न हुआ।
इसी
नेत्रदान के ठीक उपरांत, ज्योति मित्र प्रद्युम्न पाटनी की सूचना पर
,तलवंडी निवासी मनीषा मतानी ने अपनी बहन लता चावला से सहमति लेकर माँ
लीलाबाई का नेत्रदान संपन्न करवाया । नेत्रदान के इस पुनीत कार्य में
संस्था शाइन इंडिया और ईबीएसआर कोटा चैप्टर का सहयोग रहा
बेशक मुसलमानों और यहूदियों और नसरानियों और लामज़हबों में से जो कोई खु़दा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान लाए और अच्छे-अच्छे काम करता रहे तो उन्हीं के लिए उनका अज्र व सवाब उनके खु़दा के पास है और न (क़यामत में) उन पर किसी का ख़ौफ होगा न वह रंजीदा दिल होंगे
(और वह वक़्त भी याद करो) जब तुमने मूसा से कहा कि ऐ मूसा हमसे एक ही खाने
पर न रहा जाएगा तो आप हमारे लिए अपने परवरदिगार से दुआ कीजिए कि जो चीज़े
ज़मीन से उगती है जैसे साग पात तरकारी और ककड़ी और गेहूँ या (लहसुन) और
मसूर और प्याज़ (मन व सलवा) की जगह पैदा करें (मूसा ने) कहा क्या तुम ऐसी
चीज़ को जो हर तरह से बेहतर है अदना चीज़ से बदलन चाहते हो तो किसी शहर में
उतर पड़ो फिर तुम्हारे लिए जो तुमने माँगा है सब मौजूद है और उन पर ज़िल्लत
रूसवाई और मोहताजी की मार पड़ी और उन लोगों ने क़हरे खु़दा की तरफ पलटा
खाया, ये सब इस सबब से हुआ कि वह लोग खु़दा की निशानियों से इन्कार करते थे
और पैग़म्बरों को नाहक शहीद करते थे, और इस वजह से (भी) कि वह नाफ़रमानी
और सरकशी किया करते थे (61)
बेशक मुसलमानों और यहूदियों और नसरानियों और लामज़हबों में से जो कोई
खु़दा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान लाए और अच्छे-अच्छे काम करता रहे तो उन्हीं
के लिए उनका अज्र व सवाब उनके खु़दा के पास है और न (क़यामत में) उन पर
किसी का ख़ौफ होगा न वह रंजीदा दिल होंगे (62)
और (वह वक़्त याद करो) जब हमने (तामीले तौरेत) का तुमसे एक़रार लिया
और हमने तुम्हारे सर पर तूर से (पहाड़ को) लाकर लटकाया और कह दिया कि तौरेत
जो हमने तुमको दी है उसको मज़बूत पकड़े रहो और जो कुछ उसमें है उसको याद
रखो (63)
ताकि तुम परहेज़गार बनो फिर उसके बाद तुम (अपने एहदो पैमान से) फिर गए
बस अगर तुम पर खु़दा का फज़ल और उसकी मेहरबानी न होती तो तुमने सख़्त घाटा
उठाया होता (64)
और अपनी क़ौम से उन लोगों की हालत तो तुम बखू़बी जानते हो जो शम्बे
(सनीचर) के दिन अपनी हद से गुज़र गए (कि बावजूद मुमानिअत शिकार खेलने
निकले) तो हमने उन से कहा कि तुम राइन्दे गए बन्दर बन जाओ (और वह बन्दर हो
गए) (65)
बस हमने इस वाक़ये से उन लोगों के वास्ते जिन के सामने हुआ था और जो
उसके बाद आनेवाले थे अज़ाब क़रार दिया, और परहेज़गारों के लिए नसीहत (66)
और (वह वक़्त याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि खु़दा तुम लोगों
को ताकीदी हुक्म करता है कि तुम एक गाय जि़बाह करो वह लोग कहने लगे क्या
तुम हमसे दिल्लगी करते हो मूसा ने कहा मैं खु़दा से पनाह माँगता हूँ कि मैं
जाहिल बनूँ (67)
(तब वह लोग कहने लगे कि (अच्छा) तुम अपने खु़दा से दुआ करो कि हमें बता
दे कि वह गाय कैसी हो मूसा ने कहा बेशक खु़दा ने फरमाता है कि वह गाय न तो
बहुत बूढ़ी हो और न बछिया बल्कि उनमें से औसत दरजे की हो, ग़रज़ जो तुमको
हुक्म दिया गया उसको बजा लाओ (68)
वह कहने लगे (वाह) तुम अपने खु़दा से दुआ करो कि हमें ये बता दे कि
उसका रंग आखि़र क्या हो मूसा ने कहा बेशक खु़दा फरमाता है कि वह गाय खू़ब
गहरे ज़र्द रंग की हो देखने वाले उसे देखकर खु़श हो जाए (69)
तब कहने लगे कि तुम अपने खु़दा से दुआ करो कि हमें ज़रा यह तो बता दे
कि वह (गाय) और कैसी हो (वह) गाय तो और गायों में मिल जुल गई और खु़दा ने
चाहा तो हम ज़रूर (उसका) पता लगा लेगे (70)
21 जून 2026
और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और (वह वक़्त भी याद करो) जब हमने मूसा से चालीस रातों का वायदा किया था और तुम लोगों ने उनके जाने के बाद एक बछड़े को (परसतिश के लिए खु़दा) बना लिया
और फिरऔन के आदमियों को तुम्हारे देखते-देखते डुबो दिया और (वह वक़्त भी
याद करो) जब हमने मूसा से चालीस रातों का वायदा किया था और तुम लोगों ने
उनके जाने के बाद एक बछड़े को (परसतिश के लिए खु़दा) बना लिया (51)
हालाँकि तुम अपने ऊपर ज़ुल्म जोत रहे थे फिर हमने उसके बाद भी तुम से दरगुज़र की ताकि तुम शुक्र करो (52)
और (वह वक़्त भी याद करो) जब मूसा को (तौरेत) अता की और हक़ और बातिल को जुदा करनेवाला क़ानून (इनायत किया) ताकि तुम हिदायत पाओ
(53)
और (वह वक़्त भी याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि ऐ मेरी क़ौम
तुमने बछड़े को (ख़ुदा) बना के अपने ऊपर बड़ा सख़्त जु़ल्म किया तो अब
(इसके सिवा कोई चारा नहीं कि) तुम अपने ख़ालिक की बारगाह में तौबा करो और
वह ये है कि अपने को क़त्ल कर डालो तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारे
हक़ में यही बेहतर है, फिर जब तुमने ऐसा किया तो खु़दा ने तुम्हारी तौबा
क़ुबूल कर ली बेशक वह बड़ा मेहरबान माफ़ करने वाला है (54)
और (वह वक़्त भी याद करो) जब तुमने मूसा से कहा था कि ऐ मूसा हम तुम पर
उस वक़्त तक ईमान न लाएँगे जब तक हम खु़दा को ज़ाहिर बज़ाहिर न देख ले उस
पर तुम्हें बिजली ने ले डाला, और तुम तकते ही रह गए (55)
फिर तुम्हें तुम्हारे मरने के बाद हमने जिला उठाया ताकि तुम शुक्र करो (56)
और हमने तुम पर अब्र का साया किया और तुम पर मन व सलवा उतारा और (ये भी
तो कह दिया था कि) जो सुथरी व नफीस रोजि़या तुम्हें दी हैं उन्हें शौक़ से
खाओ, और उन लोगों ने हमारा तो कुछ बिगाड़ा नहीं मगर अपनी जानों पर सितम
ढाते रहे (57)
और (वह वक़्त भी याद करो) जब हमने तुमसे कहा कि इस गाँव (अरीहा) में
जाओ और इसमें जहाँ चाहो फराग़त से खाओ (पियो) और दरवाज़े पर सजदा करते हुए
और ज़बान से हित्ता बखि़्शश कहते हुए आओ तो हम तुम्हारी ख़ता ये बख़्श देगे
और हम नेकी करने वालों की नेकी (सवाब) बढ़ा देगें (58)
तो जो बात उनसे कही गई थी उसे शरीरों ने बदलकर दूसरी बात कहनी शुरू कर
दी तब हमने उन लोगों पर जिन्होंने शरारत की थी उनकी बदकारी की वजह से
आसमानी बला नाजि़ल की (59)
और (वह वक़्त भी याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी माँगा तो
हमने कहा (ऐ मूसा) अपनी लाठी पत्थर पर मारो (लाठी मारते ही) उसमें से बारह
चश्में फूट निकले और सब लोगों ने अपना-अपना घाट बखूबी जान लिया और हमने आम
इजाज़त दे दी कि खु़दा की दी हुयी रोज़ी से खाओ पियो और मुल्क में फसाद न
करते फिरो (60)
20 जून 2026
अभिभाषक परिषद में गूंजा हज का रूहानी संदेश, अख्तर खान अकेला का हुआ सम्मा