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05 फ़रवरी 2026

हाड़ोती रचनाकार परिचय कोश 4. महेश पंचोली कवि, कोटा

 

हाड़ोती रचनाकार परिचय कोश
4. महेश पंचोली कवि, कोटा
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महेश पंचोली का जन्म पिता स्व.श्री हरिदत्त पंचोली व्याख्याता एवं माता माता:स्व.लीला देवी के परिवार में 24 अगस्त 1968 को बूंदी जिले के कापरेन में हुआ। आपने बी.एससी.तक शिक्षा प्राप्त की। आप हिंदी एवं राजस्थानी भाषा में गद्य एवं पद्य विधा में रचनाएं लिखते हैं। आपकी 5 कृतियां प्रकाशित हो चुकी है एवं 3 लेखन प्रक्रिया में है। प्रकाशित कृतियों में दिया जलता रहा(हिंदी काव्य संग्रह)राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के प्रकाशन सहयोग से (2023) धरती लागै बणी ठणी(राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर के प्रकाशन सहयोग से (2023), मम्मी का मैं राज दुलारा(बाल कविता संग्रह)पंडित जवाहर लाल नेहरु बाल साहित्य अकादमी जयपुर द्वारा(2023),मेरा उपवन हिंदी बाल कविता संग्रह (2024), म्हारा देस को तिरंगो (राजस्थानी बाल कविता संग्रह ( 2024) शामिल हैं। प्रक्रियाधीन कृतियों में मुक्तक संग्रह,कहानी संग्रह, हमारा चिड़ियाघर बाल कविता संग्रह हैं। एक दर्जन से अधिक साझा संकलनों में रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। आपकी साहित्यिक सेवा के लिए बाल साहित्य भूषण सम्मान साहित्य मंडल नाथद्वारा, साहित्य श्री सम्मान अखिल भारतीय साहित्य परिषद कोटा,अक्षर अभिनन्दन सम्मान,लेखन सम्मान पंडित जवाहर लाल नेहरु साहित्य अकादमी,साहित्य सृजन सम्मान काव्य कलश संस्था,साहित्य कला सम्मान सृजन ओ तखलीक संस्था,साहित्य भूषण सम्मान हिंदी साहित्य समिति,हिंदी साहित्य भारती सम्मान,श्री आर.के.पुरम परमार्थ सेवा समिति द्वारा,कविता लेखन वन्य जीव सप्ताह सम्मान,शान ए हाडोती सम्मान श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान,जजमेन्ट सम्मान केरियर पाइन्ट युनिवर्सिटी,सफल संचालन सम्मान,श्रावणी तीज मेला सम्मान ,समरस श्री काव्य शिरोमणि सम्मान,हिंदी सेवी सम्मान राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय,कलम शिरोमणि साहित्य सम्मान राष्ट्रीय कवि चौपाल अन्तर्राष्ट्रीय महिला काव्य मंच,चम्बल साहित्य संगम ,बाल प्रभा मानद उपाधि साहित्य मण्ड़ल नाथद्वारा,सांस्कृति साहित्य मिडिया फोरम कोटा आदि कई संस्थाओं से सम्मानित किया जा चुका है।
संपर्क : 67 न्यू कमला उद्यान, कुन्हाडी कोटा (राज)
मो.9799366675,9462014354
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कोटा रेल मंडल के तकनीशियन घासीराम मीणा ने इंदौर मैराथन में बढ़ाया कोटा का गौरव*

 

कोटा रेल मंडल के तकनीशियन घासीराम मीणा ने इंदौर मैराथन में बढ़ाया कोटा का गौरव*
के डी अब्बासी
कोटा। कोटा रेल मंडल के अंतर्गत कोटा स्थित माल डिब्बा मरम्मत कारखाना में कार्यरत तकनीशियन घासीराम मीणा ने खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कोटा रेल मंडल एवं रेलवे परिवार का नाम रोशन किया है। यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, इंदौर द्वारा दिनांक 1 फरवरी 2026 को इंदौर में आयोजित 10 किलोमीटर मैराथन प्रतियोगिता में उन्होंने 40 से 50 वर्ष आयु वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता।
प्रतियोगिता में घासीराम मीणा ने 10 किलोमीटर की दौड़ 37 मिनट 17 सेकंड में पूरी कर पोडियम फिनिश दर्ज की। उनका यह प्रदर्शन यह दर्शाता है कि कोटा रेल मंडल के कर्मचारी अपने नियमित रेल सेवा दायित्वों के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस और खेल गतिविधियों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
घासीराम मीणा वर्तमान में कोटा रेल मंडल के अंतर्गत माल डिब्बा मरम्मत कारखाना, कोटा में तकनीशियन के पद पर कार्यरत हैं। निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने यह उपलब्धि अर्जित की है, जो मंडल के अन्य रेल कर्मचारियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व दिनांक 25 जनवरी 2026 को नागपुर में आयोजित 10 किलोमीटर मैराथन प्रतियोगिता में भी घासीराम मीणा ने भाग लेकर चौथा स्थान प्राप्त किया था। लगातार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन कोटा रेल मंडल के कर्मचारियों की खेल प्रतिभा और स्वास्थ्य-जागरूकता को रेखांकित करता है।

चिकित्सा शिक्षा को लाभ मिले,इस भावना से कोटा से बूंदी मेडिकल कॉलेज को मिला वर्ष का पहला देहदान

 चिकित्सा शिक्षा को लाभ मिले,इस भावना से कोटा से बूंदी मेडिकल कॉलेज को मिला वर्ष का पहला देहदान

इंदिरा कॉलोनी,स्टेशन क्षेत्र कोटा निवासी, प्रेम सिंह परिहार का बीती रात बुधवार को निवास स्थान पर ही, आकस्मिक निधन हो गया। आर्य समाज के निति,नियम सिद्धांत को जीवन में आत्मसात करने वाले प्रेम सिंह, न सिर्फ प्रकृति प्रेमी थे,बल्कि बालिका शिक्षा,पर्यावरण, बच्चों व महिलाओं के अधिकारों के लिये उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया ।

प्रेम सिंह, आर्य समाज रेलवे कॉलोनी की कोषाध्यक्ष, पाल बघेल क्षत्रिय समाज कोटा के पूर्व अध्यक्ष पद पर रहकर भी उन्होंने समाज के लिए काफी सेवा कार्य किए। वर्ष 2018 में, प्रेम सिंह ने अपना नेत्रदान और देहदान का संकल्प पत्र शाइन इंडिया फाउंडेशन के साथ भरा था,और अभी 2 दिन पहले ही,उन्हें अपनी मृत्यु के पूर्वाभास होने के कारण पत्नी कमला को,देहदान और नेत्रदान के लिए बता दिया था ।

शोक की घटना होते ही बेटे सत्यव्रत ने अल सुबह 4:00 बजे ही, शाइन इंडिया के डॉ कुलवंत गौड़ को संपर्क किया । डॉ गौड़ के मार्गदर्शन और दिशा निर्देश पर, निवास पर नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई और परिवार के सदस्यों की सहमति से,उनकी मृत देह को,कोटा से 40 किलोमीटर दूर बूंदी के राजकीय मेडिकल कॉलेज लाया गया।

प्रेम सिंह के बेटे सत्यव्रत,बेटी क्षेमिका,पत्नि कमला,भाई ओमप्रकाश पाल, नित्येंद्र सिंह पाल सहित करीबी रिश्तेदारों और मोहल्ले के 200 से अधिक लोगों ने नम आंखों से,आर्य समाज के वैदिक मंत्रों के साथ प्रेम सिंह की देह को कोटा से बूंदी में देहदान के लिए रवाना किया ।

रेलवे क्षेत्र के आर्य समाज के अध्यक्ष हरिदत्त शर्मा ने प्रेम सिंह के आकस्मिक निधन पर दुख जताते हुए कहा कि, प्रेम ने अपने पिता शंकर लाल से प्राप्त आर्य समाज शिक्षा,नीति,नियम और सिद्धांतों को अपनाया, उनके अचानक इस तरह से चले जाने से,पूरे क्षेत्र के सभी आर्य समाज के सहयोगियों को दुख पहुंचा है । हमारा प्रयास रहेगा कि,उनके सेवा कार्यों को जन-जन तक पहुंचाया जाये । यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।

नेत्रदान देहदान के उपरांत, संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन और राजकीय मेडिकल कॉलेज, बूंदी की ओर से परिवार को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, इस दौरान मेडिकल कॉलेज के भावी चिकित्सक भी मौजूद थे ।

संस्था के बूंदी शहर के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा ने बताया कि,संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से बूंदी को सर्वप्रथम पहला देहदान केशोरायपाटन निवासी स्व० पिंकी छाबड़ा का वर्ष 2023 में, वर्ष 2025 में स्व० सुरेंद्र कुमार विजयवर्गीय और अभी यह वर्ष 2026 का पहला देहदान स्व० प्रेम सिंह परिहार का संस्था के माध्यम से किया गया है ।

और उनके लिए (मेरी कु़दरत) की एक निशानी ये है कि उनके बुज़ुर्गों को (नूह की) भरी हुयी कश्ती में सवार किया

 और उनके लिए (मेरी कु़दरत) की एक निशानी ये है कि उनके बुज़ुर्गों को (नूह की) भरी हुयी कश्ती में सवार किया (41)
और उस कशती के मिसल उन लोगों के वास्ते भी वह चीज़े (कश्तियाँ) जहाज़ पैदा कर दी (42)
जिन पर ये लोग सवार हुआ करते हैं और अगर हम चाहें तो उन सब लोगों को डुबा मारें फिर न कोई उन का फरियाद रस होगा और न वह लोग छुटकारा ही पा सकते हैं (43)
मगर हमारी मेहरबानी से और चूँकि एक (ख़ास) वक़्त तक (उनको) चैन करने देना (मंज़ूर) है (44)
और जब उन कुफ़्फ़ार से कहा जाता है कि इस (अज़ाब से) बचो (हर वक़्त तुम्हारे साथ-साथ) तुम्हारे सामने और तुम्हारे पीछे (मौजूद) है ताकि तुम पर रहम किया जाए (45)
(तो परवाह नहीं करते) और उनकी हालत ये है कि जब उनके परवरदिगार की निशानियों में से कोई निशानी उनके पास आयी तो ये लोग मुँह मोड़े बग़ैर कभी नहीं रहे (46)
और जब उन (कुफ़्फ़ार) से कहा जाता है कि (माले दुनिया से) जो खु़दा ने तुम्हें दिया है उसमें से कुछ (खु़दा की राह में भी) ख़र्च करो तो (ये) कुफ़्फ़ार ईमानवालों से कहते हैं कि भला हम उस शख़्स को खिलाएँ जिसे (तुम्हारे ख़्याल के मुवाफि़क़) खु़दा चाहता तो उसको खु़द खिलाता कि तुम लोग बस सरीही गुमराही में (पड़े हुए) हो (47)
और कहते हैं कि (भला) अगर तुम लोग (अपने दावे में सच्चे हो) तो आखि़र ये (क़यामत का) वायदा कब पूरा होगा (48)
(ऐ रसूल) ये लोग एक सख़्त चिंघाड़ (सूर) के मुनतजि़र हैं जो उन्हें (उस वक़्त) ले डालेगी (49)
जब ये लोग बाहम झगड़ रहे होगें फिर न तो ये लोग वसीयत ही करने पायेंगे और न अपने लड़के बालों ही की तरफ लौट कर जा सकेगें (50)

04 फ़रवरी 2026

क्या उन लोगों ने इतना भी ग़ौर नहीं किया कि हमने उनसे पहले कितनी उम्मतों को हलाक कर डाला और वह लोग उनके पास हरगिज़ पलट कर नहीं आ सकते

 क्या उन लोगों ने इतना भी ग़ौर नहीं किया कि हमने उनसे पहले कितनी उम्मतों को हलाक कर डाला और वह लोग उनके पास हरगिज़ पलट कर नहीं आ सकते (31)
(हाँ) अलबत्ता सब के सब इकट्ठा हो कर हमारी बारगाह में हाजि़र किए जाएँगे (32)
और उनके (समझने) के लिए मेरी कु़दरत की एक निशानी मुर्दा (परती) ज़मीन है कि हमने उसको (पानी से) जि़न्दा कर दिया और हम ही ने उससे दाना निकाला तो उसे ये लोग खाया करते हैं (33)
और हम ही ने ज़मीन में छुहारों और अँगूरों के बाग़ लगाए और हमही ने उसमें पानी के चशमें जारी किए (34)
ताकि लोग उनके फल खाएँ और कुछ उनके हाथों ने उसे नहीं बनाया (बल्कि खु़दा ने) तो क्या ये लोग (इस पर भी) शुक्र नहीं करते (35)
वह (हर ऐब से) पाक साफ है जिसने ज़मीन से उगने वाली चीज़ों और खु़द उन लोगों के और उन चीज़ों के जिनकी उन्हें ख़बर नहीं सबके जोड़े पैदा किए (36)
और मेरी क़ुदरत की एक निशानी रात है जिससे हम दिन को खींच कर निकाल लेते (जाएल कर देते) हैं तो उस वक़्त ये लोग अँधेरे में रह जाते हैं (37)
और (एक निशानी) आफताब है जो अपने एक ठिकाने पर चल रहा है ये (सबसे) ग़ालिब वाकि़फ (खु़दा) का (वाधा हुआ) अन्दाज़ा है (38)
और हमने चाँद के लिए मंजि़लें मुक़र्रर कर दीं हैं यहाँ तक कि हिर फिर के (आखि़र माह में) खजूर की पुरानी टहनी का सा (पतला टेढ़ा) हो जाता है (39)
न तो आफताब ही से ये बन पड़ता है कि वह माहताब को जा ले और न रात ही दिन से आगे बढ़ सकती है (चाँद, सूरज, सितारे) हर एक अपने-अपने आसमान (मदार) में चक्कर लगा रहें हैं (40)

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