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30 अक्टूबर 2026

शाइन इंडिया के पायलेट प्रोजेक्ट मिशन सबल भारत की शुरुआत, विद्यार्थियों की नि:शुल्क जांच शुरू

  शाइन इंडिया के पायलेट प्रोजेक्ट मिशन सबल भारत की शुरुआत, विद्यार्थियों की नि:शुल्क जांच शुरू
2. चिकित्सा शिविर में आँख और दांतों की समस्या से ग्रसित मिले विद्यार्थी

"मुस्कान भी तब ही अच्छी ,जब दाँत हो साफ़ और आँखों में रोशनी अच्छी..."

स्वस्थ,समृद्ध भारत व अंधत्व निवारण के केंद्र सरकार के अभियान में सहयोग देने के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा, कोटा शहर के राजकीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की आंखों की नि:शुल्क जांच एवं नि:शुल्क चश्मा वितरण के साथ-साथ उनका नि:शुल्क दंत परीक्षण किया गया।

संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ में बताया कि, शाइन इंडिया फाउंडेशन के दो माह के पायलट प्रोजेक्ट, मिशन सबल भारत के तहत आगामी दो माह में, संस्था के द्वारा राजकीय विद्यालयों में कक्षा 8 से 12 के छात्र-छात्राओं का नि:शुल्क नेत्र एवं दंत चिकित्सा परीक्षण किया गया,साथ ही दृष्टि दोष युक्त चयनित बच्चों को नि:शुल्क चश्मा का वितरण भी किया गया।

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत विज्ञान नगर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में ऑप्टोमेट्रिस्ट जी डी गुप्ता के सहयोग से बच्चों में दृष्टि दोष की जांच की गई,और दंत चिकित्सक डॉ ज्योति चौरसिया ने बच्चों के दांतों की जाँच की, और बच्चों को सही तरह से दांतों की देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।

प्रधानाचार्य अनीता शर्मा ने अंत में संस्था सदस्यों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि,सही उम्र में सही इलाज मिलने से, काफी हद तक कम उम्र में होने वाली अंधता को रोका जा सकता है। अच्छे आत्मविश्वास और अच्छी लीडरशिप के लिए, जीवन में आगे बढ़ने के लिए मन और शरीर दोनों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है।

डॉ ज्योति ने कहा कि,जब चेहरे पर अच्छी मुस्कान रहेगी और आँखों में अच्छी रोशनी रहेगी, तो बच्चे में अपने आप ही एक अच्छा कॉन्फिडेंस दिखेगा। ऐसा बच्चा न सिर्फ स्कूल में अच्छा स्कोर करेगा, बल्कि जीवन में भी बहुत अच्छे कार्य कर सकेगा।

(ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं

 (ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं (101)
तो ये लोग भी उन्हें सज़ाओं के मुन्तिज़र (इन्तजार में) हैं जो उनसे क़ब्ल (पहले) वालो पर गुज़र चुकी हैं (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अच्छा तुम भी इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ यक़ीनन इन्तज़ार करता हूँ (102)
फिर (नुज़ूले अज़ाब के वक़्त) हम अपने रसूलों को और जो लोग ईमान लाए उनको (अज़ाब से) तलूउ बचा लेते हैं यूँ ही हम पर लाजि़म है कि हम इमान लाने वालों को भी बचा लें (103)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर तुम लोग मेरे दीन के बारे में शक में पड़े हो तो (मैं भी तुमसे साफ कहें देता हूँ) ख़़ुदा के सिवा तुम भी जिन लेागों की परसतिश करते हो मै तो उनकी परसतिश नहीं करने का मगर (हाँ) मै उस ख़ुदा की इबादत करता हूँ जो तुम्हें (अपनी कुदरत से दुनिया से) उठा लेगा और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मोमिन हूँ (104)
और (मुझे) ये भी (हुक्म है) कि (बातिल) से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ कायम रख और मुशरेकीन से हरगिज़ न होना (105)
और ख़ुदा को छोड़ ऐसी चीज़ को पुकारना जो न तुझे नफा ही पहुँचा सकती हैं न नुक़सान ही पहुँचा सकती है तो अगर तुमने (कहीं ऐसा) किया तो उस वक़्त तुम भी ज़ालिमों में (षुमार) होगें (106)
और (याद रखो कि) अगर ख़ुदा की तरफ से तुम्हें कोई बुराई छू भी गई तो फिर उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं होगा और अगर तुम्हारे साथ भलाई का इरादा करे तो फिर उसके फज़ल व करम का लपेटने वाला भी कोई नहीं वह अपने बन्दों में से जिसको चाहे फायदा पहुँचाएँ और वह बड़ा बख़्षने वाला मेहरबान है (107)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ लोगों तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) आ चुका फिर जो शख़्स सीधी राह पर चलेगा तो वह सिर्फ अपने ही दम के लिए हिदायत एख़्तेयार करेगा और जो गुमराही एख़्तेयार करेगा वह तो भटक कर कुछ अपना ही खोएगा और मैं कुछ तुम्हारा जि़म्मेदार तो हूँ नहीं (108)
और (ऐ रसूल) तुम्हारे पास जो ‘वही’ भेजी जाती है तुम बस उसी की पैरवी करो और सब्र करो यहाँ तक कि ख़ुदा तुम्हारे और काफिरों के दरम्यिान फैसला फरमाए और वह तो तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है (109)

29 अक्टूबर 2026

चिकित्सा मंत्री जी जनता की सुनो भीमगंजमंडी CHC की बदहाली! डॉक्टरों की कमी, एक्स-रे मशीन बंद और स्टील के पाइपों के पीछे से मरीजों का इलाज!

 

चिकित्सा मंत्री जी जनता की सुनो
भीमगंजमंडी CHC की बदहाली! डॉक्टरों की कमी, एक्स-रे मशीन बंद और स्टील के पाइपों के पीछे से मरीजों का इलाज!
डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़ | के.डी. अब्बासी
कोटा। चिकित्सा मंत्री जी कोटा शहर के भीमगंज मंडी क्षेत्र के लोगों की पुकार सुनो,शहर के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), क़भीमगंजमंडी में चिकित्सा सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता, एक्स-रे सुविधा और मरीजों की जांच के दौरान अपनाई जा रही व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है।
पांच डॉक्टरों के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में कुल पांच डॉक्टर हैं। इनमें तीनों की विशेषज्ञता के संबंध में उपलब्ध जानकारी स्पष्ट नहीं है,
गायनी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं होने से महिला मरीज परेशान, इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं।
जबकि एक होम्योपैथिक और एक दंत चिकित्सक बताए गए हैं। अस्पताल में 10 बेड की सुविधा है। वहीं, कुल 39 स्थायी पदों में से कई कर्मचारियों के डेपुटेशन पर बाहर होने की जानकारी सामने आई है। इससे अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपलब्ध मानव संसाधन पर सवाल उठ रहे हैं।
जनवरी से एक्स-रे सुविधा बंद होने की जानकारी
स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे सुविधा भी प्रभावित बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, एक्स-रे फिल्म उपलब्ध नहीं होने के कारण जनवरी से एक्स-रे नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में मरीजों को एक्स-रे की जरूरत पड़ने पर दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है। इससे मरीजों को परेशानी और अतिरिक्त समय का सामना करना पड़ता है।
डॉक्टरों और मरीजों के बीच स्टील के पाइप
स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों के बैठने की जगह के चारों ओर स्टील के पाइप लगे होने की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। इस व्यवस्था के कारण डॉक्टर मरीजों को दूर से देखते हैं, जबकि बड़े अस्पतालों में मरीजों की जांच के दौरान डॉक्टर उनके पास जाकर परीक्षण करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भीमगंजमंडी CHC में मरीजों की समुचित जांच के लिए पर्याप्त और सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध है?
जिम्मेदार अधिकारी ध्यान दें
स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे सुविधा बहाल करने, रिक्त पदों पर कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और डॉक्टरों द्वारा मरीजों की बेहतर जांच के लिए उचित व्यवस्था करने की जरूरत है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन समस्याओं पर कब ध्यान देता है और मरीजों को राहत कब मिलती है।

सोगरिया-रोटेदा ROB निर्माण में मनमानी - उमा शंकर नागर

 

सोगरिया-रोटेदा ROB निर्माण में मनमानी - उमा शंकर नागर
के डी अब्बासी
कोटा। क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों में कथित घटिया निर्माण और सोगरिया-रोटेदा के बीच निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के सर्विस रोड को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर शहर जिला कॉग्रेस कमेटी के सोगरिया मंडल अध्यक्ष उमा शंकर नागर के नेतृत्व में
जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्यों की जांच कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की। शहर जिला कॉग्रेस कमेटी के सोगरिया मंडल अध्यक्ष उमा शंकर नागर
ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, सोगरिया-रोटेदा के बीच बन रहे ROB के सर्विस रोड के निर्माण के दौरान किसानों को मुआवजा दिए बिना ही काम शुरू कर दिया गया है। इससे प्रभावित किसानों और क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है।
क्षेत्रवासियों ने जिला कलेक्टर को पूरे मामले से अवगत कराते हुए मांग की कि विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने के बाद ही संबंधित कार्य आगे बढ़ाया जाए।
समाधान नहीं हुआ तो सड़कों पर उतरेंगे
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन करना पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए किसानों के हितों की रक्षा करने और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास कार्य जनहित में होने चाहिए, लेकिन इनके कारण किसानों और आम नागरिकों को परेशानी नहीं उठानी पड़े। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

फ़र्ज़ी लोगों की फ़र्ज़ी बातें,

फ़र्ज़ी लोगों की फ़र्ज़ी बातें, कोंग्रेस के राहुल पर ज़ुबानी हमले पर कोटा कोंग्रेसियों का मूकबधिर हो जाना, खेर सच्चाई जानिए, फ़र्ज़ी कथनों के बारे में, क्या चाणक्य ने कहा था कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति देशभक्त नहीं हो सकता?
ऐतिहासिक तथ्यों, प्रमाणों और राजनीतिक बयानों की पड़ताल
निष्कर्ष: इस कथन का चाणक्य द्वारा कहे जाने का कोई प्रमाणित मूल संदर्भ अभी तक सामने नहीं आया है। चाणक्य नीति या कौटिल्य के अर्थशास्त्र में इस कथन का प्रामाणिक श्लोक, अध्याय और मूल संस्कृत पाठ प्रस्तुत किए बिना इसे चाणक्य का प्रमाणित कथन बताना ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं है।
यह कथन वर्ष 2020 और 2023 में राहुल गांधी तथा सोनिया गांधी पर राजनीतिक हमलों के दौरान चर्चा में आया था। आइए, उपलब्ध प्रमाणों की जांच करते हैं।
1. यह कथन किसने और कब दिया था?
(क) प्रज्ञा सिंह ठाकुर का बयान — 28 जून 2020
भोपाल से तत्कालीन भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी की पृष्ठभूमि पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति देशभक्त नहीं हो सकता।
उन्होंने इस विचार को चाणक्य से भी जोड़ा।
इस बयान की रिपोर्टिंग NDTV की समाचार रिपोर्ट⁠ और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट⁠ में हुई थी।
महत्वपूर्ण अंतर: ये समाचार रिपोर्टें इस बात का प्रमाण हैं कि प्रज्ञा ठाकुर ने ऐसा बयान दिया था। ये इस बात का प्रमाण नहीं हैं कि चाणक्य ने वास्तव में ऐसा कहा था।
(ख) संजय जायसवाल का बयान — मार्च 2023
भाजपा नेता संजय जायसवाल ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति देशभक्त नहीं हो सकता और इस विचार को लगभग 2,000 वर्ष पुराना बताते हुए चाणक्य से जोड़ा।
इस बयान की रिपोर्टिंग NDTV India⁠ ने की थी।
इससे यह स्पष्ट होता है कि यह कथन आधुनिक राजनीतिक विमर्श में चाणक्य के नाम से प्रचारित हुआ। लेकिन इसके प्राचीन स्रोत का प्रमाण अलग से आवश्यक है।
2. चाणक्य की पुस्तकों में क्या इसका प्रमाण मिलता है?
चाणक्य से संबंधित प्रमुख ग्रंथों में निम्नलिखित शामिल हैं:
ग्रंथ
विषय
इस कथन के संबंध में स्थिति
कौटिल्य का अर्थशास्त्र
राज्य संचालन, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और सुरक्षा
विदेशी महिला से जन्मे व्यक्ति को देशभक्त न मानने वाले कथन का प्रमाणित मूल संदर्भ प्रस्तुत नहीं किया गया है।
चाणक्य नीति
नीति, आचरण, व्यवहार और जीवन संबंधी शिक्षाएं
इस कथन का प्रमाणित संस्कृत श्लोक और अध्याय उपलब्ध प्रमाणों से स्थापित नहीं होता।
चाणक्य के नाम से प्रचलित सूक्तियां
विभिन्न नैतिक और राजनीतिक शिक्षाएं
किसी कथन का इंटरनेट पर चाणक्य के नाम से प्रसारित होना उसके ऐतिहासिक रूप से प्रामाणिक होने का प्रमाण नहीं है।
कौटिल्य के अर्थशास्त्र की पांडुलिपियों, अनुवादों और ऐतिहासिक अध्ययनों का परीक्षण करते समय मूल पाठ, अध्याय और श्लोक या सूत्र संख्या का मिलान करना आवश्यक है।
किसी कथन को प्रमाणित करने के लिए कम से कम निम्नलिखित साक्ष्य अपेक्षित होंगे:
मूल संस्कृत पाठ।
ग्रंथ का नाम और संबंधित अध्याय या सूत्र संख्या।
किसी मान्य संस्करण में उसका पाठ।
प्रमाणित अनुवाद या विद्वानों का संदर्भ।
अभी इस कथन के समर्थन में ऐसा सत्यापित मूल संदर्भ सामने नहीं है। इसलिए इसे चाणक्य का वास्तविक कथन घोषित करना उचित नहीं होगा।
3. क्या चाणक्य ने वास्तव में विदेशी मूल के लोगों के बारे में ऐसा सिद्धांत दिया था?
इस प्रश्न पर सावधानी से विचार करना आवश्यक है।
कौटिल्य का अर्थशास्त्र राज्य की सुरक्षा, राजा के कर्तव्यों, शत्रु राज्यों, कूटनीति, गुप्तचरी और राजनीतिक हितों पर विस्तार से चर्चा करता है।
लेकिन किसी व्यक्ति की देशभक्ति को केवल उसकी मां के जन्मस्थान या राष्ट्रीय मूल से जोड़ने वाला कोई विशिष्ट सिद्धांत चाणक्य के नाम से तभी स्वीकार किया जा सकता है, जब उसके समर्थन में प्रामाणिक मूल पाठ उपलब्ध हो।
यहां दो अलग-अलग बातें हैं:
राज्य की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि मानना: यह प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन का महत्वपूर्ण विषय है।
विदेशी महिला से जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को देशभक्ति के अयोग्य मानना: यह एक विशिष्ट दावा है, जिसके लिए अलग और प्रत्यक्ष प्रमाण चाहिए।
पहले विचार की उपस्थिति दूसरे कथन की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं करती।
4. क्या किसी व्यक्ति की देशभक्ति उसकी मां के विदेशी होने से तय होती है?
यह ऐतिहासिक प्रश्न के साथ-साथ संवैधानिक और राजनीतिक प्रश्न भी है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में कानून के समक्ष समानता और अनुच्छेद 15 में निर्धारित आधारों पर भेदभाव के विरुद्ध संरक्षण का प्रावधान है। नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और उससे संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।
इसलिए किसी व्यक्ति की देशभक्ति का आकलन केवल उसकी मां के विदेशी मूल के आधार पर कर देना तथ्यात्मक रूप से भी उचित नहीं है। किसी व्यक्ति के कार्यों, सार्वजनिक आचरण और देश के प्रति उसके वास्तविक योगदान का मूल्यांकन अलग प्रश्न है।
इसी तरह, किसी नेता के किसी बयान की आलोचना करने के लिए उसकी मां के विदेशी मूल को देशद्रोह या देशभक्ति से जोड़ना आवश्यक नहीं है।
5. इस दावे के पक्ष में प्रमाण किसे देना चाहिए?
यदि कोई व्यक्ति दावा करता है कि:
चाणक्य ने कहा था कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति कभी देशभक्त नहीं हो सकता।
तो उससे निम्नलिखित विवरण मांगे जाने चाहिए:
यह कथन चाणक्य नीति के किस अध्याय में है?
संस्कृत में मूल श्लोक क्या है?
श्लोक संख्या क्या है?
किस मान्य प्रकाशन या पांडुलिपि में यह दर्ज है?
किस विद्वान ने इसका प्रमाणित अनुवाद किया है?
यदि इन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलता, तो कथन को ऐतिहासिक तथ्य के रूप में प्रसारित नहीं करना चाहिए।
ध्यान रहे, किसी कथन का प्रमाण न मिलना और उसके कभी कहे ही न जाने को निर्णायक रूप से सिद्ध कर देना दो अलग बातें हैं। उचित निष्कर्ष यह है कि इस कथन की चाणक्य से संबद्धता प्रमाणित नहीं है।
6. अंतिम निष्कर्ष
उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और कथन के प्रचलित संदर्भों के आधार पर निष्कर्ष इस प्रकार है:
प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने जून 2020 में यह विचार चाणक्य से जोड़कर प्रस्तुत किया था।
संजय जायसवाल ने मार्च 2023 में इसी प्रकार का दावा किया।
इन बयानों की समाचार रिपोर्टिंग उपलब्ध है, लेकिन समाचार रिपोर्टिंग प्राचीन कथन की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं करती।
इस कथन का मूल संस्कृत श्लोक, अध्याय संख्या और प्रमाणित ऐतिहासिक संदर्भ स्थापित नहीं है।
इसलिए इसे चाणक्य का प्रमाणित कथन बताना तथ्यात्मक रूप से असमर्थित है।
 

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