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24 अक्टूबर 2026

एक और नवाचार से शहर वासियों को नेत्रदान अभियान से जोड़ने की मुहीम

 

एक और नवाचार से शहर वासियों को नेत्रदान अभियान से जोड़ने की मुहीम
2. रोशनी के पर्व से पहले दो आँखों से अंधेरा दूर करने का नवाचार 
3. संकल्प पत्र भर,इमोजी की कॉर्नियल अंधता को दूर कर, महसूस करें, रौशनी मिलने की खुशी 


*कोटा।* शाइन इंडिया फाउंडेशन को हमेशा नेत्रदान अंगदान और देहदान के नवाचारों के लिये, ना सिर्फ प्रदेश में बल्कि पूरे भारतवर्ष में जाना जाता है । संस्था के कई ऐसे नवाचार हैं, जिन्होंने हर उम्र और वर्ग के लोगों को अभियान में जोड़ने का प्रयास किया है ।

नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है,और रोशनी का महापर्व दीपावली आने को है। अंधकार पर प्रकाश की विजय के इस पर्व से पहले *शाइन इंडिया फाउंडेशन* ने एक बार फिर अनूठा संकल्प लिया है - जिसमें उन्होंने नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ पर,ऐसे इमोजी लगाए है, जिनकी काली आँखों को कॉर्निया की अंधता के कारण सफेद दिखाया गया है । यह सफेद रंग कॉर्निया ब्लाइंडनेस से जूझ रहे उन हजारों दृष्टिहीनों का प्रतीक है।

भोग जैसी आस्था का अनूठा नवाचार*

संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ ने कहा कि, इस अभियान को एक आध्यात्मिक भाव से जोड़ा है। जिस तरह हम थाली में भोग सजाकर भगवान के सामने रखते हैं,और मन में गहरी आस्था रखते हैं कि,भगवान ने भोग ग्रहण कर लिया, ठीक उसी प्रतीकात्मक भावना पर यह नवाचार बना है। व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प-पत्र भरता है और फिर अपने हाथों से स्माइली की आँखों पर लगा सफेद रंग साफ करता है, तो उसके मन में वही आत्मिक संतुष्टि आती है कि,आज उसके लिए नेत्रदान संकल्प से कल दो लोगों की आँखों में रोशनी पहुंचेगी।

शहरवासियों के विचार : 

नेत्रदानी परिवार से सुनीता गोयल जॉली ने कहा कि, "यह तरीका बहुत ही सरल और दिल को छूने वाला है। बच्चे और युवा इस खेल-खेल वाले तरीके से जरूर जुड़ेंगे। यह हमें भी मोटिवेट करता है।"

विज्ञान नगर निवासी जिवेश ने कहा की,हमेशा से वह नेत्रदान संकल्प लेने में थोड़ा सा झिझके,परंतु आज जब इस नवाचार की प्रक्रिया को देखा और किया तो लगा कि, कितना सा छोटा सा कार्य,किसी के चेहरे पर खुशी ला सकता है,यह महसूस हुआ,और उन्होंने संकल्प पत्र भरा । 

अभियान से जुड़ी *निधि जैन* ने कहा, _"जब मैंने अपने हाथ से स्माइली की आँख साफ की तो मन में अजीब सी खुशी आई, लगा जैसे सच में किसी की आँखों में रोशनी भर दी हो। यह सिर्फ फॉर्म भरना नहीं, एक एहसास है।"_

युवाओ को भा रहा है - नेत्रदान संकल्प का नवाचार

एक कोचिंग में कार्यरत अंजलि नामदेव ने, जब गाड़ी पर लगे स्माइली की आंखों को सफेद देखा तो उन्होंने रुक कर पूरी बात को समझा और फिर जब उन्हें इसका अर्थ समझ आया तो उन्होंने, अपना नेत्रदान संकल्प पत्र भरकर तुरंत दो लोगों की आँखों में रोशनी पहचाने का सुंदर,मार्मिक अनुभव प्राप्त किया ।

ज्ञात हो कि इस नवाचार से अभी तक 130 से अधिक युवाओं ने स्व प्रेरणा से प्रेरित होकर अपना नेत्रदान संकल्प पत्र भरा है ।

*संस्था संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ का संदेश*

इस अवसर पर *संस्था संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़* ने कहा, _"अंधकार को मिटाकर रोशनी का पर्व आने वाला है, तो क्यों ना इस पावन पर्व को मनाने से पहले हम दो दृष्टिहीनों की आँखों से अंधेरा दूर करने का एक संकल्प करें। सार्थक दिवाली, जब ही संभव है,जब दुनिया से जाने के बाद,आपकी आँखों से दो व्यक्तियों के अंधेरे जीवन में रोशनी पहुंचे ।


*-: निवेदक :-*
*शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा*
*नेत्रदान • अंगदान • देहदान*

वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं)

 (और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मषग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौषन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है (61)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे (62)
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़़ुदा से) डरते थे (63)
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की जि़न्दगी में भी और आखि़रत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है (64)
और (ऐ रसूल) उन (कुफ़्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक नहीं कि सारी इज़्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है (65)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फजऱ्) शररीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख़्याली बातें किया करते हैं (66)
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं) (67)
लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यूही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो (68)
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें (69)
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आखि़र हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख़्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें (70)

23 अक्टूबर 2026

छत्तीस क़ौमों के ऐतिहासिक कोटा मेले को दागदार करके , समुदाय ,, भाषा के आधार पर , बदनाम करने की साज़िश करने वालों के मुख पर कालिख पुती है

 छत्तीस क़ौमों के ऐतिहासिक कोटा मेले को दागदार करके , समुदाय ,, भाषा के आधार पर , बदनाम करने की साज़िश करने वालों के मुख पर कालिख पुती है ,, महापौर कोटा अनुसुइया गोस्वामी ने खुद अपने हाथों में व्यवस्थाएं नियंत्रित की है , जो मेले को दागदार बनाने के साज़िशकर्ता रहे , उन्हें , मेले की व्यवस्थाओं को छूने भी नहीं दिया ,, महापौर कोटा ने बता दिया कि ,,महापोर का पद ही सर्वोपरि है , धन , बल , अनुभवों का रोना रोकर कोई भी महापौर के हक़ , अधिकार , रुतबे को कम करते हुए अतिक्रमित नहीं कर सकता , और यही वजह रही की मेले की शुरआत के पहले दशहरे में विजयादशमी के दिन ,, जो पहले रावण के पुतले को सर्वाधिक ऊँचा बनाने का अनुभवहीन जूनून था , जिसकी वजह से कोटा दशहरे में मुख्यमंत्री भजनलाल जी के सामने कोटा की किरकरी हुई ,, रावण जला नहीं , घटनाओं के साथ दुर्घटनायें होती होती बचीं ,,, और मेले के बाद कार्यक्रमों के कारण भी बदनामी हुई , दुकानों में लूटपाट ,, की शिकायतें आम हुईं , कई लोगों ने कोटा मेले के आमद , खर्च , दूकान आवंटन , कार्यक्रम खर्च वगेरा के मामले में , ऐंटी करप्पशन से भी जांच कराने की भी मांग की , लेकिन इस बार खुद महापौर अनुसईया गोस्वामी के हाथों में अधिकारों का अतिक्रमण करने वालों से अलग हटकर , सम्पूर्ण व्यवस्थाएं है , खुद महापौर अपने अधीनस्थों और तजुर्बेकारों से मशवरा कर व्यवस्थाएं देख रही हैं , ऐसे में उन्होंने कई व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का प्रयास किया है , मेले के कई बिगड़े हालातों में सकारात्मक सुधार किया है , ,कार्यक्रमों की सूचि रेडीमेड बनाकर उनके हाथों में सौंपी गई थी , तो उसमे तो वोह क्या पर पातीं , लेकिन कवि सम्मेलन में उर्दू शायरा ,, मशहूर शायर स्वर्गीय राहत इन्दोरी की पूर्व पत्नी श्रीमती अंजुम रहबर को बुलाने की स्वीकृति ,, कवि सम्मेलन कार्य्रकम में चार चाँद लगा देने जैसा है यह मेला छत्तीस क़ौमों का है यह तो नहीं कहा जा सकता , लेकिन जिन हालातों में उनके हाथों में कार्यक्रमों की सूचि थी , उसमे मेले को छत्तीस क़ौमों की तरह बनांने का प्रयास तो है , अन्य कार्यक्रमों की छीजत को भी उन्होंने जांचा है, निजी तौर पर खंगाला है, खेर ,,कहते हैं , ना लड़की हूँ कर सकती हूँ , वही काम महापौर अनुसुइया गोस्वामी कर रही हैं , उन्हें अबला समझकर कोई अनुभवों के नाम पर , उनके अधिकारों को पूर्व की तरह अतिक्रमित कर खुद को कोई बढ़ा साबित करना चाहे तो यह गलत फहमियां उन्होंने निकाल दी है , उन्होंने साबित कर दिया है के वोह बेहतर प्रबंधन जानती है , बेहतर मेला भरवा सकती हैं , पार्टी ,, पार्टी के नेताओं और विपक्ष में भी सामंजस्य बिठाकर कोटा के संरक्षण , सफाई व्यवस्था , मेले के बेहतर प्रबंधन के लिए अपने ,, अपने निजी सलाहकारों के दम पर पहले के लोगों से बेहतर कर सकती है , उन्हें चमचे , चापलूसों , अधिकारों का अतिक्रमण कर खुद को ही ,, हम ही सब कर रहे ,हैं ऐसे प्रचारको से अलग रखकर वोह बेहतर करने का प्रयास कर रही हैं , और अगर ऐसा ही कठोर नियंत्रित प्रबन्धन चला तो ठेकेदारों की कमीशन खोरी , ठेके दिलाने के नाम पर रुतबागीरी , वगेरा वगेरा जैसे कई लोगों की दुकाने बंद हो जाएंगी , और अनुसुइया गोस्वामी बेहतर प्रबंधक के रूप में बोल्ड महापौर के रूप में अपनी इमेज बनाकर सर्वश्रेष्ठ खुद को साबित करने में सफल हो जाएंगी ,, ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

राजस्थान में अधिस्वीकृत पत्रकारों को राजस्थान रोडवेज में मुफ्त यात्रा की सुविधा, दिल्ली तक मिलेगा लाभ

 

बड़ी खबर: राजस्थान में अधिस्वीकृत पत्रकारों को राजस्थान रोडवेज में मुफ्त यात्रा की सुविधा, दिल्ली तक मिलेगा लाभ
डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़
के डी अब्बासी
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने सभी आगारों के मुख्य प्रबंधकों को जारी किए निर्देश, पुराने आदेश की पालना सुनिश्चित करने को कहा
डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़ | के. डी. अब्बासी
जयपुर। राजस्थान के अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए राहत भरी खबर है। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने अधिस्वीकृत पत्रकारों को निगम की बसों में राजस्थान राज्य क्षेत्र के साथ दिल्ली तक निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने के संबंध में सभी आगारों के मुख्य प्रबंधकों को पुनः निर्देश जारी किए हैं। निगम ने संबंधित अधिकारियों को पूर्व में जारी आदेश की पालना सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के मुख्यालय जयपुर से 22 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में महाप्रबंधक (यातायात) मनोज कुमार बंसल ने स्पष्ट किया है कि अधिस्वीकृत पत्रकारों की यात्रा सुविधा के संबंध में निगम पहले ही आदेश जारी कर चुका है।
2016 के आदेश के तहत मिलेगी सुविधा
आदेश के अनुसार, निगम के पत्र क्रमांक एफ-4/मु./यातायात/लेखा/91(ए)/2016/261, दिनांक 17 जून 2016 के तहत अधिस्वीकृत पत्रकारों को निगम की बसों में राजस्थान राज्य क्षेत्र और दिल्ली तक निःशुल्क यात्रा का प्रावधान है। यह सुविधा वातानुकूलित (एसी) एवं वॉल्वो बसों में भी लागू होने का उल्लेख आदेश में किया गया है।
निगम ने सभी संबंधित अधिकारियों को पुराने आदेश के प्रावधानों की पालना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान पत्रकार संस्थान के अध्यक्ष को भी भेजी प्रतिलिपि
इस आदेश की प्रतिलिपि राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के कार्यकारी प्रबंधक (जनसंपर्क), जयपुर तथा राजस्थान पत्रकार संस्थान के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार लोढ़ा को भी भेजी गई है। इसके अतिरिक्त आदेश को रिकॉर्ड में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए यह आदेश महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे राजस्थान रोडवेज की बसों में राजस्थान और दिल्ली तक निःशुल्क यात्रा की सुविधा को लेकर संबंधित अधिकारियों को पूर्व प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश मिले हैं।
नोट: यह सुविधा आदेश में उल्लिखित अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए है। यात्रा के दौरान लागू पात्रता, पहचान-पत्र तथा अन्य शर्तों की पुष्टि संबंधित विभाग या रोडवेज आगार से कर लेना उचित होगा।

आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे

 (और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मषग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौषन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है (61)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे (62)
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़़ुदा से) डरते थे (63)
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की जि़न्दगी में भी और आखि़रत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है (64)
और (ऐ रसूल) उन (कुफ़्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक नहीं कि सारी इज़्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है (65)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फजऱ्) शररीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख़्याली बातें किया करते हैं (66)
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं) (67)
लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यूही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो (68)
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें (69)
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आखि़र हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख़्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें (70)

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