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28 मार्च 2026

मरहूम हाफिज पारू, जो कोटा के मशहूर पहलवान, ओर हर कुश्ती की शान हुआ करते थे,

मरहूम हाफिज पारू, जो कोटा के मशहूर पहलवान, ओर हर कुश्ती की शान हुआ करते थे, कोटा की हर कुश्ती में इनके दांव पेंच , इन्हें कुश्ती केसरी, कुश्ती के हीरो कहा करते थे, पहलवान पारू भाई के नाम से विख्यात पारू भाई क़ुरआन हाफ़िज़ भी थे, वोह रमज़ानों में तरावीह वगेरा भी पढ़ाते थे, जबकि कुश्ती के दांव पेंचों के साथ अपने प्रशिक्षुओं को, भाई चारा, सद्भावना, क़ोमी एकता और इंसाफ परस्ती के लिये संघर्ष के साथ, अपनी ताकत का इस्तेमाल लोगों की हिफाज़त, लोगों की मदद की सीख देते थे, यही वजह थी के कोटा में माहौल बिगाड़ने के साज़िशकर्ता कितने ही हों, लेकिन जहां हाफ़िज़ पारू की उपस्थिति, वहां अमन, सुकून , गुंडागर्दी से मुक्ति की गारंटी होती थी, उनके इस संघर्ष की वजह से कई बार पुलिस प्रशासन से उनका टकराव भी रहा, लेकिन सत्यमेव जयते की कहावत की तर्ज़ पर जीत उनकी हुई, बाहुबली, ताकतवर, हर कुश्ती जीतने वाले पहलवान होने के बावुजूद उनकी ज़ुबान में नर्मी, व्यवहार में सादगी, मुलाक़ात में विनम्रता उन्हें दूसरे लोग जो ताक़त का दुरुपयोग कर रुपया कमाते रहे हैं , उनसे जुदा, अलग कर देती है, वोह लोगों के मददगार थे, ईमानदार, ज़िम्मेदार थे, महनती थे, यारों के यार थे, कमज़ोरों के संरक्षक थे, कोटा में केसरबाग सहित आसपास की कई कॉलोनियों के कॉलोनाइजर , हाफ़िज़ पारू ही रहे हैं, खेती की ज़मीन पर आम लोगों को प्रेरित कर सस्ते दामों में प्लाट देकर , लोगों के अपने घर का ख्वाब पूरा करने वाली वोह अहम शख्सियत रहे हैं, हाफ़िज़ पारू साहब मेरे भी ननिहाल पक्ष के रिश्तेदार रहे हैं , उन्हें खिराज ऐ अक़ीदत पेश है, उनके बेटे हलीम रेहान साहब, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक के साथ, वरिष्ठ वकील हैं, वोह मशहूर शायर भी है, मुखर वक्ता भी है, ओर शतरंज की बिसात पर अपनी चालों से जीत हांसिल करने वाले शतरंज के खिलाड़ी भी हैं, अख़्तर खान अकेला कोटा 9829086339

 

अल्हम्दु लिल्लाह, मदरसा हमीदिया, कच्ची बस्ती बहीर, टोंक में वार्षिक उत्सव व पारितोषिक पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न हुआ

 

अल्हम्दु लिल्लाह, मदरसा हमीदिया, कच्ची बस्ती बहीर, टोंक में वार्षिक उत्सव व पारितोषिक पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि जनाब सैय्यद फ़ैसल सईदी जी ने अलग अलग क्लासेज में प्रथम, द्वितीय व तृतिय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया इसके साथ ही इन्होंने ग़रीब बच्चों की पढ़ाई में हौसला अफज़ाई के लिए सभी क्लासेस में प्रथम , द्वितीय व तृतिय स्थान प्राप्त करने वाले प्रत्येक विद्यार्थियों को 500/-, 300/- व 200/- Rs देकर इन विद्यार्थियों को शिक्षा हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया और बच्चों अधिक से अधिक शिक्षा लेने पर ज़ोर दिया और शिक्षकों को भी बच्चों को अच्छी तालीम देने की बात कही, इस अवसर जनाब ज़ाहिद अंसारी जी मौजूद रहे, लेकिन सबसे आश्चर्य की बात यह रही की सभी क्लासेस में प्रथम तीन स्थानों पर लड़कियों का कब्ज़ा व दबदबा रहा जो शिक्षा के क्षेत्र में इनकी रुची को दर्शाता है, मदरसे के स्टाफ की और से सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा करते हुए इस पिछड़े कच्ची बस्ती बहीर के क्षेत्र में बच्चों को अपनी और से अच्छी तालीम देने की बात कही तथा राज्य सरकार व मदरसा बोर्ड दी जाने वाली तमाम सुविधाएं इन ग़रीब बच्चों तक पहुंचाने की बात कही अंत में सफलता पूर्वक यह वार्षिक उत्सव व पारितोषिक पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न हुआ।

सीआई विनोद कुमार को मिली बड़ी कामयाबी,मंदिर में प्रतिमा को खडिंत करने वाला व्यक्ति 2 घंटे में गिरफतार

 

सीआई विनोद कुमार को मिली बड़ी कामयाबी,मंदिर में प्रतिमा को खडिंत करने वाला व्यक्ति 2 घंटे में गिरफतार
के डी अब्बासी
कोटा,मार्च। नयापुरा थाना प्रभारी विनोद कुमार की तत्परता से मंदिर के बजरंगबली की प्रतिमा को खडिंत करने वाला व्यक्ति को 2 घंटे में गिरफतार कर लिया।
कोटा सिटी एसपी तेजस्वनी गौतम आईपीएस ने बताया कि नयापुरा थाना क्षेत्र में स्थित चबंल के बालाजी न्याय विहार में स्थित बंजरग बली की प्रतिमा को खण्डित करने वाले अज्ञात व्यक्ति की गिरफतारी के लिये श्री दिलीप सैनी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोटा शहर के निर्देशन में डॉ पूनम सीओ 2 केन्द्रीय वृत कोटा शहर के सुपरविजन में श्री विनोद कुमार पु.नि. थानाधिकारी थाना नयापुरा के नेतृत्व में श्री दिपेन्द्र कुमार शर्मा उप निरीक्षक मय जाप्ता श्री मुनेश कानि 1132 श्री जगदीश कानि 647, श्री मुनीराम कानि 861, श्री सुरेन्द्र कानि 1675 श्री रामकिशोर कानि 1854, श्री विरेन्द्र कानि 2258 थाना नयापुरा कोटा शहर पर गठित की गई थी। गठित टीम द्वारा बंजरग बली की प्रतिमा को खडित करने वाले व्यक्ति को गिरफतार किया गया।
उक्त व्यक्ति द्वारा मंदिर में घुसकर बजरंग बली की मूर्ति को खंडित कर हमारे धार्मिक भावनाओ को ठेस पहुंचाई है एव धार्मिक स्थल पर उन्माद फैला कर समाज विशेष की धार्मिक भावनाओ को भडकाने का कृत्य किया गया है।
करने वाले अज्ञात व्यक्ति छोटुसिंह चन्द्रावत पुत्र श्री दातारसिंह उर्फ मुन्ना जाति राजपुत उम्र 28 निवासी बडा गांव थाना खाचरोद जिला उज्जैन मध्यप्रदेश को चांदमारी बालाजी के पास चबंल नदी से डिटेन किया जाकर प्रकरण हाजा में गिरफतार करने में सफलता प्राप्त हुई है ।

तो जब उन लोगों ने हमारा (अज़ाब) आते देख लिया तो अब उनका ईमान लाना कुछ भी फायदेमन्द नहीं हो सकता (ये) ख़़ुदा की आदत (है) जो अपने बन्दों के बारे में (सदा से) चली आती है और काफि़र लोग इस वक़्त घाटे मे रहे

 जब (भारी भारी) तौक़ और ज़ंजीरें उनकी गर्दनों में होंगी (और पहले) खौलते हुए पानी में घसीटे जाएँगे (71)
फिर (जहन्नुम की) आग में झोंक दिए जाएँगे (72)
फिर उनसे पूछा जाएगा कि ख़ुदा के सिवा जिनको (उसका) शरीक बनाते थे (73)
(इस वक़्त) कहाँ हैं वह कहेंगे अब तो वह हमसे जाते रहे बल्कि (सच यूँ है कि) हम तो पहले ही से (ख़ुदा के सिवा) किसी चीज़ की परसतिश न करते थे यूँ ख़़ुदा काफ़िरों को बौखला देगा (74)
(कि कुछ समझ में न आएगा) ये उसकी सज़ा है कि तुम दुनिया में नाहक (बात पर) निहाल थे और इसकी सज़ा है कि तुम इतराया करते थे (75)
अब जहन्नुम के दरवाज़े में दाखि़ल हो जाओ (और) हमेशा उसी में (पड़े) रहो, ग़रज़ तकब्बुर करने वालों का भी (क्या) बुरा ठिकाना है (76)
तो (ऐ रसूल) तुम सब्र करो ख़़ुदा का वायदा यक़ीनी सच्चा है तो जिस (अज़ाब) की हम उन्हें धमकी देते हैं अगर हम तुमको उसमें कुछ दिखा दें या तुम ही को (इसके क़ब्ल) दुनिया से उठा लें तो (आखि़र फिर) उनको हमारी तरफ़ लौट कर आना है, (77)
और तुमसे पहले भी हमने बहुत से पैग़म्बर भेजे उनमें से कुछ तो ऐसे हैं जिनके हालात हमने तुमसे बयान कर दिए, और कुछ ऐसे हैं जिनके हालात तुमसे नहीं दोहराए और किसी पैग़म्बर की ये मजाल न थी कि ख़़ुदा के ऐख़्तेयार दिए बग़ैर कोई मौजिज़ा दिखा सकें फिर जब ख़़ुदा का हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा तो ठीक ठीक फैसला कर दिया गया और अहले बातिल ही इस घाटे में रहे, (78)
ख़ुदा ही तो वह है जिसने तुम्हारे लिए चारपाए पैदा किए ताकि तुम उनमें से किसी पर सवार होते हो और किसी को खाते हो (79)
और तुम्हारे लिए उनमें (और भी) फायदे हैं और ताकि तुम उन पर (चढ़ कर) अपनी दिली मक़सद तक पहुँचो और उन पर और (नीज़) कश्तियों पर सवार फिरते हो (80)
और वह तुमको अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है तो तुम ख़ुदा की किन किन निशानियों को न मानोगे (81)
तो क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं, तो देखते कि जो लोग इनसे पहले थे उनका क्या अंजाम हुआ, जो उनसे (तादाद में) कहीं ज़्यादा थे और क़ूवत और ज़मीन पर (अपनी) निशानियाँ (यादगारें) छोड़ने में भी कहीं बढ़ चढ़ कर थे तो जो कुछ उन लोगों ने किया कराया था उनके कुछ भी काम न आया (82)
फिर जब उनके पैग़म्बर उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े ले कर आए तो जो इल्म (अपने ख़्याल में) उनके पास था उस पर नाजि़ल हुए और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाते थे उसी ने उनको चारों तरफ से घेर लिया (83)
तो जब इन लोगों ने हमारे अज़ाब को देख लिया तो कहने लगे, हम यकता ख़़ुदा पर ईमान लाए और जिस चीज़ को हम उसका शरीक बनाते थे हम उनको नहीं मानते (84)
तो जब उन लोगों ने हमारा (अज़ाब) आते देख लिया तो अब उनका ईमान लाना कुछ भी फायदेमन्द नहीं हो सकता (ये) ख़़ुदा की आदत (है) जो अपने बन्दों के बारे में (सदा से) चली आती है और काफि़र लोग इस वक़्त घाटे मे रहे (85)

27 मार्च 2026

दोस्तों हाल ही में मेने कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठाये हैं

 

दोस्तों हाल ही में मेने कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठाये हैं , कांग्रेस के एस सी , एस टी , ओ बी सी , व्यापारिक , चिकित्सा , शैक्षणिक , पर्यावरण , जन आभाव अभियोग वगेरा वगेरा सहित कई कागज़ी विभाग बने हुए हैं , जिनकी सक्रियता तो शायद आज तक किसी ने देखी ही नहीं होगी , खेर में फिर कोटा ज़िले के अल्पसंख्यक विभाग की बात से अपनी बात शुरू करता हूँ , मुमकिन हो या आपके अनुभव हों , मन करे तो आप भी अपने अपने ज़िले ,कस्बे , में अल्पसंख्यक विभाग सहित अन्य विभागों की ज़िम्मेदारियों और उपेक्षित नीतियों को उजागर कर सकते हैं , में कोटा में हाल ही में रमज़ान के वक़्त शब ऐ क़द्र की रात और ईदुल फ़ित्र के वक़्त ,, बरकत उद्यान स्थित एक मस्जिद में रंगाई , पुताई , लाइटिंग व्यवस्था के प्रतिबंध और उस प्रतिबंध की जिला प्रशासन से आवश्यतानुसार इजाज़त लेने की ज़िम्मेदारी की बात कर रहा हूँ , ज़ाहिर है , मस्जिद से जुड़ा मामला है , तो आम मुस्लिम समाज से जुड़ा मामला है , ऐसे में सियासी तोर पर कांग्रेस या भाजपा अल्पसंख्यक विभागों से जुड़ा मामला इसे स्वीकारित रूप से देखा जा सकता है , अब इस समस्या पर , कोटा के भाजपा अल्पसंख्यक विभाग या लोकसभा अध्यक्ष , विधायक , मंत्रियों के इर्द गिर्द मुस्लिम समाज से जुड़े प्रतिनिधि कुछ बात करने की हिम्मत करेंगे सोचना ही बेकार सी बात है , अब खुद को अल्पसंख्यकों की चहेती , लोकतंत्र की रक्षक कहे जाने वाली पार्टी कांग्रेस बचती है , कांग्रेस का यूँ तो जिला स्तरीय संगठन , है लेकिन कांग्रेस ने माइक्रो मैनेजमेंट के तहत , महीनों चिंतन , मंथन के बाद , कोटा में जिला अध्यक्ष बनाये है , प्रदेश के पदाधिकारी ज़िम्मेदार बनाये हैं , कोटा देहात अध्यक्ष असरार अहमद की सक्रियता रो रोज़ अख़बारों की सुर्ख़ियों में हैं , देहात कांग्रेस और आम जनता की समस्याओं के लिए वोह खुलकर बोल रहे हैं , लेकिन कोटा शहर में बरकत उद्यान सहित किसी भी समस्या पर अभी तक अल्पसंख्यक विभाग ने कोई आवाज़ उठाना तो दूर , रमज़ानों में शब ऐ क़द्र के दी अस्थाई रंग रोगन , रौशनी की इजाज़त लेने तक पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है , ऐसा नहीं के इस मुद्दे की जानकारी इन नेताओं को नहीं हो , ,, अगर अल्पसंख्यक विभाग के पदाधिकारियों में कांग्रेस के माइक्रो मॅनेज्मेंट व्यवस्था के तहत यह ज़िम्मेदारी अल्पसंख्यक विभाग की है , इसका अहसास होता , तो कोटा के स्थानीय प्रदेश पदाधिकारी ,, कोटा शहर अल्पसंख्यक अध्यक्ष बैठक करते , कलेक्टर के पास जाकर ज्ञापन देते , उन्हें समझाते के यह अस्थाई है , इसकी इजाज़त दी जाना चाहिए , फिर अगर कलेक्टर का रुख इंकार वाला होता , तो यही अल्पसंख्यक ज़िम्मेदार प्रदेश अध्यक्ष को सूचित करते , उनका मार्गदर्शन लेते , कोटा के कांग्रेस जिला अध्यक्ष के पास जाते , और अगर गुटबाज़ी वाले यह पदाधिकारी खुद को महसूस करते हैं के किसी के पास जायेंगे तो हमारे भाईसाहब को गुस्सा आ जाएगा , तो मेरे यह भाई ,,अपने अपने भाई साहबों के पास जाकर यह दर्द , बताते , कोई अगर कांग्रेस से अलग खुद को भाईसहबों तक ही खुद को सीमित मानता है , तो जो नईमुद्दीन गुड्डू के से है वोह उनके पास जाते , जो खुद को जिला कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम के गुट का मानते हैं वोह उनके पास जाते , जो खुद को शांति धारीवाल साहब के गट का मानते हैं वोह उनके पास जाते , जो खुद को अमित धारीवाल साहब के गट का मानते हैं वोह उनके पास जाते , जो खुद को प्रह्लाद जी गुंजल के गुट का मानते हैं वोह उनके पास जाते , जो खुद को शिवकांत जी नंदवाना के गुट का मानते हैं वोह उनके पास जाते , और जो खुद को ओरिजनल निर्गुट कांग्रेस के संविधान के विधिक प्रावधानों के तहत संचालित निर्गुट कोंग्रेसी मानते हैं वोह जिला कांग्रेस कार्यालय में जिला कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम को इन्वाइट कर इस मुद्दे पर आपात बैठक बुलाते , लेकिन ऐसा किसी ने भी नहीं किया , खुद अल्पसंख्यक विभाग ने भी इस मुद्दे पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई , सवाल उठेगा के हमे तो पता ही नहीं , तो फिर जब तुम्हे अपनी कॉम के मुद्दों के बारे में जानकारी नहीं तो फिर तुम्हारी सक्रियता पर ही प्रश्न चिन्ह है ,खेर अभी तो जो हुआ सो हुआ , आगे से तो हर मुद्दे पर सक्रिय हो जाओ , भाजपा के अल्पसंख्यकों पर तो उम्मीद ही मत जताना , तुम से ही कुछ उम्मीद है और संगठन ने तुम्हे ज़िंदाबाद , करने के लिए नहीं , माला पहनने के अलावा ,, अपने वोटर्स खासकर अल्पसंख्यक समाज से जुड़े लोगों की समस्याओं का अध्ययन , माइक्रोमॅनेज्मेंट व्यवस्था के लिए बनाया है , ताकि कांग्रेस का मूल संगठन दूसरे काम करे और आवश्यकता पढ़ने पर आप उन्हें साथ लेकर , जिला प्रशासन पर अपने विधिक कार्यों के लिए उन्हें लेजाकर सियासी दबाव बनाएं ,, जो विधि विरुद्ध अन्याय हो रहा है उसके खिलाफ आवाज़ उठायें , खेर आगे देखते हैं , और राजस्थान सहित देश के सभी अल्पसंख्यक विभाग से जुड़े लोगों अन्य विभाग से जुड़े जिला ,क़स्बा पदाधिकारी , अध्यक्षों , प्रदेश पदाधिकारी जो अलग अलग ज़िलों में मॉनिटरिंग कर रहे हैं , उनसे गुज़ारिश है , के अपने हक़ के लिए संघर्ष करो , कर्तव्यों का निर्वहन करो , पद लिया है , चाहे जैसे तैसे भी लिया हो , तो फिर उसका सम्मान करो , ज़िम्मेदारी निभाओ , अपने प्रदेश के नेता , अपनी पार्टी का परचम भी बुलंद करो , लेकिन वोह नेताओं की क़दम बोसी से हरगिज़ नहीं होगा , इसके लिए तो आपको , अपने अपन क्षेत्रों में समस्याओं और उनके समाधान पर काम करना होगा , अपने मोबाइल फोन चौबीस घंटे चालू रखना होंगे , सुबह देर तक सोने की आदत पर विराम लगाना होगा, आवश्यकता पढ़ने पर संघर्ष करना होगा , अपने ज़िले , अपने कस्बे और इर्द गिर्द के ज़रूरत मंदों , का मददगार होना होगा , ,उनके दुःख दर्द का साथी होना होगा ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
akhtar khan akela

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