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12 मार्च 2026

15वें दीक्षांत समारोह में 9237 डिग्रियों, 1 कुलाधिपति एवं 1 कुलपति स्वर्ण पदक सहित कुल 29 स्वर्ण पदक बांटे

 

15वें दीक्षांत समारोह में 9237 डिग्रियों, 1 कुलाधिपति एवं 1 कुलपति स्वर्ण पदक सहित कुल 29 स्वर्ण पदक बांटे
के डी अब्बासी
कोटा, 11 मार्च, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय का पन्द्रहवां दीक्षांत समारोह कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर बीपी सारस्वत के मुख्य आतिथ्य एवं विशिष्ट अतिथि डॉ पीसी पंचारिया निदेशक, सीएसआईआर-केन्द्रीय इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान पिलानी की उपस्थिति में आज राज्य कृषि प्रबंन्ध संस्थान के ऑडिटोरियम कोटा में संपन्न हुआ। सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि इस अवसर पर कुलगुरु प्रो निमित चौधरी और अतिथियों ने उपस्थित विद्यार्थियों को पन्द्रहवें दीक्षांत समारोह में उपाधियों का वितरण किया। इसी दिन शाम को राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट द्वारा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई की अध्यक्षता में यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट की उपाधियों का वितरण किया गया।समारोह में वीएमओयू कुलगुरु प्रो बीएल वर्मा, बीटीयू पूर्व कुलगुरु प्रो एचडी चारण, कुलसचिव भावना शर्मा, वित्त नियंत्रक बाबूलाल मीणा, सहित राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रबन्ध मण्डल एवं विद्या परिषद के सदस्यगण, विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, विभिन्न संबद्ध महाविद्यालयों के चेयरमैन-निदेशक, प्राचार्य, विश्वविद्यालय के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी, संकाय सदस्य, शिक्षक, विभिन्न शिक्षाविद, विद्यार्थी व उनके अभिभावक, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक, मीडिया प्रतिनिधि एवं आमंत्रित विशिष्ट अतिथिगण उपस्थित रहे।कुलसचिव भावना शर्मा द्वारा दीक्षांत समारोह की समाप्ति पर धन्यवाद ज्ञापन दिया गया।
पन्द्रहवें दीक्षांत समारोह में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक) की 7319, बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर (बीआर्क) की 65, मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर (एमआर्क) की 1, मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (एमटेक) की 643, मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) की 905, मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए) की 270 तथा पीएचडी की 34 सहित कुल 9237 उपाधियों का वितरण विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। इस वर्ष कुल 7022 छात्रों और 2215 छात्राओं को उपाधियां वितरित की गई। इस समारोह में कुलाधिपति स्वर्ण पदक आर्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, जयपुर की एमबीए की छात्रा निकिता जैन को प्रदान किया, जबकि कुलपति स्वर्ण पदक आर्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, जयपुर के बीटेक के छात्र विष्णु मीणा को दिया गया। इसके अतिरिक्त, विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक) के 17, बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर (बीआर्क) का 1, मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (एमटेक) के 7, मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) में 1, मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए) का 1 गोल्ड मेडल का वितरण किया गया। इन 29 विद्यार्थियों में 12 छात्र एवं 17 छात्राएँ हैं। 15 वें दीक्षांत समारोह के दौरान विभिन्न पाठयक्रमों में अभियांत्रिकी संकाय के 24, प्रबंधन संकाय में 06 एवं कम्प्युटर एप्लीकेशन संकाय के 04 सहित कुल 34 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की गईं। जिसके अंतर्गत 22 छात्र एवं 12 छात्राएं सम्मिलित है।
विशिष्ट अतिथि डॉ पीसी पंचारिया निदेशक, सीएसआईआर, केन्द्रीय इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान, पिलानी ने दीक्षांत भाषण प्रदान करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी की डिग्री केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है—यह देश के लिए ज़रूरी है। अब से, आप दुनिया में तरक्की और लीडरशिप की ओर भारत के सफ़र का हिस्सा हैं। भारत इतिहास में एक अहम मोड़ पर है। जैसे-जैसे हम 2047, अपनी आज़ादी के 100वें साल की ओर बढ़ रहे हैं, हमारा लक्ष्य एक विकसित भारत बनाना है। यह लक्ष्य ज्ञान, टेक्नोलॉजी, सबको साथ लेकर चलने और सस्टेनेबिलिटी पर आधारित है। विज़न 2047 एक नेशनल मिशन है जिसे हमारे युवाओं, इंस्टीट्यूशन और थिंकर की मदद की ज़रूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि भविष्य के करियर के लिए अलग-अलग फ़ील्ड्स में लगातार सीखने और सोचने की ज़रूरत होगी है। आप ज़िंदगी भर सीखते रहें। अपनी स्किल्स को बेहतर बनाएँ। लीडरशिप और प्रॉब्लम-सॉल्विंग एबिलिटीज़ डेवलप करें। राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी के एल्युमनाई के तौर पर, आप जहाँ भी जाएँगे, आप अपनी यूनिवर्सिटी को रिप्रेजेंट करेंगे। एक्सीलेंस, ईमानदारी और प्रोफेशनलिज़्म से इसकी रेप्युटेशन को हमेशा बनाए रखें।
मुख्य अतिथि कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर बीपी सारस्वत ने कहा कि उपाधि प्राप्त करना विद्यार्थी के जीवन का एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण अवसर है। डिग्री विद्यार्थी के लंबे शैक्षणिक सफर का उत्सव है जिसमें विद्यार्थियों ने कठिन परिश्रम अनुशासन समर्पण के साथ अपने सपनों को साकार किया है। सभी ने अपनी प्रतिभा मेहनत और लगन से यह सिद्ध किया है कि निरंतर प्रयास से हर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। डिग्री प्राप्त करने साथ ही अपने ज्ञान, कौशल और संस्कारों के बल पर समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान देने की जिम्मेदारी स्वीकार करने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति को नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और नवाचार की भावना से परिपूर्ण बनाना है। विश्वविद्यालयों से निकलने वाले विद्यार्थी देश के भविष्य के निर्माता होते हैं और उनकी प्रतिभा से ही भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में तकनीक, अनुसंधान और नवाचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। इसलिए विद्यार्थियों को निरंतर सीखते रहने, नई चुनौतियों को स्वीकार करने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करने का संकल्प लेना चाहिए। आज भारत विश्व में डिजिटल तकनीक स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है ऐसे समय में आप जैसे युवा इंजीनियर और प्रबंधक देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं मुझे यह कहते हुए गर्व है कि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में पिछले वर्षों में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं प्रदान की। उन्होंने कहा कि आज राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय राष्ट्र के तकनीकी भविष्य का सशक्त केंद्र बन चुका है। संबद्ध महाविद्यालयों के माध्यम से इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर एवं कंप्यूटर एप्लीकेशन जैसे विविध क्षेत्रों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर निरंतर लाभान्वित हो रहे हैं। आज हमें गर्व है कि इस संस्थान के पूर्व विद्यार्थी देश-विदेश की प्रतिष्ठित कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों तथा सार्वजनिक सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। आरटीयू द्वारा अकादमिक क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने हेतु रिसर्च गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। परीक्षा एवं परिणाम प्रणाली का डिजिटलीकरण,समयबद्ध शैक्षणिक कैलेंडर, उद्योग एवं शैक्षणिक सहभागिता के माध्यम से इंटर्नशिप एवं प्लेसमेंट अवसरों में वृद्धि, कौशल विकास कार्यक्रमों का क्रियान्वयन, पाठ्यक्रमों में स्किल-आधारित क्रेडिट, प्रोजेक्ट लर्निंग, इंडस्ट्री एक्सपोजर तथा वैल्यू एजुकेशन को प्राथमिकता देने के साथ प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के मजबूत आधार स्तंभ के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है।

निगम ने सीज किए दो मैरिज गार्डन, तीन शो रूम* -यूडी टैक्स जमा नहीं करवाने पर कार्रवाई

 

निगम ने सीज किए दो मैरिज गार्डन, तीन शो रूम*
-यूडी टैक्स जमा नहीं करवाने पर कार्रवाई
के डी अब्बासी
कोटा। नगरीय विकास कर जमा नहीं करवा रहे लोगों के खिलाफ नगर निगम ने गुरूवार को एक बार फिर कार्यवाही की। निगम की टीम ने गुरूवार को शहर में दो मैरिज गार्डन व तीन शोरूम सीज कर दिए। यह कार्यवाही होते ही हड़कंप की स्थिति बन गई और शाम तक एक दुकान मालिक ने बकाया करीब 4 लाख रूपए का यूडी टेक्स जमा करवा दिया।
आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि नगरीय विकास कर के बकाए की वसूली के लिए कार्य योजना तैयार की गई है। उपायुक्त राजस्व धीरज कुमार सोनी के नेतृत्व में एक टीम लगातार उन सभी बकायादरों से सम्पर्क कर रही है जो लंबे समय से नगरीय विकास कर जमा नहीं करवा रहे हैं। पूर्व में भी निगम ने आकाश मॉल सहित कई दुकानों को सीज किया था।
अब निगम ने गुरुवार को सबसे पहले रायपुरा स्थित मरियम मैरिज गार्डन और गुलमोहर मैरिज गार्डन तथा मोटर मार्केट स्थित दो व शॉपिंग सेंटर स्थित एक दुकान को सीज कर दिया। इन सभी पर 33 लाख रूपए से अधिक का नगरीय विकास कर बकाया चल रहा था। ऐसे में शॉपिंग सेंटर स्थित साड़ी के शोरूम संचालकों ने कुछ ही देर बाद बकाया 4 लाख रुपए नगरीय विकास कर जमा करवा दिया जिस पर सीज को खोल दिया गया। बाकी दुकानदार भी शाम होते-होते अपना बकाया यूडी टैक्स की जानकारी लेने निगम कार्यालय पहुंच गए।
*आने वाले दिनों में तेज होगी कार्यवाही*
आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि नगरीय विकास कर वर्ष 2007 से संपूर्ण राजस्थान में लागू है। ऐसे में वे सभी आवासीय भवन और प्लॉट जो 2700 वर्ग फीट क्षेत्र से अधिक के हैं तथा व्यावसायिक प्लॉट और भवन जो 900 स्क्वायर फीट से अधिक क्षेत्र के हैं, सभी वर्ष 2007 से ही नगरीय विकास कर के दायरे में आते हैं। इन सभी भूखंड और भवन मालिकों से आग्रह है कि वे निगम कार्यालय में संपर्क कर अपना बकाया यूडी टैक्स जल्द से जल्द जमा करवा दें। आने वाले दिनों में निगम बकायेदारों के खिलाफ सीजिंग की कार्यवाही को और गति देगा।
*31 मार्च तक छूट का लाभ लेकर जमा करवाएं यूडी टेक्स*
आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि 2700 वर्गफीट से अधिक के आवासीय भवन और प्लॉट तथा 900 वर्गफीट से अधिक वाणिज्यिक भवन और प्लॉट नगरीय विकास कर के दायरे में आते हैं। नगरीय विकास कर भूखण्ड स्वामी के स्वनिर्धारण पर आधारित है, इस कारण कोई भी व्यक्ति नोटिस नहीं मिलने की बात कहकर कर जमा करवाने एसे बच नहीं सकता। वर्तमान में राज्य सरकार के आदेशानुसार 31 मार्च तक बकाया नगरीय विकास कर जमा करवाने पर पेनल्टी पर 100 प्रतिशत की छूट एवं वर्ष 2007-08 से 2010-11 तक मूल कर राशि पर 50 प्रतिशत की छूट का लाभ दिया जा रहा है। आयुक्त ने अपील की कि जिन भी व्यक्तियों और संस्थाओं की सम्पत्ति यूडी. टैक्स के दायरे में आती है, वह अविलम्ब अपना यूडी टैक्स जमा करवाएं।

अगर खु़दा किसी को (अपना) बेटा बनाना चाहता तो अपने मख़लूक़ात में से जिसे चाहता मुन्तखिब कर लेता (मगर) वह तो उससे पाक व पाकीज़ा है वह तो यकता बड़ा ज़बरदस्त अल्लाह है

 

39 सूरए अज़ जुमर
सूरए जुमर मक्का में नाजि़ल हुआ और उसकी पचहत्तर (75) आयतें हैं
खु़दा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
(इस) किताब (क़ुरान) का नाजि़ल करना उस खु़दा की बारगाह से है जो (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है (1)
(ऐ रसूल) हमने किताब (कु़रान) को बिल्कुल ठीक नाजि़ल किया है तो तुम इबादत को उसी के लिए निरा खुरा करके खु़दा की बन्दगी किया करो (2)
आगाह रहो कि इबादत तो ख़ास खु़दा ही के लिए है और जिन लोगों ने खु़दा के सिवा (औरों को अपना) सरपरस्त बना रखा है और कहते हैं कि हम तो उनकी परसतिश सिर्फ़ इसलिए करते हैं कि ये लोग खु़दा की बारगाह में हमारा तक़र्रब बढ़ा देगें इसमें शक नहीं कि जिस बात में ये लोग झगड़ते हैं (क़यामत के दिन) खु़दा उनके दरम्यिान इसमें फै़सला कर देगा बेशक खु़दा झूठे नाशुक्रे को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता (3)
अगर खु़दा किसी को (अपना) बेटा बनाना चाहता तो अपने मख़लूक़ात में से जिसे चाहता मुन्तखिब कर लेता (मगर) वह तो उससे पाक व पाकीज़ा है वह तो यकता बड़ा ज़बरदस्त अल्लाह है (4)
उसी ने सारे आसमान और ज़मीन को बजा (दुरूस्त) पैदा किया वही रात को दिन पर ऊपर तले लपेटता है और वही दिन को रात पर तह ब तह लपेटता है और उसी ने आफताब और महताब को अपने बस में कर लिया है कि ये सबके सब अपने (अपने) मुक़रर्र वक़्त चलते रहेगें आगाह रहो कि वही ग़ालिब बड़ा बख़्शने वाला है (5)
उसी ने तुम सबको एक ही शख़्स से पैदा किया फिर उस (की बाक़ी मिट्टी) से उसकी बीबी (हौव्वा) को पैदा किया और उसी ने तुम्हारे लिए आठ कि़स्म के चारपाए पैदा किए वही तुमको तुम्हारी माँओं के पेट में एक कि़स्म की पैदाइश के बाद दूसरी कि़स्म (नुत्फे जमा हुआ खू़न लोथड़ा) की पैदाइश से तेहरे तेहरे अँधेरों (पेट) रहम और झिल्ली में पैदा करता है वही अल्लाह तुम्हारा परवरदिगार है उसी की बादशाही है उसके सिवा माबूद नहीं तो तुम लोग कहाँ फिरे जाते हो (6)
अगर तुमने उसकी नाशुक्री की तो (याद रखो कि) खु़दा तुमसे बिल्कुल बेपरवाह है और अपने बन्दों से कुफ्र और नाशुक्री को पसन्द नहीं करता और अगर तुम शुक्र करोगे तो वह उसको तुम्हारे वास्ते पसन्द करता है और (क़यामत में) कोई किसी (के गुनाह) का बोझ (अपनी गर्दन पर) नहीं उठाएगा फिर तुमको अपने परवरदिगार की तरफ लौटना है तो (दुनिया में) जो कुछ (भला बुरा) करते थे वह तुम्हें बता देगा वह यक़ीनन दिलों के राज़ (तक) से खू़ब वाकि़फ है (7)
और आदमी (की हालत तो ये है कि) जब उसको कोई तकलीफ पहुँचती है तो उसी की तरफ रूझू करके अपने परवरदिगार से दुआ करता है (मगर) फिर जब खु़दा अपनी तरफ से उसे नेअमत अता फ़रमा देता है तो जिस काम के लिए पहले उससे दुआ करता था उसे भुला देता है और बल्कि खु़दा का शरीक बनाने लगता है ताकि (उस ज़रिए से और लोगों को भी) उसकी राह से गुमराह कर दे (ऐ रसूल ऐसे शख़्स से) कह दो कि थोड़े दिनों और अपने कुफ्र (की हालत) में चैन कर लो (8)
(आखि़र) तू यक़ीनी जहन्नुमियों में होगा क्या जो शख़्स रात के अवक़ात में सजदा करके और खड़े-खड़े (खु़दा की) इबादत करता हो और आख़ेरत से डरता हो अपने परवरदिगार की रहमत का उम्मीदवार हो (नाशुक्रे) काफिर के बराबर हो सकता है (ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि भला कहीं जानने वाले और न जाननेवाले लोग बराबर हो सकते हैं (मगर) नसीहत इबरतें तो बस अक़्लमन्द ही लोग मानते हैं (9)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे ईमानदार बन्दों अपने परवरदिगार (ही) से डरते रहो (क्योंकि) जिन लोगों ने इस दुनिया में नेकी की उन्हीं के लिए (आख़ेरत में) भलाई है और खु़दा की ज़मीन तो कुशादा है (जहाँ इबादत न कर सको उसे छोड़ दो) सब्र करने वालों ही की तो उनका भरपूर बेहिसाब बदला दिया जाएगा (10)

11 मार्च 2026

शीतला अष्टमी पर हुआ निधन,पुत्रों ने संपन्न कराया नेत्रदान

 शीतला अष्टमी पर हुआ निधन,पुत्रों ने संपन्न कराया नेत्रदान
2. साली की शादी बीच में छोड़,रात 2:30 बजे कोटा से आयी टीम ने लिया नेत्रदान


देर रात एक बजे,तिलक चौक,बूंदी निवासी स्व० मदनलाल जैन एडवोकेट की धर्मपत्नी खानी बाई जैन का आकस्मिक निधन हुआ। धर्म कर्म में आस्था रखने वाली खानी बाई नेत्रदान की प्रबल समर्थक थी पोते डॉ मोहित जैन को भी उन्होंने अपने नेत्रदान करवाने की सहमति दे रखी थी ।

देर रात 1:00 बजे जब यह दुखद घटना घटी, तो उन्होंने तुरंत ही संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा को सूचना कर दादी मां के नेत्रदान करवाने के लिए कहा ।

इदरीस की सूचना पर कोटा से,ईबीएसआर-बीबी चैप्टर के कोऑर्डिनेटर, डॉ कुलवंत गौड़ नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ स्वयं चलाकर 40 किलोमीटर दूर बूंदी पहुंचे और देर रात 2:00 बजे परिवार के सभी सदस्यों के बीच नेत्रदान का कार्य संपन्न किया । सूचना के दौरान डॉ गौड़, अपनी साली गौरक्षा दाधीच की शादी समारोह में मौजूद थे,वहीं से सीधा नेत्रदान लेने बूंदी पहुंचे ।

नेत्रदान के इस पुनीत कार्य में,खानी बाई के बेटे जैनेन्द्र,ओमप्रकाश, कमल कुमार,राजकुमार का पूरा सहयोग रहा । नेत्रदान के बारे में अधिक जानकारी देते हुए डॉ गौड़ में बताया कि, गर्मियों के दिनों में अब जरूरी सावधानी यह रखना है कि, आँखों को पूरी तरह बंद कर,उनपर रखने वाले गीले रुमाल को हर आधे घंटे में बदलते रहे ।

(वह बहस ये थी कि) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं गीली मिट्टी से एक आदमी बनाने वाला हूँ

 (वह बहस ये थी कि) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं गीली मिट्टी से एक आदमी बनाने वाला हूँ (71)
तो जब मैं उसको दुरूस्त कर लूँ और इसमें अपनी (पैदा) की हुयी रूह फूँक दो तो तुम सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना (72)
तो सब के सब कुल फरिश्तों ने सजदा किया (73)
मगर (एक) इबलीस ने कि वह शेख़ी में आ गया और काफिरों में हो गया (74)
ख़ुदा ने (इबलीस से) फरमाया कि ऐ इबलीस जिस चीज़ को मैंने अपनी ख़ास कु़दरत से पैदा किया (भला) उसको सजदा करने से तुझे किसी ने रोका क्या तूने तक़ब्बुर किया या वाकई तू बड़े दरजे वालें में है (75)
इबलीस बोल उठा कि मैं उससे बेहतर हूँ तूने मुझे आग से पैदा किया और इसको तूने गीली मिट्टी से पैदा किया (76)
(कहाँ आग कहाँ मिट्टी) खु़दा ने फरमाया कि तू यहाँ से निकल (दूर हो) तू यक़ीनी मरदूद है (77)
और तुझ पर रोज़ जज़ा (क़यामत) तक मेरी फिटकार पड़ा करेगी (78)
शैतान ने अज्र की परवरदिगार तू मुझे उस दिन तक की मोहलत अता कर जिसमें सब लोग (दोबारा) उठा खड़े किए जायेंगे(79)
फरमाया तुझे एक वक़्त मुअय्यन के दिन तक की मोहलत दी गयी (80)
वह बोला तेरी ही इज़्ज़त व जलाल की क़सम (81)
उनमें से तेरे ख़ालिस बन्दों के सिवा सब के सब को ज़रूर गुमराह करूँगा (82)
खु़दा ने फरमाया तो (हम भी) हक़ बात (कहे देते हैं) (83)
और मैं तो हक़ ही कहा करता हूँ (84)
कि मैं तुझसे और जो लोग तेरी ताबेदारी करेंगे उन सब से जहन्नुम को ज़रूर भरूँगा (85)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो तुमसे न इस (तबलीग़े रिसालत) की मज़दूरी माँगता हूँ और न मैं (झूठ मूठ) बनावट करने वाला हूँ (86)
ये (क़ुरान) तो बस सारे जहाँन के लिए नसीहत है (87)
और कुछ दिनों बाद तुमको इसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी (88)

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