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11 मार्च 2026

शीतला अष्टमी पर हुआ निधन,पुत्रों ने संपन्न कराया नेत्रदान

 शीतला अष्टमी पर हुआ निधन,पुत्रों ने संपन्न कराया नेत्रदान
2. साली की शादी बीच में छोड़,रात 2:30 बजे कोटा से आयी टीम ने लिया नेत्रदान


देर रात एक बजे,तिलक चौक,बूंदी निवासी स्व० मदनलाल जैन एडवोकेट की धर्मपत्नी खानी बाई जैन का आकस्मिक निधन हुआ। धर्म कर्म में आस्था रखने वाली खानी बाई नेत्रदान की प्रबल समर्थक थी पोते डॉ मोहित जैन को भी उन्होंने अपने नेत्रदान करवाने की सहमति दे रखी थी ।

देर रात 1:00 बजे जब यह दुखद घटना घटी, तो उन्होंने तुरंत ही संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा को सूचना कर दादी मां के नेत्रदान करवाने के लिए कहा ।

इदरीस की सूचना पर कोटा से,ईबीएसआर-बीबी चैप्टर के कोऑर्डिनेटर, डॉ कुलवंत गौड़ नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ स्वयं चलाकर 40 किलोमीटर दूर बूंदी पहुंचे और देर रात 2:00 बजे परिवार के सभी सदस्यों के बीच नेत्रदान का कार्य संपन्न किया । सूचना के दौरान डॉ गौड़, अपनी साली गौरक्षा दाधीच की शादी समारोह में मौजूद थे,वहीं से सीधा नेत्रदान लेने बूंदी पहुंचे ।

नेत्रदान के इस पुनीत कार्य में,खानी बाई के बेटे जैनेन्द्र,ओमप्रकाश, कमल कुमार,राजकुमार का पूरा सहयोग रहा । नेत्रदान के बारे में अधिक जानकारी देते हुए डॉ गौड़ में बताया कि, गर्मियों के दिनों में अब जरूरी सावधानी यह रखना है कि, आँखों को पूरी तरह बंद कर,उनपर रखने वाले गीले रुमाल को हर आधे घंटे में बदलते रहे ।

(वह बहस ये थी कि) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं गीली मिट्टी से एक आदमी बनाने वाला हूँ

 (वह बहस ये थी कि) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं गीली मिट्टी से एक आदमी बनाने वाला हूँ (71)
तो जब मैं उसको दुरूस्त कर लूँ और इसमें अपनी (पैदा) की हुयी रूह फूँक दो तो तुम सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना (72)
तो सब के सब कुल फरिश्तों ने सजदा किया (73)
मगर (एक) इबलीस ने कि वह शेख़ी में आ गया और काफिरों में हो गया (74)
ख़ुदा ने (इबलीस से) फरमाया कि ऐ इबलीस जिस चीज़ को मैंने अपनी ख़ास कु़दरत से पैदा किया (भला) उसको सजदा करने से तुझे किसी ने रोका क्या तूने तक़ब्बुर किया या वाकई तू बड़े दरजे वालें में है (75)
इबलीस बोल उठा कि मैं उससे बेहतर हूँ तूने मुझे आग से पैदा किया और इसको तूने गीली मिट्टी से पैदा किया (76)
(कहाँ आग कहाँ मिट्टी) खु़दा ने फरमाया कि तू यहाँ से निकल (दूर हो) तू यक़ीनी मरदूद है (77)
और तुझ पर रोज़ जज़ा (क़यामत) तक मेरी फिटकार पड़ा करेगी (78)
शैतान ने अज्र की परवरदिगार तू मुझे उस दिन तक की मोहलत अता कर जिसमें सब लोग (दोबारा) उठा खड़े किए जायेंगे(79)
फरमाया तुझे एक वक़्त मुअय्यन के दिन तक की मोहलत दी गयी (80)
वह बोला तेरी ही इज़्ज़त व जलाल की क़सम (81)
उनमें से तेरे ख़ालिस बन्दों के सिवा सब के सब को ज़रूर गुमराह करूँगा (82)
खु़दा ने फरमाया तो (हम भी) हक़ बात (कहे देते हैं) (83)
और मैं तो हक़ ही कहा करता हूँ (84)
कि मैं तुझसे और जो लोग तेरी ताबेदारी करेंगे उन सब से जहन्नुम को ज़रूर भरूँगा (85)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो तुमसे न इस (तबलीग़े रिसालत) की मज़दूरी माँगता हूँ और न मैं (झूठ मूठ) बनावट करने वाला हूँ (86)
ये (क़ुरान) तो बस सारे जहाँन के लिए नसीहत है (87)
और कुछ दिनों बाद तुमको इसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी (88)

10 मार्च 2026

तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा ही भला न हो तो तुम ही लोगों ने तो इस (बला) से हमारा सामना करा दिया तो जहन्नुम भी क्या बुरी जगह है

 तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा ही भला न हो तो तुम ही लोगों ने तो इस (बला) से हमारा सामना करा दिया तो जहन्नुम भी क्या बुरी जगह है (60)
(फिर वह) अज्र करेगें परवरदिगार जिस शख़्स ने हमारा इस (बला) से सामना करा दिया तो तू उस पर हमसे बढ़कर जहन्नुम में दो गुना अज़ाब कर (61)
और (फिर) खु़द भी कहेगें हमें क्या हो गया है कि हम जिन लोगों को (दुनिया में) शरीर शुमार करते थे हम उनको यहाँ (दोज़ख़) में नहीं देखते (62)
क्या हम उनसे (नाहक़) मसखरापन करते थे या उनकी तरफ से (हमारी) आँखे पलट गयी हैं (63)
इसमें शक नहीं कि जहन्नुमियों का बाहम झगड़ना ये बिल्कुल यक़ीनी ठीक है (64)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो बस (अज़ाबे खु़दा से) डराने वाला हूँ और यकता क़हार खु़दा के सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं (65)
सारे आसमान और ज़मीन का और जो चीज़े उन दोनों के दरमियान हैं (सबका) परवरदिगार ग़ालिब बड़ा बख़्शने वाला है (66)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये (क़यामत) एक बहुत बड़ा वाकि़या है (67)
जिससे तुम लोग (ख़्वाहमाख़्वाह) मुँह फेरते हो (68)
आलम बाला के रहने वाले (फरिश्ते) जब वाहम बहस करते थे उसकी मुझे भी ख़बर न थी (69)
मेरे पास तो बस वही की गयी है कि मैं (खु़दा के अज़ाब से) साफ-साफ डराने वाला हूँ (70)

09 मार्च 2026

माह ऐ रमज़ान में कोटा के इफ्तियारी बाजारों में क्या इस्लामिक तहज़ीब, रोजेदारों का एहतराम बाकी है ????

 

माह ऐ रमज़ान में कोटा के इफ्तियारी बाजारों में क्या इस्लामिक तहज़ीब, रोजेदारों का एहतराम बाकी है ????
कोटा 8 मार्च , रोज़ शाम को घण्टाघर, विज्ञाननगर, स्टेशन, किशोरपुरा, वक़्फ़ नगर, कंसुआ प्रेम नगर रोजेदारों के लिये इफ्तियारी बाज़ार होता है, लेकिन इस बाज़ार में क्या रोजेदारों की सहत्याबी, उन्हें अनावश्यक लूट खसोट से रोकने की कोशिशें, वगेरा ईमानदाराना व्यवस्थाएं होती हैं, अगर नहीं तो इज़राइल, अमेरिका और इन्हें अपनी जगह इराक़ पर रमज़ानों में बम बरसाने के लिये देने वाले खबीस ओर हममें क्या फ़र्क़ रह जाता है, खुदा का शुक्र है , के, अल्लाह ने हमे ज़िन्दगी को खूबसूरत बनाने के लिए हुक्म ऐ क़ुरआन दिया, सही रास्ता दिखाया और बज़रिये हुज़ूर स अ व आसान ईमानदाराना ज़िन्दगी के टिप्स दिए, फिर हर साल इन सब को बज़रिये सब्र शुक्र की ट्रेनिंग के साथ, क़ुरआन को दोहराकर समझने के क़ायदे के साथ, माह ऐ रमज़ान, तरावीह दी, लेकिन क्या हम आज भी जब, इस माह में शैतान केद है , तब भी, अल्लाह के क़ानून की बंदिशों के बावुजूद भी , क्या इंसान बन पा रहे हैं , लूट खसोट से, लोगों की इज़ारशी से बाज़ आ पा रहे है , व्यापारी, ठेले , खोमचे वाले, इफ्तियारी से जुड़े सामान बेचने वाले , खासकर कोटा वाले सीने पर हाथ रखकर , खुद से ही पूंछ लें,
अल्लाह का कितना बढ़ा इनाम है, के हमे, आपको हुज़ूर स अ व की उम्मत में शामिल किया, हमें हुज़ूर स अ व ने बज़रिये क़ुरआन ओर खुद की ज़िंदगी की खूबसूरती से तहज़ीब, इंसाफ, ईमानदारी, नेकी के साथ ज़िन्दगी के क़ायदे क़ानून , अख़लाक़ सिखाये गए, लेकिन किया हम हुज़ूर स अ व की दी गई सीख, खुदा के दिये गए क़ुरानी हुक्म के मुताबिक चल रहे, शायद हरगिज़ हरगिज़ नहीं, आम दिनों की तो छोड़िए, माह ऐ रमज़ान जो इबादत, सब्र, शुक्र, इस्लाम की जीवनशैली की परवरिश, याद्दाहनी का महीना है, जिस इबादत के महीने हम तरावीह के नाम पर, अल्लाह का क़ानून , क़ुरआन शरीफ के हर हुक्म को दोहराते हैं, वोह बात अलग है, के यह सब हम आसान ज़ुबान में चाहे ना समझते हैं, लेकिन अरबी में तो सुनते भी है, ओर पढ़ते भी है, फिर भी हमारी, हमारे ओर हमारे हुस्न ऐ अख़लाक़ में इतनी दूरी क्यों, हम आज भी इतने बुरे क्यों , किसलिए है, क्या हम सोचते हैं , वोह भी इस रमज़ान के माह में जब शैतान केदखाने में है, तो फिर हम में शैतानी, बेईमानी, झूँठ, फरेब दूसरों को तकलीफ देने, व्यापार में लूट खसोट करने की यह शैतानी आदत क्यों, खुद अपने आप से पूँछिये, शायद यह हम पर खुदा की फिटमार है, ओर यूँ ही हम झूँठ फरेब की ज़िल्लत भरी जिंदगी की तरफ रुजू हैं, कोटा विज्ञाननगर चौराहे के, एक नज़ारे को नज़र सानी कीजिये, वहां ट्रैफिक प्रॉब्लम, लोगों की आवाजाही में सहूलियतें खत्म कर आम लोगों की आवाजाही में कितनी दिक़्क़तें पैदा कर रहे हैं, कितने लोगों की इज़ा रसाई कर रहे हैं, विज्ञाननगर चौराहे के इफ्तियारी बेचने वाले हम हमारे भाइयों को देखिए, खराब तेल, मसाले, ना जाने क्या क्या मुनाफे से कई ज़्यादा दामों में बेचकर लूट खसोट कर रहे है, आटे के समोसे, छोटे छोटे, जिस तेल में चिकन, पकोड़ी, कवाब, दूसरी चीजें तली है, उसी तेल में यह आटे, दाल के समोसे भी आधे कच्चे आधे पक्के तले हैं, स्लिप क़ीमें के समोसे की लगी हैं और दाल भी पूरी नहीं भरी है, आधे कच्चे , आधे पक्के यह समोसे 3 रुपये की लागत, और दस रुपये प्रति नग वसूली, फ्रूट की मुनाफा बढ़ोतरी का यही हाल, इफ्तियारी के सभी सामान, हलीम, बिरियानी , कवाब शर्बत सभी का यही हाल, अब सोचिये एक रोज़ेदार आप के भरोसे यह सब इफ्तियारी मे ले जाता है, किसी का पेट खराब, गला खराब, अलग अलग बीमारियां , क्या रमज़ान में रोज़ेदारों के साथ , इस माह में आपका यह सुलूक, आम लोगों की तकलीफ ट्रैफिक जाम वगेरा सही है, सिर्फ टोपी लगाकर खोमचों, ठेलों, नुक्कड़ों पर यह बिक्री, यह खराब तेल, चिकनाई जल जाने के बाद तले भुने सामान रोज़ेदारों के लिये महंगे दामों में बेचना सही है, खुद ही अपने दिल पर हाथ रखकर सोचियेगा, क्योंकि आप खुद जब अपने रोज़ेदार लोगों की तंदरुस्ती के दुश्मन हैं तो फिर स्वास्थ्य विभाग, मिलावट की जांच करने वाले इंस्पेक्टर, नमूने लेकर स्तरहीन सामान बेचने वाले लोगों के खिलाफ ज़िम्मेदार अधिकारी , हमारे समाज के रोज़ेदारों को बचाने के लिये कुछ क्यों करेंगे, एक वक्त था घण्टाघर की सबसे पुरानी नॉनवेज होटल के मालिक, कई साल पहले हर रमज़ानों में कवाब वगेरा नो लॉस नो प्रॉफिट में बनाकर कम दामों में बेचते थे, उनके बच्चों की भी यह परम्परा है जो शुद्धता ओर रोज़ेदारों की तंदरुस्ती का भी पूरा ध्यान
रखते हैं , अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

प्रेस क्लब कोटा की वार्षिक आमसभा संपन्न, महिला दिवस पर महिला पत्रकारों का सम्मान

 

प्रेस क्लब कोटा की वार्षिक आमसभा संपन्न, महिला दिवस पर महिला पत्रकारों का सम्मान
पत्रकार हित सर्वोपरि, सदस्यों के सुझावों पर अमल का भरोसा : गजेन्द्र व्यास
के डी अब्बासी
कोटा, 9 मार्च। प्रेस क्लब कोटा की वार्षिक आमसभा रविवार को प्रेस क्लब स्थित प्रो. ललित किशोर चतुर्वेदी सभागार में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। आमसभा में क्लब की गतिविधियों, आय-व्यय, पत्रकार हितों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में क्लब की महिला सदस्यों सहित जनसंपर्क विभाग की सहायक निदेशक श्रीमती रचना शर्मा एवं सहायक जनसंपर्क अधिकारी श्रीमती आकांक्षा शर्मा पुष्पहार भेंट कर सम्मान भी किया गया।
आमसभा की अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष गजेन्द्र व्यास ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
सदस्य हितों के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा प्रेस क्लब
अपने स्वागत उद्बोधन में अध्यक्ष गजेन्द्र व्यास ने उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए अपने एक वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रेस क्लब कोटा सदैव अपने सदस्यों के हितों के लिए कार्य करता रहा है और आगे भी पत्रकारों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता से प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने आमसभा में सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों और प्रस्तावों पर विस्तार से जवाब देते हुए आश्वस्त किया कि क्लब की गतिविधियों और सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए सभी सुझावों पर सकारात्मक पहल की जाएगी।
पत्रकार पेंशन बढ़ाने पर जताया आभार
प्रेस क्लब के सचिव जितेन्द्र कुमार शर्मा ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए क्लब की गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विभिन्न चुनौतियों और विकट परिस्थितियों के बावजूद प्रेस क्लब की आय बरकरार है, जो सभी सदस्यों के सहयोग का परिणाम है।
उन्होंने वरिष्ठ अधिस्वीकृत पत्रकारों की पेंशन राशि 15 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किए जाने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार भी व्यक्त किया।
आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत
कोषाध्यक्ष रघुवीर कपूर शम्मी ने गत वर्ष के आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा आमसभा के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।
महिला दिवस पर महिला पत्रकारों का सम्मान
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रेस क्लब से जुड़ी महिला पत्रकारों और सदस्यों का सम्मान कर उनके योगदान की सराहना की गई। इस दौरान वक्ताओं ने पत्रकारिता में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक परिवर्तन बताते हुए कहा कि महिला पत्रकार समाज में सशक्त भूमिका निभा रही हैं।
कई वरिष्ठ पत्रकारों ने रखे विचार
आमसभा में वरिष्ठ पत्रकार मनोहर पारीक, विशाल उपाध्याय, मोहनलाल बड़ोदिया, विनोद कुमार देवलिया, शैलेन्द्र मेड़तवाल और सूर्यप्रकाश हरितवाल सहित कई सदस्यों ने अपने विचार रखे तथा प्रेस क्लब की गतिविधियों को और मजबूत बनाने के लिए सुझाव दिए।
मंच पर ये रहे मौजूद
इस अवसर पर मंचासीन पदाधिकारियों में अध्यक्ष गजेन्द्र व्यास, सचिव जितेन्द्र कुमार शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह हाड़ा, उपाध्यक्ष प्रताप सिंह तोमर, सह सचिव गिरीश गुप्ता, कोषाध्यक्ष रघुवीर कपूर शम्मी, कार्यकारिणी सदस्य संजीव सक्सेना, रमेशचंद गौतम, नीरज राजावत, अनिल कुमार देवलिया, यतीश व्यास और योगेन्द्र योगी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन सचिव जितेन्द्र कुमार शर्मा ने किया।
दिवंगत पत्रकारों को श्रद्धांजलि
आमसभा के अंत में दिवंगत पत्रकारों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद राष्ट्रगान और स्नेहभोज के साथ वार्षिक आमसभा का समापन हुआ।

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