आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
20 जून 2026
अभिभाषक परिषद में गूंजा हज का रूहानी संदेश, अख्तर खान अकेला का हुआ सम्मा
. तीसरे की बैठक में अंगदान नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को किया दूर
. तीसरे की बैठक में अंगदान नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को किया दूर
2. श्रद्धांजलि सभा में अंगदान नेत्रदान जागरूकता विषय पर कार्यशाला
बीते
दिनों ग्राम नलका,जिला बाराँ निवासी सेवानिवृत अध्यापक मिश्रीलाल नागर के
आकस्मिक निधन के उपरांत, शोकाकुल परिवार ने,अपने निवास स्थान पर शोक सभा का
आयोजन किया था ।
शोक सभा में,संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन एवं
ईबीएसआर-बीबीजे चैप्टर के कोऑर्डिनेटर,डॉ कुलवंत गौड़ ने,नेत्रदानी परिवार
का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया । भारत विकास परिषद के अध्यक्ष नरेश
खंडेलवाल,सचिव हितेश खंडेलवाल,एवं शारीरिक शिक्षक व समाज सेवी सुनील शर्मा
ने भी अपनी ओर से शोकाकुल परिवार के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र भेंट किया ।
स्व
नेत्रदानी मिश्रीलाल के पुत्र मयंक,व दामाद संदीप के अनुरोध पर डॉ गौड़ ने
उपस्थित जन समूह को अंगदान के महत्व,उपयोगिता और भ्रांतियों के बारे में
विस्तार से जानकारी दी। डॉ गौड़ ने कहा कि, ब्रेन डेड की अवस्था, साधारण
होने वाली मृत्यु (कार्डियक डेथ) से बिल्कुल अलग होती है,ब्रेन डेड की
अवस्था में एक व्यक्ति न्यूनतम 8 लोगों में जीवन दान दे सकता है ।
डॉ
गौड़ ने यह भी बताया कि, प्रदेश में राजस्थान सरकार अंगदान के अभियान को
गति देने के लिए, एवं अंगों के अभाव से होने वाली मृत्यु को रोकने के लिए
संस्थान सोटो (राज्य अंग एवं उत्तर प्रत्यारोपण संस्थान) के माध्यम से
कार्य कर रही है । ज्ञात हो कि,प्रदेश में अभी तक 86 ब्रेन डेड दिवंगतों के
किडनी,लीवर,आँखों,हार्ट,आँतें व फेफड़े के दान से 200 से, अधिक लोगों का
जीवन बचाया जा चुका है ।
और जो (कु़रान) मैंने नाजि़ल किया वह उस किताब (तौरेत) की (भी) तसदीक़ करता हूँ जो तुम्हारे पास है और तुम सबसे चले उसके इन्कार पर मौजूद न हो जाओ और मेरी आयतों के बदले थोड़ी क़ीमत (दुनयावी फायदा) न लो और मुझ ही से डरते रहो
और जो (कु़रान) मैंने नाजि़ल किया वह उस किताब (तौरेत) की (भी) तसदीक़ करता
हूँ जो तुम्हारे पास है और तुम सबसे चले उसके इन्कार पर मौजूद न हो जाओ और
मेरी आयतों के बदले थोड़ी क़ीमत (दुनयावी फायदा) न लो और मुझ ही से डरते
रहो (41)
और हक़ को बातिल के साथ न मिलाओ और हक़ बात को न छिपाओ हालाँकि तुम जानते हो और पाबन्दी से नमाज़ अदा करो (42)
और ज़कात दिया करो और जो लोग (हमारे सामने) इबादत के लिए झुकते हैं उनके साथ तुम भी झुका करो (43)
और तुम लोगों से नेकी करने को कहते हो और अपनी ख़बर नहीं लेते हालाँकि
तुम किताबे खु़दा को (बराबर) रटा करते हो तो तुम क्या इतना भी नहीं समझते
(44)
और (मुसीबत के वक़्त) सब्र और नमाज़ का सहारा पकड़ो और अलबत्ता नमाज़
दूभर तो है मगर उन ख़ाक़सारों पर (नहीं) जो बख़ूबी जानते हैं (45)
कि वह अपने परवरदिगार की बारगाह में हाजि़र होंगे और ज़रूर उसकी तरफ लौट जाएँगे (46)
ऐ बनी इसराइल मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंने पहले तुम्हें दी और
ये (भी तो सोचो) कि हमने तुमको सारे जहाँन के लोगों से बढ़ा दिया (47)
और उस दिन से डरो (जिस दिन) कोई शख़्स किसी की तरफ से न फिदिया हो
सकेगा और न उसकी तरफ से कोई सिफारिश मानी जाएगी और न उसका कोई मुआवज़ा लिया
जाएगा और न वह मदद पहुँचाए जाएँगे (48)
और (उस वक़्त को याद करो) जब हमने तुम्हें (तुम्हारे बुजुर्गों को)
फिरऔन (के पन्जे) से छुड़ाया जो तुम्हें बड़े-बड़े दुख दे के सताते थे
तुम्हारे लड़कों पर छुरी फेरते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी खि़दमत के
लिए) जि़न्दा रहने देते थे और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से
(तुम्हारे सब्र की) सख़्त आज़माइश थी (49)
और (वह वक़्त भी याद करो) जब हमने तुम्हारे लिए दरया को टुकड़े-टुकड़े किया फिर हमने तुमको छुटकारा दिया (50)
19 जून 2026
कोटा कोचिंग तबाह ओर बर्बाद हो रहा है, टैक्सों, मोटी फीस से लोग त्रस्त हैं लेकिन 15 सालों से आज तक कोटा सांसद ने कोचिंग को लाइफ़ सपोर्ट देने के लिए कोई योजना नहीं बनाई,
शहर के बाद,ग्रामीण क्षेत्रों में भी परंपरा बन रहा है,नेत्रदान
शहर के बाद,ग्रामीण क्षेत्रों में भी परंपरा बन रहा है,नेत्रदान
2. शोक होते ही,नेत्रदान के लिए परिजनों संपर्क किया
वार्ड
नम्बर 4,सदर बाजार, नैनवां निवासी स्व० कमल कुमार मारवाडा की धर्मपत्नी
एवं विनोद, सुनील, संजय,व मुकेश मारवाड़ा की माताजी राजकुमारी मारवाड़ा का
इलाज के लिए नैनवा से जयपुर ले जाते समय, बीच रास्ते चाकसू में निधन हो गया
।
बेटे विनोद को जैसे ही माता जी के निधन की सूचना मिली, उन्होंने
तुरंत ही सबसे पहला कॉल शाइन इंडिया फाउंडेशन व ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर के
कोऑर्डिनेटर डॉ कुलवंत गौड़ को किया ।
डॉ गौड़ उस समय बारां से,
नेत्रदानी की शोकसभा में नेत्रदान अंगदान के विषय में संबोधित करके वापस
लौट ही रहे थे, उसी समय नैनवा से यह दुख भरी खबर प्राप्त हुई ।
नैनवां
का यह मारवाड़ा परिवार, काफी समय से शाइन इंडिया फाउंडेशन के साथ जुड़ा हुआ
है,4 वर्ष पूर्व राजकुमारी के पति कमल कुमार मारवाडा का और 2 वर्ष पूर्व
स्व० राजकुमारी की, भतीजा बहू स्व० हेमलता जैन का नेत्रदान भी संस्था के
सहयोग से संपन्न हुआ था।
धर्म-कर्म में आस्था एवं साधु संतों की
सेवा में हमेशा अग्रणी रहने वाली राजकुमारी के अचानक चले जाने से एक तरफ
परिवार में असीम दुख पहुँचा, पर यह सुकून भी रहा कि,नेत्रदान से माताजी
किसी दृष्टिहीन की आँखों में हमेशा रोशनी बनाकर जीवित रहेंगे ।
संस्था
के ज्योति मित्र महावीर जैन मोदीका,ने बताया कि, पिछले 6 वर्ष में
नेत्रदान की प्रति बढ़ती जागरूकता से अभी तक 15 दिवंगतों के नेत्रदान
नैनवां से प्राप्त हुए ।