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06 नवंबर 2026

happy dipawly

 

Dear fellow citizen,  
     
  Warm greetings on the auspicious occasion of Diwali!  
     
  This festival celebrates the eternal victory of light over darkness, goodness over evil and hope over despair.
 
     
  Diwali is also an occasion to cherish our rich traditions and strengthen the bonds of togetherness.  
     
  May Diwali illuminate every home with happiness, harmony and prosperity.
 
     
  May this festive season inspire us to spread kindness, embrace positivity and work towards a brighter future.
 
     
  Let us move forward with renewed energy and determination to build a prosperous and Viksit Bharat.  
     
  Once again, wishing you a Happy Diwali!
 
     
  Yours,
Narendra Modi
 
  Letter from the Prime Minister

धनतेरस की पूर्व संध्या पर संपन्न हुआ नेत्रदान

 धनतेरस की पूर्व संध्या पर संपन्न हुआ नेत्रदान

शोक की घड़ी में बेटे-बेटियों ने निभाया मानवता का धर्म, मां का नेत्रदान करवाकर दिया प्रेरणादायी संदेश

रामगंजमंडी। ग्राम रीछड़िया, तहसील रामगंजमंडी निवासी श्री बृजमोहन मेहता की धर्मपत्नी श्रीमती बद्री बाई का कोटा के एक निजी अस्पताल में हृदयाघात से आकस्मिक निधन हो गया। परिवार के लिए यह अत्यंत दुःखद घड़ी थी, लेकिन इस कठिन समय में भी परिवार ने मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को सर्वोपरि रखते हुए माताजी का नेत्रदान करवाने का पुनीत निर्णय लिया।

बृजमोहन मेहता का परिवार प्रारंभ से ही सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा कार्यों में अग्रणी रहा है। ज्येष्ठ पुत्र मुकेश कुमार मेहता सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ मां गायत्री के उपासक भी हैं। माताजी के निधन की सूचना मिलते ही उनके मित्र एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र पंकज काला तथा वीरेंद्र कुमार जैन ने मुकेश मेहता से संपर्क कर माताजी के नेत्रदान का आग्रह किया।

मुकेश मेहता ने तत्काल अपने छोटे भाइयों बलराम, शैलेन्द्र एवं जीतेश, बहनों रेखा एवं ज्योति मीना तथा पिता श्री बृजमोहन मेहता से चर्चा कर सहमति प्राप्त की। परिवार के सभी सदस्यों ने धर्म, सेवा और मानवता के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए सहर्ष नेत्रदान के लिए सहमति प्रदान की।

परिवार की सहमति मिलते ही आरोग्य भारती के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र जैन की सूचना पर शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम के कुलवंत गौड़ ने परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न करवाई।

शाइन इंडिया फाउंडेशन के शहर संयोजक संजय विजावत ने बताया कि संस्था द्वारा पिछले 15 वर्षों से किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। अब नेत्रदान के प्रति जागरूकता केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग आगे आकर इस पुनीत कार्य में भागीदारी निभा रहे हैं।

परिवार ने दुःख की घड़ी को मानव सेवा के संकल्प में बदलकर समाज को एक प्रेरणादायी संदेश दिया है। श्रीमती बद्री बाई का नेत्रदान उन लोगों के जीवन में नई रोशनी की उम्मीद बनेगा, जो दृष्टि पाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

नेत्रदान महादान है। शरीर नश्वर है, लेकिन हमारा यह छोटा सा संकल्प किसी के जीवन में उजाला भर सकता है।

और इबराहीम की बीबी (सायरा) खड़ी हुयी थी वह (ये ख़बर सुनकर) हॅस पड़ी तो हमने (उन्हें फरिशतों के ज़रिए से) इसहाक़ के पैदा होने की खुशख़बरी दी और इसहाक़ के बाद याक़ूब की

 और इबराहीम की बीबी (सायरा) खड़ी हुयी थी वह (ये ख़बर सुनकर) हॅस पड़ी तो हमने (उन्हें फरिशतों के ज़रिए से) इसहाक़ के पैदा होने की खुशख़बरी दी और इसहाक़ के बाद याक़ूब की (71)
वह कहने लगी ऐ है क्या अब मै बच्चा जनने बैठॅूगी मैं तो बुढि़या हूँ और ये मेरे मियाँ भी बूढे़ है ये तो एक बड़ी ताज्जुब खेज़ बात है (72)
वह फरिश्ते बोले (हाए) तुम ख़ुदा की कुदरत से तअज्जुब करती हो ऐ एहले बैत (नबूवत) तुम पर ख़़ुदा की रहमत और उसकी बरकते (नाजि़ल हो) इसमें शक नहीं कि वह क़ाबिल हम्द (वासना) बुज़ुर्ग हैं (73)
फिर जब इबराहीम (के दिल) से ख़ौफ जाता रहा और उनके पास (औलाद की) खुशख़बरी भी आ चुकी तो हम से क़ौमे लूत के बारे में झगड़ने लगे (74)
बेशक इबराहीम बुर्दबार नरम दिल (हर बात में ख़ुदा की तरफ) रुजू (ध्यान) करने वाले थे (75)
(हमने कहा) ऐ इबराहीम इस बात में हट मत करो (इस बार में) जो हुक्म तुम्हारे परवरदिगार का था वह क़तअन आ चुका और इसमें शक नहीं कि उन पर ऐसा अज़ाब आने वाले वाला है (76)
जो किसी तरह टल नहीं सकता और जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते (लड़को की सूरत में) लूत के पास आए तो उनके ख़्याल से रजीदा हुए और उनके आने से तंग दिल हो गए और कहने लगे कि ये (आज का दिन) सख़्त मुसीबत का दिन है (77)
और उनकी क़ौम (लड़को की आवाज़ सुनकर बुरे इरादे से) उनके पास दौड़ती हुयी आई और ये लोग उसके क़ब्ल भी बुरे काम किया करते थे लूत ने (जब उनको) आते देखा तो कहा ऐ मेरी क़ौम ये हमारी क़ौम की बेटियाँ (मौजूद हैं) उनसे निकाह कर लो ये तुम्हारी वास्ते जायज़ और ज़्यादा साफ सुथरी हैं तो खु़दा से डरो और मुझे मेरे मेहमान के बारे में रुसवा न करो क्या तुम में से कोई भी समझदार आदमी नहीं है (78)
उन (कम्बख़्तो) न जवाब दिया तुम को खूब मालूम है कि तुम्हारी क़ौम की लड़कियों की हमें कुछ हाजत (जरूरत) नही है और जो बात हम चाहते है वह तो तुम ख़ूब जानते हो (79)
लूत ने कहा काश मुझमें तुम्हारे मुक़ाबले की कूवत होती या मै किसी मज़बूत कि़ले मे पनाह ले सकता (80)

05 नवंबर 2026

स्काउटिंग सिखाती है जीवन जीने की कला, सेवा और संस्कारों से होता है राष्ट्र निर्माण

स्काउटिंग सिखाती है जीवन जीने की कला, सेवा और संस्कारों से होता है राष्ट्र निर्माण
7 नवम्बर स्काउट-गाइड स्थापना दिवस पर विशेष : अनुशासन, आत्मनिर्भरता और मानव सेवा का संदेश
डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़
के डी अब्बासी
कोटा। स्काउटिंग केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन, समर्पण और संस्कारों की ऐसी पाठशाला है, जो बच्चों एवं युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का बोध कराती है। स्काउट-गाइड का मूल मंत्र सेवा है। इसी उद्देश्य को लेकर प्रतिवर्ष 7 नवम्बर को भारत में स्काउट-गाइड स्थापना दिवस मनाया जाता है।
सेवा, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास की पाठशाला
स्काउटिंग आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1907 में इंग्लैंड में लॉर्ड रॉबर्ट बेडेन पॉवेल ने की थी। भारत में इसकी शुरुआत 1909 में हुई। स्वतंत्रता के बाद 7 नवम्बर 1950 को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स का गठन किया गया। इसके बाद 15 अगस्त 1951 को गर्ल गाइड्स का भी इसमें विलय हुआ। आज यह संगठन युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
स्काउटिंग के माध्यम से बच्चों में ईमानदारी, आत्मनिर्भरता, नेतृत्व क्षमता, सहयोग, समय की पाबंदी और राष्ट्रप्रेम जैसे गुण विकसित किए जाते हैं। शिविर, रैलियां, पदयात्राएं, प्राथमिक उपचार, गांठें लगाना, दिशा ज्ञान और आपदा प्रबंधन जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य एवं आत्मविश्वास के साथ कार्य करना सिखाती हैं।
आपदा और सामाजिक कार्यों में निभाते हैं अग्रणी भूमिका
प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, भूकंप और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में स्काउट-गाइड स्वयंसेवक प्रशासन एवं आमजन की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। धार्मिक आयोजनों, मेलों, यातायात व्यवस्था, स्वच्छता अभियान, नशामुक्ति, जल संरक्षण, पौधारोपण और जनजागरण कार्यक्रमों में भी इनकी सक्रिय भागीदारी रहती है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कर रहे प्रेरित
वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण, जल संकट और घटते वन क्षेत्र गंभीर चुनौतियां हैं। ऐसे में स्काउट-गाइड संगठन पौधारोपण, परिंडा अभियान, जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त अभियान के माध्यम से नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहा है। पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल कर उन्हें वृक्ष बनाने का संदेश भी दिया जा रहा है।
कोटा में स्काउट-गाइड गतिविधियों को मिल रहा विस्तार
कोटा जिले में राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड के स्थानीय संघ सुल्तानपुर, रामगंजमंडी, सांगोद, इटावा, कनवास, कोटा एवं कोटा दक्षिण के माध्यम से विभिन्न विद्यालयों में सेवा, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
स्थानीय संघ कोटा दक्षिण द्वारा शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा लिमिटेड-696 आर (कोटा-बारां) के सहयोग से पौधारोपण, जल संरक्षण, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, स्वच्छता और जनजागरण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। शिक्षा सहकारी-स्काउट गाइड वाटिका, परिंडा अभियान और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।
युवाओं को जोड़ना समय की आवश्यकता
भारत युवा आबादी वाला देश है। ऐसे में युवाओं में सेवा, समर्पण, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करना बेहद जरूरी है। प्रत्येक विद्यालय में स्काउट-गाइड गतिविधियों को प्रोत्साहित कर अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इससे जोड़ना चाहिए। इससे विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।
स्काउट-गाइड स्थापना दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन में सेवा, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम अपनाने का संकल्प लेने का दिन है। लॉर्ड बेडेन पॉवेल का संदेश भी यही है कि दुनिया को पहले से बेहतर स्थिति में छोड़कर जाना चाहिए।
सेवा ही धर्म है, सेवा ही पहचान है और सेवा ही स्काउटिंग की सबसे बड़ी शान है।
लेखक : प्रकाश जायसवाल
कब मास्टर एवं जिला प्रधान, राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड, कोटा।
 

राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर बच्चों के कल्याण , संरक्षण, निरीक्षण के लिए बनी कमेटी में संभागीय आयुक्त चेयरमेन , ऐ सी बी जज को चेयरमेन , प्रिंसिपल मेफिकल कॉलेज, हरप्रीत कौर सहित अन्य सदस्य नियुक्त सभी को बधाई, मुबारकबाद,

 

राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर बच्चों के कल्याण , संरक्षण, निरीक्षण के लिए बनी कमेटी में संभागीय आयुक्त चेयरमेन , ऐ सी बी जज को चेयरमेन , प्रिंसिपल मेफिकल कॉलेज, हरप्रीत कौर सहित अन्य सदस्य नियुक्त सभी को बधाई, मुबारकबाद,
कोटा 5 नवम्बर ,, कोटा संभाग में संचालित चाइल्ड केयर सेंटर और उसके बाद बच्चों के संरक्षण निगरानी सहित अन्य संरक्षित मामलों के लिए माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के दिशा निर्देश पर कोटा संभाग के संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक संभागीय बाल आयोग कमेटी का गठन किया गया है ,, जिसमे बल विशेषज्ञ के रूप में बाल कल्याण समिति सदस्य श्रीमती हरप्रीत कोर , बाबूलाल महरा को भी सदस्य बनाया गया है , राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार , उच्चन्यायलय के अधीनस्थ नियंत्रण में गठित इस कमेटी के चेयरमेन संभागीय आयुक्त , को चेयरमेन कोटा जिला भ्रष्टाचार निरोधक मामलात जज अश्वनी शर्मा को चेयरमेन ,,सचिव जिला विधिक न्यायिक प्राधिकरण संयोजक बनाये गए है , जबकि समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक ,प्रिंसिपल गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज कोटा , डॉक्टर मिथिलेश खींची प्रोफेसर साइक्रेटरी डिपार्टमें , बाबूलाल मेहरा ,,हरप्रीत कोर , सदस्य बाल कल्याण समिति सदस्य बनाये गए है , ,बाल कल्याण समिति सदस्य हर हर प्रीत कोर इसके पूर्व कोटा जिला बाल न्यायालय में न्यायिक सदस्य भी रही हैं वर्तमानं में वोह बाल कल्याण समिति सदस्य है उन्हें बालक , बालिकाओं की समस्याओं , उनके मनोविज्ञान , समाधान के बारे में विशेष अनुभव है , उनकी इस पद पर नियुक्ति पर बधाई , मुबारकबाद , माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ द्वारा दिनांक 03.09.2026 को एस.बी. आपराधिक विविध याचिका संख्या 6874/2024, दीपक
कुमार बनाम राजस्थान राज्य में पारित आदेश के अनुपालन में,
और राजस्थान
राज्य विधि सेवा प्राधिकरण, जयपुर से दिनांक 28.10.2026 के पत्र और जिला विधि सेवा प्राधिकरण, कोटा से दिनांक 30.10.2026 के पत्र के माध्यम से संभागीय स्तर किशोर न्याय आयोग (डीयूजेसी) के गठन और प्रभावी कार्यप्रणाली के संबंध में प्राप्त संचार के अनुसरण ,
और संबंधित अधिकारियों से नामांकन प्राप्त होने पर,
कोटा संभाग के लिए संभागीय स्तर किशोर न्याय आयोग का गठन किया गया जिसमें, उक्त चेयरमेन सदस्य नियुक्त हुए,
आयोग का मुख्य कार्य बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) में रहने वाले किशोरों और 18 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके तथा पारिवारिक सहायता से वंचित किशोरों की व्यक्तिगत शिकायतों और समस्याओं का समाधान करना। सरकारी विद्यालयों/कॉलेजों/आईटीआई में तत्काल आश्रय उपलब्ध कराना और कौशल विकास को बढ़ावा देना। . सभी बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई), सुरक्षित स्थानों और देखभाल गृहों का मासिक निरीक्षण करना और राज्य किशोर न्याय परिषद को रिपोर्ट प्रस्तुत करना। . पुनर्वास के लिए बच्चे, उसके परिवार और राज्य के बीच सेतु का काम करना। यह सुनिश्चित करना कि किसी भी देखभाल से मुक्त हुए बच्चे को उचित योजना के बिना संस्था से छुट्टी न दी जाए, जैसा कि आदर्श नियम 2016 के नियम 25 के तहत अनिवार्य है। आयोग के सभी सदस्य माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार उपरोक्त कार्यों का प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित करेंगे और आयोग के प्रभावी कामकाज के लिए पूर्ण सहयोग और समन्वय प्रदान करेंगे।

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