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20 अक्टूबर 2026

नारा हूँ ना , महिला हूँ ना, कर सकती हूँ , लड़ सकती हूँ , इस नारे को बुलंद करते हुए , देश भर में अपराध घटनाओ की सिटी कहे जाने वाले ,,कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गौतम , उनकी टीम ने ,, मुंबई में टाइगर श्रॉफ के हमलावरों को चुटकियों में पकड़ लिया ,, इस बहादुरी , समझदारी , बेस्ट पुलिसिंग के लिए निश्चित तोर पर वोह ,, उनकी टीम मुबारकबाद की हक़दार है , बधाई की पात्र है

नारा हूँ ना , महिला हूँ ना, कर सकती हूँ , लड़ सकती हूँ , इस नारे को बुलंद करते हुए , देश भर में अपराध घटनाओ की सिटी कहे जाने वाले ,,कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गौतम , उनकी टीम ने ,, मुंबई में टाइगर श्रॉफ के हमलावरों को चुटकियों में पकड़ लिया ,, इस बहादुरी , समझदारी , बेस्ट पुलिसिंग के लिए निश्चित तोर पर वोह ,, उनकी टीम मुबारकबाद की हक़दार है , बधाई की पात्र है ,, तेजस्वी गौतम पुलिस अधीक्षक के साथ साथ , ब्रेवो वूमेन ,,बहुमुखी प्रतिभा की धनी भी हैं , लेकिन कोटा की सियासत ने उन्हें कोटा में उलझा कर रख दिया , और वोह चाहकर भी बहुत कुछ प्रयासों के बावजूद भी क़ानून व्यवस्थाओं , ,ब्लाइंड मर्डर , सहित डकैती , लूट , अन्य गंभीर घटनाओं की परतें खोलने में उलझकर रह गयीं , चुनावों में भी उनकी स्थिति दबाव में रही , ,खेर फिर भी तेजस्वी गौतम ने बंधे हुए हाथों के बावजूद भी , कोटा के लिए बहुत कुछ करने का प्रयास किया ,, लेकिन यह टाइगर के हमलावरों की गिरफ्तारी निश्चित तोर पर , बढ़ी कार्यवाही है , क्योंकि यह गेंग जब ट्रेन में आई, तो बीच में कई स्टेशन पढ़ते है , चाहते तो उन्हें रास्ते में ही रोका जा सकता था , जो दूसरे लोग , रेलवे पुलिस नहीं कर सकी ,, खेर इस कामयाबी के लिए कोटा की पुलिसिंग का नाम रोशन हुआ है ,, तेजस्वी गौतम आई पी एस एक जाना माना नाम , स्मैक तस्करों के खिलाफ , नशीले पदार्थों के आदतन अपराधियों के खिलाफ ,, इनकी पुलिसिंग के क़िस्से सभी जानते है , लेकिन कोटा में ज़मीन जायदाद , रुपयों के लेनदेन , ठगी , साइबर ठगी , चाकूबाजी , गोलीबारी , फिर चुनाव जैसे मामलों के अलावा सियासी दबाव में ही वोह उलझ गईं , तेजस्वी गौतम डरी भी नहीं, दबी भी नहीं , लेकिन नौकरी तो नौकरी है , कोशिशों के बावजूद भी , नशामुक्ति और नशे के व्यापरियों के खिलाफ बढ़ा वृहद अभियान नहीं चला पाईं ,, महिला सुरक्षा , आत्म स्वावलम्बी , की कार्य योजनाएं भी नहीं चली , नशे के खिलाफ मोटिवेशनल नाटक ,, प्रहसन के ज़रीये कार्य्रकम नहीं हो सके , लेकिन फिर भी जो कुछ भी किया बेहतर किया ,, अब तो वोह , पदोन्नत होकड, डी आई जी हो गई है , केडर आते ही उनकी ससम्मान विदाई भी हो जायेगी , लेकिन कोटा में , कोटा के लोगों को अपराधों से बचाने के लिए नोजवानों को जानलेवा नशे से बचाने के लिए , स्मैक के आदतन लोगों द्वारा परिवार के परिवार तबाह करने , और मोहल्लों , गलियों में छूट पुट चोरी अपराध बचाने के लिए ,,,,,जो लोग हार्डकोर क्रिमिनल है , जो गवाहों को होस्टाइल करवाकर , ज़मानत ले लेते हैं , या फिर बरी हो जाते है , उन्हें सज़ा दिलवाने के लिए , अपंने नियंत्रण में विधिक पैरोकारों के साथ मिलकर उन्हें अंतिम समय तक हर हाल में सज़ा दिलवाने की जो उनकी कार्ययोजना थी , उसे वोह चाहकर भी पूरा नहीं कर पा रही हैं , क्योंकि सियासी दबाव तो है ही , होता भी है , लेकिन वोह इसे मैनेज कर लेती है , ,बस , कभी वी वी आई पी ड्यूटी , कभी मीटिंगे , कभी मेले , कभी ठेले , कभी बढ़ी दुर्घटनाएं , कभी बढ़ी घटनाएं ,, चुनाव वगेरा इन्हीं की क़ानून व्यवस्था ड्यूटियों में वोह , उनकी पुलिस टीम उलझ कर रह गई , और कोटा को नशा मुक्त करने, , आत्महत्या मुक्त करने ,, अपराध मुक्त करने , स्मैकचियों की आपराधिक घटनाओं से कोटा को मुक्त करने का उनका सपना , पूरी कोशिशों के बावजूद भी आधा अधूरा रहा , हालात यह हुए के पुलिस जवान नशे की तस्करी में पकड़े गए, शराब के नशे में महिला डॉक्टर से अभद्रता करते पकड़े गए, लेकिन हार्डकोर अपराधियों , आर्थिक अपराधियों , गवाह मांडोली ,, गवाह खरीद फरोख्त , के ज़रिये , मजिस्ट्रेट के समक्ष बयानों के बाद भी गवाह मुकर कर , होस्टाइल होकर, घटना से इंकार कर अपराधियों को बरी करवा रहे हैं , ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान देकर मुकरने वालों के खिलाफ भी वोह क़ानूनी कार्यवाही कर होस्टाइल होने वाले गवाहों में खौफ पैदा करना चाहती थी ,, होस्टाइल गवाह के बावजूद भी बेहतर अनुसंधान ,, बेहतर अनुसंधान के बाद , कोर्ट में बेहतर तरीके से पैरवी ,,बेहतर न्यायिक दृष्टांतों के साथ बहस करवाकर वोह हार्डकोर अपराधियों को सज़ा दिलवाना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होंने कोशिशें भी कीं, लेकिन उनके ओहदे में बुलंदी , प्रमोशन तो हुआ , हार्डकोर अपराधियों को हर हाल में सज़ा दिलवाकर उन्हें सबक़ दिलाने , नशामुक्त कोटा , अपराध मुक्त कोटा का सपना, वोह पूरा करने की हर सम्भव कोशिशों के बावजूद भी सियासी दखल अंदाज़ी कहो , या अन्य कार्यों में व्यस्तता कहो , लेकिन बहुत कुछ करने के बावजूद भी बहुत कुछ नहीं कर पायीं ,, कोटा की जनता अभी भी उनसे अपेक्षा करती है , उनकी पदोन्नति के लिए दुआएं करती है , लेकिन कहते हैं ना लड़की हूँ, कर सकती हूँ , तो वोह डी आई जी पद पर जाने के पहले ,, एक बार फिर लेडी सिंघम बनकर अगर अपने सपनों को साकार करने की क्रियान्विति के प्रयासों के तहत , नशामुक्त कोटा ,, अपराध मुक्त कोटा, सियासी दखलंदाज़ी मुक्त ,कोटा ,, हार्डकोर अपराधियों को हर हाल में अदालत तक बेहतर पैरवी करवाकर सज़ा दिलवाने का जो उनका अभियान है, करें तो सही , कोटा की जनता उनके इन कार्यों में मददगार बनने के लिए पलक पावणे बिछा कर खडी है ,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339 

फिर वही ख़ुदा तो तुम्हारा सच्चा रब है फिर हक़ बात के बाद गुमराही के सिवा और क्या है फिर तुम कहाँ फिरे चले जा रहे हो

 ऐ रसूल तुम उने ज़रा पूछो तो कि तुम्हें आसमान व ज़मीन से कौन रोज़ी देता है या (तुम्हारे) कान और (तुम्हारी) आँखों का कौन मालिक है और कौन शख़्स मुर्दे से जि़न्दा को निकालता है और जि़न्दा से मुर्दे को निकालता है और हर अम्र (काम) का बन्दोबस्त कौन करता है तो फौरन बोल उठेंगे कि ख़ुदा (ऐ रसूल) तुम कहो तो क्या तुम इस पर भी (उससे) नहीं डरते हो (31)
फिर वही ख़ुदा तो तुम्हारा सच्चा रब है फिर हक़ बात के बाद गुमराही के सिवा और क्या है फिर तुम कहाँ फिरे चले जा रहे हो (32)

ये तुम्हारे परवरदिगार की बात बदचलन लोगों पर साबित होकर रही कि ये लोग हरगिज़ इमान न लाएँगें (33)
(ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि तुम ने जिन लोगों को (ख़ुदा का) शररीक बनाया है कोई भी ऐसा है जो मख़लूकात को पहली बार पैदा करे फिर उन को (मरने के बाद) दोबारा जि़न्दा करे (तो क्या जवाब देगें) तुम्ही कहो कि ख़ुदा ही पहले भी पैदा करता है फिर वही दोबारा जि़न्दा करता है तो किधर तुम उल्टे जा रहे हो (34)
(ऐ रसूल उनसे) कहो तो कि तुम्हारे (बनाए हुए) शरीकों में से कोई ऐसा भी है जो तुम्हें (दीन) हक़ की राह दिखा सके तुम ही कह दो कि (ख़ुदा) दीन की राह दिखाता है तो जो तुम्हे दीने हक़ की राह दिखाता है क्या वह ज़्यादा हक़दार है कि उसके हुक्म की पैरवी की जाए या वह शख़्स जो (दूसरे) की हिदायत तो दर किनार खुद ही जब तक दूसरा उसको राह न दिखाए राह नही देख पाता तो तुम लोगों को क्या हो गया है (35)
तुम कैसे हुक्म लगाते हो और उनमें के अक्सर तो बस अपने गुमान पर चलते हैं (हालाकि) गुमान यक़ीन के मुक़ाबले में हरगिज़ कुछ भी काम नहीं आ सकता बेषक वह लोग जो कुछ (भी) कर रहे हैं खुदा उसे खूब जानता है (36)
और ये कुरान ऐसा नहीं कि खुदा के सिवा कोई और अपनी तरफ से झूठ मूठ बना डाले बल्कि (ये तो) जो (किताबें) पहले की उसके सामने मौजूद हैं उसकी तसदीक़ और (उन) किताबों की तफ़सील है उसमें कुछ भी शक नहीं कि ये सारे जहाँन के परवरदिगार की तरफ से है (37)
क्या ये लोग कहते हैं कि इसको रसूल ने खुद झूठ मूठ बना लिया है (ऐ रसूल) तुम कहो कि (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (भला) एक ही सूरा उसके बराबर का बना लाओ और ख़ुदा के सिवा जिसको तुम्हें (मदद के वास्ते) बुलाते बन पड़े बुला लो (38)
(ये लोग लाते तो क्या) बल्कि (उलटे) जिसके जानने पर उनका हाथ न पहुँचा हो लगे उसको झुठलाने हालाकि अभी तक उनके जे़हन में उसके मायने नहीं आए इसी तरह उन लोगों ने भी झुठलाया था जो उनसे पहले थे-तब ज़रा ग़ौर तो करो कि (उन) ज़ालिमों का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ (39)
और उनमें से बाज़ तो ऐसे है कि इस कु़रान पर आइन्दा ईमान लाएगें और बाज़ ऐसे हैं जो ईमान लाएगें ही नहीं (40)

19 अक्टूबर 2026

पत्नी,बेटे की सहमति पर संपन्न हुआ नेत्रदान

  पत्नी,बेटे की सहमति पर संपन्न हुआ नेत्रदान

रविवार को, बृजबाला कॉलोनी देवी अब रोड रायपुर निवासी श्रीमती राकेश सक्सेना के पति भगवान स्वरूप सक्सेना का आकस्मिक निधन हुआ । अचानक हुई इस घटना से एक परिवार में काफी शोक आ गया ।

स्वयं भगवान भी, हमेशा से दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर रहे । निर्बल असाहयों की मदद करना उनकी दैनिक प्रवृत्ति में था ।

बेटा मोहित काफी समय से शाइन इंडिया के नेत्रदान अभियान से परिचित था, वह जानता था कि,पिता के शोक को, नेत्रदान के पुनीत कार्य से ही कम किया जा सकता था । इसलिए उन्होंने तुरंत शाइन इंडिया की ज्योति मित्र राकेश विजय को नेत्रदान के लिए संपर्क किया,इसके उपरांत परिवार की सहमति से निवास स्थान पर ही नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई

और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज़्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिशते) लिखते जाते हैं

 और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज़्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिशते) लिखते जाते हैं (21)
वह वही ख़़ुदा है जो तुम्हें खुश्की और दरिया में सैर कराता फिरता है यहाँ तक कि जब (कभी) तुम कश्तियों पर सवार होते हो और वह उन लोगों को बाद मुवाफिक़ (हवा के धारे) की मदद से लेकर चली और लोग उस (की रफ्तार) से ख़ुश हुए (यकायक) कश्ती पर हवा का एक झोंका आ पड़ा और (आना था कि) हर तरफ से उस पर लहरें (बढ़ी चली) आ रही हैं और उन लोगों ने समझ लिया कि अब घिर गए (और जान न बचेगी) तब अपने अक़ीदे को उसके वास्ते निरा खरा करके खुदा से दुआएँ मागँने लगते हैं कि (ख़ुदाया) अगर तूने इस (मुसीबत) से हमें नजात दी तो हम ज़रुर बड़े शुक्र गुज़ार होंगें (22)
फिर जब ख़ुदा ने उन्हें नजात दी तो वह लोग ज़मीन पर (कदम रखते ही) फौरन नाहक़ सरकशी करने लगते हैं (ऐ लोगों तुम्हारी सरकशी का वबाल) तो तुम्हारी ही जान पर है - (ये भी) दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी का फायदा है फिर आखि़र हमारी (ही) तरफ तुमको लौटकर आना है तो (उस वक़्त) हम तुमको जो कुछ (दुनिया में) करते थे बता देगे (23)
दुनियावी जि़दगी की मसल तो बस पानी की सी है कि हमने उसको आसमान से बरसाया फिर ज़मीन के साग पात जिसको लोग और चैपाए खा जाते हैं (उसके साथ मिल जुलकर निकले यहाँ तक कि जब ज़मीन ने (फसल की चीज़ों से) अपना बनाओ सिंगार कर लिया और (हर तरह) आरास्ता हो गई और खेत वालों ने समझ लिया कि अब वह उस पर यक़ीनन क़ाबू पा गए (जब चाहेंगे काट लेगे) यकायक हमारा हुक्म व अज़ाब रात या दिन को आ पहुँचा तो हमने उस खेत को ऐसा साफ कटा हुआ बना दिया कि गोया कुल उसमें कुछ था ही नहीं जो लोग ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके वास्ते हम आयतों को यूँ तफसीलदार बयान करते है (24)
और ख़ुदा तो आराम के घर (बेहाशत की तरफ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत करता है (25)
जिन लोगों ने दुनिया में भलाई की उनके लिए (आखि़रत में भी) भलाई है (बल्कि) और कुछ बढ़कर और न (गुनेहगारों की तरह) उनके चेहरों पर कालिक लगी हुयी होगी और न (उन्हें जि़ल्लत होगी यही लोग जन्नती हैं कि उसमें हमेशा रहा सहा करेंगे (26)
और जिन लोगों ने बुरे काम किए हैं तो गुनाह की सज़ा उसके बराबर है और उन पर रुसवाई छाई होगी ख़ुदा (के अज़ाब) से उनका कोई बचाने वाला न होगा (उनके मुह ऐसे काले होंगे) गोया उनके चेहरे यबों यज़ूर (अंधेरी रात) के टुकड़े से ढक दिए गए हैं यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये उसमें हमेषा रहेंगे (27)
(ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को इकट्ठा करेगें-फिर मुशरेकीन से कहेगें कि तुम और तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीक ज़रा अपनी जगह ठहरो फिर हम वाहम उनमें फूट डाल देगें और उनके शररीक उनसे कहेंगे कि तुम तो हमारी परसतिश करते न थे (28)
तो (अब) हमारे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है हम को तुम्हारी परसतिश की ख़बर ही न थी (29)
(ग़रज़) वहाँ हर शख़्स जो कुछ जिसने पहले (दुनिया में) किया है जाँच लेगा और वह सब के सब अपने सच्चे मालिक ख़ुदा की बारगाह में लौटकर लाए जाएँगें और (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाजि़या (झूठी बातें) करते थे सब उनके पास से चल चंपत हो जाएगें (30)

18 अक्टूबर 2026

और तुमसे पहली उम्मत वालों को जब उन्होंने शरारत की तो हम ने उन्हें ज़रुर हलाक कर डाला हालाकि उनके (वक़्त के) रसूल वाजेए व रौशन मोजि़ज़ात लेकर आ चुके थे और वह लोग ईमान (न लाना था) न लाए हम गुनेहगार लोगों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं

 और जिस तरह लोग अपनी भलाई के लिए जल्दी कर बैठे हैं उसी तरह अगर ख़ुदा उनकी शरारतों की सज़ा में बुराई में जल्दी कर बैठता है तो उनकी मौत उनके पास कब की आ चुकी होती मगर हम तो उन लोगों को जिन्हें (मरने के बाद) हमारी हुज़ूरी का खटका नहीं छोड़ देते हैं कि वह अपनी सरकशी में आप सरगि़रदा रहें (11)
और इन्सान को जब कोई नुकसान छू भी गया तो अपने पहलू पर (लेटा हो) या बैठा हो या ख़ड़ा (गरज़ हर हालत में) हम को पुकारता है फिर जब हम उससे उसकी तकलीफ को दूर कर देते है तो ऐसा खिसक जाता है जैसे उसने तकलीफ के (दफा करने के) लिए जो उसको पहुँचती थी हमको पुकारा ही न था जो लोग ज़्यादती करते हैं उनकी कारस्तानियाँ यूँ ही उन्हें अच्छी कर दिखाई गई हैं (12)
और तुमसे पहली उम्मत वालों को जब उन्होंने शरारत की तो हम ने उन्हें ज़रुर हलाक कर डाला हालाकि उनके (वक़्त के) रसूल वाजेए व रौशन मोजि़ज़ात लेकर आ चुके थे और वह लोग ईमान (न लाना था) न लाए हम गुनेहगार लोगों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं (13)
फिर हमने उनके बाद तुमको ज़मीन में (उनका) जानषीन बनाया ताकि हम (भी) देखें कि तुम किस तरह काम करते हो (14)
और जब उन लोगों के सामने हमारी रौशन आयते पढ़ीं जाती हैं तो जिन लोगों को (मरने के बाद) हमारी हुजूरी का खटका नहीं है वह कहते है कि हमारे सामने इसके अलावा कोई दूसरा (कुरान लाओ या उसका रद्दो बदल कर डालो (ऐ रसूल तुम कह दो कि मुझे ये एख़्तेयार नहीं कि मै उसे अपने जी से बदल डालूँ मै तो बस उसी का पाबन्द हूँ जो मेरी तरफ वही की गई है मै तो अगर अपने परवरदिगार की नाफरमानी करु तो बड़े (कठिन) दिन के अज़ाब से डरता हूँ (15)
(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा चाहता तो मै न तुम्हारे सामने इसको पढ़ता और न वह तुम्हें इससे आगाह करता क्योंकि मै तो (आखि़र) तुमने इससे पहले मुद्दतों रह चुका हूँ (और कभी ‘वही’ का नाम भी न लिया) (16)
तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते तो जो शख़्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाधे या उसकी आयतो को झुठलाए उससे बढ़ कर और ज़ालिम कौन होगा इसमें शक नहीं कि (ऐसे) गुनाहगार कामयाब नहीं हुआ करते (17)
या लोग ख़ुदा को छोड़ कर ऐसी चीज़ की परसतिश करते है जो न उनको नुकसान ही पहुँचा सकती है न नफा और कहते हैं कि ख़ुदा के यहाँ यही लोग हमारे सिफारिषी होगे (ऐ रसूल) तुम (इनसे) कहो तो क्या तुम ख़़ुदा को ऐसी चीज़ की ख़बर देते हो जिसको वह न तो आसमानों में (कहीं) पाता है और न ज़मीन में ये लोग जिस चीज़ को उसका शरीक बनाते है (18)
उससे वह पाक साफ और बरतर है और सब लोग तो (पहले) एक ही उम्मत थे और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से एक बात (क़यामत का वायदा) पहले न हो चुकी होती जिसमें ये लोग एख़्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला उनके दरम्यिान (कब न कब) कर दिया गया होता (19)
और कहते हैं कि उस पैग़म्बर पर कोई मोजिज़ा (हमारी ख़्वाहिष के मुवाफिक़) क्यों नहीं नाजि़ल किया गया तो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ग़ैब (दानी) तो सिर्फ ख़ुदा के वास्ते ख़ास है तो तुम भी इन्तज़ार करो और तुम्हारे साथ मै (भी) यक़ीनन इन्तज़ार करने वालों में हूँ (20)

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