आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

10 सितंबर 2026

नेत्रदान संकल्पित परिवार में,शोक हुआ तो परिजनों ने कराया नेत्रदान

  नेत्रदान संकल्पित परिवार में,शोक हुआ तो परिजनों ने कराया नेत्रदान

शाइन इंडिया फाउंडेशन के नेत्रदान जागरुकता अभियान से अब संपूर्ण हाडोती संभाग में नेत्रदान के प्रति जागरूकता काफी बड़ी चुकी है। समाचार पत्रों में लगातार नेत्रदान संबंधित जानकारी के आने से,अब नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियां दूर हो चुकी हैं ।

कल शाम, विकास नगर,बूंदी निवासी रामस्वरूप मालव की धर्मपत्नी जगन्नाथी बाई का हृदयाघात से आकस्मिक निधन हो गया । बेटे प्रेमचंद,चिरंजीलाल,निर्मल,अशोक सहित बेटी प्रकाश बाई,कमलेश,शांति बाई सभी शाइन इंडिया फाउंडेशन के साथ नेत्रदान के लिए संकल्प परिवार हैं।

 पुत्र निर्मल जो की काफी समय से सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यों में सक्रिय हैं,और उनकी पत्नी नूपुर भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष के रूप में, न सिर्फ समाज में,बल्कि बूंदी क्षेत्र में महिलाओं के लिए काफी समय से कार्य कर रहे हैं। ने,

निर्मल ने माँ के नेत्रदान के लिए सभी से सहमति लेने के बाद, तुरंत शाइन इंडिया के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा को देर रात संपर्क किया, इसके बाद कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन एवं ईबीएसआर - बीबीजे चैप्टर के कोआर्डिनेटर डॉ कुलवंत गौड़ कोटा से रवाना हुए, और परिवार के सभी सदस्यों के बीच नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया ।

कोटा नगर निगम की सो वार्डों की पार्षद सीटों के निर्वाचन के लिए शुक्रवार 11 सितम्बर को चुनाव होना है

 

कोटा नगर निगम की सो वार्डों की पार्षद सीटों के निर्वाचन के लिए कल शुक्रवार 11 सितम्बर को चुनाव होना है , कोटा में कांग्रेस , भाजपा , निर्दलीयों ने इन चुनावों में जीत की कोशिशों में अंतिम चरण में पूरी जान झोंक दी है , पुलिस और प्रशासन ने भी इन चुनावों को लेकर चाक चौबंद क़ानून व्यवस्था की है ,, ,कोटा सांसद ओम बिरला के भाई साहब छोटा भाई साहब ने अलग अलग वार्डों में स्टार प्रचारक वायदों का ज़मानंती बनकर खूब प्रचार किया , खासकर छोटा भाईसाहब हरी कृष्ण बिरला ने भाजपा के मुस्लिम प्रत्याक्षियों के पक्ष समर्थन में भी उनकी बस्तियों में जाकर के ई डी एल ,, और समस्याओं के मामले में वायदे किये , जबकि कांग्रेस की तरफ से कई वार्डों में पूर्व मंत्री शांति कुमार धारीवाल , प्रदेश सचिव अमित धारीवाल , ने भी खुलकर प्रचार किया , इधर जिला कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम , अलग अलग वार्डों में आक्रामक प्रचार करती दिखी , जबकि कुछ वार्डों में ,वरिष्ठ कोंग्रेसी विद्या शंकर गौतम , , कई वार्डों में ऑन डिमांड कोटा लोकसभा कांग्रेस प्रत्याक्षी प्रह्लाद गुंजल का भी धुंआधार प्रचार रहा ,, इधर निर्दलीय के पक्ष समर्थन में भी कई वरिष्ठ लोग प्रचार करते दिखे , जबकि एक वार्ड में पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुडा भी प्रचारक रहे , सभी पार्टियों ने अपनी अपनी जीत के दावे किये है , भीतर घातियों का टारगेट महापौर की उम्मीदवारों के खिलाफ आंतरिक खूब रहा है , खेर चुनाव है , षहान्तिपूर्ण हों , जो जीतेगा वोह सिकंदर कहलायेगा , लेकिन यह चुनाव , चुनाव प्रचार कई अनुभवों का लाभ दे गया ,, अफवाहें , झूंठ , फ़रेब ,, बहुत कुछ चला , ,कुछ वार्डों में तो प्रत्याक्षी को सभी लोगों से क़र्ज़ा लेकर चुकता नहीं करने की शिकायतें आई , यहां तक की एक चाय वाले का क़र्ज़ उतारने के लिए तो पच्चीस रूपये प्रतिदिन क़िस्त के हिसाब से चुकता करने तक की बाद हवा में चलती रही , जबकि वरिष्ठ गॉडफादर नेता ने बकाया चुकता कर क़र्ज़दारों की ज़ुबान बंद की यह भी खूब चर्चा रही , कई जगह पर पार्टी से टिकिट मिलने पर भी , उन्ही के नेताओं के नज़दीकियों के निर्दलीय खड़े रहने पर खूब सवाल उठे , खूब अफवाहें उड़ती रहीं , जबकि समाजों के विभाजन , प्रत्याक्षियों के समाजों के वोटर्स को साधने के लिए भी अफवाहों का बाज़ार रहा , खास मुद्दों में के ई डी एल ,, विधवा पेंशन बंद होना , नाली पटान , पेयजल आपूर्ति ,,सहित मोहल्लों में नशे चुप्पी , के भी मुद्दे रहे ,,, अधिकतम वार्डों में कई लोग खुलकर किसी भी पार्टी प्रत्याक्षी के साथ नज़र नहीं आये , बस कहते दिखे के हम अंदर से तुम्हारे साथ हैं , कई लोग तो यहां तक कहते दिखे की हम बैठेंगे तो उधर , रैली में भी उनकी जाएंगे , लेकिन वोट तुम्हे देंगे और दिलवाएंगे हम पर शक मत करना ,, कुछ वार्डों में प्रत्याक्षी के कंजूसी पर सवाल उठे , तो कुछ जगह पर अनावश्यक खर्च , रूपये बांटने के आरोप भी लगे , इन्ही आरोप प्रत्यारोपों के बीच कल शुक्रवार को चुनाव होने जा रहे हैं , चुनाव ईमानदारी से हों , शांतिपूर्ण हों , अधिकतम मतदान हो , और मतगणना भी शांतिपूर्ण होकर , जो भी जीते वोह सिकंदर कहलाये ,,,,,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
See less

जिन लोगों ने अपने दीन को खेल तमाशा बना लिया था और दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी ने उनको फरेब दिया था तो हम भी आज (क़यामत में) उन्हें (क़सदन) भूल जाएगें

 

जिन लोगों ने अपने दीन को खेल तमाशा बना लिया था और दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी ने उनको फरेब दिया था तो हम भी आज (क़यामत में) उन्हें (क़सदन) भूल जाएगें(51)
जिस तरह यह लोग (हमारी) आज की हुज़ूरी को भूलें बैठे थे और हमारी आयतों से इन्कार करते थे हालांकि हमने उनके पास (रसूल की मारफत किताब भी भेज दी है) (52)
जिसे हर तरह समझ बूझ के तफसीलदार बयान कर दिया है (और वह) ईमानदार लोगों के लिए हिदायत और रहमत है क्या ये लोग बस सिर्फ अन्जाम (क़यामत ही) के मुन्तजि़र है (हालांकि) जिस दिन उसके अन्जाम का (वक़्त) आ जाएगा तो जो लोग उसके पहले भूले बैठे थे (बेसाख़्ता) बोल उठेगें कि बेशक हमारे परवरदिगार के सब रसूल हक़ लेकर आये थे तो क्या उस वक़्त हमारी भी सिफारिश करने वाले हैं जो हमारी सिफारिष करें या हम फिर (दुनिया में) लौटाएं जाएं तो जो जो काम हम करते थे उसको छोड़कर दूसरें काम करें (53)
बेशक उन लोगों ने अपना सख़्त घाटा किया और जो इफ़तेरा परदाजि़या किया करते थे वह सब गायब़ (ग़ल्ला) हो गयीं बेषक तुम्हारा परवरदिगार ख़ुदा ही है जिसके (सिर्फ) 6 दिनों में आसमान और ज़मीन को पैदा किया फिर अर्ष के बनाने पर आमादा हुआ वही रात को दिन का लिबास पहनाता है तो (गोया) रात दिन को पीछे पीछे तेज़ी से ढूंढती फिरती है और उसी ने आफ़ताब और माहताब और सितारों को पैदा किया कि ये सब के सब उसी के हुक्म के ताबेदार हैं (54)
देखो हुकूमत और पैदा करना बस ख़ास उसी के लिए है वह ख़ुदा जो सारे जहाँन का परवरदिगार बरक़त वाला है (55)
(लोगों) अपने परवरदिगार से गिड़गिड़ाकर और चुपके - चुपके दुआ करो, वह हद से तजाविज़ करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता और ज़मीन में असलाह के बाद फसाद न करते फिरो और (अज़ाब) के ख़ौफ से और (रहमत) की आस लगा के ख़ुदा से दुआ मांगो (56)
(क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब है और वही तो (वह) ख़ुदा है जो अपनी रहमत (अब्र) से पहले खुषखबरी देने वाली हवाओ को भेजता है यहाँ तक कि जब हवाएं (पानी से भरे) बोझल बादलों के ले उड़े तो हम उनको किसी षहर की की तरफ (जो पानी का नायाबी (कमी) से गोया) मर चुका था हॅका दिया फिर हमने उससे पानी बरसाया, फिर हमने उससे हर तरह के फल ज़मीन से निकाले (57)
हम यूही (क़यामत के दिन ज़मीन से) मुर्दों को निकालेंगें ताकि तुम लोग नसीहत व इबरत हासिल करो और उम्दा ज़मीन उसके परवरदिगार के हुक्म से उस सब्ज़ा (अच्छा ही) है और जो ज़मीन बड़ी है उसकी पैदावार ख़राब ही होती है (58)
हम यू अपनी आयतों को उलेटफेर कर शुक्रग़ुजार लोगों के वास्ते बयान करते हैं बेशक हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (रसूल बनाकर) भेजा तो उन्होनें (लोगों से ) कहाकि ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की ही इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है और मैं तुम्हारी निस्बत (क़यामत जैसे) बड़े ख़ौफनाक दिन के अज़ाब से डरता हूँ (59)

तो उनकी क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा हम तो यक़ीनन देखते हैं कि तुम खुल्लम खुल्ला गुमराही में (पड़े) हो (60)

09 सितंबर 2026

और उनके ऊपर से (आग ही का) ओढ़ना भी और हम ज़ालिमों को ऐसी ही सज़ा देते हैं और जिन लोगों ने ईमान कुबुल किया

 और उनके ऊपर से (आग ही का) ओढ़ना भी और हम ज़ालिमों को ऐसी ही सज़ा देते हैं और जिन लोगों ने ईमान कुबुल किया (41)
और अच्छे अच्छे काम किये और हम तो किसी शख़्स को उसकी ताकत से ज़्यादा तकलीफ देते ही नहीं यहीं लोग जन्नती हैं कि वह हमेशा जन्नत ही में रहा (सहा) करेगें (42)
और उन लोगों के दिल में जो कुछ (बुग़ज़ व कीना) होगा वह सब हम निकाल (बाहर कर) देगे उनके महलों के नीचे नहरें जारी होगीं और कहते होगें शुक्र है उस ख़़ुदा का जिसने हमें इस (मंजि़ले मक़सूद) तक पहुंचाया और अगर ख़़ुदा हमें यहाँ न पहुंचाता तो हम किसी तरह यहाँ न पहुंच सकते बेशक हमारे परवरदिगार के पैग़म्बर दीने हक़ लेकर आये थे और उन लोगों से पुकार कर कह दिया जाएगा कि वह बेहिशत हैं जिसके तुम अपनी कारग़ुज़ारियों की जज़ा में वारिस व मालिक बनाए गये हों (43)
और जन्नती लोग जहन्नुमी वालों से पुकार कर कहेगें हमने तो बेशक जो हमारे परवरदिगार ने हमसे वायदा किया था ठीक ठीक पा लिया तो क्या तुमने भी जो तुमसे तम्हारे परवरदिगार ने वायदा किया था ठीक पाया (या नहीं) अहले जहन्नुम कहेगें हाँ (पाया) एक मुनादी उनके दरमियान निदा करेगा कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की लानत है (44)
जो ख़ुदा की राह से लोगों को रोकते थे और उसमें (ख़्वामख़्वाह) कज़ी (टेढ़ा पन) करना चाहते थे और वह रोज़े आख़ेरत से इन्कार करते थे (45)
और बेहशत व दोज़ख के दरमियान एक हद फ़ासिल है और कुछ लोग आराफ़ पर होगें जो हर शख़्स को (बेहिष्ती हो या जहन्नुमी) उनकी पेषानी से पहचान लेगें और वह जन्नत वालों को आवाज़ देगें कि तुम पर सलाम हो या (आराफ़ वाले) लोग अभी दाखि़ले जन्नत नहीं हुए हैं मगर वह तमन्ना ज़रूर रखते हैं (46)

और जब उनकी निगाहें पलटकर जहन्नुमी लोगों की तरफ जा पड़ेगीं (तो उनकी ख़राब हालत देखकर ख़ुदा से अजऱ् करेगें) ऐ हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना (47)
और आराफ वाले कुछ (जहन्नुमी) लोगों को जिन्हें उनका चेहरा देखकर पहचान लेगें आवाज़ देगें और और कहेगें अब न तो तुम्हारा जत्था ही तुम्हारे काम आया और न तुम्हारी शेखी बाज़ी ही (सूद मन्द हुयी) (48)
जो तुम दुनिया में किया करते थे यही लोग वह हैं जिनकी निस्बत तुम कसमें खाया करते थे कि उन पर ख़ुदा (अपनी) रहमत न करेगा (देखो आज वही लोग हैं जिनसे कहा गया कि बेतकल्लुफ) बेहशत में चलो जाओ न तुम पर कोई खौफ है और न तुम किसी तरह आज़र्दा ख़ातिर परेशानी होगी (49)
और दोज़ख वाले अहले बेहिशत को (लजाजत से) आवाज़ देगें कि हम पर थोड़ा सा पानी ही उंडेल दो या जो (नेअमतों) खुदा ने तुम्हें दी है उसमें से कुछ (दे डालो दो तो अहले बेहिष्त जवाब में) कहेंगें कि ख़ुदा ने तो जन्नत का खाना पानी काफिरों पर कतई हराम कर दिया है (50)

ऐ औलाद आदम हर नमाज़ के वक़्त बन सवर के निखर जाया करो और खाओ और पियो और फिज़ूल ख़र्ची मत करो (क्योंकि) ख़ुदा फिज़ूल ख़र्च करने वालों को दोस्त नहीं रखता

 ऐ औलाद आदम हर नमाज़ के वक़्त बन सवर के निखर जाया करो और खाओ और पियो और फिज़ूल ख़र्ची मत करो (क्योंकि) ख़ुदा फिज़ूल ख़र्च करने वालों को दोस्त नहीं रखता (31)
(ऐ रसूल से) पूछो तो कि जो ज़ीनत (के साज़ों सामान) और खाने की साफ सुथरी चीज़ें ख़ुदा ने अपने बन्दो के वास्ते पैदा की हैं किसने हराम कर दी तुम ख़ुद कह दो कि सब पाक़ीज़ा चीज़े क़यामत के दिन उन लोगों के लिए ख़ास हैं जो दुनिया की (ज़रा सी) जि़न्दगी में ईमान लाते थे हम यूँ अपनी आयतें समझदार लोगों के वास्ते तफसीलदार बयान करतें हैं (32)
(ऐ रसूल) तुम साफ कह दो कि हमारे परवरदिगार ने तो तमाम बदकारियों को ख़्वाह (चाहे) ज़ाहिरी हो या बातिनी और गुनाह और नाहक़ ज़्यादती करने को हराम किया है और इस बात को कि तुम किसी को ख़ुदा का शरीक बनाओ जिनकी उनसे कोई दलील न ही नाजि़ल फरमाई और ये भी कि बे समझे बूझे ख़़ुदा पर बोहतान बाधों (33)
और हर गिरोह (के न पैदा होने) का एक ख़ास वक़्त है फिर जब उनका वक्त आ पहुंचता है तो न एक घड़ी पीछे रह सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं (34)
ऐ औलादे आदम जब तुम में के (हमारे) पैग़म्बर तुम्हारे पास आए और तुमसे हमारे एहकाम बयान करे तो (उनकी इताअत करना क्योंकि जो शख़्स परहेज़गारी और नेक काम करेगा तो ऐसे लोगों पर न तो (क़यामत में) कोई ख़ौफ़ होगा और न वह आजऱ्दा ख़ातिर (परेशान) होंगें (35)
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उनसे सरताबी कर बैठे वह लोग जहन्नुमी हैं कि वह उसमें हमेशा रहेगें (36)
तो जो शख़्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाधे या उसकी आयतों को झुठलाए उससे बढ़कर ज़ालिम और कौन होगा फिर तो वह लोग हैं जिन्हें उनकी (तक़दीर) का लिखा हिस्सा (रिज़क) वग़ैरह मिलता रहेगा यहाँ तक कि जब हमारे भेजे हुए (फरिष्ते) उनके पास आकर उनकी रूह कब्ज़ करेगें तो (उनसे) पूछेगें कि जिन्हें तुम ख़ुदा को छोड़कर पुकारा करते थे अब वह (कहाँ हैं तो वह कुफ्फार) जवाब देगें कि वह सब तो हमें छोड़ कर चल चंपत हुए और अपने खिलाफ आप गवाही देगें कि वह बेशक काफि़र थे (37)
(तब ख़ुदा उनसे) फरमाएगा कि जो लोग जिन व इन्स के तुम से पहले बसे हैं उन्हीं में मिलजुल कर तुम भी जहन्नुम वासिल हो जाओ (और ) एहले जहन्नुम का ये हाल होगा कि जब उसमें एक गिरोह दाखि़ल होगा तो अपने साथी दूसरे गिरोह पर लानत करेगा यहाँ तक कि जब सब के सब पहुँच जाएगें तो उनमें की पिछली जमात अपने से पहली जमाअत के वास्ते बदद्आ करेगी कि परवरदिगार उन्हीं लोगों ने हमें गुमराह किया था तो उन पर जहन्नुम का दोगुना अज़ाब फरमा (इस पर) ख़ुदा फरमाएगा कि हर एक के वास्ते दो गुना अज़ाब है लेकिन (तुम पर) तुफ़ है तुम जानते नहीं (38)
और उनमें से पहली जमाअत पिछली जमाअत की तरफ मुख़ातिब होकर कहेगी कि अब तो तुमको हमपर कोई फज़ीलत न रही पस (हमारी तरह) तुम भी अपने करतूत की बदौलत अज़ाब (के मज़े) चखो बेषक जिन लोगों ने हमारे आयात को झुठलाया (39)
और उनसे सरताबी की न उनके लिए आसमान के दरवाज़े खोले जाएंगें और वह बेहश्त्त ही में दाखिल होने पाएगें यहाँ तक कि ऊँट सूई के नाके में होकर निकल जाए (यानि जिस तरह ये मुहाल है) उसी तरह उनका बेहष्त में दाखिल होना मुहाल है और हम मुजरिमों को ऐसी ही सज़ा दिया करते हैं उनके लिए जहन्नुम (की आग) का बिछौना होगा (40)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...