आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

04 मार्च 2026

ईरान की यह तस्वीर मन को भीतर तक झकझोर देती है।

 

ईरान की यह तस्वीर मन को भीतर तक झकझोर देती है।
सफेद कफनों में लिपटी छोटी-छोटी बच्चियाँ, सिरहाने रखी उनकी मुस्कुराती तस्वीरें और बिलखते हुए माता-पिता — यह दृश्य केवल का नहीं, पूरी मानवता की असफलता का आईना है।
जो उम्र किताबों, खेल और सुनहरे सपनों की थी, वह नफरत, सत्ता की हिंसा और युद्ध की राजनीति की भेंट चढ़ गई। स्कूल जाने वाली मासूम बच्चियाँ किसी भी संघर्ष का हिस्सा नहीं थीं, फिर भी सबसे बड़ी कीमत उन्हें चुकानी पड़ी।
दुनिया में कहीं भी बच्चों पर हमला केवल एक देश का आंतरिक मामला नहीं होता — यह पूरी मानवता के खिलाफ अपराध है।
बच्चों का जीवन किसी भी राजनीतिक, धार्मिक या सैन्य संघर्ष से कहीं अधिक बड़ा और पवित्र होता है।
हम शायद केवल संवेदना जता सकते हैं, उनके परिवारों के दुःख में सहभागी होने की बात कह सकते हैं। पर सच यही है — मासूम बच्चों की लाशों पर खड़ी कोई भी व्यवस्था कभी न्यायपूर्ण नहीं हो सकती।
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दे और दुनिया को इतनी संवेदना दे कि भविष्य में किसी भी बच्चे का बचपन युद्ध की आग में न जले

डॉ. नेहा प्रधान सामर्थ्य राजस्थान गौरव सम्मान से सम्मानित

 

डॉ. नेहा प्रधान सामर्थ्य राजस्थान गौरव सम्मान से सम्मानित
के डी अब्बासी
कोटा,मार्च। झालावाड़ की प्रतिष्ठित संस्था सामर्थ्य सेवा संस्थान द्वारा शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सहायक आचार्य डॉ नेहा प्रधान को ‘‘राजस्थान गौरव अवार्ड 2026’’ से सम्मानित किया गया।
आज झालरापाटन के गीतांजलि होटल में आयोजित समारोह में सामर्थ्य ग्लोबल एक्सीलेंस अवार्ड के साथ ही नई श्रेणी के पुरस्कार सामर्थ्य राजस्थान गौरव सम्मान 2026 का प्रथम बार आयोजन किया गया। इस हेतु राजस्थान से विभिन्न श्रेणियों में आवेदन आमंत्रित किए गए। इस सम्मान के लिए राज्य की 45 प्रतिभाओं का चयन किया गया। आज आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि हिजहाइनेस महाराज राणा श्री चन्द्रजीत सिंह जी, जिला कलेक्टर झालावाड़ श्री अजय सिंह राठौड़, अति. वि.अतिथि आईपीएस श्री अमित कुमार ,उपवनसंरक्षक श्री सागर पंवार, और राज्य के विभिन्न गणमान्य नागरिक आमंत्रित थे।
सामर्थ्य सेवा संस्थान के संस्थापक डॉ. राम जी चंद्रवाल ने बताया कि यह संस्था दिव्यांगों के लिए कार्य करती है लेकिन इस वर्ष से राजस्थान के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सम्मानित किए जाने का कार्य आरम्भ किया गया है। इसी क्रम में डॉ. नेहा प्रधान को हाड़ौती के क्षेत्र में साहित्यिक लेखन कार्य कर इतिहास पटल पर लाने के प्रयासों के लिए चयनित किया गया है।

कोटा में आज होली खेलते बीएसटीसी स्टूडेंट की करंट लगने से मौत हो गई

 कोटा में आज होली खेलते बीएसटीसी स्टूडेंट की करंट लगने से मौत हो गई। वह अपने दोस्तों के साथ होली खेलने गया था। उनका वीडियो बनाते हुए पास में ही लगे ट्रांसफार्मर से उसका हाथ टच हो गया और करंट लग गया। दोस्त हॉस्पिटल लेकर गए लेकिन मौत हो गई। मामला कुन्हाड़ी थाना इलाके का है। स्टूडेंट धीरज मीणा (21) गोविंदपुर बावड़ी (बूंदी) का रहने वाला था। जयपुर में रहकर बीएसटीसी की पढ़ाई कर रहा था। चाचा इंद्रराज मीणा ने बताया कि भतीजा दो-तीन दिन पहले ही होली की छुट्टी पर जयपुर से घर लौटा था। आज सुबह साढ़े 9 बजे करीब अपने तीन-चार दोस्तों के साथ होली खेलने गांव गोविंदपुर बावड़ी से कोटा शहर के लैंडमार्क सिटी इलाके में गया था। ये हॉस्टल एरिया है और भतीजे के कई दोस्त यहां पर रहते है। स्टूडेंट्स ने व्यास रेजिडेंसी व आरके रेजिडेंसी के पास सड़क पर डीजे साउंड लगा रखा था। स्टूडेंट्स डांस कर रहे थे। भतीजा अपने दोस्तों का मोबाइल से वीडियो बना रहा था। उसी समय हॉस्टल के पास लगे ट्रांसफार्मर के केबल से उसका हाथ टच हो गया। करंट लगते ही वो जमीन पर गिर गया। उसके दोस्त धीरज को हॉस्पिटल लेकर गए, जहां उसकी मौत हो गई।

(ऐ रसूल) क्या तुम तक उन दावेदारों की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह हुजरे (इबादत) की दीवार फाँद पडे़

 (ऐ रसूल) क्या तुम तक उन दावेदारों की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह हुजरे (इबादत) की दीवार फाँद पडे़ (21)
(और) जब दाऊद के पास आ खड़े हुए तो वह उनसे डर गए उन लोगों ने कहा कि आप डरें नहीं (हम दोनों) एक मुक़द्दमें के फ़रीकै़न हैं कि हम में से एक ने दूसरे पर ज़्यादती की है तो आप हमारे दरम्यिान ठीक-ठीक फैसला कर दीजिए और इन्साफ से ने गुज़रिये और हमें सीधी राह दिखा दीजिए (22)
(मुराद ये हैं कि) ये (शख़्स) मेरा भाई है और उसके पास निनान्नवे दुम्बियाँ हैं और मेरे पास सिर्फ एक दुम्बी है उस पर भी ये मुझसे कहता है कि ये दुम्बी भी मुझी को दे दें और बातचीत में मुझ पर सख़्ती करता है (23)
दाऊद ने (बग़ैर इसके कि मुदा आलैह से कुछ पूछें) कह दिया कि ये जो तेरी दुम्बी माँग कर अपनी दुम्बियों में मिलाना चाहता है तो ये तुझ पर ज़ुल्म करता है और अक्सर शुरका (की) यकी़नन (ये हालत है कि) एक दूसरे पर जु़ल्म किया करते हैं मगर जिन लोगों ने (सच्चे दिल से) ईमान कु़बूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए (वह ऐसा नहीं करते) और ऐसे लोग बहुत ही कम हैं (ये सुनकर दोनों चल दिए) और अब दाऊद ने समझा कि हमने उनका इमितेहान लिया (और वह ना कामयाब रहे) फिर तो अपने परवरदिगार से बखि़्शश की दुआ माँगने लगे और सजदे में गिर पड़े और (मेरी) तरफ रूझू की (24) (सजदा)
तो हमने उनकी वह ग़लती माफ कर दी और इसमें शक नहीं कि हमारी बारगाह में उनका तक़र्रुब और अन्जाम अच्छा हुआ (25)
(हमने फरमाया) ऐ दाऊद हमने तुमको ज़मीन में (अपना) नाएब क़रार दिया तो तुम लोगों के दरम्यिान बिल्कुल ठीक फैसला किया करो और नफ़सियानी ख़्वाहिश की पैरवी न करो बसा ये पीरों तुम्हें ख़ुदा की राह से बहका देगी इसमें शक नहीं कि जो लोग खु़दा की राह में भटकते हैं उनकी बड़ी सख़्त सज़ा होगी क्योंकि उन लोगों ने हिसाब के दिन (क़यामत) को भुला दिया (26)
और हमने आसमान और ज़मीन और जो चीज़ें उन दोनों के दरम्यिान हैं बेकार नहीं पैदा किया ये उन लोगों का ख़्याल है जो काफि़र हो बैठे तो जो लोग दोज़ख़ के मुनकिर हैं उन पर अफ़सोस है (27)
क्या जिन लोगों ने ईमान कु़बूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए उनको हम (उन लोगों के बराबर) कर दें जो रूए ज़मीन में फसाद फैलाया करते हैं या हम परहेज़गारों को मिसल बदकारों के बना दें (28)
(ऐ रसूल) किताब (कु़रान) जो हमने तुम्हारे पास नाजि़ल की है (बड़ी) बरकत वाली है ताकि लोग इसकी आयतों में ग़ौर करें और ताकि अक़्ल वाले नसीहत हासिल करें (29)
और हमने दाऊद को सुलेमान (सा बेटा) अता किया (सुलेमान भी) क्या अच्छे बन्दे थे (30)

03 मार्च 2026

हट्टे कट्टे, चुस्त दुरुस्त, नोजवान, जो सिर्फ आदतन भिखारी हैं, पेशेवर भिखारी हैं, क्या उन पर ज़कात वाजिब है, अख्तर, ,सवाल बहुत महत्वपूर्ण और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील है। क़ुरआन व हदीस की रोशनी में इसका जवाब इस प्रकार है:

 

हट्टे कट्टे, चुस्त दुरुस्त, नोजवान, जो सिर्फ आदतन भिखारी हैं, पेशेवर भिखारी हैं, क्या उन पर ज़कात वाजिब है, अख्तर, ,सवाल बहुत महत्वपूर्ण और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील है। क़ुरआन व हदीस की रोशनी में इसका जवाब इस प्रकार है:
1️⃣ ज़कात किन लोगों पर खर्च की जा सकती है?
सबसे मूल आयत:
📖 क़ुरआन – सूरह अत-तौबा (9:60)
"इन्नमस्सदक़ातु लिल्फुक़राइ वल मसाकीनी…"
(ज़कात तो केवल फक़ीरों, मिस्कीनों, ज़कात वसूल करने वालों, दिल जोड़ने वालों, ग़ुलामों को आज़ाद कराने, कर्ज़दारों, अल्लाह की राह और मुसाफ़िर के लिए है…)
🔹 यहाँ "फ़क़ीर" और "मिस्कीन" वास्तविक ज़रूरतमंद लोग हैं।
2️⃣ जो तंदुरुस्त होते हुए भी भीख माँगते हैं
📖 क़ुरआन – सूरह अल-बक़रह (2:273)
"ख़ैरात उन गरीबों के लिए है जो अल्लाह की राह में रुक गए… नादान लोग उन्हें उनके आत्मसम्मान की वजह से अमीर समझते हैं… वे लोगों से लिपटकर नहीं माँगते।"
🔹 इस आयत से स्पष्ट है कि असली हक़दार वे हैं जो मजबूर हैं, न कि जो पेशेवर तरीके से मांगते हैं।
3️⃣ हदीस की रोशनी
📚 सहीह बुख़ारी
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"ऊपरी हाथ (देने वाला) नीचे हाथ (लेने वाले) से बेहतर है।"
📚 सहीह मुस्लिम
हदीस में है:
"जो व्यक्ति लोगों से माल मांगता है, जबकि उसे ज़रूरत नहीं, वह क़यामत के दिन अपने चेहरे पर मांस का टुकड़ा भी नहीं पाएगा।"
📚 सुनन अबू दाऊद
"मांगना केवल तीन व्यक्तियों के लिए जायज़ है:
बहुत अधिक कर्ज़दार
किसी आपदा से माल नष्ट हो गया हो
इतना निर्धन कि गुज़ारा संभव न हो"
4️⃣ निष्कर्ष (फ़िक़्ही हुक्म)
🔹 हट्टे-कट्टे, काम करने में सक्षम, लेकिन पेशेवर रूप से भीख मांगने वाले व्यक्ति पर ज़कात वाजिब नहीं है।
🔹 यदि वह व्यक्ति वास्तव में काम करने में सक्षम है और उसके पास कमाने के साधन मौजूद हैं, तो उसे ज़कात देना उचित नहीं।
🔹 हाँ, यदि बाहरी रूप से तंदुरुस्त दिखता हो लेकिन वास्तव में बेरोज़गारी, बीमारी, कर्ज़ या मजबूरी में हो, तो उसकी वास्तविक स्थिति की जाँच आवश्यक है।
5️⃣ सामाजिक दृष्टिकोण
इस्लाम मेहनत को सम्मान देता है।
हदीस में है कि एक व्यक्ति रस्सी लेकर लकड़ी काटकर बेचे, यह उससे बेहतर है कि वह लोगों से माँगे।
📌 अंतिम बात
✔️ पेशेवर भिखारी → ज़कात के हक़दार नहीं
✔️ वास्तविक मजबूर, बेरोज़गार, कर्ज़दार → हक़दार हो सकते हैं
यदि चाहें तो मैं चारों इमामों (हनाफ़ी, शाफ़ई, मालिकी, हम्बली) का मत भी विस्तार से,,, अब चारों प्रसिद्ध फ़िक़्ही मज़ाहिब (इमामों) की राय संक्षेप में प्रस्तुत है कि हट्टे-कट्टे, कमाने में सक्षम लेकिन पेशेवर भिखारी को ज़कात दी जा सकती है या नहीं:
1️⃣ इमाम अबू हनीफ़ा (हनाफ़ी मत)
इमाम अबू हनीफ़ा
🔹 हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार जो व्यक्ति कमाने की क्षमता रखता हो, उस पर काम करना ज़रूरी है।
🔹 यदि वह काम छोड़कर आदतन भीख माँगता है तो उसे ज़कात देना मकरूह/नाजायज़ माना गया है।
🔹 हक़दार वही है जो वास्तव में निसाब से कम माल रखता हो और कमाने में असमर्थ हो।
📚 आधार: अल-हिदाया
2️⃣ इमाम मालिक (मालिकी मत)
इमाम मालिक
🔹 मालिकी मत के अनुसार भी जो व्यक्ति स्वस्थ और कमाने में सक्षम हो, उसे ज़कात देना उचित नहीं।
🔹 अगर वह काम छोड़कर भीख को पेशा बना ले, तो वह “फ़क़ीर” की श्रेणी में नहीं आता।
📚 आधार: अल-मुदव्वना
3️⃣ इमाम शाफ़ई (शाफ़ई मत)
इमाम शाफ़ई
🔹 शाफ़ई मत में भी असली मापदंड “ज़रूरत” है।
🔹 जो व्यक्ति कमाने की क्षमता रखता है और रोजगार उपलब्ध है, उसे ज़कात देना सही नहीं।
📚 आधार: अल-उम्म
4️⃣ इमाम अहमद बिन हम्बल (हम्बली मत)
इमाम अहमद बिन हम्बल
🔹 हम्बली मत के अनुसार भी जो व्यक्ति तंदुरुस्त हो और मेहनत कर सकता हो, उसे ज़कात नहीं दी जानी चाहिए।
🔹 यदि वह झूठ बोलकर या पेशेवर रूप से भीख मांगता है, तो यह गुनाह है।
📚 आधार: अल-मुग़नी
🔎 चारों मज़ाहिब का संयुक्त निष्कर्ष
✔️ ज़कात केवल वास्तविक फक़ीर/मिस्कीन के लिए है (सूरह तौबा 9:60)।
✔️ स्वस्थ, कमाने में सक्षम, पेशेवर भिखारी ज़कात के हक़दार नहीं।
✔️ यदि कोई दिखने में स्वस्थ है लेकिन हक़ीक़त में मजबूर (रोज़गार नहीं, कर्ज़, आपदा) है, तो उसकी जाँच कर के दिया जा सकता है।
यदि आप चाहें तो मैं इस विषय पर समकालीन भारतीय उलेमा (दारुल उलूम देवबंद, नदवतुल उलेमा आदि) के फ़तवे ,अब समकालीन भारतीय उलेमा और प्रतिष्ठित दारुल इफ्ता के फ़तवों की रोशनी में इस मसले को देखते हैं:
1️⃣ दारुल उलूम देवबंद
दारुल इफ्ता देवबंद के कई फ़तवों में स्पष्ट किया गया है:
🔹 जो व्यक्ति कमाने की ताकत रखता हो और काम उपलब्ध हो, उसके लिए भीख माँगना जायज़ नहीं।
🔹 ऐसा व्यक्ति “फ़क़ीर” की श्रेणी में नहीं आता।
🔹 पेशेवर भिखारी को ज़कात देना सही नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद तलाश करना चाहिए।
देवबंद का सिद्धांत:
“ज़कात का असली हक़दार वही है जो निसाब का मालिक न हो और कमाने से मजबूर हो।”
2️⃣ नदवतुल उलेमा
नदवा के उलेमा के अनुसार:
🔹 इस्लाम मेहनत को इबादत का दर्जा देता है।
🔹 तंदुरुस्त व्यक्ति का भीख को पेशा बना लेना शरीअत की रूह के खिलाफ है।
🔹 ज़कात का पैसा पेशेवर भिखारियों को देने के बजाय शिक्षा, रोज़गार या वास्तविक निर्धनों पर खर्च करना बेहतर है।
3️⃣ जामिया अशरफिया
यहाँ के फ़तवों में भी यही उल्लेख मिलता है:
🔹 अगर कोई व्यक्ति हट्टा-कट्टा है और काम कर सकता है, तो उसे ज़कात देना उचित नहीं।
🔹 हाँ, यदि वह अस्थायी बेरोज़गारी, कर्ज़ या आपदा से घिरा हो तो उसकी वास्तविक स्थिति देखकर निर्णय लिया जा सकता है।
4️⃣ बरेलवी मत के उलेमा
इमाम अहमद रज़ा खान की फ़तवा पुस्तकों (फ़तावा रज़विया) में भी उल्लेख है:
🔹 जो व्यक्ति बिना जरूरत मांगता है वह गुनाहगार है।
🔹 ज़कात का माल ऐसे व्यक्ति को देना उचित नहीं जो काम करने में सक्षम हो।
📌 समकालीन उलेमा का संयुक्त मत
✔️ पेशेवर, आदतन भिखारी → ज़कात के हक़दार नहीं
✔️ तंदुरुस्त लेकिन मजबूर (रोज़गार न मिले, कर्ज़ में डूबा हो) → जांच के बाद दिया जा सकता है
✔️ ज़कात का सही उपयोग: गरीब, विधवा, अनाथ, कर्ज़दार, विद्यार्थी, मुसाफ़िर,

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...