पुत्री एवं दामाद की सहमति से,परिवार में छठा नेत्रदान संपन्न,नेत्रदान की परंपरा रही कायम,
2. 110 किलोमीटर दूर कोटा से आयी हुई टीम ने देर रात लिया नेत्रदान
नेत्रदान
के प्रति अब शहरवासियों में जागरूकता बढ़ती जा रही है, परिवार में
नेत्रदान परंपरा का हिस्सा बनने लगा है, कल देर भवानीमंडी निवासी,समाजसेवी
देवेंद्र पाल छाबड़ा ने शाइन इंडिया फाउंडेशन एवं भारत विकास परिषद के
नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता को सूचना देकर बताया कि,उनके ससुर सरदार
हरबंस सिंह का आकस्मिक निधन हुआ है । उनकी बेटी मनमीत कौर ने स्वयं पहल कर
पिता के नेत्रदान के लिए सहमति दी है ।
गौ सेवा जैसे पुनीत कार्य से
जुड़े देवेंद्र पाल छाबड़ा ने अपने पिता स्वर्गीय हरबंस सिंह छाबड़ा का भी
5 वर्ष पूर्व संस्था के माध्यम से नेत्रदान कराया था, तभी से देवेंद्र ने
प्रण ले रखा था कि,घर में कभी भी कोई शोक की घटना होती है,तो वह प्रयास
करेंगे कि उनके नेत्रदान संभव सकें ।
परिवार के सभी सदस्यों की
सहमति प्राप्त होते ही, 110 किलोमीटर दूर कोटा से ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर की
टीम रात 11:00 बजे,नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ को लेकर भवानी मंडी
पहुंची और परिवार के सभी सदस्यों के बीच में नेत्रदान की प्रक्रिया को
संपन्न किया ।
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
18 मार्च 2026
पुत्री एवं दामाद की सहमति से,परिवार में छठा नेत्रदान संपन्न,नेत्रदान की परंपरा रही कायम,
इधर मिली शिकायत, उधर हटाया अतिक्रमण* -निगम में जनसुनवाई में 49 ने बताई समस्याएं
इधर मिली शिकायत, उधर हटाया अतिक्रमण*
-निगम में जनसुनवाई में 49 ने बताई समस्याएं
के डी अब्बासी
कोटा। नगर निगम में मंगलवार को जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जनसुनवाई के दौरान सकतपुरा में गेट लगाकर आम रास्ता मिलने का परिवाद प्राप्त होने पर आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने अतिक्रमण निरोधक दस्ते को तुरन्त कार्यवाही के आदेश दिए। कुछ ही देर में निगम की टीम मौके पर पहुंच गई और जनसुनवाई खत्म होने से पहले अतिक्रमण हटवाकर रास्ते को आमजन के लिए खुलवा दिया।
आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि नवाचार के रूप में दिसम्बर माह से जनसुनवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। इसका मूल उद्देश्य आमजन से सीधा संवाद का उनकी परेशानियों को सुनना तथा उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करना था। इसी संकल्प का एक उदाहरण मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में भी दिखाई दिया।
सकतपुरा से आए परिवादियों ने बताया कि वहां एक व्यक्ति ने गेट लगाकर आम रास्ते को बंद कर दिया है। लोगों के टोकने पर वह झगड़े पर आमादा हो जाता है। रास्ता बंद होने के कारण आमजन को परेशानी हो रही है। इस पर निगम की अतिक्रमण निरोधक टीम को तुरन्त मौके पर जाकर रास्ता खुलवाने के निर्देश दिए गए। टीम कुछ ही देर में सकतपुरा पहुंच गई। वहां अतिक्रमी के विरोध को दरकिनार करते हुए अतिक्रमण हटाते हुए सार्वजनिक रास्ते को आमजन के लिए खोल दिया गया।
*भूखंड में पानी जमा है, नाली का निर्माण करवाएं*
आयुक्त मेहरा ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान कुल 49 परिवाद प्राप्त हुए। आमजन ने अधिकारियों को सीधे अपनी समस्याओं से अवगत करवाया। अधिकांश शिकायतें सफाई, अतिक्रमण, पट्टा जारी किए जाने तथा भवन निर्माण संबंधी आवेदनों के निस्तारण में देरी से संबंधित थीं। लेकिन कुछ गंभीर शिकायतें भी जनसुनवाई के दौरान प्राप्त हुईं, इनमें गुमानपुरा तथा औद्योगिक क्षेत्र स्थित भूखंडों में पानी जमा होने, अतिक्रमियों द्वारा पुनः काबिज हो जाने तथा अवैध निर्माण से संबंधित शिकायतें शामिल हैं। सभी परिवादों को संबंधित अधिकारियों को भेजकर त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।
*हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उतरा सड़कों पर* *प्रधानमंत्री पर जमकर बरसे गुंजल*
*हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उतरा सड़कों पर*
*प्रधानमंत्री पर जमकर बरसे गुंजल*
*जब कोई क्राइसिस नहीं तो एडवाइजरी जारी क्यों की : गुंजल*
कोटा : कोटा सहित सारा देश गैस की बड़ी हुई कीमतों और कालाबाजारी से त्रस्त है भारत सरकार व अंधभक्त कहते हैं कि कोई क्राइसिस नहीं है यह कांग्रेस का खड़ा किया हुआ प्रोपेगेंडा है तब आज मैं भारत सरकार से पूछता हूं कि जब कोई क्राइसिस नहीं है तो एडवाइजरी जारी क्यों की व्यावसायिक सिलेंडरों की बुकिंग बंद रहेगी, किसने एडवाइजरी जारी की की घरेलू सिलेंडर पच्चीस दिन से पहले नहीं मिलेगा। देश में दहशत हैं जिस तरह मोदी ने अमेरिका के सामने घुटने टेके हैं और इस पेंडेमिक से पहले वहां से आपने ट्रेड डील में गैस और पेट्रोल खरीदने का जो मसौदा तैयार किया है वह भारत को बीमित व ट्रांसपोर्टेशन में 8 से 10 गुना महंगा पड़ने वाला है। पहले ही ₹60 सिलेंडर पर आप बढ़ा चुके हैं आने वाले समय में 60 से 70 रुपए और बढ़ाने वाले हैं यह बात पूर्व विधायक व कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित आक्रोश रैली को संबोधित करते हुए कही।गुंजल ने कहा आज क्या परिस्थितियों हैं अमेरिका कहता है 30 दिन से ज्यादा की मोहलत नहीं, मोदी का कैरियर खराब नहीं करना चाहता, क्या मजबूरी है प्रधानमंत्री जी आपकी आपके इस लचार आचरण की वजह से भारत का आत्म सम्मान गिर रहा है।
*एपिस्टन फाइल में नाम आने के बाद मोदी मोनी बाबा बन गए*
प्रहलाद गुंजल ने कहा कि हम बाद दावा करते हैं कि हम सनातन संस्कृति के लोग हैं। आदर्श हमारा जीवन है, हमारा चरित्र, हमारी परंपराएं, हमारी नैतिकता बहुत आदर्श हैं। हम पाश्चात्य संस्कृति के विपरीत हैं पाश्चात्य संस्कृति भोग की संस्कृति है, हमारे यहां की संस्कृति योग की संस्कृति है क्या उस योग की संस्कृति का नारा देने वाली पाठशाला में मोदी जी आपने यही शिक्षण प्राप्त किया। दुनिया के दूसरे राष्ट्रध्यक्ष, राजदूत व नेताओं का एपिस्टिन फाइल में नाम आया तो उनके देश में सवाल खड़े हो गए और उन्हें इस्तीफे देने पड़े और जब से आपका, हरदीप पूरी और दिया कुमारी जी का नाम आया है सरकार व भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व मोनी बाबा बन गया है। तो क्या भारत यह मान ले कि आप भारत को यह सहमति दे रहे हो कि आप गुनहगार हो यदि आप गुनहगार हो तो गुनहगारों को भारत के शासन में रहने का क्षण भर भी अधिकार नहीं है।
*कोटा की दुर्दशा पर बोले गुंजल*
प्रहलाद गुंजल ने कोटा में कोचिंग के बच्चों की कमी से हुई दुर्दशा पर बोलते हुए कहा कि पहले कोचिंग वालों से पार्टनरी मांगी गई जब कोचिंग निपट गई तो एक बड़ा कारखाना कोटा में आने वाला था पर जब उससे भी यहां के नेताओं ने 50% की पार्टनरी मांगी तो वह कारखाना भी यहां आने के बदले किसी दूसरे राज्य में चला गया। बिरला जी अखबारों में छपने और कोरी बयानबाजी करने के अलावा आपके पास संवेदनाएं नहीं है सरकार व कोटा में बैठे बड़े नेताओं की संवेदनाएं मर गई हैं। गुंजल ने कहा कि मैंने पिछली सभा में भी कहा था बेईमानों आपको शहर के व्यापार पर 50% हिस्सेदारी, कब्जा, डकैती व डाका डालने के लिए जनादेश नहीं दिया है मुंह छुपाने के लिए अपने बाउंड्री वालों का काम चालू करवा दिया मुख्यमंत्री जी आ रहे हैं कोटा बूंदी के सरकारी कर्मचारियों को सभा में आने को पाबंद करवा दिया 940 बसे लगाने के बाद भी 5000 लोग भी वहां नहीं पहुंचे । बिरला जी व्यावसायिक सिलेंडर नहीं मिलने से शहर की होटलें व मैस बंद हो रही हैं पहले ही कोटा में कोचिंग के बच्चे नहीं है जो है उन्हें भी खाने के लिए भटकना पड़ रहा है बिरला की जनता आपसे त्रस्त है, जनता ने आपसे मुंह मोड़ लिया है हवाई जहाज तो जब उड़ेगा जब उड़ जाएगा।
कोटा की कोचिंग को तो नहीं बचा पाए, होटल हॉस्टल एवं मेस वालों को सिलेंडर उपलब्ध करवा दो ताकि बचे कुचे बच्चों को तो दो वक्त की रोटी आराम से मिल जाए।
इससे पहले सुबह 10:00 बजे से ही गुंजल के नयापुरा कार्यालय पर कार्यकर्ताओं का जुटना प्रारंभ हो गया 11:00 बजे गुंजल हजारों कार्यकर्ताओं के साथ रैली के रूप में कलैक्ट्रेट के लिए रवाना हुए । हजारों की संख्या में एकत्रित कार्यकर्ता हाथों में गैस सिलेंडर की तख्तियां, झंडे बैनर लिए सरकार विरोधी नारे लगाते हुए कलैक्ट्रेट पहुंचे जहां रैली सभा में परिवर्तित हो गई ।
सभा को बूंदी जिला अध्यक्ष महावीर मीणा, पूर्व देहात अध्यक्ष सरोज मीणा, क्रांति तिवारी, अनूप ठाकुर, मंजूर तंवर, विपिन बरथूनिया, हेमंत चतुर्वेदी, राजू पहाड़ियां, राजीव आचार्य ने भी संबोधित किया। संचालन पूर्व पार्षद दिलीप पाठक ने किया व धन्यवाद रुकमणि मीणा ने दिया। प्रदर्शन मैं अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेश सचिव बादशाह खान, जिला उपाध्यक्ष मंजू चौधरी, बलविंदर सिंह, लोकेश गुंजल, बिटा स्वामी, ललित सरदार, नीरज शर्मा, शिक्षक नेता ईश्वर सिंह, विक्रम पवार, नि वर्तमान पार्षद शीतल मीणा, तोशी, मनोज गुप्ता, डिंपल प्रजापति, आसिफ मिर्जा,अजयभान सिंह शक्तावत, विनोद शर्मा, टीकम सुमन, दीपक नामदेव, पूर्व पार्षद मो. इसरार, जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्षों सहित हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
तमाम आलम ए इस्लाम को पुर खुलुस *जुमा *तुल *विदा * की 💐 🌺 🌙 🕌 दिली मुबारकबाद 🕋🌙 🌺 💐
तमाम आलम ए इस्लाम को पुर खुलुस *जुमा *तुल *विदा * की
दिली मुबारकबाद 

ख़िदमत, अमन और अख़्लाक़ की राेशन मिसाल हैं-शहर काज़ी जनाब ज़ुबेर अहमद साहब
राजस्थान के ऐतिहासिक शहर कोटा की सरज़मीं लंबे अरसे से इल्म, अदब और दीनदारी की अमानत को संजोए हुए है। इसी शहर में बरसों तक शहर काज़ी के ओहदे पर फ़ाइज़ रहे मरहूम अनवार अहमद साहब ने अपनी पूरी ज़िंदगी ख़िदमत-ए-ख़ल्क़, इस्लाह-ए-मुआशरा और अमन-ओ-अमान की तालीम के लिए वक़्फ़ कर दी। उनका दरबार किसी इमारत का नाम नहीं था, बल्कि वह रहमत, हमदर्दी और इंसानियत का मरकज़ था। उनकी शख्सियत में सादगी की चमक, तवाज़ो (विनम्रता) की ख़ुशबू और ख़ुलूस (निष्कपटता) की गर्माहट साफ़ महसूस होती थी। जो भी उनके पास अपनी परेशानी लेकर आता, मायूसी की बजाय उम्मीद और तसल्ली लेकर लौटता। फ़ज्र की नमाज़ के बाद ज़कात की तक़सीम उनका मामूल था। वे ख़ामोशी से ग़रीबों और मुस्तहिक़ीन की ख़बरगीरी करते, उनकी इज़्ज़त-ए-नफ़्स का ख़ास ख़याल रखते और इस अंदाज़ से मदद करते कि लेने वाले का सर शर्म से झुके नहीं, बल्कि दुआओं से उठे।
कितने ही घराने जो टूटने की कगार पर थे, उनकी दानिशमंदी (बुद्धिमत्ता) और हिकमत (सूझबूझ) से दोबारा जुड़ गए। उन्होंने लोगों को अमन, सब्र और ईमान की राह दिखाई। वे अक्सर फ़रमाया करते थे कि “मुआशरे की असल ताक़त इत्तेहाद और भाईचारा है।”
आज उसी रौशन रवायत को जनाब शहर काज़ी जनाब ज़ुबेर अहमद साहब पूरी शिद्दत और ज़िम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। कम वक़्त में ही उन्होंने अपने हुस्न-ए-अख़्लाक़, मिलनसारी, साफ़गोई और दरियादिली से अहल-ए-कोटा के दिलों में मुक़ाम बना लिया है। उनकी मजलिस में हर तबक़े के लोग बैठते हैं-कोई कारोबारी मसला लेकर आता है, कोई ख़ानदानी इख़्तिलाफ़, तो कोई तालीमी या मआशी परेशानी। वे हर एक की बात ग़ौर से सुनते, मुनासिब मशविरा देते और जहां तक मुमकिन हो, अमली मदद भी फ़रमाते हैं।
हर जुमे के दिन उनका दरबार रौनक़-ए-आम से भरा रहता है। मुहताज, यतीम, बेसहारा और मजबूर लोग उम्मीद की नज़र से आते हैं और दुआओं की दौलत लेकर जाते हैं। यह सिलसिला सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि एक पाक रवायत की ताजगी है, जो इंसानियत के जज़्बे से सरशार है। शहर काज़ी जनाब ज़ुबेर अहमद साहब तालीम और अख़्लाक़ी बुनियाद को मज़बूत करने पर भी ख़ास तवज्जो देते हैं। वे अकसर मदरसों, स्कूलों और अदबी महफ़िलों में जाकर नौजवानों को इल्म के साथ किरदार की अहमियत समझाते हैं। उनका मानना है कि सिर्फ़ डिग्री हासिल कर लेना काफ़ी नहीं, बल्कि अदब, तहज़ीब, सब्र और एहतराम जैसे उसूलों को ज़िंदगी में उतारना असली कामयाबी है। वे वालिदैन को भी नसीहत करते हैं कि औलाद की तरबियत में दीन और दुनियावी तालीम के दरमियान तवाज़ुन क़ायम रखें। समाज में बढ़ती बेचैनी, इख़्तिलाफ़ात और ग़लतफ़हमियों को दूर करने के लिए वे मुक़ालमे (संवाद) और मशविरा (परामर्श) की रवायत को ज़िंदा रखने पर ज़ोर देते हैं। इस तरह उनकी कोशिश रहती है कि कोटा का मुआशरा सिर्फ़ मज़हबी तौर पर नहीं, बल्कि अख़्लाक़ी और तालीमी एतबार से भी तरक़्क़ी की राह पर गामज़न रहे।
रमज़ान-रहमतों और बरकतों का महीना
रमज़ानुल मुबारक के आते ही शहर काज़ी साहब की तक़रीरें और भी पुरअसर हो जाती हैं। वे याद दिलाते हैं कि रमज़ान महज़ भूख और प्यास का नाम नहीं, बल्कि तज़किया-ए-नफ़्स (आत्मशुद्धि) और मुहासिबा-ए-ज़ात (आत्ममंथन) का महीना है। यह वह मुबारक महीना है जिसमें बंदा अपनी ख़्वाहिशात पर क़ाबू पाना सीखता है। इस्लाम की बुनियाद 5 अरकान पर क़ायम है-कलमा, नमाज़, ज़कात, रोज़ा और हज। रोज़ा उनमें से एक अहम इबादत है, जो बंदे को सब्र, तक़वा और शुकर की दौलत अता करता है। इसी माह-ए-मुक़द्दस में क़ुरआन-ए-पाक नाज़िल हुआ, जो पूरी इंसानियत के लिए हिदायत और नूर का सरचश्मा है। शहर काज़ी ज़ुबेर अहमद साहब फ़रमाते हैं कि रमज़ान में हर नेक अमल का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ा दिया जाता है। यह महीना रहमत, मग़फ़िरत और निज़ात का पैग़ाम लेकर आता है। हदीसों में बयान हुआ है कि इस महीने जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और दोज़ख़ के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं।
रोज़ा-जिस्म ही नहीं, रूह की भी इबादत
वे तशरीह करते हैं कि रोज़ा सिर्फ़ पेट का नहीं, बल्कि पूरे जिस्म और रूह का होना चाहिए। हाथ ज़ुल्म से रुकें, ज़ुबान ग़ीबत और झूठ से महफ़ूज़ रहे, आंखें बदनज़री से बचें, कान बुराई सुनने से परहेज़ करें और क़दम ग़लत राह की तरफ़ न बढ़ें-तभी रोज़े की हक़ीक़त मुकम्मल होती है। रोज़ा इंसान को भूख और प्यास का एहसास कराता है, ताकि वह ग़रीबों और मजबूरों के दर्द को समझ सके। यही एहसास इंसान के दिल में रहम, सख़ावत और हमदर्दी के जज़्बात को ज़िंदा करता है।
ज़कात और फ़ित्रा — इबादत के साथ इंसानियत
शहर काज़ी साहब इस बात पर ख़ास ज़ोर देते हैं कि साहिब-ए-निसाब लोग अपनी ज़कात और फ़ित्रा वक़्त पर अदा करें। अगर रमज़ान की इब्तिदा में ही मुस्तहिक़ीन तक मदद पहुंच जाए तो वे भी सुकून से रोज़ा रख सकें और ईद की ख़ुशियों में शरीक हो सकें। यह सिर्फ़ माली इमदाद नहीं, बल्कि इंसानियत की तकमील है।
नौजवान नस्ल और सामाजिक हमआहंगी
कोटा में रमज़ान अब सिर्फ़ इबादतों तक महदूद नहीं रहा, बल्कि यह नौजवान नस्ल की बिदारी और मुस्बत सरगर्मियों का प्रतीक बन चुका है। नौजवान बढ़-चढ़कर राहत के कामों में हिस्सा लेते हैं, इफ़्तार का इंतज़ाम करते हैं और ग़रीबों तक राशन पहुंचाते हैं। शहर काज़ी साहब उन्हें दीन और दुनिया के दरमियान तवाज़ुन (संतुलन) क़ायम रखने की नसीहत करते हैं। उनका पैग़ाम साफ़ है-मोहब्बत, भाईचारा और सामाजिक हमआहंगी ही किसी भी मुआशरे की असली पहचान है। वे अपने मरहूम पेशरव अनवार अहमद साहब की रवायत को मशअल-ए-राह मानते हुए उसी जज़्बे से सेवा का सफ़र जारी रखे हुए हैं।
आख़िर में उनकी दुआ होती है कि अल्लाह तआला हम सबको रमज़ान की हक़ीक़ी रूह समझने, अपने गुनाहों से तौबा करने और इंसानियत की ख़िदमत में आगे बढ़ने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। बेशक, जब क़ियादत (नेतृत्व) में ख़ुलूस, अमानतदारी और हमदर्दी हो तो शहर अमन और बरकत का गहवारा बन जाता है।
*जलदाय व केडीए अधिकारियों की ली बैठक* *चम्बल में अथाह पानी, कोटा में नहीं हो किल्लत - संदीप शर्मा*
*जलदाय व केडीए अधिकारियों की ली बैठक*
*चम्बल में अथाह पानी, कोटा में नहीं हो किल्लत - संदीप शर्मा*
विधायक संदीप शर्मा ने कहा है कि कोटा शहर को चम्बल का अथाह पानी वरदान के रूप में प्राप्त हुआ है, ऐसे में प्रत्येक कोटावासी को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होना चाहिए। बुधवार को सर्किट हाउस में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग एवं कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की बैठक लेते हुए उन्होंने कहा कि शहर में तीन फिल्टर प्लांट हैं, कुछ उत्पादन क्षमता 570 एमएलडी है जो 30 लाख लोगों के लिए पर्याप्त हैं, ऐसे में कोटा शहर की 17 लाख की आबादी को पेयजल की किल्लत नहीं होनी चाहिए। इसलिए जलदाय अधिकारी ग्रीष्म ऋतु की आहट के साथ पर्याप्त जलापूर्ति हेतु अपनी तैयारियां पूर्ण कर लें, अन्यथा पानी की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अमृत योजना के द्वितीय चरण की टेण्डर प्रक्रिया लम्बित होने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में हमारा ध्येय है कि शहर के प्रत्येक क्षेत्र की प्रत्येक कॉलोनी में पर्याप्त मात्रा में दबाव के साथ जलापूर्ति हो लेकिन टेण्डर प्रक्रिया के कारण लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बैठक से ही जलदाय विभाग के मुख्य अभियंता देवराज सोलंकी से दूरभाष पर वार्ता की और उन्होंने कोटा के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही कोटा में अमृत योजना में हो रहे विलम्ब को दूर कर जलापूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ीकरण करने के लिए कहा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर में 3.5 करोड़ के ग्रीष्मकालीन आकस्मिक कार्य स्वीकृत हैं, ऐसे में जिन क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में पानी की दिक्कत रहती है, उनमें जलापूर्ति के लिए अभी से कार्य करवाए जाएं। इसी प्रकार तत्काल आवश्यकता वाले पाईप लाईन आदि कार्य मुझे बताएं ताकि अन्य किसी एजेंसी से काम करवाए जाएं। दादाबाड़ी, महावीर नगर विस्तार योजना, बालाकुण्ड जैसे सघन आबादी क्षेत्रों में पानी की कमी की शिकायतों का तत्काल समाधान करवाया जाए, वहीं बरड़ा बस्ती, क्रेशर बस्ती एवं तालाब गांव जैसे क्षेत्रों में टैंकरों से जलापूर्ति की व्यवस्था की जाए।
एक-एक किराएदार के मकानों को व्यावसायिक दर से बिल देने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि लोग शहर में पढ़ने के लिए आए बच्चों को एक कमरा किराए पर दे देते हैं तो उनका मकान कोई कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स नहीं बन जाता। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे मकानों को घरेलु श्रेणी का ही बिल दिया जाए।
उन्होंने कहा कि जलदाय विभाग के अधिकारी कई बार किसी नए आबादी क्षेत्र में पानी देने के लिए पुराने क्षेत्र की जलापूर्ति लाईन से ही टेपिंग कर देते हैं, जिससे दोनों ही क्षेत्रों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। इसलिए नया तंत्र बनाया जाए, हमारे पास धन की कमी नहीं है, अमृत योजना के साथ ही 15वें वित्त आयोग में भी काम करवाए जा सकते हैं।
इसी प्रकार शहर के कई स्थानों पर नई पुरानी मिलाकर 4-4 पाईप लाईनें डली हुई हैं, इससे रिसाव, गंदे पानी व कम दबाव की समस्या आती है, इसलिए नई लाईन में जलापूर्ति शुरू होते ही पुरानी पाईप लाईनों को तुरंत बन्द किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अकेलगढ़ से निकल रही 1000 एमएम की पाईप लाईन में 40 प्रतिशत लीकेज था, इसे पूरी तरह से नहीं बदला गया है, इसलिए इसके बचे हुए हिस्से को भी तत्काल बदल दिया जाए ताकि बहुमूल्य पेयजल व्यर्थ बहने से बचे।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य अभियंता दीपक कुमार झा, अधिशाषी अभियंता श्याम माहेश्वरी, ललित शर्मा, जीवनधर राठौर, अभिषेक मिश्रा, सहायक अभियंता विमल नागर, डी पी चौधरी, अशोक बमनावत, दीक्षांत मित्तल, अनिल मित्तल, अभिषेक जैन, पवन सिंह, घनश्याम कलवार, रिजवान मुल्तानी सहित अन्य अभियंता मौजूद रहे।
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