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02 नवंबर 2026

120 किलोमीटर दूर जाकर लिया नेत्रदान,और वहीं 200 विद्यार्थियों को भी कर दिया जागरूक

 120 किलोमीटर दूर जाकर लिया नेत्रदान,और वहीं 200 विद्यार्थियों को भी कर दिया जागरूक
2. दो दृष्टिहीनों के लिये रौशनी लाये, और 200 विद्यार्थियों को भी जागरूक कर आए

शाइन इंडिया फाउंडेशन के राष्ट्रव्यापी नेत्रदान जागरुकता एवं नेत्र संकलन अभियान के तहत आज सुबह शहर गरोठ, जिला मंदसौर निवासी शपथ आयुक्त एडवोकेट रमेश कुमार शर्मा का उनके निवास स्थान,बाईपास तहसील रोड,पर आकस्मिक निधन हो गया ।

बेटे वैभव ने,माँ कांति देवी से स्व० पिता एडवोकेट रमेश कुमार के नेत्रदान के लिए सहमति लेने के बाद संस्था शाइन इंडिया के ज्योति मित्र, एवं भारत विकास परिषद के सदस्य नरेंद्र कुमार चौधरी को पिता के नेत्रदान करवाने के लिए आग्रह किया।

नेत्रदान संपन्न करवाने किए लिये,गरोठ से 120 किलोमीटर दूर कोटा में शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ को, गरोठ बुलाया गया और नेत्रदान की प्रक्रिया परिवार की सभी सदस्यों के बीच में संपन्न की गयी।

डॉ गौड़ ने बताया कि,जब भी वह कभी दूर, किसी शहर में नेत्रदान के लिए जाते हैं,तो प्रयास करते हैं कि, किसी विद्यालय में नेत्रदान के विषय पर कार्यशाला हो सके, इस मौके पर परिषद के सहयोग से,भानपुरा रोड स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 8 से 11 तक 200 भैया बहनों (विद्यार्थियों)  व शिक्षक शिक्षिकाओं को नेत्रदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।

कार्यशाला के बाद सभी बच्चों से,नेत्रदान से सम्बन्धित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम किया गया और सभी विजेताओं को शाइन मेडल से पुरस्कृत किया गया ।1. 120 किलोमीटर दूर जाकर लिया नेत्रदान,और वहीं 200 विद्यार्थियों को भी कर दिया जागरूक
2. दो दृष्टिहीनों के लिये रौशनी लाये, और 200 विद्यार्थियों को भी जागरूक कर आए

शाइन इंडिया फाउंडेशन के राष्ट्रव्यापी नेत्रदान जागरुकता एवं नेत्र संकलन अभियान के तहत आज सुबह शहर गरोठ, जिला मंदसौर निवासी शपथ आयुक्त एडवोकेट रमेश कुमार शर्मा का उनके निवास स्थान,बाईपास तहसील रोड,पर आकस्मिक निधन हो गया ।

बेटे वैभव ने,माँ कांति देवी से स्व० पिता एडवोकेट रमेश कुमार के नेत्रदान के लिए सहमति लेने के बाद संस्था शाइन इंडिया के ज्योति मित्र, एवं भारत विकास परिषद के सदस्य नरेंद्र कुमार चौधरी को पिता के नेत्रदान करवाने के लिए आग्रह किया।

नेत्रदान संपन्न करवाने किए लिये,गरोठ से 120 किलोमीटर दूर कोटा में शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ को, गरोठ बुलाया गया और नेत्रदान की प्रक्रिया परिवार की सभी सदस्यों के बीच में संपन्न की गयी।

डॉ गौड़ ने बताया कि,जब भी वह कभी दूर, किसी शहर में नेत्रदान के लिए जाते हैं,तो प्रयास करते हैं कि, किसी विद्यालय में नेत्रदान के विषय पर कार्यशाला हो सके, इस मौके पर परिषद के सहयोग से,भानपुरा रोड स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 8 से 11 तक 200 भैया बहनों (विद्यार्थियों)  व शिक्षक शिक्षिकाओं को नेत्रदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।

कार्यशाला के बाद सभी बच्चों से,नेत्रदान से सम्बन्धित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम किया गया और सभी विजेताओं को शाइन मेडल से पुरस्कृत किया गया ।

ये वह लोग हैं जिन्होंने कुछ अपना ही घाटा किया और जो इफ़्तेरा परदाजि़याँ (झूठी बातें) ये लोग करते थे (क़यामत में सब) उन्हें छोड़ के चल होगी (21) इसमें शक नहीं कि यही लोग आखि़रत में बड़े घाटा उठाने वाले होगें

 ये वह लोग हैं जिन्होंने कुछ अपना ही घाटा किया और जो इफ़्तेरा परदाजि़याँ (झूठी बातें) ये लोग करते थे (क़यामत में सब) उन्हें छोड़ के चल होगी (21)
इसमें शक नहीं कि यही लोग आखि़रत में बड़े घाटा उठाने वाले होगें (22)
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए और अपने परवरदिगार के सामने आजज़ी से झुके यही लोग जन्नती हैं कि ये बेहिश्त में हमेशा रहेगें (23)
(काफिर,मुसलमान) दोनों फरीक़ की मसल अन्धे और बहरे और देखने वाले और सुनने वाले की सी है क्या ये दोनो मसल में बराबर हो सकते हैं तो क्या तुम लोग ग़ौर नहीं करते और हमने नूह को ज़रुर उन की क़ौम के पास भेजा (24)
(और उन्होने अपनी क़ौम से कहा कि) मैं तो तुम्हारा (अज़ाबे ख़़ुदा से) सरीही धमकाने वाला हूँ (25)
(और) ये (समझता हूँ) कि तुम ख़़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मैं तुम पर एक दर्दनाक दिन (क़यामत) के अज़ाब से डराता हूँ (26)
तो उनके सरदार जो काफि़र थे कहने लगे कि हम तो तुम्हें अपना ही सा एक आदमी समझते हैं और हम तो देखते हैं कि तुम्हारे पैरोकार हुए भी हैं तो बस सिर्फ हमारे चन्द रज़ील (नीच) लोग (और वह भी बे सोचे समझे सरसरी नज़र में) और हम तो अपने ऊपर तुम लोगों की कोई फज़ीलत नहीं देखते बल्कि तुम को झूठा समझते हैं (27)
(नूह ने) कहा ऐ मेरी क़ौम क्या तुमने ये समझा है कि अगर मैं अपने परवरदिगार की तरफ से एक रौशन दलील पर हूँ और उसने अपनी सरकार से रहमत (नुबूवत) अता फरमाई और वह तुम्हें सुझाई नहीं देती तो क्या मैं उसको (ज़बरदस्ती) तुम्हारे गले मंढ़ सकता हूँ (28)
और तुम हो कि उसको नापसन्द किए जाते हो और ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुमसे इसके सिले में कुछ माल का तालिब नहीं मेरी मज़दूरी तो सिर्फ ख़़ुदा के जि़म्मे है और मै तो तुम्हारे कहने से उन लोगों को जो इमान ला चुके हैं निकाल नहीं सकता (क्योंकि) ये लोग भी ज़रुर अपने परवरदिगार के हुज़ूर में हाजि़र होगें मगर मै तो देखता हूँ कि कुछ तुम ही लोग (नाहक़) जिहालत करते हो (29)

और मेरी क़ौम अगर मै इन (बेचारे ग़रीब) (ईमानदारों) को निकाल दूँ तो ख़ुदा (के अज़ाब) से (बचाने में) मेरी मदद कौन करेगा तो क्या तुम इतना भी ग़ौर नहीं करते (30)

01 नवंबर 2026

मगर जिन लोगों ने सब्र किया और अच्छे (अच्छे) काम किए (वह ऐसे नहीं) ये वह लोग हैं जिनके वास्ते (ख़ुदा की) बखशिश और बहुत बड़ी (खरी) मज़दूरी है

 मगर जिन लोगों ने सब्र किया और अच्छे (अच्छे) काम किए (वह ऐसे नहीं) ये वह लोग हैं जिनके वास्ते (ख़ुदा की) बखशिश और बहुत बड़ी (खरी) मज़दूरी है (11)
तो जो चीज़ तुम्हारे पास ‘वही’ के ज़रिए से भेजी है उनमें से बाज़ को (सुनाने के वक़्त) शायद तुम फक़त इस ख़्याल से छोड़ देने वाले हो और तुम तंग दिल हो कि मुबादा ये लोग कह बैंठें कि उन पर खज़ाना क्यों नहीं नाजि़ल किया गया या (उनके तसदीक के लिए) उनके साथ कोई फरिशता क्यों न आया तो तुम सिर्फ (अज़ाब से) डराने वाले हो (12)
तुम्हें उनका ख़्याल न करना चाहिए और ख़ुदा हर चीज़ का जि़म्मेदार है क्या ये लोग कहते हैं कि उस शख़्स (तुम) ने इस क़ुरान) को अपनी तरफ से गढ़ लिया है तो तुम (उनसे साफ साफ) कह दो कि अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो (ज़्यादा नहीं) ऐसे दस सूरे अपनी तरफ से गढ़ के ले आओं (13)
और ख़ुदा के सिवा जिस जिस के तुम्हे बुलाते बन पड़े मदद के वास्ते बुला लो उस पर अगर वह तुम्हारी न सुने तो समझ ले कि (ये क़़ुरान) सिर्फ ख़़ुदा के इल्म से नाजि़ल किया गया है और ये कि ख़़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो क्या तुम अब भी इस्लाम लाओगे (या नहीं) (14)
नेकी करने वालों में से जो शख़्स दुनिया की जि़न्दगी और उसके रिज़क़ का तालिब हो तो हम उन्हें उनकी कारगुज़ारियों का बदला दुनिया ही में पूरा पूरा भर देते हैं और ये लोग दुनिया में घाटे में नहीं रहेगें (15)
मगर (हाँ) ये वह लोग हैं जिनके लिए आखि़रत में (जहन्नुम की) आग के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ दुनिया में उन लोगों ने किया धरा था सब अकारत (बर्बाद) हो गया और जो कुछ ये लोग करते थे सब मलियामेट हो गया (16)
तो क्या जो शख़्स अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन दलील पर हो और उसके पीछे ही पीछे उनका एक गवाह हो और उसके क़बल मूसा की किताब (तौरैत) जो (लोगों के लिए) पेशवा और रहमत थी (उसकी तसदीक़ करती हो वह बेहतर है या कोई दूसरा) यही लोग सच्चे इमान लाने वाले और तमाम फिरक़ों में से जो शख़्स भी उसका इन्कार करे तो उसका ठिकाना बस आतिश (जहन्नुम) है तो फिर तुम कहीं उसकी तरफ से शक में न पड़े रहना, बेशक ये क़़ुरान तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से बरहक़ है मगर बहुतेरे लोग इमान नही लाते (17)
और ये जो शख़्स ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बांधे उससे ज़्यादा ज़ालिम कौन होगा ऐसे लोग अपने परवरदिगार के हुज़ूर में पेश किए जाएगें और गवाह इज़हार करेगें कि यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार पर झूट (बोहतान)बांधा था सुन रखो कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की फिटकार है (18)
जो ख़़ुदा के रास्ते से लोगों को रोकते हैं और उसमें कज़ी (टेढ़ा पन) निकालना चाहते हैं और यही लोग आखि़रत के भी मुन्किर है (19)
ये लोग रुए ज़मीन में न ख़़ुदा को हरा सकते है और न ख़़ुदा के सिवा उनका कोई सरपरस्त होगा उनका अज़ाब दूना कर दिया जाएगा ये लोग (हसद के मारे) न तो (हक़ बात) सुन सकते थे न देख सकते थे (20)

31 अक्टूबर 2026

अलिफ़ लाम रा - ये (क़़ुरान) वह किताब है जिसकी आयते एक वाकिफ़कार हकीम की तरफ से (दलाएल से) खूब मुस्तहकिम (मज़बूत) कर दी गयीं (1) फिर तफ़सीलदार बयान कर दी गयी हैं ये कि ख़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मै तो उसकी तरफ से तुम्हें (अज़ाब से) डराने वाला और (बहिश्त) ख़ुशख़बरी देने वाला (रसूल) हूँ

 सूरए हूद मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी एक सौ तेईस (123) आयते हैं
(मैं) उस ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है
अलिफ़ लाम रा - ये (क़़ुरान) वह किताब है जिसकी आयते एक वाकिफ़कार हकीम की तरफ से (दलाएल से) खूब मुस्तहकिम (मज़बूत) कर दी गयीं (1)
फिर तफ़सीलदार बयान कर दी गयी हैं ये कि ख़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मै तो उसकी तरफ से तुम्हें (अज़ाब से) डराने वाला और (बहिश्त) ख़ुशख़बरी देने वाला (रसूल) हूँ (2)
और ये भी कि अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ माँगों फिर उसकी बारगाह में (गुनाहों से) तौबा करो वही तुम्हें एक मुकर्रर मुद्दत तक अच्छे नुत्फ के फायदे उठाने देगा और वही हर साहबे बुज़ुर्ग को उसकी बुज़ुर्गी (की दाद) अता फरमाएगा और अगर तुमने (उसके हुक्म से) मुँह मोड़ा तो मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े (ख़ौफनाक) दिन के अज़ाब का डर है (3)
(याद रखो) तुम सब को (आखि़रकार) ख़़ुदा ही की तरफ लौटना है और वह हर चीज़ पर (अच्छी तरह) क़ादिर है (4)
(ऐ रसूल) देखो ये कुफ्फ़ार (तुम्हारी अदावत में) अपने सीनों को (गोया) दोहरा किए डालते हैं ताकि ख़़ुदा से (अपनी बातों को) छिपाए रहें (मगर) देखो जब ये लोग अपने कपड़े ख़ूब लपेटते हैं (तब भी तो) ख़़ुदा (उनकी बातों को) जानता है जो छिपाकर करते हैं और खुल्लम खुल्ला करते हैं इसमें शक नहीं कि वह सीनों के भेद तक को खूब जानता है (5)
और ज़मीन पर चलने वालों में कोई ऐसा नहीं जिसकी रोज़ी ख़ुदा के जि़म्मे न हो और ख़ुदा उनके ठिकाने और (मरने के बाद) उनके सौपे जाने की जगह (क़ब्र) को भी जानता है सब कुछ रौशन किताब (लौहे महफूज़) में मौजूद है (6)
और वह तो वही (क़ादिरे मुतलक़) है जिसने आसमानों और ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया और (उस वक़्त) उसका अर्श (फलक नहुम) पानी पर था (उसने आसमान व ज़मीन) इस ग़रज़ से बनाया ताकि तुम लोगों को आज़माए कि तुममे ज़्यादा अच्छी कार गुज़ारी वाला कौन है और (ऐ रसूल) अगर तुम (उनसे) कहोगे कि मरने के बाद तुम सबके सब दोबारा (क़ब्रों से) उठाए जाओगे तो काफि़र लोग ज़रुर कह बैठेगें कि ये तो बस खुला हुआ जादू है (7)
और अगर हम गिनती के चन्द रोज़ो तक उन पर अज़ाब करने में देर भी करें तो ये लोग (अपनी शरारत से) बेताम्मुल ज़रुर कहने लगेगें कि (हाए) अज़ाब को कौन सी चीज़ रोक रही है सुन रखो जिस दिन इन पर अज़ाब आ पडे़ तो (फिर) उनके टाले न टलेगा और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाया करते थे वह उनको हर तरह से घेर लेगा (8)
और अगर हम इन्सान को अपनी रहमत का मज़ा चखायें फिर उसको हम उससे छीन लें तो (उस वक़्त) यक़ीनन बड़ा बेआस और नाशुक्रा हो जाता है (9)
(और हमारी शिकायत करने लगता है) और अगर हम तकलीफ के बाद जो उसे पहुँचती थी राहत व आराम का जाएक़ा चखाए तो ज़रुर कहने लगता है कि अब तो सब सख़्तियाँ मुझसे दफा हो गई इसमें शक नहीं कि वह बड़ा (जल्दी खुश होने शेख़ी बाज़ है (10)

30 अक्टूबर 2026

शाइन इंडिया के पायलेट प्रोजेक्ट मिशन सबल भारत की शुरुआत, विद्यार्थियों की नि:शुल्क जांच शुरू

  शाइन इंडिया के पायलेट प्रोजेक्ट मिशन सबल भारत की शुरुआत, विद्यार्थियों की नि:शुल्क जांच शुरू
2. चिकित्सा शिविर में आँख और दांतों की समस्या से ग्रसित मिले विद्यार्थी

"मुस्कान भी तब ही अच्छी ,जब दाँत हो साफ़ और आँखों में रोशनी अच्छी..."

स्वस्थ,समृद्ध भारत व अंधत्व निवारण के केंद्र सरकार के अभियान में सहयोग देने के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा, कोटा शहर के राजकीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की आंखों की नि:शुल्क जांच एवं नि:शुल्क चश्मा वितरण के साथ-साथ उनका नि:शुल्क दंत परीक्षण किया गया।

संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ में बताया कि, शाइन इंडिया फाउंडेशन के दो माह के पायलट प्रोजेक्ट, मिशन सबल भारत के तहत आगामी दो माह में, संस्था के द्वारा राजकीय विद्यालयों में कक्षा 8 से 12 के छात्र-छात्राओं का नि:शुल्क नेत्र एवं दंत चिकित्सा परीक्षण किया गया,साथ ही दृष्टि दोष युक्त चयनित बच्चों को नि:शुल्क चश्मा का वितरण भी किया गया।

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत विज्ञान नगर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में ऑप्टोमेट्रिस्ट जी डी गुप्ता के सहयोग से बच्चों में दृष्टि दोष की जांच की गई,और दंत चिकित्सक डॉ ज्योति चौरसिया ने बच्चों के दांतों की जाँच की, और बच्चों को सही तरह से दांतों की देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।

प्रधानाचार्य अनीता शर्मा ने अंत में संस्था सदस्यों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि,सही उम्र में सही इलाज मिलने से, काफी हद तक कम उम्र में होने वाली अंधता को रोका जा सकता है। अच्छे आत्मविश्वास और अच्छी लीडरशिप के लिए, जीवन में आगे बढ़ने के लिए मन और शरीर दोनों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है।

डॉ ज्योति ने कहा कि,जब चेहरे पर अच्छी मुस्कान रहेगी और आँखों में अच्छी रोशनी रहेगी, तो बच्चे में अपने आप ही एक अच्छा कॉन्फिडेंस दिखेगा। ऐसा बच्चा न सिर्फ स्कूल में अच्छा स्कोर करेगा, बल्कि जीवन में भी बहुत अच्छे कार्य कर सकेगा।

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