आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
21 अक्टूबर 2026
दिल्ली में पुलिसकर्मी द्वारा हमला एवं मारपीट, दिल्ली पुलिस द्वारा FIR दर्ज नहीं करने पर जयपुर में Zero FIR दर्ज कराने का विधिक अधिकार
नेत्रदान के लिए कोटा से बारां पहुंची शाइन इंडिया
नेत्रदान के लिए कोटा से बारां पहुंची शाइन इंडिया
कॉर्निया की अंधता का दुख भोग रहे मरीजों के लिए, नेत्रदान ही एक माध्यम है । सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण के माध्यम से, दृष्टि बाधित व्यक्तियों के जीवन से अंधकार को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है ।
इसी क्रम में आज, सत्संग रोड बारां निवासी सुरेश चंद्र जैन के आकस्मिक निधन की सूचना भारत विकास परिषद के सदस्य रमाकांत गुप्ता और कमलेश जैन के माध्यम से कोटा में शाइन इंडिया फाउंडेशन, व बीबीजे चैप्टर के डॉ कुलवंत गौड़ को मिली । रमाकांत ने बताया कि, पारिवार के सदस्यों ने स्व प्रेरणा से स्व०पिताजी के नेत्रदान का निर्णय लिया है ।
चिकित्सकीय जानकारी लेने के उपरांत,कोटा से डॉ गौड़ नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ लेकर, तुरंत कोटा से रवाना हुए और शवयात्रा निकलने से ठीक पूर्व निवास स्थान पर पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया परिवार के सभी सदस्यों के बीच में संपन्न की।
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम जि़म्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम जि़म्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ (41)
और उनमें से बाज़ ऐसे हैं कि तुम्हारी ज़बानों की तरफ कान लगाए रहते हैं तो (क्या) वह तुम्हारी सुन लेगें हरगिज़ नहीं अगरचे वह कुछ समझ भी न सकते हो (42)
तुम कही बहरों को कुछ सुना सकते हो और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो तुम्हारी तरफ (टकटकी बाँधे) देखते हैं तो (क्या वह इमान लाएँगें हरगिज़ नहीं) अगरचे उन्हें कुछ न सूझता हो तो तुम अन्धे को राहे रास्त दिखा दोगे (43)
ख़ुदा तो हरगिज़ लोगों पर कुछ भी ज़ुल्म नहीं करता मगर लोग खुद अपने ऊपर (अपनी करतूत से) जुल्म किया करते है (44)
और जिस दिन ख़़ुदा इन लोगों को (अपनी बारगाह में) जमा करेगा तो गोया ये लोग (समझेगें कि दुनिया में) बस घड़ी दिन भर ठहरे और आपस में एक दूसरे को पहचानेंगे जिन लोगों ने ख़ुदा की बारगाह में हाजि़र होने को झुठलाया वह ज़रुर घाटे में हैं और हिदायत याफता न थे (45)
ऐ रसूल हम जिस जिस (अज़ाब) का उनसे वायदा कर चुके हैं उनमें से बाज़ ख़्वाहा तुम्हें दिखा दें या तुमको (पहले ही दुनिया से) उठा ले फिर (आखि़र) तो उन सबको हमारी तरफ लौटना ही है फिर जो कुछ ये लोग कर रहे हैं ख़ुदा तो उस पर गवाह ही है (46)
और हर उम्मत का ख़ास (एक) एक रसूल हुआ है फिर जब उनका रसूल (हमारी बारगाह में) आएगा तो उनके दरम्यिान इन्साफ़ के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा बराबर ज़़ुल्म न किया जाएगा (47)
ये लोग कहा करते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आखि़र) ये (अज़ाब का वायदा) कब पूरा होगा (48)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै खुद अपने वास्ते नुकसान पर क़ादिर हूँ न नफा पर मगर जो ख़ुदा चाहे हर उम्मत (के रहने) का (उसके इल्म में) एक वक़्त मुक़र्रर है-जब उन का वक़्त आ जाता है तो न एक घड़ी पीछे हट सकती हैं और न आगे बढ़ सकते हैं (49)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो कि अगर उसका अज़ाब तुम पर रात को या दिन को आ जाए तो (तुम क्या करोगे) फिर गुनाहगार लोग आखि़र काहे की जल्दी मचा रहे हैं (50)
20 अक्टूबर 2026
नारा हूँ ना , महिला हूँ ना, कर सकती हूँ , लड़ सकती हूँ , इस नारे को बुलंद करते हुए , देश भर में अपराध घटनाओ की सिटी कहे जाने वाले ,,कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गौतम , उनकी टीम ने ,, मुंबई में टाइगर श्रॉफ के हमलावरों को चुटकियों में पकड़ लिया ,, इस बहादुरी , समझदारी , बेस्ट पुलिसिंग के लिए निश्चित तोर पर वोह ,, उनकी टीम मुबारकबाद की हक़दार है , बधाई की पात्र है
नारा हूँ ना , महिला हूँ ना, कर सकती हूँ , लड़ सकती हूँ , इस नारे को बुलंद करते हुए , देश भर में अपराध घटनाओ की सिटी कहे जाने वाले ,,कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गौतम , उनकी टीम ने ,, मुंबई में टाइगर श्रॉफ के हमलावरों को चुटकियों में पकड़ लिया ,, इस बहादुरी , समझदारी , बेस्ट पुलिसिंग के लिए निश्चित तोर पर वोह ,, उनकी टीम मुबारकबाद की हक़दार है , बधाई की पात्र है ,, तेजस्वी गौतम पुलिस अधीक्षक के साथ साथ , ब्रेवो वूमेन ,,बहुमुखी प्रतिभा की धनी भी हैं , लेकिन कोटा की सियासत ने उन्हें कोटा में उलझा कर रख दिया , और वोह चाहकर भी बहुत कुछ प्रयासों के बावजूद भी क़ानून व्यवस्थाओं , ,ब्लाइंड मर्डर , सहित डकैती , लूट , अन्य गंभीर घटनाओं की परतें खोलने में उलझकर रह गयीं , चुनावों में भी उनकी स्थिति दबाव में रही , ,खेर फिर भी तेजस्वी गौतम ने बंधे हुए हाथों के बावजूद भी , कोटा के लिए बहुत कुछ करने का प्रयास किया ,, लेकिन यह टाइगर के हमलावरों की गिरफ्तारी निश्चित तोर पर , बढ़ी कार्यवाही है , क्योंकि यह गेंग जब ट्रेन में आई, तो बीच में कई स्टेशन पढ़ते है , चाहते तो उन्हें रास्ते में ही रोका जा सकता था , जो दूसरे लोग , रेलवे पुलिस नहीं कर सकी ,, खेर इस कामयाबी के लिए कोटा की पुलिसिंग का नाम रोशन हुआ है ,, तेजस्वी गौतम आई पी एस एक जाना माना नाम , स्मैक तस्करों के खिलाफ , नशीले पदार्थों के आदतन अपराधियों के खिलाफ ,, इनकी पुलिसिंग के क़िस्से सभी जानते है , लेकिन कोटा में ज़मीन जायदाद , रुपयों के लेनदेन , ठगी , साइबर ठगी , चाकूबाजी , गोलीबारी , फिर चुनाव जैसे मामलों के अलावा सियासी दबाव में ही वोह उलझ गईं , तेजस्वी गौतम डरी भी नहीं, दबी भी नहीं , लेकिन नौकरी तो नौकरी है , कोशिशों के बावजूद भी , नशामुक्ति और नशे के व्यापरियों के खिलाफ बढ़ा वृहद अभियान नहीं चला पाईं ,, महिला सुरक्षा , आत्म स्वावलम्बी , की कार्य योजनाएं भी नहीं चली , नशे के खिलाफ मोटिवेशनल नाटक ,, प्रहसन के ज़रीये कार्य्रकम नहीं हो सके , लेकिन फिर भी जो कुछ भी किया बेहतर किया ,, अब तो वोह , पदोन्नत होकड, डी आई जी हो गई है , केडर आते ही उनकी ससम्मान विदाई भी हो जायेगी , लेकिन कोटा में , कोटा के लोगों को अपराधों से बचाने के लिए नोजवानों को जानलेवा नशे से बचाने के लिए , स्मैक के आदतन लोगों द्वारा परिवार के परिवार तबाह करने , और मोहल्लों , गलियों में छूट पुट चोरी अपराध बचाने के लिए ,,,,,जो लोग हार्डकोर क्रिमिनल है , जो गवाहों को होस्टाइल करवाकर , ज़मानत ले लेते हैं , या फिर बरी हो जाते है , उन्हें सज़ा दिलवाने के लिए , अपंने नियंत्रण में विधिक पैरोकारों के साथ मिलकर उन्हें अंतिम समय तक हर हाल में सज़ा दिलवाने की जो उनकी कार्ययोजना थी , उसे वोह चाहकर भी पूरा नहीं कर पा रही हैं , क्योंकि सियासी दबाव तो है ही , होता भी है , लेकिन वोह इसे मैनेज कर लेती है , ,बस , कभी वी वी आई पी ड्यूटी , कभी मीटिंगे , कभी मेले , कभी ठेले , कभी बढ़ी दुर्घटनाएं , कभी बढ़ी घटनाएं ,, चुनाव वगेरा इन्हीं की क़ानून व्यवस्था ड्यूटियों में वोह , उनकी पुलिस टीम उलझ कर रह गई , और कोटा को नशा मुक्त करने, , आत्महत्या मुक्त करने ,, अपराध मुक्त करने , स्मैकचियों की आपराधिक घटनाओं से कोटा को मुक्त करने का उनका सपना , पूरी कोशिशों के बावजूद भी आधा अधूरा रहा , हालात यह हुए के पुलिस जवान नशे की तस्करी में पकड़े गए, शराब के नशे में महिला डॉक्टर से अभद्रता करते पकड़े गए, लेकिन हार्डकोर अपराधियों , आर्थिक अपराधियों , गवाह मांडोली ,, गवाह खरीद फरोख्त , के ज़रिये , मजिस्ट्रेट के समक्ष बयानों के बाद भी गवाह मुकर कर , होस्टाइल होकर, घटना से इंकार कर अपराधियों को बरी करवा रहे हैं , ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान देकर मुकरने वालों के खिलाफ भी वोह क़ानूनी कार्यवाही कर होस्टाइल होने वाले गवाहों में खौफ पैदा करना चाहती थी ,, होस्टाइल गवाह के बावजूद भी बेहतर अनुसंधान ,, बेहतर अनुसंधान के बाद , कोर्ट में बेहतर तरीके से पैरवी ,,बेहतर न्यायिक दृष्टांतों के साथ बहस करवाकर वोह हार्डकोर अपराधियों को सज़ा दिलवाना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होंने कोशिशें भी कीं, लेकिन उनके ओहदे में बुलंदी , प्रमोशन तो हुआ , हार्डकोर अपराधियों को हर हाल में सज़ा दिलवाकर उन्हें सबक़ दिलाने , नशामुक्त कोटा , अपराध मुक्त कोटा का सपना, वोह पूरा करने की हर सम्भव कोशिशों के बावजूद भी सियासी दखल अंदाज़ी कहो , या अन्य कार्यों में व्यस्तता कहो , लेकिन बहुत कुछ करने के बावजूद भी बहुत कुछ नहीं कर पायीं ,, कोटा की जनता अभी भी उनसे अपेक्षा करती है , उनकी पदोन्नति के लिए दुआएं करती है , लेकिन कहते हैं ना लड़की हूँ, कर सकती हूँ , तो वोह डी आई जी पद पर जाने के पहले ,, एक बार फिर लेडी सिंघम बनकर अगर अपने सपनों को साकार करने की क्रियान्विति के प्रयासों के तहत , नशामुक्त कोटा ,, अपराध मुक्त कोटा, सियासी दखलंदाज़ी मुक्त ,कोटा ,, हार्डकोर अपराधियों को हर हाल में अदालत तक बेहतर पैरवी करवाकर सज़ा दिलवाने का जो उनका अभियान है, करें तो सही , कोटा की जनता उनके इन कार्यों में मददगार बनने के लिए पलक पावणे बिछा कर खडी है ,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
फिर वही ख़ुदा तो तुम्हारा सच्चा रब है फिर हक़ बात के बाद गुमराही के सिवा और क्या है फिर तुम कहाँ फिरे चले जा रहे हो
ऐ रसूल तुम उने ज़रा पूछो तो कि तुम्हें आसमान व ज़मीन से कौन रोज़ी देता है या (तुम्हारे) कान और (तुम्हारी) आँखों का कौन मालिक है और कौन शख़्स मुर्दे से जि़न्दा को निकालता है और जि़न्दा से मुर्दे को निकालता है और हर अम्र (काम) का बन्दोबस्त कौन करता है तो फौरन बोल उठेंगे कि ख़ुदा (ऐ रसूल) तुम कहो तो क्या तुम इस पर भी (उससे) नहीं डरते हो (31)
फिर वही ख़ुदा तो तुम्हारा सच्चा रब है फिर हक़ बात के बाद गुमराही के सिवा और क्या है फिर तुम कहाँ फिरे चले जा रहे हो (32)
ये तुम्हारे परवरदिगार की बात बदचलन लोगों पर साबित होकर रही कि ये लोग हरगिज़ इमान न लाएँगें (33)
(ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि तुम ने जिन लोगों को (ख़ुदा का) शररीक बनाया है कोई भी ऐसा है जो मख़लूकात को पहली बार पैदा करे फिर उन को (मरने के बाद) दोबारा जि़न्दा करे (तो क्या जवाब देगें) तुम्ही कहो कि ख़ुदा ही पहले भी पैदा करता है फिर वही दोबारा जि़न्दा करता है तो किधर तुम उल्टे जा रहे हो (34)
(ऐ रसूल उनसे) कहो तो कि तुम्हारे (बनाए हुए) शरीकों में से कोई ऐसा भी है जो तुम्हें (दीन) हक़ की राह दिखा सके तुम ही कह दो कि (ख़ुदा) दीन की राह दिखाता है तो जो तुम्हे दीने हक़ की राह दिखाता है क्या वह ज़्यादा हक़दार है कि उसके हुक्म की पैरवी की जाए या वह शख़्स जो (दूसरे) की हिदायत तो दर किनार खुद ही जब तक दूसरा उसको राह न दिखाए राह नही देख पाता तो तुम लोगों को क्या हो गया है (35)
तुम कैसे हुक्म लगाते हो और उनमें के अक्सर तो बस अपने गुमान पर चलते हैं (हालाकि) गुमान यक़ीन के मुक़ाबले में हरगिज़ कुछ भी काम नहीं आ सकता बेषक वह लोग जो कुछ (भी) कर रहे हैं खुदा उसे खूब जानता है (36)
और ये कुरान ऐसा नहीं कि खुदा के सिवा कोई और अपनी तरफ से झूठ मूठ बना डाले बल्कि (ये तो) जो (किताबें) पहले की उसके सामने मौजूद हैं उसकी तसदीक़ और (उन) किताबों की तफ़सील है उसमें कुछ भी शक नहीं कि ये सारे जहाँन के परवरदिगार की तरफ से है (37)
क्या ये लोग कहते हैं कि इसको रसूल ने खुद झूठ मूठ बना लिया है (ऐ रसूल) तुम कहो कि (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (भला) एक ही सूरा उसके बराबर का बना लाओ और ख़ुदा के सिवा जिसको तुम्हें (मदद के वास्ते) बुलाते बन पड़े बुला लो (38)
(ये लोग लाते तो क्या) बल्कि (उलटे) जिसके जानने पर उनका हाथ न पहुँचा हो लगे उसको झुठलाने हालाकि अभी तक उनके जे़हन में उसके मायने नहीं आए इसी तरह उन लोगों ने भी झुठलाया था जो उनसे पहले थे-तब ज़रा ग़ौर तो करो कि (उन) ज़ालिमों का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ (39)
और उनमें से बाज़ तो ऐसे है कि इस कु़रान पर आइन्दा ईमान लाएगें और बाज़ ऐसे हैं जो ईमान लाएगें ही नहीं (40)