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02 जुलाई 2026

अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ ने नए अधीक्षक डॉ. राकेश सिंह का किया भव्य स्वागत

 

अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ ने नए अधीक्षक डॉ. राकेश सिंह का किया भव्य स्वागत
कोटा 2 जुलाई 2026 । अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के पदाधिकारियों ने समाजसेवी डॉ दुर्गा शंकर सैनी के नेतृत्व में एमबीएस अस्पताल के नवनियुक्त अधीक्षक डॉ. राकेश सिंह का माला पहनाकर, साफा बांधकर एवं मुंह मीठा करवाकर स्वागत किया।
इस अवसर पर प्रदेश महासचिव डॉ. दुर्गा शंकर सैनी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेंद्र नागर, पूर्व अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा, सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित गोयल, जिला महासचिव डॉ. राजेश सामर सहित कई चिकित्सक उपस्थित रहे।
इस दौरान डॉ. राकेश सिंह ने कहा कि संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा। सभी चिकित्सकों और कर्मचारियों को साथ लेकर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि दूर-दराज से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को एक ही छत के नीचे सभी आवश्यक सुविधाएं मिलें, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े।
डॉ सैनी ने बताया कि 20 वर्ष पहले पिता अध्यक्ष थे अब बेटा अधीक्षक बना है

रामस्वरूप मीणा के नेतृत्व में गठित टीम ने यह सफलता हासिल की। मुखबिर की सूचना पर बिछाया जाल

 

ऑडी छोड़ खेतों में भागा हथियारबंद युवक, सीआई रामस्वरूप मीणा की सटीक घेराबंदी में चढ़ा हत्थे; इंग्लैंड भागने की साजिश नाकाम
के.डी. अब्बासी
कोटा, 2 जुलाई। रेलवे कॉलोनी थाना पुलिस ने अवैध हथियारों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से एक अवैध देशी पिस्टल, एक जिंदा कारतूस तथा ऑडी कार जब्त की है। आरोपी पुलिस की नाकाबंदी देखकर अपनी लग्जरी कार सड़क पर छोड़ खेतों के रास्ते फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने लगातार पीछा कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधीक्षक कोटा शहर तेजस्वनी गौतम ने बताया कि शहर में अवैध गतिविधियों और वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद मिश्रा एवं वृत्ताधिकारी द्वितीय डॉ. पूनम के निर्देशन में रेलवे कॉलोनी थाना प्रभारी सीआई रामस्वरूप मीणा के नेतृत्व में गठित टीम ने यह सफलता हासिल की।
मुखबिर की सूचना पर बिछाया जाल
30 जून को पुलिस को सूचना मिली कि कैथून निवासी अमृतपाल ऑडी कार (आरजे-20-सीजे-9083) में अवैध हथियार लेकर चन्द्रेशल रोड से खारी बावड़ी की ओर आने वाला है। सूचना मिलते ही एसएल गार्डन के पास नाकाबंदी की गई। जैसे ही संदिग्ध ऑडी कार पहुंची, चालक पुलिस को देखकर कार छोड़कर खेतों की ओर भाग निकला।
पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उसमें एक अवैध देशी पिस्टल और एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। हथियार, कारतूस और ऑडी कार को जब्त कर आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
तकनीकी सहायता से दबोचा आरोपी
सीआई रामस्वरूप मीणा के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने मुखबिर तंत्र, तकनीकी सहायता और लगातार दबिश देकर फरार आरोपी अमृतपाल (23) निवासी मूलतः किशनगंज (बारां) एवं हाल निवासी कैथून को 1 जुलाई को नया नोहरा ओवरब्रिज के पास से गिरफ्तार कर लिया।
पंजाबी गानों के शौक ने बनाया हथियारों का दीवाना
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी को पंजाबी गानों और उनमें दिखाई जाने वाली हथियारों व महंगी कारों की संस्कृति का शौक था। उसने करीब एक वर्ष पहले एक शादी समारोह में किसी अज्ञात व्यक्ति से 80 हजार रुपये में अवैध पिस्टल और 10 कारतूस खरीदे थे। अधिकांश कारतूस वह शौकिया फायरिंग में खर्च कर चुका था।
पत्नी इंग्लैंड में, वहीं भागने की थी तैयारी
पुलिस के अनुसार आरोपी की पत्नी मुस्कान कौर इंग्लैंड में पढ़ाई और पार्ट टाइम नौकरी करती है। आरोपी चाहता था कि उसकी गर्भवती पत्नी की डिलीवरी इंग्लैंड में हो ताकि बच्चे को वहां की नागरिकता मिल सके। उसने पासपोर्ट और वीजा भी बनवा रखा था। पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज होने के बाद आरोपी नया नोहरा ओवरब्रिज से दिल्ली पहुंचकर इंग्लैंड फरार होने की फिराक में था, लेकिन इससे पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
कार्रवाई में शामिल टीम
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी सीआई रामस्वरूप मीणा, उपनिरीक्षक देवेन्द्र कुमार, महेन्द्र कुमार तथा दिगम्बर, विनोद, राजेन्द्र कुमार, मदनलाल और लक्ष्मण सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

बेषक जिन लोगों नें कुफ्र एख़्तेयार किया और कुफ्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तो की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा इसी फटकार में रहेंगे

 बेषक जिन लोगों नें कुफ्र एख़्तेयार किया और कुफ्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तो की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा इसी फटकार में रहेंगे (161)
न तो उनके अज़ाब ही में तख़्फ़ीफ़ {कमी} की जाएगी (162)
और न उनको अज़ाब से मोहलत दी जाएगी और तुम्हारा माबूद तो वही यकता ख़ुदा है उस के सिवा कोई माबूद नहीं जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है (163)
बेशक आसमान व ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के रद्दो बदल कश्तियों (जहाज़ों) में जो लोगों के नफे़ की चीज़े (माले तिजारत वगै़रह दरिया) में ले कर चलते हैं और पानी में जो ख़ुदा ने आसमान से बरसाया फिर उस से ज़मीन को मुर्दा (बेकार) होने के बाद जिला दिया (शादाब कर दिया) और उस में हर कि़स्म के जानवर फैला दिये और हवाओं के चलाने में और अब्र में जो आसमान व ज़मीन के दरमियान ख़ुदा के हुक्म से घिरा रहता है (इन सब बातों में) अक़्ल वालों के लिए बड़ी बड़ी निशनियाँ हैं (164)
और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो ख़़ुदा के सिवा औरों को भी ख़ुदा का मिसल व शरीक बनाते हैं (और) जैसी मोहब्बत ख़ुदा से रखनी चाहिए वैसी ही उन से रखते हैं और जो लोग ईमानदार हैं वह उन से कहीं बढ़ कर ख़ुदा की उलफ़त रखते हैं और काश ज़ालिमों को (इस वक़्त) वह बात सूझती जो अज़ाब देखने के बाद सूझेगी कि यक़ीनन हर तरह की क़ूवत ख़ुदा ही को है और ये कि बेशक ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब वाला है (165)
(वह क्या सख़्त वक़्त होगा) जब पेशवा लोग अपने पैरवो से अपना पीछा छुड़ाएगे और अपनी आखों से (चश्में ख़ुद) अज़ाब को देखेगें और उनके बाहमी ताल्लुक़ात टूट जाएँगे (166)
और पैरव कहने लगेंगे कि अगर हमें कहीं फिर (दुनिया में) पलटना मिले तो हम भी उन से इसी तरह अलग हो जायेंगे जिस तरह एैन वक़्त पर ये लोग हम से अलग हो गए यूँ ही ख़ुदा उन के आमाल को दिखाएगा जो उन्हें (सर तापा पास ही) पास दिखाई देंगें और फिर भला कब वह दोज़ख़ से निकल सकतें हैं (167)
ऐ लोगों जो कुछ ज़मीन में हैं उस में से हलाल व पाकीज़ा चीज़ (शौक़ से) खाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तो तुम्हारा ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है (168)
वह तो तुम्हें बुराई और बदकारी ही का हुक्म करेगा और ये चाहेगा कि तुम बे जाने बूझे ख़ुदा पर बोहतान बाँधों (169)
और जब उन से कहा जाता है कि जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से नाजि़ल हुआ है उस को मानो तो कहते हैं कि नहीं बल्कि हम तो उसी तरीक़े पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे उन के बाप दादा कुछ भी न समझते हों और न राहे रास्त ही पर चलते रहे हों (170)

01 जुलाई 2026

तीन पीढ़ियों से कायम है विधि साधना की परंपरा: न्यायिक दृष्टांतों के दम पर मुकदमों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र गुप्ता वरिष्ठ एडवोकेट अख्तर खान अकेला की कलम से

 

तीन पीढ़ियों से कायम है विधि साधना की परंपरा: न्यायिक दृष्टांतों के दम पर मुकदमों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र गुप्ता
वरिष्ठ एडवोकेट अख्तर खान अकेला की कलम से
कोटा।
वकालत केवल डिग्री हासिल कर लेने का नाम नहीं, बल्कि कानून की गहरी समझ, न्यायिक दृष्टांतों का अध्ययन, तार्किक बहस और अपने मुवक्किल के पक्ष को पूरी तैयारी के साथ न्यायालय के समक्ष रखने की कठिन साधना है। यही सिद्धांत कोटा के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र गुप्ता पिछले कई दशकों से निभाते आ रहे हैं।
यह परंपरा उन्हें अपने पिता, दिवंगत वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण गोपाल गुप्ता से विरासत में मिली है। कृष्ण गोपाल गुप्ता अपनी सादगी, मृदुभाषिता और विधि के गहन ज्ञान के लिए प्रसिद्ध थे। वे राजस्थान बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्य भी रहे तथा चुनाव याचिकाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण मामलों में उनकी विशेष पहचान थी। कांग्रेस हो या भाजपा, चुनावी दौर में उनकी कानूनी सलाह को विशेष महत्व दिया जाता था।
कृष्ण गोपाल गुप्ता का स्पष्ट सिद्धांत था कि न्यायालय में केवल केस की फाइल ही नहीं, बल्कि उससे संबंधित न्यायिक दृष्टांतों (जजमेंट्स) की पुस्तकें भी साथ जानी चाहिए। उस समय हाथ से लिखी नकलों का दौर था, बाद में फोटोकॉपी का युग आया और अब इंटरनेट व ई-लाइब्रेरी का समय है, लेकिन उनकी यह कार्यशैली कभी नहीं बदली।
आज भी वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र गुप्ता इसी अनुशासन का पालन करते हैं। प्रतिदिन उनके कार्यालय से संबंधित मामलों की फाइलों के साथ न्यायिक दृष्टांतों से भरे कई बस्ते ऑटो के माध्यम से न्यायालय पहुंचाए जाते हैं। बहस के दौरान आवश्यक होने पर संबंधित विधि पुस्तकों और निर्णयों का हवाला देकर अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। यह कार्य उनके सहयोगी मुंशी मांगीलाल की नियमित एवं व्यवस्थित मेहनत से संभव हो पाता है।
विशेष बात यह है कि गुप्ता परिवार की तीसरी पीढ़ी भी अब वकालत के क्षेत्र में सक्रिय है और कानून की पुस्तकों के अध्ययन तथा न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर बहस करने की यह परंपरा आज भी पूरी निष्ठा के साथ जारी है।
ऐसे समय में, जब कई युवा अधिवक्ता केवल डिजिटल संसाधनों या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं, वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र गुप्ता की कार्यशैली यह संदेश देती है कि कानून की गहराई, पुस्तकों का अध्ययन और न्यायिक दृष्टांतों की ठोस तैयारी ही प्रभावी एवं सफल वकालत की वास्तविक पहचान है।
कोटा न्यायालय परिसर में गुप्ता परिवार की यह अनुशासित विधि साधना आज भी युवा अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणा और अनुकरण का विषय बनी हुई है।
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बस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा जि़क्र (खै़र) किया करुगाँ और मेरा शुक्रिया अदा करते रहो और नाशुक्री न करो

 और तीसरा फायदा ये है ताकि तुम हिदायत पाओ मुसलमानों ये एहसान भी वैसा ही है जैसे हम ने तुम में तुमही में का एक रसूल भेजा जो तुमको हमारी आयतें पढ़ कर सुनाए और तुम्हारे नफ़्स को पाकीज़ा करे और तुम्हें किताब क़ुरान और अक़्ल की बातें सिखाए और तुम को वह बातें बतांए जिन की तुम्हें पहले से खबर भी न थी (151)
बस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा जि़क्र (खै़र) किया करुगाँ और मेरा शुक्रिया अदा करते रहो और नाशुक्री न करो (152)
ऐ ईमानदारों मुसीबत के वक़्त सब्र और नमाज़ के ज़रिए से ख़ुदा की मदद माँगों बेशक ख़ुदा सब्र करने वालों ही का साथी है (153)
और जो लोग ख़ुदा की राह में मारे गए उन्हें कभी मुर्दा न कहना बल्कि वह लोग जि़न्दा हैं मगर तुम उनकी जि़न्दगी की हक़ीकत का कुछ भी शऊर नहीं रखते (154)
और हम तुम्हें कुछ खौफ़ और भूख से और मालों और जानों और फलों की कमी से ज़रुर आज़माएगें और (ऐ रसूल) ऐसे सब्र करने वालों को खुशख़बरी दे दो (155)
कि जब उन पर कोई मुसीबत आ पड़ी तो वह (बेसाख़्ता) बोल उठे हम तो ख़ुदा ही के हैं और हम उसी की तरफ लौट कर जाने वाले हैं (156)
उन्हीं लोगों पर उनके परवरदिगार की तरफ से इनायतें हैं और रहमत और यही लोग हिदायत याफ़्ता है (157)
बेशक (कोहे) सफ़ा और (कोह) मरवा ख़ुदा की निशानियों में से हैं बस जो शख़्स ख़ानए काबा का हज या उमरा करे उस पर उन दोनो के (दरमियान) तवाफ़ (आमद ओ रफ्त) करने में कुछ गुनाह नहीं (बल्कि सवाब है) और जो शख़्स खुश खुश नेक काम करे तो फिर ख़ुदा भी क़द्रदान (और) वाकि़फ़कार है (158)
बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को जिन्हें हमने नाजि़ल किया उसके बाद छिपाते हैं जबकि हम किताब तौरैत में लोगों के सामने साफ़ साफ़ बयान कर चुके हैं तो यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा भी लानत करता है और लानत करने वाले भी लानत करते हैं (159)
मगर जिन लोगों ने (हक़ छिपाने से) तौबा की और अपनी ख़राबी की इसलाह कर ली और जो किताबे ख़ुदा में है साफ़ साफ़ बयान कर दिया बस उन की तौबा मै क़ुबूल करता हूँ और मै तो बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान हूँ (160)

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