डाइट कोटा में नेत्रदान एवं अंगदान जनजागरूकता अभियान को लेकर हुई महत्वपूर्ण चर्चा
कोटा, जून।
जिला
शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), कोटा में आयोजित अधिकारियों की बैठक
के दौरान विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में नेत्रदान एवं अंगदान
जागरूकता अभियान संचालित करने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
बैठक
में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों
को नेत्रदान एवं अंगदान के प्रति जागरूक करने के लिए विद्यालय स्तर पर
नियमित कार्यशालाएँ, प्रेरक व्याख्यान एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए
जाएँ। साथ ही समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर कर अधिक से अधिक लोगों को
मानव सेवा के इस महाअभियान से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
शाइन
इंडिया फाउंडेशन ने डाइट प्रशासन के इस सकारात्मक प्रयास का स्वागत करते
हुए कहा कि यदि शिक्षा विभाग के माध्यम से यह अभियान संचालित किया जाता है
तो लाखों विद्यार्थियों एवं उनके परिवारों तक नेत्रदान एवं अंगदान का संदेश
प्रभावी रूप से पहुँच सकेगा। फाउंडेशन ने विद्यालयों में विशेषज्ञों
द्वारा जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित करने तथा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की
भी सहमति व्यक्त की।
फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौर ने कहा कि
"शिक्षा
ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है। यदि विद्यार्थी
नेत्रदान एवं अंगदान के महत्व को समझेंगे तो वे अपने परिवार एवं समाज में
भी इस संदेश को पहुँचाकर अनेक लोगों का जीवन बचाने की प्रेरणा बनेंगे।"
उन्होंने
विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा विभाग एवं सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त
प्रयास से कोटा जिले में नेत्रदान एवं अंगदान के प्रति एक व्यापक
जनजागरूकता अभियान संचालित होगा, जिससे अधिकाधिक लोग इस महादान के लिए
संकल्पित होंगे। सहायक निदेशक महात्मा गांधी प्रकोष्ठ आदित्य विजय ने कोटा
संभाग के सभी विद्यालयों में बच्चों में अंगदान, नेत्रदान के प्रति
जागरूकता के लिए अभियान रूप में शाइन इंडिया फाउंडेशन से सहमति व्यक्त की।
बैठक
में उप निदेशक, महात्मा गांधी प्रकोष्ठ प्रेमचंद अजमेरा, मुख्य जिला
शिक्षा अधिकारी श्री कृष्ण गोपाल जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक)
श्री रूप सिंह मीणा, प्रधानाचार्य डाइट कोटा श्रीमती पवित्रा त्रिपाठी,
सहायक निदेशक श्री आदित्य विजय एवं श्री महेन्द्र चौधरी उपस्थित रहे।
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
26 जून 2026
डाइट कोटा में नेत्रदान एवं अंगदान जनजागरूकता अभियान को लेकर हुई महत्वपूर्ण चर्चा
(ऐ रसूल) हम जब कोई आयत मन्सूख़ करते हैं या तुम्हारे ज़ेहन से मिटा देते हैं तो उससे बेहतर या वैसी ही (और) नाजि़ल भी कर देते हैं क्या तुम नहीं जानते कि बेशुबहा खु़दा हर चीज़ पर क़ादिर है
और जब उनके पास खु़दा की तरफ से रसूल (मोहम्मद) आया और उस किताब (तौरेत) की
जो उनके पास है तसदीक़ भी करता है तो उन अहले किताब के एक गिरोह ने किताबे
खु़दा को अपने बस पुश्त फेंक दिया गोया वह लोग कुछ जानते ही नहीं और उस
मंत्र के पीछे पड़ गए (101)
जिसको सुलेमान के ज़माने की सलतनत में शयातीन जपा करते थे हालाँकि
सुलेमान ने कुफ्र नहीं इख़तेयार किया लेकिन शैतानों ने कुफ्र एख़तेयार किया
कि वह लोगों को जादू सिखाया करते थे और वह चीज़ें जो हारूत और मारूत दोनों
फ़रिश्तों पर बाइबिल में नाजि़ल की गई थी हालाँकि ये दोनों फ़रिश्ते किसी
को सिखाते न थे जब तक ये न कह देते थे कि हम दोनों तो फ़क़त (ज़रियाए
आज़माइश) है बस तो (इस पर अमल करके) बेइमान न हो जाना इस पर भी उनसे वह
(टोटके) सीखते थे जिनकी वजह से मिया बीवी में तफ़रक़ा डालते हालाँकि बग़ैर
अज़्ने खु़दा बन्दी वह अपनी इन बातों से किसी को ज़रर नहीं पहुँचा सकते थे
और ये लोग ऐसी बातें सीखते थे जो खु़द उन्हें नुक़सान पहुँचाती थी बावजूद
कि वह यक़ीनन जान चुके थे कि जो शख़्स इन (बुराईयों) का ख़रीदार हुआ वह
आखि़रत में बेनसीब हैं और बेशुबह (मुआवज़ा) बहुत ही बड़ा है जिसके बदले
उन्होंने अपनी जानों को बेचा काश (इसे कुछ) सोचे समझे होते (102)
और अगर वह ईमान लाते और जादू वग़ैरह से बचकर परहेज़गार बनते तो खु़दा
की दरगाह से जो सवाब मिलता वह उससे कहीं बेहतर होता काश ये लोग (इतना तो)
समझते (103)
ऐ ईमानवालों तुम (रसूल को अपनी तरफ मुतावज्जे करना चाहो तो) रआना
(हमारी रिआयत कर) न कहा करो बल्कि उनज़ुरना (हम पर नज़रे तवज्जो रख) कहा
करो और (जी लगाकर) सुनते रहो और काफिरों के लिए दर्दनाक अज़ाब है (104)
ऐ रसूल अहले किताब में से जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार किया वह और
मुशरेकीन ये नहीं चाहते हैं कि तुम पर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से भलाई
(वही) नाजि़ल की जाए और (उनका तो इसमें कुछ इजारा नहीं) खु़दा जिसको चाहता
है अपनी रहमत के लिए ख़ास कर लेता है और खु़दा बड़ा फज़ल (करने) वाला है
(105)
(ऐ रसूल) हम जब कोई आयत मन्सूख़ करते हैं या तुम्हारे ज़ेहन से मिटा
देते हैं तो उससे बेहतर या वैसी ही (और) नाजि़ल भी कर देते हैं क्या तुम
नहीं जानते कि बेशुबहा खु़दा हर चीज़ पर क़ादिर है (106)
क्या तुम नहीं जानते कि आसमान की सलतनत बेशुबहा ख़ास खु़दा ही के लिए
है और खु़दा के सिवा तुम्हारा न कोई सरपरस्त है न मददगार (107)
(मुसलमानों) क्या तुम चाहते हो कि तुम भी अपने रसूल से वैसै ही
(बेढ़ंगे) सवालात करो जिस तरह साबिक़ (पहले) ज़माने में मूसा से (बेतुके)
सवालात किए गए थे और जिस शख़्स ने इमान के बदले कुफ्र एख़तेयार किया वह तो
यक़ीनी सीधे रास्ते से भटक गया (108)
(मुसलमानों) अहले किताब में से अक्सर लोग अपने दिली हसद की वजह से ये
ख़्वाहिश रखते हैं कि तुमको ईमान लाने के बाद फिर काफि़र बना दें (और लुत्फ
तो ये है कि) उन पर हक़ ज़ाहिर हो चुका है उसके बाद भी (ये तमन्ना बाक़ी
है) बस तुम माफ करो और दरगुज़र करो यहाँ तक कि खु़दा अपना (कोई और) हुक्म
भेजे बेशक खु़दा हर चीज़ पर क़ादिर है (109)
और नमाज़ पढ़ते रहो और ज़कात दिये जाओ और जो कुछ भलाई अपने लिए (खु़दा
के यहाँ) पहले से भेज दोगे उस (के सवाब) को मौजूद पाआगे जो कुछ तुम करते हो
उसे खु़दा ज़रूर देख रहा है (110)
25 जून 2026
जिले के नेत्रदानी परिवार होंगे सम्मानित,आई बैंक सोसायटी- बीबीजे चैप्टर और रोटरी क्लब करेगा सम्मान
जिले के नेत्रदानी परिवार होंगे सम्मानित,आई बैंक सोसायटी- बीबीजे चैप्टर और रोटरी क्लब करेगा सम्मान
2. मानवता की मिसाल बने,नेत्रदानी परिवारों का होगा सम्मान
बूंदी।
नेत्रदान के माध्यम से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में प्रकाश का
संचार करने वाले प्रेरणादायी नेत्रदानी परिवारों को सम्मानित करने के
उद्देश्य से,आई बैंक सोसायटी- बीबीजे चैप्टर,रोटरी क्लब, बूंदी एवं शाइन
इंडिया फाउंडेशन,कोटा के संयुक्त तत्वावधान में "नेत्रदानी परिजन सम्मान
समारोह" का आयोजन 28 जून 2026 (रविवार) को रोटरी क्लब सभागार, बूंदी में
किया जाएगा। इसमें वर्ष जनवरी 2025 से जून 2026 तक हुए, नेत्रदाताओं का
सम्मान किया जाएगा ।
इस समारोह में बूंदी जिले सहित आसपास के
क्षेत्रों के उन परिवारों का सार्वजनिक अभिनंदन किया जाएगा, जिन्होंने अपने
दिवंगत परिजनों की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान करवाकर मानवता
की अनुपम सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रत्येक नेत्रदानी परिवार को
प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मान प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम में
सम्माननीय अतिथि के तौर पर विधायक बूंदी श्री हरि मोहन जी शर्मा,शहर जिला
कलेक्टर श्री हर फूल सिंह यादव,शहर पुलिस अधीक्षक अवनिश शर्मा, जिला
अध्यक्ष रामेश्वर मीणा, अध्यक्ष शहरी विकास बैंक श्री सत्येश शर्मा उपस्थित
होंगे ।
और तुम्हारे पास मूसा तो वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ ही चुके थे फिर भी तुमने उनके बाद बछड़े को खु़दा बना ही लिया और उससे तुम अपने ही ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे
और जब उनसे कहा गया कि (जो क़ुरान) खु़दा ने नाजि़ल किया है उस पर ईमान लाओ
तो कहने लगे कि हम तो उसी किताब (तौरेत) पर ईमान लाए हैं जो हम पर नाजि़ल
की गई थी और उस किताब (कु़रान) को जो उसके बाद आई है नहीं मानते हैं
हालाँकि वह (क़ुरान) हक़ है और उस किताब (तौरेत) की जो उनके पास है तसदीक़
भी करती है मगर उस किताब कु़रान का जो उसके बाद आई है इन्कार करते हैं (ऐ
रसूल) उनसे ये तो पूछो कि तुम (तुम्हारे बुजुर्गों) अगर ईमानदार थे तो फिर
क्यों खु़दा के पैग़म्बरों का साबिक़ मे क़त्ल करते थे (91)
और तुम्हारे पास मूसा तो वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ ही चुके थे फिर
भी तुमने उनके बाद बछड़े को खु़दा बना ही लिया और उससे तुम अपने ही ऊपर
ज़ुल्म करने वाले थे (92)
और (वह वक़्त याद करो) जब हमने तुमसे अहद लिया और (क़ोहे) तूर को
(तुम्हारी उदूले हुक्मी से) तुम्हारे सर पर लटकाया और (हमने कहा कि ये
किताब तौरेत) जो हमने दी है मज़बूती से लिए रहो और (जो कुछ उसमें है) सुनो
तो कहने लगे सुना तो (सही लेकिन) हम इसको मानते नहीं और उनकी बेईमानी की
वजह से (गोया) बछड़े की उलफ़त घोल के उनके दिलों में पिला दी गई (ऐ रसूल)
उन लोगों से कह दो कि अगर तुम ईमानदार थे तो तुमको तुम्हारा ईमान क्या ही
बुरा हुक्म करता था (93)
(ऐ रसूल) इन लोगों से कह दो कि अगर खु़दा के नज़दीक आख़ेरत का घर
(बेहिश्त) ख़ास तुम्हारे वास्ते है और लोगों के वासते नहीं है बस अगर तुम
सच्चे हो तो मौत की आरजू़ करो (94)
(ताकि जल्दी बेहिश्त में जाओ) लेकिन वह उन आमाले बद की वजह से जिनको
उनके हाथों ने पहले से आगे भेजा है हरगिज़ मौत की आरज़ू न करेंगे और खु़दा
ज़ालिमों से खू़ब वाकि़फ है (95)
और (ऐ रसूल) तुम उन ही को जि़न्दगी का सबसे ज़्यादा हरीस पाओगे और
मुशरिक़ों में से हर एक शख़्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी
जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से
छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खु़दा उसे देख रहा है
(96)
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खु़दा
दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खु़दा के हुक्म से (इस कु़रान को)
तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले
नाजि़ल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते
खु़शख़बरी है (97)
जो शख़्स ख़ुदा और उसके फरिश्तों और उसके रसूलों और (ख़ासकर) जिबराईल व
मीकाइल का दुशमन हो तो बेशक खु़दा भी (ऐसे) काफि़रों का दुश्मन है (98)
और (ऐ रसूल) हमने तुम पर ऐसी निशानियाँ नाजि़ल की हैं जो वाजेए और रौशन
हैं और ऐसे नाफरमानों के सिवा उनका कोई इन्कार नहीं कर सकता (99)
और उनकी ये हालत है कि जब कभी कोई अहद किया तो उनमें से एक फरीक़ ने तोड़ डाला बल्कि उनमें से अक्सर तो ईमान ही नहीं रखते (100)
24 जून 2026
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