आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

18 जून 2026

27वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर नेत्रदान संकल्प

 27वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर नेत्रदान संकल्प
2. शहर में लगातार बढ़ रहा है नेत्रदान संकल्प पत्र भरने का कारवां

शाइन इंडिया फाउंडेशन व ईबीएसआर- बीबीजे चैप्टर के नेत्रदान जागरुकता अभियान से प्रेरित होकर, धोबी की गली गुरु नानक कॉलोनी बूंदी निवासी, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बलदेवपुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत मुकेश कुमार शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी कृष्णा कुमारी गौतम ने 27 वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर नेत्रदान का संकल्प पत्र भरा ।

मुकेश काफी सारे सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए हैं, शिक्षक संगठन में रहकर भी, शिक्षकों के अधिकार के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, काफी समय से शहर में चल रहे नेत्रदान अभियान से प्रेरणा लेकर उन्होंने संस्था शाइन इंडिया के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा को घर बुलाकर, सारी जानकारी लेने के उपरांत सपत्निक नेत्रदान का संकल्प पत्र भरा ।

शहर के अब तक 2770 लोग,नेत्रदान का संकल्प,और 42 लोग देहदान का संकल्प संस्था के साथ कर चुके हैं

ऐ लोगों अपने परवरदिगार की इबादत करो जिसने तुमको और उन लोगों को जो तुम से पहले थे पैदा किया है अजब नहीं तुम परहेज़गार बन जाओ

 ऐ लोगों अपने परवरदिगार की इबादत करो जिसने तुमको और उन लोगों को जो तुम से पहले थे पैदा किया है अजब नहीं तुम परहेज़गार बन जाओ (21)
जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन का बिछौना और आसमान को छत बनाया और आसमान से पानी बरसाया फिर उसी ने तुम्हारे खाने के लिए बाज़ फल पैदा किए बस किसी को खु़दा का हमसर न बनाओ हालाँकि तुम खू़ब जानते हो (22)
और अगर तुम लोग इस कलाम से जो हमने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर नाजि़ल किया है शक में पड़े हो बस अगर तुम सच्चे हो तो तुम (भी) एक सूरा बना लाओ और खु़दा के सिवा जो भी तुम्हारे मददगार हों उनको भी बुला लो (23)
बस अगर तुम ये नहीं कर सकते हो और हरगिज़ नहीं कर सकोगे तो उस आग से डरो जिसके ईधन आदमी और पत्थर होंगे और काफि़रों के लिए तैयार की गई है (24)
और जो लोग इमान लाए और उन्होंने नेक काम किए उनको (ऐ पैग़म्बर) खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए (बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरे जारी हैं जब उन्हें इन बाग़ात का कोई मेवा खाने को मिलेगा तो कहेंगे ये तो वही (मेवा है जो पहले भी हमें खाने को मिल चुका है) (क्योंकि) उन्हें मिलती जुलती सूरत व रंग के (मेवे) मिला करेंगे और बेहिश्त में उनके लिए साफ सुथरी बीवियाँ होगी और ये लोग उस बाग़ में हमेशा रहेंगे (25)
बेशक खु़दा मच्छर या उससे भी बढ़कर (हक़ीर चीज़) की कोई मिसाल बयान करने में नहीं झेंपता बस जो लोग ईमान ला चुके हैं वह तो यह यक़ीन जानते हैं कि ये (मिसाल) बिल्कुल ठीक है और ये परवरदिगार की तरफ़ से है (अब रहे) वह लोग जो काफि़र है बस वह बोल उठते हैं कि खु़दा का इस मिसाल से क्या मतलब है, ऐसी मिसाल से ख़ुदा बहुतेरों की हिदायत करता है मगर गुमराही में छोड़ता भी है तो ऐसे बदकारों को (26)
जो लोग खु़दा के एहदो पैमान को मज़बूत हो जाने के बाद तोड़ डालते हैं और जिन (ताल्लुक़ात) का खु़दा ने हुक्म दिया है उनको क़ताआ कर देते हैं और मुल्क में फसाद करते फिरते हैं, यही लोग घाटा उठाने वाले हैं (27)
(हाँए) क्यों कर तुम खु़दा का इन्कार कर सकते हो हालाँकि तुम (माओं के पेट में) बेजान थे तो उसी ने तुमको ज़िन्दा किया फिर वही तुमको मार डालेगा, फिर वही तुमको (दोबारा क़यामत में) जि़न्दा करेगा फिर उसी की तरफ लौटाए जाओगे (28)
वही तो वह (खु़दा) है जिसने तुम्हारे (नफ़े) के ज़मीन की कुल चीज़ों को पैदा किया फिर आसमान (के बनाने) की तरफ़ मुतावज्जेह हुआ तो सात आसमान हमवार (व मुसतहकम) बना दिए और वह (खु़दा) हर चीज़ से (खू़ब) वाकि़फ है (29)
और (ऐ रसूल) उस वक़्त को याद करो जब तुम्हारे परवरदिगार ने फ़रिश्तों से कहा कि मैं (अपना) एक नायब ज़मीन में बनानेवाला हूँ (फरिश्ते ताज्जुब से) कहने लगे क्या तू ज़मीन में ऐसे शख़्स को पैदा करेगा जो ज़मीन में फ़साद और खू़ँरेजि़याँ करता फिरे हालाँ तो कि (अगर) ख़लीफा बनाना है (तो हमारा ज़्यादा हक़ है) क्योंकि हम तेरी तारीफ व तसबीह करते हैं और तेरी पाकीज़गी साबित करते हैं तब खु़दा ने फरमाया इसमें तो शक ही नहीं कि जो मैं जानता हूँ तुम नहीं जानते (

16 जून 2026

नेत्रदान संकल्पित सेवानिवृत्त शिक्षक का हुआ नेत्रदान

 नेत्रदान संकल्पित सेवानिवृत्त शिक्षक का हुआ नेत्रदान

ग्राम नलका,जिला बारां, निवासी सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षक मिश्री लाल नागर,ने काफी समय पहले,संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के साथ नेत्रदान का संकल्प पत्र भरा था ।  कुछ समय से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, इसी कारण से,उन्होंने अपने नेत्रदान की इच्छा भी पत्नी निर्मला (सेवानिवृत शिक्षिका), बेटे मयंक,बेटी अंकिता को बता दी थी ।

परिवार नेत्रदान के प्रति इतना सजग था कि,जैसे ही उनका आकस्मिक निधन हुआ,परिवार ने तुरंत ही नेत्रदान के लिये दामाद संदीप नागर व संस्था के ज्योति मित्र मुकेश कुमार को, संपर्क करके नेत्रदान करवाने के लिए कहा । मुकेश की सूचना पर,डॉ कुलवंत गौड़ ने नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न की ।

सहज,सरल और विनम्र स्वभाव के मिश्रीलाल ग्राम नलका में सभी के चहेते थे, कोई भी उनके पास अपनी समस्या लेकर आता था, तो उसका पूरा निवारण हो जाता था।  पत्नी निर्मला ने भी अपना नेत्रदान का संकल्प पत्र मिश्रीलाल के साथ ही भरा था।

संस्था संस्थापक डॉ कुलवंत गौड़ ने कहा कि, ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्रदान की प्रति जागरूकता ,और कॉर्निया प्रत्यारोपण की सकारात्मक खबरों से हाड़ौती संभाग का नेत्रदान का प्रतिशत काफी बढ़ा है।

और जब उनसे कहा जाता है कि मुल्क में फसाद न करते फिरो (तो) कहते हैं कि हम तो सिर्फ इसलाह करते हैं

 और जब उनसे कहा जाता है कि मुल्क में फसाद न करते फिरो (तो) कहते हैं कि हम तो सिर्फ इसलाह करते हैं (11)
ख़बरदार हो जाओ बेशक यही लोग फसादी हैं लेकिन समझते नहीं (12)
और जब उनसे कहा जाता है कि जिस तरह और लोग ईमान लाए हैं तुम भी ईमान लाओ तो कहते हैं क्या हम भी उसी तरह ईमान लाएँ जिस तरह और बेवकू़फ़ लोग ईमान लाएँ, ख़बरदार हो जाओ लोग बेवक़ूफ़ हैं लेकिन नहीं जानते (13)
और जब उन लोगों से मिलते हैं जो ईमान ला चुके तो कहते हैं हम तो ईमान ला चुके और जब अपने शैतानों के साथ तनहा रह जाते हैं तो कहते हैं हम तुम्हारे साथ हैं हम तो (मुसलमानों को) बनाते हैं (14)
(वह क्या बनाएँगे) खु़दा उनको बनाता है और उनको ढील देता है कि वह अपनी सरकशी में ग़लता पेचाँ (उलझे) रहें (15)
यही वह लोग हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही ख़रीद ली, फिर न उनकी तिजारत ही ने कुछ नफ़ा दिया और न उन लोगों ने हिदायत ही पाई (16)
उन लोगों की मिसाल (तो) उस शख़्स की सी है जिसने (रात के वक़्त मजमे में) भड़कती हुयी आग रौशन की फिर जब आग (के शोले) ने उनके गिर्दों पेश (चारों ओर) खू़ब उजाला कर दिया तो खु़दा ने उनकी रौशनी ले ली और उनको घटाटोप अँधेरे में छोड़ दिया (17)
कि अब उन्हें कुछ सुझाई नहीं देता ये लोग बहरे गूँगे अन्धे हैं कि फिर अपनी गुमराही से बाज़ नहीं आ सकते (18)
या उनकी मिसाल ऐसी है जैसे आसमानी बारिश जिसमें तारिकियाँ गरज और बिजली की गरज हो मौत के खौफ से कड़क के मारे अपने कानों में ऊँगलियाँ दे लेते हैं हालाँकि खु़दा काफि़रों को (इस तरह) घेरे हुए है (कि उसक हिल नहीं सकते) (19)
क़रीब है कि बिजली उनकी आँखों को चैन्धिया दे जब उनके आगे बिजली चमकी तो उस रौशनी में चल खड़े हुए और जब उन पर अँधेरा छा गया तो (ठिठक के) खड़े हो गए और खु़दा चाहता तो यूँ भी उनके देखने और सुनने की कूवतें छीन लेता बेशक खु़दा हर चीज़ पर क़ादिर है (20)

15 जून 2026

(ये) वह किताब है। जिस (के किताबे खु़दा होने) में कुछ भी शक नहीं (ये) परहेज़गारों की रहनुमा है

 सूरए बक़रा (गाय) मदीना में नाजि़ल हुआ और इसमें दो सौ छियासी आयतें और चालीस रूकू हैं।
ख़ु़दा के नाम से शुरू करता हूँ जो बड़ा मेहरबान और रहम वाला है
अलीफ़ लाम मीम (1)
(ये) वह किताब है। जिस (के किताबे खु़दा होने) में कुछ भी शक नहीं (ये) परहेज़गारों की रहनुमा है (2)
जो ग़ैब पर ईमान लाते हैं और (पाबन्दी से) नमाज़ अदा करते हैं और जो कुछ हमने उनको दिया है उसमें से (राहे खु़दा में) ख़र्च करते हैं (3)
और जो कुछ तुम पर (ऐ रसूल) और तुम से पहले नाजि़ल किया गया है उस पर ईमान लाते हैं और वही आखि़रत का यक़ीन भी रखते हैं (4)
यही लोग अपने परवरदिगार की हिदायत पर (आमिल) हैं और यही लोग अपनी दिली मुरादें पाएँगे (5)
बेशक जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार किया उनके लिए बराबर है (ऐ रसूल) चाहे तुम उन्हें डराओ या न डराओ वह ईमान न लाएँगे (6)
उनके दिलों पर और उनके कानों पर (नज़र करके) खु़दा ने तसदीक़ कर दी है (कि ये ईमान न लाएँगे) और उनकी आँखों पर परदा (पड़ा हुआ) है और उन्हीं के लिए (बहुत) बड़ा अज़ाब है (7)
और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो (ज़बान से तो) कहते हैं कि हम खु़दा पर और क़यामत पर ईमान लाए हालाँकि वह दिल से ईमान नहीं लाए (8)
खु़दा को और उन लोगों को जो ईमान लाए धोखा देते हैं हालाँकि वह अपने आपको धोखा देते हैं और कुछ शऊर नहीं रखते हैं (9)
उनके दिलों में मर्ज़ (मरज़) था ही अब खु़दा ने उनके मर्ज़ (मरज़) को और बढ़ा दिया और चूँकि वह लोग झूठ बोला करते थे इसलिए उन पर तकलीफ देह अज़ाब है (10)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...