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02 अगस्त 2026

वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है

 और (तुम्हारा गुमान बिल्कुल ग़लत है) किसी नबी की (हरगिज़) ये शान नहीं कि ख़्यानत करे और ख़्यानत करेगा तो जो चीज़ ख़्यानत की है क़यामत के दिन वही चीज़ (बिलकुल वैसा ही) ख़ुदा के सामने लाना होगा फिर हर शख़्स अपने किए का पूरा पूरा बदला पाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी (161)
भला जो शख़्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या वह उस शख़्स के बराबर हो सकता है जो ख़ुदा के गज़ब में गिरफ़्तार हो और जिसका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है (162)
वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है (163)
ख़ुदा ने तो ईमानदारों पर बड़ा एहसान किया कि उनके वास्ते उन्हीं की क़ौम का एक रसूल भेजा जो उन्हें खुदा की आयतें पढ़ पढ़ के सुनाता है और उनकी तबीयत को पाकीज़ा करता है और उन्हें किताबे (ख़ुदा) और अक़्ल की बातें सिखाता है अगरचे वह पहले खुली हुयी गुमराही में पडे़ थे (164)
मुसलमानों क्या जब तुमपर (जंगे ओहद) में वह मुसीबत पड़ी जिसकी दूनी मुसीबत तुम (कुफ़्फ़ार पर) डाल चुके थे तो (घबरा के) कहने लगे ये (आफ़त) क़हाँ से आ गयी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये तो खुद तुम्हारी ही तरफ़ से है (न रसूल की मुख़ालेफ़त करते न सज़ा होती) बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (165)
और जिस दिन दो जमाअतें आपस में गुंथ गयीं उस दिन तुम पर जो मुसीबत पड़ी वह तुम्हारी शरारत की वजह से (ख़ुदा की इजाजत की वजह से आयी) और ताकि ख़ुदा सच्चे ईमान वालों को देख ले (166)
और मुनाफि़क़ों को देख ले (कि कौन है) और मुनाफि़क़ों से कहा गया कि आओ ख़ुदा की राह में जेहाद करो या (ये न सही अपने दुशमन को) हटा दो तो कहने लगे (हाए क्या कहीं) अगर हम लड़ना जानते तो ज़रूर तुम्हारा साथ देते ये लोग उस दिन बनिस्बते ईमान के कुफ्र के ज़्यादा क़रीब थे अपने मुँह से वह बातें कह देते हैं जो उनके दिल में (ख़ाक) नहीं होतीं और जिसे वह छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है (167)
(ये वही लोग हैं) जो (आप चैन से घरों में बैठे रहते है और अपने शहीद) भाईयों के बारे में कहने लगे काश हमारी पैरवी करते तो न मारे जाते (ऐ रसूल) उनसे कहो (अच्छा) अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा अपनी जान से मौत को टाल दो (168)
और जो लोग ख़ुदा की राह में शहीद किए गए उन्हें हरगिज़ मुर्दा न समझना बल्कि वह लोग जीते जागते मौजूद हैं अपने परवरदिगार की तरफ़ से वह (तरह तरह की) रोज़ी पाते हैं (169)
और ख़ुदा ने जो फ़ज़ल व करम उन पर किया है उसकी (ख़ुशी) से फूले नहीं समाते और जो लोग उनसे पीछे रह गए और उनमें आकर शामिल नहीं हुए उनकी निस्बत ये (ख़्याल करके) ख़ुशियां मनाते हैं कि (ये भी शहीद हों तो) उनपर न किसी कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे (170)

01 अगस्त 2026

180 किमी दूर जाकर भी रुका नहीं जुनून"

 180 किमी दूर जाकर भी रुका नहीं जुनून"  

शाइन इंडिया फाउंडेशन ने कोटा से दूरस्थ गांवों में फैलाया अंगदान का संदेश


कोटा। शनिवार को "नो बैग डे" के अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम ने राजस्थान सरकार के "अंगदान संजीवनी अभियान" के अंतर्गत कोटा से लगभग 180 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गुराडिया कलाँ और पगारिया में अंगदान जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यशाला में दोनों विद्यालयों के कक्षा 8 से 12 तक के 800 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। टीम ने बच्चों को नेत्रदान, अंगदान और देहदान के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि, बच्चों को बताया गया कि मृत्यु उपरांत एक व्यक्ति अपने अंगदान से 8 से 9 लोगों को नया जीवन दे सकता है। और इसी तरह से मृत्यु के बाद 6 घंटे के अंदर नेत्रों के दान से कॉर्निया की अंधता को भी दूर किया जा सकता है।

संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा 400 से अधिक राजकीय एवं निजी विद्यालयों में इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा चुका है।


गुराडिया कलाँ के प्रधानाचार्य  जितेंद्र सिंह हाड़ा ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि,  

"अपने शहर से तेज बारिश और तूफान में इतनी दूर आकर बच्चों को अंगदान के बारे में जागरूक करना ही एक जुनून का कार्य है। यदि आज के युवा छात्र अंगदान के विषय को अच्छे से समझ लेते हैं तो भविष्य में वे अंगदान प्रेरक के रूप में अन्य लोगों को भी जागरूक कर सकेंगे।"

*पगारिया उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार ने भी संस्था को धन्यवाद देते हुए कहा कि, "आज के समय में अंगदान समाज की सबसे बड़ी जरूरत है। एक व्यक्ति के चले जाने के बाद भी उसके अंग कई जिंदगियां बचा सकते हैं। शाइन इंडिया फाउंडेशन इस महत्वपूर्ण विषय पर जिस समर्पण और लक्ष्य के साथ काम कर रही है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। हम उम्मीद करते हैं कि ऐसे आयोजन लगातार होते रहें ताकि हर घर तक अंगदान का संदेश पहुंचे।"_

कार्यक्रम के अंत में सदस्य ने अंगदान से संबंधित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किया और सही जवाब देने वाले प्रतिभागियों को "शाइन मेडल" दिया।

विद्यालय स्टाफ और विद्यार्थियों ने संस्था के इस पुण्य कार्य की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की मांग की।


संपर्क: शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा | 8386900102

33 वर्षों की गौरवपूर्ण न्यायिक सेवा पूर्ण कर जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री संदीप कुमार शर्मा सेवानिवृत्त

 

33 वर्षों की गौरवपूर्ण न्यायिक सेवा पूर्ण कर जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री संदीप कुमार शर्मा सेवानिवृत्त
बूंदी, 31 जुलाई। जिला एवं सेशन न्यायाधीश, बूंदी श्री संदीप कुमार शर्मा 33 वर्षों की गौरवपूर्ण एवं निष्कलंक न्यायिक सेवा पूर्ण कर शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर जिला न्यायालय परिसर में गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पुलिस अधिकारियों, न्यायालयीन कर्मचारियों, पक्षकारों एवं गणमान्य नागरिकों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।
समारोह में श्री पंकज नरूका, न्यायाधीश, एम.ए.सी.टी. क्रम 1, बूंदी; श्री वीरेन्द्र प्रताप सिंह, न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, बूंदी; श्री प्रशान्त शर्मा, न्यायाधीश, पॉक्सो क्रम 1, बूंदी; श्रीमती सोनाली प्रशान्त शर्मा, न्यायाधीश, एस.सी. एवं एस.टी. (पी.ए.) प्रकरण, बूंदी; श्रीमती प्रीति मुकेश परनामी, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश क्रम 1, बूंदी; श्रीमती कृष्णा गुप्ता, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश क्रम 2, बूंदी; श्री अंकुर गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बूंदी; प्रिन्सिपल मजिस्ट्रेट, जे.जे.बी., बूंदी श्रीमती अम्बिका; श्री सिद्धान्त सक्सेना, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बूंदी; श्रीमती वृष्टि विज, जे.एम. क्रम 3, बूंदी; सुश्री नूपुर गुप्ता, जे.एम. क्रम 2, बूंदी; सुश्री तनु वर्मा, जे.एम., बूंदी तथा श्री आशीष कुमार परेवा, जे.एम. क्रम 1, बूंदी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त प्रोटोकॉल अधिकारी श्री बृजेश श्रृंगी, कोर्ट मैनेजर श्री सुरेन्द्र सांखला, श्री अभिषेक दीक्षित (पी.ए., मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय), अधिवक्तागण, पुलिस अधिकारी, पक्षकार एवं न्यायालय के समस्त अधिकारी-कर्मचारी भी समारोह में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्री संदीप कुमार शर्मा अपने संपूर्ण परिवार के साथ समारोह में उपस्थित रहे। न्यायिक अधिकारियों एवं उपस्थित अतिथियों द्वारा श्री शर्मा के साथ-साथ उनके परिवारजनों का भी माल्यार्पण, पुष्पगुच्छ भेंट कर एवं आत्मीय अभिनंदन के साथ स्वागत किया गया। सेवानिवृत्ति समारोह में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं न्यायालयीन कर्मचारियों द्वारा श्री शर्मा का माल्यार्पण कर, साफा बंधवाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। इसके उपरांत राजस्थान पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानपूर्वक सलामी दी गई तथा पुलिस बैंड की मधुर धुनों के साथ जिला न्यायालय परिसर से गरिमापूर्ण विदाई दी गई। समारोह के दौरान वातावरण भावुक एवं सम्मानपूर्ण बना रहा।
अपने 33 वर्षों के न्यायिक सेवाकाल में श्री संदीप कुमार शर्मा ने विभिन्न न्यायालयों में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं संवेदनशील न्याय प्रदान करते हुए न्यायपालिका की गरिमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनकी सादगी, सौम्यता, प्रशासनिक दक्षता एवं न्याय के प्रति समर्पित कार्यशैली ने उन्हें न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं न्यायालयीन कर्मचारियों के बीच अत्यंत सम्माननीय स्थान दिलाया। समारोह के अंत में उपस्थित सभी जनों ने उनके स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामनाएँ करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं

विद्याश्रम पब्लिक स्कूल में सीबीएसई वेस्ट ज़ोन आर्चरी चैंपियनशिप का भव्य आगाज़

 

विद्याश्रम पब्लिक स्कूल में सीबीएसई वेस्ट ज़ोन आर्चरी चैंपियनशिप का भव्य आगाज़
राजस्थान, गुजरात एवं मध्यप्रदेश राज्यों के 300 से अधिक प्रतिभागी दिखाएंगे अपना निशानेबाजी कौशल
के डी अब्बासी
कोटा । विद्याश्रम पब्लिक स्कूल, कोटा में सीबीएसई आर्चरी (निशानेबाजी) चैंपियनशिप 2026-27 (बालक वर्ग) का भव्य शुभारंभ शनिवार को उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि क्षेत्र की लोकप्रिय विधायक श्रीमती कल्पना देवी रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता सीबीएसई कोटा डिवीजन के कोऑर्डिनेटर श्री प्रदीप सिंह गौड़ ने की। समारोह में श्री गौरव सिंह झाला, श्री रवि शर्मा, श्री हंसमुख भाई पटेल, श्री अरविंदभाई पटेल, विद्यालय के निदेशक श्री राघव अग्रवाल तथा श्री पुरुषोत्तम शर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। जोन स्तरीय इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता में राजस्थान, गुजरात एवं मध्यप्रदेश के सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों के लगभग 300 छात्र-खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता में अंडर-14, अंडर-17 एवं अंडर-19 आयु वर्ग के प्रतिभागी अपनी निशानेबाजी एवं खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे। प्रतियोगिता के दौरान इंडियन, रिकर्व एवं कंपाउंड श्रेणी की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित स्पर्धाओं का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य अतिथि श्रीमती कल्पना देवी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण खेल भावना होती है। प्रत्येक खिलाड़ी को पूरी निष्ठा, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ खेल में भाग लेना चाहिए। खेल व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम हैं।” विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री शैलेंद्र पोरवाल ने सभी अतिथियों, अधिकारियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया तथा प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए सभी को शुभकामनाएँ दीं। चैंपियनशिप का समापन 4 अगस्त 2026 को होगा, जिसमें विभिन्न वर्गों के विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।

और अगर तुम ख़ुदा की राह में मारे जाओ या (अपनी मौत से) मर जाओ तो बेशक ख़ुदा की बख़शश और रहमत इस (माल व दौलत) से जिसको तुम जमा करते हो ज़रूर बेहतर है

 (तुम घबराओ नहीं) हम अनक़रीब तुम्हारा रोब काफि़रों के दिलों में जमा देंगे इसलिए कि उन लोगों ने ख़ुदा का शरीक बनाया (भी तो) उस चीज़ बुत को जिसे ख़ुदा ने किसी कि़स्म की हुकूमत नहीं दी और (आखि़रकार) उनका ठिकाना दोज़ख़ है और ज़ालिमों का (भी क्या) बुरा ठिकाना है (151)
बेशक खुदा ने (जंगे ओहद में भी) अपना (फतेह का) वायदा सच्चा कर दिखाया था जब तुम उसके हुक्म से (पहले ही हमले में) उन (कुफ़्फ़ार) को खू़ब क़त्ल कर रहे थे यहाँ तक की तुम्हारे पसन्द की चीज़ (फ़तेह) तुम्हें दिखा दी इसके बाद भी तुमने (माले ग़नीमत देखकर) बुज़दिलापन किया और हुक्में रसूल (स०) (मोर्चे पर जमे रहने) में झगड़ा किया और रसूल की नाफ़रमानी की तुममें से कुछ तो तालिबे दुनिया हैं (कि माले ग़नीमत की तरफ़) से झुक पड़े और कुछ तालिबे आखेरत (कि रसूल पर अपनी जान फि़दा कर दी) फिर (बुज़दिलेपन ने) तुम्हें उन (कुफ़्फ़ार) की की तरफ से फेर दिया (और तुम भाग खड़े हुए) उससे ख़ुदा को तुम्हारा (इमान अख़लासी) आज़माना मंज़ूर था और (इसपर भी) ख़ुदा ने तुमसे दरगुज़र की और खुदा मोमिनीन पर बड़ा फ़ज़ल करने वाला है (152)
(मुसलमानों तुम) उस वक़्त को याद करके शर्माओ जब तुम (बदहवास) भागे पहाड़ पर चले जाते थे और बावजूद दस रसूल (स०) तुम्हारे खुलूस (खड़े) तुमको बुला रहे थे, मगर तुम (जान के डर से) किसी को मुड़ के भी न देखते थे बस (चूकि) रसूल को तुमने (आज़ारदा) किया ख़ुदा ने भी तुमको (उस) रंज की सज़ा में (शिकस्त का) रंज दिया ताकि जब कभी तुम्हारी कोई चीज़ हाथ से जाती रहे या कोई मुसीबत पड़े तो तुम रंज न करो और सब्र करना सीखो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है (153)
फिर ख़ुदा ने इस रंज के बाद तुमपर इत्मिनान की हालत तारी की कि तुममें से एक गिरोह का (जो सच्चे ईमानदार थे) ख़ूब गहरी नींद आ गयी और एक गिरोह जिनको उस वक्त भी (भागने की शर्म से) जान के लाले पड़े थे ख़ुदा के साथ (ख़्वाह मख़्वाह) ज़मानाए जिहालत की ऐसी बदगुमानिया करने लगे और कहने लगे भला क्या ये अम्र (फ़तेह) कुछ भी हमारे इखि़्तयार में है (ऐ रसूल) कह दो कि हर अम्र का इखि़्तयार ख़ुदा ही को है (ज़बान से तो कहते ही है नहीं) ये अपने दिलों में ऐसी बातें छिपाए हुए हैं जो तुमसे ज़ाहिर नहीं करते (अब सुनो) कहते हैं कि इस अम्र (फ़तेह) में हमारा कुछ इखि़्तायार होता तो हम यहाँ मारे न जाते (ऐ रसूल इनसे) कह दो कि तुम अपने घरों में रहते तो जिन जिन की तकदीर में लड़ के मर जाना लिखा था वह अपने (घरों से) निकल निकल के अपने मरने की जगह ज़रूर आ जाते और (ये इस वास्ते किया गया) ताकि जो कुछ तुम्हारे दिल में है उसका इम्तिहान कर दे और ख़ुदा तो दिलों के राज़ खू़ब जानता है (154)
बेशक जिस दिन (जंगे औहद में) दो जमाअतें आपस में गुथ गयीं उस दिन जो लोग तुम (मुसलमानों) में से भाग खड़े हुए (उसकी वजह ये थी कि) उनके बाज़ गुनाहों (मुख़ालफ़ते रसूल) की वजह से शैतान ने बहका के उनके पाँव उखाड़ दिए और (उसी वक़्त तो) ख़ुदा ने ज़रूर उनसे दरगुज़र की बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला बुर्दवार है (155)
ऐ ईमानदारों उन लोगों के ऐसे न बनो जो काफि़र हो गए भाई बन्द उनके परदेस में निकले हैं या जेहाद करने गए हैं (और वहाँ) मर (गए) तो उनके बारे में कहने लगे कि वह हमारे पास रहते तो न मरते ओर न मारे जाते (और ये इस वजह से कहते हैं) ताकि ख़ुदा (इस ख़्याल को) उनके दिलों में (बाइसे) हसरत बना दे और (यू तो) ख़ुदा ही जिलाता और मारता है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उसे देख रहा है (156)
और अगर तुम ख़ुदा की राह में मारे जाओ या (अपनी मौत से) मर जाओ तो बेशक ख़ुदा की बख़शश और रहमत इस (माल व दौलत) से जिसको तुम जमा करते हो ज़रूर बेहतर है (157)
और अगर तुम (अपनी मौत से) मरो या मारे जाओ (आखि़रकार) ख़ुदा ही की तरफ़ (क़ब्रों से) उठाए जाओगे (158)
(तो ऐ रसूल ये भी) ख़ुदा की एक मेहरबानी है कि तुम (सा) नरमदिल (सरदार) उनको मिला और तुम अगर बदमिज़ाज और सख़्त दिल होते तब तो ये लोग (ख़ुदा जाने कब के) तुम्हारे गिर्द से तितर बितर हो गए होते बस (अब भी) तुम उनसे दरगुज़र करो और उनके लिए मग़फे़रत की दुआ मांगों और (साबिक़ दस्तूरे ज़ाहिरा) उनसे काम काज में मशवरा कर लिया करो (मगर) इस पर भी जब किसी काम को ठान लो तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखो (क्योंकि जो लोग ख़ुदा पर भरोसा रखते हैं ख़ुदा उनको ज़रूर दोस्त रखता है (159)
(मुसलमानों याद रखो) अगर ख़ुदा ने तुम्हारी मदद की तो फिर कोई तुमपर ग़ालिब नहीं आ सकता और अगर ख़ुदा तुमको छोड़ दे तो फिर कौन ऐसा है जो उसके बाद तुम्हारी मदद को खड़ा हो और मोमिनीन को चाहिये कि ख़ुदा ही पर भरोसा रखें (160)

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