नेत्रदान में,ना चेहरे पर आती विकृति, ना आता है रक्त
2. नो बैग डे पर,बच्चों ने जाना,मृत्यु के बाद,किन अंगो का होता है दान
शाइन
इंडिया फाउंडेशन के हाडोती संभाग में चल रहे "नो बैग डे" पर नेत्रदान
अंगदान विषय पर कार्यशाला के अंतर्गत, लगातार हर शनिवार राजकीय विद्यालयों
में जागरूकता कार्यशालाएं प्रारंभ है ।
इसी क्रम में आज, राजकीय
उच्च माध्यमिक विद्यालय,देवली अरब रोड के कक्षा 8 से 12 की विद्यार्थियों
के बीच, संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के सदस्यों ने नेत्रदान के महत्व
उपयोगिता और भ्रांतियों के बारे में विस्तार से चर्चा की ।
प्रमुख
वक्ता डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि, नेत्रदान एक ऐसा पुनीत कार्य है जो
मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे के दौरान संपन्न होता है,जिसमें ना किसी तरह से
चेहरे पर कोई विकृति आती है,ना रक्त निकलता है ।
कार्यशाला के
उपरांत प्रधानाध्यापिका महोदया लोपामुद्रा भाटिया ने अपने विचार प्रकट करते
हुए कहा कि, आज की नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को अपने पास में
ना रखते हुए सभी छात्र घर जाकर अपने परिजनों से इस विषय पर जरूर चर्चा
करेंगे । किसी भी तरह की शंका या सवाल आने पर छात्र उनको लिखकर
लायेंगे,जिससे अगले दिन सही जवाब भेजा जा सके।
कार्यशाला के दौरान
विद्यार्थियों से संबंधित विषय पर प्रश्न भी पूछे गए विद्यार्थियों ने सही
जवाब दिए उन्हें शाइन मेडल द्वारा पुरस्कृत किया गया ।
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
08 अगस्त 2026
नेत्रदान में,ना चेहरे पर आती विकृति, ना आता है रक्त
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