बच्चों की सुरक्षा में बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका – सिटी एसपी सुश्री तेजस्वनी गौतम
कोटा,सितंबर। कोटा सिटी एसपी सुश्री तेजस्वनी गौतम ने बच्चों के संरक्षण में बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों (CWPOs) एवं मानव तस्करी विरोधी इकाई (AHTUs) के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि बच्चों के साथ व्यवहार हमेशा सहानुभूतिपूर्ण, संवेदनशील और मैत्रिपूर्ण होना चाहिए, क्योंकि कठोर या अनदेखा करने वाला व्यवहार बच्चों के मानसिक व भावनात्मक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। एसपी तेजस्वनी गौतम ने यह भी बताया कि पुलिस का संवेदनशील दृष्टिकोण न केवल बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि उन्हें सुरक्षित, सशक्त और न्यायपूर्ण समाज की ओर भी अग्रसर करता है। उन्होंने अधिकारियों को यह समझने के लिए प्रेरित किया कि कानून की जानकारी के साथ-साथ बच्चों के मनोविज्ञान की समझ भी आवश्यक है, ताकि वे प्रभावी रूप से बाल संरक्षण कार्य में योगदान दे सकें। उन्होंने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम को बच्चों के बेहतर संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी कदम बताते हुए कहा कि इससे अधिकारियों के दृष्टिकोण, ज्ञान और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आएगा तथा राजस्थान में बच्चों के लिए सुरक्षित एवं सशक्त वातावरण सुनिश्चित होगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिन में विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। डॉ. अनुकृति शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ कोटा ने बच्चों के विकास और बाल मनोविज्ञान को समझने के महत्व पर व्याख्यान दिया, जिससे अधिकारियों को बच्चों से व्यवहार करने में व्यावहारिक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। इसके बाद श्री राम राज मीना, DCPU Kota ने बच्चों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी साझा की। सुश्री रानी शर्मा, पूर्व JJB सदस्य एवं वर्तमान सदस्य SJPU Kota ने Juvenile Justice Act, 2015 और Child Marriage Act के तहत CWPOs व AHTUs की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। इसके अतिरिक्त, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों और उसके तंत्र पर डॉ. ज्ञान सिंह यादव, हेड ऑफ डिपार्टमेंट, IIIT Kota ने विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किया। प्रत्येक सत्र के बाद प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया ताकि अधिकारीगण अपनी शंकाओं का समाधान कर सकें। विशेष आकर्षण के रूप में, यूनिवर्सिटी ऑफ कोटा के छात्रों ने डॉ. अनुकृति शर्मा के निर्देशन में एक नाट्य प्रस्तुति दी, जिसमें बच्चों के मनोविज्ञान की गहन समझ और व्यवहारिक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान श्री प्रवीण सिंह, श्री बिमल सिंह, फैकल्टी, सेंटर फॉर चाइल्ड प्रोटेक्शन, सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय, श्री राधेशयाम कुमावत, श्री नरेंद्र सिंह ने अलग-अलग सत्रों को संचालित कर अपना व्यवहारिक अनुभव साझा किया। प्रतिभागियों ने व्यवहारिक चुनौतियों को विशेषज्ञों के समक्ष रखा और विषय विशेषज्ञों ने उनके समाधान हेतु अपने अनुभवों को साझा किया।
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