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30 मई 2022

भारतीय राष्ट्रीय कोंग्रेस में गांधी विचारक, गांधी को आत्मसात कर ईमानदारी से ज़िन्दगी बसर करने वाले ,, भाई गणेश शंकर पांडेय के आकस्मिक निधन से कोंग्रेस में ओरिजनल गांधीवादी विचारक स्तब्ध है

भारतीय राष्ट्रीय कोंग्रेस में गांधी विचारक, गांधी को आत्मसात कर ईमानदारी से ज़िन्दगी बसर करने वाले ,, भाई गणेश शंकर पांडेय के आकस्मिक निधन से कोंग्रेस में ओरिजनल गांधीवादी विचारक स्तब्ध है, शोकाकुल हैं, गणेश शंकर पांडेय सादा जीवन उच्च विचार,  के व्यक्तित्व से जुड़े ,, ईमानदार शख्स थे ,, ईमानदार होना ही नहीं , ईमानदारी का अपने कार्य व्यवहार में प्रदर्शन उनकी  अपनी पूंजी रही है, कोंग्रेस में छात्र कोंग्रेस से लेकर, यूथ कोंग्रेस, मुख्य कोंग्रेस में उनका ज़र्रा ज़र्रा शामिल रहा है,   उनकी अपनी क़ुर्बानियां कांग्रेस के लिए बेमिसाल रही हैं ,,  राजस्थान में कोंग्रेस की मजबूती के लिये वोह हमेशा , उन्हें  दी गयी  हर  ज़िम्मेदारी में , वोह हर बार अव्वलीन साबित हुए हैं, कॉरपोरेट कल्चर, वी आई पी गिरी, महंगे शोक , फ़िज़ूल खर्ची, पांच सितारा संस्क्रति से कोसों दूर रहते हुए  ,  ओरिजनल कोंग्रेसी होने के कारण, स्वर्गीय गणेश शंकर पांडेय,  मेरे लिये प्रेरणा स्त्रोत, आदरणीय , सम्मानीय, मार्गदर्शक थे, नियमित मेरी उनसे टेलीफोनिक चर्चा के दौरान में उनसे कोंग्रेस के दुख दर्द बांटता था , रायबरेली कोंग्रेस कार्यालय को अपना सर्वस्व दान करने वाले पांडेय परिवार के भाई गणेश शंकर कहते थे, सब्र रखो , कोंग्रेस फिर से ओरिजनल स्वभाव पर लौटकर , भारत की सत्ता में आकर देश को , एकता , अखण्डता, चहुमुखी विकास, भाईचारा सद्भावना , बेरोजगारों को रोजगार, महंगाई पर अंकुश , मामलों में कामयाबी का  विश्व रिकॉर्ड बनाएगी, अब वोह गणेश शंकर पांडेय, हमारे बीच नहीं रहे , लेकिन उनकी यादें शेष हैं , उनके साथ का, एक संस्मरण ही , उनके  कृतित्व  उनकी महानता, गाँधीवादिता को साबित करने के  लिये काफी है,,
राजस्थान चुनाव अभियान में गणेशशंकर जी कोटा सर्किट हाउस के कमरा नम्बर 6  में ठहरे थे ,वोह अपने कपड़े रोज़ खुद धोते ,कपड़े कमरे में  ही सुखाते  ,शुद्ध खादी पहनना उनकी आदत ,,सादगी उनकी पहचान ,,उनके नियमित रोज़ कपड़े धोकर सुखाने ,उन्ही कपड़ो को पहनने पर नज़र रखे हुए ,,कोटा के मेरे एक साथी,  जो उन गांधीवादी के पुराने परिचित   भी थे ,उन्होंने पारिवारिक सदस्य होने के नाते यह समझ लिया,  के शायद यात्रा के दौरान यह कपड़े लाना भूल गए ,इसी लिए रोज़ मर्रा उन्हें यह मशक़्क़त करना पढ़ रही है ,बस इन जनाब ने दो जोड़ी  खादी के सूट, एक परिवार के नाते उन्हें गिफ्ट के रूप में देना चाहा ,,लेकिन उन्होंने बढ़ी विनम्रता से उन्हें समझाकर उक्त कपड़े वापस लोटा दिए ,,मेरे यह मित्र जो उनके पुराने जानकार थे ,उन्होंने फिर ,उनके कपड़े लॉन्ड्री  में नियमित धुलवाने के लिए प्रस्ताव रखा ,,,लेकिन वाह  रे ,कांग्रेस के गांधीवादी विचारधारा समर्थक ,उन्होंने साफ़ कहा ,भाई में यह दिखावा ,या मजबूरी में नहीं कर रहा ,यह मेरा स्वभाव है ,अपने कपड़े में खुद धोकर अगर न पहन सकूं तो फिर ,ऐसी कांग्रेस ,ऐसी गांधीवादी विचारधारा का होने से क्या फायदा ,  चूँकि इसी दौरान ,, इसी कोटा सर्किट हाउस में , और विशेष नेताजी अलग कमरे में ठहरे थे , जिनके लिए रोज़ नए कपड़े , ब्रांडेड जूते , और कपड़ो की नियमित अर्जेन्ट ड्राइक्लीनिंग ,, हो रहे थी , सो , मेरे मित्र ने उन्हें फिर कहा ,साहिब दूसरे लोग भी तो लॉन्ड्री पर कपड़े धुलवा रहे है ,उन्होंने कहा उनका वोह जाने ,मेरा अपना स्वभाव है ,,मेरे अपने सिद्धांत है ,में अपने सिद्धांत किसी भी मजबूरी ,किसी भी हालत में बदल नहीं सकता ,,खेर जब  उनके जाने की बारी आई तब ,  उनके लिए ,, उन्हें   कोटा का नमकीन ,काजु कतली ,बच्चो के प्रसादम के लिए बतौर मेज़बानी गिफ्ट देने का प्रयास  किया ,,लेकिन वाह रे गांधीवादी मेरे भाई गणेश शंकर पांडेय साहब ,,,उन्होंने उनके परिवार के लिए दी गयी ,, मिठाई ,नमकीन अपने साथ नहीं ली  ,वहां उपस्थित सभी लोगो में मिल बाँट कर ,,मोहब्बत के पैगाम के साथ,, प्रसादम करवा दिया ,उनके रहने ,चलने ,उनके व्यवहार ,उनके बोलने ,,महमान होने पर भी मेज़बानों के साथ उनका जो खुलूस ,एडजस्टमेंट था ,कारों में बैठने को लेकर उनका जो एडजस्टमेंट था ,सही में गांधीवादी विचारक के रूप में सादगी भरा था ,और बस उनके इस व्यवहार को देखकर   में सोचता था , अगर ऐसा कोंग्रेसी व्यवहार कांग्रेस के नेताओं में , ,मुंग में सफेदी के बराबर भी  हो जाए ,तो देश का ,,हम जैसे, हर ओरिजनल निर्गुट कोंग्रेसी  कार्यकर्ताओं का तो उद्धार ही हो जाए ,, आज  गणेश शंकर पांडेय हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी यादें , उनके सिद्धांत , कांग्रेस के लिए उनका त्याग , सम्पर्ण , हमेशा यादगार बना रहेगा , ,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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