कल एक अजीब हादसा हुआ , हादसा इसलिए हुआ के , शांति भंग की कार्यवाही कर लोगों को , बंद करने वाले , एक शीर्ष पुलिस अफसर , सेवानिवृत्ति के बाद , इस बिमारी से ग्रसित मिले , उनके खिलाफ भी , एक थाने के ज़रिये , उनकी पुलिस अधीक्षक को शिकायत के बाद , यह कार्यवाही अमल में लायी गयी है , हादसा इसलिए लिखा है , के आम तोर पर किसी भी फरियादी को , किसी व्यक्ति के खिलाफ , शांति भांग की कार्यवाही कर प्रताड़ित करने की अंग्रेज़ो के वक़्त से चली आ रही इस प्रथा को , हर थानाधिकारी , वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने फैशन सा बना लिया है ,, खुद सेवानिवृत्ति के पूर्व , ऐसे अधिकारीयों ने भी , ऐसी कार्यवाहियां , अपने वरिष्ठ अधिकारीयों के निर्देशन या फिर स्वेच्छिक रूप से खूब की होंगी , लेकिन अब खुद पर अगर पढ़ी , तो पुलिस अधिनियम से लेकर , सुप्रीमकोर्ट के डिक्लेयर्ड क़ानून , के मुद्दे बचाव में , और ऐसे थानाधिकारी जिसने ऐसी कार्यवाही की है , उसके खिलाफ नज़र आने लगे है ,, कार्यवाही कुछ भी हो , लेकिन क़ानून का सिपाही होने के नाते , मेरे सामने भी कई ऐसे यक्ष सवाल खड़े हुए , जिन पर रिसर्च ज़रूरी है , इन जनाब ने कहा के , यूँ तो , पुलिस अधिनियम में ऐसे प्रावधान नहीं है ,, ,अनावश्यक प्रताड़ना की कार्यवाही में 107 , 116 सी आर पी सी की कार्यवाही के लिए पुलिस थानाधिकारी को अधिकार नहीं दिए है , इस मामले में , पुलिस नियम 1965 की धारा 4 की उप मद 28 में 151 सी आर पी सी का प्रावधान तो बताया गया है , ,जिसमे जाँच , दंडनायक को सुचना , उच्च अधिकारीयों को सुचना , फिर जांच के निष्कर्ष के बाद , गिरफ्तारी की कार्यवाही है , लेकिन विवेकाधिकार के आधार पर , बिना जाँच शंका के आधार पर , 107 , 116 सी आर पी सी की कार्यवाही का अधिकार नहीं है , ,मेने उन्हें सी आर पी सी की कार्यवाही का हवाला दिया , तो वोह मानने को तय्यार नहीं थे , चर्चा के दौरान ,, मेने उन्हें ,, मधु लिमये बनाम भारत सरकार , मेनका गाँधी बनाम ,भारत सरकार , मामले में , माननीय सुप्रीमकोर्ट के पांच जजों का प्रतिपादित सिद्धांत , जो संविधान के अनुच्छेद 148 में घोषणात्मक आदेश है ,, जो जजमेनेट इन पर्सोना नहीं , जजमेंट जनरल है ,यानि सभी लोगों पर यह जजमेंट लागु होने वाला है ,, उस आदेश में प्रतिपादित सिद्धांत के तहत तो पुलिस की इस तरह की कार्यवाहियां , प्रताड़ित करने वाली , परेशान करने वाली मानी जाना चाहिए ,, जबकि सुप्रीमकोर्ट , राजस्थान हाईकोर्ट ने , सी आर पी सी के ऐसे प्रावधानों में , कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने पर ,भी कई सिद्धांत प्रतिपादित किये है , सी आर पी सी में खुद लिखा है , के 107 , 116 सी आर पी सी मामले में ,अगर 108 सी आर पी सी की कार्यवाही नहीं है , ,तो फिर उससे हाज़री के लिए ज़मानत मुचलके इन्हीं लिए जाएंगे , पहले अधिकतम छह माह में , इन आरोपों की जांच होगी और अगर जांच में , दोषी हुए तो फिर भविष्य के लिए पाबंद करने के आदेश होंगे , लेकिन बाबू राज है , क़ानूनविदों में कुछ लोगों की मोन सहमति है , जाते है ,, रटे रटाये फार्मूले के तहत ,, ज़मानत , मुचलके , पाबंदी के कागज़ भरते है , छह माह तक पेशिया , या फिर पहले दिन ही नोटिस स्वीकार , पाबंद हो जाते है , छह माह की पेशी के बाद , ना थानाधिकारी गवाह में आया , न फरियादी या कोई गवाह में आया , कार्यवाही डिस्पोज़ल , हर ज़िले , हर कस्बे , हर शहर में हज़ारों हज़ारों कार्यवाहियां इस तरह की पेंडिंग है , तेज़ तय्यार हो रही है , पेश हो रही है ,, शांति भंग मामले , या शांति भंग परिवाद मामले में , हज़ारो प्रताड़ित तो होते है , लेकिन इक्का दुक्का ही निगरानी याचिका पेश करता है , फिर छह माह बाद वही , कार्यवाही समाप्त , कुछ मामलों में ,हाईकोर्ट , सुप्रीमकोर्ट , ने आवश्यक निर्देश जारी किये है ,, लेकिन उन निर्देशों को , ना तो हम पढ़ते है , न पेश करते है , और ना ही , शांति भंग की कार्यवाही , रोज़ मर्रा कार्यपालक महोदय के रीडरों के समक्ष ,, ज़मानत मुचलके पेश करने की रूटीन कार्यवाही , फिर छह माह बाद डिस्पोज़ल मामले में ,यूँ ही सिलसिला चल रहा है , चल रहा है , ऐसे मामलों में , वकीलों के संगठनों , क़ानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों ,, मानवाधिकार संगठनों ,, प्रताड़ित लोगों , समाजसेवियों को , नियमित सेमिनारें आयोजित कर , देश की जनता को ऐसे क़ानूनी दुरूपयोग के , रोज़मर्रा दुरूपयोग और उपयोग ,, मामलों का फ़र्क़ समझाकर , अधिकारीयों को भी प्रशिक्षित करवाना चाहिए , ताकि आज़ादी का आंदोलन कुचलने के लिए असहमति पर ,, अनावश्यक गिरफ्तारी और लाठ साहब के इस क़ानून को , आज़ाद भारत में , मानवाधिकार आयोगों की निगरानी होने पर भी ,,, रूटीन सिस्टम में लागू किये जाने से रोका जा सके ,, बात कड़वी ज़रूर है , लेकिन सच्ची है ,या नहीं ,यह तो , आप जैसे क़ानून विद भाइयों के दिए गए , मार्गदर्शन , सुझावों के बाद ही , मुझ जैसे , निरक्षर विधिक छात्र को समझ में आ पाएगी ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
12 अगस्त 2021
कल एक अजीब हादसा हुआ
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