सूरए अल इन्शिरा
सूरए अल इन्शिरा मक्के में नाजि़ल हुआ और इसकी आठ (8) आयतें हैं
ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
(ऐ रसूल) क्या हमने तुम्हारा सीना इल्म से कुशादा नहीं कर दिया (जरूर किया) (1)
और तुम पर से वह बोझ उतार दिया (2)
जिसने तुम्हारी कमर तोड़ रखी थी (3)
और तुम्हारा जि़क्र भी बुलन्द कर दिया (4)
तो (हाँ) पस बेशक दुशवारी के साथ ही आसानी है (5)
यक़ीनन दुशवारी के साथ आसानी है (6)
तो जब तुम फारिग़ हो जाओ तो मुक़र्रर कर दो (7)
और फिर अपने परवरदिगार की तरफ रग़बत करो (8)
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
13 अगस्त 2021
ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
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