*वैसे तो हम कोई राजनीतिक,पार्टी के सदस्य नहीं,और ना ही,इस प्रकार कि, पार्टीयों में,विश्वास करतें हैं*
लेकिन इस बात से तो अवश्य ही, सहमत हैं,कि, पार्टीयां होनीं चाहिये।
एक शनिवार की रात को,
और दूसरी रविवार की दिन में। जब भी हों आप मंहगाई से त्रस्त, तो ऐसे पार्टियां करके-सबको करते रहिए मस्त। ज़िन्दगी को हर हाल में खुश होकर जीना सीखिये,क्योंकि,जिंदगी का,कोई गुजरा हुआ दिन फिर लौटके आने वाला नहीं? जो आपसे जुदा होकर चला गया,वो फिर से आपकीं पार्टी में आने वाला नहीं?* इसलिये,*निष्कर्ष के रूप में* पार्टीयों का होना,सबके स्वास्थ के लिये उचित और उपयोगी हैं। तो देरी किसी बात की? काल करे,सो आज कर......आज करें..........?
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