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05 सितंबर 2017

सभी हिन्दू भाइयो को अनंत चतुर्दर्शी की बधाई

हिन्दू धर्म में अपना खोया हुआ स्वाभिमान ,,राजपाठ ,,ताक़त ,,को दुबारा हांसिल कर स्वाभिमान से सुरक्षित रहने की पूजापद्धति अनन्तचतुर्दर्शी के रूप में मनाई जाती है ,,,इस अवसर पर सभी हिन्दू भाइयो को मेरी तरफ से बधाई ,,मेरी दुआ है के मेरे देश की सुख शांति ,,अमन ,चेन ,,सुकून ,,प्यार ,,मोहब्बत ,,आत्मस्वाभिमान ,,दुश्मनो के छक्के छुड़ाने वाला अदम्य साहस ,,सीमाओं पर ,,मेरे बहादुर जांबाज़ सिपाहियों का हौसला ,,,मेरे देश के नेताओ की ईमानदारी ,,उनके जुमलेबाज़ी से मुक्ति ,,मेरे देश के नेता जो कहे वोह करके दिखाए ऐसा स्वाभिमान उनका फिर से लोटे ,,फिर से मेरा देश ,,मज़बूत ,,अटूट ,,सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा ,,मेरा भारत महान बने ,,इसी दुआओं के साथ सभी हिन्दू भाइयो को अनंत चतुर्दर्शी की बधाई ,,जबकि जैन भाइयो को पर्युषण पर्व की मुबारकबाद ,,बधाई ,,,,,दोस्तों ,,,इस दिन अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनन्तसूत्रबांधा जाता है,, कहा जाता है कि जब पाण्डव जुएमें अपना सारा राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनन्तचतुर्दशीका व्रत करने की सलाह दी थी। धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदीके साथ पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया तथा अनन्तसूत्रधारण किया। अनन्तचतुर्दशी-व्रतके प्रभाव से पाण्डव सब संकटों से मुक्त हो गए।
कथा,,,,,,,
एक दिन कौण्डिन्य मुनि की दृष्टि अपनी पत्नी के बाएं हाथ में बंधे अनन्तसूत्रपर पडी, जिसे देखकर वह भ्रमित हो गए और उन्होंने पूछा-क्या तुमने मुझे वश में करने के लिए यह सूत्र बांधा है? शीला ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया-जी नहीं, यह अनंत भगवान का पवित्र सूत्र है। परंतु ऐश्वर्य के मद में अंधे हो चुके कौण्डिन्यने अपनी पत्नी की सही बात को भी गलत समझा और अनन्तसूत्रको जादू-मंतर वाला वशीकरण करने का डोरा समझकर तोड दिया तथा उसे आग में डालकर जला दिया। इस जघन्य कर्म का परिणाम भी शीघ्र ही सामने आ गया। उनकी सारी संपत्ति नष्ट हो गई। दीन-हीन स्थिति में जीवन-यापन करने में विवश हो जाने पर कौण्डिन्यऋषि ने अपने अपराध का प्रायश्चित करने का निर्णय लिया। वे अनन्त भगवान से क्षमा मांगने हेतु वन में चले गए। उन्हें रास्ते में जो मिलता वे उससे अनन्तदेवका पता पूछते जाते थे। बहुत खोजने पर भी कौण्डिन्यमुनि को जब अनन्त भगवान का साक्षात्कार नहीं हुआ, तब वे निराश होकर प्राण त्यागने को उद्यत हुए। तभी एक वृद्ध ब्राह्मण ने आकर उन्हें आत्महत्या करने से रोक दिया और एक गुफामें ले जाकर चतुर्भुजअनन्तदेवका दर्शन कराया।
भगवान ने मुनि से कहा-ने जो अनन्तसूत्र
तुम का तिरस्कार किया है, यह सब उसी का फल है। इसके प्रायश्चित हेतु तुम चौदह वर्ष तक निरंतर अनन्त-व्रत का पालन करो। इस व्रत का अनुष्ठान पूरा हो जाने पर तुम्हारी नष्ट हुई सम्पत्ति तुम्हें पुन:प्राप्त हो जाएगी और तुम पूर्ववत् सुखी-समृद्ध हो जाओगे। कौण्डिन्यमुनिने इस आज्ञा को सहर्ष स्वीकार कर लिया। भगवान ने आगे कहा-जीव अपने पूर्ववत् दुष्कर्मोका फल ही दुर्गति के रूप में भोगता है। मनुष्य जन्म-जन्मांतर के पातकों के कारण अनेक कष्ट पाता है। अनन्त-व्रत के सविधि पालन से पाप नष्ट होते हैं तथा सुख-शांति प्राप्त होती है। कौण्डिन्यमुनि ने चौदह वर्ष तक अनन्त-व्रत का नियमपूर्वक पालन करके खोई हुई समृद्धि को पुन:प्राप्त कर लिया।
जैन धर्म में महत्व
जैनियों के लिए महत्वपूर्ण ,अनंत चतुर्दशी या अनंत चौदस जैन धर्मावलंबियों के लिए सबसे पवित्र तिथि है।,, यह मुख्य जैन त्यौहार, पर्यूषण पर्व का आख़री दिन होता है।

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