मेरे वालिद ,,मेरे उस्ताद ,,मेरे शिक्षक ,,मेरे वालिद ने मुझे ऊँगली पकड़
कर चलना ,सिखाया ,खुद के पेरो पर खड़ा रहकर ,स्वीभिमान के साथ जीने का सलीक़ा
सिखाया ,,मेरे वालिद ने मुझे बेस्ट शूटर बनाने के लिए ,,निशानेबाज़ी की
उस्तादी के साथ ,निशाना साधना सिखाया ,,सब्र ,,,विनम्रता ,,इस्लाम की
जानकारी की दौलत मेरे वालिद ने मुझे उस्ताद बनकर ,,सिखाई ,,में मेरे वालिद
मोहतरम उस्ताद ,अल्हाज मरहूम असगर अली खान का ताबेदार था ,,और इंशा अल्लाह
रहूंगा ,,,अल्लाह मेरे वालिद के सिखाई पाठ पर जो ,,सीख ,,क़ुरान ,,हदीस
,,दुनियावी तजुर्बे की रौशनी में मुझे ,,मेरे वालिद से मिली ,,में उसी पर
चलता रहूंगा ,,,उस्तादों के लिए सिर्फ साल के एक दिन की इस परम्परा को
निबाहते हुए ,,मेरी तरफ से भी सही उस्तादों को मेरी मुबारकबाद ,,बधाई
,,,अख्तर
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