राजस्थान विधि एवं विधिक कार्यविभाग ने ,,दिव्यांग मामलो के लिए पृथक से
सभी जिला न्यायालयों को विशेष अदालत घोषित किया है ,,,महामहिम राज्यपाल की
ऒर से जारी आदेश दिनांक 30 अगस्त 2017 में 22 अगस्त 2017 को जारी अधिसूचना
द राइट्स ऑफ़ परसन्स डिसएबिलिटी एक्ट 2016 की धारा 84 के विधिक प्रावधान
के जयपुर और जोधपुर के अलावा राजस्थान के सभी राजस्व ज़िलों के सेशन
न्यायालयों को इस सुनवाई के लिए विशेष अदालत घोषित किया है ,,,,वक्त आदेश
को राजस्थान हाईकोर्ट की तरफ से 4 सितम्बर को आवश्यक सूचनार्थ
एवं कार्यवाही के लिए भेज दिया है ,,, उक्त अधिनियम के तहत प्रत्येक
दिव्यांग को जीने का अधिकार है ,,इसी क्रम में यह क़ानून बनाकर ,,पीड़ितों को
इंसाफ दिलाने का क़ानून बनाया गया है ,,इसके उलंग्घन पर दोषी व्यक्ति के
खिलाफ मुक़दमा दर्ज कर कार्यवाही का प्रावधान है जबकि पुलिस या समाजसेवक ऐसे
पीड़ित दिवांग को ज़िलामजिस्ट्रेट के आदेश से सुरक्षित स्थान पहुंचाएगा
,,सरकारों पर इनके कल्याण ,सुरक्षा ,,,सहित प्रबंधन की ज़िम्मेदारी है जो
अभी तक पूरी नहीं हुई है ,राजस्थान विधि विभाग ने चार वर्ष पहले राष्ट्रिय
मानवाधिकार अधिनियम की धारा 30 के प्रावधान के तहत विशेष मावधिकारो का गठन
करते हुए ,,जिला जज को अपने राजस्व ज़िले में विशेष मानवाधिकार न्यायालय का
कार्य करने का आदेश दिए थे ,लेकिन अब तक यह आदेश फाइलों में दबे है जबकि
,,राजस्थान बार एसोसिएशन ,,बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान ,,ज़िले की बार एसोसिएशन
,,खुद हाईकोर्ट के इंस्पेक्टिंग जज लगातार अदालतों का हर वर्ष इंस्पेक्शन
करते रहे है ,,ऐसे जागरूक वकीलों के बीच ,,पीड़ितों को त्वरित न्याय के लिए
चार वर्ष पूर्व खोली गयी जिला मानवाधिकार विशेष न्यायालय अब तक कार्य करना
शुरू नहीं कर पायी है ,,अब तक सरकार ने इस मामले में विशेष लोक अभियोजक
की नियुक्ति भी नहीं की है ,,,जब मानवाधिकार संरक्षण मामलों की सुनवाई में
यह हालत है तो दिव्यांगों के न्यायिक अधिकारों के लिए अधिसूचित इन जिला
न्यायालयो के प्रति वकीलों ने जागरूकता नहीं दिखाई ,,इंस्पेक्टिंग जजेज़ ने
इस मामले का प्रसंज्ञान नहीं लिया तो यह आदेश भी मानवाधिकार न्यायालय की
तरह चार साल तक पत्रित हो जाए कोई दूर नहीं है ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा
राजस्थान
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