"गौरी लंकेश,,,एक क़लम कार ,,एक पत्रकार ,,उनकी पेनी क़लम रुक न सकी ,,बिक न
सकी ,,तो कटटरपंथो ने जो करते है वही किया ,,उनकी आवाज़ ,,उनके अल्फ़ाज़ों को
दबाने के लिए ,,एक निहत्थी महिला पर तीन गोलियां दाग कर उनकी हत्या करते
हे बहादुरी दिखाई है ,,इसके पहले कई क़लमकारो की हत्याएं हुई ,,कई क़लमकारो
के हाथ क़लम किये गए ,,अंगूठे ,,उँगलियों के नाख़ून नोचे गए ,,परिवार सहित
ज़िंदा जलाया गया ,,लेकिन विचार ,,,क़लम ,अलफ़ाज़ कभी रुके नहीं ,,हाँ इस युग
में , ,,,बिके ज़रूर है ,,इस युग में सियासी ज़रूर हुए है
,,जो सांसद ,,विधायक ,,मंत्री बने है ,,उन्हें पत्रकार कहने का हक़ भी नहीं
है ,,,जो बिकाऊ मिडिया है वोह तो तवायफ से भी बदतर हालात में है ,,जो सोशल
मीडिया एक्टिविस्ट एक नौकर की तरह ,,विचारधारा बेच रहे है ,,एक नौकर की
तरह ,,लिखे हुए अल्फ़ाज़ों का ,,उनकी बेहूदा विचारधारा के अल्फ़ाज़ों से
प्रतिकार कर रहे है ,,सब ऐसे लोगो को जानते है ,,लेकिन बोलते नहीं
,,पत्रकार गोरी लंकेश ,,मरी नहीं ,,वोह शहीद हुई है ,,उनकी शहादत
पत्रकारिता का इतिहास हमेशा याद रखेगा लेकिन जो लोग बिक गए है ,,जो लोग चंद
रुपयों के खातिर ,,कुछ पद्मश्री ,,विज्ञापनों के खातिर ,,कुछ लोग सांसद
,,विधायक ,,मंत्री के खातिर खुद को ,,,एक गंदगी की तरफ धकेल चुके है ,,वोह
पत्रकारिता के नाम पर कीड़े मकोड़ो के ही जन्मदाता है ,,लेकिन हज़ार ,,लाख
,,करोडो ,,अरब ,,,खरब ,,झूंठ में अगर एक सच ज़िंदा हो तो वोह सच इन सब पर
भारी होता है और इस सच को या तो इन झूंठो को मारना पढ़ता है ,,या फिर मानना
पढ़ता है ,यह लोग इस सच को मान नहीं सकते थे ,,खरीद नहीं सकते थे ,,बस
इसीलिए इस सच को ,,इस पत्रकार गोरी लंकेश को हमेशा के लिए सुला दिया गया
,,अफसोस हुआ ,बढ़ी बड़ी डिबेट दिखाने वाले रिश्वत के रूप में सरकार से
पद्मश्री जैसे सम्मान पाने वाले ,,सांसद जैसे पद पाने वाले मीडिया दलाल इस
मुद्दे को उठाने की हिम्मत भी नहीं कर पा रहे है ,,लेकिन उन्हें सोचना होगा
,,समझना होगा ,,मोत से किसकी यारी है ,,आज गोरी लंकेश की तो कल मेरी ,,कल
उनकी बारी है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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