कहने को तो समान नागरिक संहिता है ,, लेकिन मुस्लिम सहित सभी धर्मों के विशेषज्ञ प्रतिनिधि उसमे सदस्य तक नहीं
प्रस्तावित समान नागरिक संहिता में लिव इन रिलेशन शिप को पूरी तरह खत्म करने , तलाक़ में अगर सहमति हो तो तुरंत संयुक्त प्रार्थना पत्र पर तलाक़ होने ,, नाता प्रथा के नाम पर खरीद फरोख्त खत्म करने , नौकरियों में समान अंकों के आधार पर ही नौकरी देने , देश के संविधान को कलंकित करणे वाले पंडित नेहरू आरक्षण सर्कुलर 1952 में केवल हिन्दुओं के लिए शब्द हटा कर देश के हर नागरिक को समान रूप से उसके आरक्षण का लाभ देने सहित कई सुझावों के साथ मुख्यमंत्री को जिला कलेक्टर के माध्यम से , ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के महासचिव एडवोकेट अख्तर खान अकेला ने मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार को सुझाव भिजवाए
कोटा 7 जुलाई ,राजस्थान में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता को लेकर कोटा में प्रस्तावित जन सुनवाई 7 जुलाई की रद्द हो गई जबकि 8 जुलाई को जिला परिषद कोटा के सभागार में जन सुनवाई का कार्यकम है , ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के महासचिव एडवोकेट अख्तर खान अकेला का कहना है की यह संवेदनशील मामला , सभी धर्मों के परसनल लॉ से जुड़ा है ,,मांनव अधिकारों का संरक्षण भी इसमें ज़ररी है ऐसे में उक्त समान नागरिक समिति में मुस्लिम सहित अन्य धर्मों के प्रतिनिधि नहीं होना उपेक्षित धर्मों के पर्सनल लो के साथ कुठाराघात है ऐसे में सिक्ख ,, क्रिश्चियन , जैन ,, मुस्लिम ,बौद्ध समाजों को परफेक्ट न्याय कैसे मिल सकेगा इस लिए एडवोकेट अख्तर खान अकेला ने उक्त समिति का विस्तार करते हुए इसमें सभी धर्मों के एक एक विशेषज्ञ प्रतिनिधि को और जोड़ने की मांग की है ,, एडवोकेट अख्तर खान अकेला ने कोटा जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार को भेजे गए सुझाव ज्ञापन में ,, लिव इन रिलेशन शिप को अय्याशीउ और समाज में गंदगी फैलाने वाला बताते हुए इसपर तुरंत रोक लगाकर इसे दंडात्मक बनांने ,, नौकरियों में सिर्फ मेरिट अंकों के आधार पर सभी धर्म ,,समाजों को समानता के आधार पर वरीयता से नौकरी का प्रावधान लागू हो,यही समानता का नियम अंकों की मेरिट के आधार पर स्कूल कॉलेज , मेडिकल ,, आई आई टी अन्य व्यवसायिक कोर्स में समान नियम लागू हो , ज्ञापन में ऐडवोकेट अख्तर खान अकेला ने पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा संविधान बनते ही , आरक्षण परिपत्र 1952 के जरिये बाबा अम्बेडकर द्वारा निर्मित संविद्धान में आर्टिकल 14 में धर्म ,, लिंग जाति अन्याधारपरभेदभाव नहीं करने और सभी लागु करने की जो पाबंदी लगाई थी उसे तोड़ दी गई और उसमे सिर्फ हिन्दुओं के लिए लागू करना लिखकर संविधान का पणित नेहरू ने मज़ाक़ उड़ाया था ,, उस असंवैधानिक सर्कुलर को संशोधित कर देश के हर नागरिक के लिए समान रूप से लागू करने का नियम बने , किसी भी धर्म से जुड़ा सहमति से जुड़ा तलाक़ का मामला हो, उसका निस्तारण तुरंत किया जाकर उंन्हे डिक्री मिले , रजिस्ट्रेशन मिले ,, रजिस्ट्रेशन को ही तलाक़ की डिक्री का दर्जा हो , और रजिस्ट्रेशन संयुक्त प्रार्थना पत्र पेश करने की तिथि से समयबद्ध एक हफ्ते में करने की पाबंदी हो , जबकि लिव रिलेशन शिप कोसमज के लिए अभिशाप , गदगी फैलाने वाला बताते हुए इसे तुरंत रोककर दंडात्मक बनाने का सुझाव है,,,,,
एडवोकेट अख्तर खान अकेला द्वारा भेजा गया ज्ञापन इस प्रकार है ,,,
माननीय मुख्यमंत्री महोदय,
राजस्थान सरकार,
जयपुर
ज़रिये ,, माननीय जिला कलेक्टर महोदय कोटा
विषय: प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) एवं संबंधित विधिक सुधारों के संबंध में सुझाव।
महोदय,
मैं भारत के संविधान में निहित न्याय, समानता, स्वतंत्रता एवं बंधुत्व के आदर्शों तथा अनुच्छेद 14, 15, 16, 21, 25, 38, 39 एवं 44 की भावना को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित सुझाव प्रस्तुत करता हूँ—
1 ,,,यदि समान नागरिक संहिता लागू की जाती है तो वह धर्म, जाति, पंथ एवं समुदाय से परे भारत के प्रत्येक नागरिक पर समान रूप से लागू हो, जिससे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) एवं अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध) की भावना सुदृढ़ हो। भारत सरकार द्वारा देश के अलग अलग अधिसूचित कर्मकारों को 1952 में अधिसूचना जारी कर आरक्षण में शामिल किया था, लेकिन समान नागरिक संहिता, संविधान आर्टिकल 14 की धज्जियां उड़ाते हुए उसे धर्म आधारित केवल हिंदुओं के लिये शब्द जोड़कर संविधान की खिल्ली उड़ाई, उस पाबन्दी को हटवाकर पूरे देश के सवधर्म नागरिक को समान रूप से इस आरक्षण का लाभ लागू कर समान नागरिक संहिता लागू की जाए,
2. विवाह पंजीकरण सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य हो।विवाह की न्यूनतम आयु एवं आवश्यक शर्तें सभी पर समान हों।बहुविवाह, विवाह विच्छेद एवं पुनर्विवाह के नियम स्पष्ट एवं समान हों। हिन्दू, मुस्लिम तलाक़ आपसी रज़ामन्दी से हो तो तलाक रजिस्ट्रेशन तुरन्त प्रस्तुत दिनांक को ही करवाया जाए, हिन्दू मैरिज एक्ट 13 बी के सहमति से तुरन्त तलाक़ का प्रावधान मुस्लिम समाज के लिये भी मुस्लिम महिला तलाक़ अधिनियम 1921 में संशोधन कर समान त्वरित समझौता तलाक़ नियम लागू किया जाए,
3. तलाक की प्रक्रिया न्यायसंगत, पारदर्शी एवं दोनों पक्षों के समान अधिकारों पर आधारित हो।महिला एवं पुरुष दोनों को समान कानूनी संरक्षण मिले। बिना महर, स्त्रीधन चुकता किये तलाक़ दंडात्मक हो प्रतिबंधित हो, नाता प्रथा के नाम पर महिलाओं की खरीद फरोख्त पर पूर्ण रोक लगे, दंडात्मक प्रावधान भी हों,
4. उत्तराधिकार एवं संपत्ति पुत्र एवं पुत्री को समान उत्तराधिकार अधिकार प्राप्त हों।पति-पत्नी एवं माता-पिता के अधिकार समान रूप से संरक्षित हों। मुस्लिम महिलाओं को सम्पत्ति के अधिकार है दूसरे समाजों में भी दिया जाए, वृद्धाश्रम में पुत्रों के होते हुए किसी पेरेंट्स को रखने पर पुत्रों, पुत्र वधुओं के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान हो,
5. जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण सभी नागरिकों के लिए समान नियमों के अनुसार अनिवार्य हो।
6. गोद लेना एवं अभिभावकत्व सभी नागरिकों को समान कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत दत्तक ग्रहण एवं अभिभावक बनने का अधिकार मिले।
7. आरक्षण संबंधी सुझाव,,भारत का संविधान अनुच्छेद 15(4), 15(5), 16(4), 16(4A), 16(6) आदि के माध्यम से विभिन्न प्रकार के आरक्षण का प्रावधान करता है।मेरा सुझाव है कि—आरक्षण व्यवस्था की समय-समय पर निष्पक्ष समीक्षा की जाए।सामाजिक न्याय एवं समान अवसर के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाई जाए।आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों सहित सभी संवैधानिक प्रावधानों का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।योग्यता (Merit) एवं सामाजिक न्याय—दोनों संवैधानिक उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाए रखने हेतु विशेषज्ञ समिति गठित की जाए।
8. अधिसूचना की भाषा यदि किसी सरकारी अधिसूचना में ऐसा शब्द प्रयोग हो जिससे किसी एक धार्मिक समुदाय तक उसका दायरा सीमित प्रतीत होता हो, तो उसकी भाषा संविधान के धर्मनिरपेक्ष एवं समान नागरिकता के सिद्धांतों के अनुरूप स्पष्ट एवं सर्वसमावेशी बनाई जाए, ताकि सभी नागरिकों के लिए समानता का संदेश जाए।
9. मौलिक अधिकारों का संरक्षण समान नागरिक संहिता बनाते समय संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 के अंतर्गत धार्मिक स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 14 एवं 21 के अंतर्गत समानता एवं गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का समुचित संतुलन रखा जाए।
10, बहु विवाह प्रथा को रोक लगाकर सभी धर्मों में दंडात्मक बनाया जाए, अय्याशी के लिये जो रिलेशन शिप लिविंग की छूट को मान्यता दी है उसे खत्म कर दंडात्मक किया जाए, दहेज़ क़ानून सख्त किया जाए, समान नागरिक क़ानून में भी दंडात्मक प्रावधान हों,
11, कोई भी धर्म सड़क पर धार्मिक गतिविधि , जुलूस, वगेरा के कार्यक्रम नहीं रखे इसके उलनग्घन को दंडात्मक बनाया जाए, धार्मिक स्थल कोई भी हो, धार्मिक स्थल की एक ईंट भी कोई भी धर्म बिना सरकार की विधिक अनुमति के ना रखे, दंडात्मक प्रावधान हों, डी जे, माइक की आवाज़ सभी धार्मिक कार्यक्रममें 80 डेसीबल से अधिक होने पर तुरन्त डी के, माइक जब्ती कर दंडात्मक प्रावधान किए जाएं,
12, सभी नागरिकों को डॉक्टर, इंजीनियर सहित अन्य एडमिशन में मेरिट के आधार पर ही प्रवेश मिले किसी को दस नम्बर पर ओर किसी को 500 नम्बर पर भी एडमिशन ना मिले इसे समान किया जाए, इसी तरह कोई भी नोकरी हो एक समान मेरिट प्रतिभा के आधार पर ही नोकरी मिले, किसी को ज़ीरो नम्बर नोकरी मिल रही है तो किसी को 500 नम्बर लाने पर भी नहीं मिल रही इस भेदभाव को खत्म कर समान नागरिक क़ानून में शामिल किया जाए,
13. व्यापक जन-सुनवाई विधेयक तैयार करने से पूर्व विधि विशेषज्ञों, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ताओं, महिला संगठनों, अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों, अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से व्यापक परामर्श किया जाए।
14, ई डब्ल्यू एस, ओ बी जी प्रमाणपत्र बनाने में धर्म गुरु, समाज , पंचायत अध्यक्ष के प्रमाणीकरण के आधार पर ही बनाने के निर्देश हों, मुस्लिम में दस्तावेजी प्रक्रिया में जाति भिश्ती, जुलाहा, पठान वगेरा की जगह सिर्फ मुस्लिम लिखा जाता, हिन्दू समाज में भी यही दिक़्क़तें है, जिसे समाज के प्रमाणीकरण पर लागू के प्रावधान हों,
15, संविधान में मान्यता प्राप्त सभी भाषाओं को स्कूली, कॉलेज शिक्षा में बराबर का समान अधिकार देते हुए, हर भाषा इच्छानुसार होने पर पढ़ाया जाना अनिवार्य किया जाए, इसके लिए अध्यापक, लेक्चरर्स की पर्याप्त नियुक्ति अनिवार्य की जाए,
अतः निवेदन है कि उपर्युक्त सुझावों पर विचार करते हुए ऐसा कानून बनाया जाए जो संविधान की मूल भावना—न्याय, समानता, स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता एवं बंधुत्व—के अनुरूप हो तथा सभी नागरिकों के अधिकारों की समान रूप से रक्षा करे।
भवदीय
अख्तर खान अकेला एडवोकेट
महासचिव, ह्यूमन रिलीफ सोसायटी, 2 थ 15 , मैन रोड, बृजवासी मिष्ठान के पास, विज्ञाननगर कोटा राजस्थान 324005
मोबाइल 9829086339
akhtar khan akela
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