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09 जुलाई 2026

समान नागरिक संहिता समिति में सभी धर्मों के विशेषज्ञों को मिले जगह, तभी होगा न्याय" — एडवोकेट अख्तर खान अकेला,

 

समान नागरिक संहिता समिति में सभी धर्मों के विशेषज्ञों को मिले जगह, तभी होगा न्याय" — एडवोकेट अख्तर खान अकेला,
सीएम को भेजे 15 सुझाव, लिव-इन रिलेशनशिप पर प्रतिबंध, सहमति से त्वरित तलाक, नाता प्रथा पर रोक और समिति में सभी धर्मों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग
के डी अब्बासी
कोटा, जुलाई। राजस्थान में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के महासचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अख्तर खान अकेला ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से विस्तृत सुझाव-पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे संवेदनशील विषय पर गठित समिति में मुस्लिम सहित सभी धर्मों के विशेषज्ञ प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक समुदाय के व्यक्तिगत कानून (पर्सनल लॉ) और संवैधानिक अधिकारों का समुचित संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
अख्तर खान अकेला ने कहा कि यदि समिति में मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई सहित अन्य समुदायों के विशेषज्ञ शामिल नहीं होंगे तो प्रस्तावित कानून में सभी वर्गों को समान न्याय मिलना कठिन होगा। उन्होंने समिति का विस्तार कर प्रत्येक प्रमुख धर्म से एक-एक विशेषज्ञ सदस्य को शामिल करने की मांग की।
ज्ञापन में उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप को समाज के लिए हानिकारक बताते हुए इसे समाप्त कर दंडात्मक प्रावधान लागू करने का सुझाव दिया है। वहीं, पति-पत्नी की आपसी सहमति होने पर तलाक की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाते हुए संयुक्त आवेदन के आधार पर एक सप्ताह के भीतर तलाक का पंजीकरण और डिक्री जारी करने की व्यवस्था करने की मांग भी की गई है।
अख्तर खान अकेला ने नाता प्रथा के नाम पर महिलाओं की खरीद-फरोख्त पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, बहुविवाह को सभी धर्मों में दंडनीय अपराध घोषित करने, दहेज कानून को और अधिक सख्त बनाने तथा महिला अधिकारों को समान रूप से सुरक्षित करने की भी मांग की है।
ज्ञापन में उन्होंने सरकारी नौकरियों, मेडिकल, इंजीनियरिंग, आईआईटी सहित सभी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश केवल समान मेरिट के आधार पर देने का सुझाव देते हुए कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
उन्होंने आरक्षण व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा करने, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सहित सभी संवैधानिक प्रावधानों का समान रूप से पालन सुनिश्चित करने तथा इस विषय पर विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी सुझाव दिया है। साथ ही वर्ष 1952 की आरक्षण संबंधी अधिसूचना की भाषा में संशोधन कर उसे सभी नागरिकों के लिए समान रूप से लागू करने की मांग भी उठाई।
ज्ञापन में धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25 एवं 26 के बीच संतुलन बनाए रखने, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, विवाह पंजीकरण, उत्तराधिकार, गोद लेने, अभिभावकत्व और संपत्ति अधिकारों के लिए समान कानून बनाने का सुझाव दिया गया है।
इसके अतिरिक्त उन्होंने बिना सरकारी अनुमति धार्मिक स्थलों के निर्माण, सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक आयोजन, निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि प्रदूषण करने वाले डीजे व लाउडस्पीकर पर दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रस्ताव रखा है।
अख्तर खान अकेला ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि समान नागरिक संहिता का अंतिम प्रारूप तैयार करने से पहले विधि विशेषज्ञों, महिला संगठनों, अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों, अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा सामाजिक संगठनों से व्यापक जन-सुनवाई कर कानून बनाया जाए, ताकि यह संविधान की मूल भावना—न्याय, समानता, स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और बंधुत्व—के अनुरूप सभी नागरिकों के अधिकारों की समान रूप से रक्षा कर सके

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