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13 फ़रवरी 2026

हाडोती संभाग में देहदान बढ़ाने वाली प्रमुख संस्था बनी शाइन इंडिया

 हाडोती संभाग में देहदान बढ़ाने वाली प्रमुख संस्था बनी शाइन इंडिया
2. घर जाकर, परिवार के सदस्यों की समझाइश से बढ़ रहा है,देहदान
3. शाइन इंडिया एक मात्र संस्था,कोटा आस पास के मेडिकल कॉलेज को भी,उपलब्ध करा रही है अध्ययन के लिए देह


हाडोती संभाग में नेत्रदान अंगदान और देहदान के लिए वर्ष 2011 से अनवरत कार्य कर रही संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन ने देहदान के क्षेत्र में भी, अपना उत्कृष्ट आयाम स्थापित किया है ।

3 वर्षों से, देहदान के क्षेत्र में कार्य करने के बाद अभी तक संस्था के साथ पूरे हाडोती संभाग से 350 व्यक्तियों ने अपना देहदान का संकल्प पत्र भरा हुआ है । साथ ही अब तक 70 देहदान भी, संस्था के माध्यम से न सिर्फ हाडोती के मेडिकल कॉलेज को बल्कि शहर से दूर दराज के मेडिकल कॉलेज में भी संस्था के माध्यम से देहदान संपन्न हुए हैं ।

परिवार के सदस्यों के बीच में भरा जाता है संकल्प-पत्र, जिससे अंतिम समय में कोई व्यवधान न हो

संस्थापक डॉ कुलवंत गौड़ बताते हैं कि,जब भी संस्था के पास कोई देहदान का संकल्प पत्र भरने की इच्छा जाहिर करता है, संस्था सदस्य परिवार के मुखिया से बात कर समय निश्चित कर, परिवार के सदस्यों की पूरी तरह समझाइश करने के बाद ही, संकल्पकर्ता का देहदान संकल्प भरवाते हैं, देहदान से संबंधित सारी जानकारी को घर परिवार के सभी सदस्यों को अच्छे से विस्तार से बताते हैं, जिससे जब भी शोक का समय आता है, तब परिवार स्व प्रेरणा से प्रेरित होकर स्वयं संस्था को संपर्क कर, देहदान के कार्य में सहयोग करे ।

देहदान संकल्प लेने के इसी क्रम में, बीते दिनों बजरंग नगर निवासी सेवानिवृत शिक्षक बिरधी लाल मेरोठा ने 2 वर्ष तक अपनी पत्नी सुशीला देवी और बेटे रवि को देहदान के पुण्य कार्य के बारे में समझाया, उसके बाद डॉ कुलवंत ने घर पहुंच के परिवार के सभी सदस्यों के बीच में बिरधी लाल का देहदान संकल्प पत्र भरवाया ।

इसी तरह से देहदान के लिए,शाइन इंडिया के साथ सहयोगी संस्था के रूप में कार्य कर रही,रजत सेवा संस्थान के अध्यक्ष निर्मल दीक्षित के माध्यम से दादाबाड़ी निवासी,सूचना सहायक रश्मि अग्रवाल का देहदान संकल्प पत्र भरा गया ।

ज्ञात हो कि जब भी कभी, कोई परिजन दिवंगत के देहदान के लिए संस्था को संपर्क करते हैं तो सूचना मिलते ही संस्था के कुछ सदस्य शोकाकुल परिवार के घर जाकर देहदान को संपन्न करने की सारी व्यवस्था और जरूरी पेपर वर्क के बारे में जानकारी देते हैं । इससे शोकाकुल परिवार के सदस्यों का मनोबल तो बढ़ता ही है, इसके साथ ही देहदान का कार्य भी आसानी से संपन्न हो पाता है ।

जल्द ही संस्था एवं जागरूक शहर वासियों के प्रयासों से अब कोटा का नाम नेत्रदानी नगरी के साथ-साथ देहदानी नगरी के रूप में भी जाना जा सकेगा ।

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