मगर खु़दा के बरगुजीदा बन्दे (40)
उनके वास्ते (बेहिश्त में) एक मुक़र्रर रोज़ी होगी (41)
(और वह भी ऐसी वैसी नहीं) हर कि़स्म के मेवे (42)
और वह लोग बड़ी इज़्ज़त से नेअमत के (लदे हुए) (43)
बाग़ों में तख़्तों पर (चैन से) आमने सामने बैठे होगे (44)
उनमें साफ सफेद बुर्राक़ शराब के जाम का दौर चल रहा होगा (45)
जो पीने वालों को बड़ा मज़ा देगी (46)
(और फिर) न उस शराब में ख़ु़मार की वजह से) दर्द सर होगा और न वह उस (के पीने) से मतवाले होंगे (47)
और उनके पहलू में (शर्म से) नीची निगाहें करने वाली बड़ी बड़ी आँखों वाली परियाँ होगी (48)
(उनकी) गोरी-गोरी रंगतों में हल्की सी सुर्खी ऐसी झलकती होगी (49)
गोया वह अन्डे हैं जो छिपाए हुए रखे हो (50)
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
13 फ़रवरी 2026
उनके वास्ते (बेहिश्त में) एक मुक़र्रर रोज़ी होगी
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)