एक महिला ने संसद परिसर में नेहरू का कॉलर पकड़कर पूछा, "भारत आज़ाद हो गया, तुम देश के प्रधानमंत्री बन गए, मुझ बुढ़िया को क्या मिला."
इस पर नेहरू ने जवाब दिया, "आपको यही मिला है कि आप देश के प्रधानमंत्री का गिरेबान पकड़ कर खड़ी हैं."
कहते हैं कि महिला ने बंटवारे में अपना घर गवां दिया था. नेहरू के धुर विरोधी डॉ लोहिया के कहने पर महिला संसद परिसर में आई और नेहरू जैसे ही गाड़ी से उतरे, महिला ने उनका कॉलर पकड़कर ये सवाल पूछा था.
यह वही देश है. लोकतंत्र का करीब सात दशक बीत चुका है. वही देश की संसद है. विपक्ष की दो तीन महिला सांसद विरोध में खड़ी हो गईं तो कहा जा रहा है कि वे प्रधानमंत्री पर हमला कर सकती थीं, दांत काट सकती थीं इसलिए प्रधानमंत्री सदन में आए ही नहीं। वाह!
कहां से चले थे और कहां पहुंच गए! प्रधानमंत्री का कॉलर पकड़ने की आजादी से शुरू हुआ सफर यहां तक पहुंच गया है कि महिला सांसद दांत काट सकती थीं।
नेहरू को जीवन भर गाली दे-देकर प्राण दे दीजिए, इससे क्या होगा? उनसे महान बनने के लिए उनके बाल बराबर अपना किरदार तो बना लीजिए!

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