(ऐ रसूल उनसे कह दो कि) ये तो खु़दा की खि़लक़त है कि (भला) तुम लोग मुझे
दिखाओं तो कि जो (जो माबूद) ख़ु़दा के सिवा तुमने बना रखे है उन्होंने क्या
पैदा किया बल्कि सरकश लोग (कुफ़्फ़ार) सरीही गुमराही में (पडे़) हैं (11)
और यक़ीनन हम ने लुक़मान को हिकमत अता की (और हुक्म दिया था कि) तुम ख़़ुदा
का शुक्र करो और जो ख़़ुदा का षशुक्र करेगा-वह अपने ही फायदे के लिए शुक्र
करता है और जिसने नाशुक्री की तो (अपना बिगाड़ा) क्योंकी ख़़ुदा तो
(बहरहाल) बे परवाह (और) क़ाबिल हमदो सना है (12)
और (वह वक़्त याद करो) जब लुक़मान ने अपने बेटे से उसकी नसीहत करते हुए कहा
ऐ बेटा (ख़बरदार कभी किसी को) ख़़ुदा का शरीक न बनाना (क्योंकि) शिर्क
यक़ीनी बड़ा सख़्त गुनाह है (13)
(जिस की बख्शिश नहीं) और हमने इन्सान को जिसे उसकी माँ ने दुख पर दुख सह के
पेट में रखा (इसके अलावा) दो बरस में (जाके) उसकी दूध बढ़ाई की (अपने और)
उसके माँ बाप के बारे में ताक़ीद की कि मेरा भी शुक्रिया अदा करो और अपने
वालदैन का (भी) और आखि़र सबको मेरी तरफ लौट कर जाना है (14)
और अगर तेरे माँ बाप तुझे इस बात पर मजबूर करें कि तू मेरा शरीक ऐसी चीज़
को क़रार दे जिसका तुझे इल्म भी नहीं तो तू (इसमें) उनकी इताअत न करो (मगर
तकलीफ़ न पहुँचाना) और दुनिया (के कामों) में उनका अच्छी तरह साथ दे और उन
लोगों के तरीक़े पर चल जो (हर बात में) मेरी (ही) तरफ रुजू करे फिर (तो
आखि़र) तुम सबकी रुजू मेरी ही तरफ है तब (दुनिया में) जो कुछ तुम करते थे
(15)
(उस वक़्त उसका अन्जाम) बता दूँगा ऐ बेटा इसमें शक नहीं कि वह अमल (अच्छा
हो या बुरा) अगर राई के बराबर भी हो और फिर वह किसी सख़्त पत्थर के अन्दर
या आसमान में या ज़मीन मे (छुपा हुआ) हो तो भी ख़ुदा उसे (क़यामत के दिन)
हाजि़र कर देगा बेशक ख़ुदा बड़ा बारीकबीन वाकि़फकार है (16)
ऐ बेटा नमाज़ पाबन्दी से पढ़ा कर और (लोगों से) अच्छा काम करने को कहो और
बुरे काम से रोको और जो मुसीबत तुम पर पडे़ उस पर सब्र करो (क्योंकि) बेशक
ये बड़ी हिम्मत का काम है (17)
और लोगों के सामने (गु़रुर से) अपना मुँह न फुलाना और ज़मीन पर अकड़कर न
चलना क्योंकि ख़ुदा किसी अकड़ने वाले और इतराने वाले को दोस्त नहीं रखता और
अपनी चाल ढाल में मियाना रवी एख़्तेयार करो (18)
और दूसरो से बोलने में अपनी आवाज़ धीमी रखो क्योंकि आवाज़ों में तो सब से बुरी आवाज़ (चीख़ने की वजह से) गधों की है (19)
क्या तुम लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि जो कुछ आसमानों में है और जो
कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही ने यक़ीनी तुम्हारा ताबेए कर
दिया है और तुम पर अपनी ज़ाहिरी और बातिनी नेअमतें पूरी कर दीं और बाज़ लोग
(नुसर बिन हारिस वगै़रह) ऐसे भी हैं जो (ख़्वाह मा ख़्वाह) ख़़ुदा के बारे
में झगड़ते हैं (हालांकि उनके पास) न इल्म है और न हिदायत है और न कोई
रौशन किताब है (20)
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
07 जनवरी 2026
और दूसरो से बोलने में अपनी आवाज़ धीमी रखो क्योंकि आवाज़ों में तो सब से बुरी आवाज़ (चीख़ने की वजह से) गधों की है
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