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26 जनवरी 2026

लोगों के वास्ते जब (अपनी) रहमत (के दरवाजे़) खोल दे तो कोई उसे जारी नहीं कर सकता और जिस चीज़ को रोक ले उसके बाद उसे कोई रोक नहीं सकता और वही हर चीज़ पर ग़ालिब और दाना व बीना हकीम है

 सूरए फातिर (पैदा करने वाला) मक्के में नाजि़ल हुआ और उसकी पैंतालिस (45) आयतें हैं
खु़दा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
हर तरह की तारीफ खु़दा ही के लिए (मख़सूस) है जो सारे आसमान और ज़मीन का पैदा करने वाला फरिश्तों का (अपना) क़ासिद बनाने वाला है जिनके दो-दो और तीन-तीन और चार-चार पर होते हैं (मख़लूक़ात की) पैदाइश में जो (मुनासिब) चाहता है बढ़ा देता है बेशक खु़दा हर चीज़ पर क़ादिर (व तवाना है) (1)
लोगों के वास्ते जब (अपनी) रहमत (के दरवाजे़) खोल दे तो कोई उसे जारी नहीं कर सकता और जिस चीज़ को रोक ले उसके बाद उसे कोई रोक नहीं सकता और वही हर चीज़ पर ग़ालिब और दाना व बीना हकीम है (2)
लोगों खु़दा के एहसानात को जो उसने तुम पर किए हैं याद करो क्या खु़दा के सिवा कोई और ख़ालिक है जो आसमान और ज़मीन से तुम्हारी रोज़ी पहुँचाता है उसके सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं फिर तुम किधर बहके चले जा रहे हो (3)
और (ऐ रसूल) अगर ये लोग तुम्हें झुठलाएँ तो (कुढ़ो नहीं) तुमसे पहले बहुतेरे पैग़म्बर (लोगों के हाथों) झुठलाए जा चुके हैं और (आखि़र) कुल उमूर की रूजू तो खु़दा ही की तरफ है (4)
लोगों खु़दा का (क़यामत का) वायदा यक़ीनी बिल्कुल सच्चा है तो (कहीं) तुम्हें दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी फ़रेब में न लाए (ऐसा न हो कि शैतान) तुम्हें खु़दा के बारे में धोखा दे (5)
बेशक शैतान तुम्हारा दुश्मन है तो तुम भी उसे अपना दुशमन बनाए रहो वह तो अपने गिरोह को बस इसलिए बुलाता है कि वह लोग (सब के सब) जहन्नुमी बन जाएँ (6)
जिन लोगों ने (दुनिया में) कुफ्र इख़तेयार किया उनके लिए (आखे़रत में) सख़्त अज़ाब है और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए उनके लिए (गुनाहों की) मग़फेरत और निहायत अच्छा बदला (बेहश्त) है (7)
तो भला वह शख़्स जिसे उस का बुरा काम शैतानी (अग़वा से) अच्छा कर दिखाया गया है औ वह उसे अच्छा समझने लगा है (कभी मोमिन नेकोकार के बराबर हो सकता है हरगिज़ नहीं) तो यक़ीनी (बात) ये है कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है राहे रास्त पर आने (की तौफ़ीक़) देता है तो (ऐ रसूल कहीं) उन (बदबख़्तों) पर अफसोस कर करके तुम्हारे दम न निकल जाए जो कुछ ये लोग करते हैं ख़ुदा उससे खू़ब वाकि़फ़ है (8)
और ख़ुदा ही वह (क़ादिर व तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो हवाएँ बादलों को उड़ाए-उड़ाए फिरती है फिर हम उस बादल को मुर्दा (उफ़तादा) शहर की तरफ हका देते हैं फिर हम उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके मर जाने के बाद शादाब कर देते हैं यूँ ही (मुर्दों को क़यामत में जी उठना होगा) (9)
जो शख़्स इज़्ज़त का ख्वाहाँ हो तो ख़ुदा से माँगे क्योंकि सारी इज़्ज़त खु़दा ही की है उसकी बारगाह तक अच्छी बातें (बुलन्द होकर) पहुँचतीं हैं और अच्छे काम को वह खु़द बुलन्द फरमाता है और जो लोग (तुम्हारे खि़लाफ) बुरी-बुरी तदबीरें करते रहते हैं उनके लिए क़यामत में सख़्त अज़ाब है और (आखि़र) उन लोगों की तदबीर मटियामेट हो जाएगी (10)

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