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18 जनवरी 2026

प्रसंग : एक फरवरी 26 को रंगीतिका संस्था और साहित्य अकादमी के तत्वावधान में कोटा में प्रस्तावित हाड़ौती महिला रचनाकार सम्मेलन

ऐसा देश है मेरा / साहित्यिक परिचय ......993
श्रीमती रेणु सिंह 'राधे', कोटा
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प्रसंग : एक फरवरी 26 को रंगीतिका संस्था और साहित्य अकादमी के तत्वावधान में कोटा में प्रस्तावित हाड़ौती महिला रचनाकार सम्मेलन
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परिवेश और संदर्भों को मुखरित कर अपने सृजन से आशा और विश्वास के दीप प्रज्वलित करने वाली संवेदनशील रचनाकार रेणु सिंह 'राधे' का जन्म 1 अक्टूबर 1983 को उत्तरप्रदेश में शामली के समीप सुजती गाँव में पिता स्व. रामधन सिंह राठी एवं माता स्व. श्रीमती महेंद्री देवी के परिवार में हुआ। इनके पति शक्ति सिंह एक्स आर्मी मेन हैं। इन्होंने बी.ए. बी.एड. तक शिक्षा प्राप्त की।
रचनाकार ने 15 वर्ष की उम्र में आत्म कथ्य शैली में प्रथम कविता लिखी थी। पढ़ने के शौक ने लेखन की तरफ रुझान कर दिय कविताओं से शुरू होकर कहानियाँ और उपन्यास लेखन के विषय बन गए। लेखन मातृभाषा हिंदी को ही अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। इनके सृजन में श्रृंगार रस, विरह वेदना, भक्ति रस और सामाजिक रचनाओं के साथ साथ स्त्री विमर्श, स्त्री का अस्तित्व, स्त्री का संघर्ष शिद्दत से दिखाई देता है तथा स्वतंत्र कविताएं भी कोई न कोई संदेश देती है। साथ ही राजनैतिक माहौल पर कटाक्ष, आज के स्वार्थवादी इंसान, स्त्री होना पाप है क्या, जीवन की क्षण भंगुरता जैसे विषयों पर कविता लिखती हैं। ऑन लाइन मंचों के साथ - साथ काव्य गोष्ठियों और विभिन्न मंचों से काव्यपाठ के माध्यम से भी रचना और उनके संदेश समाज तक पहुँचते हैं।
इनकी कहानियों की विषय वस्तु भी प्रमुखतः आस-पास का परिवेश और सामाजिक कुरीतियां हैं। कहानी लेखन का सिलसिला तब से शुरू हुआ जब कक्षा 9 में इन्होंने पहली कहानी लिखी और उस पर खुश हो कर इनके चाचा जी ने इन्हें 10 रुपए का इनाम दिया। इस इनाम ने इनका हौसला बढ़ाया। इनकी कहानियों में 'सौतन', 'बड़े घर की बहू', 'गौरी', सर पर पल्लू आदि में समाज में प्रचलित रीति रिवाजों का उचित मूल्यांकन किया गया है। 'वो लडकी एवं औरत', 'बहू' कहानियों में स्त्री बहू या बेटी से हट कर स्त्री को स्त्री मानने का संदेश दिया गया है। 'गलती किसकी' कहानी में बच्चो को मिलने वाले अनुचित लाड़-प्यार पर सवाल किया गया है। 'मिलन चंबल घाट में' दो सहेलियों का आपसी प्रेम और द्वेष दर्शाया है। 'तुम मेरे- मगर कब तक' प्रेम की चाशनी में पगी एक प्रेम कहानी है। 'मुझे मत छूना' में अपने लिए लड़ती महिला की कहानी है। एक लघु कथा 'जिंदगी.. लव यू' में कैंसर से पीड़ित एक बच्चे की खुशी बाँटने की मनोदशा को शिद्दत से रेखांकित कर प्रेम का संदेश दिया गया है ।
रचनाकार के अब तक दो काव्य संग्रह
रंग बदलते अल्फाज 2024 में एवं प्रकृति की दहलीज पर 2025 में प्रकाशित हो चुके हैं। रंग बदलते अल्फाज संग्रह पर रचनाकार गरिमा राकेश गर्विता का कहना है कि कविताएं सहज, सरल और सीधी भाषा में लिखी गई हैं, जो पाठक को अपनी ओर खींचती हैं।" भूमिका में लेखिका लिखती हैं, " आज के भागदौड़ भरे जीवन में हमारे परिवेश से जुड़े कुछ विषयों के प्रति मन में कुछ भाव उभरे, जिनको बड़े जतन और उमंगों से शब्दों में पिरोया है। कहीं पर भक्ति रस की सरिता बहती मिलेगी तो कहीं यथार्थ का दर्शन, कहीं पर स्त्री विषय में पिरोए नाजुक विचार तो कहीं पर प्रेमिल भावों का संचार, तो कहीं पर तन्हाईसे द्वंद करता अंतर्मन।
इनकी 350 से अधिक रचनाएं 10 साझा संकलनों में और पत्र-पत्रिकाएं में प्रकाशित हुई हैं। अरुंधती द रक्षक और सितारा, दोनों ही उपन्यासों में महिलाओं की प्रेरणा दायक कहानी है, जिनमें महिला अलग-अलग क्षेत्र में खुद को साबित करती। नुक्कड़ वाला प्यार प्रेम के साथ साथ पुनर्जन्म की दास्तान बयान करता उपन्यास है, जिसमें एक साथ दो समय की कहानी चलती है जिसके 65 भाग लिखे जा चुके हैं और कुछ लिखने शेष हैं। ये सभी उपन्यास ऑन लाइन पाठकों को पढ़ने के लिए
प्रतिलिपि ऐप पर सुलभ है, जिस से लाखों पाठक जुड़े हुए हैं। इस ऐप पर इनकी 1200 से अधिक रचनाएं पाठकों के लिए उपलब्ध हैं।
लेखन के लिए इन्हें चार दर्जन से अधिक ऑन लाइन मंचों के साथ- साथ स्थानीय और राष्ट्रीय संस्थाओं पुरस्कार और सम्मानित किया जा चुका है। श्री समरस साहित्य सम्मान, शान ए हाड़ौती, प्रतिलिपि सम्मान, हिंदी सेवी सम्मान, दी ग्राम टुडे सम्मान, महिला शक्ति सम्मान, साहित्य मण्डल, श्री नाथद्वारा प्रशस्ति पत्र एवं महिला काव्य मंच प्रशस्ति पत्र प्रमुख सम्मान हैं। ( संपर्क : 4 डब्ल्यू 19, तलवंडी, कोटा, राज, मो. 9664467129 )
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा

 

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