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29 अगस्त 2025

परिवारों में परंपरा बन रहा है नेत्रदान

 परिवारों में परंपरा बन रहा है नेत्रदान
2. शोक के पलों में सुकून देता है,इसलिये परंपरा बन रहा है नेत्रदान

आज से 9 वर्ष पूर्व,नेत्रदान पखवाड़े के दौरान ही, नानक रेजिडेंसी कोटा जंक्शन निवासी चमन लाल ढींगरा का आकस्मिक निधन के उपरांत बेटे पंकज और अमित ने माँ चंद्र कांता ढींगरा की सहमति से पिता चमन लाल का नेत्रदान संपन्न करवाया था ।

आज जब माँ चंद्रकांता ढींगरा, का निधन हुआ तो परिवार ने, नेत्रदान को परंपरा बनाते हुए संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र नवीन तोतलानी के सहयोग से, माँ का नेत्रदान का कार्य संपन्न कराया ।

नवीन तोतलानी ने कहा कि, शोकाकुल परिवार के सदस्य नेत्रदान का महत्व समझते हैं, वह जानते हैं कि,नेत्रदान के माध्यम से मृत्यु का शोक भी कम होता है, इसलिए जिन परिवारों में एक बार नेत्रदान हो जाता है वह स्वत: ही नेत्रदान के लिए तैयार हो जाते हैं ।

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