दान में मिली आँख से पटरी पर आ गई याकूब की जिंदगी
2. संभाग से प्राप्त 800 से ज्यादा नेत्रदाताओं की आँखों से है,हज़ारों लोगों की दुनिया रौशन
सीसवाली,बाराँ
के रहने वाले 60 वर्षीय मोहम्मद याकूब ,पिछले 6 माह से दाँयी की रौशनी
पूरी तरह चले जाने से,और बाँयी आँख में मोतियाबिंद आ जाने से ,बहुत मुश्किल
से अंधेरे में अपना जीवन यापन कर रहे थे ।
दिल्ली,अहमदाबाद,जोधपुर,जयपुर
में उन्होंने आँखों के लिये बड़े-बड़े चिकित्सकों को दिखा कर काफी पैसा
बेकार कर लिया था,परंतु कहीं से भी कोई सही इलाज के बारे में जानकारी नहीं
मिल सकी । सभी का यह कहना था कि, मोतियाबिंद का इलाज करा लो तो,आपकी बायीं
आँख से तो आपको सही दिखने लगेगा,परंतु यह डर था की, यदि मोतियाबिंद के
ऑपरेशन के बाद यह आँख बिगड़ गई तो, फिर तो मेरा जीवन और मुश्किल हो जायेगा ।
कोटा
में इनके मित्र मस्टन बोहरा और राजेंद्र झाबक ने बताया कि, कोटा में काफी
वर्षों से नेत्रदान के लिए संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन कार्य कर रही है आप
एक बार यहां आकर मिले,ज्योति-मित्र टिंकू ओझा के सहयोग से याक़ूब को नीमच
स्थित गोमाबाई अस्पताल में प्राथमिक परीक्षण के लिए भेजा गया । जिससे यह
पता चल गया कि, यदि नेत्रदान के माध्यम से कोई कॉर्निया मिले तो,याकूब जी
को वह दान की आँख लगाई जा सकती है,और यह दोबारा से अपना जीवन यापन ठीक तरह
से करने लग सकतें हैं ।
शाइन
इंडिया व नीमच के आई बैंक मैनेजर श्रीपद दीक्षित के सहयोग और तत्परता
से,याकूब जी का पंजीकरण कर लिया गया,करीब 2 महीने बाद संस्था शाइन इंडिया
फाउंडेशन के सहयोग से याकूब जी का आँख का कॉर्निया प्रत्यारोपण नीमच स्थित
गोमाबाई नेत्र चिकित्सालय में निःशुल्क किया गया ।
याकूब
जी को कार्निया प्रत्यारोपण हुए आज 1 माह हो चुका है,वह वापस से अपना
पुराना टेलरिंग का काम करने लगे हैं, उनके अंदर नया आत्मविश्वास,जोश और
जुनून देखने को मिल रहा है । उनके चेहरे पर खुशियाँ आ जाने से ना सिर्फ वह
स्वयं खुश हैं, बल्कि उनकी तीनों बेटियां अंजुम रंजु,हिना और बेटा हनीफ़ भी
काफी खुश हैं ।
याकूब जी
की पत्नी रशिदन बेगम बताती हैं कि,उनकी आँखों की रोशनी चले जाने से न सिर्फ
इनकी बल्कि इनके साथ साथ हमारी भी दुनिया खत्म हो गई थी । बिना आँखों के
तो जीवन गुजारना बड़ा मुश्किल हो जाता है,परंतु हम सभी परिवार के सदस्य
नेत्र दाता और उसके परिवार के सभी सदस्यों को बार-बार धन्यवाद देते हैं
कि,उनके देवलोक जा चुके परिजनों की दान की हुई आँखों से ही मेरे पति का
जीवन वापस पटरी पर आया है,अन्यथा हम तो मायूस हो चुके थे ।
*11 वर्षों से अनवरत कार्य कर रही है संस्था*
शाइन
इंडिया फाउंडेशन पिछले 11 वर्षों से पूरे हाड़ौती संभाग में
नेत्रदान,अंगदान और देहदान के लिए अनवरत कार्य कर रही है । इसी प्रयास के
कारण इस वर्ष 424 नेत्रों का संकलन संस्था के माध्यम से हुआ हैं,जो कि अब
तक प्रतिवर्ष प्राप्त होने वाले नैत्रदान से कई अधिक है,बीते वर्ष 360
नेत्रों का संकलन किया गया था ।
इसके
साथ ही पूरे राज्य में आई बैंक सोसाइटी ऑफ राजस्थान,जयपुर के मार्गदर्शन
में जयपुर के अलावा ,10 से ज्यादा जिलों में नेत्रदान का कार्य हो रहा
है,परंतु कोटा संभाग पूरे राज्य में सभी जिलों से नेत्र संकलन में प्रथम व
नेत्र प्रत्यारोपण में दूसरे पायदान पर अपना स्थान बनाए हुए हैं ।
पूरे
हाड़ौती संभाग से शाइन इंडिया के 11 वर्षों के अथक प्रयास से 1674 नेत्रों
का संकलन पुण्य-आत्माओं द्धारा प्राप्त हुआ है,इस तरह से संभाग से प्राप्त
दान की आँखों से न सिर्फ राजस्थान राज्य, बल्कि भारत देश के अन्य राज्यों
को मिलाकर एक हजार से ज्यादा कॉर्निया की अंधता का दुख भोग रहे लोगों में
हमारे दान की गयी आँखों से रौशनी पहुंची है ।
*अनवरत जागरूकता शिविर ही बढ़ा सकते हैं,नेत्रदान का प्रतिशत*
ईबीएसआर-बीबीजे
कोऑर्डिनेटर डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया है कि,नेत्रदान का कार्य ऐसा नहीं
कि, सिर्फ माह में 10 दिन कर लिया जाए और शोकाकुल परिवार के सदस्य आपको
नेत्रदान के लिये आगे से संपर्क करने लगे। आज शाइन इंडिया का कार्य घर-घर
इसलिये पहुँचा, क्योंकि हमारा कार्य महीने में पूरे 30 दिन,साल के पूरे
365 बिना किसी एक दिन के रुकावट के अनवरत चलता है,ऐसा कोई पल नहीं होता जब
संस्था से जुड़े सदस्य नेत्रदान के बारे में दिन में 8-10 लोगों से चर्चा
ना करें,तब जाकर आज यह स्थिति है कि,वर्ष में 2 जोड़ी नेत्रदान से प्रारंभ
हुआ ,यह पुनीत कार्य आज माह में 20 से 25 नेत्रदान प्रतिमाह पर आ गया है।
इसका श्रेय भी हमारे प्रयासों को उतना ज्यादा नहीं है,जितना कि शोक की घड़ी
में नेत्रदान करने के लिए परिवारों की रजामंदी का होना ।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)