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12 अक्तूबर 2020

आसान नहीं होता

 

आसान नहीं होता
दिमाग़ वाली स्त्री से प्रेम करना
क्योंकि उसे पसंद नहीं होती जी हुज़ूरी
झुकती नहीं वो कभी जब तक न हो
रिश्तों और प्रेम की मजबूरी।
तुम्हारी हर हाँ में हाँ और
न में न कहना वह नहीं जानती
क्योंकि उसने सिखा ही नहीं
झूठ की डोर से रिश्तों को बांधना।
वो नहीं जानती स्वांग की चाश्नी में
डुबोकर अपनी बात मनवाना,
वो तो जानती है बेबाकी से सब बोल जाना।
फिज़ूल की बहस में पड़ना
उसकी आदत में शुमार नहीं,
लेकिन वो जानती है तर्क के साथ
अपनी बात रखना।
वो गहने कपड़ों की माँग
नहीं किया करती
वो तो संवारती है ख़ुद को
आत्मविश्वास से,
निखारती है अपना व्यक्तित्व
मासूमियत भरी मुस्कान से।
तुम्हारी ग़लतियों पर तुम्हें टोकती है
तो तकलीफ़ में तुम्हें संभालती भी है।
उसे घर संभालना बख़ूबी आता है
तो अपने सपनों को पूरा करना भी।
अगर नहीं आता है तो किसी की
अनर्गल बातों को मान लेना।
पौरुष के आगे वो नतमस्तक नहीं होती
झुकती है तो तुम्हारे
निःस्वार्थ प्रेम के आगे।
और प्रेम की खातिर अपना
सर्वस्व न्योछावर कर देती है।
हौंसला हो निभाने का
तभी ऐसी स्त्री से प्रेम करना,
क्योंकि आसान नहीं होता
दिमाग़ वाली स्त्री से प्रेम करना।

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