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14 अक्तूबर 2020

चिन्मन्यानंद जी के खिलाफ ,,यौनशोषण की रिपोर्ट लिखाने वाली ,, शिकायतकर्ता , के मुकर जाने की खबर है ,, अजीब बात नहीं ,यह तो होना ही था ,ऐसा होता भी है

 चिन्मन्यानंद जी के खिलाफ ,,यौनशोषण की रिपोर्ट लिखाने वाली ,, शिकायतकर्ता , के मुकर जाने की खबर है ,, अजीब बात नहीं ,यह तो होना ही था ,ऐसा होता भी है ,लेकिन यह गिद्ध समाज ,,चील , कव्वों जैसा समाज , यह इसी तरह की सियासत ,बेटियों के साथ शोषण , फिर गवाही से मुकर जाने के बीच की जो मजबूरियां है जो हालात है ,उन पर क़तई विचार करने को तय्यार नहीं ,, आखिर सोचिये ,एक बेटी के साथ योन शोषण होता है , बलात्कार होता है ,, फिर एक एफ आई आर दर्ज होती ,है ,,,मिडिया में खबरें प्रकाशित होती है ,फिर पुलिस जांच होती है ,, अदालत में मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 सी आर पी सी के बयान होते है ,मेडिकल रिपोर्ट होती है , अधिकतम मामलों में तो ,,पुलिस स्तर पर ही ,मामले रफा दफा ,एफ आर के ज़रिये हो जाते है ,,फिर कुछ बचते है ,तो चालान पेश होने के बाद , ऐसी फरियादिया , पीड़िताओं के मुकर जाने से ,, अभियुक्त बरी हो जाते है ,ज़मानत हो जाती है ,, कुछ बचते है , तो उन्हें सज़ा भी होती है , आखिर क्या है यह गोरख धंधा ,, देश की पुलिस सक्रिय हुई है , कई इस तरह की महिलाओं को हनी ट्रेप के नाम पर उनके दलालों के साथ गिरफ्तार किया गया है ,,कुछ मामलों में शिकायत होने के बाद , मांडोली के नाम पर ,, वसूली मामले में भी गिरफ्तारियां हुई है , लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा है ,, आखिर समाज ,ऐसा समाज , जो बेटियों को बचाने ,बेटियों को पढ़ाने की बात करता है ,, ऐसा समाज ,ऐसी सियासत , जो बेटियों के साथ ऐसी हरकतों पर , देश भर में चीख पुकार मचाता है , आन्दोलन करता है , मुख्यमंत्रियों से , प्रधानमंत्री से इस्तीफे मांगता है ,तात्कालिक तोर पर जिसके खिलाफ शिकायत होती है ,उसे मंत्री पद हो ,सरकारी पद हो ,या कोई भी मान प्रतिष्ठा हो , उससे हाथ धोना पढ़ती है ,, कुछ पडिताओं को तंदूर कांड की तरह जला दिया जाता है ,, उत्तर प्रदेश के विधायक जी के आरोप की तरह उनका एक्सीडेंट कहो , हमला कहो , ऐसे हमले करवाए जाते है ,,,, , मांडोलियाँ होती है , , नतीजा कुछ मामलों में तो , पुलिस अनुसंधान स्टेज पर ही , मामले खत्म हो जाते है ,, कुछ मामलों में ,, चालान पेश होने के बाद ,, बयानों के वक़्त ,पीड़िता मुकर जाती है ,, कुछ मामलों में ,विरोधाभास होता है ,, कुछ मामलों में सहमति का आधार बनाया जाता है , ,बकाया मामलों में , उपधारणा कहो ,, साक्ष्य कहो , इन आधारों पर ,, अभियुक्तों को सज़ा मिलती है ,यह सब सजाये , समाज में ऐसे अपराधियों को सबक़ सिखाने के लिए काफी नहीं है ,जितने मामले दर्ज होते है ,उससे आधे से भी कम मामलों में ,, कार्यवाहियां होती है ,बाक़ी मामले तो दबा दिए जाते है ,देश के पुलिस अनुसंधान से जुड़े लोग , न्यायधीश , वकील ,,खूब जानते है के ,किस तरह से समझौते , किस तरह से मामले रफा दफा करने के सकारात्मक प्रयास होते है , रिश्ते ,नाते , दोस्तियां ,यारियां ,धमकियां ,प्रलोभन ,और लेंन देन सभी तरह के मामले लोगों की निगाह में है ,लेकिन समाज की यह गंदगी , खुलासा नहीं होती ,,सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामले में गंभीर निर्देश दिए है ,, गवाही से मुकरने पर ,परिवादिया को कई मामलों में दंडित भी किया है ,क्योंकि मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयानों के बाद मुकर जाना और कोई कार्यवाही नहीं होना ,सिर्फ इसलिए के एक मुक़दमा और बढ़ा दिया जाएगा ,ऐसे प्रलोभन या किसी भी वजह से , गवाही से मुकरने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करती है ,देश का मीडिया , इलेक्ट्रॉनिक मिडिया , प्रिंट मिडिया ,सोशल मिडिया ,समाजसेवी संगठन , महिला संगठन , महिला आयोग ,,विधि आयोग , मानवाधिकार आयोग , विधायक , सांसद ,राज्य सभा सदस्य , धर्म गुरु ,, सभी धर्मसमाजों के अपने अपने ,कथित सेवादार संगठन , महिला की इस पीड़ा ,, उसके साथ शोषण ,फिर शिकायत ,एफ आई आर ,अदालत में मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान ,, फिर मांडोली ,धमकियां ,, या कुछ भी ,लेकिन बयानों से मुकरना ,एफ आर लगना ,, अदालत में बयान से मुकरना और घिनोने अपराधों में अपराधियों के मज़े हो जाना ,, समाज को कलंकित करने वाला ही है ,इस तरफ ध्यान नहीं देते है ,आवाज़ नहीं उठाते है ,उलटे कई लोग ऐसे समझौतों के हिस्से बनते देखे गए है ,, देश के मिडिया ,इलेक्ट्रॉनिक मिडिया ,प्रिंट मिडिया को देश के पांच सालों में इस तरह के मामलों के दर्ज होने ,एफ आर लगने , चालान पेश होने के बाद ,परिवादिया के मुकर जाने , गवाहों के बदले जाने के मामलों का रिकॉर्ड खंगालना चाहिए , खुद राज्यो की सरकारों ,, केंद्र सरकार ,को इस तरफ अध्ययन कर ऐसे बदलने वालों के चेहरे , उनकी मजबूरिया ,, जो भी वजह हो वोह भी सामने लाना चाहिये ,, विधायक हो ,सांसद हों ,राज्य सभा सदस्य हों , विधानपरिषद सदस्य हों , सभी को केंद्र सरकार , राज्यों की सरकारों से ,लोकसभा ,विधानसभा में सवाल पूंछ कर ,इस तरह के मामलों के बारे में रिपोर्ट लेना चाहिए ,ऐसे मामलों में फरियादिया , ,उसके परिवार को सुरक्षा मिले ,निगरानी रहे , प्रलोभन न दिया जाए ,, धमकियां नहीं मिले ,और अगर ,ऐसे फरियादी लोग बदलते है ,तो इनके खिलाफ क़ानून बनाकर इन्हे सज़ा देने का प्रावधान भी बनाया जाए ,ताकि दूसरी बेटियों पर ऐसे दरिंदे ,बरी होने ,या फिर बरी होने के तोर तरीकों की जानकारी होने ,, बरी होने के उदाहरण देखकर प्रोत्साहित न हों ,, इसके लिए सरकार को एक गाइड लाइन बनाना चाहिए ,क़ानून बनाना चाहिए , फरियादियाँ को पूरी सुरक्षा मिले , तत्काल मुक़दमा दर्ज हो ,, अनुसंधान तत्काल हो ,, परिवादिया को सुरक्षा ,मिले ,और एक बार , बयानों के बाद ,अगर परिवादिया , बयानों से मुकरे ,तो उस बयानों से मुकरने की सभी वजह ,पर अनुसंधान हों ,, लेन देन , प्रलोभन हो तो गिरफ्तारी हो ,, धमकियां हो ,मजबूरियां हो ,तो कार्यवाही ऐसे लोगों के खिलाफ हो , वर्ना देश में ,,राज्यों में शहरों में ऐसे मामले दर्ज होते है ,,फिर बयान होते है ,फिर समझौते होते है ,फिर मुल्ज़िम बरी होते है ,,संदेश देश के लिए ,अपराधियों के लिए ,बेटियों की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं जाता है ,, इस मामले में देश को ,देशवासियों को , आर एस एस को ,, जमात ऐ इस्लामी को ,वकील संगठनों को , महिला संगठनों को ,,आयोगों को ,सरकारी व्यवस्थाओं को ,,,,लोकसभा को , राज्य सभा को ,,विधानसभाओ को , सभी को मिलजुलकर ,निष्पक्षता से ,, एक क़ानून बनाने पर ज़ोर देना चाहिये , ताकि एक बार अगर योन शोषण हो गया ,एक बार अगर मुक़दमा दर्ज हो गया ,,एक बार परिवादियाँ , और दूसरे गवाहों ने बयानों से योन शोषण साबित कर दिया ,चालान पेश हो गया ,तो बचाव पक्ष जिरह में चाहे कुछ भी सवालात करे , बचाव के कोई भी जुगत लगाए ,, लेकिन गवाह मुकर गया ,परिवादिया मुकर गयी ,इस वजह से तो कमसे कम अभियुक्त को बरी न किया जाए ,वर्ना देश में बेटियों के खिलाफ , महिलाओं के खिलाफ सामंतवादी व्यवस्था के तहत , इस तरह की ज़ोर ज़बरदस्ती का दौर थमने वाला नहीं है ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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