हमें चाहने वाले मित्र

18 अक्तूबर 2020

परवरदिगार मुझे इल्म व फहम अता फरमा और मुझे नेकों के साथ शामिल कर

और वह वही हे जो मुझे मार डालेगा और उसके बाद (फिर) मुझे जि़न्दा करेगा (81)
और वह वही है जिससे मै उम्मीद रखता हूँ कि क़यामत के दिन मेरी ख़ताओं को बख्श देगा (82)
परवरदिगार मुझे इल्म व फहम अता फरमा और मुझे नेकों के साथ शामिल कर (83)
और आइन्दा आने वाली नस्लों में मेरा जि़क्रे ख़ैर क़ायम रख (84)
और मुझे भी नेअमत के बाग़ (बेहेश्त) के वारिसों में से बना (85)
और मेरे (मुँह बोले) बाप (चचा आज़र) को बख्श दे क्योंकि वह गुमराहों में से है (86)
और जिस दिन लोग क़ब्रों से उठाए जाएँगें मुझे रुसवा न करना (87)
जिस दिन न तो माल ही कुछ काम आएगा और न लड़के बाले (88)
मगर जो शख़्स ख़ुदा के सामने (गुनाहों से) पाक दिल लिए हुए हाजि़र होगा (वह फायदे में रहेगा) (89)
और बेहेश्त परहेज़ गारों के क़रीब कर दी जाएगी (90)

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...