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19 सितंबर 2020

दोस्तों यह है जगतपुरा जयपुर का जे ऍन यू अस्पताल , यहाँ इलाज के नाम पर खुली लूट होती है ,नो सीखिए अनुभवहीन डॉक्टर्स ,,, खराब उपकरणों के चलते ,रोज़ मरीज़ों को इलाज के नाम पर मोत बांटी जा रही है

 दोस्तों यह है जगतपुरा जयपुर का जे ऍन यू अस्पताल , यहाँ इलाज के नाम पर खुली लूट होती है ,नो सीखिए अनुभवहीन डॉक्टर्स ,,, खराब उपकरणों के चलते ,रोज़ मरीज़ों को इलाज के नाम पर मोत बांटी जा रही है ,,इस पर राजस्थान सरकार के कुछ लोगों से सांठगांठ कर ,,अस्पताल मालिक डॉक्टर संदीप बख्शी ,उनके एडवाइज़र ,डॉक्टर जसवंत गोयल ने , कोविड सेवाओं के लिए बेहतर अस्पताल बताकर मान्यता प्राप्त करवा ली , उक्त अस्पताल पर सरकार का कोई अंकुश नहीं है ,सरकार ने इस अस्पताल के डॉक्टर जसवंत सहित दूसरे डॉक्टरों की डिग्रियों और विशेषग्यता का परीक्षण तक नहीं किया है ,उपकरण ,वेंटिलेटर ,बाई पेप , ऑक्सीजन मास्क किस स्थिति में है ,, कोविड के मरीज़ों को जाने के बाद ,सरकार के बार बारे विज्ञापित करने के बाद भी , प्लाज़्मा थेरेपी सहित दूसरी थेरेपी से इलाज नहीं करने में यह डॉक्टर ,अस्पताल पीछे क्यों रहे और कई लोगों की मोत के कारण क्यों बने , इसकी कोई जांच करने वाला नहीं ,,,, सही मायनों में ,,ऐसे अस्पताल के उपकरणों सहित ,, सभी व्यवस्थाओ का सूक्ष्म परीक्षण कर ,इनके अस्पताल में भर्ती मरीज़ों के सभी चिकित्सा पर्चे ज़ब्त कर विशेषज्ञों से जांच करवाना ज़रूरी है ,,जो कमियां ,जान बूझकर छोड़ी गयी है ,जैसे प्लाज़्मा थेरेपी में कोताही वगेरा वगेरा ,ऐसा साबित होने पर इनके खिलाफ हत्या का मुक़दमा दर्ज करवाकर इनकी गिरफ्तारी होना चाहिए ,इनका लाइसेंस ,, इनके मेडिकल कॉलेज की मान्यता भी रद्द हुआ ज़रूरी हो गया है ,,,, ताजजुब है राजस्थान सरकार ने इस अस्पताल को कोविड इलाज की मान्यता देते वक़्त डॉक्टर जसवंत गोयल के चिकित्स्कीय अनुभव ,,उनकी  मास्टर डिग्री का भी अवलोकन नहीं किया ,डॉक्टर जसवंत गोयल कथित रूप से ,इलाज करने वाले चिकित्स्क से ज़्यादा चांसलर के एवाइज़र के रूप मे अपनी पहचान रखते है , वोह मरीज़ों के इलाज की विशेषग्यता में मास्टर डिग्री नहीं है ,उन्होंने फार्मोकोलॉजी ,,दवाओं के बारे में पढ़ाने के लिए मास्टर डिग्री पास की है ,,राजस्थान सरकार ने उनका मोबाइल नंबर 86969034000 सरकारी दस्तावेज के रुप में वेबसाइट पर डाला हुआ है ,, लेकिन डॉक्टर ऐसे के इन्हे अपने मरीज़ों , उनके तीमारदारों ,यहाँ तक के केबिनेट मंत्री स्तर के लोगों से भी बात करने की फुरसत नहीं है ,,जे ऍन यू अस्तपाल की मानयता कल िये इन्होने 222 बेड  ,25 आई सी यू ,, 8 वेंटिलेटर बताये है ,, लेकिन कितने चालू है ,कितने खराब ,पता नहीं , हाँ भामाशाह ,जन आधार योजना के नाम पर यहाँ लोगों के साथ काफी मौज मस्ती की जा रही है ,यहाँ लाखों रूपये का सरकार के इस योजना के नाम पर चूना लगाया जा रहा है ,,,, अस्पताल में डॉक्टर प्रेरणा कहने को इंचार्ज है ,लेकिन वोह  प्रशासनिक कार्य देख रही है ,, मरीज़ों से कौन्सिलिंग नहीं , मरीज़ों के परिजनों से कोई कौन्सिलिंग या समझाइश डॉक्टर जसवंत की नहीं ,,,यहाँ डॉक्टर विष्णु ,,डॉक्टर अनिल ,डॉक्टर अनुभव ,डॉक्टर प्रदीप बंसल खुद को ,डॉक्टर जसवंत गोयल के अधीनस्थ होने से असहाय सा महसूस करते है , मेरे बहनोई ,सय्यद अख्तर हुसैन , इस अस्पताल में बेहतर सुविधाओं का लेखा जोखा बताकर ,डॉक्टर प्रेरणा ने भर्ती करवाया ,,मरीज़ बूंदी से बेहतर कंडीशन चलते फिरते हाथ पाँव से ,जे ऍन यू अस्पताल इलाज के लिए पहुंचे ,,उन्हें कोविड जांच के बाद कोविड वार्ड में भर्ती किया ,, मरीज़ और परिजनों ने  सैकड़ों बार ,,प्लाज़्मा देने की पेशकश की ,प्लाज़्मा डोनर आ गए , लेकिन अनुभवहीन , डॉक्टर जसवंत गोयल ,प्लाज़्मा थेरेपी ,राजस्थान सरकार की रामबाण योजना होने पर भी , नहीं देने पर अड़े रहे वोह रोज़ हज़ारों का बिल बिठाना चाहते थे ,मरीज़ को ठीक कर घर पहुंचाना उनकी नियत नहीं थी , बल्कि वोह मरीज़ के परिजनों से लाखों रूपये इलाज के नाम पर लूटना चाहते थे ,, मरीज़ को ऑक्सीजन मास्क भी सही नहीं लगाए ,कई बारे लीक मास्क थे ,फिर बाई पेप के भी मास्क लीकेज होने से ,ऑक्सींजन ठीक तरह से नहीं गयी ,,डॉक्टर जसवंत ने मरीज़ की गंभीरता को भी नहीं देखा ,,अचानक जब मरीज़ को बाई पेप से हठाकर वेंटिलेटर पर लेने की ज़रूरत पढ़ी , तो वेंटिलेटर ही खराब निकला ,,दूसरे वेंटिलेटर पर लेने में मरीज़ को इतनी देरी हो गयी के उसका नुकसान हुआ और बेहोशी की हालत में मरीज़ को फिर दूसरे वेंटिलेटर पर लिया गया ,, मरीज़  को संक्रमण , लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में जो दवाये दी जाना चाहिए थीं वोह भी प्रॉपर नहीं थीं ,,, मरीज़ पर चिकित्सक का अटेंशन भी सही नहीं था ,,आखिर में जब मरीज़ की स्थिति अत्यंत खराब हो गयी ,तब बार बार कहने पर ,, उन्हें डॉक्टर जसवंत ने प्लाज़्मा बेचकर ,सोलह हज़ार रूपये का प्लाज़्मा चढ़वाया ,प्लाज़्मा चढ़ते ही मरीज़ की स्थित में आश्चर्यजनक सुधार हुआ ,, दूसरा प्लाज़्मा चढाने का बार बार निवेदन किया , लेकिन डॉक्टर जसवंत के खौफ के मारे कोई भी चिकित्सक इसके लिए तैयार नहीं हुआ ,,नतीजन ,डॉक्टर जसवंत ,जो फार्मोकोलॉजी में मास्टर है ,उन्होंने एक मरीज़ को प्लाज़्मा सहित दूसरी तरह के ज़रूरी इलाजों से महरूम रखकर ,,मोत के घाट उतार दिया ,, या यूँ कहिये ,, मरीज़ की डॉक्टर जसवंत गोयल की नौसिखिया वजह से हत्या कर दी गयी ,,, लूट का आलम देखिए ,,, एक यूनिट प्लाज़्मा का खर्च 16000 रूपये जबकि कई दिनों तक प्लाज़्मा के डोनर अस्पताल में आ आ कर प्लाज़्मा डोनेट करने के लिए बैठ कर चले गए , लेकिन डॉक्टर जसवंत ने इसकी इजाज़त नहीं दी ,,,, प्रारम्भ के दिनों में ही अगर प्लाज़्मा मरीज़ को चढ़ा दिया जाता , तो मरीज़ की स्थीति तत्काल सुधरती और उसकी हत्या जिस तरह से ,जिस बेरहमी ,चिकित्स्कीय लापरवाही से हुई है वोह हरगिज़ , हरगिज़ न होती ,,, ऐसे नौसिखिये डॉक्टर्स के अधीनस्थ चलने वाले अस्पताल के बिल की बानगी देखिये ,,,12 दिन मरीज़ को रखने के बीएड चार्जेज़ बांसठ हज़ार रूपये ,,,, इक्कावन हज़ार चार सो नब्बे रूपये की जांचे ,,,1150 रूपये के एक्सरे ,,,उन्नीस हज़ार छह सो सोलह रूपये की फिर जांचें ,,  एक लाख तेहत्तर हज़ार नो सो पंछियान्वे रूपये की दवाये ,16500 प्लाज़्मा ब्लडबैंक ,,18720 रूपये बाइपेप चार्ज ,,टोटल तीन लाख तियालीस हज़ार चार सो इकत्तर रूपये और ,इन सब खर्च , परेशानियों के बावजूद भी मरीज़ की जांच नेगेटिव आ जाने के बाद ,उसकी स्थिति में बेहतर सुधार होने के बाद भी ,डॉक्टर्स खासकर डॉक्टर जसवंत की लापरवाही से ,अस्पताल मालिक डॉक्टर संदीप बख्शी के कुप्रबंधन से ,, मरीज़  के  परिजनों को अगर जीते जागते इंसान का शव दिया जाए तो मरीज़ों के परिजनों पर क्या गुज़रेगी ,, राजस्थान सरकार के चिकित्सा विभाग ,चिकित्सा मंत्री ,चिकित्सा सचिव ,मुख्यमंत्री महोदय को इस मामले में ,,खुली जांच करवाकर ,,इलाज के नाम पर लूट और मोत का खेल कर रहे इन चिकित्स्कों को जेल भिजवाकर इनके लाइसेसं निरस्त करवाना चाहिए ,,,,देखते है कोविड मैनेजमेंट में अव्वल ,, राजस्थान के गाँधी ,,संवेदनशील पारदर्शिता का सिद्धांत रखने वाले आदरणीय मुख्यमंत्री महोदय जयपुर के इस जगतपुरा स्थित जे ऍन यू अस्पताल और चिकित्स्कों के खिलाफ , क्या कार्यवाही अमल में लाते है ,,,, अख्तर खान ;अकेला कोटा राजस्थान

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