हमें चाहने वाले मित्र

01 अगस्त 2020

खुद की समझदारी ही,,

खुद की समझदारी ही,,
अहमियत रखती है,,
वरना,,
अर्जुन और दुर्योधन का,,
गुरु एक ही था,,
इसलिए वक़्त है अभी भी , दुर्योधन , कर्ण , की हिमायत से दूर होकर फिर से पांडवों में शामिल होने का ,, अख्तर

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...