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10 अगस्त 2020

प्रकृती से कोई जीत नहीं सकता , कहावतें कई बार झूंठी साबित होती रही है ,, कमोबेश ,एक कहावत ,, जहां न पहुंचे रवि ,, वहां पहुंचे कवि ,, यानी पत्रकार सभी जगह पहुंच सकते है ,, इन दिनों सो फीसदी झूंठी साबित हो रही है ,

 प्रकृती से कोई जीत नहीं सकता , कहावतें कई बार झूंठी साबित होती रही है ,, कमोबेश ,एक कहावत ,, जहां न पहुंचे रवि ,, वहां पहुंचे कवि ,, यानी पत्रकार सभी जगह पहुंच सकते है ,, इन दिनों सो फीसदी झूंठी साबित हो रही है ,, ,देश जानता है ,कई स्थानों पर पत्रकार खुद नहीं पहुंच रहे है ,या फिर जान बुझ कर नहीं पहुँचने के उन्हें निर्देश है ,, इन दिनों राजस्थान में ,गुमशुदा 19 विधायक कहाँ है , इस मामले में तो यह कहावत सो फीसदी झूंठी साबित हो गयी है ,वहां अभी तक कोई भी पत्रकार नहीं पहुंचा है ,या खुद ने नहीं पहुंचना चाहा है , इसी तरह गंभीर बात यह है के इन दिनों कोरोना संक्रमण का माहौल है ,अस्पतालों में इलाज चल रहा है , कोरोना जांचे चल रही है ,,अस्पतालों में कोरोना मरीज़ , या फिर , दूसरी गंभीर बिमारियों के मरीज़ जिन्हे कोरोना जांच के बाद ,या फिर मृत्यु के बाद कोरोना संक्रमित घोषित किया जा रहा है ,इस रिपोर्टिंग के लिए भी ,,पत्रकार वहां नहीं पहुंच पा रहे है ,,पहुंचे भी कैसे , ,,संवाददाताओं के पास रिपोर्टिंग के लिए सुरक्षित साधन उपलब्ध नहीं है , कोरोना गाइड लाइन , और कोरोना खौफ के नाम पर पत्रकार कई मामलों में , ऐसे गंभीर मरीज़ों ,उनके इलाज पर्चों ,.जाँच रिपोर्टरों ,सहित कई गंभीर जानकारियों से दूर रखे गए है ,बिना पी पी ई किट के ऐसे मरीज़ों के बारे में जाकर जानना ना मुमकिन है ,, और कोई भी पत्रकार को किसी भी चैनल , या प्रिंट मीडिया , या फिर पारदर्शी सिद्धांत के तहत रिपोर्टिंग के लिए सरकार ने खुद पत्रकारों को जोखिम से बचाने के लिए ,, पी पी ई किट देकर रिपोर्टिंग की पहल की है ,, आज बेहिसाब मौतें ,फिर कोरोना की पोजेटिव रिपोर्ट ,, दिल की बिमारी , सांस की बीमारी ,,,शुगर की बीमारी , वगेरा जैसे कई मरीज़ ऐसे है ,जो अस्पताल जाते है पैरों से चलकर ,और फिर दो तीन दिन में उनके शव ,,पोजेटिव होने के नाम पर ,,अंतिम संस्कार कोरोना गाइड लाइन के तहत हो जाते है ,, कई मरीज़ तो डर के मारे अस्पताल जा अभी नहीं रहे है ,, मोत होने पर उनके अंतिम ससंकार सामान्य मोत की तरह हो रही है ,, हालात क्या है ,सच क्या है ,,ऊपर वाला जाने ,, लेकिन आम जनता को यह जान्ने का हक़ है , के मरीज़ को क्या बीमारी रही ,उसकी बिमारी का इलाज , जांच रिपोर्टें ,आई सी यू में पल पल की रेस्पिरेशन , मॉनिटरिंग ,, दवाओं की स्थिति क्या रही ,,वेंटिलेटर पर लेजाने के बाद हालत क्या रहे ,,भर इलाज के तरीके की विडिओ रिकॉर्डिंग , इलाज की पत्रावलियां अफवाहों के खंडन के लिए ,, परिजनों को देना आवश्यक करना चाहिए ताकि वोह अपने भरोसे के चिकित्सक को सभी रिपोर्टर्स ,विडिओ रिकॉर्डिंग दिखाकर ,,तसल्ली कर ले , इसी तरह ,कोरोना जांच का बजट क्या है , किस पर कितना खर्च हो रहा है ,प्रतिदिनः खर्च कितना है ,, कोरोना जांच किट , पी पी ई किट ,, जाँच लेब खर्च , आवागमन खर्च ,, एम्बुलेंस खर्च ,,प्रति मरीज़ भर्ती ,, साफ सफाई ,, बिस्तर ,टॉवल ,,दैनिक ज़रुरतों के सामान , दवाइयां ,, खाना ,[पानी सहित सभी खर्च प्रति दिन का बजट कितना है ,खर्च कितना होता है ,,खाने की व्यस्थाएं क्या है ,, नाश्ते की क्या व्यवस्था है ,,अगर मृत्यु हो जाती है , तो फिर बॉडी का सुरक्षात्मक खर्च ,,अंतिम संस्कार खर्च ,,,के अलावा चिकित्सा कर्मियों ,चिकित्सकों को अगर कोई ओवर टाइम ,, हार्ड ड्यूटी ,या खतरनाक महामारी ड्यूटी का अलग से कोई भत्ता मरीज़ की देखरेख के लिए दिया जाता हो ,तो वोह सभी खुलासे ब्योरेवार होना चाहिए ,, ताकि अफवाहों का बाज़ार थम सके ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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