हमें चाहने वाले मित्र

11 अगस्त 2020

अब ना मैं हूँ ना बाकी है जमाने मेरे

 अब ना मैं हूँ ना बाकी है जमाने मेरे,_
_फिर भी मशहूर है शहरों में फंसाने मेरे,_
_जिंदगी है तो नए जख्म भी लग जाएंगे,_
_अब भी बाकी है कई दोस्त पुराने मेरे..._
_#राहत_इंदौरी

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...