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21 अगस्त 2020

उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो कि पहेली

 

उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो कि पहेली
मैं मीर कि हमराज़ हूँ, ग़ालिब कि सहेली

दक्खन के वली ने मुझे गोदी में खिलाया
सौदा के क़सीदौं ने मेरा हुस्न बढाया
है मीर कि अज़्मत के मुझे चलना सिखाया
मैं दाग़ के आँगन में खिली बन के चमेली

उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो कि पहेली
मैं मीर कि हमराज़ हूँ, ग़ालिब कि सहेली

ग़ालिब ने बलंदी का सफ़र मुझ को सिखाया
हाली ने मुरव्वत का सबक़ याद दिलाया
इक़बाल ने आईना ए हक़ मुझको दिखाया
मोमिन ने सजाई मेरी ख़्वाबौं कि हवेली

उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो कि पहेली
मैं मीर कि हमराज़ हूँ, ग़ालिब कि सहेली

है ज़ौक कि अज़्मत के दिए मुझ को सहारे
चकबस्त कि उल्फ़त ने मेरे ख़्वाब संवारे
फ़ानी ने सजाये मेरी पलकों पे सितारे
अकबर ने रचाई मेरी बेरंग हथेली

उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो कि पहेली
मैं मीर कि हमराज़ हूँ, ग़ालिब कि सहेली

क्यूँ मुझको बनाते हो ता’असुब का निशाना
मैं ने तो कभी ख़ुद को मुसलमां नहीं माना
देखा था कभी मैं ने भी ख़ुशियों का ज़माना
अपने ही वतन में हूँ मगर आज अकेली

उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो कि पहेली
मैं मीर कि हमराज़ हूँ, ग़ालिब कि सहेली

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