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20 अगस्त 2020

रुकी रुकी नब्ज़

 

रुकी रुकी नब्ज़
डूबता दिल
उखड़ती साँसें
भटकती आँखें
तुम्हारे ही देखने के क़ाबिल था
तुम ने ही ये
समाँ न देखा,,,

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