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08 अगस्त 2020

देश में बेलगाम , बकवासबाज़ ,, एक तरफा ,,बिकाऊ मीडिया को कंट्रोल में करने को लेकर , जमात ऐ इस्लामी की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी

 देश में बेलगाम , बकवासबाज़ ,, एक तरफा ,,बिकाऊ मीडिया को कंट्रोल में करने को लेकर , जमात ऐ इस्लामी की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी , जिसमे सुप्रीम कोर्ट ने कहा है के सरकार हर काम अब तभी करती है , जब उसे सुप्रीम कोर्ट करने के लिए कहता है ,जबकि , विधि नियमों के तहत सरकार को अपना काम पहले ही करना चाहिए , इसके अलावा ,,मीडिया की बकवास बाज़ी एक तरफा खबरों पर कंट्रोल ,करने के लिए एक याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट की अलग बेंच ने स्वीकार करते हुए , सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा है , देश में यह कोई छोटी घटना नहीं ,देश के मीडिया के नंगे नाच के खिलाफ यह एक आवाज़ है ,,बिकाऊ मीडिया कर्मी ,, जो चैनलों पर ,, मोदी भक्त बनकर , तवाइफ़ों की तरह एक तरफा मुजरा करते नज़र आते है ,उनके खिलाफ एक जंग की शुरुआत है ,, कुछ चंद मिडिया के ऐसे कर्मचारियों के चलते ,देश का मीडिया बेवजह बदनामी , अपमान के घेरे में है ,, अभी हाल ही में कोरोना संक्रमण के वक़्त ,, जमात के लोगों में जब कोरोना पोजेटिव हुआ तब ,,देश के मीडिया ने इसे विशेष मैनेजमेंट इशारे पर ,, धार्मिक ,जिहाद ,आतंकवाद के ऐंगल से खबरें बनाकर ,एक समुदाय को बदनाम करने की साज़िशे शुरू कर दीं, फ़र्ज़ी कपोल कल्पित खबरे बनाकर देश का माहौल बिगाड़ने की साज़िश रची ,यह खबरें देश में पिछले सात सालों से देश के लिए आफत बनी हुई है ,न जाने कितने लोग ऐसी खबरों को देखकर हिंसक हो गए ,कितने निहत्थे लोगों की इन खबरों के भड़काने से हत्या हुई है , जबकि ऐसी खबरों से देश में नफरत का माहौल बना है ,,,, एक दूसरे के परस्पर विश्वास में कमी आयी है ,,हाँ मिडिया का मक़सद एक वर्ग को अलग थलग कर ,एक वर्ग विशेष को एक जुट कर ,सिर्फ भाजपा के पक्ष में वोट मैनेजमेंट के रूप में समेटना रहा है ,लेकिन ऐसी खबरों से देश को विकास ,सुख , शांति ,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की साख ,, रोज़गार ,,आर्थिक विकास ,उद्योगों के विकास , क़ौमी एकता ,गंगा जमुना संस्कृति सहित कई मायनों में नुकसान उठाना पढ़ा है ,, कई लोग मानसिक रोगी हो गये ,अविश्वास का वातावरण जन्मा है ,,बस इसीलिए मीडिया के खिलाफ इस लड़ाई का संकल्प जमात के पढ़े लिखे लोगों ने देश के संविधान के दायरे में लिया ,और सुप्रीमकोर्ट में अपने होमवर्क ,खबरों की स्क्रिप्ट , खबरों के तोर तरीके ,अनावश्यक खबरों के प्रसारण के साथ याचिका पेश कर सरकार को पाबंद करने के लिए निवेदन किया ,सुप्रीम कोर्ट मीडिया की आज़ादी के खिलाफ नहीं है ,,उसने खबरें रोकने से तो इंकार कर दिया ,लेकिन लगातार हालातों के बाद ,जब फिर बहस हुई ,सरकार का जवाब आया के प्राधिकरण ने पचास ऐसी खबरों का संज्ञान लेकर ,,कार्यवाही शुरू की है ,, तो तय हो गया के ,प्रेस की आज़ादी का गलत इस्तेमाल हो रहा है ,संविधान में हर किसी को अपनी अभिव्यक्ति का अधिकार है ,,उसकी अभिव्यक्ति तब तक ,अभिव्यक्ति स्वतंत्रता का हक़ रखती है ,जब तक वोह सच ,हो , तथ्यात्मक हो ,राष्ट्र हित्त में हो ,, ईमानदारी से की गयी अभिव्यक्ति हो ,,किसी व्यक्ति ,वर्ग विशेष का अपमान करने का मक़सद उसमे छुपा न हो ,, सुबूतों के साथ हो , वर्ग विशेष में तनाव , नफरत का माहौल बनाने वाला न हो ,, लेकिन रोज़ पागलों की तरह से चिल्ला चिल्लाकर एक तरफा चैनल पर बैठे कुछ बकवास बाज़ ,, विशेष पैकेज पर देश तोड़ने की साज़िशों में लगे है ,, उन्हें भूख ,गरीबी ,विकास ,,सरकार के घोषणा पत्र में किये गये वायदों की क्रियान्विति ,,बेरोज़गारी ,बंद पढ़े उद्योग ,,जैसी समस्याओं से कोई मतलब नहीं , सिर्फ समुदायों में नफरत फैलाने की खबरें ,,ऐसे नेता जो सरकार के खिलाफ मुखर हैं ,उनका मान मर्दन का पैकेज ,, इनकी खबरों की कहानी है ,, एक जनाब तो अपने चैनल का अंग्रेजी नाम रखकर ,, खुद को राष्ट्रभक्त हिंदुस्तानी साबित करने के लिए चिल्लाते रहते है, वोह बात अलग है उनके नाना कोंग्रेसी की गोद में पळे बढे फिर , पापा के भाजपा से चुनाव लड़ने के बाद ,उनका रुख ही एक तरफा होगा ,, छद्म राष्ट्रवाद ,छद्म भक्ति ,देश देखता है ,,, खेर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष , प्राधिकरण की पचास पत्रकारों को ऐसी खबरों को चिन्हित करने की रिपोर्ट ,, स्वागत योग्य है ,आखिर सुप्रीमकोर्ट को पूर्व में ही ऐसी खबरों को लगाम देने के लिए बनाये गए प्राधिकरण ,व्यस्थाओं के होते हुए ,, टिप्पणी करना पढ़ी के हर बार सरकार को ,जब सुर्प्रीमकोर्ट कुछ करने के लिए कहती है तभी वोह करती है ,,,यह इस सिस्टम को झकझोर देने के लिए काफी है ,सही मायनों में तो यह टिप्पणी केंद्र सरकार के लकवाग्रस्त सिस्टम को नाकारा साबित करने की तरफ इशारा करती है ,, जो सरकार के लिए शर्म से डूब मरने की बात है ,दूसरी याचिका में मीडिया को कंट्रोल कर ,क़ानून में दी गयी संवैधानिक आज़ादी में ही ,अपनी खबरें , प्रकाशित करने ,, खबरें प्रसारित करने ,, लाइव डिबेट दिखाने में निष्पक्षता साबित करने की याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार सहित ज़िम्मेदारों से जवाब तलब ,अब इस बात की तरफ इशारा है के सब कुछ ठीक रहा ,कुछ बदलाव नहीं हुआ ,कुछ पूर्व की तरह अदला बदली नहीं हुई ,बेंचेज़ बनी रहे तो हो सकता है ,ऐसे मिडिया कर्मी ,जो देश की अटूट एकता ,क़ौमी एकता ,,सामप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की सौदेबाज़ी कर रहे है , उन पत्रकारों , उन चेनल्स ,उन अख़बारों के मुख पर कालिख पुत्त जाए ,, उन्हें सजा मिल जाए ,सरकार को ऐसे क़ानूनों की पालना कर ,ऐसे मीडियाकर्मी जो मीडिया की स्वंत्रता की आड़ में ,, देश को गुमराह करते है ,, उनके खिलाफ एक गाइड लाइन मिल जाए ,,क़ानून बन जाए , और फिर देश इन छद्म मीडियाकर्मी ,विज्ञापन बाज़ ,, पेड़ चेनल्स से आज़ादी की तरफ अपनी राह ले , अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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