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10 जुलाई 2020

राजस्थान में झीलों की नगरी उदयपुर संभाग के आदिवासी इलाक़े डूंगरपुर , की एक शख्सियत ,,एडवोकेट असरार अहमद ,, का आज जन्म दिन

हमारे राजस्थान,,राजस्थान में झीलों की नगरी उदयपुर संभाग के आदिवासी इलाक़े डूंगरपुर , की एक शख्सियत ,,एडवोकेट असरार अहमद ,, का आज जन्म दिन है , अल्लाह असरार साहब की नेकियाँ क़ुबूल करे , उन्हें खुशहाली , सहत्याबी , उम्रदराज़ी के साथ , ऊंचे ओहदे पर बिठाए ,, ताकि वो लोगों के ज़्यादा से ज़्यादा काम आ सकें , असरार अहमद को अल्लाह ने ,,वली ऐ हिन्द ,,ख्वाजा गरीब नवाज़ के आस्ताने की खिदमात की ज़िम्मेदारियाँ दीं , यकींनन असरार अहमद ने इस ज़िम्मेदारी को ,,पूरी ईमानदारी ,दयानतदारी से ,अपनी टीम के साथ निभाया ,, अल्लाह ने फिर उन्हें इस आस्थाने की खिदमत की दुबारा ज़िम्मेदारी दी ,,असरार अहमद दो बार ,,ख्वाजा वली ऐ हिन्द के आस्ताने की खिदमत का शर्फ हांसिल कर चुके है , उन्हें बधाई ,,मुबारकबाद ,,, असरार अहमद समाजसेवा , आदिवासी कल्याण ,उत्थान ,,कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में जाना पहचाना नाम है ,, यह नामचीन एडवोकेट होने के साथ ,कांग्रेस विचारधारा के प्रचारक ,,गांधीववादी अशोक गहलोत ,सोनिया गाँधी ,के निर्देशन पर कांग्रेस ज़िंदाबाद के सफलतम प्रयासों में अव्वल भी है ,कुशल वक्ता ,,तेज़तर्रार अधिवक्ता ,आदिवासी मामलों सहित अल्पसंख्यक मामलों के जानकार ,असरार अहमद ,हमेशा आम लोगों के हक़ के लिए एक जंगजू सिपाही की तरह संघर्ष शील रहते है ,न काहू से दोस्ती ,न काहू से बेर ,,न चमचागिरी ,न चापलूसी ,बस ख़ल्क़ ऐ खिदमत ,,मानव कल्याण ,इंसानियत ज़िंदाबाद इनका नारा है ,यही वजह है ,,के असरार अहमद हमेशा अपने क्षेत्र के सियासी कार्यक्रमों ,बैठकों ,,जनसभाओं में अव्वल रहते है , असरार अहमद राजस्थान सरकार में अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य होने के नाते ,,राजस्थान भर के अल्पसंख्यकों सिक्ख ,क्रिश्चियन ,बौद्ध ,पारसी , मुस्लिम समाज की कल्याणकारी योजनाओ की क्रियान्विति , उन्हें इन्साफ दिलवाने में आने वाली बाधाओं को दूर करने की ,सकारात्मक ,रचनात्मक , कल्याणकारी रिपोर्ट तैयार कर अव्वल रहे थे ,, असरार अहमद सियासत में हर वरिष्ठ का अदब करते है ,सम्मान करते ,है , लेकिन मुद्दों पर , अपने समाज ,अपने वर्ग के हक़ के लिए वोह संघर्ष भी करते है ,,वोह ऐसे लोग जो उनके समाज ,उनके वर्ग के प्रति उपेक्षित रुख अपनाते है ,, उनकी आँखों में आँखे डालकर ,, उनसे ज़िद कर अपने ,समाज अपने वर्ग के लोगों के लिए ,वोह खुद के नुकसान की परवाह किये बगैर ,,झगड़ते भी है ,,मांग भी रखते है ,हाथ जोड़ना उनकी विनम्रता है ,लेकिन सिर्फ हाथ बाँध कर गलत मुद्दों पर जी हुज़ूरी उनकी फितरत नहीं ,, वह संगठन को मज़बूत करने के लिए ,महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ,निर्भीकता , निष्पक्षता से अपना विज़न ,अपना सुझाव रखने में सक्षम रहते है ,,असरार अहमद पूर्व अशोक गहलोत सरकार में अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य का कार्यकाल खत्म होने पर , राजस्थान अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम में मंत्री दर्जा चेयरमेन बनाये गए ,,इनके कार्यकाल में ,,राजस्थान में अल्पसंख्यकों के स्वरोजगार ऋण योजनाओं ,,शैक्षणिक ऋण मामलों में विधिनियमों के सरलीकरण के प्रयास हुए और ,,टारगेट से अधिक इस वर्ग के लोगों को लाभान्वित किया गया , असरार अहमद ,आदिवासी कल्याण , अल्पसंख्यक कल्याण ,क़ौमी एकता सहित कई समाजसेवी संस्थाओं से जुड़कर लोगों की खिदमत अंजाम दे रहे है ,यह राजस्थान में उर्दू बंद करने के प्रयासों के मुखालिफ रहकर आंदोलन का हिस्सा बने है ,जबकि नफरत के माहौल में मोहब्बत की रौशनी लेकर ,वातावरण में क़ौमी एकता की जान फूंकने के लिए इनकी विशिष्ठ पहचान है , मदरसा पैराटीचर्स को उनके हक़ दिलवाने को लेकर भी यह प्रयासरत है , कांग्रेस संगठन में वरिष्टता के आधार पर हर चुनाव में ,चुनाव प्रचार ,राष्ट्रिय स्तर के नेताओं की आमसभाओं को लेकर ,इनकी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारिया रहती है ,,अल्लाह ने इनकी जुबांन में वोह मिठास ,वोह तासीर दी है ,के यह इनकी जुबांन से लोगों के दिल दिमाग बदलकर नफरत से मोहब्बत ,इत्तेहाद ,हक़ संघर्ष का माहौल बदलने में कामयाब रहते है ,,, इनकी दयानतदारी ,,ख़ुशनूदगी ,तहज़ीब ,,मोहब्बत ,,अपनों के लिए प्यार ,,बढ़ों के लिए इज़्ज़त ,,उपेक्षित ,,पीड़ितों ,शोषितों के लिए हमदर्दी ,इंसाफ पसंदी , ईमानदारी , मज़हबी रिवायतों की अलमबरदारी का ही नतीजा रहा है ,के इन्हे भारत सरकार ने ख्वाजा गरीब नवाज़ कमेटी का सदस्य नियुक्त किया फिर सदस्यों ने इन्हे ख्वाजा गरीब नवाज़ कमेटी का चेयरमेन चुनकर खिदमत का मौक़ा दिया ,एक बार इस पद पर रहकर खिदमत करना सामान्य सी बात है , लेकिन इसी पद पर फिर से इन्हे ज़िम्मेदारी मिलना इस बात का पुख्ता सुबूत है के आस्थाने की दुबारा खिदमत की ज़िम्मेदारी इनके काम काज का इनाम रही ,, अल्लाह से दुआ है के ऐसी शख्सियत जो हाथ बाँध कर विनम्रता तो दिखाते है ,लेकिन ज़ोर ,ज़ुल्म ,ज़्यादती के मामले में हमारे मसाइलों पर दूसरे ,चमचे ,चापलूसों की तरह हाथ बाँध कर ज़िंदाबाद नहीं करते ,,तारीफों की चमचागिरी नहीं करते , पहले सांकेतिक भाषा में ,विनम्रता तहज़ीब से ,,मुद्दों के निस्तारण के लिए बात करते है ,बहस करते है और फिर भी अगर हक़ मामले में इन्साफ नहीं होता तो यह आँखों में आँखे डालकर ,अपने विनम्रता से बंधे हुए हाथ खोलकर , मर्यादाओं में रहकर मुक़ाबला भी करते है ,,संघर्ष भी करते है ,ज़िंदाबाद ,मुर्दाबाद करने में भी पीछे नहीं रहते ,वोह कहते है ,मेरे अपनों का प्यार ,मेरे अपनों की हिम्मत ,मेरे अपनों की ताक़त मेरे साथ है ,तो इनके हक़ों के लिए संघर्ष करना ,इन्हे इन्साफ दिलाना मेरी पहली ज़िम्मेदारी है और अगर संगठन के लोगों को ,हुकूमत के लोगों को ,अपनों की समस्याए बताई जाती है ,उनके समाधान के रास्ते बताये जाते यही ,तो वोह प्रार्थमिकता के आधार पर निस्तारित भी होती है ,इसीलिए वोह अपने संगठन , अपने नेताओं के सकारात्मक ,,रचनात्मक निर्णयों के क़ायल भी है ,, भाई असरार अहमद को सेल्यूट ,,सलाम ,,बधाई , मुबारकबाद ,,हमे गर्व है के भाई असरार अहमद को उनकी खिदमात , निष्पक्ष ईमानदार छवि के मामले में जल्द ही दुबई में ऑल इंडिया मीडिया कौंसिल इंटरनेशनल सोशल एवार्ड से नवाजा गया, है ,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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