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24 जून 2020

,तेरे सूखे हुए ख़्वाब ,,तेरी ,चाहत तेरी ज़रूरतें ,आ मेरे साथ आ , में तुझे शादाब कर दूँ

मध्यप्रदेश सरकार में आबकारी अधिकारी के ऊँचे ओहदे पर बैठे , शादाब अहमद सिद्दीक़ी ,की ,  परवरिश , दोस्तों की सोहबत में ,, खुद भी पढ़ो ,दूसरों को भी पढ़ाओ ,रोतों हुओं को हँसाओ ,, मायूस ज़िंदगियो में खुशियां भर दो ,लोगों को कामयाबी का रास्ता दिखाओ जैसी फितरत है और इसी फितरत ,इसी हिम्मत ,इसी परवरिश के चलते ,शादाब अहमद सिद्दीक़ी ,अपने दोस्त जज़्बा सोशल फाउंडेशन  के इंजीनियर सरफ़राज़ कुरैशी ,नईम खान वगेरा के साथ मध्य्प्रदेश के ज़रूरतमंदों , छात्र छात्राओं  में ,,हिम्मत ,मदद ,शिक्षा ,अदब , अख़लाक़ , कामयाबी के फार्मूले बाँट रहे है ,अल्लाह इन्हे कामयाब करे इन्हे ,,  हौसला दे , हिम्मत दे ,ताक़त दे ,,शादाब सिद्दीक़ यानी डॉक्टर शादाब सिद्दीक़ी जो नो साल की उम्र में ही ,कुशल वक्ता की शील्ड विजेता रहे है , तो माशाल्लाह अब नोजवानी में तो स्टेज पर यह कमाल करते है ,, 
तेरी सुखी उम्मीदें ,,तेरे सूखे हुए ख़्वाब ,,तेरी ,चाहत तेरी ज़रूरतें ,आ मेरे साथ आ , में तुझे शादाब कर दूँ ,, तेरी हर उम्मीद को में हरा भरा कर ,,खिला गुलाब कर दूँ ,,कमोबेश यही ,नारा , हर नाउम्मीद , हारे हुए खिलाड़ी , ज़िंदगी को संवारने की  कोशिश में लड़खड़ाने वालों को ,यह शादाब सिद्दीक़ी , अपने नाम के मायनों की पहचान को सार्थक करते हुए , पुकारते है ,,बढे अदब से ऐसे लोगों को , कामयाब ज़िंदगी की खाद के साथ हरा भरा कर ,खिला गुलाब करने के लिए कहते है ,में हूँ ,ना , में हूँ ना ,शादाब सिद्दीक़ी ,  रोतों हुओं को हंसाते ,,है , नाउम्मीदों को उम्मीद जगाते है ,हारों हुओं को फिर से खेल में  दांव पेंच सिखाकर अव्वल लाकर जिताते है ,, जी हाँ दोस्तों ,,मध्यप्रदेश की सर ज़मीन पर , यह एक हरा भरा , शादाब , जिन्हे हम , शादाब अहमद सिद्दीक़ी भी कहते है ,,जो सूखे हुए फूलों को खुशियों की खिलखिलाहट देता ,है जो मुरझाये हुए पेड़ों को हरा भरा कर , सूखे हुए बाग़ को फिर से गुले गुलज़ार करता है ,,  मालवा मध्यप्रदेश में 15 मई 1978 को श्रीमती मक़बूल परवीन के यहाँ इस  शख्सियत का जन्म ,हुआ इनके वालिद  हाजी रफ़ीक अह्मद सिद्दीक़ी जो लोगों को उनकी ज़मीन का हक़ दिलाने ,, उनकी ज़िंदगी को ईमानदारी से गुले गुलज़ार करने वाले आदर्श पटवारी साहब थे , इन्होने अपने इस छोटे बेटे से उम्मीदें बाँधी ,,इस मासूम से चेहरे पर ,लोगों की ज़िंदगी को  हरी भरी खुशहाल करने के जज़्बे की चमक देखी तो , उन्होंने इनका नाम ,शादाब ,यानी हरा भरा ,हरियाली ,खुशहाली रख दिया ,, बस फिर मासूम शादाब ने अपने 6 फुट 2 इंच के सिद्धांतों पर चलने वाले , ईमानदारी , कर्तव्यनिष्ठा का पर्याय कहे  जाने वाले , पढ़ो ,पढ़ाओ की परवरिश नारा देकर ,सादा जीवन उच्च विचार ,का मंत्र पढ़कर ,वालिद की ऊँगली थामी ,,और बस बढे होते गए ,बढे होते गए ,माशा अल्लाह इतने बढे हो गए ,के अब यह लोगों को ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाते ,हैं भटकों हुओं को कामयाबी का रास्ता दिखाते हैं ,  रोते हुए लोगों की आँख के आँसू पोंछ कर उन्हें हंसना सिखाते है , कभी खूबसूरत शेर शायरी से लोगों के चेहरे की मुस्कान बनते ,है तो कभी ,मध्य्प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में बैठकर अफसर बनने का ख्वाब देखने वाले , छात्र छात्राओं के ख्वाओं को पूरा करते है ,, कभी अपनी कमाई में से कुछ ज़रूरतमंदों की फीस जमा करते है ,किताबें दिलवाते ,है तो कभी उनके कपड़े ,खाने  के सामान घर पर पहुंचाकर ,उन्हें बेज़ार ज़िंदगी से लड़ने की ताक़त देते है ,,, शादाब अहमद सिद्दीक़ी ,माशा अल्लाह जैसा नाम वैसी शख्सियत ,वालिद की तरह खूबसूरत नूरानी ,चेहरा 6 फिट से भी ज़्यादा की लम्बाई ,स्मार्ट पर्सनालिटी , चेहरे पर रुआब , एक शाही चमक ,, अफसर होने पर भी ,खिदमत के जज़्बे की  मासूम सी विनम्रता , बोलने पर माशा  अल्लाह ऐसा लगे जैसे फूल झड़ रहे हो , पुरकशिश आवाज़ में पुरखुलूस शाही अंदाज़ , ,एक एक अलफ़ाज़ में ज़िंदगी जीने का  फलसफा ,हारे हुए लोगों के लिए ,एक महागुरु  वाली ज़िंदगी जीत लेने वाली सीख , माशा अल्लाह इस बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व के पास  अल्लाह की दी हुई इज़्ज़त ,है रुतबा है ,अफसरी है ,,डॉक्टरेट की डिग्री के साथ ज्ञानवर्धक जानकारियां है ,, दोस्त ,है ,रिश्तेदार ,है घर परिवार है ,लेकिन फिर भी इनके लिए आराम हराम है ,इनका लक्ष्य सिर्फ पढ़ना ,पढ़ाना ,;लोगों को खिदमत के जज़्बे के साथ ,आत्मनिर्भर बनाना ,, स्वरोज़गार के  साथ स्वावलंबन करना ,या फिर पढ़े लिखे नौजवानों के गाइड ,,उस्ताद बनकर ,उन्हें कॉम्पिटिशन में अव्वल आकर रुतबे की नौकरी हांसिल ,कर फिर दूसरे लोगों की मदद की सीख  ही इनकी खिदमत की कढ़ी से मिली , कढ़ी है ,,  शादाब अहमद ,सिद्दीक़ी सरकार के खिदमतगार ,अपने  परिवार के फ़रमाबरदार ,नयी ज़िदंगी ,  नए मुस्तक़बिल की तलाश में निकले छात्र छात्राओं के मार्गदर्शक है , शादाब सिद्दीक़ी खुद डॉक्टरेट की उपाधि ,लेकर डॉक्टर शादाब सिद्दीक़ी है ,,यह पढ़ना और पढ़ाना चाहते थे ,लेकिन वालिद ,और इनके बढे भाईजान की ज़िद कहें या हुक्म ,इन्हे मध्य प्रदेश शासन में प्रशासनिक अधिकारी बनने का टास्क था ,,इसीलिए शादाब अहमद ने फरमाबरदारी दिखाई , इनके पटवारी वालिद की तर्ज़ पर दो भाई पटवारी है ,जबकि एक भाई जल संसाधन विभाग में एस डी ओ हैं , तीन बहनों में एक डॉक्टर ,दूसरी पोस्ट ग्रेजुएट तो तीसरी इनकी तरह ही ,शोधग्रंथ लिखकर ,,डॉक्टरेट की उपाधि लेकर ,डॉक्टर साहब बनीं ,है कुल मिलाकर ,घर में पढ़ने ,पढ़ाने का माहौल ,, इंसानियत की परवरिश ,खिदमत ऐ ख़ल्क़ यानी ज़रूरतमंदों की मदद का जज़्बा दिल में रखकर सभी की तत्काल मदद करने की सीख ने इन्हे  इंसानों में सबसे बेहतर इंसान ,गुरुओं में सबसे बेहतर गुरु ,शायरों में सबसे बेहतर शायर , वक्ता में सबसे अव्वल वक्ता , अफसरशाही में सबसे बेहतर अफसर बना दिया ,,इनके दोस्त इंजीनियर सरफ़राज़ कुरैशी नईम खान के साथ ,यह जज़्बा फाउंडेशन सोसायटी से जुड़कर , लोगों के जज़्बात टटोलते ,है उनकी ज़रूरतें पूरी करते है ,इन्हे पढ़ने पढ़ाने का शोक ,था इसलिए यह लेक्चरर भी रहे ,, मध्य्प्रदेश शासन में वाणिज्य कर अधीकारी बने ,फिर माशा अल्लाह मध्य्प्रदेश शासन के सर्वाधिक ईमानदार , आबकारी अधिकारी है ,, शादाब भाई ,यारों के यार है ,,भाइयों के भाई है , नौकरी की तलाश में भटकने वाले बच्चों की कामयाबी की एक सड़क हैं , अँधेरे की ज़िंदगी जी रहे लोगों के लिए खुशहाल ज़िदंगी की रौशनी ,है , ज़रूरतमन्दों की ज़रूरतें पूरी करने वाले एक मसीहा है ,, मुशायरे की महफ़िलों की रौनक है ,, स्टेज पर सबसे बेहतर ,सबसे  कशिश आवाज़ की भाषणशैली के पारंगत उस्ताद है ,,, शादाब सिद्दीक़ी पी  ऐ सी कोचिंग सेंटर के ज़रिये छात्र छात्राओं को पढ़ाकर सिर्फ उन्हें अफसर बनाकर खुश होने का सपना देखने वाले थे ,लेकिन  एम ऐ , एल एल बी ,फिर पी एच डी करने के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश शासन में प्रशासनिक पद पर अव्वलीन नंबरों से खुद को आबकारी  अधिकारी बनाकर स्थापित किया ,आबकारी अधिकारी और ईमानदारी जो एक दूसरे के विलोम कहे जाते रहे ,हैं उन्हें एक दूसरे का पर्याय साबित कर ,  ईमानदारी ,कर्त्तव्ययनिष्ठा के जज़्बे में खुद को बुलंद से भी बुलंद कर लिया ,, अब शादाब सिद्दीक़ी अफसरी भी कर रहे है , लेकिन नौकरी के भविष्य को लेकर चिंतित युवाओ के गाइड भी है ,पथप्रदर्शक भी ,है मददगार भी  ,है इनकी पुस्तक मध्य्प्रदेश सामान्य  ज्ञान के अब तक 13 संस्करण प्रकाशित हो चुके  है जो हर परीक्षा में , हज़ारों परीक्षार्थियों के लिए कामयाबी रोशन करती है ,, हाल ही में कोरोना संकट के वक़्त लोकडाउन में , शादाब अहमद सिद्दीक़ी के ,इनके परिवार , इनके मित्र , इनके जज़्बा फाउंडेशन के दरवाज़े हर ज़रूरतमंद के लिए खुले ,थे रोज़ मर्रा हज़ारों हज़ार लोगों के यह मददगार ,बने ,इनके  मोबाइल नंबर हर तरफ इन्होने शेयर किये नतीजा ,हर रोज़ सैकड़ों ज़रूरतमन्दों के फोन ,उनकी ज़रूरतों को रफाकर दुआए लेने का काम इन शादाब भाई ने ,,मायूस लोगों की पतझड़ सूखी ज़िंदगी को हराभरा कर खुशियों से भर दिया , शादाब साहब एक बेहतरीन  शायर भी हैं कई राष्ट्रिय ,अंतर्राष्ट्रीय मुशायरों की रौनक भी है ,,एक हौसला है ,,कामयाबी की एक मिसाल है ,, मायूसी को खुशहाल ज़िंदगी में बदलने की सीख देने वाले एक गुरु जी ,है , फुटपाथ पर पढ़ने वाले बच्चों के लिए कोचिंग में रहने , खाने , फीस ,कपड़े ,,सहित सभी व्यवस्थाओं के साथ ,ऐसे बच्चों की मायूस ज़िंदगी में  खुशियों , कामयाबी के रंग भर कर , परीक्षा में ज़िंदाबाद करने की एक कोशिश हैं ,,, ऐसी बहुमुखी प्रतिभा शख्सियत शादाब अहमद सिद्दीक़ी को सेल्यूट ,सलाम , बधाई ,, एक उम्मीद ,राजस्थान सहित दूसरे राज्यों में भी ,मध्य्प्रदेश के इस हीरो ,इस मसीहा ,इस पढ़ो , पढ़ाओ के आइकॉन की तर्ज़ पर ,कामयाब लोगों को दूसरे ज़रूरतमंदों के लिए कामयाबी का पुल तैय्यार कर ,उन्हें कामयाब रास्ते पर चलाने की कोशिश करने वाला बनना चाहिये , यही खिदमत एक ख़ल्क़ ,है यही इंसानों में मसिहागिरि ,है यही इंसानों में फ़रिश्तागीरी है ,,जज़्बा सोशल फाउंडेशन के जज़्बे के साथ ,इंजीनियर सरफ़राज़ कुरैशी ,शादाब अहमद सिद्दीक़ी ,नईम खान ,की तर्ज़  पर माशा अल्लाह राजस्थान में भी एक वट वृक्ष बनकर ,,अल्पसंख्यक अधिकारी ,कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष हारुन खान , अपनी टीम के खिदमतगार जज़्बाती साथियों के साथ पढ़ो ,पढ़ाओ ,,ज़रूरतमंदों की मदद करो ,,गरीबी के माहौल में जो भी बच्चे पढाई छोड़कर बैठे है उन प्रतिभाओं को तलाश रहे है ,और ऐसे बच्चों को इन्होने डॉक्टर , इंजीनियर ,,अफसर बनने के लिए तराशना शुरू कर दिया ,है इसमें हारून खान इनकी टीम को कामयाबी भी मिल रही ,है दुआए भी मिल रही है ,मध्य्प्रदेश राजस्थान की इस व्यवस्था को हर राज्य में साकार करने की ज़रूरत है ,,,  अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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