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06 अप्रैल 2020

कोरोना का यह घटाटोप अँधेरा ,इस अँधेरे में कुछ नफरत बाज़ों की शरारते

कोरोना का यह घटाटोप अँधेरा ,इस अँधेरे में कुछ नफरत बाज़ों की शरारते ,,, कुछ मीडियाकर्मियों की वेमन्सयता रिपोर्टिंग ,,सहित कई विरोधाभासों के बावजूद ,यह मेरा भारत है ,यह मेरा हिन्दुस्तान है ,सड़को ,पर अस्पतालों में ,हर जगह ,गली मोहल्लों में इस कोरोना से जंग लड़ रहा है ,,,देश में इस संकट काल में कोरोना के खिलाफ जंग के लिए हमारे पास हथियार नहीं ,थे सिर्फ एहतियात ,होसला ,और एकजुटता थी ,,यक़ीनन हौसला नरेंद्र मोदी ने चाहे अशोक गहलोत से लिया हो ,लेकिन एक आवाज़ ,एक होसला उन्होंने भी भारत को दिया है कमाण्डर युद्ध लड़ने के लिए अगर हथियार किसी मजबूरी की वजह से नहीं दे पाता तो हौसला तो देता है ,यह हौसला नरेंद्र मोदी ने उनके अंदाज़ में जितनी उनकी हैसियत थी देने की भरपूर कोशीश की है ,,डॉक्टरों की पीठ थपथपाई ,, जनता को तकलीफें बताई ,वक़्त ज़रूरत खेलकूद की तरह उन्हें निराशाजनक हालातों में ,,व्यस्त कार्यक्रम दिए ,,नकारात्मक हालातों में भी हम कुछ एक मिडिया रिपोर्टर ,नफरतबाज़ों को छोड़कर सकारात्मक रहे ,,,अशोक गहलोत का राजस्थान तो इस मामले में रोल मॉडल बनकर उभरा है ,अशोक गहलोत के कार्यक्रमों को देश भर में लागू किया जा रहा है ,लेकिन इन सब के अतिरिक्त मेरा देश ,मेरा भारत ,महान सारे जहां से अच्छा यह हिंदुस्तान हमारा ,,केंद्र और राज्यसरकारों के सीमित साधनों ,,,,चिकित्स्कीय प्राथमिक प्रंबधनों के बीच ,एक जुट होकर उठ खड़ा हुआ ,,देश ने संकट काल में , जनता कर्फ्यू का पालन किया ,लोकडाउन का सब्र के साथ पालन कर रहा है ,सोशल मीडिया पर भी पेडवर्कर्स को छोड़कर सभी फराख दिली से बढे दिल वाले बनकर मदद कार्यों ,राहत ,कार्यों भोजन सामग्री वितरण ,चिकित्स्क ,पुलिसकर्मी उनके स्टाफ को हिम्मत के साथ मोटिवेट रहे है ,,ज़रा सोचो ,सरकारी की मदद तो अब पहुंचना शुरू हुई ,है ,,एक तरफ ,केंद्र सरकार ,राज्य सरकारों ने इस संकट काल में भामाशाहों के सामने अलग अलग सहायता एकाउंट खोलकर ,,हाथ फैला दिए ,,सरकारी कर्मचारियों के वेतन से सीधी मदद ले ली ,,उनके वेतन को रोक दिया ,,अधिकतम भामाशाहों ने केंद्र और राज्य सरकारों को अलग अलग मदद भी दी ,ज़रा सोचो ऐसे माहौल में हर शहर ,हर कस्बे में ,कई बस्तियां ,कई लोग पीड़ित ,थे ,परेशांनं ,थे भूखे थे ,,ऐसे में सामाजिक संगठनों ,राजनितिक संगठनों ,,ने लगभग बिना किसी भेदभाव के स्वेच्छिक ,समाजसेवकों को जोड़कर ,,भामाशाहों को जोड़कर ,भंडारे चलाये ,,कोरोना के खिलाफ साहसिक स्लोगन ,दिए एहतियाती ज़िम्मेदारियों का अहसास दिलाया ,, प्रशासन के हर निर्देश के पालन में सहयोग किया , कुछ लोग उत्साहवर्धन के लिए फोटोग्राफी भी करते है ,तो कुछ लोग ,घर बैठे बैठे सिर्फ होतत्सहित करने के लिए फोटोग्राफी मदद व्यवस्था का मज़ाक़ भी उड़ाते रहे ,लेकिन मदद का यह सिलसिला बिना किसी भेदभाव ,बिना किसी कार्ययोजना के स्वस्फुरित तरीके से ,चमत्कारिक तरीके से चलता रहा ,,,ज़रूरतमंदों को किराना किट भी मिले ,सेनेटाइज़ेशन भी मिला ,,मास्क भी मिले ,,दोनों वक़्त का उनके अपने घरों पर ,,समाजसेवकों ,सियासी पार्टियों ,समाजों की तरफ से ,,भोजन भी पहुंचाया जा रहा है ,ज़रा सोचिये आकस्मिक लोकडाउन ,कर्फ्यू जैसे हालात ,पुलिस की सख्ती ,गलियों में ,मोहल्लों में ,,बस्तियों में दैनिक मज़दूर ,बीमार ,अशक्त ,गरीब लोग ,क्या करते ,सरकार की अचानक मदद सम्भव ही नहीं थी ,ऐसे में हर ज़िले में ,,आप और हम निकले ,मददगार ,बने जिससे जितना मुमकिन हुआ उसने वोह सब किया ,,लेकिन इस मदद में ,माफ़ करना ,मुझे देश का ,विश्व का सबसे बढ़ा सामाजिक समाजसेवा संगठन कहीं दूर दूर तक नज़र नहीं आया ,रेडक्रॉस भी मोटिवेट ,एलिगेंट करने पर अब नज़र आयी ,वरना सरकारी की मदद तीस प्रतिशत जनता की मदद सत्तर प्रतिशत से भी अधिक है ,,,,,में मुबारकबाद देना चाहता हूँ आपको ,सभी समाजसेवीयों को ,,भामाशाहों को ,जिन्होंने इस मौके पर देश के संकटकाल में ,देश को अँधेरे से रौशनी की तरफ लाने के लिए अपनी मदद की रौशनी से घर घर खाने की ,,किराने की मदद पहुंचकर इस देश को बचाया ,है ,इस देश की रीढ़ को मज़बूत किया है ,इस देश की संस्कृति को जीवित रखा ,है ,यह साबित कर दिया है ,के सरकार अगर अव्यवस्थित भी हो ,सरकार अगर फैसलों में देरी लेने वाली भी हो ,,अचनाक संकट से सरकार में बैठे लोग घबरा भी जाए तो ,,,हर हिन्दुस्तानी एक जुट होकर ,सरकार का हिस्सा बनकर ,अपने निजी ,बजट अपने निजी तरीके से ,सरकार की ज़िम्मेदारी निभाकर सरकार को भी मार्गदर्शित करता है ,,,हमारे यहाँ के अधिकारी ,कर्मचारी ,चिकित्स्क , चिकित्सा ,टीम सुरक्षा कर्मी ,पुलिस ने भी यह बता दिया ,है के वोह किसी भी तरह के संकट पर विजय श्री का हौसला रखते है ,इंशा,अल्लाह इसी हौसले ,, इसी अटूट एकता ,,, इसी एक दूसरे के मदद के जज़्बे से ,,बिना किसी हिन्दू ,,मुस्लिम केविवाद के ,, हम हिंदुस्तानी बनकर , सभी एक दूसरे के दुखदर्द बांटेंगे और इस संकट की घड़ी में हम जल्दी ही होंगे कामयाब ,,हम होंगे कामयाब ,एडवोकेट ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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