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16 अक्तूबर 2019

,खेर में बात कर रहा हूँ ,कोटा की अज़ीम हस्ती रहे ,मौलाना असरारुल हक़ जिनका डंका राजस्थान की राजनीति में बजा करता था

राजस्थान में नगरपालिका चुनावों के साथ ही कोटा नगर निगम पार्षद के चुनाव होना है , पार्षद ही महापौर ,उपमहापौर चुनेंगे ,कई लोग पार्टी से प्रत्याक्षी बनने के लिए क़तार में है ,जबकि कई लोग अपनी अपनी सिफारिशें लगा रहे है ,कुछ को टिकिट मिलेगा ,कुछ को निराशा मिलेगी ,कुछ बगावत करेंगे ,कुछ टिकिट लेकर भी हार जाएंगे ,लेकिन दोस्तों ,बुज़ुर्गों ,पहनों ,चुनाव में हार जीत होती है ,पार्षद के चुनाव में भी हारजीत होगी , कोटा के हारे हुए प्रत्याक्षियों को हारने के बाद निराश होने की ज़रूरत नहीं है ,कोटा का इतिहास है यहां ,अधिकतम पार्षद प्रत्याक्षी हारने के बाद ऊँचे ,ऊँचे ओहदों पर रहे है ,,, कोटा में मौलाना अंसारुल हक़ इस मामले में पार्षद का चुनाव हारकर भी हिम्मत नहीं हारने की वजह से महत्वपूर्ण पदों पर रहे है ,, दूसरे लोग भी है जो महत्वपूर्ण पदों पर रहे है ,,खेर में बात कर रहा हूँ ,कोटा की अज़ीम हस्ती रहे ,मौलाना असरारुल हक़ जिनका डंका राजस्थान की राजनीति में बजा करता था ,लेकिन अफ़सोस कोटा में उनके ज़रिये कई लोगों के फायदेमंद होने के बावजूद भी आज ,,उनकी वफ़ात ,,योम ऐ पैदाइश या फिर किसी भी कार्यक्रम के वक़्त उनका नामलेवा नहीं है ,फिर भी मौलाना असरारुल हक़ के जो काम है वोह किसी पहचान के मोहताज नहीं है ,,सभी जानते है , बिहार से कोटा आकर बसे ,, मौलाना असरारुल ने कोटा को ही अपना राजनीतिक अखाड़ा बनाया और यहाँ कभी खुद पछड़े कभी दूसरे खिलाडियों को पछाड़ कर वोह राजस्थान के ही नहीं पुरे हिन्दुस्तान के खुसूसी लोगों में से एक हो गए ,,, मौलाना असरारुल हक़ चाहे पाटनपोल राधाविलास वार्ड से , हाजी अशरफ बिजली ठेकेदार से चुनाव हार गए हो ,लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी ,वोह सियासत में जुड़े रहे ,उन्होंने कभी पाटनपोल ,तो कभी घंटाघर ,तो कभी श्रीपुरा कबाड़ी बाज़ार जो उस वक़्त खुला मैदान हुआ करता था ,मज़हबी मजलिसें की ,,सुन्नी जमात के नाम पर कार्यक्रम किये ,,सियासी बैठके की ,,नतीजा यह हुआ के ,,मौलाना असरारुल हक़ पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंद्रा गांधी के प्रमुख वफादारों की सूचि में अव्वल हुए ,, मौलाना असरारुल हक़ कोटा नगर कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर रहे ,,मोहन टाकीज़ स्थित जहाँ वर्तमान भाजपा कार्यालय है इस कार्यालय में वोह कांग्रेस का दफ्तर चलाकर ,लोगों में कांग्रेस के पक्ष में चुनाव प्रचार करते थे ,कई कार्यक्रम करवाते थे ,,बैठके करवाते थे ,चुनावों में धरने ,पर्दर्शन ,रैलियां उनके नेतृत्व में होती थी ,वोह राजस्थान सरकार में राजस्थान वक़्फ़ बोर्ड के प्रदेश सदस्य बनाये गए ,,मौलाना असरारुल हक़ कांग्रेस सरकार के संकट मोचक भी रहे है ,वोह कभी वकृफ की समस्या पर आंदोलन को खत्म करवाने में सरकार के मददगार बने तो कभी आपात काल में नसबंदी के प्रचार कार्यक्रम में सरकारी तात्कालिक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर ऐ क्यू खान की मौजूदगी में ,नसबंदी पर ,,लोगों को उत्प्रेरित करने के सभा की रूहे रवां बने ,लेकिन मौलाना असरारुल हक़ ,,असरारुल हक़ ही थे ,उनका कमाल यह था के वोह अपने भाषण से हवा अपने पक्ष में करने का हुनर रखते थे ,या अल्फ़ाज़ों को चुनकर ,माहौल साज़गार बना देते थे ,,आपातकाल में उनपर मुस्लिम बस्ती घटनाघर में सरकारी कार्यक्रम में ,,नसबंदी कार्यक्रम का आइकॉन बनने का दबाव था ,वोह मंच पर थे ,उनका जब नाम पुकारा गया तो नसबन्दी की वकालत उन्होंने ऐसे अल्फ़ाज़ों में की जिसमे उन्होने वकालत भी की और लोगों को बुरा भी नहीं लगा ,उनके भाषण के यह अंश आज भी लोगों की ज़ुबान पर है ,,उन्होंने कहा ,,मुसलमान देश के लिए सर कटाने को तैयार रहता है ,आप तो सिर्फ एक नस की बात करते , हैं उनकी भाषण शैली की जादूगरी से सभी प्रभावित थे ,,इंद्रा गांधी ने उन्हें राजस्थान राज्य से राजयसभा का सदस्य बनवाया ,वोह राजस्थान के मुख्यमंत्री जननाथ पहाड़िया ,,बरकतुल्ला खान ,मोहनलाल सुखाड़िया के नज़दीकियों में से थे ,उनके साथ अक्सर बैठकर चर्चाये किया करते थे ,, मौलाना असरारुल हक़ से ,इंद्रा जी ने जब चुनाव की घोषणा की ,कुछ लोग रमज़ान और किसानों की फसल का वक़्त होने से चुनावों को लेकर परेशां थे तब उन्होंने मौलाना असरारुल हक़ से ही इस मामले में इंद्रा जी से बात करने के लिए कहा ,उन्होंने खूबसूरत ,पुरलुत्फ अल्फ़ाज़ों में उन्हें समझाया और चुनावों की तारीखे बढ़ा दी गयीं ,,, मौलाना असरारुल हक़ ने कोटा में कई लोगों के ट्रांसफर ,नौकरी ,सियासी पहचान के काम करवाए ,,वोह जंगलीशाह बाबा की उर्स महफ़िल की जान हुआ करते थे ,कोटा में रहकर मौलाना असरारुल हक़ कई विवादों में रहे ,, विवादों से उनका पुराना नाता रहा ,लेकिन कोटा की सरज़मीं पर चाहे उनसे मदद लेने वाले ,उनकी ऊँगली पकड़ कर महत्वपूर्ण जगह पर पहुंचने वाले लोग,, अपनी सियासी पहचान बनाने वाले लोग भी ,, उन्हें भूल गए है ,लेकिन कोटा उन्हें ,ईद मिलादुन्नबी के ,क़ौमी एकता जुलुस के रूप में आज भी याद करता है ,,मौलाना असरारुल हक़ ,कोटा में हर साल बढ़ी तैयारियों के साथ , ईद मिलादुन्नबी का जुलुस निकाला करते थे ,,उनके जुलुस में कभी ज्ञानी जेल सिंह पूर्व राष्ट्रपति ,फखरुद्दीन अली अहमद ,तो कभी केसरीनाथ त्रिपाठी ,,कभी केदार जी केंद्रीय मंत्री शिरकत कर खुली जीप में ,,हाजी अज़ीज़ जावा जीप चलाते थे और पीछे मिलान असरारुल हक़ ,,ज्ञानी जेल सिंह ,,जो भी वी वी आई पी होते थे वोह रहा करते थे ,,मौलाना असरारुल हक़ ने , ऑल इण्डिया सीरत कमेटी बनाई ,,उक्त कमेटी के वोह खुद राष्ट्रिय अध्यक्ष थे जबकि राष्ट्रपति रहे ज्ञानी जेल सिंह उनकी इस कमेटी में उनके अधीनस्थ उपाध्यक्ष थे ,,आज राजस्थान में खासकर कोटा में इस कमेटी का वुजूद कागज़ों में सिमट कर रह गया है ,,उनके नाम पर कोई कार्यक्रम नहीं ,,उनकी वफ़ात के दिन ,या फिर उनकी पैदाइश के दिन उनसे फायदा उठाने वाले लोग भी कोई कार्यक्रम नहीं करवा पा रहे है ,,मौलाना असरारुल हक़ साहब का एक हवेली नुमा बढ़ा मकान आज भी चंद्रघटा ,चंबल नदी के किनारे है ,,जिसमे अस्सी से भी अधिक कमरे है ,,कभी चंबल नाराज़ होकर जब सड़कों पर आकर कई मकान डूबा जाती थी ,तो मौलाना असरारुल हक़ ने केंद्रीय मंत्री केदार जी पर दबाव बनाया और आखिर कोटा चबंल के दोनों किनारों पर ,,करोड़ों करोड़ रूपये की पिचिंग वाल बनाई गयी जो कई सालों तक कोटा वासियों को बचाती रही है ,, तो दोस्तों ,मौलाना असरारुल हक़ से जुड़े लोगों ,ज़रा ज़मीर ज़िंदा करों ,,उनकी योम ऐ पैदाइश ,,उनकी वफ़ात के दिन तो कमसे कम एक खिराज ऐ अक़ीदत के कार्यक्रम ही रख लो ,,उनके काम जो कोटा ,राजस्थान में उन्होने किये है ,, उन्हें ही गिनाने लगो , ईद मिलादुन्नबी के जुलुस ,दूसरे कार्यक्रमों में उनके लिए भी दो अलफ़ाज़ बोल दिया करों , अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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