हमें चाहने वाले मित्र

26 अगस्त 2019

सूरह बकराह: संक्षिप्त परिचय

सूरह बकराह: संक्षिप्त परिचय

यह सूरह मदनी है, इस में 286 आयते है।
यह सूरह कुरान की सब से बडी सूरह है। इस के एक स्थान पर “बकरह “(अर्थात: गाय ) कि चर्चा आई है जिस के कारण इसे यह नाम दिया गाया है।
इस कि आयत 1 से 21 तक में इस पुस्तक का परिचय देते हुये यह बताया गया है कि किस प्रकार के लोग इस मार्गदर्शन को स्वीकार करेगे। और किस प्रकार के लोग इसे स्वीकार नहीं करेगे।
आयत 22 से 29 तक में सर्व साधारण लोगों को अपने पालनहार कि आज्ञा का पालन करने के निर्देश दिये गये है। और जो इस से विमुख हों उन के दुराचारी जीवन और उस के दुष्परिणाम को, और जो स्वीकार कर ले उन के सदाचारी जीवन और शुभपरिणाम को बताय गया है।
आयत 30 से 39 तक के अन्दर प्रथम मनुष्य आदम (अलैहिस्सलाम) की उत्पति और शैतान के विरोध की चर्चा करते हुये यह बताया गया है कि मनुष्य की रचना कैसे हुई , उसे क्यों पैदा किया गया, और उस की सफलता की राह क्या है ?
आयत 40 से 123 तक , बनी इस्रराईल को सम्बोधित किया गया है की यह अन्तिम पुस्तक और अन्तिम नबी वही है जिन की भविष्यवाणी और उन पर ईमान लाने का वचन तुम से तुम्हारी पुस्तक तौरात में लिया गया है। इस लिये उन पर ईमान लाओ। और इस आधार पर उन का विरोध न करो की वह तुम्हारे वंश से नहीं है। वह अरबों में पैदा हुये है, इसी के साथ उन के दुराचारों और अपराधों का वर्णन भी किया गया है|
आयत 124 से 167 तक आदरणीय इब्रराहीम (अलैहिस्सलाम ) के काबा का निर्माण करने तथा उन के धर्म को बताया गया है जो बनी इस्राईल तथा बनी ईसमाईल (अरबों) दोनों ही के परम पिता थे कि वह यहूदी, ईसाई या किसी अन्य धर्म के अनुयायी नहीं थे। उन का धर्म यही इस्लाम था। और उन्हों ने ही काबा बनाने के समय मक्का में एक नबी भेजने की प्रार्थना की थी जिसे अल्लाह ने पूरी किया। और प्रेषित मुहम्मद (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) को धर्म पुस्तक कुरान के साथ भेजा।
आयत 168 से 242 तक बहुत से धार्मिक , सामाजिक तथा परिवारिक विधान और नियम बताये गये है जो इस्लामी जीवन से जिन के कारण मनुष्य मार्गदर्शन पर स्थित रह सकता है।
आयत 243 से 283 तक के अन्दर मार्गदर्शन केंद्र काबा को मुशरिकों के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिये जिहाद की प्रेरणा दी गई है तथा ब्याज को अवैध घोषित कर के आपस के व्यावहार को उचित रखने के निर्देश दिये गये है।
आयत 284 से 286 तक अन्तिम आयतो में उन लोगों के ईमान लाने की चर्चा की गई है जो किसी भेद – भाव के बिना अल्लाह के रसूलो पर ईमान लाये। इस लिये अल्लाह ने उन पर सीधी राह खोल दी। और उन्होंने ऐसी दुआये की जो उन के ईमान को उजागर करती है।
हदीस में है कि “जिस घर में सूरह बक़रह: पढ़ी जाये उस से शैतान भाग जाता है।” ( सहिह मुस्लिम -780 )

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...