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11 जुलाई 2019

राजस्थान के हज़ारों पैराटीचर्स ,,साक्षरता कार्यक्रम को बढ़ावा देने की कोशिशों में जुटे रहे ,लेकिन सरकार ने उन्हें ,,खुद के,, परिवार के,, गरीबी की रेखा से भी निम्न जीवन यापन ,और न्यूनतम मज़दूरी के बराबर भी मानदेय ,,मासिक भत्ता नहीं दिया

राजस्थान के हज़ारों पैराटीचर्स ,,साक्षरता कार्यक्रम को बढ़ावा देने की कोशिशों में जुटे रहे ,लेकिन सरकार ने उन्हें ,,खुद के,, परिवार के,, गरीबी की रेखा से भी निम्न जीवन यापन ,और न्यूनतम मज़दूरी के बराबर भी मानदेय ,,मासिक भत्ता नहीं दिया ,इतना ही नहीं ,पढ़े लिखे ,,प्रशिक्षित बी ऐड पैराटीचर्स ,,स्कूल के अध्यापकों के बराबर कार्य करने के बाद भी सिर्फ पैराटीचर्स ही रहे ,उन्हें प्रबोधक बनाने ,या फिर स्थाई करते ,हुए ,उनके वेतन ,भत्ते ,सुविधा बढ़ाने के लिए कोई सरकार की तरफ से व्यवस्था नहीं की गयी ,हां यह बात अलग है के ,राजस्थान सरकार ,भारत सरकार ने अल्पसंख्यकों के कल्याण के नाम पर मंत्रियों ,कर्मचारियों ,,प्रतिनिधि कथित मंत्री दर्जा चैयरमेन ,सदस्यों ,,समितियों के वेतन ,भत्तों ,यात्रा भत्तों ,योजनाओं की व्यवस्था के नाम पर करोड़ों करोड़ रूपये बेवजह खर्च ज़रूर किये है ,लेकिन पैराटीचर्स के हाथों में बाबा जी ठुल्लू ,,कोरा आश्वासन ही आया है ,,
राजस्थान में मदरसों की स्थिति दयनीय है ,आधुनिक मदरसों का बजट लेप्स हुआ ,नए मदरसों को स्वीकृति नहीं मिली ,,पुराना बजट का सद्भाविक ,सकारात्मक ,उपयोग नहीं हो सका ,,अतिरिक्त बजट की व्यवस्था नहीं की गयी ,इतना ही नहीं संचालित मदरसों को बिना किसी विधिक प्रक्रिया नोटिस के बंद कर दिए गए ,,मदरसों में प्रारंभिक शिक्षा के माध्यम से सम्पूर्ण साक्षरता कार्यक्रम की अलख जगाने का प्रयास है ,लेकिन सरकार की उपेक्षा के चलते ,,मदरसों के आसपास के बच्चों को सुविधा नहीं मिल पा रही है ,मदरसों में मिडडे मील योजना ,,मदरसों में खेलकूद , प्रारम्भिक शैक्षणिक व्यवस्था की स्टेशनरी ,बैठने के लिए कुर्सी टेबल टाट पट्टियां डेस्क नहीं दी गयी ,मदरसा मॉडर्नाइजेशन के नाम पर विशेषज्ञ चिकित्स्क नहीं दिए ,गए पुस्तके ,यूनिफॉर्म ,चिकित्सा जांच सहित जो प्राथमिक शिक्षण के लिए आवश्यक व्यस्थाएं है वोह तक उपलब्ध नहीं कराई गयी ,,मदरसा बोर्ड को उर्दू निदेशालय गठित कर ,उर्दू निदेशालय के साथ ,संवैधानिक दर्जा देकर स्वतंत्र शिक्षा ,स्वतंत्र सिलेबस ,,पाठ्यक्रम चयन ,,अध्ययन प्रक्रिया ,,परीक्षा व्यवस्था लागू करने सहित किसी भी व्यवस्थित प्रबंधन की आज़ादी नहीं दी गयी ,मदरसा बोर्ड एकल अध्यक्ष के अधीन रहा ,,जिसके तहत कोई सुझाव सरकार के पास नहीं गए ,सकारात्मक डिमांड सरकार ने स्वीकार नहीं की ,,नई नियुक्तियां नहीं हुई ,,मदरसा शिक्षा कम्प्यूटराइजेशन व्यवस्था ठप्प हो गयी ,,अल्पसंख्यको की प्राथमिक शिक्षा ,प्राथमिक रोज़गार से दूर रखने का पूरा प्रयास चलता रहा जो आज भी यथावत चल रहा है ,,राजस्थान विधानसभा में मदरसा पैराटीचर्स के मानदेय बढ़ाने ,व्यवस्था बनाने ,, मदरसों में नए पैराटीचर्स की नियुक्ति ,,मदरसों के आधुनिकीकरण ,,मदरसा पैराटीचर्स को स्थाई करने ,,मॉडर्न मदरसों का आदर्श मॉडल बनाने ,,अतिरिक्त विशेषज्ञ टीचर्स की नियुक्ति करने ,,के नाम पर कुछ नहीं हुआ ,मदरसों में पैराटीचर्स की उपस्थिति ,उनके स्थानांतरण ,वर्षों से रुके मानदेय भुगतान ,सहित पूर्व नियुक्तियों ,,खरीद फरोख्त सहित काफी भ्रष्टाचार की सीधी शिकायते पिछली सरकारों में रही है ,मदरसा पैराटीचर्स का दर्द ,,राजस्थान में केशवराय पाटन की विधायिका श्रीमती चंद्रकांता मेघवाल ,,बहुजन समाजवादी पार्टी के विधायक वाजिब अली ने समझा है ,जाना है ,और इसीलिए सरकार से इन सभी व्यवस्थाओं ,,पैराटीचर्स के मानदेय भुगतान ,पैराटीचर्स को स्थाई करने सहित कई प्रमुख समस्याओं को लेकर सरकार से विधानसभा में जवाब तलब किया है ,सम्भवत इस मामले के शुक्रवार को विधानसभा में बहस के दौरान अल्पसंख्यक मामलात के मंत्री सरकार का पक्ष ,पिछली सरकारों के उपेक्षित रव्वैये ,भविष्य की मदरसा योजना ,पैराटीचर्स के मानदेय भुगतान ,,मानदेय बढ़ोतरी ,,पैराटीचर्स के स्थाईकरण पर रखेंगे ,जिससे असंतुष्ट होने पर विधायक चंद्रकांता मेघवाल ,विधायक वाजिब अली द्वारा वादविवाद की पूरी सम्भावनाये है ,,,, ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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