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09 फ़रवरी 2019

उनके लिए (जन्नत की) ख़ुशख़बरी है

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मैं इबादत को उसके लिए ख़ास करके खु़दा ही की बन्दगी करो (11)
और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मैं सबसे पहल मुसलमान हूँ (12)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर मैं अपने परवरदिगार की नाफरमानी करूँ तो मैं एक बड़ी (सख़्त) दिन (क़यामत) के अज़ाब से डरता हूँ (13)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं अपनी इबादत को उसी के वास्ते ख़ालिस करके खु़दा ही की बन्दगी करता हूँ (अब रहे तुम) तो उसके सिवा जिसको चाहो पूजो (14)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि फिल हक़ीक़त घाटे में वही लोग हैं जिन्होंने अपना और अपने लड़के वालों का क़यामत के दिन घाटा किया आगाह रहो कि सरीही (खुल्लम खुल्ला) घाटा यही है कि उनके लिए उनके ऊपर से आग ही के ओढ़ने होगें (15)
और उनके नीचे भी (आग ही के) बिछौने ये वह अज़ाब है जिससे खु़दा अपने बन्दों को डराता है तो ऐ मेरे बन्दों मुझी से डरते रहो (16)
और जो लोग बुतों से उनके पूजने से बचे रहे और ख़ुदा ही की तरफ रूजु की उनके लिए (जन्नत की) ख़ुशख़बरी है (17)
तो (ऐ रसूल) तुम मेरे (ख़ास) बन्दों को खु़शख़बरी दे दो जो बात को जी लगाकर सुनते हैं और फिर उसमें से अच्छी बात पर अमल करते हैं यही वह लोग हैं जिनकी खु़दा ने हिदायत की और यही लोग अक़्लमन्द हैं (18)
तो (ऐ रसूल) भला जिस शख़्स पर अज़ाब का वायदा पूरा हो चुका हो तो क्या तुम उस शख़्स की ख़लासी दे सकते हो (19)
जो आग में (पड़ा) हो मगर जो लोग अपने परवरदिगार से डरते रहे उनके ऊँचे-ऊँचे महल हैं (और) बाला ख़ानों पर बालाख़ाने बने हुए हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं ये खु़दा का वायदा है (और) वायदा खि़लाफी नहीं किया करता (20)

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