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11 अगस्त 2018

खु़दा उन की मोहब्बत (लोगों के दिलों में) पैदा कर देगा

और उन लोगों ने खु़दा को छोड़कर दूसरे-दूसरे माबूद बना रखे हैं ताकि वह उनकी इज़्ज़त के बाएस हों हरगि़ज़ नहीं (81)
(बल्कि) वह माबूद खु़द उनकी इबादत से इन्कार करेंगे और (उल्टे) उनके दुशमन हो जाएँगे (82)
(ऐ रसूल) क्या तुमने इसी बात को नहीं देखा कि हमने शैतान को काफि़रों पर छोड़ रखा है कि वह उन्हें बहकाते रहते हैं (83)
तो (ऐ रसूल) तुम उन काफिरों पर (नुज़ूले अज़ाब की) जल्दी न करो हम तो बस उनके लिए (अज़ाब) का दिन गिन रहे हैं (84)
कि जिस दिन परहेज़गारों केा (खु़दाए) रहमान के (अपने) सामने मेहमानों की तरह तरह जमा करेंगे (85)
और गुनेहगारों को जहन्नुम की तरफ प्यासे (जानवरो की तरह हकाँएगे (86)
(उस दिन) ये लोग सिफारिश पर भी क़ादिर न होंगे मगर (वहाँ) जिस शख़्स ने ख़ु़दा से (सिफारिश का) एक़रा ले लिया हो (87)
और (यहूदी) लोग कहते हैं कि खु़दा ने (अज़ीज़ को) बेटा बना लिया है (88)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुमने इतनी बड़ी सख़्त बात अपनी तरफ से गढ़ के की है (89)
कि क़रीब है कि आसमान उससे फट पड़े और ज़मीन शिगाफता हो जाए और पहाड़ टुकड़े-टुकडे़ होकर गिर पड़े (90)
इस बात से कि उन लोगों ने खु़दा के लिए बेटा क़रार दिया (91)
हालाँकि खु़दा के लिए ये किसी तरह शायाँ ही नहीं कि वह (किसी को अपना) बेटा बना ले (92)
सारे आसमान व ज़मीन में जितनी चीज़े हैं सब की सब खु़दा के सामने बन्दा ही बनकर आने वाली हैं उसने यक़ीनन सबको अपने (इल्म) के अहाते में घेर लिया है (93)
और सबको अच्छी तरह गिन लिया है (94)
और ये सब उसके सामने क़यामत के दिन अकेले (अकेले) हाजि़र होंगे (95)
बेशक जिन लोगों ने इमान कु़बूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए अनक़रीब ही खु़दा उन की मोहब्बत (लोगों के दिलों में) पैदा कर देगा (96)
(ऐ रसूल) हमने उस कु़रान को तुम्हारी (अरबी) जु़बान में सिर्फ इसलिए आसान कर दिया है कि तुम उसके ज़रिए से परहेज़गारों को (जन्नत की) खुशख़बरी दो और (अरब की) झगड़ालू क़ौम को (अज़ाबे खु़दा से) डराओ (97)
और हमने उनसे पहले कितनी जमाअतों को हलाक कर डाला भला तुम उनमें से किसी को (कहीं देखते हो) उसकी कुछ भनक भी सुनते हो (98)

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