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15 जुलाई 2018

प्रतियोगी ,प्रवेश परीक्षाएं ,करवा पाने में लगातार असफलताओं के बाद

अजीब सरकार है,, प्रतियोगी ,प्रवेश परीक्षाएं ,करवा पाने में लगातार असफलताओं के बाद, अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए ,,जुओं के डर से गोदडे फेंकने वाले कहावत चरितार्थ करते हुए ,इंटरनेट सेवायें बंदकर ,जनजीवन अस्तव्यस्त करते हुए लोगो के कारोबार को प्रभावित कर करोडो का घाटा दे रही है ,,हाल ही में सम्पन्न पुलिसकोनिस्टेबल भर्ती परीक्षा में सरकार ने दो दिन तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखी ,जिसमे ऑन लाइन व्यापार को करोडो करोड़ का घाटा हुआ है ,रोज़ मर्रा ,इंटरनेट से टिकिट बुक करवाने ,शॉपिंग करने ,,आवेदन भरने ,आवश्यक संदेश आदान प्रदान करने वालों को परेशानियां उठाना पढ़ी है ,राजस्थान में सेकंड शनिवार को लोक अदालत के कामकाज में भी कई दस्तावेजों को इधर से उधर भेजने को लेकर असुविधाएं हुई है ,,अजीब बात है सरकार के पास इतनी बढ़ी फौज ,,सरकार के पास जेमर है ,उन्हें लगाए भी गए ,फिर इंटरनेट सर्विस बंद करने की ज़रूरत भी क्या थी ,यह कोई सार्वजनिक हित ,,सामजिक शान्ति का मामला नहीं था ,पहली बार परीक्षाओं को लेकर यह बेवकूफी ग़ैरक़ानूनी तरीके से की गयी है ,,आज कानिस्टेबल भर्ती परीक्षा का मामला है ,कल आईआईटी ,,नीट ,,भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा ,,राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा ,,दूसरी परीक्षाएं भी होंगी फिर तो प्रशासन के लिए ,इंटरनेट सेवा बंद करना रोज़ का काम हो जाएगा ,,जो लोग गुड मॉर्निंग के सिवा इंटरनेट का उपयोग नहीं करते उन्हें चाहे फ़र्क़ न पढ़े ,लेकिन करोडो करोड़ के ऑन लाइन बिज़नेस ,सरकारी सेवाएं ,,टिकिट बुकिंग ,,समाचार सेवाएं ,अख़बार की खबरों का आदान प्रदान ,इंटरनेट समाचार पत्र ,टी वी चैनल ,सहित कई ऐसे ज़रूरी मामले है ,जो ठप्प रहे ,राजीव गाँधी की दूरसंचार क्रान्ति में ,बेवजह ,सिर्फ अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद करने की कहीं सरकार को छूट नहीं दी गयी ,,क़ानून व्यवस्था ,,हिंसा ,अफवाहे फैलाने जैसे मामले अगर हो तो ही ऐसा सम्भव है ,लेकीन सिर्फ परीक्षाएं ,जहाँ परीक्षा केन्द्रो पर जेमर लगाने की ढींगे हाँकी गयी है ,वहां परीक्षा के नाम पर ,व्यवस्थाएं नहीं जुटाने वाले नाकमयाब प्रशासन ,नाकामयाब सरकार को देश के किसी भी क़ानून ने ऐसा करने की इजाज़त नहीं दी है ,,,जो लोग खुद पर नियंत्रण रख पाने में अक्षम रहकर बेवजह इंटरनेट से चिपके रहते है ,वोह कहते है हमे सुकून रहा ,अरे तुम अगर सुकून तलाश रहे हो तो फिर क्यों इंटरनेट पर हो ,क्यों चेटिंग कर रहे हो ,अगर हो तो खुद पर नियंत्रित रखना क्यों नहीं सीखते ,सरकार की ऐसी गलत नीतियों को समर्थन करके ,,सरकार को ऐसी गलत कार्यवाही के लिए उकसाना पढ़े लिखे ,शिक्षित लोगो का ,,देश की जनता के साथ धोखा ही तो है ,किसी भी परीक्षा के मामले में इस तरह इंटरनेट सेवा बंद करने का सभी लोगो को विरोध करना होगा ,वरना हर परीक्षा में सरकार इस व्यवस्था को फैशन बना लेगी और देश का ऑन लाइन व्यापार तहस नहस हो जाएगा ,,लोगो को तत्काल टिकिट नहीं मिले ,,ऑन लाइन टिकिट नहीं मिले ,पे टी एम भुगतान बंद रहे ,अस्पतालों में विशेषज्ञ मशवरे नहीं हो सके ,,सेवाएं ठप्प रही ,सरकार को अपने नाकारा अधिकारीयों की इस तरह की सलाह मानने की जगह ,,दूरसंचार सेवा अधिनियम का अवलोकन करना होगा ,ऐसे निकम्मे अधिकारियो की गलत सलाह मानने की जगह उन्हें फटकार लगाकर अपने कर्तव्यों की प्रति पहले की परीक्षाओं में ज़िम्मेदारी से कर्तव्य निर्वहन की सलाह देना होगी ,जेमर के खर्चे जब है तो फिर इंटरनेट बंद करना बेवकूफी नहीं तो क्या है ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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