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16 दिसंबर 2017

कोटा वकीलों की हाईकोर्ट बेंच का आन्दोलन भाईसाहबो की चापलूसी की भेंट चढ़ गया ,प्लॉटों की मांग भाईसाहबो के इशारे पर नतमस्तक हो गयी

बहुत शोर सुनते थे ,,सीने में दिल का ,,जो चीरा तो क़तरा ऐ खून न निकला ,,,जी हाँ दोस्तों कोटा अभिभाषक परिषद के वकीलों के वार्षिक चुनाव में पिछले कुछ सालों से ,,सिम्पोजियम की दहाड़ के निर्वाचन के बाद ,,कमोबेश यही शेर सही साबित हुआ है ,,वर्ष 2018 के लिए फिर चुनाव हुए है ,,मनोज पूरी अध्यक्ष ,,अतीश सक्सेना उपाध्यक्ष ,जितेंद्र पाठक महासचिव नियुक्त किये गये है ,सिम्पोजियम में खूब दहाड़े है ,खूब सपने दिखाए है ,खुदा से उम्मीद है ,दुआ है के खुदा इन्हे इनकी टीम को ,,कोटा के वकीलों को इतनी ताक़त दे ,,के वोह जो कहा है उसे पूरा करके दिखाए ,,कोटा वकीलों की हाईकोर्ट बेंच का आन्दोलन भाईसाहबो की चापलूसी की भेंट चढ़ गया ,प्लॉटों की मांग भाईसाहबो के इशारे पर नतमस्तक हो गयी ,,हम ने खुद को एडजस्ट कर लिया ,,कार्यस्थगन ,,शोकसभा को लेकर हम ख़ौफ़ज़दा हुए ,दूसरे मामलों में कार्यस्थगन तो दूर ,,हम कई सालों से हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर प्रत्येक शनिवार के कार्यस्थगन आन्दोलन को भी बरक़रार नहीं रख सके ,, नतमस्तक हो गए ,,,हमारे वकील साथियों की मोत पर हमे हमारे वक़्त के मुताबिक़ शोक मनाने का अधिकार भी हमसे छीन लिया गया ,,हम 11 बजे सुबह की जगह तीन बजे शोकसभा करने लगे ,,कोई कार्यस्थगन नहीं ,,कागज़ी कार्यस्थगन ,,हम बदल गए ,,कई मामलों में हम कहते रहे ,,लेकिन कर कुछ नहीं सके ,,,,अजीब तमाशा रहा ,,जो विधायक ,,जो सांसद ,,जो नेतागण हमे ,,शान्तिधारीवाल पूर्व मंत्री द्वारा प्लाट देने पर ,,उनके खिलाफ उकसा कर कहते थे ,,इतने महंगे प्लाट ,वकीलों को एक रूपये में प्लाट मिलना चाहिए ,,,इतनी दूर प्लाट ,,वकीलों को पास में प्लाट मिलना चाहिए ,,कहते थे ,हमारी सरकार आने दो ,एक महीने में कोटा में हायकोर्ट बेंच होगी ,,प्लॉटों की समस्या का समाधान होगा ,,चार साल गुज़र गए ,,वकीलों को हायकोर्ट बेंच नहीं मिली ,प्लॉटों की एक रूपये फिट की जुमलेबाज़ी पूरी होना तो दूर ,,जितनी क़ीमत में ,,पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने प्लाट दिए थे उतनी क़ीमत में भी सरकार देने को तैयार नहीं हुई ,,वकीलों ने ऐसे झूंठे ,फरेबी भड़काने वाले नेताओ का गिरेहबान नहीं ,पकड़ा ,ऐसे लोगो के पोस्टर ,उनके द्वारा लिखित इबारत के रजिस्टर को फ्लेक्स बनाकर जनता की अदालत में सार्वजनिक रूप से उन्हें आयना नहीं दिखाया ,,क्यों नहीं दिखाया इसका जवाब तो यही लोग देंगे ,,लेकिन अब फिर वायदे हुए है ,मर्दो की जुबां वाली टीम जीत कर आयी है ,ऐसा लगता है ,,दहाड़े भी बहुत है ,,देखते है ,,कार्यभार ग्रहण करने के बाद वकीलों के परिसर की समस्या ,,न्यायिक अधिकारियो के व्यवहार में बदलाव की समस्या ,,केस डायरी मंगवाने से लेकर ,,अदालतों में सम्मन तामील की समस्या ,,केंटीन ,,जनसुविधाओं ,,पक्षकारो के बैठने ,,पार्किंग की सुविधा ,,दूसरे परिसरों में चल रही अदालतों को नज़दीक लाकर वकीलों को राहत दिलाने की मांग ,,प्लॉटों की समस्या ,,वकीलों के बैठने के चेंबर और पाटों की सुविधा ,,शनिवार के कार्यस्थगन की पालना ,,पुलिस का वकीलों के प्रति दमनात्मक रवय्या में बदलाव का मामला ,,शोकसभा फिर से सुबह 11 बजे करवाना ,,एकेडमिक कार्य ,,कल्याणकारी कार्य ,भवन विस्तार ,,सुरक्षात्मक मामले ,,जुमलेबाज नेताओ के खिलाफ प्लॉटों की समस्या ,हायकोर्ट बेंच मामले में मदद नहीं करने पर ,,पूर्व मंत्री शान्ति धारीवाल के कार्यकाल की तरह ,,पुतलेजलाना ,,हड़ताल प्रदर्शन करना ,,तिये की बैठक करना ,उनके खिलाफ जनमानस बनाने के लिए शहर के नुक्कड़ों पर सभाये आयोजित करना ,राज्य स्तरीय टूर्नामेंट ,,सेमिनार आयोजित करवाने ,कल्याणकारी स्ट्राइफंड सहित दूसरी व्यस्थाएं करने के लिए क्या कुछ होता है ,,इन्तिज़ार करते ,है कुछ होता है ,या फिर हर बार की तरह जुमले ,,दहाड़े टांय टांय फिस्स होकर रह जाती है ,,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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